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OBC आरक्षण पर भोपाल में बड़ी बैठक, कांग्रेस-सपा-आप समेत कई दल हुए शामिल

भोपाल  मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण मामले में 6 साल पहले कानून बन गया था। लेकिन अभी तक नौकरी में 27 फीसदी आरक्षण नहीं मिल पा रहा है। वहीं, आरक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट में घिरने के बाद सरकार ने इस समस्या का हल निकालना शुरू कर दिया है। ओबीसी आरक्षण पर हल खोजने के लिए सीएम हाउस में सर्वदलीय बैठक बुलाई गई। सभी पार्टी के नेताओं के बीच शुरू हुई चर्चा खत्म हो गई है। गुरुवार की सुबह मुख्यमंत्री निवास के समत्व भवन में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की अध्यक्षता में प्रदेश में ओबीसी के सदस्यों को आरक्षण के संबंध में सर्वदलीय बैठक हुई। इस बैठक में सभी दलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। साथ ही ओबीसी आरक्षण मुद्दे पर खुलकर चर्चा की। सर्वदलीय बैठक में ये नेता हुए शामिल इस बैठक में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव, कमलेश्वर पटेल और सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट रामेश्वर ठाकुर, वरुण ठाकुर, समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मनोज यादव, आम आदमी पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष रानी अग्रवाल मंत्री प्रहलाद पटेल जैसे मध्य प्रदेश ओबीसी आयोग के अध्यक्ष रामकृष्ण कुसुमरिया मंत्री कृष्णा गौर जैसे दिग्गज नेता मौजूद रहे। चिंताएं और आवश्यकताएं हुई स्पष्ट इस बैठक में सभी नेताओं ने अपने-अपने मत सरकार को दिए। बैठक के दौरान विभिन्न दलों ने अपनी चिंताओं और आवश्यकताओं को स्पष्ट किया। इसके चलते मुद्दे पर दलों के बीच गहन विचार विमर्श हुआ। सीएम की अध्यक्षता में हुई इस बैठक से आरक्षण मुद्दे में आगे की नीतिगत दिशा तय करने में सहायता मिलेगी। इस बैठक का मूल उद्देश्य ही सभी दलों के विचारों को सुनना और सामंजस्यपूर्ण समाधान निकालना था। सीएम डॉक्टर मोहन यादव ने कहा कि हमारी सरकार तो हमेशा से ही ओबीसी को 27% आरक्षण देना चाहती है लेकिन सुप्रीम कोर्ट में मामला होने की वजह से कुछ समस्याएं आ रही थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मुद्दे का हाल सभी दल मिलकर निकालेंगे। इससे समन्वय की स्थिति बनेगी और ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने की राह आसान हो जाएगी। जीतू पटवारी ने किए तीखे सवाल बैठक शुरू होने से पहले मीडिया से बात करते हुए जीतू पटवारी ने कहा कि जिन लोगों ने गड़बड़ की, क्या उनको सजा मिलेगी? पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव, बीजेपी सरकार ने कांग्रेस द्वारा दिए आरक्षण को क्यों रोका? नेता प्रतिपक्ष उमार सिंघार का तंज वहीं, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि 6 साल पहले कमल नाथ की सरकार में आदेश हुआ था। अध्यादेश भी आया था। इस तरह से पुराने घर में नारियल फोड़कर 27 प्रतिशत आरक्षण का गृह प्रवेश कर रहे हैं। सर्वदलीय बैठक की आवश्यकता तब पड़ती है जब विवाद हो, आपस में समन्वय न हो। कांग्रेस तो पहले से ही तैयार है। कांग्रेस ही अध्यादेश और कानून लेकर आई थी। क्या बोले अन्य पार्टी के नेता समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ मनोज यादव ने कहा पिछड़े वर्ग को आबादी के हिसाब से 52 प्रतिशत आरक्षण मिलना चाहिए। लेकिन सरकार 14 प्रतिशत दे रही है। 13 प्रतिशत होल्ड आरक्षण तत्काल प्रभाव से लागू करें। वहीं, आम आदमी पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष रानी अग्रवाल ने कहा कि 27 प्रतिशत आरक्षण तो प्रदेश में लागू हो गया था। यह ओबीसी का हक है और उसे मिलना ही चाहिए। केंद्र-राज्य में बीजेपी सरकार है। चाहे तो 27 प्रतिशत आरक्षण हो सकता है पर वह लटकाए हुए हैं।

