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झारखंड की जेलों में छठ महापर्व की रौनक, बंदियों ने उठाया आस्था का संकल्प

रांची झारखंड की सभी जेलों में इस साल भी छठ महापर्व की विशेष तैयारियां की गई हैं। जेलों में व्रत करने वाले बंदियों के लिए पूजा सामग्री और अर्घ्य की व्यवस्था जेल प्रबंधन की ओर से की गई है। बंदियों के लिए की गई अर्घ्य की व्यवस्था राज्य भर के कारागारों में छठ की भक्ति में बंदी डूबे हुए हैं, जहां पुरुष बंदियों की संख्या महिलाओं से ज्यादा है। झारखंड कारा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की विभिन्न जेलों में कुल 25 महिला और 31 पुरुष बंदी इस वर्ष छठ का व्रत कर रहे हैं। रांची स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में सबसे अधिक 08 महिला और 08 पुरुष बंदी आराधना में लीन हैं। इनके लिए विशेष रूप से पूजन सामग्री उपलब्ध कराई गई है और अर्घ्य देने की व्यवस्था की गई है। भक्तिमय वातावरण में डूबा हुआ कारा परिसर इसी तरह केंद्रीय कारा दुमका में 02 महिलाएं, हजारीबाग के लोकनायक जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा में 05 महिला और 07 पुरुष, जबकि पलामू में 04 महिला और 06 पुरुष बंदी श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना कर रहे हैं। अन्य जिलों की जेलों में भी श्रद्धा और सादगी के साथ व्रत किया जा रहा है। जेल अधीक्षक स्वयं व्यवस्था पर नजर रखे हुए हैं। कारा परिसर इन दिनों पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में डूबा हुआ है।  

इलाज में लापरवाही का आरोप, छिंदवाड़ा अस्पताल में महिला की मौत से मचा हड़कंप

छिंदवाड़ा छिंदवाड़ा जिला अस्पताल में पेट दर्द और घबराहट के बाद भर्ती कराई गई महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई। मौत को लेकर स्वजनों ने जमकर हंगामा कर दिया। परिजनों ने डॉक्टरों पर गंभीर आरोप लगाए है। परिजनों का कहना है की पहले तो नर्स ने इलाज किया। उसके बाद डॉक्टर पहुंचे। उन्होंने जांच कर पर्ची में दवा लिख दी। रात भर एक के बाद एक लगातार ग्लूकोज की बॉटल लगाते गए, लेकिन मरीज को आराम नहीं लगा। जब डियूटी नर्स को मरीज की गंभीर हालात के बारे में बताया और कहा कि हमारे मरीज को रेफर कर दीजिए। पहले तो उन्होंने हमारे साथ अभद्रता की। उन्होंने रेफर करने में घंटे लगाए। इस दौरान मरीज ने सुबह 9 बजे दम तोड़ दिया। परिजनों का कहना है जब तक प्रशासन और डॉक्टर मौके पर नहीं आएगा हम अस्पताल के सामने शव रखकर प्रदर्शन करेंगे। परिजनों ने स्पष्ट कहा है कि डॉक्टरों की और नर्सों की लापरवाही पर कार्रवाई होना चाहिए। इसके बाद मौके पर पुलिस प्रशासन पहुंचा। पुलिस प्रशासन ने परिजनों को समझाइस दी। इधर सिविल सर्जन और आरएमओ भी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने पीड़ित परिजनों की पूरी बात सुनी। इसके बाद पीड़ित परिजन पीएम के लिए राजी हुए। हालांकि परिजनों का कहना है कि जब तक कलेक्टर एसडीएम मौके पर आकर नहीं मिलते तब तक हम सब का पीएम नहीं करवाएंगे। पीएम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के असली कारणों का खुलासा हो सकेगा। गांव में उल्टी दस्त का प्रकोप अमरवाड़ा के ग्राम रजोला में 10 दिन पूर्व दूषित पानी पीने से 200 से अधिक ग्रामीण उल्टी दस्त का शिकार हुए थे इसके बाद मौके पर प्रशासन और स्वास्थ्य अमला पहुंचा था। स्वास्थ्य अमले ने इलाज कर खाना पूर्ति कर दी। धनराज चंद्रवंशी का आरोप है कि गांव में आज भी उल्टी दस्त का प्रकोप है प्रशासन ने कोई इलाज नहीं करवाया है और हमारी जो मरीज की मौत हुई है वह उल्टी दस्त के कारण हुई है।

