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भारत-पाक हॉकी मैच के लिए पाकिस्तान ने मांगा न्यूट्रल वेन्यू, भारत ने दिया साफ जवाब

चंडीगढ़  पंजाब में होने वाली एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी हॉकी को लेकर भारत-पाकिस्तान मुकाबले पर संकट के बादल मंडरा गए हैं। पाकिस्तान हॉकी महासंघ (पीएचएफ) ने सुरक्षा और दोनों देशों के बीच मौजूदा संवेदनशील परिस्थितियों का हवाला देते हुए टूर्नामेंट को तटस्थ स्थान पर कराने की मांग की है। पाकिस्तान की ओर से एशियाई हॉकी महासंघ (एएचएफ) के समक्ष यह मांग रखी गई है कि या तो पूरा टूर्नामेंट भारत से बाहर कराया जाए अथवा पाकिस्तान के मुकाबले किसी न्यूट्रल वेन्यू पर करवाए जाएं। पाकिस्तान हॉकी महासंघ के अंतरिम अध्यक्ष मोहिउद्दीन अहमद वानी ने कहा है कि यह कदम खिलाड़ियों और अधिकारियों की सुरक्षा, सम्मान और अनुकूल माहौल सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। हालांकि पाकिस्तान ने टूर्नामेंट से हटने की बात नहीं कही है और भारत समेत अन्य टीमों के खिलाफ खेलने की प्रतिबद्धता जताई है। हॉकी इंडिया ने ठुकराई न्यूट्रल वेन्यू की मांग पाकिस्तान की मांग के बाद हॉकी इंडिया ने फिलहाल साफ कर दिया है कि टूर्नामेंट के आयोजन स्थल में कोई बदलाव नहीं होगा। हॉकी इंडिया के महासचिव और एएचएफ के उपाध्यक्ष भोला नाथ सिंह ने कहा कि यदि पाकिस्तान को एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में खेलना है तो उसे भारत आना होगा। जानकारी अनुसार पाकिस्तान के नहीं आने की स्थिति में ओमान या बांग्लादेश को विकल्प के तौर पर शामिल किया जा सकता है। 1 नवंबर को होना है मुकाबला एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी का आयोजन पंजाब में 27 अक्टूबर से 5 नवंबर तक होना है। जालंधर में 27 अक्टूबर से 2 नवंबर तक उद्घाटन समारोह और लीग चरण के मुकाबले होंगे, जबकि सेमीफाइनल और फाइनल मोहाली में खेले जाएंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार भारत और पाकिस्तान के बीच बहुप्रतीक्षित मुकाबला 1 नवंबर को जालंधर में होना है। पंजाब में लंबे समय बाद भारत-पाकिस्तान हॉकी मुकाबला देखने को लेकर हॉकी प्रेमियों में खासा उत्साह था। ऐसे में पाकिस्तान की ओर से न्यूट्रल वेन्यू की मांग आने के बाद इस मुकाबले के आयोजन को लेकर स्थिति फिर असमंजस में पहुंच गई है। चार और देश भी उतरेंगे मैदान में टूर्नामेंट में भारत, पाकिस्तान के अलावा चीन, जापान, मलेशिया और दक्षिण कोरिया की टीमें प्रस्तावित हैं। पाकिस्तान के नहीं खेलने की स्थिति में ओमान और बांग्लादेश को विकल्प के तौर पर रखा गया है। भारत-पाकिस्तान के बीच पिछले कुछ समय से द्विपक्षीय खेल संबंधों को लेकर अलग स्थिति रही है, हालांकि दोनों देशों की टीमें बहुदेशीय प्रतियोगिताओं में आमने-सामने आती रही हैं। अब सबकी नजर एशियाई हॉकी महासंघ के अगले फैसले पर है कि पाकिस्तान की न्यूट्रल वेन्यू की मांग पर क्या निर्णय होता है और क्या 1 नवंबर को जालंधर में भारत-पाकिस्तान हॉकी मुकाबला देखने को मिलेगा।

भरतपुर और डीग के 25 निकायों में BJP का निर्विरोध कब्जा, प्रमुख पदों पर प्रत्याशी निर्वाचित

