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PAVITRA से प्रदूषण नियंत्रण होगा वैज्ञानिक और डेटा आधारित, जयपुर में अधिकारियों को दी गई तकनीकी जानकारी

जयपुर  राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बॉम्बे की ओर से PAVITRA  भारत के लिए वायु प्रदूषण प्रबंधन एवं हस्तक्षेप उपकरण विषय पर शुक्रवार को कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में वायु प्रदूषण के स्रोतों की पहचान, उत्सर्जन का आकलन तथा प्रदूषण नियंत्रण के विभिन्न उपायों के संभावित प्रभावों का वैज्ञानिक एवं आंकड़ा आधारित विश्लेषण करने के संबंध में अधिकारियों को तकनीकी जानकारी दी गई। इस अवसर पर राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों ने मंडल द्वारा प्रदूषण नियंत्रण के किए जा रहे विभिन्न उपायों की जानकारी दी। इस अवसर पर आरएसपीसीबी के।अधिकारियों ने कार्यशाला में PAVITRA की कार्यप्रणाली, आंकड़ा विश्लेषण एवं इसके व्यावहारिक उपयोग से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञों के साथ चर्चा की  PAVITRA एक निर्णय-सहायक मंच कार्यशाला में विशेषज्ञों ने बताया कि PAVITRA एक निर्णय-सहायक मंच है, जिसके माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में प्रस्तावित नीतिगत एवं नियंत्रण उपायों के आधार पर उत्सर्जन में संभावित कमी तथा उसके परिणामस्वरूप वायु में सूक्ष्म कण पीएम-2.5 की सांद्रता में होने वाले बदलाव का आकलन किया जा सकता है। इससे वायु गुणवत्ता प्रबंधन से जुड़े निर्णयों के लिए वैज्ञानिक आधार उपलब्ध कराने में सहायता मिलती है। प्रस्तुति के दौरान विशेषीकृत बहु-प्रदूषक उत्सर्जन सूची—स्मॉग इंडिया— वायुमंडलीय परिवहन एवं रसायन विज्ञान आधारित मॉडल इनमैप-पवित्रा तथा आईएसआरएम-पवित्रा सहित PAVITRA के विभिन्न तकनीकी घटकों की जानकारी दी गई। बताया गया कि स्मॉग इंडिया के माध्यम से देशभर में विभिन्न प्रदूषकों के उत्सर्जन का विस्तृत आंकड़ा आधारित भौगोलिक विवरण उपलब्ध होता है, जिसे PAVITRA के माध्यम से वायुमंडलीय मॉडलिंग से जोड़कर विभिन्न हस्तक्षेपों के संभावित प्रभावों का आकलन किया जा सकता है। कार्यशाला में PAVITRA डैशबोर्ड का प्रत्यक्ष प्रदर्शन भी किया गया। इसके माध्यम से अधिकारियों को यह समझाया गया कि किसी क्षेत्र में परिवहन, उद्योग, कृषि अवशेष जलाने, ईंधन में बदलाव तथा अन्य स्रोतों से संबंधित नियंत्रण उपायों को लागू करने की स्थिति में उत्सर्जन और पीएम-2.5 के स्तर में संभावित परिवर्तन का किस प्रकार आकलन किया जा सकता है। विशेषज्ञों ने बताया कि PAVITRA का उपयोग आधारभूत आकलन, कार्ययोजना के लिए प्राथमिकता निर्धारण, विभिन्न संभावित परिस्थितियों के आधार पर योजना निर्माण तथा क्रियान्वयन में तकनीकी सहयोग के लिए किया जा सकता है। इसके माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों एवं प्रदूषण स्रोतों के प्रभाव का तुलनात्मक अध्ययन कर प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े उपायों की प्राथमिकता निर्धारित करने में सहायता मिल सकती है। कार्यशाला में विभिन्न क्षेत्रों में उत्सर्जन में कमी लाने के संभावित उपायों पर भी चर्चा की गई। इनमें घरेलू क्षेत्र में एलपीजी के उपयोग को बढ़ावा देना, घरों का विद्युतीकरण, कृषि अवशेष जलाने में कमी तथा लघु एवं मध्यम उद्योगों में स्वच्छ ईंधन एवं तकनीक को अपनाना प्रमुख हैं। इन उपायों से संबंधित आंकड़ों के आधार पर उनके संभावित पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन किए जाने की प्रक्रिया भी समझाई गई। कार्यशाला में यह भी रेखांकित किया गया कि आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक आंकड़ों और वायुमंडलीय मॉडलिंग का उपयोग कर वायु गुणवत्ता प्रबंधन योजनाओं को अधिक प्रभावी, लक्षित एवं परिणामोन्मुख बनाया जा सकता है। PAVITRA जैसे तकनीकी प्लेटफॉर्म् से नीति निर्माण एवं प्रदूषण नियंत्रण के लिए उपलब्ध वैज्ञानिक जानकारी को व्यवहारिक निर्णयों से जोड़ने में सहायता मिलेगी। गौरतलब है कि, कार्यशाला का उद्देश्य राज्य में वायु प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े प्रयासों में वैज्ञानिक आंकड़ों, तकनीकी मॉडलिंग एवं आधुनिक निर्णय-सहायक प्रणालियों के उपयोग को बढ़ावा देना रहा। इस अवसर पर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बॉम्बे की PAVITRA परियोजना टीम द्वारा प्रशिक्षण एवं तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। ऑनसाइट प्रशिक्षण दल में PAVITRA परियोजना के प्रधान अन्वेषक प्रो. चंद्र वेंकटरामन, परियोजना प्रबंधक प्रिया अभिजीत चौधरी, शोध सहयोगी रुतुजा घाटे, शोध वैज्ञानिक डॉ. रोहित सिंह तथा शोध सहयोगी तेजस सरनाइक उपस्थित रहे। वहीं ऑनलाइन माध्यम से PAVITRA परियोजना की सह-प्रधान अन्वेषक प्रो. श्रीनिधि बालासुब्रमणियन एवं पीएचडी शोधार्थी गिरिवेंद्र प्रताप यादव ने प्रशिक्षण एवं तकनीकी सत्रों में सहभागिता की।