हरियाणा में बढ़ता नशा: सुरजेवाला ने BJP सरकार पर किया कड़ा हमला

चंडीगढ़  कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सदस्य रणदीप सिंह सुरजेवाला ने हरियाणा में बढ़ते नशे के प्रसार पर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि नायब सरकार के नकारेपन की हरी झंडी तले नशा तस्कर और माफिया हरियाणा को ‘उड़ता हरियाणा’ से ‘उजड़ता हरियाणा’ बना चुके हैं। सुरजेवाला ने तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सिर्फ साइकिल पर फोटो खिंचवाने तक सीमित हैं, जबकि नशे का जहर अब हर गांव, हर शहर और हर घर की दीवारों में रिस चुका है। सुरजेवाला ने कहा कि हरियाणा का युवा आज नशे की गिरफ्त में जकड़ा हुआ है। नशे की लत इतनी भयावह हो चुकी है कि ममता भी मर रही है। माताएं अपने छह माह के बच्चों को बेचने तक मजबूर हैं। गांवों और शहरों में नशे की ओवरडोज से सैकड़ों युवाओं की रोज मौत हो रही है। उन्होंने कहा कि अब हालात इतने बदतर हैं कि पिता अपने बेटे की लाश पर रोते हुए कहते हैं – ‘मेरा बेटा तो गया, अब औरों को बचाओ।’ सुरजेवाला ने कहा – हरियाणा नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की रिपोर्ट खुद कहती है कि प्रदेश के 860 कुख्यात नशा तस्करों में से 730 जेल से बाहर खुलेआम घूम रहे हैं। ये माफिया सरकार की नाक के नीचे धड़ल्ले से नशा बेच रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की कागजों पर नशा मुक्ति असल में भाजपाई युक्ति बन गई है, जहां सरकार दावा करती है कि प्रदेश के 3,000 से अधिक गांव और 600 से अधिक वार्ड नशामुक्त हैं, लेकिन असलियत में वहीं ड्रग पेडलर खुलेआम कारोबार चला रहे हैं।   खेत से खलिहान तक फैल रहा नशे का जाल सुरजेवाला ने कहा कि नशे का यह जहर अब केवल समाज को नहीं, बल्कि हरियाणा के वर्तमान और भविष्य दोनों को निगल रहा है। खेती, मजदूरी, खेल – हर क्षेत्र में नशे का असर दिख रहा है। यह युवा शक्ति को अपराध, चोरी और अंधकार की ओर धकेल रहा है। कांग्रेस नेता ने कहा कि जब हरियाणा का नौजवान नशे से मर रहा है, तब मुख्यमंत्री ‘जुबानी हवाबाजी’ और ‘फोटोशूट राजनीति’ में व्यस्त हैं। भाजपा सरकार नशे के खिलाफ नहीं, नशे के साथ खड़ी दिख रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हरियाणा को ‘उजड़ते हरियाणा’ से ‘बचते हरियाणा’ की राह पर लाने के लिए संघर्ष जारी रखेगी।

पुलिस हिरासत में प्रताड़ना के मामले में HHRC का सख्त कदम, DGP और स्वास्थ्य प्रमुख को किया नोटिस

