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रांची फ्लाइंग इंस्टिट्यूट में बड़ा विस्तार, पीपीपी मॉडल पर शुरू होंगे एविएशन कोर्स

रांची  झारखंड सरकार ने राज्य में विमानन क्षेत्र को सशक्त बनाने और स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग (नागर विमानन प्रभाग) के तहत स्थापित झारखंड फ्लाइंग इंस्टिट्यूट में एयर होस्टेस के अलावा केबिन क्रू एवं ग्राउंड हैंडलर के गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण हेतु पीपीपी (सार्वजनिक-निजी भागीदारी) मोड पर एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर लिया गया है। इसके साथ ही रांची में जल्द ही एयर होस्टेस, केबिन क्रू ट्रेनिंग (डिप्लोमा अथवा सर्टिफिकेट कोर्स) और ग्राउंड हैंडलिंग स्टाफ प्रशिक्षण शुरू किया जाएगा। प्रशिक्षण पीपीपी मोड पर निजी भागीदार के साथ संचालित होगा, जिसमें आधुनिक बुनियादी ढांचा, केबिन माक-अप और प्रतिष्ठित संस्थानों से मान्यता शामिल होगी। पहले चरण में सितंबर से सैकड़ों युवाओं, विशेषकर महिलाओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है, जिसके लिए प्रशिक्षण शुल्क निर्धारित किया गया है। 60 हजार से 1.20 लाख तक खर्च का अनुमान इंस्टिट्यूट द्वारा पहले से ही नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) के मानकों के अनुरूप कामर्शियल पायलट लाइसेंस (सीपीएल) को लेकर आधुनिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अब एयर होस्टेस और ग्राउंड स्टाफ प्रशिक्षण जुड़ने से यह संस्थान पूर्वी भारत में विमानन प्रशिक्षण का अग्रणी केंद्र बनकर उभरेगा। प्रारंभिक तौर पर राज्य सरकार और परिवहन विभाग किसके लिए 60 हजार एवं 1,20,000 रुपये फीस निर्धारित करने का निर्णय ले सकता है। डिप्लोमा कोर्स के लिए 60,000 रूपये का फीस होगा जबकि सर्टिफिकेट कोर्स के लिए यह राशि 1.2 लाख रुपये हो सकती है। सरकार इस मामले में कमजोर वर्गो के विद्यार्थियों को राहत देने का मन बना रही है। इंडस्ट्री लिंक्ड सिलेबस लागू होगा अधिकारियों के अनुसार, निजी भागीदारी के सहयोग से अत्याधुनिक ट्रेनिंग सुविधा, लाइब्रेरी और इंडस्ट्री-लिंक्ड सिलेबस लागू किया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद युवाओं को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस में बेहतर वेतनमान वाली नौकरियों में प्लेसमेंट के अवसर मिलेंगे। जेएफआई के प्रबंध निदेशक कैप्टन एस.पी. सिन्हा ने कहा, यह पहल सरकार की दूरदर्शी सोच का परिणाम है, जो न केवल युवाओं को आत्मनिर्भर बनाएगी बल्कि झारखंड को विमानन क्षेत्र में पसंदीदा गंतव्य भी बनाएगी। उन्होंने कहा कि अगले कुछ वर्षों में सैकड़ों स्थानीय युवा एयर होस्टेस, केबिन क्रू और ग्राउंड हैंडलिंग पदों पर काम करते नजर आएंगे। यह कदम राज्य के ग्रामीण एवं शहरी युवाओं को समान अवसर प्रदान करेगा और विशेष रूप से महिला सशक्तिकरण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

Insurance Claim पर बड़ा फैसला: बीमारी छिपाने का आरोप लगाने पर बीमा कंपनियों को देना होगा सबूत