मोदी के जन्मदिन पर काशी से वडनगर रवाना हुए 250 बाइकर्स, 10 राज्यों के कार्यकर्ता होंगे शामिल

लखनऊ  भाजपा अभियानों के रथ पर चुनावी रंगमहल सजा देती है। सेवा संंकल्प अभियान के हर कार्यक्रम पर राजनीतिक संदेशों के फूल खिले हैं। पार्टी ने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को धार देते हुए दस राज्यों के कार्यकर्ताओं को काशी से वडगनर भेजा है जो विभिन्न लोकसभा एवं विधान सभा क्षेत्रों में सरकार की उपलब्धियां बताते एवं अपनी संस्कृतियों को साझा करते हुए निकलेंगे। सिक्किम, तलिलनाडु, झारखंड एवं छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से काशी आकर फिर गुजरात के लिए निकले कार्यकर्ताओं के जरिए पार्टी यह संदेश भी दे रही है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश के सभी हिस्सों तक विकास पहुंचा है। धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को नई शक्ति मिली है। उधर, यात्रा के बहाने मिशन-2027 और 2029 की भी जमीन बनाई जाएगी। नरेन्द्र मोदी के जन्म दिन पर भाजपा ने वाराणसी से ढाई सौ बाइकर्स को गंगाजल के साथ वडनगर भेजा है। टीम के साथ एक-एक एंबुलेस, बस और एलइडी वाहन भी चल रहा है। यूपी की दस नदियों के जल से काशी विश्वनाथ मंदिर में जलाभिषेक करने के बाद उड़ीसा, बिहार, बंगाल, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, सिक्किम, झारखंड, छत्तीसगढ़ एवं मध्य प्रदेश समेत दस राज्यों के कार्यकर्ता भी यात्रा में शामिल हैं। क्षेत्रीय मुद्दों पर रहेगी नजर भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा को यात्रा की जिम्मेदारी दी गई है। दस मार्गों से निकले कार्यकर्ता यूपी में 88 जगहों पर रात्रि विश्राम एवं चौपाल करेंगे। यहां पर राजनीतिक परिचर्चा के बहाने कार्यकर्ता यह भी जानेंगे कि क्षेत्र में कौन से चुनावी मुद्दे आकार ले रहे हैं। वह अपने राज्य की भाषा, खाद्य पदार्थ, सांस्कृतिक एवं धार्मिक प्रतीक एवं संस्थानों की विरासत भी लेकर चल रहे हैं। पिछले चार वर्ष से प्रधानमंत्री तमिल-काशी संगमम कार्यक्रम करा रहे हैं, जहां संस्कृतियों के बीच आपसी संपर्क बढ़ाने का लक्ष्य है। उधर, वडनगर के लिए निकली टीम 197 जगहों पर जलपान एवं संक्षिप्त संबोधन और एलइडी प्रदर्शन के लिए रुकेगी। इस दौरान टीम 826 विकासखंडों एवं 762 नगर निकायों को कवर करेगी। भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष रोहित मिश्र ने बताया कि काशी और गुजरात के बीच दोनों तरफ से आने-जाने वाले कार्यकर्ता समर्पण, निष्ठा, संस्कार एवं संकल्प से भरे हुए हैं। वह चौपालों में सरकारों की उपलब्धियां बताएंगे।  

जल संरक्षण से जनभागीदारी तक, मल्हनिया जलाशय में गूंजा सेवा का संकल्प

रायपुर  ‘सेवा संकल्प अभियान‘ के अंतर्गत जिले में जल संरक्षण, स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में गौरेला विकासखंड के ग्राम देवरगांव स्थित मल्हनिया जलाशय में ‘जल जन सेवा संकल्प‘ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से जल संरक्षण, जलस्रोतों की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करते हुए सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में जल संसाधन विभाग एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की सहभागिता रही। इस अवसर पर जल संरक्षण जागरूकता रैली निकाली गई। रैली के माध्यम से ग्रामीणों एवं स्थानीय नागरिकों को जल के महत्व, जलस्रोतों की सुरक्षा तथा पानी के विवेकपूर्ण उपयोग के प्रति जागरूक किया गया। प्रतिभागियों ने जल संरक्षण को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने और भविष्य के लिए जलस्रोतों को सुरक्षित रखने का संदेश दिया। स्वच्छ जलाशय, स्वस्थ पर्यावरण का लिया संकल्प जल जन सेवा संकल्प कार्यक्रम के अंतर्गत मल्हनिया जलाशय एवं उसके आसपास के क्षेत्र में स्वच्छता अभियान भी चलाया गया। अभियान के दौरान जलाशय परिसर की साफ-सफाई करते हुए लोगों को जलस्रोतों में कचरा नहीं डालने, आसपास स्वच्छता बनाए रखने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए प्रेरित किया गया। अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने जल संरक्षण और स्वच्छता के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि जलस्रोत ग्रामीण जीवन, कृषि और पर्यावरणीय संतुलन का महत्वपूर्ण आधार हैं। इनके संरक्षण के लिए प्रशासनिक प्रयासों के साथ नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। उन्होंने नागरिकों से जलस्रोतों को स्वच्छ रखने और उनके संरक्षण में निरंतर सहयोग करने की अपील की। जनभागीदारी से मजबूत होगा जल संरक्षण का अभियान ‘जल जन सेवा संकल्प‘ का उद्देश्य आम नागरिकों को जल संरक्षण के प्रति जिम्मेदार बनाना तथा सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से जलस्रोतों की स्वच्छता एवं सुरक्षा को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि जल संरक्षण केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने नागरिकों से जल का अनावश्यक अपव्यय रोकने, पानी का विवेकपूर्ण उपयोग करने, जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाने तथा अपने आसपास के लोगों को भी जल संरक्षण के लिए प्रेरित करने की अपील की। सेवा संकल्प अभियान में सेवा के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश ‘सेवा संकल्प अभियान‘ के माध्यम से जिले में जनहित और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों को व्यापक रूप दिया जा रहा है। जल संरक्षण और स्वच्छता से जुड़ा यह आयोजन सेवा की भावना को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। मल्हनिया जलाशय में आयोजित कार्यक्रम ने लोगों को यह संदेश दिया कि जलस्रोतों और प्रकृति की सेवा भी समाज तथा आने वाली पीढ़ियों के प्रति महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। जल संरक्षण जागरूकता रैली और स्वच्छता अभियान के माध्यम से ग्रामीणों में सामूहिक सहभागिता की भावना को मजबूत किया गया। कार्यक्रम के दौरान जल, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाने का संदेश दिया गया। सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित यह पहल जिले में जनभागीदारी के माध्यम से जल संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन की दिशा में सामूहिक प्रयासों को गति देने वाली रही।

