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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल से पूजा के डॉक्टर बनने के सपने को मिला संबल

रायपुर प्रतिभा, मेहनत और दृढ़ संकल्प के सामने आर्थिक अभाव और विपरीत परिस्थितियां भी बाधा नहीं बन सकतीं। सरगुजा जिले की आदिवासी बेटी कुमारी पूजा सिंह ने अपने संघर्ष और लगन से इसे साबित कर दिखाया है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाली और 66 प्रतिशत दिव्यांगता के बावजूद पूजा ने नीट-2026 में सफलता हासिल कर मेडिकल कॉलेज जगदलपुर में प्रवेश प्राप्त किया है। उनके डॉक्टर बनने के सपने को आर्थिक परिस्थितियों के कारण रुकने न देने के लिए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के निर्देश पर कलेक्टर  अजीत वसंत ने जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) मद से शिक्षण शुल्क के लिए 2 लाख 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल से अब पूजा के लिए मेडिकल शिक्षा की राह आसान हुई है। राज्य शासन की मंशा है कि आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभावान विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा आर्थिक अभाव के कारण बाधित न हो। पूजा की पारिवारिक परिस्थितियों और उनकी उपलब्धि को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा उन्हें आवश्यक आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराया गया है। कलेक्टर  अजीत वसंत ने पूजा की सफलता की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद पूजा ने जिस लगन, आत्मविश्वास और मेहनत के साथ नीट में सफलता हासिल की है, वह अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणादायी है। मजदूर मां की मेहनत और बेटी के हौसले ने दिखाई सफलता की राह कुमारी पूजा सिंह विकासखंड सीतापुर के ग्राम राधापुर की निवासी हैं। उनका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। पूजा के पिता  चक्रधर सिंह दूसरी शादी के बाद अपनी दूसरी पत्नी के साथ निवास करते हैं। ऐसे में परिवार के भरण-पोषण और बेटी की पढ़ाई की जिम्मेदारी उनकी मां के कंधों पर रही। पूजा की मां के पास स्वयं की कृषि भूमि नहीं है। परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए वे गांव में दूसरे लोगों के खेतों में मजदूरी करती हैं। सीमित आय और संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी बेटी की पढ़ाई जारी रखने में कोई कसर नहीं छोड़ी। मां की मेहनत और बेटी के दृढ़ संकल्प ने मिलकर पूजा के सपने को आगे बढ़ाया। शासकीय स्कूल से पढ़ाई, घर पर रहकर चार साल की नीट तैयारी पूजा ने अपनी प्रारंभिक एवं पूर्व माध्यमिक शिक्षा ग्राम राधापुर में पूरी की। इसके बाद उन्होंने शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सीतापुर से हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी की पढ़ाई पूरी की। वर्ष 2022 में उन्होंने कक्षा 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए बड़े शहर जाकर महंगी कोचिंग ले सकें। इसके बावजूद पूजा ने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया। उन्होंने वर्ष 2022 से 2026 तक लगातार चार वर्षों तक घर पर रहकर नीट परीक्षा की तैयारी की। 66 प्रतिशत दिव्यांगता और आर्थिक चुनौतियों के बीच भी उन्होंने डॉक्टर बनने के अपने संकल्प को कमजोर नहीं पड़ने दिया। चार साल की मेहनत लाई रंग, मेडिकल कॉलेज जगदलपुर में मिला प्रवेश पूजा की निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास का परिणाम वर्ष 2026 में सामने आया। उन्होंने नीट परीक्षा में सफलता हासिल की और काउंसलिंग के माध्यम से मेडिकल कॉलेज जगदलपुर में प्रवेश प्राप्त किया। सीमित संसाधनों के बीच एक मजदूर मां की बेटी का मेडिकल कॉलेज तक पहुंचना उनके परिवार के साथ-साथ पूरे सरगुजा जिले के लिए गौरव की उपलब्धि है। पूजा की सफलता यह संदेश देती है कि कठिन परिस्थितियां लक्ष्य की राह में स्थायी बाधा नहीं होतीं। यदि संकल्प मजबूत हो और मेहनत निरंतर जारी रहे तो सीमित संसाधनों में भी बड़े सपनों को साकार किया जा सकता है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल से मिली आर्थिक सहायता ने अब यह सुनिश्चित किया है कि पूजा की मेडिकल शिक्षा आर्थिक तंगी के कारण बाधित न हो। मां की मेहनत, बेटी का संघर्ष और शासन का सहयोग—इन तीनों के समन्वय ने पूजा के डॉक्टर बनने के सपने को नई उड़ान दी है। पूजा की यह सफलता सरगुजा सहित प्रदेश के उन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े लक्ष्य निर्धारित कर उन्हें हासिल करने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं।

