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ऐतिहासिक पल: राष्ट्रपति मुर्मु को मिली धरती आबा बिरसा मुंडा की बस्तर कला प्रतिमा, रायपुर में हुआ भव्य समारोह

रायपुर : जनजातीय गौरव दिवस समारोह का ऐतिहासिक क्षण : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु को भेंट की धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की बस्तर आर्ट प्रतिमा रायपुर जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर अंबिकापुर में आयोजित कार्यक्रम में एक प्रेरक एवं गरिमामय क्षण देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु को बस्तर आर्ट में निर्मित धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा स्मृति-चिह्न के रूप में भेंट की। यह प्रतिमा जनजातीय विरासत, शौर्य और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता का प्रतीक मानी जाती है। मुख्यमंत्री श्री साय द्वारा भेंट की गई यह मूर्ति भगवान बिरसा मुंडा के बलिदान और जनजातीय समाज की गौरवपूर्ण परंपराओं को सम्मानपूर्वक स्मरण कराने वाला एक सशक्त प्रतीक है। कार्यक्रम स्थल पर मौजूद दर्शकों ने इस भावनात्मक क्षण का गर्मजोशी से स्वागत किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार आदिवासी समाज की समृद्ध परंपराओं, कला, इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम में उनके अप्रतिम योगदान को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार जनजातीय समाज की विरासत, संस्कृति और अमूल्य योगदान को संजोने, संरक्षित करने और सशक्त रूप से आगे बढ़ाने के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।  मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारा संकल्प है कि आदिवासी समाज के स्वाभिमान को नई ऊंचाइयों तक पहुँचाया जाए, ताकि उनकी गौरवशाली पहचान आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा बने।

रामलला VIP दर्शन अपडेट: 25 नवंबर समेत कई दिनों में प्रवेश प्रतिबंध, यात्रा से पहले जानें नई सूची

अयोध्या यूपी के अयोध्या स्थित राम मंदिर में 25 नवंबर को होने वाले ध्वजारोहण समारोह के लिए तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इसको देखते हुए राम मंदिर ट्रस्ट ने यह निर्णय लिया है कि ध्वजारोहण समारोह के एक दिन पहले यानी 24 नवंबर और एक दिन बाद यानी 26 नवंबर को राम मंदिर में वीआईपी दर्शन पर रोक रहेगी। भीड़ नियंत्रण के लिए यह योजना बनाई गई है। ट्रस्ट की ओर से यह पहले ही बताया जा चुका है कि 25 नवंबर को राम मंदिर में आम श्रद्धालु दर्शन नहीं कर पाएंगे। इस दिन केवल ध्वजारोहण समारोह में आने वाले आठ हजार से अधिक मेहमानों को ही दर्शन कराया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत की मौजूदगी में होने वाले ध्वजारोहण समारोह के बाद दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक मेहमानों को रामलला और राम दरबार के दर्शन कराए जाएंगे। पीएम मोदी के आगमन को लेकर तैयारियां तेज 25 नवंबर को ध्वजारोहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अयोध्या आगमन को लेकर महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर तैयारियां तेज हो गई हैं। एयरपोर्ट प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। एयरपोर्ट निदेशक धीरेंद्र सिंह ने बताया कि एयरपोर्ट पर कुल आठ पार्किंग उपलब्ध हैं, जिनमें से चार पार्किंग वीआईपी मूवमेंट के लिए आरक्षित की गई हैं, जबकि बाकी चार पार्किंग शेड्यूल और नॉन-शेड्यूल फ्लाइट्स के लिए उपयोग होंगी। उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट पर फ्लाइट रिफ्यूलिंग को न्यूनतम रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि सुरक्षा और सुगमता दोनों बनी रहे। 25 नवंबर को लगभग 50 फ्लाइट्स के लैंड होने की संभावना जताई जा रही है। इस बढ़ते दबाव को देखते हुए आसपास के जनपदों के एयरपोर्ट्स को भी अलर्ट पर रखा गया है। वीआईपी मेहमानों को उतारने के बाद कई फ्लाइट्स पास के जिलों की हवाई पट्टियों पर पार्क की जाएंगी। सुरक्षा को लेकर भी व्यापक इंतजाम किए गए हैं। सीआईएसएफ जवानों को दी गई विशेष जिम्मेदारी एयरपोर्ट पर सीआईएसएफ के 48 जवान स्थायी तौर पर तैनात हो चुके हैं। उन्हें इस कार्यक्रम के दौरान विशेष जिम्मेदारी दी गई है। 24 नवंबर को एक विशेष सुरक्षा ऑपरेशन भी चलाया जाएगा, ताकि किसी भी संभावित चुनौती का तुरंत समाधान किया जा सके। निदेशक का कहना है कि प्रधानमंत्री के दौरे को सफल और सुरक्षित बनाने के लिए सभी विभागों के बीच समन्वय लगातार जारी है।  

