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सरकार बदली, चुनौतियाँ वही: शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर क्या होगा असर?

छपरा बिहार में नई सरकार के गठन के बाद मंत्रिमंडल में बड़े बदलाव की उम्मीद लगाए बैठी जनता तब हैरान रह गई, जब मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और शिक्षा मंत्री जैसे अहम पद फिर से पुराने चेहरों को ही सौंप दिए गए। इसके बाद राज्य की शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था में वास्तविक सुधार को लेकर कई सवाल तेज हो गए हैं। स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मंत्रिमंडल में स्थिरता प्रशासनिक निरंतरता के लिहाज से फायदेमंद हो सकती है, लेकिन जिन विभागों की पिछले कार्यकाल में सबसे ज्यादा आलोचना हुई, जैसे सरकारी अस्पतालों की बदहाली, चिकित्सकों-कर्मियों की कमी, स्कूलों में शिक्षकों की अनुपस्थिति और कमजोर आधारभूत संरचना उनमें बदलाव न होना जनता के मन में संदेह पैदा कर रहा है। स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार को लेकर बढ़ा असंतोष स्थानीय लोगों का कहना है कि सदर अस्पतालों से मरीजों को बिना इलाज रेफर कर देने की पुरानी व्यवस्था अब खत्म होनी चाहिए। स्वास्थ्य विभाग की आधारभूत संरचना तो तैयार कर दी गई है, लेकिन डॉक्टरों और पैरामेडिकल कर्मियों की भारी कमी आज भी बनी हुई है। विगत वर्षों में स्वास्थ्य विभाग पर कई गंभीर आरोप लगे हैं, अस्पतालों में दवाओं और मशीनों की कमी, पंचायत स्तर तक स्वास्थ्य सेवाओं का कमजोर होना और बेहतर इलाज के लिए बिहार से बाहर जाने वाले मरीजों की बढ़ती संख्या प्रमुख मुद्दे हैं। ऐसे में पुरानी टीम का ही पुनः जिम्मेदारी संभालना जनता के बीच यह सवाल खड़ा कर रहा है कि क्या अबकी बार वाकई बदलाव देखने को मिलेगा। सारण प्रमंडल के सारण, सिवान और गोपालगंज जिलों सहित कई क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं “इलाज” से ज्यादा “रेफर” आधारित व्यवस्था पर निर्भर हैं। सड़क हादसे, गोलीबारी और अन्य आपात मामलों में प्रखंड अस्पतालों से लेकर जिला सदर अस्पताल तक केवल औपचारिकता निभाकर मरीजों को पटना पीएमसीएच या अन्य मेडिकल कॉलेज भेज दिया जाता है। शिक्षा विभाग में भी सुधारों पर सवाल शिक्षा विभाग पर भी सरकार लगातार निशाने पर रही है। शिक्षकों की भारी कमी, स्कूलों में संसाधनों की दयनीय स्थिति और सरकारी स्कूलों के गिरते परिणामों ने चिंता बढ़ाई है। विभाग से जुड़े अधिकारियों व शिक्षक संघों का कहना है कि बिना संरचनात्मक सुधार के केवल घोषणाओं से शिक्षा व्यवस्था में सुधार संभव नहीं है। हालांकि राज्य सरकार ने दावा किया है कि 2025–30 के कार्यकाल में शिक्षा और स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी, और बजट व इंफ्रास्ट्रक्चर दोनों स्तरों पर बड़े कदम उठाए जाएंगे। क्या बदलेगी बिहार की तस्वीर? अब जनता की नजर इस बात पर है कि क्या पुरानी टीम, नई नीतियों और नई ऊर्जा के साथ सचमुच स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों क्षेत्रों की जर्जर स्थिति को बदल पाएगी। विशेषकर शिक्षा विभाग में चल रहे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और व्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा मौजूदा शिक्षा मंत्री को सौंपी गई है। जनता अब सरकारी दावों नहीं, बल्कि जमीनी बदलाव का इंतजार कर रही है।

गे-लेस्बियन विवाह से भूकंप की बात कहकर कन्हैया भेलारी हुए ट्रोल, रोहिणी का पुराना बयान फिर चर्चा में