भोपाल  अब बीमा कंपनियां केवल यह कहकर क्लेम खारिज नहीं कर सकेंगी कि बीमित व्यक्ति ने अपनी पुरानी बीमारी छिपाई है। उपभोक्ता आयोग ने साफ कर दिया है कि ऐसे मामलों में आरोप लगाने वाली बीमा कंपनी को ठोस सबूत भी पेश करने होंगे, अन्यथा क्लेम रोकना ‘सेवा में कमी’ माना जाएगा। उपभोक्ता कानून के तहत केवल आरोप लगाना पर्याप्त नहीं है। कंपनी को दस्तावेजी साक्ष्य के साथ यह साबित करना होता है कि बीमारी पहले से मौजूद थी और उसे जानबूझकर छिपाया गया। बीमा दावा खारिज करने के मामलों में कंपनियों की मनमानी पर भोपाल जिला उपभोक्ता आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। भोपाल उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग (बेंच-2) ने चोलामंडलम एमएस जनरल इंश्योरेंस कंपनी को फटकार लगाते हुए उपभोक्ता को 1.63 लाख रुपए का क्लेम 7% ब्याज सहित चुकाने का आदेश दिया है। साथ ही मानसिक और आर्थिक क्षति के लिए मुआवजा और वाद व्यय भी देने के निर्देश दिए गए हैं। बता दें कि आयोग ने यह फैसला हाल ही में सुनाया है। क्या था पूरा मामला देवास निवासी नसरुद्दीन खान ने वर्ष 2020 में चोलामंडलम एमएस जनरल इंश्योरेंस कंपनी से ‘आरोग्य संजीवनी’ पॉलिसी ली थी, जिसकी अवधि 29 जुलाई 2020 से 28 जुलाई 2021 तक थी। इस पॉलिसी के लिए उन्होंने 4554 रुपए का प्रीमियम जमा किया था। बीमा अवधि के दौरान 12 जून 2021 को उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें भोपाल के फ्यूचर मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया। यहां 7 दिन इलाज चला और कुल 1,63,156 रुपए का खर्च आया। इलाज के बाद किया क्लेम, कंपनी ने टालमटोल की परिवादी ने अस्पताल में भर्ती होने की सूचना तत्काल बीमा कंपनी को दी और सभी जरूरी दस्तावेजों के साथ क्लेम भी प्रस्तुत किया। इसके बावजूद कंपनी ने लंबे समय तक क्लेम पर कोई निर्णय नहीं लिया। कई बार फोन और व्यक्तिगत संपर्क करने के बाद भी कंपनी ने भुगतान नहीं किया। बीमा कंपनी ने 27 जुलाई 2022 को पत्र जारी कर दावा यह कहते हुए खारिज कर दिया कि प्रस्तुत दस्तावेज गलत और मनगढ़ंत हैं। कंपनी ने यह भी आरोप लगाया कि बीमित ने पॉलिसी लेते समय अपनी पुरानी बीमारी छिपाई थी, जो नियमों का उल्लंघन है। उपभोक्ता आयोग में पहुंचा मामला क्लेम खारिज होने के बाद परिवादी ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने 1.63 लाख रुपए की क्लेम राशि के साथ 18% ब्याज, 2 लाख रुपए क्षतिपूर्ति और 20 हजार रुपए वाद व्यय की मांग की। उनका कहना था कि उन्होंने कोई जानकारी नहीं छिपाई और कंपनी ने गलत तरीके से दावा निरस्त किया। कंपनी ने समय-सीमा का उठाया मुद्दा बीमा कंपनी ने अपने जवाब में कहा कि परिवाद देरी से दायर किया गया है और इसलिए यह स्वीकार्य नहीं है। साथ ही उन्होंने पुनः यही तर्क दिया कि पॉलिसी लेते समय बीमारियों की जानकारी छिपाई गई थी। आयोग ने मामले में प्रस्तुत दस्तावेजों, बिल, जांच रिपोर्ट और डिस्चार्ज समरी का परीक्षण किया। इससे स्पष्ट हुआ कि परिवादी वास्तव में बीमार था और अस्पताल में भर्ती होकर इलाज कराया गया था। इलाज में खर्च की गई राशि भी दस्तावेजों से प्रमाणित हुई। बीमा कंपनी आरोप साबित नहीं कर पाई आयोग ने पाया कि बीमा कंपनी ने धोखाधड़ी के आरोप तो लगाए, लेकिन इसके समर्थन में कोई ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया। न ही कोई ऐसा दस्तावेज दिया गया जिससे यह साबित हो सके कि परिवादी को पहले से बीमारी थी। आयोग ने माना सेवा में कमी आयोग ने कहा कि बीमा कंपनी का यह कृत्य ‘सेवा में कमी’ की श्रेणी में आता है। बीमा अनुबंध ‘अत्यंत सद्भावना’ (Utmost Good Faith) पर आधारित होता है, लेकिन जब कंपनी दावा खारिज करती है तो आरोप सिद्ध करना उसी की जिम्मेदारी होती है, जो यहां पूरी नहीं हुई। वहींआयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल देरी के आधार पर उपभोक्ता के अधिकार खत्म नहीं होते। यदि उपभोक्ता लगातार अपने अधिकार के लिए प्रयास कर रहा है, तो देरी को उचित कारण मानकर माफ किया जा सकता है। आदेश: ब्याज सहित क्लेम और मुआवजा दें आयोग ने आदेश दिया कि बीमा कंपनी दो माह के भीतर परिवादी को 1,63,156 रुपए 7% वार्षिक ब्याज सहित अदा करे। इसके अलावा 10,000 रुपए मानसिक, शारीरिक व आर्थिक क्षति के लिए और 5,000 रुपए वाद व्यय के रूप में देने होंगे। आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय में भुगतान नहीं किया गया, तो पूरी राशि पर 9% वार्षिक ब्याज देना होगा। उपभोक्ता आयोग का स्पष्ट रुख उपभोक्ता आयोग ने अपने हालिया फैसले में कहा कि बीमा अनुबंध ‘अत्यंत सद्भावना’ (Utmost Good Faith) के सिद्धांत पर आधारित होता है, लेकिन यदि बीमा कंपनी किसी दावे को धोखाधड़ी बताकर खारिज करती है, तो उस आरोप को प्रमाणित करना उसी की जिम्मेदारी है। बिना सबूत के क्लेम खारिज करना गलत है।

