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ताऊ देवीलाल जयंती की112वीं जयंती पर अभय चौटाला का वार, कांग्रेस-भाजपा को घेरा

जींद   इंडियन नेशनल लोकदल (आईएनएलडी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभय सिंह चौटाला ने रोहतक में 25 सितंबर 2025 को होने वाली ताऊ देवीलाल की 112वीं जयंती के सम्मान समारोह की तैयारियों को लेकर खास बातचीत की। उन्होंने कहा कि पार्टी ने 90 विधानसभा क्षेत्रों में 27 बैठकें आयोजित की हैं, जिनमें 500 से 1500 कार्यकर्ता शामिल हुए। नरवाना की बैठक में 1000 जिम्मेदार कार्यकर्ता पहुंचे, जो पार्टी के प्रति उनके लगाव को दर्शाता है। कांग्रेस-भाजपा पर हमला अभय चौटाला ने कांग्रेस और भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस ने हमेशा आईएनएलडी को भाजपा की बी-टीम कहकर बदनाम किया, लेकिन असल में हुड्डा और उनके बेटे ने भाजपा की हरियाणा में तीसरी बार सरकार बनवाने में मदद की। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले दो सालों में हुड्डा ने कभी भाजपा के खिलाफ नहीं बोला और केवल आईएनएलडी को वोट काटने वाली पार्टी बताकर प्रचार किया। अभय ने कहा, "1977 से 2000 तक हमने कांग्रेस की जड़ें काटीं और उसे सत्ता से बाहर रखा। इस बार रोहतक में लोग कांग्रेस की रीढ़ तोड़ेंगे।" जजपा की नाकामी  जननायक जनता पार्टी (जजपा) पर तंज कसते हुए अभय ने कहा कि जजपा ने झूठे वादे किए और भाजपा की गोद में जाकर बैठ गई। उन्होंने कहा कि लोगों ने जजपा का इलाज कर दिया। इस बार उनकी पार्टी 1 लाख वोट भी नहीं जुटा पाई, जबकि वे 17% वोट की बात करते थे। चौधरी ओम प्रकाश चौटाला की कमी  पहली बार ताऊ देवीलाल की जयंती चौधरी ओम प्रकाश चौटाला के बिना मनाए जाने के सवाल पर अभय ने कहा कि उनकी कमी हर कार्यकर्ता को खल रही है। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि पार्टी कार्यकर्ता चौधरी साहब की देन हैं और उनकी अनुपस्थिति में भी पार्टी को मजबूती से आगे ले जा रहे हैं। इंडिया गठबंधन पर टिप्पणी अभय ने दावा किया कि यदि आईएनएलडी इंडिया गठबंधन का हिस्सा होती, तो हरियाणा और केंद्र में भाजपा की सरकार नहीं बनती। उन्होंने कांग्रेस पर नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू को गठबंधन से बाहर करने का आरोप लगाया। उन्होंने राहुल गांधी के वोट चोरी के दावों पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस और भाजपा "चोर-चोर मौसेरे भाई" हैं। मनीषा हत्याकांड और अपराध  मनीषा हत्याकांड पर सीबीआई जांच के सवाल पर अभय ने कहा कि उन्हें हरियाणा पुलिस पर भरोसा है, लेकिन भाजपा और कांग्रेस को नहीं। उन्होंने सीबीआई को भाजपा की कठपुतली बताते हुए कहा कि हरियाणा में रोजाना 3-4 हत्याएं, 10 से ज्यादा अपहरण और बलात्कार की घटनाएं हो रही हैं। उन्होंने दावा किया कि यदि आईएनएलडी की सरकार बनी, तो 24 घंटे में अपराध खत्म हो जाएगा, जैसा चौधरी ओम प्रकाश चौटाला के शासनकाल में था। वायरल वीडियो पर टिप्पणी सिरसा विधायक गोकुल सेतिया और जुलाना विधायक विनेश फोगाट की अधिकारियों से बातचीत की वायरल वीडियो पर अभय ने कहा कि ये विधायक अधिकारियों से सम्मानजनक बातचीत नहीं करते और वीडियो बनाकर वायरल करते हैं, जो गलत है। नायब सैनी पर तंज अभय ने मुख्यमंत्री नायब सैनी को "डमी मुख्यमंत्री" करार देते हुए कहा कि हरियाणा में अभी भी मनोहर लाल खट्टर का ही कार्यकाल चल रहा है। 25 सितंबर को विशाल रैली का दावा  अभय ने कहा कि 25 सितंबर को रोहतक में लाखों लोग जुटेंगे और भाजपा को सत्ता से बाहर कर आईएनएलडी को सत्ता में लाने का काम करेंगे। उन्होंने सुखबीर सिंह बादल और उमर अब्दुल्ला को भी रैली में आमंत्रित करने की बात कही।

मध्यप्रदेश हैल्थ केयर फैसिलिटी और इनोवेशन में निभा रहा है अग्रणी भूमिका : केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा

भोपाल. केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रसाद नड्डा ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरगामी सोच से हमारा देश बदल रहा है। हम विकास के हर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और स्वास्थ्य सेवाओं और सुविधाओं के विस्तार में भारत ने पूरे विश्व में अपनी अलग पहचान बनाई है। दिल्ली से स्वास्थ्य सुधार के लिए तैयार की गई योजनाओं और स्वास्थ्य कार्यक्रमों को मध्यप्रदेश में अभूतपूर्व तरीके से अमली जामा पहनाया जा रहा है। मध्यप्रदेश का प्रदर्शन देश के दूसरे राज्यों के लिए एक उदाहरण बन रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार, विस्तार और नवाचार में मध्यप्रदेश नेतृत्व कर रहा है। केन्द्रीय मंत्री नड्डा सोमवार को जबलपुर के घंटाघर स्थित नेताजी सुभाषचंद्र बोस सांस्कृतिक सूचना केन्द्र में स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रिमोट का बटन दबाकर श्योपुर और सिंगरौली जिले में नवनिर्मित नवीन शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों का वर्चुअली लोकार्पण किया। केन्द्रीय मंत्री नड्डा ने इन दोनों मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस कोर्स की 100-100 सीटों के प्रवेश के लिए केन्द्र सरकार की ओर से लैटर ऑफ परमिशन भी राज्य सरकार को दिया। उन्होंने कहा कि लैटर ऑफ परमिशन के जरिए इन दोनों मेडिकल कॉलेज के संचालन और प्रवेश की प्रक्रिया भी आज से ही प्रारंभ कर दी गई है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा ने कहा कि हमारी नई स्वास्थ्य नीति में हमने बीमार होने के बाद इलाज करने की पुरानी व्यवस्था के बजाय नागरिक बीमार ही न पड़ें, इसके लिए प्रिवेन्टिव और प्रमोशनल हेल्थ केयर पर फोकस किया। टोटल हैल्थ केयर सेक्टर में हम विकास और विस्तार की एक नई कहानी लिख रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत विश्व का पहला ऐसा देश है, जिसने अपनी अधिकतम आबादी को बीमारी की इलाज के लिए 5 लाख रुपये सालाना हैल्थ कवरेज दिया है। आयुष्मान भारत निरामयम् योजना के जरिए हमने यह कर दिखाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और स्वास्थ्य विभाग का अमला इस उपलब्धि के लिए बधाई और साधुवाद के पात्र हैं। केन्द्रीय मंत्री नड्डा और मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में बैतूल, पन्ना, धार और कटनी जिले में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर स्थापित होने वाले नए शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय के लिए संबंधित निवेशक समूहों के साथ अनुबंध पत्रों पर हस्ताक्षर एवं आदान-प्रदान भी किए गए। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री ने प्रदेश के 8 लाख पात्र वरिष्ठ नागरिकों को ‘वय वंदना कार्ड’ के वितरण कार्य का शुभारंभ करते हुए मंच से 5 वरिष्ठ नागरिकों को वय वंदना के पीवीसी कार्ड का वितरण किया। साथ ही रिमोट का बंटन दबाकर ‘आयुष्मान सखी’ स्मार्ट चैटबॉट और आशा संवाद कार्यक्रम की शुरुआत भी की। मातृ-गर्भावस्था आहार प्रचार सामग्री एवं मातृ-शिशु सुरक्षा कार्ड का विमोचन भी किया गया। राज्य सरकार के लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने ‘स्वस्थ यकृत मिशन’ के तहत एक करोड़ लोगों की लीवर स्क्रीनिंग पूरी कर ली है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा ने मध्यप्रदेश सरकार द्वारा हासिल की गई इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व और स्वास्थ्य विभाग के मैदानी अमले के समर्पण की सराहना की और बधाई दी। केंद्रीय मंत्री नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शिता और मार्गदर्शन में स्वस्थ भारत के निर्माण के लिए केंद्र सरकार ने कई कदम उठाए हैं। स्वस्थ भारत से ही सशक्त और समृद्ध भारत का निर्माण होगा। नड्डा ने कहा कि मध्यप्रदेश हैल्थ सैक्टर में नेतृत्व प्रदान कर रहा है। प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। भारत सरकार देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को लेकर क्रांतिकारी बदलाव कर रही है। पहले हमारी स्वास्थ्य नीति क्योरेटिव थी अर्थात बीमारी के बाद उसका इलाज करना। अब प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में होलिस्टिक पॉलिसी बनी है, जिसमें प्रिवेंटिव क्योर, हैल्थ प्रमोशन जैसी बातों पर ध्यान दिया गया। एक लाख 77 हजार आरोग्य मंदिरों में डेंटल केयर, मेंटल केयर, कैंसर जैसी बीमारियों की स्क्रीनिंग शुरू की गई। 30 साल से अधिक उम्र के हर व्यक्ति की आरोग्य मंदिर के माध्यम से हेल्थ स्क्रीनिंग शुरू की गई। केंद्रीय मंत्री नड्डा ने कहा कि देश में सबसे अच्छा हैल्थ सिस्टम है। पांच करोड़ से अधिक माताओं और बच्चों की स्क्रीनिंग भारत सरकार डिजिटली करती है। आशा वर्कर्स ने अंतिम पंक्ति तक स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाया है। गर्भावस्था के समय महिलाओं के 5 चैकअप होते हैं। पांच करोड़ एंटी नेटल चेकअप हमारे रोबस्ट हेल्थकेयर सिस्टम को दर्शाता है। इसी प्रकार वैक्सिनेशन के क्षेत्र में भी आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका अहम है। केंद्रीय मंत्री नड्डा ने कहा कि आज देश में 89 प्रतिशत बच्चों का जन्म अस्पतालों में हो रहा है। मातृ मृत्यु-दर आज 130 से घटकर 93 पर आ गई है। शिशु मृत्यु-दर घटकर 39 प्रतिशत पर आ चुकी है, जबकि दुनिया में यह दर 11 प्रतिशत है। देश भर में 5 करोड़ 20 लाख लोगों को हाइपरटेंशन और 3 करोड़ 50 लाख लोग डायबिटीज से पीड़ित मिले हैं। भारत सरकार सिकल सेल एनीमिया की स्कीनिंग के लिए तेजी से कार्य कर रही है। टीबी के मरीजों की भी तेजी से जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने देश के 12 करोड़ 74 लाख परिवारों अर्थात 50 करोड़ से अधिक आबादी को आयुष्मान योजना के माध्यम से 5 लाख रुपए तक का हैल्थ कवरेज दिया है। इस योजना में हैल्थ वर्कर और आशा वर्कर भी शामिल हो चुकी हैं। अब 'वय वंदन कार्ड' के माध्यम से देश में 70 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों को नि:शुल्क स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। दुनिया में कोई बीमा कंपनी ऐसी सुविधा नहीं देती। केंद्रीय मंत्री नड्डा ने कहा कि देश में कुल 780 मेडिकल कॉलेज और इनमें 1 लाख 70 हजार एमबीबीएस की सीटें हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने आगामी 5 साल में यूजी-पीजी की 75 हजार मेडिकल सीटें और बढ़ाने का लक्ष्य दिया है। यह प्रधानमंत्री के नीतिगत फैसलों को दर्शाता है। छोटे शहरों में मेडिकल कॉलेज खोलने से डॉक्टर उन्हीं क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ाएंगे। केंद्रीय मंत्री नड्डा ने कहा कि नीट के जरिए आज 13 भाषाओं में प्रवेश परीक्षा आयोजित की जा रही है। अब गांव के बच्चे … Read more