पटना  बेटियों को मायके से दूर रहना चाहिए जैसा बयान देने पर लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्या से भर पेट बात सुनने वाले बिहार के पत्रकार कन्हैया भेलारी का एक नया वीडियो वायरल हो गया है। इस वीडियो में उनकी पौराणिक सोच का स्तर और नीचे गिरते देखा जा सकता है। यू-ट्यूब चैनल लल्लटॉप के शो में कन्हैया भेलारी यह कहकर सबको चौंका दे रहे हैं कि लड़का का लड़का और लड़की का लड़की से शादी (सेम सेक्स मैरिज, गे मैरिज, लेस्बियन मैरिज, समलैंगिक संबंध) करने के कारण भूंकप आ रहे हैं। चैनल का पत्रकार जब उनको भूकंप के वैज्ञानिक कारण बताता है तो वो और जिद पकड़ लेते हैं और कहते हैं कि एडवांस होने का मतलब ये सब नहीं है।   कन्हैया भेलारी को रोहिणी आचार्या ने टीवी चैनलों पर उनके बयानों को लेकर 18 नवंबर को फोन करके काफी फटकारा था। भेलारी ने किसी चैनल पर कहा था कि बेटियों को शादी के बाद नैहर यानी मायके से दूर रहना चाहिए। बेटियों को शादी, पर्व त्योहार और न्योता पर ही मां-बाप के घर आना चाहिए। बता दें कि चुनाव नतीजों के अगले दिन लालू यादव के परिवार में रोहिणी आचार्या और तेजस्वी यादव के बीच हार के कारणों को लेकर विवाद हुआ था। रोहिणी ने आरोप लगाया था कि संजय यादव का नाम लेने पर उन्हें गाली दी गई और उन पर चप्पल चलाया गया। रोहिणी तब से दिल्ली होते हुए मुंबई में अपनी सास के पास हैं। ताजा वायरल बयान में कन्हैया भेलारी महिला का महिला और पुरुष का पुरुष से समलैंगिक संबंध को गलत बताते हुए कह रहे हैं कि इन्हीं कारणों से भूकंप आता है। भेलारी ने कहा है कि आजकल ऐसा हो गया है कि लड़का दूसरे लड़के से शादी कर लेता है और कोई लड़की किसी लड़की से ही शादी कर लेती है। वो इसे ठीक नहीं मानते। जब उनसे कहा गया कि अगर कोई समलैंगिक संबंध से खुश है तो उनको क्या समस्या है। उनके अपने अधिकार हैं जिन पर सुप्रीम कोर्ट ने रजामंदी दे दी है। इसे अपराध की श्रेणी से बाहर रखा है। इस पर भेलारी ने अजीबोगरीब जवाब दिया। भेलारी ने कहा कि इसीलिए भूकंप आता है। जब चैनल ने भूकंप का वैज्ञानिक कारण बताया तो भेलारी ने कहा- इसका कोई मतलब है जी। एडवांस होने का यह अर्थ नहीं है। हम इसको नहीं मानते। कन्हैया भेलारी ने एक न्यूज चैनल के डिबेट में कहा था कि ब्याही बेटियों को अपने मायके में कम रहना चाहिए। यहां कुंडली मारकर नहीं बैठना चाहिए। उन्हें किसी खास अवसर पर मायके आना चाहिए और फिर चले जाना चाहिए। बेटियों को पिता परिवार के मसलों में दखल नहीं देना चाहिए। इस पर रोहिणी आचार्या ने उनकी क्लास लगा दी थी और कहा था कि बेटियों के हक में दखल देने का अधिकार आपको किसने दे दिया। रोहिणी ने फोन पर बातचीत का वीडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया था।

बड़ा फैसला: हाईकोर्ट ने MP सिविल जज परीक्षा का रिज़ल्ट दोबारा जारी करने को कहा, 191 पद खाली—एक भी ST उम्मीदवार चयनित नहीं