कड़कड़ाती ठंड ने बढ़ाई सिहरन: राजस्थान में तापमान में तेज गिरावट

जयपुर राजस्थान में बर्फीली हवा का असर लगातार बना हुआ है। बुधवार को भी माउंट आबू का तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस पर दर्ज किया गया, जहां रातभर पड़ी ओस जमकर बर्फ में बदल गई। हालांकि सुबह के बाद खिली धूप ने लोगों को कुछ राहत दी, लेकिन पहाड़ी इलाकों में ठिठुरन अब भी बरकरार है। माउंट आबू के अलावा फतेहपुर, नागौर, सीकर और दौसा समेत कई जिलों में भी ठंड का असर तेज रहा। मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि राज्य में अगले कुछ दिनों तक मौसम शुष्क रहेगा और तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं देखने को मिलेगा। हालांकि शीतलहर में कमी से जनजीवन में थोड़ी राहत बनी रहेगी। पिछले 24 घंटों के आंकड़ों पर नजर डालें तो माउंट आबू के बाद सबसे ठंडा शहर सीकर रहा, जहां न्यूनतम तापमान 5.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। नागौर में पारा 5.9 डिग्री, फतेहपुर में 6.9 डिग्री और दौसा में 6.7 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। जालौर में 7 डिग्री, सिरोही में 7.4 डिग्री, बारां में 7.8 डिग्री और करौली में 8.7 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। वहीं चूरू और चित्तौड़गढ़ का तापमान 8.2 डिग्री रहा। पिलानी, वनस्थली, भीलवाड़ा, उदयपुर, अजमेर और कोटा के तापमान में भी मामूली गिरावट देखने को मिली, जबकि जयपुर का न्यूनतम तापमान 11.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। दिन के तापमान में हल्की बढ़ोतरी प्रदेश में दिन के अधिकतम तापमान में मामूली बढ़ोतरी हुई है जिससे दिन के वक्त लोगों को शीत लहर से राहत है। फतेहपुर में अधिकतम तापमान बढ़कर 31 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया, जबकि सीकर में 29 डिग्री और पिलानी में 29.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। जोधपुर का अधिकतम तापमान 30.4 डिग्री, फलोदी में 30 डिग्री, बीकानेर में 30.6 डिग्री, जैसलमेर में 31.5 डिग्री और बाड़मेर में 32.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मौसम केंद्र जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि राज्य के दक्षिणी क्षेत्रों में पूर्वी हवाओं का प्रभाव बढ़ रहा है। इन हवाओं के चलते अगले कुछ दिनों में न्यूनतम तापमान में 1 से 2 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी की संभावना है। इसका सीधा असर उदयपुर और कोटा संभाग के जिलों पर पड़ेगा, जहां सर्दी में हल्की कमी आने की उम्मीद है।

‘आपकी सरकार–आपके द्वार’ की शुरुआत आज , मुख्यमंत्री हेमंत करेंगे कार्यक्रम का शुभारंभ