डायल-112 बनी जनता की जीवनरेखा: 43 लाख लोगों को मिली आपातकालीन मदद

– वर्तमान में डायल-112 पर फोन आने के बाद 14 मिनट लग रहे घटना स्थल तक पहुंचने में – एडीजी एनके आजाद ने प्रेस वार्ता कर दी पूरे मामले की जानकारी, 1833 वाहन हैं अभी इसमें पटना, बिहार पुलिस का डायल-112 आपातकालीन नंबर सामान्य विधि-व्यवस्था संभालने के साथ ही आम लोगों को हर तरह से मदद करने में भी जुटा हुआ है। 2022 में डायल-112 सेवा की शुरुआत की गई थी। अब तक इसके जरिए 43 लाख से अधिक नागरिकों को आपातकालीन सहायता पहुंचाई जा चुकी है। इस वर्ष अब तक 8 लाख से अधिक लोगों को आपात समय में सहायता मुहैया कराई जा चुकी है। यह जानकारी एडीजी (संचार एवं तकनीकी सेवा) एनके आजाद ने सोमवार को पुलिस मुख्यालय सरदार पटेल भवन के सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में दी।       एडीजी ने कहा कि वर्तमान में इस आपातकालीन हेल्पलाइन सेवा पर कॉल करने के बाद पुलिस को संबंधित घटना स्थल तक पहुंचने में औसतन 14 मिनट का समय लगता है। आने वाले समय में इस समय को और कम करने की योजना है। इसके एक वाहन औसतन ड्रायवर छोड़कर 3 से 4 लोग होते हैं। इनकी संख्या बढ़ाने की योजना पर भी काम तेजी से चल रहा है। इसके लिए चयनित कर्मियों को डेढ़ साल की ट्रेनिंग लेनी होती है। इस कारण कर्मियों की संख्या बढ़ाने में थोड़ा समय लगता है। इसके अलावा लोकेशन आधारित सिस्टम को अधिक सटीक बनाने के लिए मोबाइल फोन सेवा प्रदान करने वाले सेवा प्रोवाइडर को पूरे मामले की जानकारी दी गई है। जल्द ही उनके स्तर से तकनीकी तौर पर इस व्यवस्था को सशक्त किया जाएगा।        उन्होंने बताया कि इसके अंतर्गत 1833 वाहन जुड़े हुए हैं, जिसमें 1283 चार पहिया और 550 दो पहिया शामिल हैं। इनके माध्यम से चौबीस घंटे आपातकालीन सहायता मुहैया कराई जाती है। इस वर्ष जिन 8 लाख लोगों को सेवा मुहैया कराई गई है, उसमें 6 लाख कॉल सामान्य विधि-व्यवस्था से जुड़े आए थे। 1 लाख कॉल घरेलू एवं लैंगिक हिंसा, 43 कॉल एंबुलेंस की सहायता और 33 हजार कॉल अगलगी से संबंधित सहायता के लिए आ चुके हैं।        एडीजी ने बताया कि जिन लोगों को सुविधा मुहैया कराई जाती है, उनमें 10 से 15 फीसदी का ही फीडबैक मिल पाता है। इसमें 90 फीसदी लोग सेवा से संतुष्ट हैं। आने वाले समय में सौ फीसदी लोगों से फीडबैक लेने की ऑनलाइन व्यवस्था की जा रही है।      उन्होंने कहा कि 5 सितंबर 2024 से महिलाओं को यातायात के दौरान खासतौर से सुरक्षा प्रदान करने के लिए डायल-112 के जरिए एक विशेष पहल शुरू की गई थी। इसका अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। अब तक 200 से अधिक महिलाओं को उनकी मांग के अनुरूप सुरक्षा मुहैया कराई गई है। इस एक हेल्पलाइन से अग्निशमन, महिला एवं बच्चों से जुड़ी समस्या, एंबुलेंस समेत अन्य सभी तरह की आपात नंबर समाहित कर दी गई हैं। इस नंबर पर फोन करके किसी तरह की सेवा प्राप्त की जा सकती है।  