जबलपुर  मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सिविल जज जूनियर डिवीजन  भर्ती परीक्षा-2022 के परिणाम पर बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) अभ्यर्थियों के चयन पर पुनर्विचार किया जाए। जस्टिस विवेक अग्रवाल की एकल पीठ ने “एडवोकेट यूनियन फॉर डेमोक्रेसी एंड सोशल जस्टिस” की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किया।  याचिका में भर्ती के नियम 194 में संशोधन को चुनौती दी गई थी। दरअसल, सिविल जज भर्ती-2022 में कुल 199 पदों के लिए विज्ञापन निकला था, जिसमें बैकलॉग के पद भी शामिल थे। इसमें अनारक्षित वर्ग: 48 में से 17 बैकलॉग,  SC: 18 में से 11 बैकलॉग , ST: 121 में से 109 बैकलॉग ,  OBC: 10 में से 1 बैकलॉग है।  वहीं हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि मुख्य परीक्षा में एससी उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम 45% और एसटी के लिए 40% अंक मानें जाएं. वहीं इंटरव्यू में भी 20 अंकों की बाध्यता में राहत देने के निर्देश दिए गए हैं. कोर्ट का कहना है कि पात्र उम्मीदवारों को मौका देना न्याय की मूल भावना है. अब एक्जाम सेल को जल्द ही नई सूची कोर्ट में पेश करनी होगी. यह फैसला कई परिवारों की उम्मीदें फिर से जगा रहा है. मेन्स और इंटरव्यू के बाद अंतिम रूप से 89 अभ्यर्थी सफल घोषित किए गए। हैरानी की बात यह रही कि इन 89 चयनित अभ्यर्थियों में ओबीसी वर्ग के 15 अभ्यर्थी तो शामिल थे, लेकिन SC वर्ग के केवल 3 और ST वर्ग का एक भी अभ्यर्थी जगह नहीं बना पाया। याचिकाकर्ता का कहना था कि इतनी बड़ी संख्या में बैकलॉग पद होने के बावजूद SC-ST अभ्यर्थियों का इतना कम प्रतिनिधित्व संवैधानिक आरक्षण के मूल उद्देश्य पर सवाल खड़े करता है।  साथ ही नियम 194 में किए गए संशोधन को भी असंवैधानिक बताया गया। हाईकोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए अंतिम निर्णय तक सुरक्षित रखा है, लेकिन फिलहाल SC-ST अभ्यर्थियों के चयन पर पुनर्विचार करने का स्पष्ट निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि यदि कोई अभ्यर्थी योग्य पाया जाता है तो उसे नियुक्ति में प्राथमिकता दी जाए।  दों के खाली रहने को 'अत्यंत गंभीर' बताया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर और पुष्पेंद्र शाह ने तर्क दिया कि परीक्षा सेल ने आरक्षण नीति का सही ढंग से पालन नहीं किया। बैकलॉग पदों को अनारक्षित वर्ग को देना, न्यूनतम योग्यता में छूट न देना और साक्षात्कार में कम अंक देना भेदभाव को दर्शाता है। वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि सिविल जज परीक्षा के परिणामों में 191 पदों के बदले केवल 47 अभ्यर्थियों का चयन व्यवस्था की गंभीर त्रुटि को दर्शाता है। अजजा वर्ग के निर्धारित पदों को भरा ही नहीं जा सका। एक राज्य के तौर पर यह निराशाजनक है। सरकार वंचित वर्ग के उत्थान में पूरी तरह विफल साबित हुई है। हम न्यायपालिका या आरक्षण पर प्रश्न नहीं उठा रहे, किंतु परिणाम बताते हैं कि आरक्षित वर्ग को आज भी सीखने और तैयारियों के संसाधन और अवसर उपलब्ध नहीं हैं। राज्य को इस बात के प्रयास बढ़ाने होंगे, जिसमें वंचित समुदाय को बेहतर अवसर मिल सकें। लगातार हो रहा विरोध सबसे बड़ी चिंता यह रही कि 191 सीटों में से एसटी वर्ग का एक भी उम्मीदवार चयनित नहीं हुआ, जबकि 121 सीटें एसटी वर्ग की खाली रह गईं. एससी वर्ग से भी केवल एक ही अभ्यर्थी का चयन हुआ. कोर्ट ने इसे बेहद गंभीर माना. वहीं परिणाम आने के बाद दलित, आदिवासी व ओबीसी वर्ग के उम्मीदवार लगातार विरोध कर रहे थे. अब संशोधित सूची आने से इस विवाद पर बड़ा असर पड़ सकता है और डिजर्विंग उम्मीदवारों को न्याय मिल सकता है. सिलेक्शन नहीं हो पाने की एक वजह यह बताई एडवोकेट मोहर सिंह बताते हैं कि इस बार का एग्जाम काफी कठिन था। कानूनों से ज्यादा सवाल कोर्ट के जजमेंट्स से जुड़े हुए थे। इस कारण अभ्यर्थियों को जवाब देने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। वैकल्पिक एग्जाम भी कठिन था, जिसके कारण कम अभ्यर्थी ही मुख्य परीक्षा तक पहुंच पाए। मुख्य परीक्षा में भी 50% अंक लाना जरूरी था। अधिकतर स्टूडेंट 50% का आंकड़ा नहीं छू पाए और पहले ही बाहर हो गए। इस तरह का था परीक्षा पैटर्न प्रारंभिक परीक्षा     प्रारूपः वस्तुनिष्ठ (बहुविकल्यीय प्रश्न)     अवधि: 2 घंटे     कुल अंकः 150 (150 प्रश्न, प्रत्येक 1 अंक का) मुख्य परीक्षा     प्रारूपः वर्णनात्मक (निबंध-आधारित)     अवधिः प्रत्येक पेपर के लिए 3 घंटे     कुल पेपर: 4     कुल अंक: 400 (प्रत्येक पेपर 100 अंकों का) विषय : भारत का संविधान, सिविल प्रक्रिया संहिता, भारतीय साक्ष्य अधिनियम, लेखन कौशल और न्यायालयीन अभ्यास जैसे विषय शामिल थे। अनिवार्यता : सामान्य वर्ग के लिए न्यूनतम 200 अंक और अन्य वर्गों के लिए 190 अंक लाना जरूरी। मौखिक साक्षात्कार कुल अक: 50 चयनः अंतिम चयन के लिए मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार के कुल अंकों को जोड़ा गया।