भजनलाल सरकार का विशेष अभियान जारी, हजारों हैंडपंप और पाइपलाइन दुरुस्त कर लोगों को राहत

जयपुर  मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक पर्याप्त, स्वच्छ एवं निर्बाध पेयजल उपलब्ध कराने के संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री के निर्देशों पर जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) द्वारा संचालित विशेष राज्यव्यापी अभियानों ने भीषण गर्मी के दौरान जल संकट के समाधान में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। इन अभियानों के माध्यम से हजारों पेयजल समस्याओं का त्वरित समाधान कर लाखों लोगों को राहत पहुंचाई गई है तथा जलापूर्ति व्यवस्थाओं को नई मजबूती मिली है। मुख्यमंत्री की सतत मॉनिटरिंग, त्वरित निर्णय क्षमता और जनहित के प्रति प्रतिबद्ध दृष्टिकोण के चलते विभाग ने जलापूर्ति व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाने, शिकायतों के त्वरित निस्तारण तथा जल स्रोतों के संरक्षण के क्षेत्र में प्रभावी कार्य किए हैं। इसके सकारात्मक परिणाम प्रदेशभर में देखने को मिले हैं और पेयजल सेवाओं की गुणवत्ता एवं उपलब्धता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। एक ही दिन में 2,385 पेयजल समस्याओं का समाधान शनिवार को आयोजित नवें विशेष राज्यव्यापी अभियान के दौरान विभागीय टीमों ने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्रोतों, पाइपलाइन नेटवर्क तथा जलापूर्ति व्यवस्थाओं का व्यापक निरीक्षण कर त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई की। अभियान के तहत 597 खराब हैंडपंपों को पुनः चालू किया गया, 512 पाइपलाइन लीकेज दुरुस्त किए गए, 165 प्रेशर संबंधी समस्याओं का समाधान किया गया तथा 161 क्षेत्रों में बाधित जलापूर्ति बहाल की गई। इसके अतिरिक्त कम जलापूर्ति, अल्प अवधि की सप्लाई एवं प्रदूषित जल संबंधी शिकायतों का भी प्रभावी निस्तारण किया गया। कुल मिलाकर एक ही दिन में 2,385 पेयजल संबंधी कार्य पूर्ण कर विभाग ने अपनी कार्यकुशलता और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता का परिचय दिया। 2,357 शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण नवें अभियान के दौरान तकनीकी टीमों ने समन्वित एवं त्वरित कार्रवाई करते हुए लगभग 2,357 शिकायतों का मौके पर ही समाधान किया। इससे प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को तत्काल राहत मिली तथा पेयजल संबंधी समस्याओं का त्वरित निवारण सुनिश्चित हो सका नौ अभियानों में 24 हजार से अधिक कार्य, पेयजल व्यवस्था हुई और मजबूत 5 अप्रैल से 20 जून तक संचालित नौ विशेष राज्यव्यापी अभियानों के दौरान प्रदेशभर में 24,781 पेयजल संबंधी कार्य सफलतापूर्वक संपन्न किए गए। इनमें 5,081 हैंडपंपों की मरम्मत, 3,360 पाइपलाइन लीकेज की दुरुस्ती, 1,610 प्रेशर संबंधी समस्याओं का समाधान तथा 1,816 बाधित जलापूर्ति मामलों का निस्तारण शामिल है। इसके अतिरिक्त 8,684 अन्य सुधारात्मक कार्यों के माध्यम से पेयजल व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़, प्रभावी एवं भरोसेमंद बनाया गया है। इन प्रयासों से विशेष रूप से ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में पेयजल उपलब्धता में सुधार हुआ है तथा हजारों परिवारों को भीषण गर्मी के दौरान राहत मिली है। अवैध जल उपयोग के खिलाफ प्रभावी अभियान जल संरक्षण और संसाधनों के समुचित प्रबंधन को प्राथमिकता देते हुए विभाग ने अवैध जल उपयोग के विरुद्ध भी व्यापक अभियान चलाया है। नवें अभियान के दौरान 332 अवैध जल कनेक्शन हटाए गए, जिनमें होटल, ढाबों एवं कृषि कार्यों में उपयोग किए जा रहे कनेक्शन शामिल थे। अब तक विशेष अभियानों के दौरान कुल 2,518 अवैध जल कनेक्शन हटाए जा चुके हैं। इस कार्रवाई से जल की बर्बादी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ है तथा आमजन के लिए उपलब्ध जल संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। 30 जून तक जारी रहेंगे विशेष अभियान मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के निर्देशानुसार प्रदेशभर में पेयजल व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाए रखने के लिए विशेष राज्यव्यापी अभियान 30 जून तक निरंतर संचालित किए जाएंगे। इन अभियानों का उद्देश्य प्रत्येक घर तक स्वच्छ, पर्याप्त एवं निर्बाध पेयजल उपलब्ध कराना तथा गर्मी के मौसम में किसी भी नागरिक को पेयजल संकट का सामना न करना पड़े।