अंतर्राज्यीय समन्वय, सीसीटीवी एवं तकनीकी साक्ष्यों से 03 आरोपी गिरफ्तार

भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा गंभीर एवं संगठित अपराधों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई, तकनीकी साक्ष्यों के प्रभावी उपयोग तथा पड़ोसी राज्यों की पुलिस के साथ बेहतर अंतर्राज्यीय समन्वय के माध्यम से अपराधों के विरुद्ध लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में सिंगरौली पुलिस ने जयंत स्थित कंचन ज्वेलर्स में हुई डकैती की सनसनीखेज घटना का महज 06 घंटे में पर्दाफाश करते हुए अंतर्राज्यीय गिरोह के 03 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने कार्रवाई में डकैती में लूटे गए 200.7 ग्राम सोने के आभूषण, 205.410 ग्राम चांदी के आभूषण, 1 लाख 04 हजार 200 रुपये नगद, 02 मोटरसाइकिल, 01 पिस्टल, 02 कट्टे एवं 01 मोबाइल फोन बरामद किया  है। हथियारों के बल पर ज्वेलर्स में डकैती जयंत स्थित कंचन ज्वेलर्स में आरोपियों द्वारा पिस्टल एवं कट्टे लहराकर दुकान के कर्मचारियों को धमकाते हुए डकैती की वारदात को अंजाम दिया गया। विरोध करने पर आरोपियों द्वारा दो व्यक्तियों पर हथियारों से हमला किया गया तथा घटना के दौरान फायरिंग भी की गई। घटना की सूचना मिलते ही सिंगरौली पुलिस ने बिना समय गंवाए वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में आरोपियों की धरपकड़ एवं लूटी गई संपत्ति की बरामदगी के लिए विशेष पुलिस टीमें गठित कीं। नगर पुलिस अधीक्षक विंध्यनगर, एसडीओपी मोरवा एवं एसडीओपी चितरंगी के नेतृत्व में गठित पुलिस टीमों द्वारा घटनास्थल एवं आसपास के क्षेत्रों के सीसीटीवी फुटेज का बारीकी से विश्लेषण किया गया। साथ ही संदिग्धों के आवागमन एवं संभावित भागने के मार्गों की जानकारी एकत्र कर तत्काल कार्रवाई प्रारंभ की गई। घटना की गंभीरता को देखते हुए सोनभद्र (उत्तरप्रदेश), बलरामपुर (छत्तीसगढ़), गढ़वा एवं पलामू (झारखंड) पुलिस को तत्काल सूचना देकर अंतर्राज्यीय सीमाओं एवं संभावित मार्गों पर अलर्ट जारी कराया गया। बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन तथा अन्य संभावित मार्गों पर पुलिस टीमों द्वारा सघन चेकिंग एवं संदिग्धों की तलाश की गई। इसी दौरान प्राप्त मुखबिर सूचना के आधार पर संदिग्ध मोटरसाइकिलों का पीछा करते हुए पुलिस ने दो आरोपियों को पकड़ा। पीछा किए जाने के दौरान आरोपियों की मोटरसाइकिल दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसमें दोनों घायल हो गए। पुलिस ने उन्हें तत्काल उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया। अंतर्राज्यीय पुलिस समन्वय के तहत उत्तरप्रदेश पुलिस के सहयोग से गिरोह के एक अन्य आरोपी को भी गिरफ्तार किया गया। आरोपी जवाबी फायरिंग में घायल हुआ था। उसके कब्जे से घटना में प्रयुक्त दूसरी मोटरसाइकिल तथा उसके हिस्से में आए लूट के आभूषण एवं नगदी जब्त की गई। पुलिस द्वारा गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर घटना में शामिल अन्य आरोपियों एवं वारदात से जुड़े नेटवर्क के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है। गिरोह के शेष आरोपियों की गिरफ्तारी तथा शेष लूटे गए मशरूका की बरामदगी के लिए पुलिस की विशेष टीमें विभिन्न राज्यों में भेजी गई हैं। प्रकरण में आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है।  

दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण पर योगी सरकार का जोर, हर विधानसभा क्षेत्र में लगेंगे कल्याण शिविर

योगी सरकार का दिव्यांगजनों को सशक्त बनाने पर जोर, हर विधानसभा क्षेत्र में लगेंगे कल्याण शिविर दिव्यांगजनों को घर के नजदीक मिलेंगी सुविधाएं, 10 अक्टूबर तक शिविर पूरा करने का लक्ष्य सहायक उपकरण योजना के तहत पात्र दिव्यांगजनों को मिलेंगे कृत्रिम अंग और आवश्यक उपकरण एक ही स्थान पर पंजीकरण, पात्रता सत्यापन और विभिन्न सरकारी योजनाओं की मिलेगी जानकारी जिलाधिकारियों और मुख्य विकास अधिकारियों को विभागों के बीच समन्वय के निर्देश लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल करने जा रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में सहायक उपकरण योजना के तहत पात्र दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग और आवश्यक सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए प्रदेशभर में व्यापक स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सेवा सेतु अभियान के अंतर्गत प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में दिव्यांग कल्याण शिविर लगाए जाएंगे, जिन्हें 10 अक्टूबर 2026 तक पूरा कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। योगी सरकार की इस पहल का उद्देश्य सरकारी योजनाओं का लाभ दिव्यांगजनों तक उनके निकटतम क्षेत्र में पहुंचाना है, ताकि उन्हें आवश्यक सुविधाओं के लिए सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें। शिविरों के माध्यम से पात्र लाभार्थियों को एक ही स्थान पर विभिन्न योजनाओं की जानकारी, आवेदन, पात्रता सत्यापन और लाभ उपलब्ध कराने की सुविधा मिलेगी। एक ही स्थान पर मिलेंगी कई योजनाओं की सुविधाएं दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की ओर से आयोजित होने वाले इन शिविरों में पात्र दिव्यांगजनों का चिन्हांकन और पंजीकरण किया जाएगा। सहायक उपकरणों के लिए आवेदन लेने के साथ आवश्यक अभिलेखों एवं पात्रता का सत्यापन भी होगा। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पात्र लाभार्थियों को कृत्रिम अंग और उनकी आवश्यकता के अनुरूप सहायक उपकरण उपलब्ध कराने की कार्यवाही की जाएगी। इसके अलावा विभिन्न विभागों की दिव्यांगजन हितैषी योजनाओं की जानकारी भी एक ही स्थान पर दी जाएगी। जरूरत के अनुसार लाभार्थियों को स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने के साथ आवेदन प्रक्रिया के संबंध में मार्गदर्शन भी प्रदान किया जाएगा। अधिकारियों को समन्वय के निर्देश शासनादेश के अनुसार शिविरों के प्रभावी आयोजन के लिए जिला स्तर पर जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी के माध्यम से संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया जाएगा। दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की ओर से अधिकारियों को अधिक से अधिक पात्र लाभार्थियों तक शिविरों की सूचना पहुंचाने और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। योगी सरकार की यह पहल दिव्यांगजनों की गतिशीलता, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सहभागिता बढ़ाने में सहायक होगी। लाभार्थियों को उनके नजदीकी क्षेत्र में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने से सरकारी योजनाओं तक उनकी पहुंच आसान होगी। यह अभियान ‘सरकार की योजनाओं का लाभ लाभार्थी के द्वार तक’ पहुंचाने के संकल्प को आगे बढ़ाने के साथ दिव्यांगजनों के सम्मानजनक और सुगम जीवन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