लखनऊ में गूंजा ‘शुक्स’ का नाम, शुभांशु शुक्ला का हुआ भव्य स्वागत

आई.एस.एस. पर कदम रखने वाले पहले भारतीय का हजारों लोगों ने किया अभिनंदन सी.एम.एस. छात्र की गौरवशाली उपलब्धि का मना अभूतपूर्व जश्न लखनऊ,  लखनऊ के इतिहास में आज का दिन सदैव अविस्मरणीय रहेगा। ऐसा लगा, जैसे शहर थम-सा  गया हो, जब हजारों लोग अपने अन्तरिक्ष नायक.ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के स्वागत में उमड़ पड़े, जिन्होंने अन्तर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन (आई.एस.एस.) पर कदम रखने वाले पहले भारतीय होने की ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम की है। राजकीय समारोह जैसी झलकियों के बीच, हजारों की संख्या में सी.एम.एस. छात्र, लखनऊ के प्रबुद्ध नागरिक व अन्य विशिष्ट हस्तियाँ लखनऊ एयरपोर्ट से सिटी मोन्टेसरी स्कूल, गोमती नगर एक्सटेंशन कैम्पस तक अन्तरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला की स्वागत यात्रा में शामिल हुए, जो हाल ही में आई.एस.एस. पर अपने ऐतिहासिक 18-दिवसीय मिशन से लौटे हैं। लहराते झंडों का सागर, पुष्पवर्षा और गगनभेदी नारों से 39 वर्षीय अन्तरिक्ष यात्री का अभूतपूर्व स्वागत देखने लायक था। शुभांशु का यह अन्तरिक्ष मिशन एक ऐसी अभूतपूर्व उपलब्धि है, जिसने जिसने भारत के अन्तरिक्ष कार्यक्रम को एक नया आयाम प्रदान किया है। अभूतपूर्व परेड का दृश्य: समारोह की शुरुआत एयरपोर्ट से हुई, जहाँ सी.एम.एस. प्रबन्ध प्रबंधक प्रो. गीता गांधी किंगडन के नेतृत्व में छात्रों ने बैंड प्रस्तुति दी और अपने गौरवशाली पूर्व छात्र का माल्यार्पण किया। इसके बाद खुले वाहन पर निकलने वाली शोभायात्रा शहर की सड़कों से गुज़री, उनके पीछे हजारों की उल्लसित भीड़ ‘जय हिन्द’ और ‘जय जगत’ के नारे लगाती चल रही थी। जी-20 चौराहे पर तो स्वागत समारोह का दृश्य बेहद रोमांचक हो गया, जब हजारों लोगों की तालियों के बीच शुभांशु विनम्रता से हाथ हिलाकर अभिवादन कर रहे थे। अपने गृहनगर की भावनात्मक वापसी: भव्य शोभायात्रा का समापन सी.एम.एस. गोमती नगर एक्सटेंशन ऑडिटोरियम में हुआ, जहाँ खचाखच भरी सभा शुभांशु का इंतजार कर रही थी। जहाँ एक ओर, शुभांशु के रूप में मंच पर राष्ट्र का गौरव झलक रहा था तो वहीं दूसरी ओर विशिष्ट अतिथियों के साथ ही सी.एम.एस. छात्र और शुभांशु का परिवार.उनके माता-पिता, बहनें, पत्नी, पुत्र और अन्य परिजन इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने को तत्पर दिखे। इस अवसर पर शुभांशु की माताजी को फलों और फूलों से तौलकर सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया गया तो वहीं दूसरी ओर उनके पिताजी श्री शम्भू दयाल शुक्ल को शॉल भेंटकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत सी.एम.एस. प्रार्थना से हुई, तत्पश्चात ‘वन्दे मातरम्’ की सुमधुर व उत्साहपूर्ण प्रस्तुति से पूरा सभागार रोमांचित हो उठा। ‘जय जगत’ की भावना को किया साकार: अन्तरिक्ष यात्री शुभांशु का स्वागत करते हुए सी.एम.एस. प्रबन्धक प्रो. गीता गाँधी किंगडन ने कहा, ‘शुभांशु की उपलब्धि केवल सी.एम.एस. की नहीं बल्कि हर भारतीय की है। उन्होंने सचमुच विद्यालय के आदर्श.वाक्य ‘जय जगत’ की भावना.को साकार किया है। हमें उन पर असीम गर्व है और हम उनके गगनयान मिशन समेत समस्त अन्तरिक्ष कार्यक्रमों की अभूतपूर्व सफलता की कामना करते हैं। सी.एम.एस. संस्थापिका-निदेशिका डा. भारती गांधी ने उन्हें आशीर्वाद देते हुए कहा कि शुभांशु ‘राष्ट्र का गौरव’ हैं और उनकी उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। स्वागत समारोह में बोलते हुए शुभांशु शुक्ला ने कहा कि जिस उत्साह से सी.एम.एस. छात्रों ने मेरा स्वागत व सम्मान किया है, उससे मैं अभिभूत हूँ। अपने घर व विद्यालय में आकर मैं बहुत खुश हूँ। इस अवसर पर शुभांशु शुक्ला ने सी.एम.एस. छात्रों से खास बातचीत में छात्रों के प्रश्नों के जवाब देकर उनकी जिज्ञासाओं को शान्त किया। समारोह की समाप्ति पर आयोजित एक प्रेस कान्फ्रेन्स में शुभांशु शुक्ला ने सी.एम.एस. की प्रशंसा करे हुए अपनी ऐतिहासिक अन्तरिक्ष यात्रा के अनुभवों को साझा किया। अन्तरिक्ष अन्वेषण का नया अध्याय: एक्सिओम मिशन के तहत आई.एस.एस. से लौटे ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने अपने अन्तरिक्ष मिशन के दौरान इसरो के आगामी गगनयान मिशन हेतु महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोग सम्पन्न किए। वे आधिकारिक रूप से वर्ष 2027 के गगनयान दल का हिस्सा घोषित हो चुके हैं। यह एक ऐसा अन्तरिक्ष मिशन साबित होगा, जो भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल करेगा जिनके पास मानव अन्तरिक्ष उड़ान क्षमता है। कुल मिलाकर, आज का यह स्वागत समारोह मात्र एक अन्तरिक्ष यात्री का ही सम्मान नहीं था अपितु यह वह अविस्मरणीय दिन था जब लखनऊ स्वयं अपनी उपलब्धि पर गौरवान्वित हो रहा था।

कलेक्टर के निर्देश पर भोपाल में फूड क्वालिटी चेक, कई प्रतिष्ठानों से लिए गए नमूने