हाई कोर्ट ने दिए निर्देश, MPHW भर्ती में अनुभव अंक जोड़कर तैयार की जाए नई मेरिट लिस्ट

चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा में मल्टी-पर्पज हेल्थ वर्कर (पुरुष) भर्ती से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत कार्यरत कर्मचारियों के अनुभव को केवल पदनाम के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर (एसटीएस) और पैरा मेडिकल वर्कर (पीएमडब्ल्यू) के रूप में प्राप्त अनुभव को अनुभव अंक देने से इनकार करना मनमाना और भेदभावपूर्ण है। इसके साथ ही अदालत ने संबंधित अधिकारियों को अभ्यर्थियों के अनुभव अंक जोड़कर उनकी मेरिट स्थिति दोबारा तय करने का निर्देश दिया है। जस्टिस संदीप मौदगिल ने वर्ष 2015 के विज्ञापन के तहत एमपीएचडब्ल्यू (पुरुष) पदों की भर्ती से संबंधित याचिकाओं का निपटारा करते हुए यह आदेश पारित किया। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्होंने एनएचएम की विभिन्न योजनाओं के तहत कार्य किया था और हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के समक्ष अनुभव प्रमाणपत्र भी प्रस्तुत किए थे, लेकिन उन्हें चयन मानदंडों के अनुसार अनुभव अंक नहीं दिए गए। उनका तर्क था कि यदि अनुभव अंक जोड़ दिए जाते तो वे अपने-अपने वर्ग में चयन क्षेत्र में आ जाते।राज्य सरकार और आयोग ने अदालत को बताया कि अनुभव अंक केवल उसी क्षमता में कार्य करने वाले उम्मीदवारों को दिए जा सकते हैं, जिन्होंने आरसीएच, एनआरएचएम, एनएचएम परियोजनाओं अथवा स्वास्थ्य विभाग में समान पद पर कार्य किया हो। चूंकि याचिकाकर्ता एमपीएचडब्ल्यू (पुरुष) के बजाय एसटीएस, डीआर-टीबी/एचआईवी समन्वयक, टीबीएचवी अथवा पीएमडब्ल्यू पदों पर कार्यरत रहे थे, इसलिए उन्हें अनुभव अंक देने का प्रश्न नहीं उठता। अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। न्यायमूर्ति मौदगिल ने कहा कि इसी भर्ती प्रक्रिया में अन्य अभ्यर्थियों को एसटीएस के अनुभव के आधार पर अंक दिए जा चुके हैं। ऐसे में समान परिस्थितियों वाले याचिकाकर्ताओं को इससे वंचित रखना तर्कसंगत नहीं है। अदालत ने स्वास्थ्य विभाग की 12 अगस्त 2024, 29 नवंबर 2024 और 31 जनवरी 2025 की स्पष्टीकरण रिपोर्टों का भी उल्लेख किया, जिनमें एसटीएस और पीएमडब्ल्यू के कार्यों को एमपीएचडब्ल्यू (पुरुष) के दायित्वों के समान बताया गया था। हाई कोर्ट ने कहा कि जब स्वयं विभाग ने कार्यों और जिम्मेदारियों में समानता स्वीकार कर ली है तो केवल पदनाम के आधार पर अनुभव को अस्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी माना कि एसटीएस पद के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता एमपीएचडब्ल्यू (पुरुष) से अधिक है और दोनों पदों की जिम्मेदारियां काफी हद तक समान हैं। अदालत ने 5 जून 2019 के परिणाम को याचिकाकर्ताओं के अनुभव अंक नहीं देने की सीमा तक निरस्त करते हुए निर्देश दिया कि उनके एनएचएम अनुभव को जोड़कर मेरिट सूची का पुनर्गणना किया जाए। यदि संशोधित मेरिट में याचिकाकर्ता चयन क्षेत्र में आते हैं तो उन्हें नियुक्ति सहित सभी परिणामी लाभ दिए जाएं। पूरी प्रक्रिया दो माह के भीतर पूरी करने के आदेश दिए गए हैं।