हतारी वंदन से सशक्त हो रही छत्तीसगढ़ की नारी शक्ति, आत्मनिर्भरता को मिल रही नई उड़ान

रायपुर  महतारी वंदन योजना महिलाओं के लिए आर्थिक संबल और आत्मविश्वास का महत्वपूर्ण आधार बन रही है। योजना के माध्यम से महिलाओं को मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता उन्हें अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ परिवार की जरूरतों में सहयोग करने और आर्थिक निर्णयों में अधिक आत्मविश्वास के साथ भागीदारी का अवसर दे रही है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने महिला नेतृत्व वाले विकास को विकसित भारत 2047 की यात्रा का महत्वपूर्ण आधार बताया है। उनका विजन है कि महिलाएं केवल विकास की लाभार्थी न रहें, बल्कि विकास की नेतृत्वकर्ता और भागीदार बनें। वित्तीय समावेशन, उद्यमिता, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, स्वच्छता और शासन सहित विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भूमिका इसी सोच को आगे बढ़ाती है। इसी व्यापक सोच का जमीनी प्रभाव गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के ग्राम सारबहरा की कविता चक्रधारी के जीवन में भी दिखाई देता है। कविता महतारी वंदन योजना की हितग्राही हैं। उन्होंने बताया कि योजना की 31वीं किस्त की राशि उनके बैंक खाते में प्राप्त हो गई है। उनके लिए यह राशि रोजमर्रा की छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने में उपयोगी साबित हो रही है। तीज-त्योहार से पहले खाते में राशि आने से बढ़ी खुशी कविता चक्रधारी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि तीज-त्योहार के समय घर-परिवार की कई छोटी-छोटी जरूरतें सामने आती हैं। ऐसे समय में महतारी वंदन योजना की राशि खाते में पहुंचना उनके लिए विशेष रूप से मददगार है। त्योहार से पहले राशि मिलने से उनकी खुशी और भी बढ़ गई है। उन्होंने बताया कि इस सहायता से आवश्यक घरेलू खर्चों को पूरा करने में सुविधा होती है और परिवार की जरूरतों में भी सहयोग मिल पाता है। आर्थिक सहायता से बढ़ रहा महिलाओं का आत्मविश्वास कविता ने कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। नियमित आर्थिक सहायता मिलने से महिलाओं में अपनी आवश्यकताओं को लेकर स्वयं निर्णय लेने का आत्मविश्वास बढ़ रहा है। छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भरता कम होने से महिलाओं में आत्मनिर्भरता की भावना मजबूत हो रही है। उन्होंने कहा कि आर्थिक सशक्तिकरण केवल किसी एक परिवार की स्थिति को बेहतर नहीं करता, बल्कि इसका सकारात्मक प्रभाव पूरे परिवार पर पड़ता है। जब महिला अपने खर्च और आवश्यकताओं को लेकर निर्णय लेने में सक्षम होती है, तो परिवार के आर्थिक प्रबंधन में भी उसकी भूमिका मजबूत होती है। कविता जैसी महिलाओं के अनुभव बताते हैं कि योजनाओं का वास्तविक महत्व तब सामने आता है, जब उनका लाभ सीधे परिवारों के जीवन में दिखाई देता है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से मिलने वाली नियमित सहायता महिलाओं के लिए आर्थिक सहयोग के साथ-साथ आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता को मजबूत करने का माध्यम बन रही है। महिला सशक्तिकरण से विकसित भारत की ओर प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विजन में नारी शक्ति को विकसित भारत की निर्माण यात्रा का महत्वपूर्ण आधार माना गया है। महिला नेतृत्व वाले विकास की यह अवधारणा महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के साथ उन्हें विकास की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनाने पर केंद्रित है। छत्तीसगढ़ में महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा सकता है। योजना से जुड़ी कविता चक्रधारी की कहानी यह दर्शाती है कि आर्थिक सहायता मिलने से महिलाओं के दैनिक जीवन में सुविधा के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति जताया आभार महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त की राशि प्राप्त होने पर कविता चक्रधारी ने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति हृदय से धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए संचालित ऐसी योजनाओं से उन्हें नियमित आर्थिक सहयोग मिल रहा है, जिससे वे अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने में अधिक सक्षम हो रही हैं। कविता के चेहरे की खुशी और उनके शब्दों में व्यक्त संतोष सेवा संकल्प अभियान की उस भावना को सामने लाता है, जिसमें जनसेवा, जनभागीदारी और योजनाओं के जमीनी प्रभाव को केंद्र में रखा गया है। महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण केवल उनके जीवन में बदलाव नहीं लाता, बल्कि मजबूत परिवार, आत्मनिर्भर समाज और विकसित भारत की नींव को भी मजबूत करता है।