रांची आज से झारखंड में 'आपकी सरकार-आपके द्वार' कार्यक्रम की शुरुआत हो रही है जो कि 15 दिसंबर तक चलेगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पलामू से ‘आपकी सरकार-आपके द्वार’ कार्यक्रम की शुरुआत करेंगे। इसके चलते रांची जिले के सभी 305 पंचायतों और नगर निगम क्षेत्र के 53 वार्डों में कल से शिविर लगने शुरू हो जाएंगे। यहां आम जनता की समस्याओं को सुना और निपटाया जाएगा। उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची, मंजूनाथ भजंत्री के निर्देश पर प्रत्येक पंचायत स्तर पर शिविरों का आयोजन योजनाबद्ध तरीके से किया जाएगा। इसमें सरकारी योजनाओं से संबंधित आवेदन लिए जाएंगे और पात्र लाभुकों को सीधे लाभ पहुंचाने की कोशिश होगी। उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची, मंजूनाथ भजंत्री संबंधित सभी पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि अधिक से अधिक लोगों को इस कार्यक्रम से जोड़ें और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करें। उपायुक्त ने कहा कि पंचायत और गांव स्तर पर शिकायतों के त्वरित निष्पादन और योजनाओं से नए लाभुकों को जोड़ना प्रशासन की प्राथमिकता है। उपायुक्त ने रांची जिले के सभी लोगों से अपील की है कि वे अपने नजदीकी शिविरों में पहुंचे और आवश्यक दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, वोटर आईडी, बैंक पासबुक या अन्य पहचान पत्र आदि साथ लेकर आएं, ताकि उन्हें योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सके। साथ ही नोडल अधिकारियों को प्रतिदिन अपने-अपने केंद्रों पर उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। आज इन पंचायतों और वार्डों में होगा शिविर चतरा पंचायत-अनगड़ा, खुखरा पंचायत -बेड़ो, कांची पंचायत-बुण्डू, छापर पंचायत-बुढ़मू, पंडरी पंचायत-चान्हो, गड़गांव पंचायत-ईटकी, उरुगुटू एवं उपरकोनकी-कांके, हुल्सु पंचायत-लापुंग, बंझीला पंचायत-मांडर, नारो पंचायत-नगड़ी, हरदाग पंचायत-नामकुम, जयडीहा पंचायत-ओरमांझी, राहे पंचायत-राहे, तारुप पंचायत-रातू, हलमाद पंचायत-सिल्ली, बारेन्दा पंचायत-सोनाहातू, अमलेशा पंचायत-तमाड़, वार्ड-1 (सीएमपीडीआई स्कूल के सामने), वार्ड-2 (एदलहातू जोगो पहाड़)

अब हरियाणा में TB की जांच होगी और आसान, सरकार ने की 6 करोड़ की अत्याधुनिक मशीनों की खरीद

चंडीगढ़ गांवों और दूरदराज क्षेत्रों में स्थित कम्युनिटी हेल्थ सेंटर (सीएचसी) व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में टीबी टेस्ट के परिणाम के लिए अब ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। हरियाणा सरकार ने पहली बार छह करोड़ रुपये की लागत से 40 टू नेट मशीनों की खरीद को मंजूरी दे दी है। पहले केंद्र सरकार की ओर से यह मशीनें उपलब्ध करवाई जाती थी। इन मशीनों को सीएचसी और पीएचसी में उपलब्ध करवाया जाएगा। ये मशीनें टीबी के संदिग्ध मरीजों की गुणवत्तापूर्ण और त्वरित जांच करने में अहम म भूमिका निभाती हैं। मात्र एक से डेढ़ घंटे में पता चल सकेगा कि मरीज को टीबी है या नहीं। स्टेट टीबी अधिकारी राजेश राजू ने बताया कि टीबी के गंभीर रोगियों का पता लगाने में टू नेट मशीन बेहद उपयोगी हैं। इसके जरिए कम समय में जांच के बेहद विश्वसनीय नतीजे प्राप्त किए जा सकते हैं। इस मशीन से टीबी के गंभीर मामलों का पता लगाना बेहद आसान होता है। इसका मकसद हरियाणा के ग्रामीण और दूरदराज 2018 के क्षेत्रों तक जांच सुविधा का विस्तार करना है। मशीनों के आने से जो इलाके हमारी जद से बच रहे थे अब उन पर फोकस किया जा सकेगा। समय पर रोग की पहचान होने से टीबी के संक्रमण को रोकने में मदद मिलेगी। टू नेट मशीन में एमडीआर रोगियों यानी मल्टीपल ड्रग रेजिस्टेंस मरीजों की भी जांच हो सकेगी जनवरी से अक्तूबर तक हरियाणा में 79,000 नए मरीजों की पहचान की गई है। इस समयावधि में करीब नौ लाख टेस्ट किए गए हैं। इस दौरान 78,000 से अधिक मरीजों को सफलतापूर्वक टीबी मुक्त किया भी जा चुका है। टीबी अधिकारी का कहना है कि ज्यादा टेस्ट होने पर मरीजों की संख्या भी बढ़ना तय है। उन्होंने बताया कि ज्यादा टेस्ट करने का मकसद टीबी के प्रसार को रोकना है। एक अनुमान के मुताबिक एक टीबी मरीज साल में दस से 15 लोगों को संक्रमित करता है। ऐसे में यदि समव पर उसकी जांच कर इलाज शुरू कर दिया जाए तो टीबी को रोका जा सकता है। इसलिए हरियाणा में ज्यादा टेस्ट किए जा रहे हैं।