अतिक्रमण पर सख्त हुए सीएम योगी, जनता दर्शन में त्वरित कार्रवाई के आदेश

लखनऊ यूपी की राजधानी लखनऊ में आज सीएम योगी ने जनता दर्शन किए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सरकारी आवास 5- कालिदास मार्ग लखनऊ में आयोजित जनता दर्शन में लोगों की समस्याओं को सुना और संबंधित अधिकारियों को प्राथमिकता के साथ जन-समस्याओं के शीघ्र निराकरण के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार सुबह ‘जनता दर्शन’ किया। इस दौरान उन्होंने प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए हर फरियादी से एक-एक कर मुलाकात की। उनका प्रार्थना पत्र लिया और समस्याएं सुनीं। मुख्यमंत्री ने सभी शिकायतों के उचित व समयबद्ध निस्तारण के लिए अधिकारियों को निर्देश दिया। वहीं अतिक्रमण की शिकायत पर मुख्यमंत्री सख्त हुए और तत्काल इसकी जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई का निर्देश दिया। मथुरा से आए वृद्ध को सीएम ने किया आश्वस्त, जल्द हटेगा अतिक्रमण ‘जनता दर्शन’ में मथुरा से एक वृद्ध भी शिकायत लेकर पहुंचे। उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया कि चकरोड पर अतिक्रमण कर लिया गया है। इसकी शिकायत स्थानीय स्तर पर की जा चुकी है, लेकिन अभी तक कार्रवाई नहीं हुई। इस पर मुख्यमंत्री ने सख्त रूख अपनाते हुए जिलाधिकारी को निर्देशित किया कि वे स्वयं मौके पर जाएं और यथास्थिति देखें। अतिक्रमण होने की स्थिति में इसे तत्काल हटाएं और दोषियों पर कार्रवाई करें। सीएम ने फिर कहा कि अतिक्रमण की शिकायत कतई बर्दाश्त नहीं होगी। सभी अधिकारी, प्रशासन, पुलिस, नगर निगम, विकास प्राधिकरण समेत जिम्मेदार संस्थाएं नियमित रूप से इसकी मॉनिटरिंग भी करती रहें। शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक सहायता समेत हर पहलु पर सरकार का ध्यान ‘जनता दर्शन’ में शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक सहायता, बिजली के तार, पुलिस, राजस्व से जुड़े प्रार्थना पत्र भी आए। मुख्यमंत्री ने सभी प्रार्थना पत्र लेकर पीड़ितों की बातें सुनीं, फिर उन्हें आश्वस्त किया कि सरकार जनता से जुड़ी हर मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति कर रही है। आप सभी की समस्याओं का भी समाधान होगा। किसी को परेशान होने की जरूरत नहीं है, सरकार हर परिस्थिति में 25 करोड़ प्रदेशवासियों के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री ने हालचाल जाना, कहा- सेहत व स्वास्थ्य का भी ध्यान रखिए सीएम ने भीषण गर्मी में आए फरियादियों का सबसे पहले हालचाल जाना, फिर उनकी समस्याएं पूछीं। मुख्यमंत्री ने विभिन्न जनपदों से आए लोगों से कहा कि अभी गर्मी व धूप अधिक है। बुजुर्गों, महिलाओं व बच्चों से कहा कि बहुत जरूरत होने पर ही दोपहर में घर से निकलिए। सीएम ने संयमित खानपान के लिए भी कहा।

पंचायत सहायकों के लिए राहत, अब देरी नहीं होगी भुगतान में; बीडीओ को साप्ताहिक समीक्षा के आदेश