जयपुर  राजस्थान के निकाय चुनाव में पार्षदों के नतीजे आने के बाद अब मेयर, सभापति और अध्यक्ष की कुर्सियों पर तस्वीर तेजी से साफ हो रही है. कई जगह बहुमत का गणित काम कर रहा है तो कई निकायों में निर्दलीय पार्षदों के रुख ने पूरा खेल बदल दिया है. इसी बीच बीजेपी ने 25 निकायों में अपने चेयरमैन, सभापति और अध्यक्ष निर्विरोध बनवाने में सफलता हासिल की है. इनमें भरतपुर और भीलवाड़ा के नगर निगम भी शामिल हैं।  इन दोनों जगहों का सियासी महत्व इसलिए भी ज्यादा है, क्योंकि भरतपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का गृह जिला है, जबकि भीलवाड़ा में बीजेपी ने निकाय चुनाव में साफ बहुमत हासिल किया था. भरतपुर में हालांकि कहानी थोड़ी अलग रही. यहां नगर निगम के चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस से ज्यादा सीटें निर्दलीयों ने जीती थीं. इसके बावजूद मेयर चुनाव के लिए खड़ी निर्दलीय प्रत्याशी ने अपना नाम वापस ले लिया और बीजेपी प्रत्याशी अनुराधा सिंह के लिए निर्विरोध निर्वाचन का रास्ता साफ हो गया।  भरतपुर में निर्दलीयों का दबदबा, फिर भी बीजेपी का मेयर भरतपुर नगर निगम में कुल 65 वार्ड हैं. हालिया निकाय चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवारों ने सबसे ज्यादा 36 वार्डों में जीत दर्ज की. बीजेपी के 20, कांग्रेस के 7, बीएसपी के एक और आरएलपी के एक पार्षद चुनाव जीते थे. यानी संख्या के हिसाब से निर्दलीय सबसे बड़ा समूह बनकर सामने आए थे।  शुरुआत में मेयर पद के लिए निर्दलीय पार्षदों की तरफ थी निगाहें मेयर पद के लिए शुरुआत में मुकाबला बनने की स्थिति थी. बीजेपी ने अनुराधा सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया था, जबकि वार्ड नंबर 17 से निर्दलीय पार्षद विचित्रा सिंह ने भी नामांकन दाखिल किया था. उस समय यह सवाल था कि सबसे ज्यादा निर्दलीय पार्षदों वाले भरतपुर में आखिर मेयर की कुर्सी किसके पास जाएगी. लेकिन 18 सितंबर को तस्वीर बदल गई. निर्दलीय विचित्रा सिंह ने अपना नामांकन वापस ले लिया. इसके बाद बीजेपी की अनुराधा सिंह के निर्विरोध महापौर चुने जाने का रास्ता साफ हो गया।  सीएम के गृह जिले में बीजेपी के लिए अहम तस्वीर भरतपुर को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का गृह जिला माना जाता है. ऐसे में यहां नगर निगम की सत्ता का समीकरण बीजेपी के लिए खास महत्व रखता है. चुनाव परिणाम के बाद हालांकि यहां बीजेपी के सामने सीधा बहुमत नहीं था. निर्दलीयों की संख्या सबसे ज्यादा होने के कारण मेयर चुनाव में उनका समर्थन जरूरी हो गया था. अब निर्दलीय प्रत्याशी के नामांकन वापस लेने के बाद मुकाबला ही खत्म हो गया. बीजेपी प्रत्याशी अनुराधा सिंह का निर्विरोध चुना जाना तय हो गया।  भीलवाड़ा में भी बीजेपी की जसवंत कंवर निर्विरोध भीलवाड़ा में स्थिति भरतपुर से अलग थी. यहां बीजेपी के पास पहले से ही मजबूत संख्याबल था. 70 वार्ड वाले नगर निगम में बीजेपी ने 45 सीटें जीतीं और स्पष्ट बहुमत हासिल किया. कांग्रेस के खाते में 10 और निर्दलीयों के खाते में 15 सीटें गईं. बीजेपी ने वार्ड नंबर 9 से जीतीं जसवंत कंवर को मेयर पद का उम्मीदवार बनाया. उन्होंने नामांकन दाखिल किया. शुरुआत में निर्दलीय संतोष कंवर भी मैदान में थीं, लेकिन उन्होंने 17 सितंबर को अपना नाम वापस ले लिया. कांग्रेस ने भी मेयर पद के लिए उम्मीदवार नहीं उतारा. इसके बाद जसवंत कंवर निर्विरोध महापौर चुन ली गईं।  