चुनाव आयोग पर अखिलेश का हमला: बोले— BJP हर चाल चल ले, यूपी-बंगाल में हार तय

लखनऊ  समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शनिवार को चुनाव आयोग (EC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर जमकर हमला बोला। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि आगामी चुनाव को प्रभावित करने के लिए भाजपा और चुनाव आयोग मिलकर सपा के वोट कटवाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि साल 2024 के लोकसभा चुनाव में जहां-जहां इंडिया गठबंधन जीता है, वहां-वहां हर विधान सभा सीट से 50 हजार- 50 हजार वोट काटने की तैयारी है जिससे कि हम जीतने न पाए। इसके बावजूद ये चाहे जो भी कर लें, ये न यूपी जीतेंगे और न ही बंगाल जीत पाएंगे। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने इसके लिए अधिकारियों की टीम को लगा दिया है इसलिए हमें सावधान रहने की जरुरत है। इनके निशाने पर कन्नौज भी आ गया है। ये भाजपा वाले जीतने के लिए कुछ भी कर रहे हैं। प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने कन्नौज की एसडीएम से बातचीत भी सुनवाई। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग उत्तर प्रदेश बंगाल और तमिलनाडु में एसआरआई में सहयोग नहीं कर रहा है। सपा मुखिया ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत विपक्ष के वोटरों का लिस्ट से नाम हटाने की कोशिश नई नहीं है लेकिन अब इसे संगठित ढंग से अंजाम दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी बूथ स्तर पर समीक्षा कर रही है। कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया गया है कि हर वोटर का नाम मतदाता सूची में सही तरीके से दर्ज हो।   अखिलेश यादव ने कहा कि बीएलओ घर-घर नहीं जा रहे हैं। एक ही स्थान पर बैठ कर काम कर रहे हैं। ये शादी का सीजन है फिर भी एसआईआर कराया जा रहा है। सपा की मांग है एसआईआर का समय बढ़ाया जाए और एसओपी जारी की जाए। बीएलओ दलित पिछड़े मुस्लिम, पिछड़े और अति पिछडो के यहां नहीं जा रहे हैं। केवल भाजपा वालों, प्रधान और पार्षद के यहां जा रहे हैं। गणना प्रपत्र मांगने पर बीएलओ कहते हैं मैं आ नहीं पाऊंगा। आप यहां आकर ले लो या फिर कहते हैं कि कहो तो मैं आपको वाट्सअप पर भेज दूं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वर्ष 2003 की मतदाता सूची से काफी संख्या में नाम गायब हैं। चुनाव आयोग कह रहा है 98.4% प्रपत्र बंट चुका है। भाजपा सरकार को बताया फेल अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार को हर मोर्चे पर फेल बताया। तंज कसते हुए कहा कि भाजपा की सरकार में खांसी की दवा मत लेना। पहले 500 एमजी की दवा से बुखार ठीक हो जाता था अब 650 एमजी खाने के बाद भी ठीक नहीं होता। यमुना गंदी, गंगा गंदी। देश में हर नीति फेल है। विदेश नीति फेल है। ये झूठा प्रचार कर रहे हैं। सरकार के अधिकारी भाजपा के पदाधिकारी बनकर काम कर रहे हैं। भाजपा चाहती है कि जनता सीधे अधिकारियों से भीड़ जाए। अखिलेश यादव ने नए श्रम कानूनों पर केंद्र सरकार को घेरा। कहा कि ये उद्योगपतियों के इशारे पर बनाए गए हैं। कुछ कहो तो सरकार कह देगी देश द्रोही है। सपा 2147 का घोषणा पत्र जारी करेगी सपा मुखिया ने कहा कि भाजपा 2047 की बात कर रही है। अरे ये अपना घोषणा पत्र पढ़ लें और उसी पर ही काम कर लें। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा से सीख कर सपा 2147 का घोषणा पत्र जारी करेगी। हम लोगों ने जब सैफई में मंदिर बनवाना शुरू किया तो भाजपा ने इसका विरोध शुरू कर दिया। कोई पुजारी नहीं मिला तो भाजपा कार्यकर्त्ता को खड़ा कराकर उसका विरोध शुरू करा दिया। सपा के पूर्व विधायक पर उसके ही पूर्व कर्मी से 32 हजार रूपये का झूठा मुकदमा दर्ज करा दिया। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं और साथियों से निवेदन कर रहे हैं कि तैयारी बहुत सूझबूझ से करें और बहुत सूझबूझ से ही चुनाव लड़ना है। हमे कांटे से कांटा निकालने वाली भाजपा की बात को याद रखना है और उसी तरह चुनाव लड़ना होगा, तभी भाजपा को हरा पाएंगे।  

