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जड़ी-बूटी विरासत बचाने की दिशा में बड़ा कदम, केदार कश्यप बोले—सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध

रायपुर वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप आज छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के नवनियुक्त उपाध्यक्ष  अंजय शुक्ला के पदभार ग्रहण समारोह में शामिल हुए। यह कार्यक्रम राज्य वन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान परिसर, जीरो प्वाइंट, रायपुर में आयोजित किया गया। इस अवसर पर तकनीकी शिक्षा मंत्री  गुरु खुशवंत साहेब, राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा , विधायक  किरण सिंह देव, विधायक  अनुज शर्मा और विधायक  इंद्रकुमार साहू अतिविशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।           वन मंत्री  कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ एक वन संपदा से समृद्ध राज्य है, जहां लगभग 44.21 प्रतिशत क्षेत्र में वन हैं। यहां के वनों में विभिन्न प्रकार की वनौषधियां पाई जाती हैं, जिनका उपयोग प्राचीन काल से उपचार के लिए किया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करने और आमजन तक इसके लाभ पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2012 से 21 मार्च को विश्व वानिकी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन  अंजय शुक्ला द्वारा उपाध्यक्ष का पदभार ग्रहण करना एक सकारात्मक संकेत है। उन्होंने विश्वास जताया कि उनके अनुभव से औषधि पादप बोर्ड को मजबूती मिलेगी और यह नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा।           समारोह में तकनीकी शिक्षा मंत्री  गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि औषधि पादप बोर्ड द्वारा वैद्य सम्मेलन, वनौषधि प्रदर्शनी और जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि  शुक्ला के मार्गदर्शन में बोर्ड और बेहतर कार्य करेगा। कार्यक्रम को विधायक  किरण सिंह देव ने भी संबोधित करते हुए कहा कि  शुक्ला के अनुभव का लाभ औषधि पादप बोर्ड को मिलेगा और बोर्ड नए आयाम स्थापित करेगा। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष  विकास मरकाम ने कि राज्य सरकार वन औषधीय के पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण और संवर्धन के लिए पादप बोर्ड का गठन किया है। जो लगातार बेहतर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने  शुक्ला को बधाई देते हुए कहा पादप बोर्ड को उनके अनुभव का निश्चित ही लाभ मिलेगा और बोर्ड बेहतर नवाचार करेगा।         कार्यक्रम में अपेक्स बैंक के अध्यक्ष  केदारनाथ गुप्ता, खाद्य आपूर्ति निगम के अध्यक्ष  संजय वास्तव, अध्यक्ष अल्प संख्यक आयोग  अमरजीत सिंह छाबड़ा, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम,  लोकेश कावड़िया, अध्यक्ष, रायपुर विकास प्राधिकरण  नंदकुमार साहू , , जिला पंचायत सदस्य मती स्वाती वर्मा, सतनामी समाज के धर्मगुरू गुरू बालदास,  रमेश सिंह ठाकुर, मान उपकार चंद्राकर , अंजिनेश शुक्ल पिंटू साहू   श्याम नारंग सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  जे.ए.सी.एस. राव  सुरेन्द्र पाटनी,  अमित साहू,  आलोक साहू सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