भैरव घाट पर 450 मीटर वायाडक्ट और टनल बन रही, इंदौर–खंडवा रोड पर सफर होगा सुरक्षित और आसान

इंदौर मध्य प्रदेश में सड़क परिवहन विभाग विकास के नए-नए आयाम लिख रहा है. निमाड़-मालवा वालों के लिए खुशखबर यह है कि इंदौर-खंडवा रोड का काम पूरा होने जा रहा है. इंदौर इच्छापुर हाईवे का फोर लेन निर्माण कार्य किया जा रहा है. यह निर्माण कार्य 2026 में पूरा हो जाएगा. भैरव घाट में वर्तमान सड़क से अलग टनल और ब्रिज का निर्माण किया जा रहा है जिससे घुमावदार मोड़ वाले घाट और एक्सीडेंट झोन खत्म हो जाएंगे. नर्मदा नदी पर वायाडक्ट का निर्माण सड़क निर्माण कंपनी मेघा इंजीनियरिंग के प्रोजेक्ट हेड नागेश्वर राव के अनुसार, ''वर्तमान में सड़क निर्माण का कार्य लगातार तेजी से किया जा रहा है. भैरव घाट पर हादसों को देखते हुए सड़क डिजाइन में कई विशेष बातों का ध्यान रखा गया है. जिसमें मुख्य तौर पर यहां नर्मदा नदी पर बने पुल से ऊंचा वायाडक्ट पुल के रूप में तैयार किया गया है. साथ ही भैरव घाट और चोरल घाट में तीन अलग-अलग टनल का निर्माण किया जा रहा है.'' अप्रैल 2026 तक पूरा हो जाएगा कार्य इस वायाडक्ट और टनल के चलते हादसों की संभावना लगभग ना के बराबर होगी. इसे हादसों को ध्यान में रखते हुए ही डिजाइन किया गया है. यह प्रोजेक्ट भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत चल रहा है. सड़क निर्माण से आने वाले समय में लोगों को काफी सुविधा होगी. भैरव घाट में निर्माण कार्य लगभग अप्रैल तक पूरा कर लिया जाएगा. वहीं, इसे जून महीने तक यात्रियों के लिए शुरू कर दिया जाएगा. जिन टनल का निर्माण किया जा रहा है उनमें पहली टनल 300 मीटर लंबी, दूसरी टनल 480 में और तीसरी 550 मीटर लंबी है. 450 लंबा वायाडक्ट हो रहा तैयार भैरव घाट में वर्तमान में सड़क पर वाहनों को चढ़ाई करने के दौरान उल्टी तरफ चढ़ना पड़ता है. ऐसे में कई बार हादसों की स्थिति बनी रहती है. वर्तमान में तैयार किया जा रहा वायाडक्ट करीब 450 मी का है. जिसमें अलग-अलग चीजों का ध्यान रखा गया है. यह सड़क इंदौर इच्छापुर हैदराबाद हाईवे के नाम से पहचानी जाती है. करीब 300 किलोमीटर के इस हाइवे पर कंपनी द्वारा पहले हिस्से में काम किया जा रहा है, यह सड़क करीब 80% पूरी हो चुकी है. अप्रैल 2026 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. भैरव घाट पर सड़क हादसों में कई लोगों की मौत इंदौर-खंडवा रोड पर स्थित भैरव घाट को आमतौर पर मौत की सड़क के नाम पर जाना जाता है. आए दिन होने वाले हादसों में यहां कई लोग अपनी जान गवां चुके हैं. बीते दिनों हुए हादसों में करीब एक दर्जन से अधिक लोग अपनी जान गवां चुके हैं. आने वाले दिनों में इन हादसों पर अब रोकथाम लगने वाली है. सड़क निर्माण कंपनी मेघा इंजीनियरिंग के प्रोजेक्ट हेड नागेश्वर राव के अनुसार वर्तमान में सड़क निर्माण का कार्य लगातार तेजी से किया जा रहा है.