‘बस्तर सेवा संकल्प अभियान’ के तहत शहीदों की याद में 1986 स्थानों पर जलाए गए दीये

रायपुर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के राष्ट्रसेवा एवं जनसेवा के संकल्प के लिए मनाए जा रहे सेवा संकल्प अभियान को नया आयाम मिला जब गुरुवार को इस अभियान के अंतर्गत बस्तर के शहीदों की याद में 'बस्तर सेवा संकल्प अभियान’ के तहत पूरे बस्तर संभाग में विशेष दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान बस्तर की नक्सल हिंसा से प्रभावित रही धरती पर शांति, विकास और सेवा के संकल्प के साथ 1986 स्थानों पर दीप प्रज्ज्वलित किए गए। इनमें नक्सल हिंसा में प्रभावित एवं जनहानि वाले गांव, पुनर्वास केंद्र, शहीद स्मारक एवं प्रतिमा स्थल, नक्सल उन्मूलन अभियान में सुरक्षा जवानों को जनसमर्थन देने वाले स्थान, सुरक्षा कैंप, पुलिस थाने तथा पूर्व में अति नक्सल प्रभावित रहे गांव शामिल रहे। अभियान का उद्देश्य बस्तर के उन क्षेत्रों में सेवा, शांति और विश्वास की रोशनी पहुंचाना रहा, जिन्होंने लंबे समय तक नक्सल हिंसा का दंश झेला है। इसमें कांकेर से लेकर झीरम घाटी,  सुकमा के कोंटा और कर्रेगुट्टा पहाड़ियों पर भी द्वीप जलाए गए। नक्सल हिंसा के साक्षी रहे 107 गांवों में जले दीप बस्तर सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत ऐसे 107 गांवों में दीप प्रज्ज्वलित किए गए, जहां पूर्व में बड़ी नक्सल घटनाएं हुई थीं और बड़ी संख्या में जवानों अथवा आम नागरिकों की मृत्यु हुई थी। इनमें बीजापुर के 40, सुकमा के 31, दंतेवाड़ा के 11, नारायणपुर के 11, कांकेर के 9, कोंडागांव के 3 और बस्तर जिले के 2 गांवों में दीए जलाए गए। इन गांवों में दीप प्रज्ज्वलन के माध्यम से हिंसा के अंधकार से शांति और विकास की ओर बढ़ते बस्तर का संदेश दिया गया। पुनर्वास केंद्रों से लेकर शहीद स्मारकों तक पहुंची दीपों की रोशनी       बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों में स्थापित 9 पुनर्वास केंद्रों में भी दीप प्रज्ज्वलित किए गए। इनमें बीजापुर में 3 और सुकमा, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, कांकेर, कोंडागांव और बस्तर में एक-एक पुनर्वास केंद्र शामिल हैं। इसी तरह शहीदों की स्मारक प्रतिमाओं एवं स्मृति स्थलों के समीप 177 स्थानों पर दीप जलाकर बस्तर की शांति और सुरक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले वीरों को नमन किया गया। इनमें बीजापुर में 5, सुकमा में 12, दंतेवाड़ा में 13, नारायणपुर में 23, कांकेर में 82, कोंडागांव में 32 और बस्तर में 10 स्थान शामिल हैं। नक्सल उन्मूलन अभियान में सुरक्षा जवानों का साथ देने वाले स्थान भी हुए रोशन    अभियान के तहत उन 147 स्थानों पर भी दीप प्रज्ज्वलित किए गए, जहां नक्सल उन्मूलन अभियान के दौरान सुरक्षा जवानों को स्थानीय लोगों का महत्वपूर्ण सहयोग मिला। इनमें बीजापुर के 31, सुकमा के 59, दंतेवाड़ा के 6, नारायणपुर के 27, कांकेर के 5, कोंडागांव के 16 और बस्तर जिले के 3 स्थान शामिल हैं। इसके अलावा नक्सल उन्मूलन अभियान के उद्देश्य से स्थापित 393 सुरक्षा कैंपों में भी दीप प्रज्ज्वलित किए गए। बीजापुर में 130, सुकमा में 91, दंतेवाड़ा में 38, नारायणपुर में 56, कांकेर में 55, कोंडागांव में 10 और बस्तर में 13 सुरक्षा कैंपों में दीप जलाए गए। 122 थानों में भी जला सेवा और सुरक्षा का दीप    बस्तर संभाग के 122 पुलिस थानों में भी दीप प्रज्ज्वलित किए गए। इनमें बीजापुर के 22, सुकमा के 19, दंतेवाड़ा के 12, नारायणपुर के 14, कांकेर के 25, कोंडागांव के 15 और बस्तर जिले के 15 थाने शामिल हैं। यह दीप उन जवानों और पुलिसकर्मियों के प्रति सम्मान का प्रतीक बने, जो बस्तर में शांति एवं सुरक्षा के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। पूर्व में अति नक्सल प्रभावित रहे 1,031 गांवों में भी रोशन हुआ हर घर    ‘बस्तर सेवा संकल्प अभियान’ का सबसे व्यापक स्वरूप पूर्व में अति नक्सल प्रभावित रहे, जहां नक्सलियों का डेरा रहा, ऐसे 1,031 गांवों में देखने को मिला। इन गांवों में भी दीप प्रज्ज्वलित कर शांति और विकास के नए दौर का स्वागत किया गया। इनमें बीजापुर के 593, सुकमा के 32, दंतेवाड़ा के 192, नारायणपुर के 93, कांकेर के 85, कोंडागांव के 22 और बस्तर जिले के 14 गांव शामिल हैं। सात जिलों में एक साथ जली सेवा संकल्प की ज्योति    बस्तर संभाग के सातों जिलों में आयोजित इस विशेष दीप प्रज्ज्वलन अभियान में बीजापुर में 824, दंतेवाड़ा में 273, कांकेर में 262, सुकमा में 245, नारायणपुर में 225, कोंडागांव में 99 और बस्तर जिले में 58 स्थानों पर दीप प्रज्ज्वलित किए गए। इस प्रकार संभाग में कुल 1,986 स्थानों पर सेवा संकल्प की ज्योति प्रज्वलित हुई।          बस्तर सेवा संकल्प अभियान के तहत जलाए गए ये दीप केवल रोशनी का प्रतीक नहीं, बल्कि नक्सल हिंसा से शांति की ओर बढ़ते बस्तर, शहीदों के सम्मान, सुरक्षा जवानों के प्रति कृतज्ञता और विकास के नए संकल्प का प्रतीक बने। बस्तर के उन गांवों और क्षेत्रों में, जहां कभी हिंसा और भय का वातावरण रहा, दीपों की रोशनी ने यह संदेश दिया कि अब बस्तर शांति, विश्वास और विकास के नए अध्याय की ओर आगे बढ़ रहा है।