युवाओं के आत्मविश्वास और व्यक्तित्व विकास की दिशा में एक मील का पत्थर- मंत्री टंक राम वर्मा

​रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप और उच्च शिक्षा मंत्री  टंक राम वर्मा के मार्गदर्शन व निर्देशों के तहत छत्तीसगढ़ शासन का उच्च शिक्षा विभाग प्रदेश के अनुसूचित जनजातीय (ST) क्षेत्रों के विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण पहल करने जा रहा है। जनजातीय क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं में अंग्रेजी भाषा के सम्प्रेषण कौशल को निखारने के लिए 90 घंटे का एक विशेष प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार किया गया है।    उच्च शिक्षा मंत्री  टंक राम वर्मा ने इस पहल को युवाओं के आत्मविश्वास और व्यक्तित्व विकास की दिशा में एक मील का पत्थर बताया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि योजना का लाभ अनुसूचित जनजाति वर्ग के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे और हर योग्य विद्यार्थी को इसका लाभ मिले। ​मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की सरकार का ध्येय प्रदेश के दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धी क्षमताओं से लैस करना है। इसी उद्देश्य को साकार करने के लिए 'राज्य-स्तरीय अंग्रेजी सम्प्रेषण पाठ्यक्रम कार्यपालन समिति' का गठन किया गया है, जो इस 90-दिवसीय/घंटे के पाठ्यक्रम का संचालन और निगरानी करेगी। राष्ट्रीय गुणवत्ता सुधार एवं गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ और राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना कार्यालय के माध्यम से संचालित होगा। यह विशेष पाठ्यक्रम प्रदेश भर के अनुसूचित जनजातीय क्षेत्रों के महाविद्यालयों में संचालित किया जाएगा। इस पहल से दूरस्थ अंचलों में पढ़ने वाले युवाओं में अंग्रेजी में बातचीत करने और अपने विचारों को प्रभावी ढंग से व्यक्त करने की झिझक दूर होगी, जिससे उन्हें रोजगार एवं उच्च शिक्षा के नए अवसर प्राप्त होंगे।   ​ पाठ्यक्रम के सुचारू संचालन, उच्च गुणवत्ता और प्रभावी अनुवीक्षण को सुनिश्चित करने के लिए आयुक्त, उच्च शिक्षा विभाग की अध्यक्षता में 'राज्य-स्तरीय अंग्रेजी सम्प्रेषण पाठ्यक्रम अनुवीक्षण समिति' की एक महत्वपूर्ण बैठक  आयोजित की गई। ​बैठक में समिति के वरिष्ठ अधिकारियों ने पाठ्यक्रम के क्रियान्वयन की चरणबद्ध रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की।

पंकज चौधरी ने यूपी बीजेपी संगठन में किया विस्तार, 13 नेताओं को मिली नई जिम्मेदारी

लखनऊ यूपी बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी ने प्रदेश संगठन में प्रकोष्ठ, सोशल मीडिया से जुड़े पदों की घोषणा की है। आज जारी सूची में कुल 13 पदाधिकारियों के नाम शामिल हैं। घोषणा के अनुसार ओम प्रकाश श्रीवास्तव को प्रकोष्ठ संकुल संयोजक बनाया है। वहीं संतराम यादव, डॉ. मिथिलेश त्रिपाठी को प्रकोष्ठ संकुल सह-संयोजक बनाया गया है। सुभाष यादुवंश को सोशल मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं गौरव वार्ष्णेय, विनीत मालवीय, अनुज चौधरी, मनोज मौर्य, निखिल सिन्हा और विवेक लवानिया को सोशल मीडिया सह-संयोजक नियुक्त किया गया है। इसके अलावा जयंत शिवाच, वाईके शर्मा और अभिमन्यु सिंह को सोशल मीडिया सदस्य बनाया गया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के हस्ताक्षर से जारी पदाधिकारी घोषणा में सभी नियुक्तियों का उल्लेख किया गया है। प्रदेश संगठन की नई टीम घोषित हुई थी इससे पहले यूपी चुनाव के मद्देनजर भाजपा ने अपनी प्रदेश संगठन की नई टीम घोषित की थी। जिसमें 19 उपाध्यक्ष और 8 महामंत्री बनाए गए थे। संगठन में बड़े चेहरों में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे नीरज सिंह, विधायक पूजा पाल, सुरेश राणा को प्रदेश उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी गई। यूपी भाजपा की 64 सदस्यीय सूची में 52 नेताओं को प्रदेश कार्यकारिणी में शामिल किया गया है। नई टीम में 19 प्रदेश उपाध्यक्ष, 19 प्रदेश मंत्री, 8 प्रदेश महामंत्री और 6 मोर्चा अध्यक्षों की नियुक्ति की गई है। इसके अलावा 6 क्षेत्रीय उपाध्यक्ष, 3 कार्यालय मंत्री और 3 अन्य पदाधिकारियों को भी जिम्मेदारी दी गई है। जातीय समीकरण भी साधे गए भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी और महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह को मिलाकर अब 54 लोगों की टीम हो गई है। टीम में 13 महिलाएं हैं। ओबीसी की संख्या 16 से बढ़कर 25 हो गई है। सामान्य वर्ग के 21 चेहरों को प्रदेश टीम में जगह मिली। ठाकुरों की संख्या 7 से घटकर 6 और ब्राह्मणों की संख्या 8 से घटकर 7 हो गई है। इसके अलावा 4 भूमिहार, 3 वैश्य और 1 श्रीवास्तव को जगह मिली है। अनुसूचित जाति (SC) की बात करें तो 7 लोगों को जगह दी गई है। वहीं, अनुसूचित जनजाति (ST) में सिर्फ इंजीनियर विद्याभूषण गोंड को जगह दी गई है। और अब सोशल मीडिया और प्रकोष्ठ संकुल संयोजक और सह-संयोजक के पदों पर नई तैनाती हुई है।