बनारस में गंगा-वरुणा का प्रकोप, एक मंजिल तक जलमग्न हुए घर

वाराणसी वाराणसी में गंगा के पलट प्रवाह से वरुणा में आई बाढ़ ने हाहाकार मचा दिया है। कई घर एक मंजिल तक डूब गए हैं। हालांकि राहत की बात यही है कि कई दिनों के बाद गुरुवार की सुबह गंगा स्थिर हो गई हैं। जलस्तर चेतावनी बिंदु को तो बुधवार की सुबह ही पार कर गया था लेकिन खतरे के निशान से करीब 30 सेंटीमीटर नीचे पानी स्थिर हो गया है। इससे लोगों ने राहत की सांस ली है। हालांकि अभी गंगा के घटने का तो कोई संकेत नहीं मिल रहा है। सरकारी बुलेटिन के अनुसार भी वाराणसी में शुक्रवार को गंगा के लेवल खतरे के निशान को पार करते हुए 71.4 मीटर तक जाने की आशंका जताई गई है। फिलहाल जलस्तर 70.92 मीटर पर स्थिर हुआ है। यहां चेतावनी बिंदु 70.262 और खतरे का निशान 71.262 है। सोमवार को दस सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ रहा जलस्तर बुधवार को तीन सेमी तक गिर गया था। इसके बाद बुधवार की देर रात रफ्तार केवल एक सेमी प्रतिघंटे रह गई। अब स्थिर हो गया है। गंगा में वेग से वरुणा के बेसिन में बने मकान पूरी तरह से पानी में घिर गए हैं। आपदा नियंत्रण कंट्रोल रूम के मुताबिक बाढ़ राहत शिविरों में मंगलवार को वरुणा किनारे के 26 परिवारों के 108 लोग और बुधवार को 483 परिवारों के 2080 लोग पहुंचे। दो दिन में कुल 509 परिवारों के 2188 सदस्य राहत शिविरों में शिफ्ट हुए हैं। बढ़ाव के कारण गंगा का रुख अब तटवर्ती घाटों और किनारों पर बसी कॉलोनियों की ओर होने लगा था। वरुणा के पानी ने आबादी की ओर रुख करते हुए पुरानापुल इलाके के चार दर्जन घरों में बाढ़ को अपनी आगोश में ले लिया था।   वरुणा किनारे रहने वाले सैकड़ों परिवारों की मुसीबतें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। इस सीजन में यह तीसरी बार है जब पानी बढ़ने से लोगों को घर खाली करने पड़ रहे हैं। लोग सुरक्षित जगह पलायन कर रहे हैं। अभी अपने घरों में शिफ्ट हुए लोगों को 15 दिन भी नहीं हुए कि उन्हें फिर अपना घर छोड़ने को मजबूर होना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को हो रही है। सिर में गठरी लेकर और गोद में बच्चों को लेकर वह सुरक्षित स्थान पर पलायन करने को मजबूर हैं। गंगा में वृद्धि से चिरईगांव के ढाब सहित किनारे बसे गांवों के किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हालांकि ढाब के किनारे स्थित सोता में पानी अभीं भी दोनों तटों तक सीमित है लेकिन नालों के माध्यम से निचली भूमि पर तेजी से फैल रहा है। बुधवार शाम तक ढाब क्षेत्र में रामपुर की दलित बस्ती पानी से घिर गई। राजस्व कर्मियों के साथ बीडीओ वीरेन्द्र नारायण द्विवेदी मौके पर पहुंचे और प्रभावित आठ परिवारों के 50 सदस्यों को रामपुर प्राथमिक विद्यालय में बने बाढ़ राहत शिविर में पहुंचाया। नाले के रास्ते सोता के इस पार छितौना और जाल्हूपुर के निचले हिस्से में भी पानी भरना शुरू हो गया है। गांव के प्रभावित किसान लालजी यादव, सत्येन्द्र, चन्द्र शेखर, महेंद्र,राम अशीष,कमला, जयगोविंद आदि ने बताया कि पिछली बाढ़ हटने के बाद धान की फसलों में निकल रहे कल्ले भी इस बार चौपट हो जाएंगे। उधर, रोहनिया क्षेत्र के बेटावर गांव में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे घुसने लगा है। पहले आई बाढ़ से धान की फसल खराब हो गई थी। अब इसी तरह से बढ़ाव रहा तो धान की फसल व मवेशियों के हरे चारे पूरी तरह नष्ट हो जाएंगे। लेखपाल आलोक पाठक ने बताया कि अभी गांव के निचले हिस्से में पानी है रोड पर नहीं आया है लेकिन बढ़ाव तेजी से हो रहा है गांव का मौका-मुआयना किया गया है। बाढ़ के हालात पर नजर बनी हुई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 29 अगस्त को दो दिनी दौरे पर वाराणसी आ रहे हैं। वे यहां मॉरीशस प्रधानमंत्री के आगमन की तैयारी और बाढ़ से बचाव एवं राहत कार्यों का जायजा लेंगे। मुख्यमंत्री शाम करीब 4:30 बजे प्रतापगढ़ से हेलीकॉप्टर से पुलिस लाइन आएंगे। यहां से सर्किट हाउस जाएंगे। आधे घंटे विश्राम के बाद सवा पांच बजे से मॉरीशस प्रधानमंत्री के 11 सितंबर की बनारस में प्रस्तावित द्विपक्षीय बैठक और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों की तैयारी की समीक्षा करेंगे। बैठक के पश्चात वह काशी विश्वनाथ और कालभैरव मंदिर में दर्शन-पूजन करने जाएंगे।  