CM साय का सख्त रुख: रोप-वे हादसे की जांच के बाद जिम्मेदारों पर गिरेगी गाज

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने महासमुंद जिला स्थित प्रसिद्ध खल्लारी मंदिर में आज सुबह हुए रोप-वे हादसे को दुखद बताया. उन्होंने कहा कि घटना की जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज कवर्धा और बलौदाबाजार जिले के दौर पर रवाना होने से पहले मीडिया से चर्चा की. उन्होंने बताया कि कवर्धा में लोधी समाज द्वारा अवंति बाई की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में कार्यक्रम आयोजित किया गया है, जिसमें शामिल होंगे. इसके अलावा बलौदाबाजार में गोंडवाना समाज की ओर से आयोजित आदर्श विवाह समारोह में शामिल होंगे. वहीं शाम को केरल के दौरे को लेकर कहा कि कल (केरल विधानसभा चुनाव के लिए) बीजेपी प्रत्याशियों का नामांकन है. उसमें शामिल होने जा रहे हैं. विधानसभा में पारित धर्म स्वातंत्र्य विधेयक को लेकर मिल रही लोगों से बधाई पर कहा कि कल हम सरगुजा गए थे, वहां अनुसूचित जनजाति मोर्चा ने मुलाकात के दौरान विधेयक का स्वागत किया. रायपुर में भी सीएम हाउस पहुंचे लोगों ने धन्यवाद दिया.  एक मौत, 17 श्रद्धालु घायल हादसे में एक महिला की मौत हो गई है जबकि 17 श्रद्धालु घायल हुए हैं। नीचे वाली ट्राली में 9 लोग और ऊपर वाली ट्राली में 8 लोग सवार थे। मौके पर मौजूद लोगों और मंदिर प्रबंधन व पुलिस ने तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल महासमुंद भेजा गया, जहां उनका इलाज जारी है। रोप-वे सेवा को तत्काल बंद कर दिया गया घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। एहतियात के तौर पर रोप-वे सेवा को तत्काल बंद कर दिया गया है। प्रारंभिक जांच में तकनीकी खराबी को हादसे का कारण माना जा रहा है, हालांकि विस्तृत जांच के आदेश दे दिए गए हैं। स्थानीय लोगों ने लापरवाही का आरोप लगाया स्थानीय लोगों ने रोप-वे की नियमित जांच और सुरक्षा मानकों के पालन में लापरवाही का आरोप लगाया है। प्रशासन ने मामले में जांच कर दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। ज्ञात हो कि नवरात्र जारी है और मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ है।

संभल जाएं लोग! अगले 48 घंटों में इस राज्य में मौसम का कहर, विभाग ने दी चेतावनी

रांची झारखंड में मौसम के अचानक बदले मिजाज ने लोगों को चौंका दिया है। आमतौर पर मार्च में गर्मी बढ़ने लगती है, लेकिन इस बार ठंड ने फिर से वापसी कर ली है। राजधानी रांची में न्यूनतम तापमान गिरकर 15 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जबकि लातेहार में यह 12 डिग्री दर्ज किया गया है, जिससे लोगों को ठंड का एहसास होने लगा है। मौसम में इस बदलाव की मुख्य वजह पश्चिमी विक्षोभ है, जिसका असर पूरे राज्य में देखा जा रहा है। इसके कारण ठंडी हवाएं चल रही हैं और तापमान में गिरावट आई है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 2 से 3 दिनों तक ऐसा ही मौसम बने रहने की संभावना है। राज्य में येलो अलर्ट जारी किया गया है। हालांकि स्थिति पहले की तुलना में थोड़ी बेहतर हुई है, लेकिन लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है, जिससे ठंड और बढ़ सकती है। इन जिलों में वज्रपात की संभावना अधिक लातेहार, लोहरदगा, पलामू और गढ़वा जिलों में मौसम का असर ज्यादा देखने को मिल रहा है। इन इलाकों में बारिश, वज्रपात और तेज हवाओं की संभावना अधिक है, क्योंकि पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव सबसे पहले इन्हीं क्षेत्रों पर पड़ रहा है। इधर, पाकुड़ जिले में पिछले 24 घंटों के दौरान जोरदार बारिश दर्ज की गई है, जिससे मौसम पूरी तरह बदल गया है। कई स्थानों पर ओलावृष्टि भी हुई है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। राज्य के अधिकांश जिलों में अधिकतम तापमान 30 से 32 डिग्री के बीच बना हुआ है, लेकिन दिन में चल रही ठंडी हवाएं लोगों को राहत दे रही हैं। जहां एक ओर आम लोगों को गर्मी से राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। फिलहाल झारखंड में मौसम का यह बदला हुआ रूप चर्चा का विषय बना हुआ है।  