जनजातीय समुदायों के पास है देशी इलाज का समृद्ध ज्ञान

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जनजातीय समुदाय पुराकाल से हमारी सांस्कृतिक विरासत के संवाहक रहे हैं। इनके पास प्राकृतिक और औषधीय वनस्पतियों से जुड़ा अमूल्य देशज ज्ञान भी है। इस ज्ञान का संरक्षण, संवर्धन और वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजातीय समाज के पास प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व का सदियों पुराना अनुभव और ज्ञान है। इस अमूल्य ज्ञान-सम्पदा को संरक्षित करना जनजातीय समाज के हित साधन के साथ ही प्रदेश की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। हमारी कोशिश है कि प्रदेश के जनजातीय बंधुओं के पास उपलब्ध औषधीय पौधों, खेती-किसानी, वन एवं लोकज्ञान की गूढ़ जानकारियां व अब मौखिक परम्पराओं तक ही सीमित न रहें, बल्कि इनका वैज्ञानिक तरीके से दस्तावेजीकरण हो, ताकि यह ज्ञान अगली पीढ़ी तक भी पहुंचे। हम जनजातियों की देशज ज्ञान-सम्पदा को वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित और दस्तावेजीकृत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की लगभग 21 प्रतिशत जनसंख्या जनजातीय समुदाय से संबंधित है। राज्य सरकार इनके समग्र कल्याण के लिए हर स्तर पर प्रयास कर रही है। इसी क्रम में जनजातीय वर्गों की वनों पर केन्द्रित जीवन संस्कृति और इनकी पारम्परिक ज्ञान-सम्पदा को संरक्षित करना भी सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि वन, औषधीय पौधों, खेती-किसानी और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा वृहद पारम्परिक ज्ञान लंबे समय से समुदाय के अनुभवी बुजुर्गों और पारम्परिक ज्ञानधारकों के जरिए एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचता रहा है। यद्यपि इस ज्ञान को व्यवस्थित रूप से अभिलेखबद्ध करना एक बड़ी चुनौती है, तथापि राज्य सरकार ने इस दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने जनजातीय समुदाय के देशी ज्ञानधारक बुजुर्गों और वरिष्ठ जानकारों के सहयोग से पारम्परिक ज्ञान-सम्पदा के दस्तावेजीकरण का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए जनजातीय अनुसंधान एवं विकास संस्था (टीआरआई-भोपाल) को यह अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरकार की इस पहल के अंतर्गत जनजातीय समुदाय के परम्परागत वनवासी वैद्य, तड़वी, भुमका, बरवा, ओझा और गुनिया सहित बुजुर्ग ज्ञानधारकों तक सीधी पहुंच बनाई जा रही है। विशेष रूप से प्राकृतिक कंद-मूल (जड़ी-बूटियों) और औषधीय वनस्पतियों से सामान्य-असामान्य रोगों के अल्पावधि-दीर्घावधि उपचार से संबंधित जनजातियों में पीढ़ी-दर-पीढ़ी चले आ रहे नैसर्गिक ज्ञान और इनके अनुभवों को अभिलेख रूप में विकसित करने की कोशिश की जा रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि केन्द्र सरकार भी इस दिशा में आगे आई है। केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय ने जनजातीय समुदाय के वैद्यों/चिकित्सकों को औषधीय पौधों, कृषि तथा वनोपज से संबंधित पारम्परिक ज्ञान के दस्तावेजीकरण, प्रमाणीकरण तथा इसे और भी सुदृढ़ करने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिलाने की एक देशव्यापी पहल शुरू की है। केंद्र सरकार के सहयोग से मध्यप्रदेश में भी जनजातियों के देशी इलाज के समृद्ध ज्ञान के संरक्षण-संवर्धन का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। केन्द्र सरकार चला रही ‘नेशनल प्रोग्राम ऑन कैपेसिटी बिल्डिंग ऑफ ट्राइबल हीलर्स’ उल्लेखनीय है कि जनजातीय समुदायों के पास पीढ़ियों से संरक्षित पारम्परिक चिकित्सा ज्ञान के अभिलेखीकरण के लिए केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के बीच हुए एक समझौता ज्ञापन के तहत ‘नेशनल प्रोग्राम ऑन कैपेसिटी बिल्डिंग ऑफ ट्राइबल हीलर्स’संचालित किया जा रहा है। इस राष्ट्रीय कार्यक्रम का प्रमुख लक्ष्य देशभर में जनजातीय समुदायों से जुड़े वैद्यों (ट्राईबल हीलर्स) का 5,000 प्रशिक्षित ‘मास्टर ट्रेनर्स' का कैडर तैयार करना है। कार्यक्रम के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से ऐसे जनजातीय वैद्यों का चयन किया जा रहा है, जो अपने समुदाय में पारम्परिक उपचार पद्धतियों का अनुभव रखते हैं और आगे दूसरों को भी प्रशिक्षित कर सकें। चयन में जिलों, जनजातियों तथा उपचार विधाओं में विविधता सुनिश्चित करने पर जोर है। इस पहल से देशज चिकित्सा ज्ञान को अगली पीढ़ी तक व्यवस्थित रूप से पहुंचाने का मार्ग मजबूत होगा। मध्यप्रदेश की तैयारी प्रदेश के इंदौर, जबलपुर, शहडोल, नर्मदापुरम्, रीवा, ग्वालियर-चंबल, भोपाल एवं उज्जैन संभाग के कुल 34 जिलों के करीब 640 जनजातीय वैद्यों (ट्राईबल हीलर्स) को मास्टर ट्रेनर्स के रूप में नामांकित कर इनकी क्षमता निर्माण के लिए विशेष प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य में वृद्धि की भी संभावना है। जून 2026 के अंत तक प्रदेश से 101 ट्राईबल हीलर्स के नाम मास्टर ट्रेनर्स की ट्रेनिंग लेने के लिए केन्द्रीय जनजातीय मंत्रालय को भेजे जा चुके हैं। ट्राईबल हीलर्स के चयन की कार्यवाही चल रही है। जिलों से मांगे जा रहे हैं ट्राईबल हीलर्स के नाम राज्य शासन ने संबंधित कलेक्टर्स एवं जनजातीय कार्य विभाग के जिलाधिकारियों को ट्राईबल हीलर्स के नाम भेजने के निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारियों से मास्टर ट्रेनर्स के रूप में प्रशिक्षण लेने के लिए ऐसे जनजातीय वैद्यों/चिकित्सकों के नाम मांगे गए हैं, जो अनिवार्यत: अनुसूचित जनजाति समुदाय से हों। उनका अपने समुदाय में स्थापित प्रभाव हो और वे अन्य लोगों को प्रशिक्षित करने की स्थिति में हों। साथ ही ऐसे वैद्यों/चिकित्सकों के नाम भी मांगे गए हैं, जो उपचार के विभिन्न क्षेत्रों जैसे – जड़ी-बूटी चिकित्सा (हीलिंग विथ हर्ब्स), अस्थि चिकित्सा (बोन-सेटिंग), प्रसूति कराने (मिडवाईफरी) एवं सर्पदंश उपचार (स्नेक बाइट) आदि विधाओं में विशेषज्ञ हों।  