चंडीगढ़  हरियाणा मानव अधिकार आयोग (HHRC) ने पुलिस हिरासत में प्रताड़ना के एक गंभीर मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए हरियाणा पुलिस महानिदेशक (DGP) और स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक से विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने निर्देश दिया है कि इस मामले की गहराई से जांच कर 17 दिसंबर तक रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। यह निर्देश आयोग के सदस्य दीप भाटिया ने शिकायत संख्या 1037/10/2023 के अंतर्गत जारी किए। इस दौरान शिकायतकर्ता के पिता धर्म सिंह और सब-इंस्पेक्टर कृष्ण चंद (सीआईए-।।, करनाल) आयोग के समक्ष उपस्थित हुए। मामला एफआईआर संख्या 64 दिनांक 11 मार्च, 2023 से जुड़ा है। निसिंग पुलिस स्टेशन में भादंसं की धारा-379 और विद्युत अधिनियम की धारा-136 के तहत केस दर्ज किया गया था। इस प्रकरण की जांच सब-इंस्पेक्टर कृष्ण चंद द्वारा की गई थी। उन्होंने बताया कि शिकायतकर्ता लवदीप को 14 अप्रैल, 2023 को गिरफ्तार किया गया था और उसी दिन उसका चिकित्सकीय परीक्षण भी करवाया गया था। हालांकि आयोग के समक्ष प्रस्तुत चिकित्सकीय रिपोर्ट अस्पष्ट थी और पढ़ने योग्य नहीं थी। दस्तावेज़ों से यह प्रतीत हुआ कि उस रिपोर्ट में किसी नई चोट का उल्लेख नहीं किया गया था। चोटों की रिपोर्ट में विरोधाभास पर सवाल आयोग ने पाया कि 15 अप्रैल, 2023 को किए गए एमएलआर (मेडिकल लीगल रिपोर्ट) में कई चोटों का उल्लेख किया गया है, जिनकी अवधि 4 से 7 दिन पुरानी बताई गई। आयोग ने इस विरोधाभास पर प्रश्न उठाया कि जब 14 अप्रैल की रिपोर्ट में कोई चोट नहीं थी, तो फिर 15 अप्रैल की रिपोर्ट में पुरानी चोटें कैसे दर्ज हो गईं। इस प्रश्न पर जांच अधिकारी कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके। ‘सतही परीक्षण’ पर आयोग की नाराज़गी आयोग के समक्ष सब-इंस्पेक्टर कृष्ण चंद और निरीक्षक दिनेश कुमार (महानिदेशक जांच, आयोग) ने बताया कि पुलिस हिरासत में आमतौर पर डॉक्टर केवल उन्हीं चोटों का उल्लेख करते हैं जिनकी शिकायत आरोपी स्वयं करता है, और शरीर का संपूर्ण परीक्षण नहीं किया जाता। इस पर आयोग सदस्य दीप भाटिया ने कड़ी नाराज़गी व्यक्त करते हुए कहा कि यह दृष्टिकोण अत्यंत चिंताजनक है। हिरासत में प्रताड़ना मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है और ऐसे मामलों में लापरवाही अस्वीकार्य है। वरिष्ठ अधिकारी से जांच के आदेश मानवाधिकार आयोग ने पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिए हैं कि वे किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को इस मामले की गहन जांच के लिए नामित करें। उन्हें यह भी कहा गया है कि शिकायतकर्ता के साथ हुई कथित हिरासत प्रताड़ना तथा पुलिस की कार्यप्रणाली की पूरी समीक्षा कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। साथ ही, स्वास्थ्य सेवाएं हरियाणा के महानिदेशक को भी आदेश दिए हैं कि 14 अप्रैल और 15 अप्रैल, 2023 के दोनों चिकित्सकीय परीक्षणों की जांच कर अपनी रिपोर्ट 17 दिसंबर से पहले आयोग में प्रस्तुत करें।

Probation पूरा होना ही नहीं, परफॉरमेंस और आचरण भी तय करेंगे नौकरी की परमानेंटिटी: Chhattisgarh HC