सिंगापुर के साथ MANIT भोपाल कर रहा अभिनव शोध, भविष्य की EV और सोलर टेक्नोलॉजी में आएगा बदलाव

भोपाल  मैनिट भोपाल अब दुनिया की टॉप यूनिवर्सिटी में शामिल नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ सिंगापुर (NUS) के साथ मिलकर ऐसा हाई-टेक शोध करने जा रहा है, जिसकी बदौलत भारत में इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग सिस्टम और सोलर ग्रिड मैनेजमेंट पूरी तरह बदल सकता है। शिक्षा मंत्रालय की SPARC योजना के तहत मैनिट को इसके लिए 1 करोड़ रुपये का मेगा अनुदान मिला है। क्या खास होने वाला है?  भारत में पहली बार EV चार्जिंग का “डिजिटल ट्विन” बनेगा इस परियोजना में EV चार्जिंग सिस्टम का डिजिटल ट्विन मॉडल तैयार किया जाएगा। यानी-चार्जिंग स्टेशन का वर्चुअल क्लोन, जो रियल टाइम में बतायेगा कि लोड कितना है? कितनी गाड़ियां चार्ज हो सकती हैं? कहां ओवरलोडिंग का खतरा है? चार्जिंग को कैसे तेज और सस्ती बनाई जाए? यह टेक्नोलॉजी विदेशों में तो है, भारत में अभी शुरुआत भी नहीं हुई। दो साल की अवधि वाली परियोजना स्वीकृत परियोजना का शीर्षक है इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग के लिए ग्रिड-इंटीग्रेटेड सोलर पीवी सिस्टम के उन्नत प्रबंधन हेतु डेटा फ्यूज़न के साथ डिजिटल ट्विन इंटीग्रेशन। दो साल की अवधि वाली यह परियोजना डिजिटल ट्विन तकनीक, उन्नत डेटा फ्यूजन, स्मार्ट सोलर पीवी सिस्टम और बुद्धिमान ईवी चार्जिंग प्रबंधन जैसे आधुनिक शोध क्षेत्रों पर काम करेगी। मैनिट की अंतरराष्ट्रीय पहचान को मिलेगा नया आयाम यह अनुदान न सिर्फ मैनिट की वैश्विक शोध प्रतिष्ठा को मजबूत करेगा, बल्कि संस्थान में अंतर्विषयक सहयोग और उन्नत तकनीकों पर शोध को नई दिशा देगा। परियोजना से मिलने वाले परिणाम भविष्य के स्वच्छ, स्मार्ट और सतत ऊर्जा समाधानों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। इस परियोजना से क्या बदल जाएगा? – भारत में EV चार्जिंग होगी तेज, सस्ती और स्मार्ट – सोलर ग्रिड होगा भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए तैयार – शहरी यातायात और ऊर्जा प्रबंधन होगा डिजिटल और स्वचालित – मैनिट की ग्लोबल पहचान नई ऊंचाई पर जाएगी  

देश की पहली क्वालिटी सर्टिफाइड लैब पंडरी IPHL, बलौदाबाजार बनी दूसरी—छत्तीसगढ़ का गौरव