एनआईएफटीईएम ने दिया मोटे अनाज से बेकरी उत्पाद निर्माण का जशपुर में प्रशिक्षण

पोषण तत्वों  के साथ ही रोजगार के अवसरों की दी जानकारी रायपुर, एनआईएफ़टीईएम के छात्रों ने मोटे अनाज में पाए जाने वाले फ़ाइबर, मिनरल्स, एंटीऑक्सीडेंट्स के महत्व के साथ ही इनके नियमित उपयोग से होने वाले स्वास्थ्य लाभों पर विस्तार से जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागी महिलाओं को मोटे अनाज आधारित उत्पादों से होने वाली आमदनी और बाज़ार संभावनाओं के बारे में भी बताया गया। प्रशिक्षण में स्व-सहायता समूह की 25 महिलाओं की रही सहभागिता        हरियाणा के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ फ़ूड टेक्नोलॉजी, एंटरप्रेन्योरशिप एंड मैनेजमेंट द्वारा महुआ पर स्थापित सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस में विगत दिवस मोटे अनाज के पोषण तत्वों और इनके उपयोग से बेकरी उत्पाद बनाने संबंधी हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग आयोजित की गई। इस प्रशिक्षण में स्व सहायता समूह की 25 महिलाओं ने सहभागिता की। मोटे अनाज का उपयोग बढ़ाकर  पोषण स्तर में करना है वृद्धि         कार्यक्रम का उद्देश्य नान खटाई, न्यूट्रीबार, कुकीज़ जैसे बेकरी आइटम्स में मोटे अनाज का उपयोग बढ़ाकर इनके पोषण स्तर में वृद्धि करना और ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार करना है। यह प्रशिक्षण जिला प्रशासन के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। स्थानीय समुदायों को खाद्य प्रसंस्करण आधारित उद्यमिता से है जोड़ना           जशपुर में एनआईएफ़टीईएम टीम वैल्यू-एडेड फ़ूड प्रोडक्ट्स के उत्पादन के साथ-साथ पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग के लिए तकनीकी सहायता प्रदान कर रही है। यह पूरी पहल स्थानीय समुदायों को खाद्य प्रसंस्करण आधारित उद्यमिता से जोड़ने के उद्देश्य से चलाए जा रहे ग्राम अंगीकरण कार्यक्रम के अंतर्गत की जा रही है। इस कार्यक्रम का नेतृत्व प्रो. प्रसन्ना कुमार जी.वी. और श्री अभिमन्यु गौर कर रहे हैं, जबकि यह कार्यक्रम एनआईएफ़टीईएम के डायरेक्टर डॉ. हरिंदर सिंह ओबेरॉय के निर्देशन में संचालित हो रहा है। कार्यक्रम के संचालन और विभिन्न गतिविधियों के समन्वय में मिशन मैनेजर श्री विजय शरण प्रसाद और जय जंगल एफपीसी जशपुर के डायरेक्टर श्री समर्थ जैन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