बिलासपुर हाई कोर्ट ने एक सर्विस संबंधी मामले में महत्वपूर्व आदेश देते हुए कहा है कि सिर्फ परिवीक्षा अवधि (Probation period) पूरी होने पर स्थायीकरण और पदोन्नति का दावा अधिकार के रूप में नहीं किया जा सकता। प्रतिकूल कार्य एवं आचरण रिपोर्ट के आधार पर प्रमोशन दिया जाना, या नहीं देना भेदभाव नहीं माना जाएगा। प्रकरण के अनुसार हाई कोर्ट ने अनुवादक के पद को भरने के लिए विज्ञापन प्रकाशित किया था। अपीलकर्ता शैलेन्द्र सोनी और अन्य उम्मीदवारों ने पद के लिए आवेदन किया। परीक्षा के बाद अपीलकर्ता और अन्य प्रतिवादी को 29 फरवरी 2012 को अनुवादक के पद पर नियुक्त किया गया। प्रतिवादी अपीलकर्ता से कनिष्ठ था। दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि पूरी होने के बाद शैलेन्द्र के साथ के अन्य परिवीक्षा कर्मी को सात मार्च 2014 से पद पर स्थायी कर दिया गया। 27 जनवरी 2015 को उसको सहायक ग्रेड-1 के पद पर पदोन्नत किया गया। हालांकि अपीलकर्ता की सर्विस की उस समय पुष्टि नहीं की गई। देर से स्थायी होने के कारण प्रमोशन से वंचित शैलेन्द्र का अनुवादक के पद पर स्थायीकरण देर से हुआ। इस कारण उसके सहकर्मी को दी गई पदोन्नति के लिए वह अयोग्य हो गया। व्यथित होकर उसने 29 अप्रैल 2015 को एक अभ्यावेदन प्रस्तुत किया, जिसमें प्रतिवादी से अपनी वरिष्ठता बनाए रखने के लिए पूर्वव्यापी प्रभाव से स्थायीकरण और पदोन्नति का अनुरोध किया।अभ्यावेदन पर विचार नहीं किया गया। इस पर शैलेंद्र ने हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की। सिंगल बेंच ने 16 जुलाई 2025 को याचिका खारिज कर दी। इससे व्यथित होकर अपीलकर्ता कर्मचारी ने डिवीजन बेंच में अपील दायर की। कार्य और आचरण रिपोर्ट अलग-अलग, इसलिए भेदभाव नहीं डिवीजन बेंच ने सुनवाई के बाद सिंगल बेंच के निष्कर्ष को उचित माना, जिसमें कहा गया था कि कार्य और आचरण रिपोर्ट और एसीआर अलग-अलग हैं। हाई कोर्ट प्रशासन ने तर्क दिया कि मार्च 2014 में अपीलकर्ता की दो साल की परिवीक्षा अवधि पूरी होने पर उसके कार्य और आचरण पर रिपोर्ट अच्छी और औसत नहीं पाई गई।