रायपुर  छत्तीसगढ़ ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। जिला अस्पताल पंडरी रायपुर और जिला अस्पताल बलौदाबाजार की इंटिग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब (IPHL) को भारत सरकार के नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस कार्यक्रम (NQAS) के अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर का गुणवत्ता प्रमाणपत्र प्राप्त हुआ है। इनमें पंडरी रायपुर की IPHL देश की प्रथम, जबकि बलौदाबाजार की IPHL देश एवं राज्य की द्वितीय प्रमाणित लैब बनी है। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और वैज्ञानिक मानकों पर आधारित लैब सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण को प्रमाणित करती है। राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा निरंतर किए जा रहे प्रयासों का यह सीधा परिणाम है कि जनवरी 2024 से नवंबर 2025 के बीच राज्य की कुल 832 स्वास्थ्य संस्थाओं का राष्ट्रीय मानकों के आधार पर मूल्यांकन और प्रमाणीकरण किया गया है। इनमें दंतेवाड़ा के दूरस्थ क्षेत्र चिंतागुफा जैसे दुर्गम इलाकों के स्वास्थ्य केंद्र भी शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि देश में पहली बार किसी राज्य में लैब्स की इतनी बड़ी और व्यवस्थित श्रृंखला का मूल्यांकन एवं प्रमाणीकरण हुआ है, जिसने छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट स्थान दिलाया है। दोनो लैब्स का मूल्यांकन भारत सरकार, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा नामित विशेषज्ञ मूल्यांकनकर्ताओं की टीमों ने किया। पंडरी रायपुर की IPHL का मूल्यांकन 10 सितंबर 2025, जबकि बलौदाबाजार की IPHL का मूल्यांकन 11 सितंबर 2025 को किया गया। दोनों टीमों ने लैब की कार्यप्रणाली, मरीज केंद्रित सेवाएँ, गुणवत्ता नियंत्रण, समयबद्ध रिपोर्टिंग और सुरक्षा प्रक्रियाओं की गहन समीक्षा की। मूल्यांकन उपरांत, पंडरी रायपुर IPHL को 90% और बलौदाबाजार IPHL को 88% स्कोर के साथ प्रमाणन प्राप्त हुआ। यह स्कोर स्वास्थ्य गुणवत्ता के राष्ट्रीय मानकों में उत्कृष्ट श्रेणी में आता है। इंटिग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब की अवधारणा का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मरीजों को एक ही छत के नीचे पैथोलॉजी, बायोकैमिस्ट्री और माइक्रोबायोलॉजी से संबंधित सभी प्रकार की जांच सुविधाएं उपलब्ध हों। इससे न केवल जांच की गति और विश्वसनीयता बढ़ती है, बल्कि लोगों को महंगी निजी जांच लैब्स पर अनावश्यक निर्भरता से भी राहत मिलती है। एकीकृत मॉडल होने के कारण, मरीजों को एक ही स्थान पर किफायती और सटीक जांच रिपोर्ट उपलब्ध हो पाती है।

रोड एक्सीडेंट पर MP हाई कोर्ट की नाराज़गी, पुलिस को फटकार—ट्रैफिक कौन संभालेगा?

इंदौर   इंदौर में बढ़ते सड़क हादसों को लेकर हाई कोर्ट ने ट्रैफिक पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े किए. शहर के एयरपोर्ट रोड पर करीब 2 माह पहले बेलगाम ट्रक ने कई लोगों को कुचल दिया था. इस मामले में दायर याचिका पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में सुनवाई चल रही है. हाई कोर्ट की सुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इंदौर पुलिस कमिश्नर पेश हुए. इस दौरान हाई कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर पर चालानी कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठाए. मामले की अगली सुनवाई 27 नवंबर को होगी. पहले ट्रैफिक रूल्स तुड़वाते हैं, फिर चालानी कार्रवाई हाई कोर्ट में चीफ जस्टिस संजीव सचदेव और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ द्वारा इस मामले की सुनवाई की जा रही है. सुनवाई के दौरान पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह ने बताया "ट्रैफिक रूल्स तोड़ने वाले वाहन चालकों पर कार्रवाई की जा रही है." उन्होंने इसका ब्यौरा भी पेश किया. इस पर युगलपीठ ने कहा "आपकी पुलिस द्वारा पहले वाहन चालकों से नियम तुड़वाए गए और उसके बाद उनके खिलाफ चालानी कार्रवाई की गई." चालान काटने में लगी रहती है ट्रैफिक पुलिस हाई कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर से कहा "मुंबई में जाकर देखें, वहां पर बीच चौराहे पर पुलिसकर्मी नजर आता है लेकिन आपके इंदौर में पेड़ के पीछे जवान खड़े रहते हैं और वह ड्यूटी करने के दौरान सिग्नल तोड़ने वालों के चालान बनाने में लगे रहते हैं. आपको 31 दिसंबर तक चालानी कार्रवाई का टारगेट मिलता है. यदि 31 दिसंबर तक निश्चित संख्या में चालानी कार्रवाई नहीं हुई तो चालानी कार्रवाई बड़े स्तर पर की जाती है." इससे पहले भी कलेक्टर, कमिश्नर ,आरटीओ द्वारा कई प्लान बताए गए, उन प्लान में कई तरह की खामियां थी. इस पर कोर्ट ने आपत्ति ली है. भारी वाहनों की मनमानी पर पुलिस ने क्या किया कोर्ट ने इंदौर पुलिस कमिश्नर से पूछा "हादसा होने के बाद भी शहरी क्षेत्र में भारी वाहन घुस रहे हैं. ड्रिंक एंड ड्राइव के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, इस पर पुलिस क्या कार्रवाई कर रही है." इस पर पुलिस कमिश्नर ने बताया "भारी वाहनों के प्रवेश पर सख्ती जारी है. जरूरी सामान लाने ले जाने वाले वाहनों को अनुमति दी गई है." इंदौर शहर के ट्रैफिक को सुधारने के लिए लगातार वालेंटियर का भी सहयोग लिया जा रहा है. अब 27 नवंबर को एक बार फिर हाई कोर्ट के समक्ष सभी विभागों के अधिकारी उपस्थित होंगे और अभी तक ट्रैफिक सुधारने को लेकर क्या कदम उठाए हैं, इस बारे में जानकारी देंगे. ट्रक ने बरपाया कहर, 2 की मौत, 13 घायल हुए थे इंदौर के एयरपोर्ट रोड पर दो महीने पहले एक ट्रक अनियंत्रित हो गया था और उसने आधा दर्जन से अधिक वाहन चालकों को टक्कर मारी. इसमें दो लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 13 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे. इस घटना के बाद याचिका इंदौर हाई कोर्ट में हाई कोर्ट बार एसोसिशन के अध्यक्ष रितेश ईरानी द्वारा लगाई गई थी. वकील रितेश ईरानी के अनुसार याचिका पर लगातार सुनवाई चल रही है. 