भोपाल.  कलेक्टर भोपाल के निर्देशानुसार आज गांधी नगर एवं बैरागढ़ क्षेत्र के खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान चिरायु मेडिकल कॉलेज स्थित स्टूडेंट मेस (भोपाल कैटर्स) से बेसन का नमूना, विकास डिस्ट्रीब्यूटर्स पंजाब नेशनल बैंक रोड बैरागढ़ से पेय पदार्थों के दो नमूने तथा जया डेयरी एंड स्वीट्स गांधी नगर से खाद्य एवं पेय पदार्थों के तीन नमूने जांच हेतु लिए गए, जिन्हें खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेजा जा रहा है। खाद्य कारोबारकर्ताओं को प्रतिष्ठान पर खाद्य लाइसेंस की प्रति चस्पा करने, अखाद्य रंग का उपयोग नहीं करने तथा परिसर में स्वच्छता बनाए रखने के निर्देश दिए गए। निरीक्षण दल में खाद्य सुरक्षा अधिकारी श्री जे.पी. विश्वकर्मा एवं श्री जे.पी. लववंशी उपस्थित रहे।

स्टूडेंट्स को शिवराज की अपील: भारत में ही ज्ञान और प्रतिभा का करें इस्तेमाल

भोपाल  इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (IISER) भोपाल के 12वें दीक्षांत समारोह में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने छात्रों से भावुक अपील की कि वे देश छोड़कर बाहर न जाएं, बल्कि अपने ज्ञान और कौशल को भारत की प्रगति में ही लगाए।  समारोह में संस्थान की नई इनोवेशन मैगजीन और ब्रॉशर का विमोचन हुआ तथा रिसर्च और स्टार्टअप उपलब्धियों का विस्तृत ब्योरा भी दिया गया। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार और IISER चेयरपर्सन प्रो. अरविंद आनंद नाटू विशेष रूप से मौजूद रहे। छात्रों को मिला विशेष सम्मान इस वर्ष बायोकेमिस्ट्री विभाग के छात्र कौशिक मेहंदी को प्रेसिडेंट गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया। शैक्षणिक प्रदर्शन, नेतृत्व कौशल और योगदान के आधार पर उन्हें डायरेक्टर गोल्ड मेडल के लिए भी चुना गया। इसके अलावा संस्थान ने बेस्ट एकेडमिक परफॉर्मेंस की सूची घोषित की, जिसमें वरुण अजीत नायर, आशीष शुक्ला, देवाशीष तिवारी, कौशिक मेहंदी, महेश और अगम दीप सिंह समेत अन्य छात्रों के नाम शामिल हैं। 423 छात्र-छात्राएं स्नातक हुए संस्थान के डायरेक्टर प्रो. गोवर्धन दास ने बताया कि इस बार कुल 423 छात्र-छात्राओं ने स्नातक किया। इनमें 227 बीएसएमएस, 51 बीएस, 56 एमएस और 89 पीएचडी शामिल हैं। उन्होंने स्नातकों को भविष्य के इनोवेटर्स और लीडर्स बताते हुए कहा कि IISER ने बहुविषयक शिक्षा को प्रोत्साहन दिया है और अब नेचुरल साइंसेस के साथ सोशल साइंसेस, ह्यूमैनिटीज और इंजीनियरिंग पर भी काम कर रहा है। इस सत्र से नए पाठ्यक्रम शुरू प्रो. दास ने यह भी बताया कि इस सत्र से संस्थान में बीटेक और एमए (लिबरल आर्ट्स) कोर्स भी शुरू किए गए हैं। IISER भोपाल की छात्र संख्या लगभग तीन हजार के करीब पहुंच चुकी है और इनमें लगभग 35 प्रतिशत विद्यार्थी महिलाएं हैं। यह संस्थान के लिए गर्व का विषय है और आने वाले वर्षों में इसे और बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। 340 करोड़ का अनुदान मिला प्रो. दास ने संस्थान की रिसर्च बेस्ड उपलब्धियों का विस्तृत ब्योरा देते हुए कहा कि अब तक IISER भोपाल के 847 प्रोजेक्ट्स राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय 45 एजेंसियों से फंडेड हुए हैं। संस्थान को कुल मिलाकर करीब 340 करोड़ रुपए का अनुसंधान अनुदान प्राप्त हुआ है। उनकी फैकल्टी ने 4,000 से अधिक पियर-रि‍व्यूड लेख प्रकाशित किए हैं, 60 से अधिक पेटेंट हासिल किए गए हैं और 50 से अधिक संस्थानों के साथ एमओयू दर्ज हैं। वर्तमान में संस्थान में लगभग 160 नियमित फैकल्टी सदस्य कार्यरत हैं और यह संख्या विस्तार के रास्ते पर है। IISER में केन्द्र और राज्य सरकार के सहयोग से स्टेट ऑफ आर्ट हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग सुविधाएं विकसित की गई हैं, जो आज के कटिंग-एज टेक्नोलॉजी के अनुरूप अनुसंधान को सशक्त बनाने के लिए जरूरी हैं। इसके अलावा संस्थान में रिसर्च पार्क का विकास भी जोरों पर है, ताकि रिसर्च बेस्ड स्टार्टअप और उद्योगों को सहयोग और संसाधन मिल सके। प्रो. दास ने कहा, IISER भोपाल ने कृषि व टेक्नोलॉजी के संयोजन पर भी विशेष बल दिया है। संस्थान ने प्रस्ताव रखा है कि यहां एक सेंटर फॉर एग्रो टेक्नोलॉजी रिसर्च स्थापित किया जाए, जिसका उद्देश्य कृषि क्षेत्र में नयी नयी तकनीकों के माध्यम से किसानों की आजीविका में सुधार लाना होगा। संस्थान की रिसर्च टीम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग को कृषि से जोड़ने पर काम कर रही है। जिससे ताकि किसान यह जान सकें कि कौन-सी फसल कब और किस तरीके से लगानी चाहिए, संभावित जोखिम क्या हैं और उनसे निपटने के वैधानिक तथा तकनीकी उपाय क्या हो सकते हैं। ड्रोन इमेजरी की मदद से फसलों की सटीक निगरानी, रोगों का शीघ्र पता और जल प्रबंधन संभव होगा। जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा। इसके अलावा संस्थान में प्रकाशित शोधों में सिकल सेल एनीमिया के इलाज के लिए स्टेम सेल तकनीक पर भी काम चल रहा है, जो बीमारियों के नए उपचार के रास्ते खोल सकते हैं। मंत्री नहीं, मामा बनकर आया हूं समारोह को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि IISER का परिसर देखकर उन्हें दिव्यता का अनुभव हुआ। उन्होंने कहा – नाटू साहब ने मेरा परिचय मंत्री के रूप में दिया, लेकिन मैं यहां मामा बनकर आया हूं।' चौहान ने छात्रों से कहा कि भारत की पुरानी विद्वता आज भी हमें ज्ञान का प्रकाश देती है और नए शोधकर्ताओं का कर्तव्य है कि वे इस विरासत को आगे बढ़ाएं। उन्होंने कहा- 'देश छोड़कर मत जाना, असली सुख तब है जब आपका ज्ञान अपने देश और समाज के काम आए।' किसानों के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग उन्होंने छोटे और संसाधन सीमित किसानों के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग पर जोर दिया। जिसमें मधुमक्खी पालन, पशुपालन और विविध फसल प्रबंधन कर किसान अपनी आमदनी बढ़ा सकें। चौहान ने छात्र-उद्यमियों से कहा कि यदि उनके पास प्रोजेक्ट हैं तो वे भोपाल में उपलब्ध हैं; और यदि वे दिल्ली में हैं तो संपर्क कर सकते हैं। वे दोनों जगहों पर सहायता के लिए तत्पर हैं। दीक्षांत का अर्थ दीक्षा का अंत नहीं दीक्षांत समारोह के अंत में प्रो. दास और अतिथियों ने स्नातकों को समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी याद दिलाई। उन्होंने कहा कि दीक्षा का अर्थ अध्ययन का अंत नहीं, बल्कि प्रारम्भ है। अब ज्ञान के साथ कौशल है और उसका प्रयोग समाज के उत्थान के लिए होना चाहिए।  