मतदाता सुरक्षा बढ़ी, आयोग का बड़ा फैसला – EVM-VVPAT पर नए नियम लागू

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से निर्वाचन आयोग ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि किसी भी मतदान दल को सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बिना ईवीएम और वीवीपैट मशीनें नहीं सौंपी जाएंगी। इस नियम का पालन सुनिश्चित करने के लिए सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए गए हैं। कॉलेज और जिला स्कूल में बनाए गए हैं डिस्पैच सेंटर विधानसभा चुनाव की प्रशासनिक तैयारियां अब अंतिम चरण में हैं। विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के लिए MIT, RDS कॉलेज और जिला स्कूल में अलग-अलग डिस्पैच सेंटर बनाए गए हैं। आगामी 6 नवंबर को मतदान होना निर्धारित है। उससे एक दिन पहले यानी 5 नवंबर को मतदान कर्मी, पदाधिकारी और सुरक्षा बल बूथों के लिए रवाना होंगे। ये सभी दल डिस्पैच सेंटर से ईवीएम और अन्य आवश्यक मतदान सामग्री प्राप्त करेंगे। जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा है कि चुनाव की प्रक्रिया को पारदर्शी और जिम्मेदार बनाने के लिए बिना सुरक्षा बलों की उपस्थिति के किसी भी दल को ईवीएम या वीवीपैट उपलब्ध नहीं कराई जाएगी। काउंटर पर मौजूद पदाधिकारियों की जवाबदेही होगी कि वे केवल उन्हीं दलों को सामग्री दें जो सुरक्षा बलों के साथ पहुंचे हों। किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पीठासीन पदाधिकारी निभाएंगे ये जिम्मेदारी डिस्पैच सेंटरों पर मौजूद पीठासीन पदाधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि मतदान दल के साथ सुरक्षा बल हों। इसके बाद ही उन्हें मतदान सामग्री सौंपी जाएगी। सभी दलों को सामग्री प्राप्ति की पावती देनी होगी और उसे सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा। साथ ही वितरण रजिस्टर को भी लगातार अपडेट किया जाएगा ताकि भविष्य में कोई भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो। निर्वाचन प्रक्रिया को व्यवस्थित रखने के लिए प्रत्येक डिस्पैच सेंटर पर 20-20 काउंटर बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जरूरत पड़ने पर काउंटरों की संख्या बढ़ाई भी जा सकती है। मतदाता और कर्मियों की सुविधा के लिए हेल्पलाइन, सूचना सामग्री और पब्लिक एड्रेस सिस्टम की भी व्यवस्था की जा रही है। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए मजबूत बैरिकेडिंग और ड्राप गेट का निर्माण किया जा रहा है। वहीं, आपात स्थिति से निपटने के लिए सिविल सर्जन को एंबुलेंस, चिकित्सक, पारा मेडिकल स्टाफ और आवश्यक दवाइयों की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

कुछ दिन से लापता छात्र का शव मिला GGU तालाब में, कारण तलाश जारी

बिलासपुर छत्तीसगढ़ के गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी परिसर स्थित तालाब में मिली लाश लापता हुए छात्र की ही निकली. मृतक की पहचान छात्र असलम अंसारी के भाई अयूब अंसारी ने की है. इस मामले में एसएसपी रजनेश सिंह ने जांच के लिए 6 सदस्यीय जांच दल का गठन किया है. जानकारी के मुताबिक, जीजीयू परिसर स्थित एक तालाब में गुरुवार की शाम एक युवक की लाश मिली थी. शव को तालाब से बाहर निकालकर पुलिस ने मरच्यूरी में रखवाया था. इस बीच शुक्रवार को विवि परिसर में एक छात्र के दो दिनों से लापता होने की जानकारी सामने आने से सनसनी फैल गई. लापता छात्र के छोटे भाई को शिनाख्ती के लिए बुलाया गया. उसने टी शर्ट से अपने बड़े भाई के रूप में पहचान की. घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. वहीं सेंट्रल यूनिवर्सिटी की सुरक्षा भी संदेह के दायरे में है. अब पुलिस की  6 सदस्य टीम छात्र की मौत मामले में की जांच करेगी.

छठ पर्व की शुरुआत पर मुख्यमंत्री और राज्यपाल ने दी बधाई, कहा—छठी मैया सबकी मनोकामना पूर्ण करें

रांची झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने लोगों को लोक आस्था के महापर्व छठ के दूसरे दिन खरना पूजा पर शुभकामनाएं दी हैं। राज्यपाल गंगवार ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा, 'लोक आस्था और सूर्य उपासना के महापर्व छठ पूजा के द्वितीय अनुष्ठान ‘खरना' की सभी श्रद्धालुओं को हार्दिक शुभकामनाएं। छठी मैया और भगवान भास्कर की कृपा से हर घर में सुख, शांति और समृद्धि का प्रकाश फैले, यही मंगलकामना बहै।' वहीं, मुख्यमंत्री सोरेन ने अपने सोशल मीडिया पर लिखा, 'लोक आस्था और सूर्य उपासना के महापर्व छठ पूजा के दूसरे दिन खरना पूजा का अनुष्ठान, लोक-आस्था, आत्म-संयम, समर्पण और शुद्धता का अछ्वुत प्रतीक है। यह पर्व हमें प्रकृति, जल, सूर्य, परिवार और समाज के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की प्रेरणा देता है। छठ व्रतियों की तपस्या, श्रद्धा और संकल्प पूरे समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। मैं सभी छठ व्रतियों और परिवारजनों के इस अछ्वुत आत्मबल को नमन करता हूं। छठी मैया और भगवान भास्कर से प्रार्थना करता हूं कि वे सभी को उत्तम स्वास्थ्य, सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करें, आपकी मनोकामना पूर्ण करें। आप सभी को खरना पूजा की अनेक-अनेक बधाई, शुभकामनाएं और जोहार। जय छठी मैया! जय भगवान भास्कर!'  