किसानों और नागरिकों के हित में साय सरकार ने गाइडलाइन दरों की समीक्षा की

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के दूरदर्शी नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने पूरे राज्य के लिए गाइडलाइन दरों का व्यापक, वैज्ञानिक और तर्कसंगत पुनरीक्षण करते हुए ऐतिहासिक कदम उठाया है। यह निर्णय जनता के हित, पारदर्शिता, उचित बाजार मूल्यांकन और नागरिकों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। गाइडलाइन नियम 2000 के अनुसार दरों का प्रतिवर्ष पुनरीक्षण आवश्यक है, परंतु वर्ष 2017-18 के बाद से दरों में किसी प्रकार का संशोधन नहीं हुआ था। इस कारण वास्तविक बाजार मूल्य और गाइडलाइन दरों में भारी अंतर पैदा हो गया था—जिसका प्रतिकूल प्रभाव किसानों, भूमिस्वामियों, संपत्ति धारकों और आम नागरिकों पर पड़ रहा था। राज्य में गाइडलाइन दरों के पिछले ढांचे नगरीय क्षेत्रों में दरों में भारी विसंगतियाँ थीं। एक ही सड़क, वार्ड या आसपास के क्षेत्रों में अनुपातहीन अंतर दिखाई देता था। एक ही सड़क पर स्थित संपत्तियों की दरें अलग-अलग थीं, जिससे नागरिकों को वास्तविक मूल्यांकन में कठिनाई होती थी। ग्रामीण क्षेत्रों में भी एक ही मार्ग पर स्थित गाँवों की दरों में अतार्किक भिन्नता थी, जिससे किसानों को मुआवज़ा और बैंक लोन में नुकसान होता था। पिछले सात वर्षों में बने नए हाईवे, कॉलोनी, औद्योगिक क्षेत्र आदि की दरें निर्धारित नहीं थीं, जिससे नागरिकों को संपत्ति मूल्य जानने में कठिनाई हो रही थी। वाणिज्यिक कर (पंजीयन) मंत्री ओपी चौधरी के दिशानिर्देश पर गाइडलाइन दरों को पुर्ननिर्धारित करते हुए पूरी प्रक्रिया को वैज्ञानिक, पारदर्शी और जनसुलभ बनाया गया है। नगरीय क्षेत्रों में गाइडलाइन को रोड-वाइज तैयार किया गया है, ताकि एक सड़क और समान परिस्थितियों वाले क्षेत्रों की दरें समान हों। अत्यधिक कंडिकाओं को समायोजित कर संख्या कम की गई, ताकि नागरिकों को मूल्य समझने में सरलता हो। ग्रामीण क्षेत्रों में सभी गाँवों की दरों को नक्शे में प्रविष्ट कर, समान मार्ग और समान परिस्थितियों वाले गाँवों की दरें यथासंभव समान और तर्कसंगत की गईं।वर्तमान दरों की वैज्ञानिक मैपिंग कर रैशनलाइज़्ड बेस रेट तैयार किए गए और इन्हीं के आधार पर नई दरें प्रस्तावित की गईं है। नवीन दरें – जनता को सीधा लाभ नगरीय क्षेत्रों में लगभग 20% की तर्कसंगत वृद्धि की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के हित में दरों में 50% से 300% तक वृद्धि की गई है—जिससे किसानों को भूमि अधिग्रहण आदि में 3 गुना तक अधिक मुआवज़ा मिलेगा। नवीन दरों से किसानों/भूमिस्वामियों को उनकी भूमि का अधिक एवं न्यायसंगत मुआवज़ा प्राप्त होगा। संपत्ति के विरुद्ध बैंक