ग्राम मलैकी में नहीं है बिजली पानी की सुविधा शासन प्रशासन मौन।

राजेंद्रग्राम/छबिलाल जनपद पंचायत पुष्पराजगढ़ के ग्रामपंचायत परसेल में आने वाले ग्राम मलैकी में जीवन यापन करने वाले ग्रामीण पानी व बिजली की समस्याओं से जूझ रहे हैं। शासन ने लाखों रुपये की लागत से नल जल योजना अंतर्गत लगाया है। लेकिन कोई काम का नहीं बताया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हो पाया मलैकी में पेयजल की समस्या गंभीर बनी हुई है। गांव में पीने योग पानी की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। गांव की महिला एवं बच्चे कठिन रास्ते से गुजरते हुए घढ़े और बर्तनों में पानी भरकर नहाने कपड़े धोने और घरेलू उपयोग के लिए ग्रामीणों को इसी प्रकार दूर-दूर से पानी लाना पड़ता है जिससे उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है ग्रामीणों की परेशानी वहीं समाप्त नहीं होगी गांव के लोग आज भी नल मे पानी कब तक आएगा इंतजार में लगे रहते हैं लेकिन पानी न मिलने से ग्रामीणों में आक्रोश जनक साबित हो रहा है।  गांव में नहीं है बिजली गांव में करीब एक माह से लगातार आज भी बिजली की समस्याओं से जूझ रहे हैं। लेकिन शासन प्रशासन अपना जिम्मेदारी ना समझते हुए ग्रामीणों को अंधेरे में रहने को प्रताड़ित किया जा रहा है ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार ग्राम पंचायत के सरपंच को अवगत कराया जा चुका है उन्होंने बताया कि जब भी ग्रामीणों द्वारा इस विषय में पूछा जाता है तो सरपंच द्वारा यही कहा जाता है कि इस संबंध में आवेदन किया जा चुका है हालांकि लंबे समय से यही जवाब मिल रहा है लेकिन समस्या का समाधान अब तक नहीं हो पाया है ग्रामीणों की समस्याओं को देखते हुए एवं विद्यार्थी बच्चों की पढ़ाई को मद्देनजर रखते हुए देखा जाए तो बिजली न होने से समय से पढ़ाई भी नहीं कर पा रहे हैं जिससे बच्चों के भविष्य से भी खिलवाड़ किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि एक महीने पहले ट्रांसफार्मर जल गया था उसके लिए हम चंदा लगाकर बिजली ऑफिस जाकर ऑफिसर को कह कर थक चुके हैं लेकिन देखने नहीं आ रहे हैं आज लगाएंगे कल लगाएंगे इस तरीके का बहाना बनाते हुए नजरअंदाज करते नजर आ रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन को आवेदन देकर गांव में पेयजल व्यवस्था बिजली आपूर्ति की मांग की है। इनका कहना है कि यदि जल्द ही इन मूलभूत सुविधाओं को व्यवस्था नहीं दी गई तो ग्रामीणों को इसी प्रकार आगे परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

फिर चमकी किस्मत: आर्मी को दूध-चाय पहुंचाने वाले श्रवण सिंह ने जीते 5 लाख

फिरोजपुर. फिरोजपुर जिले के कस्बा ममदोट के गांव तारा वाली के रहने वाले मास्टर श्रवण सिंह की किस्मत एक बार फिर चमकी है। उन्होंने अब 5 लाख रुपये की लॉटरी जीती है, जिसके बाद पूरे परिवार में जश्न का माहौल है। श्रवण सिंह को हाल ही में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 'प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2025' से सम्मानित किया था क्योंकि उन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान आर्मी के जवानों की बहुत सेवा की थी। अब श्रवण सिंह की 5 लाख रुपये की लॉटरी निकली है। जानकारी के मुताबिक, श्रवण सिंह ने अपने पिता सोना सिंह के साथ ममदोट में सिर्फ 350 रुपये की लॉटरी डाली थी (जिसमें एक टिकट 7 रुपये का था), जिससे उनकी किस्मत बदल गई। यह खुशी की खबर मिलते ही परिवार और रिश्तेदारों में खुशी की लहर दौड़ गई और सभी ने ढोल की थाप पर नाचकर जश्न मनाया। गौरतलब है कि श्रवण सिंह को 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारतीय सेना के जवानों को दूध, चाय और लस्सी पहुंचाने में उनकी सेवा और बहादुरी के लिए सेना ने सम्मानित भी किया है। उन्हें 26 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से खास बातचीत भी की। श्रवण के पिता सोना सिंह ने भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने तीन बार लॉटरी डाली थी और तीनों बार इनाम निकला। उन्होंने कहा कि वह इस इनाम की रकम को श्रवण के सुनहरे भविष्य के लिए बचाकर रखेंगे। उनके पिता के मुताबिक, श्रवण ने पहले भी देश भर में परिवार का नाम रोशन किया था और आज उसकी किस्मत ने परिवार की किस्मत बदल दी है। 