लखनऊ उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले की ग्राम पंचायतों में कार्यरत पंचायत सहायकों के लिए राहत भरी खबर है। अब उनका मानदेय समय पर आएगा। अब उन्हें समय पर मानदेय उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन ने सख्त व्यवस्था लागू कर दी है। पंचायत सहायकों के मानदेय भुगतान में होने वाली देरी को रोकने के लिए जिला पंचायत राज विभाग ने सभी बीडीओ को निर्देश जारी किए हैं। डीपीआरओ लालजी दूबे ने बताया कि निदेशक पंचायती राज के 15 जून के निर्देशों के अनुपालन में 22 जून को जिले के बीडीओ और एडीओ पंचायत को आवश्यक आदेश जारी किए गए हैं। इसके तहत प्रत्येक विकास खंड में पंचायत सहायकों के मानदेय भुगतान की प्रगति की साप्ताहिक समीक्षा अनिवार्य होगी। पंचायत सहायकों को मोबाइल फोन उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था डीपीआरओ ने बताया कि ग्राम पंचायतों में शासकीय कार्यो के बेहतर संचालन और डिजिटल कार्यप्रणाली को मजबूत बनाने के उद्देश्य से पंचायत सहायकों को मोबाइल फोन उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था की गई है। ग्राम पंचायतें अपने उपलब्ध स्वयं के संसाधनों (ओएसआर) और वित्तीय नियमों का पालन करते हुए पंचायत सहायकों को यह सुविधा प्रदान कर सकेंगी। एडीओ पंचायत और ग्राम पंचायत सचिव की जिम्मेदारी उन्होंने कहा कि पंचायत सहायकों का मानदेय निर्धारित समय सीमा के भीतर उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब या लापरवाही पाए जाने पर संबंधित एडीओ पंचायत और ग्राम पंचायत सचिव की जिम्मेदारी तय करते हुए उनके खिलाफ नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की जाएगी। डिजिटल कार्यो में तेजी लाने की तैयारी डीपीआरओ लालजी दूबे ने बताया कि गोंडा जिले की ग्राम पंचायतों में तैनात सभी पंचायत सहायकों को समय पर मानदेय भुगतान के लिए बीडीओ, एडीओ पंचायत को निर्देश दिए गए हैं। डिजिटल कार्यो में तेजी लाने के लिए मोबाइल फोन भी उपलब्ध कराने की तैयारी चल रही है। इससे कार्यों में तेजी आएगी। पंचायती राज ग्रामीण के तरबगंज ब्लॉक सफाई कर्मी संघ के आठवीं बार अध्यक्ष बने नरसिंह उधर, उत्तर प्रदेश पंचायती राज ग्रामीण सफाई कर्मचारी संघ की तरबगंज ब्लॉक कार्यकारिणी चुनाव जिला मुख्यालय पर चुनाव अधिकारी अमीर अहमद, जिलाध्यक्ष राघवेंद्र तिवारी और महामंत्री देवमणि शुक्ला की देखरेख में हुआ। तरबगंज ब्लॉक में नरसिंह नारायण पांडे लगातार आठवीं बार अध्यक्ष और भानुपाल सिंह महामंत्री निर्वाचित हुए। हलधरमऊ में रमेश सिंह, कटरा बाजार में हरेंद्र सिंह और परसपुर में जितेंद्र तिवारी अध्यक्ष चुने गए। सभी पदाधिकारी निर्विरोध निर्वाचित हुए। इस दौरान सरिता कश्यप, सनी राम कनौजिया, लोकनाथ शुक्ल, विनय त्रिवेदी, धरनीधर तिवारी समेत कई पदाधिकारी मौजूद रहे।  

1.25 करोड़ रुपये के SBI घोटाले का आरोपी नेपाल से लौटकर छिपा था, CBI ने दबोचा

 धनबाद  Dhanbad SBI Scam स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की मुख्य शाखा, बैंक मोड़ में करीब दो दशक पहले हुए करोड़ों रुपये के घोटाले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) को बड़ी सफलता मिली है। रविवार को चलाए गए समन्वित अभियान में सीबीआई ने बृजभूषण प्रसाद को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के कोपरगांव से तथा करतार सिंह को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से गिरफ्तार कर लिया। करीब 20 वर्षों की फरारी के बाद हुई इन गिरफ्तारियों को सीबीआई एसीबी धनबाद की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। दोनों आरोपियों में एक को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए धनबाद न्यायालय में पेश किया गया जहां से न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। वर्ष 2005 से फरार चल रहे दोनों आरोपी लंबे समय तक नेपाल में छिपे रहे और बाद में भारत लौटकर पहचान बदलकर अलग-अलग राज्यों में रह रहे थे। CBI के अनुसार, आरसी-11(ए)/2005-डी के तहत 31 अगस्त 2005 को मामला दर्ज किया गया था। जांच में सामने आया था कि नवंबर 2002 से जून 2005 के बीच एसबीआई की मुख्य शाखा, बैंक मोड़, धनबाद से करीब 1.25 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और गबन किया गया था। मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 420 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जांच के दौरान आरोपी बृजभूषण प्रसाद और करतार सिंह फरार हो गए थे। सीबीआई की कार्रवाई तेज होने पर दोनों नेपाल भाग गए। न्यायालय ने उन्हें घोषित अपराधी करार दिया था। उनकी गिरफ्तारी के लिए रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था तथा नकद इनाम की भी घोषणा की गई थी। सीबीआई अधिकारियों के मुताबिक, नेपाल से लौटने के बाद दोनों आरोपी अपनी असली पहचान छिपाकर अलग-अलग राज्यों में रह रहे थे, ताकि गिरफ्तारी और न्यायिक कार्रवाई से बच सकें। पिछले तीन-चार महीनों से सीबीआई एसीबी धनबाद की टीम मानव स्रोतों और तकनीकी निगरानी के जरिए उनके ठिकानों का पता लगाने में जुटी थी। धनबाद सीबीआइ के सूत्रों ने बताया कि दूसरे आरोपित को भी लाया जा रहा है। न्यायालय में पेश करने के बाद उसे भी न्यायिक हिरासत में जेल भेजा जाएगा।  