यूनेस्को साइट में आता मौजूदा परिसर, हाईकोर्ट शिफ्ट को लेकर मंथन जारी

चंडीगढ़ पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट को स्थानांतरित करने को लेकर अब अंतिम निर्णय बार एसोसिएशन (PHHCBA) के हाथ में होगा। हाईकोर्ट के मौजूदा परिसर के विस्तार या इसे नए स्थान पर शिफ्ट करने का फैसला मतदान से तय किया जाएगा। वर्तमान में हाईकोर्ट चंडीगढ़ के सेक्टर-1 में स्थित है, जो सुखना झील के कैचमेंट एरिया और यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट "कैपिटल कॉम्प्लेक्स" का हिस्सा है। यही कारण है कि इसके विस्तार की संभावना लगभग खत्म हो गई है और लंबे समय से नए विकल्प तलाशे जा रहे थे। इसी क्रम में 20 अगस्त को PHHCBA की कार्यकारिणी समिति ने सर्वसम्मति से हाईकोर्ट को चंडीगढ़ के सरणगपुर गांव में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव पारित किया। 25 वर्षों तक जरूरतें पूरी करने में सक्षम होगा प्रस्ताव के मुताबिक, सरणगपुर में हाईकोर्ट का नया परिसर बनाने के लिए 48.865 एकड़ भूमि निर्धारित की गई है, जिनमें से 15 एकड़ जमीन पहले ही आवंटित की जा चुकी है। यहां करीब 42 लाख वर्ग फुट क्षेत्रफल का नया भवन तैयार किया जाएगा, जो आने वाले 20 से 25 वर्षों तक जरूरतें पूरी करने में सक्षम होगा। एसोसिएशन का कहना है कि सरणगपुर बेहतर विकल्प है क्योंकि यहां मेट्रो स्टेशन प्रस्तावित है, पीजीआई की ओर से फ्लाईओवर, चौड़ी सड़कें और मोहाली व एयरपोर्ट तक बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी। साथ ही चारों दिशाओं से एंट्री-एग्जिट की सुविधा और बिना ट्रैफिक जाम के आवागमन की संभावना इसे और उपयुक्त बनाती है। एक और विकल्प पर भी चल रहा विचार मौजूदा परिसर में ही विस्तार करने की योजना को भी विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। इसके तहत बार रूम के सामने नए कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया जा सकता है। इसमें दो मंजिला अंडरग्राउंड पार्किंग और ऊपर तीन मंजिलें होंगी। इससे करीब 16 नए कोर्टरूम जुड़ जाएंगे। इस योजना की लागत लगभग 200 करोड़ आंकी गई है। हालांकि यह निर्माण कार्य यूनेस्को से मंजूरी मिलने पर ही संभव होगा। एसोसिएशन का कहना है कि मंजूरी की प्रक्रिया में कम से कम डेढ़ साल लगेगा और इसके बाद निर्माण में पांच साल से अधिक का समय लग सकता है। इस दौरान परिसर में भीड़, पार्किंग की समस्या, धूल और आवाजाही में दिक्कतें बढ़ जाएंगी। अदालत की सख्त टिप्पणी 22 अगस्त को चीफ जस्टिस शील नागु और जस्टिस रमेश कुमारी की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि हाईकोर्ट को शिफ्ट करने जैसा महत्वपूर्ण फैसला केवल कार्यकारिणी समिति नहीं ले सकती। इसे एसोसिएशन की जनरल बॉडी के समक्ष रखा जाना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक जनरल बॉडी इस प्रस्ताव को पारित नहीं करती, इसे मान्यता नहीं दी जाएगी। बार एसोसिएशन का रुख PHHCBA ने बार सदस्यों के लिए जारी नोटिस में कहा है कि मौजूदा परिसर में विस्तार का विकल्प लंबा समय लेगा और फिर भी हाईकोर्ट की जरूरतों को पूरी तरह पूरा नहीं कर पाएगा। जबकि सरणगपुर में नया परिसर एक स्थायी समाधान होगा और सुविधाओं से भरपूर होगा। एसोसिएशन ने कहा कि दोनों ही योजनाओं में 5 से 7 साल का समय लग सकता है, लेकिन सरणगपुर का विकल्प भविष्य के लिए बेहतर साबित होगा। अब अंतिम फैसला वकीलों के वोट से अब हाईकोर्ट को शिफ्ट करने या नहीं करने का फैसला बार एसोसिएशन के सदस्य वकीलों के मतदान से तय होगा। मतदान की तारीख और प्रक्रिया जल्द घोषित की जाएगी। PHHCBA सचिव गगनदीप जम्मू ने कहा कि “यह फैसला ऐतिहासिक और भविष्य को प्रभावित करने वाला है। इसलिए सभी सदस्य अपने मूल्यवान वोट जरूर डालें।” अभी जरूरत के अनुसार छोटी है हाईकोर्ट वर्तमान में हाईकोर्ट की स्वीकृत क्षमता 85 कोर्टरूम की है, लेकिन फिलहाल केवल 69 कोर्टरूम ही कार्यशील हैं। बढ़ते मामलों और न्यायिक ढांचे की जरूरतों को देखते हुए हाईकोर्ट के विस्तार या स्थानांतरण पर यह फैसला बेहद अहम माना जा रहा है।