केला उत्पादन से बढ़ी आमदनी, उद्यानिकी खेती से मिला नया सहारा

बिलासपुर कहते हैं खेती में नई तकनीक और सही फैसले किसान की तकदीर बदल देते हैं, और इसे सच कर दिखाया है तखतपुर विकासखण्ड के ग्राम कपसिया कला के किसान  हेतराम मनहर ने। पारंपरिक धान की खेती छोड़कर केला उत्पादन अपनाने वाले  मनहर आज लाखों रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं।      उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के अंतर्गत केला (जी-9 किस्म) की खेती शुरू की। विभाग से प्राप्त तकनीकी सहयोग, उन्नत पौध सामग्री एवं वैज्ञानिक पद्धतियों के उपयोग से उन्होंने लगभग 0.900 हेक्टेयर क्षेत्र में केला फसल का रोपण किया। उचित देखभाल और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से उन्हें लगभग 510 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ। इस फसल में करीब 1.70 लाख रुपये की लागत आई, जबकि 4 से 5 लाख रुपये तक की आय अर्जित हुई, जो पारंपरिक खेती की तुलना में कई गुना अधिक है।        केला उत्पादन से हुई अतिरिक्त आय ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। अब वे परिवार की जरूरतों के साथ बच्चों की शिक्षा और अन्य आवश्यकताओं पर भी बेहतर ध्यान दे पा रहे हैं।  हेतराम मनहर की यह सफलता क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है और यह दर्शाती है कि फसल परिवर्तन एवं आधुनिक खेती अपनाकर बेहतर आय अर्जित की जा सकती है।

नशे के खिलाफ कार्रवाई तेज: कुरुक्षेत्र में 50 लाख का चूरापोस्त जब्त, 2 आरोपी पकड़े गए

पिहोवा/अमृतसर. पुलिस के एंटी नारकोटिक सेल ने नशा तस्करी के आरोप में दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से भारी मात्रा में चूरापोस्त भी बरामद हुआ है। आरोपितों की पहचान हिमाचल प्रदेश के चंबा निवासी सतपाल और सोलन निवासी जीतराम के रूप में हुई है। दोनों के खिलाफ इस्माईलाबाद थाने में एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि 19 मार्च को एंटी नारकोटिक्स सेल प्रभारी उप निरीक्षक सतविंद्र सिंह के नेतृत्व में टीम एनएच-152 पर गांव टबरा के पास गश्त पर मौजूद थी। इसी दौरान गुप्त सूचना मिली कि हिमाचल प्रदेश के चंबा निवासी सतपाल और सोलन निवासी जीतराम कैंटर में भारी मात्रा में डोडा-चूरापोस्त लेकर आ रहे हैं। सूचना के आधार पर पुलिस ने जलबेहड़ा के पास नाकाबंदी कर वाहनों की जांच की। कुछ देर बाद संदिग्ध कैंटर आता दिखाई दिया तो उसे रोक कर जांच की। चालक ने अपना नाम सतपाल और क्लीनर ने जीतराम बताया। राजपत्रित अधिकारी की मौजूदगी में तलाशी लेने पर कैंटर से 6 क्विंटल 92 किलो 907 ग्राम चूरापोस्त बरामद हुआ, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 50 लाख रुपये आंकी गई है। पुलिस ने दोनों के एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया।