से अधिक राशि का लोन स्वीकृत होगा। आम नागरिकों के लिए अपनी संपत्ति की गाइडलाइन दर स्पष्ट और समझने में आसान होगी। वाणिज्यिक कर (पंजीयन) मंत्री ओ. पी. चौधरी ने कहा कि गाइडलाइन दरों का यह व्यापक और वैज्ञानिक पुनरीक्षण जनता के हितों को सर्वोपरि रखते हुए पूरी पारदर्शिता के साथ किया गया है। उन्होंने कहा कि 2017-18 के बाद दरों में संशोधन न होने से राज्य में वास्तविक बाजार मूल्य और गाइडलाइन दरों में गंभीर असंतुलन पैदा हो गया था, जिससे किसान, भूमिस्वामी और सामान्य नागरिक प्रतिकूल रूप से प्रभावित हो रहे थे। नई गाइडलाइन दरें रोड-वाइज और वैज्ञानिक मैपिंग के आधार पर तैयार की गई हैं, ताकि हर क्षेत्र में दरें तर्कसंगत, समान और समझने में सरल हों। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में 50% से 300% तक की वृद्धि किसानों को उचित मुआवज़ा और अधिक बैंक लोन प्राप्त करने में बड़ा लाभ देगी, नगरीय क्षेत्रों में 20% की तार्किक वृद्धि मूल्य-विसंगतियाँ दूर करेगी। चौधरी ने कहा कि विभाग भविष्य में भी विकास, नई बसाहटों, बाजार प्रवृत्तियों और क्षेत्रीय आवश्यकताओं के आधार पर नियमित समीक्षा करता रहेगा, ताकि किसी भी नागरिक को उनकी संपत्ति के वास्तविक मूल्य से वंचित न होना पड़े। उल्लेखनीय है कि लंबे अंतराल के बाद गाइडलाइन दरों का यह व्यापक और महत्त्वपूर्ण संशोधन किया गया है। भविष्य में भी विभाग द्वारा जिले स्तर पर उस क्षेत्र में हो रहे विकास, नए निर्माण, क्षेत्रीय परिस्थितियों, बाजार प्रवृत्तियों तथा नई बसाहटों/कॉलोनियों के विस्तार का नियमित आकलन किया जाता रहेगा। इसी आधार पर गाइडलाइन दरों में समय-समय पर आवश्यक, तर्कसंगत और जनहितकारी संशोधन किए जाते रहेंगे, ताकि नागरिकों को उनकी संपत्ति के वास्तविक मूल्य का लाभ निर्बाध रूप से मिलता रहे और किसी भी प्रकार की मूल्य-विसंगतियाँ उत्पन्न न हों। "गाइडलाइन दरों का वैज्ञानिक और तर्कसंगत पुनरीक्षण राज्य के किसानों, भूमिस्वामियों और आम नागरिकों के हित में उठाया गया अत्यंत महत्त्वपूर्ण कदम है। पिछले कई वर्षों से दरों में संशोधन न होने के कारण वास्तविक बाजार मूल्य और गाइडलाइन दरों में बड़ा अंतर पैदा हो गया था। नई दरें न केवल न्यायसंगत मूल्यांकन सुनिश्चित करेंगी, बल्कि किसानों को भूमि अधिग्रहण में अधिक मुआवज़ा, नागरिकों को संपत्ति का सही मूल्य और बैंक से अधिक ऋण प्राप्त करने में भी सहायता प्रदान करेंगी। शासन की मंशा स्पष्ट है—हर नागरिक को उसकी संपत्ति का उचित मूल्य मिले और किसी भी प्रकार की विसंगतियाँ या भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो। यह निर्णय प्रदेश के आर्थिक परिवेश को अधिक पारदर्शी, संतुलित और जनहितकारी बनाएगा।" – CM विष्णु देव साय