राजस्व महा–अभियान : नौ दिनों में हुआ 35.36 फीसदी जमाबंदी पंजी की प्रति का वितरण

शिविर में आए आवेदनों में अररिया, खगड़िया, सुपौल हैं अग्रणी जमाबंदी पंजी के वितरण में वैशाली, अरवल और कैमूर अग्रणी जिलों में शामिल पटना, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की तरफ से चलाए जा रहे राजस्व महा–अभियान (16 अगस्त से 20 सितम्बर 2025) के तहत राज्य के ग्रामीण परिवारों को जमाबंदी पंजी की प्रति उपलब्ध कराने तथा पंचायत स्तर पर शिविर लगाकर आवेदन लेने का कार्य सभी जिले में तीव्र गति से चल रहा है। 19 अगस्त से 24 अगस्त की अवधि में सभी 38 जिलों में 1584 शिविर लगाए गए। शिविर में कुल 50 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें जमाबंदी में सुधार के आवेदनों की संख्या सर्वाधिक 38340 है। ऑफलाइन जमाबंदी को ऑनलाइन करने के आवेदनों की संख्या 7246, उत्तराधिकार नामांतरण के आवेदनों की संख्या 1465 एवं बंटवारा नामांतरण के आवेदनों की संख्या 1368 है। पिछले छह दिन में सर्वाधिक आवेदन अररिया में आए हैं। यहां आवेदनों की संख्या 5654 है। दूसरे नंबर पर खगड़िया है। यहां आवेदनों की संख्या 3131 है। तीसरे नंबर पर सुपौल है। यहां आवेदनों की संख्या 2754 है। इनके अतिरिक्त अन्य जिलों में भी अच्छी संख्या में आवेदन आए हैं। 16 अगस्त से 24 अगस्त की अवधि में सभी 38 जिलों में टीमों द्वारा 35.36 प्रतिशत जमाबंदी पंजी की प्रति का सफलतापूर्वक वितरण किया गया है। राज्य में कुल जमाबंदी की संख्या 3 करोड़ 60 लाख के करीब है। इसके मुकाबले एक करोड़ 27 लाख 26 हजार से अधिक जमाबंदी की प्रति का वितरण सभी जिलों में किया गया है। इस अवधि में कई जिलों ने वितरण में उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की है। वैशाली (73.54%), अरवल (61.98%) और कैमूर (61.58%) जमाबंदी पंजी के वितरण के मामले में शीर्ष तीन स्थानों पर हैं। इनके अलावा गोपालगंज (61.14%), खगड़िया (60.26%), सीतामढ़ी(59.26%), जहानाबाद (57.12%), अररिया (51.50%), शेखपुरा (51.43%) तथा पूर्णिया (50.69%) ने भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। इसी क्रम में मधुबनी (46.45%), बक्सर (45.94%), भोजपुर (43.92%), मुजफ्फरपुर (41.76%), किशनगंज (39.81%), शिवहर (35.69%), सिवान (35.41%), दरभंगा (33.67%), मधेपुरा (32.91%) और नालंदा (32.38%) भी शीर्ष 20 जिलों में शामिल रहे हैं। पटना, बेगूसराय, गया, कटिहार, सहरसा, समस्तीपुर, सारण समेत अन्य जिलों में भी जमाबंदी की प्रति वितरण की स्थिति संतोषजनक है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने बताया कि अभियान का लक्ष्य है कि 15 सितम्बर तक राज्य के सभी पात्र परिवारों को उनसे संबंधित जमाबंदी पंजी की प्रति उपलब्ध करा दी जाए। इसके लिए अंचल के माइक्रो प्लान के हिसाब से कार्य कराया जा रहा है। इसके लिए सभी जिलों में मौजा स्तर पर निर्धारित टीम पहुंच रही है और जमाबंदी की प्रति, आवेदन प्रपत्र और पंफलेट उपलब्ध करा रही है। रैयत उपलब्ध कराई गई जमाबंदी पंजी की प्रति के हिसाब से आवेदन पंचायत में लगने वाले शिविर में जमा करेंगे। शिविर का आयोजन 20 सितंबर तक होगा। शिविर में आवेदन जमा करते मोबाइल पर ओटीपी आयेगा और आवेदन रजिस्टर्ड हो जाएगा। इसके उपरांत आवेदन पर हो रही कार्रवाई की सूचना मिलती रहेगी। बताते चलें कि राजस्व महा–अभियान के दौरान जमाबंदी की गलतियों में सुधार, छूटी हुई जमाबंदी को ऑनलाइन करना, उत्तराधिकार नामांतरण और बंटवारा नामांतरण का कार्य किया जा रहा है।