25 निकायों में निर्विरोध अध्यक्ष बनाने का दावा बीजेपी की ओर से सामने आई जानकारी के मुताबिक पार्टी ने राजस्थान के 25 निकायों में अपने चेयरमैन, सभापति और अध्यक्ष निर्विरोध बनवाने में सफलता हासिल की है. इसका मतलब यह है कि इन निकायों में मतदान से पहले ही अध्यक्ष पद की तस्वीर साफ हो गई. राजस्थान के 309 शहरी निकायों के चुनाव में बीजेपी 148 निकायों में सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई थी, जबकि कांग्रेस 104 निकायों में आगे रही थी।  भरतपुर में बहुमत का गणित नहीं, समर्थन का खेल चला भरतपुर का मामला इस पूरे चुनाव की अलग तस्वीर दिखाता है. यहां बीजेपी के पास 20 पार्षद थे, जबकि निर्दलीयों की संख्या 36 थी. कांग्रेस सिर्फ 7 सीटों पर थी. ऐसे में किसी एक पार्टी के पास अपने दम पर मेयर बनाने की स्थिति नहीं थी. लेकिन मेयर पद पर मुकाबला आखिर मतदान तक पहुंचा ही नहीं. निर्दलीय उम्मीदवार के नामांकन वापस लेने के बाद बीजेपी उम्मीदवार के सामने कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं बचा. इस तरह यहां संख्या का खेल समर्थन के खेल में बदल गया।  21 सितंबर को बाकी निकायों की तस्वीर होगी साफ भरतपुर और भीलवाड़ा जैसे नगर निगमों में मतदान से पहले ही तस्वीर साफ होने से पार्टी को राहत मिली है. लेकिन राजस्थान के बाकी निकायों में कहानी अभी खत्म नहीं हुई है. कहीं बहुमत है, कहीं बागी उम्मीदवार हैं और कहीं निर्दलीय पार्षद पूरे समीकरण की चाबी बने हुए हैं. ऐसे में 21 सितंबर का दिन कई नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पालिकाओं के लिए सबसे अहम रहने वाला है। 

भोपाल से इंदौर तक हजारों लोग बनाएंगे ह्यूमन रंगोली, ड्रोन से दर्ज होगा भव्य दृश्य

मध्यप्रदेश में बनेगी ‘सेवा के रंग—राष्ट्र के संग’ की विराट तस्वीर  भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, झाबुआ और आलीराजपुर में हजारों नागरिक बनाएंगे ह्यूमन रंगोली ड्रोन कैमरे से दर्ज होगा जनभागीदारी का भव्य दृश्य भोपाल सेवा, सहभागिता और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश में सेवा संकल्प अभियान के अवसर पर 9 और 10 अक्टूबर को विशेष आयोजन किया जाएगा। ‘सेवा के रंग—राष्ट्र के संग’ थीम पर प्रदेश के छह जिलों में बड़े मैदानों पर विशाल ह्यूमन रंगोली बनाई जाएगी। इस अनूठे आयोजन में बड़ी संख्या में नागरिकों की सहभागिता होगी और मानव रंगोली के माध्यम से सेवा, राष्ट्रभावना, स्थानीय संस्कृति तथा विकसित भारत के संकल्प को साकार किया जाएगा। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, झाबुआ और आलीराजपुर में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में जनभागीदारी को प्रमुख आधार बनाया गया है। हजारों नागरिक एक निर्धारित स्वरूप में एक साथ खड़े होकर ऐसी जीवंत मानव रंगोली का निर्माण करेंगे, जिसे ऊपर से देखने पर एक विशाल चित्र और संदेश के रूप में देखा जा सकेगा। आयोजन के दौरान ड्रोन कैमरों के माध्यम से इस पूरे दृश्य को रिकॉर्ड किया जाएगा। सेवा से राष्ट्र निर्माण तक पहुंचेगा संदेश ‘सेवा के रंग—राष्ट्र के संग’ कार्यक्रम का उद्देश्य सेवा को केवल एक गतिविधि के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र निर्माण की भावना से जोड़ना है। आयोजन में स्थानीय कला और लोक-संस्कृति को भी स्थान दिया जाएगा। इसके साथ विकसित भारत के संकल्प और देश की प्रगति का संदेश भी मानव रंगोली के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। स्थानीय संस्कृति और आधुनिक तकनीक का संगम आयोजन में मध्यप्रदेश की स्थानीय कला एवं लोक-संस्कृति को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ने