प्रभारी सचिव बाढ़ प्रभावित जिलों का भ्रमण कर राहत कार्यों का करें निरीक्षण : मुख्यमंत्री साय

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर संभाग के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के प्रत्येक बाढ़ प्रभावित परिवार तक हर संभव मदद उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित परिवारों की पीड़ा को शीघ्र कम करना प्रशासन की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि लोगों को यह महसूस होना चाहिए कि संकट की इस घड़ी में प्रशासन उनके साथ मजबूती से खड़ा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बस्तर संभाग के बाढ़ प्रभावित जिलों—बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा के कलेक्टरों व वरिष्ठ अधिकारियों से राहत एवं पुनर्वास कार्यों की विस्तृत समीक्षा के दौरान यह निर्देश दिए। मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों को निर्देशित किया  कि बाढ़ से हुई जनहानि और पशुहानि प्रभावित परिवारों को राहत राशि बिना विलंब के उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त आवासों के सुधार हेतु तिरपाल, बाँस-बल्ली और राहत राशि का वितरण प्राथमिकता से किया जाए। मुख्यमंत्री ने  कहा कि बाढ़ प्रभावित जिलों के प्रभारी सचिव अपने-अपने जिलों का भ्रमण करें और राहत कार्यों का सतत पर्यवेक्षण सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि प्रभावित गाँवों से सड़क संपर्क बहाल करने, क्षतिग्रस्त पुल-पुलियों की मरम्मत और बिजली आपूर्ति पुनर्स्थापना का कार्य युद्धस्तर पर किया जाए। उन्होंने कहा कि बस्तर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की शीघ्र बहाली राहत कार्यों की सफलता की कुंजी है। समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव अमिताभ जैन और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह भी उपस्थित थे। मुख्य सचिव जैन ने कलेक्टरों से कहा कि यदि उन्हें  शासन स्तर से अतिरिक्त सहयोग की आवश्यकता हो तो वे तुरंत प्रस्ताव भेजें, ताकि शासन स्तर पर शीघ्र निर्णय लिया जा सके। मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह ने कलेक्टरों को निर्देश दिया कि राहत शिविरों में भोजन, कपड़े और सूखा राशन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही, उन्होंने कहा कि राहत शिविरों और प्रभावित गाँवों में स्वास्थ्य शिविर और शुद्ध पेयजल की उपलब्धता भी अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए। बैठक के प्रारंभ में राजस्व सचिव रीना बाबासाहेब कंगाले ने मुख्यमंत्री को बस्तर में बाढ़ की स्थिति और अब तक किए गए राहत कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सभी बाढ़ प्रभावित जिलों को अतिरिक्त राशन का आबंटन भी कर दिया गया है और सामग्री प्रभावित परिवारों तक पहुँचाई जा रही है। इसके उपरान्त मुख्यमंत्री साय ने चारों जिलों के कलेक्टरों से सीधे संवाद कर उनके-अपने जिलों में चल रहे राहत एवं पुनर्वास कार्यों की प्रगति के बारे में जानकारी ली। कलेक्टरों ने बताया कि अब अधिकांश बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में पानी उतरने लगा है और स्थिति नियंत्रण में है। समीक्षा बैठक में बताया गया कि वर्तमान में प्रशासन का पूरा ध्यान राहत और पुनर्वास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने पर केंद्रित है। समीक्षा बैठक में लोक निर्माण विभाग के सचिव कमलप्रीत सिंह, बस्तर संभाग के आयुक्त डोमन सिंह और पुलिस महानिरीक्षक पी. सुन्दरराज उपस्थित थे।

उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने वैष्णोदेवी में हुई दुर्घटना पर शोक व्यक्त किया

भोपाल  उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने वैष्णोदेवी में हुए भू-स्खलन की घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया। इस दुर्घटना में मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ विधानसभा क्षेत्र के ग्राम भीलखेडी से गये तीर्थ यात्रियों के घायल होने और तीन लोगों की मृत्यु की जानकारी प्राप्त हुई है। देवड़ा ने दिवंगतों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए  घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ और सकुशल रहने की प्रार्थना की है। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने घटना को लेकर मंदसौर कलेक्टर से चर्चा कर हर संभव मदद करने के लिये निर्देशित किया है।

सर्वसम्मति से पास हुआ प्रस्ताव: शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की सिफारिश

रांची दिशोम गुरु शिबू सोरेन को भारत रत्न देने का प्रस्ताव गुरुवार को मानसून सत्र के आखिरी दिन विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित हो गया। झारखंड सरकार के समाज कल्याण मंत्री दीपक बिरुआ ने सदन में शिबू सोरेन को भारत रत्न देने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि, शिबू सोरेन ने झारखंड आंदोलन के लिए अपना जीवन तमाम कर दिया। उनके संघर्ष से नया राज्य और नई पहचान मिली। मंत्री ने कहा कि 4 अगस्त को उनका निधन हो गया। प्रस्ताव करता हूं कि उन्हें भारत रत्न देने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा जाए। भारत रत्न के प्रस्ताव पर बोलते हुए नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि हम संकल्प के साथ हैं। उन्होंने मांग रखी कि झारखंड आंदोलन के प्रणेता और झारखंड आंदोलन की नींव रखने वाले मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा और विनोद बिहारी महतो का नाम जरूर जोड़ें। वहीं संसदीय कार्य मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने सुझाव दिया कि प्रस्ताव में यह बात जोड़ी जाए कि भारत की आजादी में आदिवासी समाज का बहुमूल्य योगदान है। लेकिन आदिवासी समाज के किसी आंदोलनकारी, राजनीतिज्ञ, बुद्धिजीवी को आज तक भारत रत्न नहीं मिला। ऐसे में शिबू सोरेन को भारत रत्न दिया जाए, यह जरूर जोड़ा जाए। प्रस्ताव पर स्वीकार रबीन्द्रनाथ महतो में सदन के समक्ष रखा। जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया। बता दें कि झारखंड आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाने वाले दिशोम गुरू शिबू सोरेन का लंबी बीमारी के बाद 4 अगस्त को सर गंगाराम अस्पताल में निधन हो गया था। उनके निधन के बाद पार्थिव शरीर को झारखंड लाया गया और इसके बाद उनके पैतृक गांव नेमरा में अंतिम संस्कार किया गया था। उनके निधन के बाद से ही उन्हें भारत रत्न देने की मांग जोर पकड़ने लगी थी। गुरुवार को उनको भारत रत्न देने की मांग का प्रस्ताव विधानसभा में आया और सर्वसम्मति से उस प्रस्ताव को पारित कर दिया गया।  

पैलेस ऑन व्हील्स का नया अध्याय: निजी कंपनी करेगी संचालन, स्वर्णनगरी में 21 सितंबर को होगा आगमन