हरियाणा: औरंगपुर गांव में पिता-पुत्र की हत्या, आरोपी बेटा अशोक पुलिस के हत्थे चढ़ा

झज्जर  झज्जर-गुरुग्राम मार्ग के गांव औरंगपुर (Aurangpur) में करीब ढाई माह पहले हुई पिता और बेटे की हत्या (Father-Son Murder) का खुलासा हुआ है। पुलिस ने आरोपी अशोक (Ashok) को गिरफ्तार कर तीन दिन के रिमांड पर लिया है। हत्या के शिकार 80 वर्षीय खजान सिंह (Khajan Singh) और उनके 30 वर्षीय बेटे संजय (Sanjay) थे। पुलिस के अनुसार, हत्या का कारण जमीनी विवाद (land dispute) था। इस दोहरे हत्याकांड को खजान सिंह के एक अन्य बेटे अशोक ने अंजाम दिया। डीसीपी क्राइम अमित दहिया (DCP Crime Amit Dahiya) ने प्रेस वार्ता में बताया कि आरोपी ने करीब ढाई माह पहले दोनों के शवों को मकान के पिछले हिस्से में खेत में जलाया और अवशेष को खुर्द-बुर्द करके जुताई कर दिया, ताकि कोई सबूत हाथ न लगे। हत्या का मुख्य कारण खजान सिंह की पुस्तैनी जमीन और खरीदी गई चार एकड़ भूमि बताया गया। अशोक को शक था कि पिता यह जमीन संजय के नाम कर सकते हैं। पुलिस ने बताया कि रिमांड के दौरान आरोपी से हत्या में इस्तेमाल हथियारों (weapons used in the murder) की बरामदगी और क्राइम सीन रिक्रिएट (crime scene recreation) की जाएगी। इसके अलावा जांच यह भी कर रही है कि और कौन-कौन लोग इस जघन्य अपराध में शामिल थे। उन्होंने बताया कि एक ही स्थान पर रहते हुए परिवार के अन्य लोगों ने इस मामले में ढाई माह तक चुप्पी आखिर क्यों साधे रखी यह जांच का विषय है। जैसे-जैसे जांच आगे बढे़गी तो मामले की सभी परतें भी खुलती चली जाएगी। उन्होंने आरोपी अशोक को मीडिया के सामने भी पेश किया। अशोक की गिरफ्तारी के बाद परिवार के अन्य सदस्यों पर भी पुलिस की नजर । डीसीपी ने कहा कि मामले की सभी परतें उजागर करने के लिए पूरी गंभीरता से जांच जारी है।

अबकी बार अंतागढ़: 20 नक्सलियों ने सुरक्षा बलों के समक्ष किया आत्मसमर्पण

कांकेर सुरक्षा बलों के लगातार बढ़ते दबाव और सरकार के बेहतर पुनर्वास नीति का असर एक बार फिर देखने को मिला है. आज अंतागढ़ क्षेत्र में सक्रिय 20 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है. अंतागढ़ के बर्रेबेड़ा गांव से 20 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है. यह एएसपी आशीष बंसोड और एसडीओपी शुभम तिवारी के प्रयासों का परिणाम है. कुछ दिन पहले कामतेड़ा कैंप में 50 नक्सलियों ने भी आत्मसमर्पण किया था. ताड़ोकी पुलिस नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने में जुटी है. नक्सलियों का समर्पण अंतागढ़ क्षेत्र के नक्सलमुक्त होने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.