हरियाणा में डिजिटल कनेक्टिविटी को मिली रफ्तार, 82.84% ग्राम पंचायतें भारतनेट के दायरे में

चंडीगढ़  हरियाणा ने ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी और दूरसंचार ढांचे के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। प्रदेश की 6222 ग्राम पंचायतों में से 5154 यानी 82.84 प्रतिशत ग्राम पंचायतें भारतनेट के दायरे में आ चुकी हैं। कुल 45 हजार 130 फाइबर टू द होम (एफटीटीएच) कनेक्शन कार्यरत हैं। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने शुक्रवार को राज्य ब्राडबैंड समिति की बैठक में भारतनेट, राइट आफ वे (आरओडब्ल्यू) नियम 2024, 5जी नेटवर्क के विस्तार तथा दूरसंचार परियोजनाओं की स्वीकृति प्रक्रिया से संबंधित विभिन्न पहलों की समीक्षा की। 150 करोड़ रुपये का मिला प्रोत्साहन चालू वित्त वर्ष में पूंजी निवेश हेतु विशेष सहायता योजना (एसएएससीआइ) के तहत राज्य के लिए 150 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन निर्धारित किया गया है। यह प्रोत्साहन दूरसंचार क्षेत्र में छह सुधार लक्ष्यों की प्राप्ति से जुड़ा है। 31 मार्च तक लंबित सभी आरओडब्ल्यू आवेदनों का निपटारा कर दिया गया है, जिससे अधिकतम 22.5 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन का प्रविधान है। 150 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन पैकेज में आरओडब्ल्यू नियमों के क्रियान्वयन संबंधी आदेशों के लिए 45 करोड़ रुपये, राज्य आरओडब्ल्यू पोर्टल के लिए 22.5 करोड़ रुपये, पुराने लंबित आवेदनों के निपटारे के लिए अधिकतम 22.5 करोड़ रुपये, औसत निपटारा अवधि को 45 दिन या उससे कम करने के लिए 7.5 करोड़ रुपये, भारतनेट अनुपालन के लिए 37.5 करोड़ रुपये तथा बिजली क्षेत्र से संबंधित आवश्यकताओं के अनुपालन के लिए 15 करोड़ रुपये निर्धारित हैं। मुख्य सचिव ने आरओडब्ल्यू आवेदनों की औसत निपटारा अवधि 45 दिन या उससे कम करने के लिए आवश्यक कदम तेजी से उठाने के निर्देश दिए। आवेदनों और दूरसंचार ढांचे को मिलेगी गति इस दौरान उपायुक्तों की अध्यक्षता वाली जिला स्तरीय दूरसंचार समितियों को और अधिक सक्रिय बनाने पर भी चर्चा हुई। इन समितियों की नियमित त्रैमासिक बैठकें आयोजित करने का प्रस्ताव रखा गया, ताकि जिलों में आरओडब्ल्यू आवेदनों तथा दूरसंचार ढांचे से संबंधित मामलों का स्थानीय स्तर पर शीघ्र समाधान सुनिश्चित किया जा सके। भूमिगत दूरसंचार एवं अन्य बुनियादी ढांचे को खुदाई के दौरान होने वाले नुकसान से बचाने के लिए ‘काल बिफोर यू डिग’ प्रणाली के व्यापक उपयोग पर भी जोर दिया गया। वर्तमान में हरियाणा के विभिन्न विभागों के 1204 उपयोगकर्ता इस प्रणाली पर पंजीकृत हैं। समिति ने सरकारी भवनों तथा अन्य उपयुक्त सरकारी संपत्तियों पर 5जी स्माल सेल, रूफटाप साइट, पोल और फाइबर नेटवर्क के विस्तार को सुविधाजनक बनाने के उपायों पर भी विचार किया। इसके अलावा दूरसंचार टावरों पर स्मार्ट मीटर लगाने की प्रगति की समीक्षा की गई। स्मार्ट मीटर से दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के लिए हरित ऊर्जा की मुक्त पहुंच को सुगम बनाने के साथ-साथ संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के तहत ग्राम पंचायतों में बिजली की खपत और बिलिंग व्यवस्था को बेहतर बनाने में भी सहायता मिलेगी।  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के 25 वर्ष के जनसेवा कार्यों एवं 76वें जन्मदिवस पर आशीर्वाद के दीप जलाने को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बयान पर नान अध्यक्ष का पलटवार