राजधानी की सड़कों पर स्मार्ट रोशनी का नया दौर, कंट्रोल सेंटर से होगी स्ट्रीटलाइटों की निगरानी

नई दिल्ली  दिल्ली की सड़कों पर जल्द ही स्मार्ट तकनीक आधारित स्ट्रीटलाइटें लगाई जाएंगी। इसके लिए दिल्ली सरकार ने करीब 93 हजार स्ट्रीटलाइटों को आधुनिक बनाने की योजना शुरू की है। खास बात यह है कि इस प्रोजेक्ट में ठेकेदारों को एकमुश्त भुगतान नहीं किया जाएगा, बल्कि उनकी EMI कार्यक्षमता के आधार पर दी जाएगी। सरकार का कहना है कि इस नई व्यवस्था से सड़कों पर बेहतर रोशनी मिलेगी, रखरखाव में सुधार होगा और सरकारी खर्च का बोझ भी कम होगा। इसके साथ ही दिल्ली में लगे लगभग 1.4 लाख चीनी मूल के सीसीटीवी कैमरों को भी चरणबद्ध तरीके से बदला जाएगा। पहले चरण में 50 हजार कैमरे बदले जाने की योजना है। स्मार्ट एलईडी लाइटों से होगा बदलाव PWD की सड़कों पर लगी पुरानी सोडियम वेपर और पुराने एलईडी लाइटों को हटाकर नई स्मार्ट एलईडी लाइटें लगाई जाएंगी। इसके अलावा लगभग 5,000 नए पोल भी लगाए जाएंगे, ताकि अंधेरे वाले हिस्सों में पर्याप्त रोशनी पहुंच सके। प्रदर्शन के आधार पर मिलेगा भुगतान नई व्यवस्था में ठेकेदारों को तभी भुगतान मिलेगा जब स्ट्रीटलाइटें सही तरीके से काम करेंगी। यदि लाइटें खराब रहती हैं या समय पर मरम्मत नहीं होती है, तो भुगतान प्रभावित हो सकता है। इससे ठेकेदारों की जवाबदेही बढ़ेगी और रखरखाव बेहतर होगा। कंट्रोल सेंटर से होगी निगरानी PWD मुख्यालय में एक केंद्रीय कमांड और कंट्रोल सेंटर बनाया जाएगा। यहां से हर स्ट्रीटलाइट की रियल टाइम निगरानी की जाएगी। स्मार्ट लाइटों की रोशनी मौसम और जरूरत के अनुसार कम या ज्यादा भी की जा सकेगी। बिजली बचत पर सरकार का जोर वित्त विभाग के आकलन के अनुसार स्मार्ट एलईडी प्रणाली से बिजली की खपत में बड़ी कमी आएगी। सरकार को उम्मीद है कि अगले पांच वर्षों में लगभग 300 करोड़ रुपये की बचत होगी। अधिकारियों का मानना है कि यह योजना दिल्ली की सड़कों को अधिक सुरक्षित, ऊर्जा-कुशल और तकनीकी रूप से आधुनिक बनाने में मदद करेगी।