इंसाफ की मांग पर अड़ा परिवार: अमृतसर में गिरफ्तारी से पहले पोस्टमार्टम नहीं होगा

अमृतसर. पंजाब के अमृतसर में गगनदीप सिंह रंधावा मामले में रविवार को नया मोड़ सामने आया, जब परिजनों ने आरोपितों की गिरफ्तारी तक पोस्टमार्टम करवाने से साफ इंकार कर दिया। परिवार का कहना है कि जब तक मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर, उनके पिता सुखदेव सिंह भुल्लर और पीए दिलबाग सिंह को गिरफ्तार नहीं किया जाता, तब तक वे किसी भी पुलिस कार्रवाई में सहयोग नहीं करेंगे। जानकारी के अनुसार, थाना रंजीत एवेन्यू की पुलिस ने रविवार को शव का पोस्टमार्टम करवाने का प्रयास किया, लेकिन परिजनों ने कड़ा विरोध करते हुए इसे रुकवा दिया। इस दौरान मौके पर माहौल तनावपूर्ण बना रहा और बड़ी संख्या में रिश्तेदार भी मौजूद रहे। पुलिस की कार्रवाई से असंतुष्ट परिवार मृतक की पत्नी उपिंदर जीत कौर ने आरोप लगाया कि घटना के तीसरे दिन भी पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि मामला दर्ज होने के बावजूद अब तक किसी भी आरोपित को गिरफ्तार नहीं किया गया है, जिससे परिवार में रोष बढ़ता जा रहा है। जब तक पुलिस आरोपितों को गिरफ्तार नहीं करेगी, पोस्टमॉर्टम नहीं करवाया जाएगा। समझौते का दबाव बनाया जा रहा परिजनों का यह भी आरोप है कि पुलिस उन्हें समझौता करने के लिए दबाव बना रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक सभी नामजद आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं होती, वे न तो पोस्टमार्टम होने देंगे और न ही अंतिम संस्कार करेंगे। स्थिति को संभालने के लिए मौके पर रविंदर पाल सिंह भी पहुंचे। मीडिया द्वारा गिरफ्तारी को लेकर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने जल्द कार्रवाई का भरोसा दिलाया, हालांकि स्पष्ट समयसीमा नहीं बताई। इसके बाद वह मौके से चले गए। इस घटनाक्रम के बाद इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है। परिजनों की मांग को लेकर प्रशासन और पुलिस पर दबाव बढ़ गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए आने वाले समय में पुलिस की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