जयपुर देश की विभिन्न शाही रेलों में सबसे चर्चित और लोकप्रिय लग्जरी ट्रेन पैलेस ऑन व्हील इस सीजन की पहली यात्रा पर 21 सितंबर को जैसलमेर पहुंचेगी। यह ट्रेन 17 सितंबर को दिल्ली के सफदरजंग रेलवे स्टेशन से रवाना होकर जयपुर, सवाई माधोपुर, चित्तौड़गढ़ और उदयपुर होते हुए रविवार सुबह जैसलमेर पहुंचेगी। 26 जनवरी 1982 को शुरू हुई पैलेस ऑन व्हील का 41 साल बाद दो साल पहले निजीकरण कर दिया गया है। पहले रेलवे इसके संचालन और नवीनीकरण का जिम्मा संभालता था, लेकिन यात्रियों की घटती संख्या और लगातार घाटे के बाद अब इसकी कमान निजी कंपनी को सौंप दी गई है। ट्रेन को इस सीजन के लिए नया कलेवर दिया गया है। 41 बाथरूमों का रेनोवेशन किया गया है, बायो-टॉयलेट्स लगाए गए हैं, फर्नीचर और लाइटिंग बदली गई है तथा स्थानीय व्यंजनों को खाने के मेन्यू में शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य सैलानियों को एक बार फिर से शाही रेल का शाही अनुभव देना है। पैलेस ऑन व्हील की यात्रा हमेशा से विदेशी सैलानियों की पहली पसंद रही है लेकिन महंगे किराए और कोविड के प्रभाव से यात्रियों की संख्या लगातार गिरती गई। पांच साल पहले पूरे सीजन में केवल 3500 यात्री ही इसमें सवार हुए। कोविड से ठीक पहले यह संख्या 2500 से भी नीचे चली गई थी। स्थिति और बिगड़ने पर इसे दो साल तक बंद करना पड़ा। 2022 में इसे फिर से शुरू किया गया, लेकिन पूरे सीजन में केवल 11 फेरे ही हो पाए। इस बार निजी कंपनी के हाथों में संचालन सौंपने के बाद ट्रेन 33 फेरे करेगी। उम्मीद है कि बदलाव और नए शाही लुक के साथ पैलेस ऑन व्हील का पुराना आकर्षण एक बार फिर लौटेगा।

8 साल बाद आया न्यायालय का फैसला, नीरज सिंह मर्डर केस में सभी आरोपी बरी

रांची झारखंड में नीरज सिंह हत्याकांड में बीते बुधवार को धनबाद के न्यायालय ने झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह को आरोपों से बरी कर दिया है। न्यायालय ने इस मामले के सभी आरोपियों को नीरज सिंह हत्याकांड से बरी कर दिया। इससे पहले संजीव सिंह को स्ट्रेचर पर कोर्ट के अंदर ले जाया गया। पुलिस उन्हें एंबुलेंस में सिंह मेंशन से लेकर कोर्ट पहुंची थी। इसके पहले वकीलों को कोर्ट में प्रवेश नहीं करने देने पर वकीलों ने पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। हालांकि, थोड़ी देर बाद नारेबाजी बंद हो गयी। धनबाद की राजनीति को झकझोर देने वाले चर्चित पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह हत्याकांड में आज आठ साल, पांच महीने और पांच दिन बाद अदालत ने सभी आरोपियों को बरी किया है। जिला और सत्र न्यायाधीश 16 सह विशेष न्यायाधीश एमपी-एमएलए कोर्ट दुर्गेश चंद्र अवस्थी ने अपना फैसला सुनाते हुए पूर्व विधायक संजीव सिंह समेत सभी 10 आरोपियों को बरी कर दिया। इस फैसले में झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह, जैनेंद्र सिंह उर्फ पिंटू सिंह, डब्लू मिश्रा, विनोद सिंह, सागर सिंह उर्फ शिबू, चंदन सिंह, कुर्बान अली, पंकज सिंह और रणधीर धनंजय उर्फ धनजी सहित सभी आरोपियों को राहत मिली। ज्ञातव्य है कि 21 मार्च 2017 को धनबाद के तत्कालीन डिप्टी मेयर नीरज सिंह सहित तीन लोगों की हत्या कर दी गयी थी। नीरज सिंह के साथ जिन लोगों की हत्या की गयी थी उसमें अशोक यादव, चंद्र प्रकाश महतो उर्फ घोल्टू और मुन्ना तिवारी का नाम शामिल था। अशोक यादव नीरज सिंह के आप्त सचिव थे जबकि घोल्टू उनका ड्राइवर और मुन्ना तिवारी निजी बॉडीगार्ड था।  