की योजना है। विशाल मानव रंगोली के निर्माण के दौरान ड्रोन शूटिंग के जरिए ऊपर से पूरे आयोजन की तस्वीर सामने आएगी। इससे अलग-अलग जिलों में होने वाली जनभागीदारी का व्यापक दृश्य तैयार होगा और सेवा संकल्प का संदेश व्यापक स्तर तक पहुंचाया जा सकेगा। ‘सेवा के रंग—राष्ट्र के संग’ कार्यक्रम के लिए राज्य स्तर पर नोडल अनुसूचित जाति मंत्री श्री नागर सिंह चौहान रहेंगे। राज्य प्रभारी अधिकारी की जिम्मेदारी महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव श्रीमती जी.वी. रश्मि को दी गई है। महिला एवं बाल विकास विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है, जबकि जनसंपर्क विभाग और संबंधित छह जिलों का जिला प्रशासन आयोजन में सहयोगी भूमिका निभाएगा।

मेधावी विद्यार्थियों के लिए बड़ी सौगात, आज CM यादव 7400 से अधिक छात्रों को देंगे स्कूटी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश के मेधावी विद्यार्थियों को आज शनिवार को देंगे स्कूटी की सौगात 7400 से अधिक मेधावी विद्यार्थी होंगे लाभांवित भोपाल के शासकीय सुभाष उत्कृष्ट विद्यालय में होगा राज्य स्तरीय कार्यक्रम भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश के मेधावी विद्यार्थियों को शनिवार को बड़ी सौगात देंगे। शासकीय हायर सेकंडरी स्कूलों में कक्षा 12वीं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को 19 सितंबर को ई-स्कूटी का वितरण करेंगे। यह स्कूटी  "मुख्यमंत्री स्कूटी योजना ’ अंतर्गत दी जाएगी। इससे विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा की राह आसान होगी। साथ ही, कॉलेज आने-जाने में भी सहूलियत होगी। राज्य स्तरीय स्कूटी वितरण का कार्यक्रम शासकीय सुभाष उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शिवाजी नगर में भोपाल में सुबह 9 बजे से होगा। प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही मुख्यमंत्री स्कूटी योजना का उद्देश्य स्कूली विद्यार्थियों को शैक्षणिक उपलब्धियां हासिल करने के लिए प्रोत्साहित करना है। योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए विद्यार्थियों को कक्षा 12वीं में प्रथम प्रयास में ही 70% अंक के साथ स्कूल में प्रथम स्थान आना जरूरी है। प्रदेश सरकार द्वारा इस योजना का लाभ स्कूल शिक्षा एवं जनजातीय कार्य विभाग के शासकीय हायर सेकंडरी स्कूलों में नियमित विद्यार्थी के रूप में अध्ययनरत विद्यार्थी को दिया जाता है। योजना में सभी संकायों के विद्यार्थियों को शामिल किया गया है। मोटराइज्ड स्कूटी के लिए अधिकतम 90 हजार रुपये और ई-स्कूटी के लिए अधिकतम 1.20 लाख रुपये की राशि प्रदान की जाती है। अब तक प्रदेश के 23,000 से अधिक पात्र विद्यार्थी हो चुके हैं लाभान्वित प्रदेश सरकार द्वारा योजना अंतर्गत शिक्षण सत्र 2025-26 के लिए प्रदेश के 7,400 से अधिक पात्र विद्यार्थियों को ई-स्कूटी का वितरण किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही इस योजना से अब तक प्रदेश के 23,000 से अधिक पात्र विद्यार्थी लाभान्वित हो चुके हैं। योजना के संचालन पर अब तक लगभग 246 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं। मुख्यमंत्री स्कूटी योजना मेधावी विद्यार्थियों की मेहनत और उपलब्धि को प्रोत्साहित करने के साथ ही आगे की पढ़ाई के लिए सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में प्रदेश सरकार की महत्वपूर्ण पहल है। शासकीय स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित करने से शिक्षा के प्रति उनका उत्साह बढ़ रहा है और उच्च शिक्षा की ओर उनकी भागीदारी को मजबूत करने में भी मदद मिल रही है।  