लखपति दीदी बनीं कमलेश यादव, मेहनत और स्वसहायता समूह के सहारे लिखी आत्मनिर्भरता की कहानी

रायपुर  सेवा संकल्प अभियान के तहत शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों की सफलता की कहानियां ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आए सकारात्मक बदलाव और आत्मनिर्भरता की तस्वीर प्रस्तुत कर रही हैं। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत मंझगवा की कमलेश यादव की कहानी भी इसी बदलाव की प्रेरक मिसाल है। कभी छोटे-से व्यवसाय को आगे बढ़ाने का सपना देखने वाली कमलेश यादव आज अपनी मेहनत, हुनर और स्वसहायता समूह से मिले आर्थिक सहयोग के बल पर ‘लखपति दीदी‘ के रूप में नई पहचान बना रही हैं। कमलेश यादव वंदना महिला स्वसहायता समूह से जुड़ीं और समूह की अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालते हुए आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। स्वसहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आरएफ, सीआईएफ और बैंक लोन के माध्यम से वित्तीय सहयोग मिला। कमलेश ने इस सहयोग का उपयोग केवल आर्थिक सहायता के रूप में करने के बजाय इसे आय का स्थायी साधन बनाने की दिशा में लगाया। उन्होंने प्राप्त सहयोग से चिकन स्टोर का व्यवसाय शुरू किया। इसके साथ ही वे सिलाई का कार्य भी कर रही हैं। व्यवसाय और हुनर के इन दोनों माध्यमों ने उनकी आय बढ़ाने के साथ परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कमलेश यादव की कहानी इस बात को रेखांकित करती है कि जब महिलाओं को संगठित होने का मंच, आर्थिक संसाधनों तक पहुंच और अपने हुनर को आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है, तो वे अपने परिवार के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर सकती हैं। आज कमलेश की वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक हो गई है। आर्थिक गतिविधियों में निरंतर भागीदारी और आत्मविश्वास के साथ वे ‘लखपति दीदी‘ के रूप में अपनी नई पहचान बना रही हैं। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के महिला सशक्तिकरण के विजन से जुड़ी ऐसी कहानियां देश में महिलाओं को केवल योजनाओं का लाभार्थी बनाने के बजाय उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के महिला सशक्तिकरण के विजन में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को संगठित कर उन्हें आर्थिक गतिविधियों से जोड़ना महत्वपूर्ण पहल है। लखपति दीदी‘ की अवधारणा भी ग्रामीण महिलाओं की आय और आर्थिक भागीदारी को बढ़ाने की इसी सोच से जुड़ी है। कमलेश यादव की सफलता इस विजन के स्थानीय स्तर पर दिखाई देने वाले प्रभाव का उदाहरण है। स्वसहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें वित्तीय संसाधन मिले और उन्होंने अपनी क्षमता तथा मेहनत के आधार पर व्यवसाय खड़ा किया। चिकन स्टोर और सिलाई के माध्यम से आय के अलग-अलग स्रोत विकसित कर उन्होंने यह साबित किया कि अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं अपने हुनर को आजीविका और व्यवसाय में बदल सकती हैं।  कमलेश यादव का कहना है कि महिला स्वसहायता समूह से जुड़ना उनके जीवन में बदलाव का महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। समूह के माध्यम से मिले वित्तीय सहयोग ने उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने और अपने हुनर को व्यवसाय में बदलने का अवसर दिया। वे अपनी सफलता के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करती हैं। उनका कहना है कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मिल रहा सहयोग उनके जैसे अनेक परिवारों के लिए नई उम्मीद और बेहतर भविष्य का रास्ता तैयार कर रहा है। गांव की अन्य महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा कमलेश यादव की सफलता अब केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं है। उनकी उपलब्धि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही है। उनकी कहानी बताती है कि स्वसहायता समूह से जुड़कर महिलाएं सामूहिक रूप से आर्थिक गतिविधियों से जुड़ सकती हैं, वित्तीय संसाधनों का उपयोग कर सकती हैं और अपने पारंपरिक हुनर को आय के स्थायी साधन में बदल सकती हैं। कमलेश की यात्रा सपने से शुरुआत, समूह से जुड़ाव, आर्थिक सहयोग, व्यवसाय की स्थापना और अंततः ‘लखपति दीदी‘ की पहचान तक पहुंचने की कहानी है। यह कहानी बताती है कि सही अवसर, निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास के साथ ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख सकती हैं।  महिला सशक्तिकरण केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को अपने निर्णय लेने, रोजगार के साधन विकसित करने और सम्मान के साथ आगे बढ़ने का अवसर देने की दिशा में एक निरंतर प्रक्रिया है।  