हिंदू प्रेमियों के लिए अपना धर्म छोड़ा, रुखसाना और जास्मीन की नई पहचान

लखीमपुर खीरी  यूपी के लखीमपुर खीरी जिले में दो मुस्लिम बहनों ने हिंदू लड़कों से मंदिर में शादी रचा ली. हिंदू रीति-रिवाज से जास्मीन और रुखसाना बानो स्थानीय लड़कों रामप्रवेश और सर्वेश के साथ शादी के बंधन में बंध गईं. इनके बीच काफी समय से प्रेम प्रसंग चल रहा था. नाम बदलकर रुखसाना अब रूबी और जास्मीन चांदनी बन गई हैं. ये शादी इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है.  दरअसल, सोमवार को पड़ुआ थाना क्षेत्र के बैरिया गांव में दो मुस्लिम बहनें जास्मीन और रुखसाना बानो अपने प्रेमियों के घर पहुंच गईं. वे दोनों रविवार देर रात से वहीं मौजूद थीं और शादी की जिद पर अड़ी थीं. दोनों का गांव के ही एक ही परिवार के दो लड़कों- रामप्रवेश और सर्वेश से प्रेम संबंध था. दोनों बहनें बालिग हैं, जिसकी पुष्टि उनके शैक्षिक प्रमाणपत्रों से हुई.  जानकारी के मुताबिक, रविवार की देर रात दोनों बहनें अपने घर से चुपचाप निकलीं और सीधे रामप्रवेश और सर्वेश के घर पहुंच गईं. उनके अचानक पहुंचने से पूरे गांव में सनसनी फैल गई. गांव वाले और परिवार के लोग हैरान थे कि आखिर ये कैसे हुआ. खबर फैलते ही दोनों परिवारों में हलचल मच गई और लोग इस मामले को सुलझाने के लिए इकट्ठा हुए. गांव में तनाव का माहौल बन गया था, लेकिन दोनों बहनें अपने फैसले पर अडिग थीं.  सोमवार सुबह इस मामले को सुलझाने के लिए गांव के बुजुर्गों ने पंचायत बुलाई. सभी चाहते थे कि दोनों परिवारों के बीच कोई सहमति बन जाए, लेकिन कोई हल नहीं निकल सका. क्योंकि, दोनों बहनें अपनी बात पर अड़ी रहीं कि वे अपने प्रेमियों से ही शादी करेंगी. उनकी जिद के सामने पंचायत भी नाकाम रही. जब उनकी उम्र की जांच की गई तो शैक्षिक प्रमाणपत्रों के आधार पर पता चला कि दोनों बहनें बालिग हैं.  जब पंचायत में कोई बात नहीं बनी, तो दोनों बहनों और उनके प्रेमियों की खुशी के लिए हिंदू रीति-रिवाज से विवाह कराने का फैसला लिया गया. जास्मीन और रुखसाना ने अपना धर्म छोड़कर अपने प्यार को चुना. इस फैसले ने न सिर्फ दोनों परिवारों को बल्कि पूरे गांव को चौंका दिया है. 

विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन में असहमति, माले विधायक की तीखी टिप्पणी कांग्रेस पर