लुधियाना में AAP का बड़ा चुनावी अभियान, 20 सितंबर से घर-घर पहुंचेंगे कार्यकर्ता; 2.68 लाख वर्कर मैदान में

चंडीगढ़ आम आदमी पार्टी पंजाब में 20 सितंबर से एक बड़ा डोर-टू-डोर अभियान शुरू करेगी। यह घोषणा मनीष सिसोदिया ने की है। इस अभियान में पार्टी के 2.68 लाख बूथ कमेटी सदस्य घर-घर जाकर भगवंत मान सरकार के कार्यों को जनता तक पहुंचाएंगे। मुख्यमंत्री भगवंत मान स्वयं धुरी में इस अभियान का हिस्सा बनेंगे। सिसोदिया ने बताया कि यह अभियान पूरे राज्य में चलाया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य सरकार की उपलब्धियों और जनहितैषी नीतियों से लोगों को अवगत कराना है। अभियान के दौरान आप का सदस्यता अभियान भी शुरू होगा। इससे पार्टी अपने जनाधार को और मजबूत करने का प्रयास करेगी।   सिसोदिया ने बताया कि अभियान की शुरुआत से पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान 19 सितंबर को लुधियाना में चुनावी अभियान का पैंफलेट जारी करेंगे। यह पैंफलेट अभियान की रूपरेखा और संदेशों को स्पष्ट करेगा। पार्टी का लक्ष्य हर घर तक पहुंचकर सरकार के सकारात्मक कार्यों को बताना है। इस मेगा कैंपेन के दौरान AAP के 2.68 लाख बूथ कमेटी सदस्य घर-घर जाकर मान सरकार के कामों और उपलब्धियों की जानकारी लोगों को देंगे। AAP के पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया ने चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि इसी दौरान पार्टी के मेंबरशिप अभियान की भी शुरूआत करेगी। AAP प्रभारी मनीष सिसोदिया की अहम बातें     एक महीने तक चलेगा अभियान: मनीष सिसोदिया ने कहा- हमने पंजाब में इतने काम किए, जो 75 साल में नहीं हुए। इन्हीं कामों के आधार पर पार्टी चुनाव में उतरेगी। परसों से शुरू हो रहे डोर टू डोर कैंपेन के जरिए सरकार के कामकाज घर-घर पहुंचाएंगे। पंजाब में 25,332 बूथ हैं। करीब 2.68 लाख कार्यकर्ता और बूथ लीडर इस अभियान में शामिल होंगे। यह अभियान एक महीने तक चलेगा।     हर परिवार को 1.82 लाख का फायदा हो रहा: सिसोदिया ने कहा कि AAP ने अपनी एक-एक गारंटी पूरी की है। इससे हर परिवार को सालाना करीब 1.82 लाख रुपए का फायदा हुआ है, जबकि हर महीने करीब 15 हजार रुपए का लाभ मिल रहा है। पार्टी के कार्यकर्ता अब इन कामों और योजनाओं की जानकारी देने के लिए घर-घर जाएंगे।     बीजेपी अकाली दल व कांग्रेस को घेरेंगे: सिसोदिया कहा कि कार्यकर्ता लोगों को यह भी याद दिलाएंगे कि 2007 से 2017 तक अकाली-भाजपा सरकार के दौरान पंजाब किस तरह नशे की समस्या से जूझता रहा। उन्होंने कैप्टन अमरिंदर सिंह पर भी वादे पूरे न करने का आरोप लगाया। सिसोदिया ने कहा कि सरकार बनने के बाद वह कई वादों से पीछे हट गए और नशा भी खत्म नहीं कर पाए।     BJP ने चलाई नशे की सप्लाई चेन: सिसोदिया ने कहा कि पंजाब में नशे के खिलाफ युद्ध छेड़ा गया। तस्करों के घर तोड़े गए, उन्हें जेल भेजा गया और सप्लाई चेन तोड़ी गई। इसके बावजूद पंजाब में नशा कहां से आ रहा, इसका जवाब ये है कि पंजाब में बिकने वाला 80 फीसदी नशा भाजपा शासित राज्यों से आ रहा है। अरोड़ा ने कहा- भाजपा अपने राज्यों में नशा खत्म करे AAP के प्रदेश अध्यक्ष अमन अरोड़ा ने कहा कि अगर भाजपा वास्तव में पंजाब से नशा खत्म करना चाहती है तो पहले अपने-अपने राज्यों में नशे के कारोबार को खत्म करे। हरियाणा और गुजरात से नशा आ रहा है। अरोड़ा के मुताबिक, पंजाब की लोकल सप्लाई चेन तोड़ी जा चुकी है, अब बाहर से नशा पंजाब में आ रहा है। यात्रा निकालने वाले पंजाब का अपमान कर रहे है। अरोड़ा ने पिछली अकाली दल+भाजपा और कांग्रेस सरकारों पर पंजाब को कंगाली की ओर ले जाने का आरोप लगाया।