PAVITRA से प्रदूषण नियंत्रण होगा वैज्ञानिक और डेटा आधारित, जयपुर में अधिकारियों को दी गई तकनीकी जानकारी

जयपुर  राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बॉम्बे की ओर से PAVITRA  भारत के लिए वायु प्रदूषण प्रबंधन एवं हस्तक्षेप उपकरण विषय पर शुक्रवार को कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में वायु प्रदूषण के स्रोतों की पहचान, उत्सर्जन का आकलन तथा प्रदूषण नियंत्रण के विभिन्न उपायों के संभावित प्रभावों का वैज्ञानिक एवं आंकड़ा आधारित विश्लेषण करने के संबंध में अधिकारियों को तकनीकी जानकारी दी गई। इस अवसर पर राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों ने मंडल द्वारा प्रदूषण नियंत्रण के किए जा रहे विभिन्न उपायों की जानकारी दी। इस अवसर पर आरएसपीसीबी के।अधिकारियों ने कार्यशाला में PAVITRA की कार्यप्रणाली, आंकड़ा विश्लेषण एवं इसके व्यावहारिक उपयोग से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञों के साथ चर्चा की  PAVITRA एक निर्णय-सहायक मंच कार्यशाला में विशेषज्ञों ने बताया कि PAVITRA एक निर्णय-सहायक मंच है, जिसके माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में प्रस्तावित नीतिगत एवं नियंत्रण उपायों के आधार पर उत्सर्जन में संभावित कमी तथा उसके परिणामस्वरूप वायु में सूक्ष्म कण पीएम-2.5 की सांद्रता में होने वाले बदलाव का आकलन किया जा सकता है। इससे वायु गुणवत्ता प्रबंधन से जुड़े निर्णयों के लिए वैज्ञानिक आधार उपलब्ध कराने में सहायता मिलती है। प्रस्तुति के दौरान विशेषीकृत बहु-प्रदूषक उत्सर्जन सूची—स्मॉग इंडिया— वायुमंडलीय परिवहन एवं रसायन विज्ञान आधारित मॉडल इनमैप-पवित्रा तथा आईएसआरएम-पवित्रा सहित PAVITRA के विभिन्न तकनीकी घटकों की जानकारी दी गई। बताया गया कि स्मॉग इंडिया के माध्यम से देशभर में विभिन्न प्रदूषकों के उत्सर्जन का विस्तृत आंकड़ा आधारित भौगोलिक विवरण उपलब्ध होता है, जिसे PAVITRA के माध्यम से वायुमंडलीय मॉडलिंग से जोड़कर विभिन्न हस्तक्षेपों के संभावित प्रभावों का आकलन किया जा सकता है। कार्यशाला में PAVITRA डैशबोर्ड का प्रत्यक्ष प्रदर्शन भी किया गया। इसके माध्यम से अधिकारियों को यह समझाया गया कि किसी क्षेत्र में परिवहन, उद्योग, कृषि अवशेष जलाने, ईंधन में बदलाव तथा अन्य स्रोतों से संबंधित नियंत्रण उपायों को लागू करने की स्थिति में उत्सर्जन और पीएम-2.5 के स्तर में संभावित परिवर्तन का किस प्रकार आकलन किया जा सकता है। विशेषज्ञों ने बताया कि PAVITRA का उपयोग आधारभूत आकलन, कार्ययोजना के लिए प्राथमिकता निर्धारण, विभिन्न संभावित परिस्थितियों के आधार पर योजना निर्माण तथा क्रियान्वयन में तकनीकी सहयोग के लिए किया जा सकता है। इसके माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों एवं प्रदूषण स्रोतों के प्रभाव का तुलनात्मक अध्ययन कर प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े उपायों की प्राथमिकता निर्धारित करने में सहायता मिल सकती है। कार्यशाला में विभिन्न क्षेत्रों में उत्सर्जन में कमी लाने के संभावित उपायों पर भी चर्चा की गई। इनमें घरेलू क्षेत्र में एलपीजी के उपयोग को बढ़ावा देना, घरों का विद्युतीकरण, कृषि अवशेष जलाने में कमी तथा लघु एवं मध्यम उद्योगों में स्वच्छ ईंधन एवं तकनीक को अपनाना प्रमुख हैं। इन उपायों से संबंधित आंकड़ों के आधार पर उनके संभावित पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन किए जाने की प्रक्रिया भी समझाई गई। कार्यशाला में यह भी रेखांकित किया गया कि आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक आंकड़ों और वायुमंडलीय मॉडलिंग का उपयोग कर वायु गुणवत्ता प्रबंधन योजनाओं को अधिक प्रभावी, लक्षित एवं परिणामोन्मुख बनाया जा सकता है। PAVITRA जैसे तकनीकी प्लेटफॉर्म् से नीति निर्माण एवं प्रदूषण नियंत्रण के लिए उपलब्ध वैज्ञानिक जानकारी को व्यवहारिक निर्णयों से जोड़ने में सहायता मिलेगी। गौरतलब है कि, कार्यशाला का उद्देश्य राज्य में वायु प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े प्रयासों में वैज्ञानिक आंकड़ों, तकनीकी मॉडलिंग एवं आधुनिक निर्णय-सहायक प्रणालियों के उपयोग को बढ़ावा देना रहा। इस अवसर पर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बॉम्बे की PAVITRA परियोजना टीम द्वारा प्रशिक्षण एवं तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। ऑनसाइट प्रशिक्षण दल में PAVITRA परियोजना के प्रधान अन्वेषक प्रो. चंद्र वेंकटरामन, परियोजना प्रबंधक प्रिया अभिजीत चौधरी, शोध सहयोगी रुतुजा घाटे, शोध वैज्ञानिक डॉ. रोहित सिंह तथा शोध सहयोगी तेजस सरनाइक उपस्थित रहे। वहीं ऑनलाइन माध्यम से PAVITRA परियोजना की सह-प्रधान अन्वेषक प्रो. श्रीनिधि बालासुब्रमणियन एवं पीएचडी शोधार्थी गिरिवेंद्र प्रताप यादव ने प्रशिक्षण एवं तकनीकी सत्रों में सहभागिता की।