कारोबारियों के लिए अहम सूचना: 30 जून तक करवाएं GST लंबित मामलों का रिव्यू

चंडीगढ़/जालंधर. GST से जुड़े पेंडिंग विवादों वाले कारोबारियों को तुरंत अपने केस का रिव्यू करवाने की जरूरत है। कई मामलों में GST अपीलेट ट्रिब्यूनल (GSTAT) में अपील दाखिल करने की आखिरी तारीख 30 जून होने संबंधी बताया जा रहा है। ऐसे में कारोबारियों को बिना देर किए अपने केस की जांच करवानी चाहिए। टैक्स माहिर C.A. पुनीत ओबेरॉय ने बताया कि अभी कई टैक्सपेयर्स को यह गलतफहमी है कि GSTAT में अपील दाखिल करने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर, 2026 तक है, जबकि कई पुराने मामलों में अपील फाइल करने की आखिरी तारीख 30 जून हो सकती है। ऐसे में कारोबारियों को सोशल मीडिया या WhatsApp मैसेज पर भरोसा करने के बजाय अपने केस का असल स्टेटस चेक करवाना चाहिए। जिन कारोबारियों के मामसे में अपील अथॉरिटी के प्रतिकूल आदेश, इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC), रिजेक्शन, टैक्स, इंटरेस्ट या पेनल्टी की मांग, रजिस्ट्रेशन कैंसल करना, रिफंड से इनकार, क्लासिफिकेशन और असेसमेंट विवाद या दूसरे प्रतिकूल आदेश शामिल हैं, उन्हें अपने केस का रिव्यू करना चाहिए। भले ही पहले कई ऑर्डर मिले हों, फिर भी उनकी जांच करना जरूरी है। अगर तय समय सीमा के अंदर अपील फाइल नहीं की जाती है, तो संबंधित आदेश अंतिम रूप में प्रभावी हो सकता है। इसके अलावा डिपार्टमेंटल रिकवरी की कार्रवाई शुरू हो सकती है, इंटरेस्ट का बोझ बढ़ सकता है और बैंक अकाउंट या प्रॉपर्टी के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। ओबेरॉय ने कहा कि G.S.T.A.T. में अपील फाइल करना सिर्फ एक रस्मी प्रक्रिया नहीं है। इसके लिए कई तैयारियां करनी होती हैं जैसे डॉक्यूमेंट्स का रिव्यू, लीगल बेसिस तैयार करना, टाइम लिमिट की जांच और प्री-डिपॉजिट का कैलकुलेशन। इसलिए करोबारियों को आखिरी मिनट तक इंतजार करने के बजाय अभी से तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि G.S.T.A.T. आने वाले समय में G.S.T. कानून की एक जैसी व्याख्या डेवलप करने और टैक्सपेयर्स और डिपार्टमेंट दोनों को साफ गाइडेंस देने में अहम भूमिका निभाएगा। ऐसे में जिन कारोबारियों के G.S.T. विवाद पेंडिंग हैं, उन्हें अपने अधिकारों की रक्षा के लिए समय रहते जरूरी कदम उठाने चाहिए।

जैसलमेर जासूसी मामला: 2 साल से पाक हैंडलर्स के संपर्क में था आरोपी, कोर्ट ने बढ़ाई रिमांड

जयपुर पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोपी मुश्ताक को आज 5 दिन की रिमांड पूरी होने के बाद कोर्ट में पेश किया गया. कोर्ट में सीआईडी इंटेलिजेंस ने 3 दिन की रिमांड मांगी. कोर्ट ने इसे स्वीकार करते हुए तीन की रिमांड दी है. स्पेशल पीपी सुदेश सतवान ने बताया कि कोर्ट से 3 दिन की और रिमांड मांगी है, ज‍िससे आरोपी की कॉल डिटेल, रिकॉर्ड और बैंक खातों के बारे में विस्तृत पूछताछ की जा सके. आरोपी 2 साल से पाक हैंडलर्स के संपर्क में था, ऐसे में हर एंगल से पूछताछ की जा रही है. 5 दिन के रिमांड पर पूछताछ उन्होंने बताया कि सीआईडी ने 5 दिन की रिमांड पर आरोपी से जैसलमेर में जहां रहा. जहां के फोटो और वीडियो उसने शेयर किए हैं.  जांच एजेंसी ने वहां ले जाकर, उससे पूछताछ की है. उन सभी जगहों पर ले जाकर तफ्तीश की गई है. सीआईडी हर एंगल से जांच कर रही   सीआईडी हर एंगल से मामले की जांच कर रही है. एजेंसी को शक है कि शायद कोई अन्य स्थानीय लोग भी इस पूरे मामले में उसका सहयोग कर रहे थे. साथ ही, ऑपरेशन सिंदूर के वक्त भी कोई जानकारी उसने साझा की है क्या, इस मामले में भी जांच हो रही है.   पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में था अभी तक कि जांच में सामने आया है कि आरोपी पिछले दो साल से पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में था, और उनके निर्देश पर उसने एक चाय की दुकान खोली थी, जहां लाइव फीड कैमरे लगाने की तैयारी भी की जा रही थी.   BSF की गतिविधियों पर नजर रखता था मुश्ताक सेना और बीएसएफ की गतिविधियों पर नजर रखता था, और गूगल मैप कैम के जरिए सटीक लोकेशन के साथ फोटो और वीडियो साझा करता था. उसके फोन में खालिद और नजीर अहमद नाम से सेव दो मोबाइल नंबर मिले हैं, जो पाकिस्तान में रहकर एजेंट ट्रेनिंग का काम करते हैं.   सीआईडी इंटेलिजेंस जांच कर रही देश की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस मामले में सीआईडी इंटेलिजेंस लगातार जांच कर रही है. बड़े सवाल यही है कि वह क्या कुछ अभी तक पाक हैंडल्स को भेज चुका है? क्या और स्थानीय लोग भी इस पूरे मामले में उसके साथ शामिल थे? आखिर किस तरह पाक हैंडलर्स लगातार स्थानीय नागरिक से संपर्क कर उन्हें फंसा रहे हैं?