ड्रग माफिया पर बड़ी चोट: पंजाब पुलिस ने 250 करोड़ की हेरोइन के साथ तस्कर किया गिरफ्तार

फिरोजपुर  मुख्यमंत्री और डीजीपी पंजाब के दिशा निर्देशों अनुसार पंजाब में चलाए गए युद्ध नशे विरुद्ध अभियान के तहत एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स फिरोजपुर रेंज की पुलिस ने एक नशा तस्कर को पाकिस्तान से मंगवाई गई करीब 50 किलो 14 ग्राम हेरोइन की बड़ी खेप के साथ फिरोजपुर बॉर्डर के साथ लगते सीमावर्ती गांव राओ के हिठाड़ के नजदीक गिरफ्तार किया है।    बताया जाता है कि यह नशा तस्कर हेरोइन की डिलीवरी लेकर पंजाब नंबर की  कार पर जा रहा था तो एंटीनाकोटिक्स टास्क फोर्स फिरोजपुर रेंज को इस बात की गुप्त सूचना मिली थी, जिसके आधार पर कार्रवाई करते हुए एएनटीएफ की टीम ने उसे काबू कर लिया और उसकी कर में से 50 किलो 14 ग्राम हेरोइन बरामद हुई। पकड़े गए नशा तस्कर की पहचान संदीप सिंह उर्फ सीपा पुत्र छिंदर सिंह वासी गांव चैनार शेर सिंह तलवंडी चौधरी जिला कपूरथला के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार पकड़ी गई हेरोइन की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 250 रुपए करोड रुपए बताई जाती है। इस रिकवरी को लेकर नशा तस्कर के खिलाफ थाना एएनटीएफ  एसएएस नगर मोहाली में एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज किया गया है और उससे पूछताछ की जा रही है।  पुलिस द्वारा इस बात का भी पता लगाया जा रहा है कि इस हेरोइन को मंगवाने में और किन-किन भारतीय तस्करों का हाथ है और इस हेरोइन की डिलीवरी कहां पर दी जानी थी ?    

दो दशक बाद मिला इंसाफ: छात्र सुनील मर्डर केस का मास्टरमाइंड आखिरकार पकड़ा

मैनपुरी  उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले की एक त्वरित अदालत ने 10 वीं कक्षा के एक छात्र की अपहरण कर हत्या किए जाने के करीब 20 साल पुराने मामले में 3 आरोपियों को दोषी करार देते हुए सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई और प्रत्येक दोषी पर 55 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया। एक सरकारी वकील ने शनिवार को यह जानकारी दी। तीन दोषियों को आजीवन कारावास, 55 हजार रुपए का जुर्माना जिला शासकीय अधिवक्ता (डीजीसी) पुष्पेंद्र सिंह चौहान ने बीते शनिवार को एक न्यूज एजेंसी को बताया कि अपर सत्र न्यायाधीश (त्वरित अदालत) कुलदीप सिंह ने बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष के वकीलों की सुनवाई के बाद रवि मिश्रा, आक्रोश गुप्ता और योगेंद्र कश्यप को दोषी ठहराया और उन्हें आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई और प्रत्येक दोषी पर 55,000 रुपए का जुर्माना लगाया। उन्होंने बताया कि इस मामले में सह आरोपी शैलेन्द्र यादव और शैलेन्द्र कश्यप के फरार होने के कारण उनके मुकदमे की फाइल अलग कर दी गई। सुनील तोमर हत्याकांड का 20 साल पुराना मामला, आरोपी फरार डीजीसी चौहान ने बताया कि शहर कोतवाली क्षेत्र के पावर हाउस रोड निवासी 10वीं कक्षा का छात्र सुनील तोमर 31 दिसंबर, 2005 की शाम को लापता हो गया था। काफी खोजबीन के बाद भी उसका पता नहीं चल सका। एक जनवरी, 2006 को सुनील का शव जलालपुर गांव के पास मिला। उन्होंने बताया कि मृतक सुनील के भाई दीपू तोमर ने कोतवाली में रवि मिश्रा, आक्रोश गुप्ता, योगेंद्र कश्यप, शैलेंद्र यादव और पावर हाउस रोड निवासी शैलेंद्र कश्यप के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। पुलिस ने जांच के बाद अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। अदालत ने सुनवाई पूरी कर आरोपितों को सजा सुनाई। 