मोदी के जन्मदिन पर काशी से वडनगर रवाना हुए 250 बाइकर्स, 10 राज्यों के कार्यकर्ता होंगे शामिल

लखनऊ  भाजपा अभियानों के रथ पर चुनावी रंगमहल सजा देती है। सेवा संंकल्प अभियान के हर कार्यक्रम पर राजनीतिक संदेशों के फूल खिले हैं। पार्टी ने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को धार देते हुए दस राज्यों के कार्यकर्ताओं को काशी से वडगनर भेजा है जो विभिन्न लोकसभा एवं विधान सभा क्षेत्रों में सरकार की उपलब्धियां बताते एवं अपनी संस्कृतियों को साझा करते हुए निकलेंगे। सिक्किम, तलिलनाडु, झारखंड एवं छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से काशी आकर फिर गुजरात के लिए निकले कार्यकर्ताओं के जरिए पार्टी यह संदेश भी दे रही है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश के सभी हिस्सों तक विकास पहुंचा है। धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को नई शक्ति मिली है। उधर, यात्रा के बहाने मिशन-2027 और 2029 की भी जमीन बनाई जाएगी। नरेन्द्र मोदी के जन्म दिन पर भाजपा ने वाराणसी से ढाई सौ बाइकर्स को गंगाजल के साथ वडनगर भेजा है। टीम के साथ एक-एक एंबुलेस, बस और एलइडी वाहन भी चल रहा है। यूपी की दस नदियों के जल से काशी विश्वनाथ मंदिर में जलाभिषेक करने के बाद उड़ीसा, बिहार, बंगाल, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, सिक्किम, झारखंड, छत्तीसगढ़ एवं मध्य प्रदेश समेत दस राज्यों के कार्यकर्ता भी यात्रा में शामिल हैं। क्षेत्रीय मुद्दों पर रहेगी नजर भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा को यात्रा की जिम्मेदारी दी गई है। दस मार्गों से निकले कार्यकर्ता यूपी में 88 जगहों पर रात्रि विश्राम एवं चौपाल करेंगे। यहां पर राजनीतिक परिचर्चा के बहाने कार्यकर्ता यह भी जानेंगे कि क्षेत्र में कौन से चुनावी मुद्दे आकार ले रहे हैं। वह अपने राज्य की भाषा, खाद्य पदार्थ, सांस्कृतिक एवं धार्मिक प्रतीक एवं संस्थानों की विरासत भी लेकर चल रहे हैं। पिछले चार वर्ष से प्रधानमंत्री तमिल-काशी संगमम कार्यक्रम करा रहे हैं, जहां संस्कृतियों के बीच आपसी संपर्क बढ़ाने का लक्ष्य है। उधर, वडनगर के लिए निकली टीम 197 जगहों पर जलपान एवं संक्षिप्त संबोधन और एलइडी प्रदर्शन के लिए रुकेगी। इस दौरान टीम 826 विकासखंडों एवं 762 नगर निकायों को कवर करेगी। भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष रोहित मिश्र ने बताया कि काशी और गुजरात के बीच दोनों तरफ से आने-जाने वाले कार्यकर्ता समर्पण, निष्ठा, संस्कार एवं संकल्प से भरे हुए हैं। वह चौपालों में सरकारों की उपलब्धियां बताएंगे।  