पटना बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी समर जारी है। ऐसे में दोनों गठबंधनों को दरार और फूट की बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है। महागठबंधन में दरार को लेकर एक खबर जोर पकड़ रही है। दरअसल,  सासाराम क्षेत्र के रोहतास जिले में कांग्रेस कमेटी द्वारा विभिन्न विधानसभा सीटों के लिए उम्मीदवारों से आवेदन लिए जाने को लेकर महागठबंधन के घटक दलों के बीच नया विवाद खड़ा हो गया है। जिले की काराकाट विधानसभा सीट से भाकपा माले के विधायक अरुण सिंह ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। गौरतलब है कि कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी की सदस्य एवं महाराष्ट्र की सांसद प्रीणीति शिंदे इन दिनों रोहतास समेत बिहार के अलग-अलग जिलों में जाकर कांग्रेस उम्मीदवारों से आवेदन ले रही हैं। कांग्रेस का व्यवहार गठबंधन धर्म के खिलाफ विधायक अरुण सिंह ने कहा कि कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी को महागठबंधन के अन्य घटक दलों वाली सीटों पर उम्मीदवारों के आवेदन नहीं लेने चाहिए। यह पूरी तरह से गठबंधन धर्म के खिलाफ है। कांग्रेस सिर्फ उन्हीं सीटों पर आवेदन लेने की हकदार है, जो उसके खाते में पहले से हैं। जिन विधानसभा सीटों पर पहले से ही राष्ट्रीय जनता दल या भाकपा माले के विधायक हैं, उन पर कांग्रेस अगर उम्मीदवारों से आवेदन ले रही है या चयन प्रक्रिया शुरू कर रही है तो यह बिल्कुल गलत है। कांग्रेस को ऐसा नहीं करना चाहिए। भाकपा माले को कम से कम 40 सीटें चाहिए अरुण सिंह ने कहा कि आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में भाकपा माले को गठबंधन में कम से कम 40 सीटें मिलनी चाहिए। पिछले विधानसभा चुनाव में 19 सीटों में से 12 पर जीत और लोकसभा चुनाव में 3 सीटों में से 2 सीटों पर जीत दर्ज की गई थी। इस आधार पर माले का स्ट्राइक रेट सबसे बेहतर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस को समझना चाहिए कि माले किसी भी हाल में अपनी जीती हुई सीट नहीं छोड़ेगी और हर जिले में माले को कम से कम एक-एक विधानसभा सीट मिलनी ही चाहिए। गठबंधन को होगा फायदा माले विधायक ने कहा कि बिहार में गरीबों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों का वोट हमेशा माले के साथ रहा है। माले की जितनी अधिक हिस्सेदारी होगी, गठबंधन को उतना अधिक फायदा होगा। उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी को राजद और माले विधायक वाली सीटों पर उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया रोकनी चाहिए। कांग्रेस को पिछली बार जिले में करगहर और चेनारी सुरक्षित सीट मिली थी, इसलिए उन्हें केवल इन्हीं सीटों के लिए उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया अपनानी चाहिए।

मध्यप्रदेश शिक्षक दिवस: दस शिक्षकों को मिलेगा खास सम्मान

भोपाल   शिक्षक दिवस पर शिक्षकों को सम्मान की आस है। मध्यप्रदेश के चार लाख शिक्षकों में से दस नामों का चयन किया जाएगा। ये राज्य स्तर पर सम्मान पाने वाले होंगे। इसके अलावा जिला स्तर पर नाम का चयन करने अलग कमेटी है। सम्मान पाने के लिए शिक्षकों से ऑनलाइन आवेदन जमा कराए गए थे। इन आवेदनों के आधार पर रिजल्ट आना बाकी है। राजधानी में शिक्षक दिवस पर आयोजन होगा। शिक्षा में बेहतर योगदान के शिक्षकों को पुरस्कार दिया जाएगा। इस पुस्कार के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने केटेगरी तय की है। इस केटेगरी के तहत शिक्षकों को अपने बायाडाटा सहित परफारमेंस अपडेट करना है। जानकारी विभाग ने ऑनलाइन मांगी है। एजुकेशन पोर्टल के माध्यम से आवेदन लिए गए है। इनमें नामों का चयन होगा। राज्य, जिला, ब्लॉक स्तर पर आयोजन शिक्षक दिवस पर राज्य जिला और ब्लॉक स्तर पर शिक्षक सम्मानित होंगे। इनका चयन शिक्षाविद् और अधिकारी करेंगे। विभाग ने आवेदन के लिए क्राइटेरिया तय किया है। प्रायमरी, मिडिल और हाई हायर सेकेंडरी केटेगरी में शिक्षक शामिल रहेंगे। वहीं, राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश से दो शिक्षकों का सम्मान होना है। इनमें एक प्रामयरी शिक्षक हैं। ये दमोह जिले से हैं। वहीं एक मिडिल स्कूल के शिक्षक का चयन हुआ है। ये आगरमालवा से हैं। शिक्षक सम्मान के लिए विभाग ने आवेदन मांगे हैं। तय केटेगरी के आधार पर शिक्षकों को जानकारी देनी। उच्च स्तर पर विशेषज्ञों की कमेटी है। जो नाम तय करेगी। नरेन्द्र अहिरवार, जिला शिक्षा अधिकारी