स्टील घोटाले पर बड़ा एक्शन: CBI ने महारत्न कंपनी SAIL पर कसा शिकंजा

भिलाई. देश की प्रतिष्ठित महारत्न सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी सेल में सामने आई कथित स्टील आपूर्ति अनियमितता अब बड़े घोटाले का रूप ले चुकी है। लोकपाल के स्पष्ट निर्देश के बाद सीबीआइ ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है, जिससे अब कंपनी के शीर्ष प्रबंधन और पूर्व निदेशकों तक जांच की आंच पहुंच गई है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, इस पूरे प्रकरण में सेल को लगभग 300 से 350 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। बीएसपी में तैयार टीएमटी स्टील की बड़ी मात्रा भी कथित तौर पर फर्जी या गैर-पात्र प्रोजेक्ट कंपनियों को सप्लाई की गई। इससे संकेत मिलता है कि अनियमितता केवल एक इकाई तक सीमित न रहकर पूरे नेटवर्क में फैली हुई थी। 1.5 लाख टन स्टील से खुला घोटाले का राज जांच की शुरुआत तब हुई जब यह सामने आया कि वेंकटेश इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को प्रोजेक्ट वर्क्स स्कीम के तहत 1.5 लाख टन से अधिक स्टील की आपूर्ति की गई, जबकि कंपनी इस योजना के लिए पात्र ही नहीं थी। लोकपाल ने 10 जनवरी 2024 को सीबीआइ जांच के आदेश दिए, जिसके बाद एजेंसी ने 10 अक्टूबर 2024 को एफआइआर दर्ज कर मामले की औपचारिक जांच शुरू की। 29 वरिष्ठ अधिकारी निलंबित, फिर बहाली पर उठे सवाल लोकपाल के आदेश के बाद सेल प्रबंधन ने 29 वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित किया था, जिनमें निदेशक स्तर के दो अधिकारी भी शामिल थे। हालांकि, 28 जून 2024 को जांच में देरी का हवाला देकर सभी अधिकारियों की बहाली कर दी गई। इस निर्णय ने पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 35 निजी कंपनियां जांच के घेरे में जांच में यह भी सामने आया है कि वेंकटेश इंफ्रा के अलावा 35 से अधिक निजी कंपनियों को नियमों को दरकिनार कर स्टील सप्लाई की गई। इनमें इंफ्रास्ट्रक्चर, रियल एस्टेट और गैर-प्रोजेक्ट सेक्टर की कंपनियां शामिल हैं, जिन्हें इस स्कीम का लाभ मिलना ही नहीं चाहिए था। इन कंपनियों में कई नाम शामिल हैं, जैसे ब्रिक टू वाल इंफ्राटेक, ओएफबी टेक, लैंडसिएर्ज स्टेट, नोबेल टेक इंडस्ट्रीज, आर्टिस्टी इंफ्राकॉन, स्ट्राइक इंफ्राकान, जारैली प्रोजेक्ट्स, श्री सिद्धबाली इस्पात, एसएमडब्ल्यू इस्पात, रुद्रनाथ इंफ्रा, रेनबो वाणिज्य, सिल्वर वाटर मेटल एंड मिनरल्स, पीवीवी इंफ्रा लिमिटेड सहित अन्य। व्हिसलब्लोअर को ही चुकानी पड़ी कीमत इस पूरे मामले को उजागर करने वाले व्हिसलब्लोअर राजीव भाटिया बताए जा रहे हैं। उन्होंने पहले भी स्टील आपूर्ति में गड़बड़ी को लेकर उच्च स्तर पर शिकायत की थी। लेकिन कार्रवाई भ्रष्टाचार पर होने के बजाय, उन्हें 11 फरवरी 2025 को सीसीएस नियम 56(जे) के तहत समयपूर्व सेवानिवृत्त कर दिया गया। अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, भाटिया को एक ईमानदार और निर्भीक अधिकारी माना जाता था। उनकी बर्खास्तगी को लेकर उच्च स्तर तक असंतोष की चर्चाएं हैं। सीएमडी पर भी उठे सवाल, इस्तीफे की अटकलें जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि सेल के वर्तमान सीएमडी अमरेंदु प्रकाश भी जांच के दायरे में हैं। आरोप है कि अनियमितताओं की जानकारी होने के बावजूद कई कंपनियों को स्टील आपूर्ति की अनुमति दी गई। प्रशासनिक हलकों में उनके इस्तीफे को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं, हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। सरकारी धन से कानूनी खर्च पर विवाद एक और बड़ा विवाद इस बात को लेकर खड़ा हुआ है कि सीबीआइ जांच का सामना कर रहे अधिकारियों की कानूनी लड़ाई के लिए सेल द्वारा करीब 70 लाख रुपये अधिवक्ताओं की फीस में खर्च किए गए। अब मांग उठ रही है कि यह राशि संबंधित अधिकारियों से व्यक्तिगत रूप से वसूली जाए। सबसे बड़ा सवाल, क्या होगी कार्रवाई? पूरे मामले ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि क्या इस कथित स्टील घोटाले में जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होती है या फिर मामला अन्य मामलों की तरह फाइलों में ही दबकर रह जाता है।

स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा बदलाव: RIMS में पूरी जांच सुविधा, मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत

रांची. झारखंड की राजधानी रांची के रिम्स में अब मरीजों को लगभग हर तरह की जांच की सुविधा एक ही जगह मिलने जा रही है। ट्रामा सेंटर लैब में पहले से 24 घंटे जांच की सुविधा उपलब्ध है, वहीं अब कई नई और महंगी जांचें भी शुरू की जा रही हैं। इन जांचों के शुरू होने से मरीजों को समय पर बीमारी का पता चलेगा और इलाज जल्दी शुरू हो सकेगा। इससे खासकर गरीब मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी, जिन्हें अब तक निजी लैब में हजारों रुपये खर्च करने पड़ते थे। रिम्स प्रबंधन के अनुसार, कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों की जांच अब यहीं संभव होगी। जिन जांचों के लिए निजी लैब में 15 से 20 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ते थे, वे फिलहाल फ्री या बहुत कम दर पर उपलब्ध कराई जाएंगी। आगे चलकर इन जांचों की दरें बाजार से 90 प्रतिशत तक कम रखने की तैयारी है। ये 6 नई जांचें होंगी शुरू, मरीजों को मिलेगा सीधा लाभ CA-125 जांच: यह महिलाओं में अंडाशय (ओवरी) के कैंसर की पहचान के लिए महत्वपूर्ण जांच है। CA-19-9 जांच: अग्न्याशय (पैंक्रियाज) और पाचन तंत्र से जुड़े कैंसर का पता लगाने में सहायक। एंटी-TPO जांच: थायरायड ग्रंथि से जुड़ी बीमारियों की पहचान के लिए उपयोगी। एंटी-CCP जांच: जोड़ों की बीमारी (रूमेटाइड आर्थराइटिस) की शुरुआती पहचान में सहायक। मूत्र प्रोटीन जांच: किडनी से जुड़ी बीमारियों और शरीर में प्रोटीन की कमी या लीकेज का पता लगाने के लिए जरूरी। RF (रूमेटाइड फैक्टर) जांच: गठिया रोग की पुष्टि और उसकी गंभीरता जानने में सहायक। ट्रामा सेंटर लैब में 24 घंटे मिल रही ये सुविधाएं  रिम्स के ट्रामा सेंटर स्थित अत्याधुनिक लैब में पहले से ही 24×7 जांच की सुविधा उपलब्ध है। यहां 4-5 घंटे के भीतर रिपोर्ट मिल रही है। उपलब्ध प्रमुख जांचों में शामिल हैं: रक्त शर्करा जांच (ब्लड शुगर), गुर्दा कार्य जांच (यूरिया, क्रिएटिनिन), यकृत कार्य जांच (लिवर फंक्शन), इलेक्ट्रोलाइट जांच (सोडियम, पोटैशियम), कोलेस्ट्राल जांच (लिपिड प्रोफाइल), हार्मोन जांच (टी3, टी4, टीएसएच, कोर्टिसोल), कैंसर संबंधी जांच (सीईए, एएफपी, एचसीजी, एलडीएच), गंभीर संक्रमण जांच (सीआरपी, प्रोकैल्सीटोनीन, डी-डाइमर, ट्रोपोनिन), संक्रामक रोग जांच (एचआईवी,हेपेटाइटिस बीवसी), सामान्य पैथोलाजी जांच (सीबीसी, पीटी,आइएनआर, मूत्र जांच, शरीर के तरल की जांच) आदि। निजी लैब पर निर्भरता होगी कम इन सुविधाओं के विस्तार से अब मरीजों को निजी लैब का रुख नहीं करना पड़ेगा। जहां पहले एक जांच के लिए हजारों रुपये खर्च होते थे, वहीं अब रिम्स में सस्ती या मुफ्त जांच उपलब्ध होगी। रिम्स के डाक्टरों का मानना है कि इससे गरीब मरीजों का आर्थिक बोझ कम होगा और समय पर जांच व इलाज से गंभीर बीमारियों पर नियंत्रण पाया जा सकेगा। पहले भी उठती रही है जांच सुविधा बढ़ाने की मांग रिम्स में महंगी जांचों की सुविधा शुरू करने की मांग लंबे समय से उठती रही है। कई बार मरीजों और जनप्रतिनिधियों ने यह मुद्दा उठाया कि सरकारी अस्पताल में इलाज के बावजूद जांच के लिए निजी लैब पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे इलाज महंगा हो जाता है। खासकर कैंसर और हार्मोन से जुड़ी जांचों के लिए मरीजों को बाहर जाना पड़ता था। इन नई सुविधाओं के शुरू होने से आयुष्मान भारत योजना और बीपीएल श्रेणी के मरीजों को सीधा फायदा मिलेगा। अब उन्हें जांच के लिए अलग-अलग जगह भटकना नहीं पड़ेगा। एक ही परिसर में जांच और इलाज दोनों की सुविधा मिलने से समय और पैसे दोनों की बचत होगी।