रायपुर  प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री के रूप में जनसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने एवं 76वें जन्मदिवस के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी द्वारा देशभर में आशीर्वाद के दीप जलाने के आह्वान को लेकर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बयान पर छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष  संजय वास्तव ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि दीप जलाना भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और जनआशीर्वाद का प्रतीक है, लेकिन कांग्रेस पार्टी को इस पवित्र भाव का भी उपहास उड़ाने में संकोच नहीं होता।  संजय वास्तव ने कहा कि भूपेश बघेल की मति खराब हो चुकी है, उन्हें दीप के महत्व और उसके पीछे छिपे सनातनी भाव को समझना चाहिए। दीप केवल मिट्टी और तेल से बना एक साधन नहीं, बल्कि हमारी आस्था, संस्कार और शुभकामनाओं का प्रतीक है। जिस प्रकार दीपावली में दीप प्रज्ज्वलित कर मां लक्ष्मी का स्वागत किया जाता है और घर में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है, उसी प्रकार प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के जन्मदिवस पर आशीर्वाद के दीप जलाकर देश की जनता ने उनके दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य एवं निरंतर राष्ट्रसेवा की कामना की है। 25 वर्षों की जनसेवा में गरीब कल्याण रहा सर्वोच्च प्राथमिकता नान अध्यक्ष वास्तव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री के रूप में 25 वर्ष के जनसेवा कार्यों को पूरा देश देख रहा है। उनके नेतृत्व में लागू की गई गरीब कल्याण योजनाओं के केंद्र में हमेशा गरीब, वंचित और जरूरतमंद व्यक्ति रहा है। प्रधानमंत्री जी ने गरीब परिवारों के जीवन में बदलाव लाने के लिए अनेक योजनाएं संचालित कीं, जिनका लाभ देश के करोड़ों लोगों तक पहुंचा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के माध्यम से जरूरतमंद परिवारों को खाद्यान्न उपलब्ध कराया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीबों को पक्के मकान मिले, हर घर नल-जल योजना के माध्यम से घरों तक पानी पहुंचाने का कार्य हुआ तथा आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत गरीब परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिला। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की गरीबों के प्रति संवेदनशील सोच और सेवा के संकल्प का परिणाम है। कांग्रेस ने 58 वर्षों तक शासन किया, तब गरीबों की चिंता क्यों नहीं हुई?  संजय वास्तव ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उन्हें चुनौती देने की आदत है तो मैं उनसे सवाल करता हूं कि कांग्रेस पार्टी ने देश में लगभग 58 वर्षों तक शासन किया, उस समय गरीबों को भरपेट राशन क्यों नहीं मिलता था? गरीबों के पक्के मकान क्यों नहीं बनते थे? गरीबों के इलाज के लिए पर्याप्त सुविधाएं क्यों नहीं थीं और पैसे के अभाव में गरीबों को अपनी जान क्यों गंवानी पड़ती थी? हर घर तक पानी क्यों नहीं पहुंचता था? उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी ने गरीब परिवारों के लिए योजनाएं बनाकर उन्हें सम्मान और सुविधाओं के साथ जीवन जीने का अवसर दिया है। कांग्रेस को इन योजनाओं और उनके लाभार्थियों के बारे में भी जवाब देना चाहिए। करोड़ों आशीर्वाद के दीप जनता के विश्वास का प्रतीक नान अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी को हर गरीब और हर भारतीय का आशीर्वाद प्राप्त है। इसी भावना के साथ भाजपा कार्यकर्ताओं एवं पार्टी ने जनता से आशीर्वाद के दीप जलाने का आह्वान किया था। मुझे प्रसन्नता है कि जनता ने इस आह्वान को स्वीकार किया और पूरे देश में करोड़ों आशीर्वाद के दीप प्रज्ज्वलित हुए। छत्तीसगढ़ में भी लगभग डेढ़ करोड़ आशीर्वाद के दीप जलाए गए। उन्होंने कहा कि  नरेंद्र मोदी जी का तीन बार देश का प्रधानमंत्री बनना जनता के आशीर्वाद का परिणाम है। देश के लगभग 80 प्रतिशत राज्यों में भाजपा की सरकारें होना भी जनता के विश्वास को दर्शाता है। लेकिन भूपेश बघेल और कांग्रेस के नेताओं को यह समझ नहीं आ रहा कि दीप क्या है और आशीर्वाद क्या है। दीप एक प्रतीक है, एक स्वरूप है, जिसके माध्यम से जनता अपनी भावनाएं व्यक्त करती है। दुर्भाग्य है कि कांग्रेस नेताओं के दिमाग में यह दीप नहीं जलता। भाजपा और कांग्रेस के संस्कारों में अंतर स्पष्ट वास्तव ने कहा कि कांग्रेस पार्टी की सोच केवल गांधी परिवार तक सीमित है। जब रायपुर में कार्यक्रम हुआ था, तब सड़कों पर गुलाब की पंखुड़ियां बिछाई गई थीं। ऐसा लग रहा था मानो कोई नई नवेली दुल्हन रायपुर शहर में प्रवेश कर रही हो। कांग्रेस के नेता तलवार से केक काटकर जन्मदिन मनाते हैं, जबकि भाजपा सेवा, संस्कार, राष्ट्रभक्ति और जनआशीर्वाद की भावना से प्रधानमंत्री जी का जन्मदिवस मनाती है। यही भाजपा और कांग्रेस पार्टी की विचारधारा एवं संस्कारों का अंतर है। हर सवाल का जवाब जनता के सामने दिया जाएगा नान अध्यक्ष  संजय वास्तव ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के मुद्दे पर कांग्रेस नेताओं की राजनीति जनता के सामने उजागर हो चुकी है। इसके बावजूद भूपेश बघेल बार-बार चुनौती देने और आरोप लगाने का प्रयास करते हैं। कांग्रेस पार्टी के भीतर से मिल रही चुनौतियों के कारण वे अपने नाम और चर्चा में बने रहने के लिए इस प्रकार के आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा जनता के विकास और गरीब कल्याण के मुद्दे पर काम करती है। कांग्रेस के हर सवाल का जवाब तथ्यों और जनहित के मुद्दों के साथ दिया जाएगा। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के प्रति देश की जनता का आशीर्वाद, विश्वास और स्नेह निरंतर बना हुआ है।