पंजाबी गायक हरमन सिद्धू की माैत: शूटिंग से लाैटते समय ट्रक से टकराई गाड़ी

मानसा (पंजाब)  पंजाबी गायक हरमन सिद्धू की शुक्रवार रात एक सड़क हादसे में माैत हो गई। उनके माैत की खबर से म्यूजिक इंडस्ट्री में शोक की लहर दाैड़ गई है।  शुक्रवार की रात मानसा में ट्रक से उनकी गाड़ी टकराई। वह रात को अपनी शूटिंग से गांव ख्याला कलीं लौट रहे थे। रात करीब 12 बजे उनकी गाड़ी एक ट्रक से जा टकराई जिस दौरान उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हरमन सिद्धू ने पेपर में प्यार उठोजी तुहाड़ी जान गुड मॉर्निंग कैंदी है समेत कई  हिट गाने गए थे। पंजाबी गायिका मिस पूजा के साथ उनके गाने काफी प्रसिद्ध हुए थे। पुलिस द्वारा शव को परिजनों को साैंप दिया गया है। 

डॉक्टर की ‘ना-खड़े होने’ वाली घटना पर बवाल, हाई कोर्ट ने सुनाया कड़ा निर्णय

हरियाणा पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने कोविड ड्यूटी पर तैनात सरकारी डॉक्टर के खिलाफ केवल इसलिए कार्रवाई किए जाने पर निराशा जताई, क्योंकि वह इमरजेंसी वार्ड में विधायक के आने पर खड़ा नहीं हुआ था। अदालत ने कहा कि यह राज्य का असंवेदनशील और बेहद चिंताजनक रवैया दिखाता है। जज अश्विनी कुमार मिश्रा और जज रोहित कपूर की पीठ ने कहा कि समर्पित चिकित्सीय पेशेवरों के साथ होने वाली ऐसी अवांछित घटनाओं पर रोक लगनी चाहिए। अदालत ने हरियाणा के अधिकारियों को निर्देश दिया कि डॉक्टर को स्नातकोत्तर चिकित्सीय पाठ्यक्रम के लिए जरूरी अनापत्ति प्रमाणपत्र तुरंत जारी किया जाए। उसने राज्य पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।   याचिकाकर्ता डॉ. मनोज हरियाणा सरकार के कैजुअल्टी मेडिकल ऑफिसर थे और कोविड-19 महामारी के दौरान सरकारी अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में ड्यूटी पर थे। डॉक्टर की याचिका के अनुसार, एक दिन अस्पताल का निरीक्षण करने आए विधायक इस बात पर नाराज हो गए कि डॉक्टर ने उनके आने पर उठकर उनका अभिवादन नहीं किया। इसके बाद राज्य सरकार ने 2016 के हरियाणा सिविल सर्विसेज नियमों के तहत चिकित्सक को मामूली सजा देने का प्रस्ताव रखा और उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया। डॉ. मनोज ने जून 2024 में अपना जवाब दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि वह विधायक को पहचान नहीं पाए थे। इसलिए वह खड़े नहीं हुए और उन्होंने ऐसा जानबूझकर नहीं किया था। कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा डॉक्टर के अनुसार, आज तक इस मामले में कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया गया है। अदालत ने कहा, ‘हमें राज्य की ओर से उठाए गए इस कदम पर आश्चर्य और निराशा है कि कोविड काल के दौरान आपातकालीन ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर को केवल इसलिए नोटिस जारी किया गया, क्योंकि वह विधायक के आने पर खड़े नहीं हुए। किसी डॉक्टर से यह उम्मीद करना कि वह इमरजेंसी वार्ड में विधायक के आने पर खड़ा हो और ऐसा न करने पर उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करना बेहद व्यथित करने वाला है।’ पीठ ने कहा कि हमारी नजर में इस तरह के आरोप पर चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई करना राज्य की असंवेदनशीलता दिखाता है। उसने कहा कि चिकित्सक को एनओसी न देकर उसे उच्च शिक्षा के अधिकार से वंचित रखा पूरी तरह मनमाना रवैया है। 'ऐसी घटनाओं पर सख्ती से रोक लगे' अदालत ने कहा, ‘हमें दुख के साथ यह कहना पड़ रहा है कि अखबारों में अक्सर समाचार आते हैं कि मरीजों के परिजन या जनप्रतिनिधि चिकित्सकों के साथ बिना किसी ठोस कारण के दुर्व्यवहार करते हैं। अब समय आ गया है कि ऐसी अवांछित घटनाओं पर सख्ती से रोक लगाई जाए और ईमानदार डॉक्टरों को पर्याप्त सम्मान दिया जाए।’ अदालत ने कहा कि राज्य सरकार चिकित्सक को तुरंत एनओसी जारी करे। उसने कहा कि याचिका स्वीकार की जाती है और राज्य सरकार को 50 हजार रुपये का जुर्माना PGIMER, चंडीगढ़ के गरीब मरीज कल्याण कोष में जमा करना होगा।  