भूख के खिलाफ बिहार ने जीती बड़ी जंग! हर महीने दो करोड़ से ज्‍यादा परिवारों को मुफ्त राशन

अब गरीबों की थाली नहीं रहेगी खाली! पारदर्शिता से समय पर पहुंचा अनाज पटना, बिहार ने भूख के खिलाफ जंग लगभग जीत ली है। इसमें प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) और बिहार सरकार की पहल बड़ा सहारा बनी है।नतीजा ये है कि प्रदेश के 2.06 करोड़ से अधिक परिवारों को हर महीने मुफ्त राशन मिल रहा है। दरअसल, ऐसा इसलिए संभव हो सका है कि बिहार सरकार ने इसे मिशन की तरह लिया। बताते चलें कि राशन वितरण में प्रणाली में लगातार गड़बड़ियों की शिकायत मिल रही थी। जिसे सरकार ने सुधार लिया है। करोड़ों परिवारों को हर महीने अनाज अब ई-पीओएस मशीन के जरिए अनाज का वितरण किया जा रहा है। जिसका नतीजा है कि हर परिवार के प्रति सुरक्षा देने का संकल्प पूरा हो रहा है। इस योजना के तहत बिहार में हर महीने औसतन 4.25 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा खाद्यान्न वितरित किया जा रहा है। PHH परिवारों (1.83 करोड़) को प्रति सदस्य 5 किलो अनाज (1 किलो गेहूं और 4 किलो चावल) मिलता है। वहीं, AAY परिवारों (22.81 लाख) को प्रति परिवार 35 किलो अनाज (7 किलो गेहूं और 28 किलो चावल) दिया जा रहा है। गरीबों के लिए यह योजना न सिर्फ राहत है बल्कि जीवन जीने की गारंटी बन गई है। ई-पीओएस मशीन से खत्म हुई धांधली बताते चलें, पहले राशन वितरण में गड़बड़ियों की शिकायतें आम थीं, लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है। सभी जनवितरण केंद्रों पर ई-पीओएस मशीन लगाने से पूरा सिस्टम पारदर्शी हो गया है। लाभुक का नाम, पहचान, अनाज की मात्रा और वितरण की तारीख, सब कुछ रियल टाइम में रिकॉर्ड किया जाता है। इससे चोरी-छुपे गड़बड़ी की गुंजाइश ही नहीं रहती है। भूख के खिलाफ सबसे बड़ी जंग "हर घर अन्न–हर थाली में पोषण" यह सिर्फ नारा नहीं बल्कि बिहार सरकार का संकल्‍प है। गरीब परिवारों की जिंदगी में बदलाव लाने का निश्‍चय है। जिसे बिहार सरकार और नीतीश कुमार गंभीरतापूर्वक पूरा करने का प्रयास कर रहे हैं। अब बच्चों की थाली से खाना गायब नहीं होता और बुजुर्गों को भूखा सोने पर मजबूर नहीं होना होता है। बिहार में यह योजना भूख के खिलाफ सबसे बड़ी जंग बन चुकी है और गरीब परिवारों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है।

ड्रैगन फ्रूट विकास योजना’ के तहत इस वर्ष मिलेगा 60 फीसदी का अनुदान

वित्तीय वर्ष 2025-26 और 2026-27 के लिए कृषि विभाग ने मांगा है आवेदन पटना, बिहार सरकार किसानों को आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इसी क्रम में कृषि विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 एवं 2026-27 के लिए 'ड्रैगन फ्रूट विकास योजना' की शुरुआत की है। इस योजना के पहले वर्ष अर्थात 2025-26 में ड्रैगन फ्रूट की खेती पर सरकार ने 60 फीसदी का अनुदान देने की घोषणा की है।       इस योजना के तहत, प्रति हेक्टेयर ड्रैगन फ्रूट की खेती की लागत 6.75 लाख है। जिसपर कुल 40 प्रतिशत अर्थात 2.70 लाख प्रति हेक्टेयर अनुदान मिलेगा। यह अनुदान दो चरणों में दिया जाएगा। 2025-26 में मिलने वाले अनुदान का 60 प्रतिशत, यानी 1.62 लाख और 2026-27 में शेष 40 प्रतिशत अनुदान, यानी 1.08 लाख रुपए दिए जाएंगे। 22 जिलों के लिए है यह योजना राज्य के 22 जिलों के किसान इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। इन 22 जिलों में अररिया, औरंगाबाद, बेगूसराय, भागलपुर, बक्सर, दरभंगा, गयाजी, जमुई, कैमूर, कटिहार, किशनगंज, लखीसराय, मधेपुरा, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नवादा, पूर्णिया, रोहतास, समस्तीपुर, सारण, शेखपुरा, और सीवान शामिल हैं। उच्च मूल्य वाली फसल है ड्रैगन फ्रूट ड्रैगन फ्रूट एक उच्च मूल्य वाली फसल है, जो कम पानी में भी उगाई जा सकती है। बाजार में इसकी अच्छी मांग भी है। किसान एक बार इस फसल को लगाने के बाद लंबे समय तक लाभ कमा सकते हैं। इस तरह से यह योजना किसानों को अधिक से अधिक आर्थिक लाभ कमाने में मदद करेगी। 'ड्रैगन फ्रूट विकास योजना' बिहार के किसानों के लिए अवसर कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार करेगी, बल्कि राज्य की कृषि विविधता को भी बढ़ावा देगी। इस योजना का लाभ लेने के लिए किसान कृषि विभाग की वेबसाइट http://horticulture.bihar.gov.in पर जाकर अपना आवेदन दे सकते हैं। विशेष जानकारी के लिए संबंधित जिले के जिला उद्यान पदाधिकारी से संपर्क किया जा सकता है।