नुक्कड़ नाटक, रंगोली, ड्रॉइंग एवं भाषण प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने दिखाई राष्ट्र निर्माण की कल्पना, युवा शक्ति, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता को बनाया केंद्र

रायपुर ‘सेवा संकल्प अभियान‘ के अंतर्गत गौरेला पेन्ड्रा मरवाही जिले में विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा, जनजागरूकता और राष्ट्र निर्माण की भावना को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया। अभियान के तहत विद्यार्थियों ने कला, अभिनय और अभिव्यक्ति के माध्यम से विकसित भारत की अपनी कल्पना को प्रस्तुत किया। जिले के गौरेला स्थित रानी दुर्गावती चौराहा के पास आईटीआई गौरेला एवं कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की बालिकाओं द्वारा नुक्कड़ नाटक और रंगोली के माध्यम से जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। वहीं ‘पच्चीस करोड़ बच्चों के सपनों का भारत‘ थीम के तहत जिले के शासकीय एवं निजी सहित सभी 905 विद्यालयों में ड्रॉइंग एवं भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। नुक्कड़ नाटक के जरिए युवा शक्ति और राष्ट्र निर्माण का संदेश रानी दुर्गावती चौराहा में आयोजित नुक्कड़ नाटक में बालिकाओं ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में सेवा भाव, नमो गाथा तथा देश को समृद्ध, सशक्त और मजबूत राष्ट्र बनाने में युवा शक्ति की भूमिका को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। नाटक के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह संदेश दिया कि देश के विकास में युवाओं की सक्रिय भागीदारी महत्वपूर्ण है और शिक्षा, कौशल, मेहनत तथा नवाचार के माध्यम से युवा राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभा सकते हैं। नुक्कड़ नाटक में युवाओं को आत्मनिर्भर बनने, स्वरोजगार के अवसरों का लाभ उठाने तथा अपनी क्षमता और कौशल के अनुरूप आर्थिक गतिविधियों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया गया। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना एवं मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना जैसी योजनाओं के माध्यम से युवाओं को स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश भी दिया गया। स्वच्छता से पर्यावरण संरक्षण तक, विद्यार्थियों ने दिखाई जिम्मेदारी जनजागरूकता कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने स्वच्छता को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने, पानी एवं बिजली की बचत करने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाने का संदेश दिया। नाटक के माध्यम से मेहनत, लगन, अनुशासन, एकता और भाईचारे जैसे मूल्यों को भी प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया गया। रंगोली के माध्यम से भी सामाजिक सरोकारों, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र निर्माण से जुड़े संदेशों को आकर्षक रूप में प्रदर्शित किया गया। रंगों और रचनात्मक आकृतियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने समाज को सकारात्मक बदलाव के लिए प्रेरित करने वाले विचारों को सामने रखा। 905 विद्यालयों में गूंजा ‘पच्चीस करोड़ बच्चों के सपनों का भारत‘ ‘पच्चीस करोड़ बच्चों के सपनों का भारत‘ थीम के तहत जिले के सभी 905 शासकीय एवं निजी विद्यालयों में ड्रॉइंग एवं भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए अपनी कल्पनाशीलता और विचारों के माध्यम से विकसित भारत के सपने को चित्रों और भाषणों में अभिव्यक्त किया। ड्रॉइंग प्रतियोगिता में बच्चों ने स्वच्छ एवं सुंदर भारत, हरित पर्यावरण, आधुनिक शिक्षा, तकनीकी प्रगति, आत्मनिर्भरता, सामाजिक एकता और सशक्त राष्ट्र जैसे विषयों को चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया। वहीं भाषण प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने विकसित भारत के निर्माण में शिक्षा, युवा शक्ति, नवाचार, कौशल विकास, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सहभागिता की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए। बच्चों के सपनों में दिखी विकसित भारत की तस्वीर प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों की कल्पनाओं में ऐसा भारत दिखाई दिया, जो स्वच्छ, शिक्षित, आत्मनिर्भर, तकनीकी रूप से सक्षम और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील हो। बच्चों ने अपने चित्रों और विचारों के माध्यम से आधुनिक सुविधाओं के साथ प्रकृति संरक्षण, सामाजिक सद्भाव और समान अवसरों वाले भारत की परिकल्पना प्रस्तुत की। इन गतिविधियों ने विद्यार्थियों को केवल प्रतियोगिता का मंच ही नहीं दिया, बल्कि उन्हें अपने विचारों को सार्वजनिक रूप से व्यक्त करने और राष्ट्र के भविष्य को लेकर अपनी कल्पना साझा करने का अवसर भी प्रदान किया। इससे बच्चों में रचनात्मक सोच, आत्मविश्वास, अभिव्यक्ति कौशल और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को प्रोत्साहन मिला। सेवा संकल्प अभियान से जुड़ी युवा सोच, विकसित भारत का संकल्प ‘सेवा संकल्प अभियान‘ के अंतर्गत आयोजित इन गतिविधियों के माध्यम से जिले के बच्चों और युवाओं ने सेवा, समर्पण, अनुशासन और जनभागीदारी की भावना को अभिव्यक्त किया। नुक्कड़ नाटक, रंगोली, ड्रॉइंग और भाषण जैसे माध्यमों से विद्यार्थियों ने यह संदेश दिया कि विकसित भारत का निर्माण केवल योजनाओं और संसाधनों से नहीं, बल्कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी, जिम्मेदारी और सकारात्मक सोच से भी संभव है। जिले के 905 विद्यालयों में विद्यार्थियों की सहभागिता ने अभियान को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ा। बच्चों की रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से विकसित भारत की कल्पना को समाज के सामने लाने वाली ये गतिविधियां नई पीढ़ी में राष्ट्र निर्माण की भावना, आत्मनिर्भरता और सामाजिक जिम्मेदारी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुईं।