पोस्टरों पर कालिख पोतने का मामला तूल पकड़ा, नूंह पुलिस ने पांच आरोपियों को दबोचा

नूंह  नूंह के नए बस स्टैंड पर कांग्रेस के कुछ युवा कार्यकर्ताओं द्वारा सरकारी बसों पर लगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नायब सैनी के पोस्टरों पर कालिख पोतने का मामला तूल पकड़ गया है। घटना के तुरंत बाद शहर थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पाँच युवकों को गिरफ़्तार किया है। पुलिस के अनुसार हिरासत में लिए गए युवकों की पहचान हारिस पुत्र जाकिर निवासी बिसरू, आमिर पुत्र नूर मोहम्मद निवासी आकेड़ा, वासिद पुत्र शमसुद्दीन निवासी चंदेनी, अफाक पुत्र इलियास निवासी सालाहेडी और यूथ कांग्रेस के जिला अध्यक्ष मुबीन पुत्र पलटू निवासी तेड के रूप में हुई है। सभी पर आरोप है कि उन्होंने बस स्टैंड पर खड़ी सरकारी बसों पर लगे पीएम और सीएम के पोस्टरों पर कालिख पोती। हरियाणा रोडवेज़ के ड्राइवर कासम की शिकायत पर पुलिस ने सरकारी कार्य में बाधा डालने समेत संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। गिरफ्तार युवकों ने पुलिस को बताया कि 19 नवंबर की रात उन्हें जिला अध्यक्ष मुबीन तेडीया का फोन आया था। उन्होंने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष यूथ कांग्रेस निशित कटारिया और अन्य पदाधिकारी 20 नवंबर को नूंह आने वाले हैं और बस स्टैंड पर कार्यक्रम रखा गया है। युवकों के अनुसार जब वे बस स्टैंड पहुँचे तो वहाँ प्रदेश अध्यक्ष निशित कटारिया, सह प्रभारी प्रियंका चंडाल और कई यूथ कांग्रेस कार्यकर्ता पहले से मौजूद थे। बताया गया कि कटारिया अपने साथ काली स्प्रे लेकर आए थे और उसी से सरकारी बसों पर लगे पोस्टरों पर कालिख पोती गई। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची, बसों की जांच की और आरोपियों को मौके से हिरासत में ले लिया। इस घटना के बाद स्थानीय राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है। भाजपा समर्थक इसे सरकारी संपत्ति का अपमान बता रहे हैं, जबकि कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि युवाओं पर की गई कार्रवाई पक्षपातपूर्ण और मनमानी है।