जल संरक्षण से जनभागीदारी तक, मल्हनिया जलाशय में गूंजा सेवा का संकल्प

रायपुर  ‘सेवा संकल्प अभियान‘ के अंतर्गत जिले में जल संरक्षण, स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में गौरेला विकासखंड के ग्राम देवरगांव स्थित मल्हनिया जलाशय में ‘जल जन सेवा संकल्प‘ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से जल संरक्षण, जलस्रोतों की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करते हुए सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में जल संसाधन विभाग एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की सहभागिता रही। इस अवसर पर जल संरक्षण जागरूकता रैली निकाली गई। रैली के माध्यम से ग्रामीणों एवं स्थानीय नागरिकों को जल के महत्व, जलस्रोतों की सुरक्षा तथा पानी के विवेकपूर्ण उपयोग के प्रति जागरूक किया गया। प्रतिभागियों ने जल संरक्षण को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने और भविष्य के लिए जलस्रोतों को सुरक्षित रखने का संदेश दिया। स्वच्छ जलाशय, स्वस्थ पर्यावरण का लिया संकल्प जल जन सेवा संकल्प कार्यक्रम के अंतर्गत मल्हनिया जलाशय एवं उसके आसपास के क्षेत्र में स्वच्छता अभियान भी चलाया गया। अभियान के दौरान जलाशय परिसर की साफ-सफाई करते हुए लोगों को जलस्रोतों में कचरा नहीं डालने, आसपास स्वच्छता बनाए रखने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए प्रेरित किया गया। अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने जल संरक्षण और स्वच्छता के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि जलस्रोत ग्रामीण जीवन, कृषि और पर्यावरणीय संतुलन का महत्वपूर्ण आधार हैं। इनके संरक्षण के लिए प्रशासनिक प्रयासों के साथ नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। उन्होंने नागरिकों से जलस्रोतों को स्वच्छ रखने और उनके संरक्षण में निरंतर सहयोग करने की अपील की। जनभागीदारी से मजबूत होगा जल संरक्षण का अभियान ‘जल जन सेवा संकल्प‘ का उद्देश्य आम नागरिकों को जल संरक्षण के प्रति जिम्मेदार बनाना तथा सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से जलस्रोतों की स्वच्छता एवं सुरक्षा को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि जल संरक्षण केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने नागरिकों से जल का अनावश्यक अपव्यय रोकने, पानी का विवेकपूर्ण उपयोग करने, जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाने तथा अपने आसपास के लोगों को भी जल संरक्षण के लिए प्रेरित करने की अपील की। सेवा संकल्प अभियान में सेवा के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश ‘सेवा संकल्प अभियान‘ के माध्यम से जिले में जनहित और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों को व्यापक रूप दिया जा रहा है। जल संरक्षण और स्वच्छता से जुड़ा यह आयोजन सेवा की भावना को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। मल्हनिया जलाशय में आयोजित कार्यक्रम ने लोगों को यह संदेश दिया कि जलस्रोतों और प्रकृति की सेवा भी समाज तथा आने वाली पीढ़ियों के प्रति महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। जल संरक्षण जागरूकता रैली और स्वच्छता अभियान के माध्यम से ग्रामीणों में सामूहिक सहभागिता की भावना को मजबूत किया गया। कार्यक्रम के दौरान जल, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाने का संदेश दिया गया। सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित यह पहल जिले में जनभागीदारी के माध्यम से जल संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन की दिशा में सामूहिक प्रयासों को गति देने वाली रही।

युवाओं के आत्मविश्वास और व्यक्तित्व विकास की दिशा में एक मील का पत्थर- मंत्री टंक राम वर्मा

​रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप और उच्च शिक्षा मंत्री  टंक राम वर्मा के मार्गदर्शन व निर्देशों के तहत छत्तीसगढ़ शासन का उच्च शिक्षा विभाग प्रदेश के अनुसूचित जनजातीय (ST) क्षेत्रों के विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण पहल करने जा रहा है। जनजातीय क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं में अंग्रेजी भाषा के सम्प्रेषण कौशल को निखारने के लिए 90 घंटे का एक विशेष प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार किया गया है।    उच्च शिक्षा मंत्री  टंक राम वर्मा ने इस पहल को युवाओं के आत्मविश्वास और व्यक्तित्व विकास की दिशा में एक मील का पत्थर बताया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि योजना का लाभ अनुसूचित जनजाति वर्ग के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे और हर योग्य विद्यार्थी को इसका लाभ मिले। ​मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की सरकार का ध्येय प्रदेश के दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धी क्षमताओं से लैस करना है। इसी उद्देश्य को साकार करने के लिए 'राज्य-स्तरीय अंग्रेजी सम्प्रेषण पाठ्यक्रम कार्यपालन समिति' का गठन किया गया है, जो इस 90-दिवसीय/घंटे के पाठ्यक्रम का संचालन और निगरानी करेगी। राष्ट्रीय गुणवत्ता सुधार एवं गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ और राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना कार्यालय के माध्यम से संचालित होगा। यह विशेष पाठ्यक्रम प्रदेश भर के अनुसूचित जनजातीय क्षेत्रों के महाविद्यालयों में संचालित किया जाएगा। इस पहल से दूरस्थ अंचलों में पढ़ने वाले युवाओं में अंग्रेजी में बातचीत करने और अपने विचारों को प्रभावी ढंग से व्यक्त करने की झिझक दूर होगी, जिससे उन्हें रोजगार एवं उच्च शिक्षा के नए अवसर प्राप्त होंगे।   ​ पाठ्यक्रम के सुचारू संचालन, उच्च गुणवत्ता और प्रभावी अनुवीक्षण को सुनिश्चित करने के लिए आयुक्त, उच्च शिक्षा विभाग की अध्यक्षता में 'राज्य-स्तरीय अंग्रेजी सम्प्रेषण पाठ्यक्रम अनुवीक्षण समिति' की एक महत्वपूर्ण बैठक  आयोजित की गई। ​बैठक में समिति के वरिष्ठ अधिकारियों ने पाठ्यक्रम के क्रियान्वयन की चरणबद्ध रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की।