शावकों का जन्म चीता संरक्षण की हमारी यात्रा में आशा, जीवटता और सफलता का सुंदर प्रतीक

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जीवन अपना रास्ता खुद ढूंढ ही लेता है और जीवन की यही प्रकृति इसे और भी अधिक रोमांचक बनाती है। एक वक्त था, जब मध्यप्रदेश में गिनती के चीते हुआ करते थे। आज यहां चीतों की संख्या बढ़कर 56 हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अत्यंत हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 17 सितंबर 2022 को कूनो राष्ट्रीय उद्यान से शुरू हुई चीता पुनर्स्थापना की ऐतिहासिक यात्रा अब एक नए मुकाम पर पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि कूनों में बीते दिनों जन्मे चार नन्हें शावक चीता संरक्षण की हमारी यात्रा में आशा, जीवटता और सफलता का सुंदर प्रतीक है। पुनर्स्थापना के चार वर्ष पूर्ण होने के अगले ही दिन शुक्रवार (18 सितम्बर को) भारत में ही जन्मी मादा चीता केजीपी12 ने कूनों में चार नन्हें शावकों को जन्म दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रोजेक्ट चीता के लिये यह ऐतिहासिक और हर्ष का क्षण है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि न केवल देश में चीतों की संख्या बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कूनो का प्राकृतिक वातावरण चीतों के प्रजनन और उनके संरक्षण के लिए अनुकूल बन रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चीता प्रोजेक्ट से जुड़े सभी अधिकारी-कर्मचारियों को बधाई और शुभकामनाएं दी है। प्रोजेक्ट चीता : 56 हुआ भारत में चीतों का कुनबा प्रमुख तथ्य     कूनो में गूंजी चीतों की नई किलकारी – भारत में जन्मी मादा KGP12 ने 4 शावकों को दिया जन्म, 52 से बढ़कर 56 हुआ भारत में चीतों का कुनबा।     मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रोजेक्ट चीता के संरक्षण, संवर्धन और इनकी सुरक्षा पर हो रहा है निरंतर ठोस कार्य।     भारत में जन्मी मादा चीता KGP12 ने दिया 4 शावकों को जन्म। नई आमद के साथ चीता संख्या 52 से बढ़कर 56 हो गई है।     चार वर्ष – चार नई जिंदगियां। प्रोजेक्ट चीता की यात्रा में यह उपलब्धि भारत में चीता संरक्षण और प्राकृतिक प्रजनन की सफलता का महत्वपूर्ण प्रतीक है। मध्यप्रदेश चीतों के संरक्षण का मजबूत केंद्र बन गया है। वर्ष 2022 से 2026 तक चीता पुनर्स्थापना का सफल सफर     17 सितंबर 2022 – नामीबिया से 8 चीते कूनो पहुंचे।     फरवरी 2023 – दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते भारत लाए गए।     फरवरी 2026 – बोत्सवाना से 9 चीते भारत लाए गए।     इन पुनर्स्थापना प्रयासों और भारत में हुए प्रजनन के परिणामस्वरूप अब कुल 56 जीवित चीते हैं।     52 से 56 – चीता परिवार में चार नए सदस्य     चार वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर भारत में 52 जीवित चीते थे।     KGP12 द्वारा 18 सितम्बर 2026 को चार शावकों को जन्म देने के बाद अब संख्या 56 हो गई है। भारत में जन्मे चीतों की संख्या अब 36 हो गई है। नए शावकों के साथ भारत में जन्मी चीता पीढ़ी का विस्तार और मजबूत हुआ है। मध्यप्रदेश में चीता संरक्षण का हो रहा विस्तार     वर्तमान में मध्यप्रदेश प्रोजेक्ट चीता का प्रमुख केंद्र है।     कूनो राष्ट्रीय उद्यान में 49 चीते और गांधी सागर वन्यजीव अभ्यारण्य में 3 चीते थे।     चार नए शावकों के जन्म के बाद कूनो में चीतों की संख्या 53 और मध्यप्रदेश में कुल चीता संख्या 56 हो गई है।     कूनो के साथ गांधी सागर में भी चीता संरक्षण का सफल विस्तार किया गया है। पुनर्स्थापना से प्रजनन तक     17 सितंबर 2022 को नामीबिया से लाए गए 8 चीतों के साथ भारत में प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत हुई थी।     इसके बाद दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना से भी चीते भारत लाए गए।     भारत में हुआ चीतों का प्रजनन। भारत में जन्मी मादा द्वारा चार शावकों को जन्म देना इस यात्रा में नई उपलब्धि है।     भारत में चीता संरक्षण पुर्नस्थापना तक ही सीमित नहीं, अब यह प्रजनन और नई पीढ़ी के संरक्षण के चरण में पहुंच चुका है। प्रधानमंत्री की पहल और संरक्षक के रूप में मध्यप्रदेश शासन की भूमिका     प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की ऐतिहासिक पहल से शुरू हुए प्रोजेक्ट चीता को मध्यप्रदेश शासन द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में आगे बढ़ाया जा रहा है। वन विभाग, वन्यजीव विशेषज्ञों, पशु चिकित्सकों और मैदानी अमले द्वारा चीतों की सुरक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, निगरानी एवं आवास प्रबंधन का कार्य लगातार पूरी मुस्तैदी से किया जा रहा है।