आशीर्वाद का दीया’ बना विश्व रिकॉर्ड का साक्षी

रायपुर,   प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी जी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में आयोजित ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम ने जनभागीदारी और सेवा भावना का नया अध्याय रचा है। रायपुर में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में 25 लाख से अधिक दीप प्रज्वलित किए गए, वहीं प्रदेशभर में 1.50 करोड़ से अधिक दीयों की रोशनी से सेवा, सुशासन और जनभागीदारी का संदेश दिया गया। इस ऐतिहासिक आयोजन के लिए ‘आशीर्वाद का दीया’ का नाम गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया। वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने इस उपलब्धि को छत्तीसगढ़ की जनता की व्यापक सहभागिता और सामूहिक संकल्प का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी जी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों की सेवा यात्रा पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित ‘आशीर्वाद का दीया’ में प्रदेशवासियों ने जिस उत्साह और आत्मीयता के साथ भागीदारी की, वह अभूतपूर्व है।  चौधरी ने कहा कि रायपुर में 25 लाख से अधिक दीपों का प्रज्वलन और प्रदेशभर में 1.50 करोड़ से अधिक दीयों का जलना छत्तीसगढ़ की जनता के उत्साह और जनभागीदारी की व्यापकता को दर्शाता है। यह केवल दीप प्रज्वलन का आयोजन नहीं, बल्कि सेवा, सुशासन और राष्ट्र निर्माण की भावना के प्रति जनसहभागिता का सामूहिक उत्सव बना। ‘आशीर्वाद का दीया’ के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न जिलों में गांवों से लेकर शहरों तक नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न वर्गों ने सहभागिता की। दीपों की रोशनी के माध्यम से प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी जी की 25 वर्षों की सार्वजनिक सेवा यात्रा के प्रति आभार और विकसित भारत के संकल्प के साथ विकसित छत्तीसगढ़ की भावना को अभिव्यक्ति मिली। इस व्यापक जनभागीदारी ने ‘आशीर्वाद का दीया’ को विशेष पहचान दिलाई और आयोजन का नाम गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़वासियों की सामूहिक सहभागिता और उत्साह का प्रमाण है।

9 लाख 77 हजार से अधिक स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को मिली 10.53 करोड़ रुपये की छूट

भोपाल  मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के कार्यक्षेत्र के भोपाल, नर्मदापुरम, ग्वालियर एवं चंबल संभाग अंतर्गत आने वाले 16 जिलों के स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए अगस्त माह लाभदायक रहा। कंपनी द्वारा स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को टाइम ऑफ डे (ToD) टैरिफ व्यवस्था के तहत सोलर आवर्स (सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक) में बिजली की खपत पर 20 प्रतिशत तक की विशेष छूट का लाभ दिया जा रहा है। इसी के तहत अगस्त -2026 में कंपनी कार्यक्षेत्र के कुल 9 लाख 77 हजार 400 स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को उनके बिजली बिलों में कुल ₹10.53 करोड़ रुपये की ToD छूट का सीधा लाभ मिला। इनमें भोपाल रीजन के 7 लाख 94 हजार 972 उपभोक्ताओं को 7 करोड़ 80 लाख 50 हजार रुपये तथा ग्वालियर रीजन के 1 लाख 82 हजार 428 उपभोक्ताओं को 2 करोड़ 72 लाख 82 हजार रुपये की छूट प्रदान की गई। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक श्री ऋषि गर्ग ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे आधुनिक तकनीक का लाभ उठाते हुए अपने परिसरों में स्मार्ट मीटर लगवाएं। स्मार्ट मीटर न केवल ऊर्जा प्रबंधन को बेहतर बनाते हैं, बल्कि उपभोक्ताओं को अपनी बिजली खपत पर नियंत्रण रखने और आर्थिक बचत करने का अवसर भी प्रदान करते हैं। उन्होंने बताया कि टाइम ऑफ डे (ToD) टैरिफ के तहत स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को सोलर आवर्स (सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक) बिजली उपयोग करने पर ऊर्जा प्रभार की सामान्य दर में 10 किलोवाट तक स्वीकृत लोड/अनुबंध मांग वाले उपभोक्ताओं को 20 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है। स्मार्ट मीटर से संबंधित किसी भी जानकारी के लिए उपभोक्ता 1912 पर संपर्क कर सकते हैं अथवा श्री कैलाश कुमार चौधरी, प्रबंधक (स्मार्ट मीटरिंग सेल) से संपर्क कर सकते हैं। साथ ही Smartmeteringcellbhopal@gmail.com पर ई-मेल के माध्यम से भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है। उपभोक्ताओं को घरेलू स्मार्ट मीटर से मिलने वाले फायदे     ऊर्जा की खपत को ट्रैक करने और ऊर्जा की बचत करने में मदद करता है।     बिजली की खपत को सटीक रूप से मापता है, जिससे बिल में कोई गलती नहीं होती।     ऐप के जरिए मोबाइल पर रियल-टाइम डेटा देखकर ऊर्जा की खपत को नियंत्रित कर सकते हैं।     ऊर्जा की गुणवत्ता के बारे में जानकारी मिलती है, ताकि ऊर्जा की खपत को बेहतर बना सकते हैं।     ऊर्जा की खपत को ऑनलाइन ट्रैक करने और नियंत्रित करने की सुविधा मिलती है।     ऊर्जा की खपत को कम करने से पर्यावरण पर पड़ने वाला प्रभाव कम होता है।  

71 सोलर हाईमास्ट से रोशन हो रहे गांव, 672 सोलर पम्पों से पेयजल और 4,300 सोलर पम्पों से किसानों के खेतों को मिल रहा सिंचाई का सहारा

रायपुर सुकमा जिले के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा अब केवल बिजली का विकल्प नहीं, बल्कि रोशनी, पेयजल, सिंचाई और रोजमर्रा की सुविधाओं को मजबूत करने का माध्यम बन रही है। गांवों में सोलर हाईमास्ट से रात रोशन हो रही है, सोलर पम्पों से पेयजल की उपलब्धता आसान हुई है और किसानों के खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचाने में सौर ऊर्जा महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विकास विजन में गांवों में आधुनिक सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने, स्वच्छ ऊर्जा को प्रोत्साहित करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष जोर रहा है। ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना में ग्रामीण भारत को मजबूत आधार देना इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्रधानमंत्री  मोदी ने छत्तीसगढ़ के ‘विकसित भारत विकसित छत्तीसगढ़’ कार्यक्रम में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने, छत्तीसगढ़ को सौर ऊर्जा का केंद्र बनाने और किसानों को ‘अन्नदाता से ऊर्जादाता’ बनाने की दिशा में सरकार के प्रयासों का उल्लेख किया था। इसी व्यापक सोच के अनुरूप सुकमा जैसे दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार सौर ऊर्जा आधारित सुविधाओं का विस्तार ग्रामीण जीवन में प्रत्यक्ष बदलाव ला रहा है। अंधेरे से रोशनी तक, 71 सोलर हाईमास्ट से बदल रही गांवों की रात कभी शाम ढलते ही अंधेरे में सिमट जाने वाले सुकमा के कई गांवों में अब सौर ऊर्जा से संचालित हाईमास्ट रोशनी का माध्यम बन रहे हैं। नियद नेल्लानार योजना के जरिए सिलगेर, सालातोंग, टेकलगुडियम, पूवर्ती, बगडेगुड़ा, सुरपनगुड़ा, दुलेड़, मोरपल्ली, मंडीमरका, बेदरे, केरलापेन्दा और तोकनपल्ली सहित विभिन्न ग्रामों एवं नगरीय निकाय क्षेत्रों में 71 सोलर हाईमास्ट संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। वहीं 8 अन्य संयंत्रों की स्थापना प्रगतिरत है। इन हाईमास्ट की रोशनी का लाभ केवल सड़कों और चौक-चौराहों तक सीमित नहीं है। शाम के बाद जरूरी काम से आने-जाने वाले ग्रामीणों, बाजार जाने वाले परिवारों, बच्चों और युवाओं तथा सार्वजनिक आयोजनों में शामिल होने वाले लोगों के लिए यह रोशनी सुविधा का नया आधार बनी है। महिलाओं, बुजुर्गों और राहगीरों के लिए भी गांवों में आवागमन पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक हुआ है। सौर ऊर्जा आधारित सुविधाओं के रखरखाव में भी प्रशासन की तत्परता दिखाई दे रही है। सुशासन तिहार में प्राप्त शिकायतों पर क्रेडा जिला कार्यालय द्वारा कार्रवाई करते हुए खराब सोलर हाईमास्ट संयंत्रों की एलईडी लाइट और बैटरियों को बदला गया। इससे बंद पड़ी रोशनी फिर से शुरू हुई और ग्रामीणों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप सुविधा मिल सकी। 672 सोलर पम्पों से पेयजल की राह हुई आसान सौर ऊर्जा का दूसरा महत्वपूर्ण प्रभाव ग्रामीण पेयजल व्यवस्था में दिखाई दे रहा है। जल जीवन मिशन के तहत जिले के विभिन्न गांवों में 672 सोलर पम्प स्थापित किए गए हैं। इससे दूरस्थ क्षेत्रों में सौर ऊर्जा का उपयोग पेयजल व्यवस्था को सुगम बनाने में किया जा रहा है। केंद्र सरकार के जल जीवन मिशन का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों तक सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल की सुविधा पहुंचाना है। वर्ष 2026 में केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक जारी रखने तथा इसे केवल बुनियादी ढांचे के निर्माण से आगे बढ़ाकर नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण पर अधिक केंद्रित करने का निर्णय लिया है। सुकमा के ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर पम्पों के माध्यम से पेयजल व्यवस्था को ऊर्जा की उपलब्धता से जोड़ा जाना दूरस्थ गांवों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। जिन परिवारों को पहले पानी के लिए नदी, झिरिया या कुओं तक जाना पड़ता था, उनके लिए गांव में ही सौर ऊर्जा से संचालित पम्प के माध्यम से पानी उपलब्ध होने से समय और श्रम की बचत हो रही है। इसका लाभ विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों को मिल रहा है, जिन्हें पानी लाने में अतिरिक्त समय और मेहनत नहीं करनी पड़ती। 4,300 सोलर पम्पों से किसानों को सिंचाई का सहारा सौर ऊर्जा का सबसे सीधा प्रभाव सुकमा के किसानों के खेतों में भी दिखाई दे रहा है। सौर सुजला योजना के तहत पिछले आठ वर्षों में जिले में 4,300 सोलर पम्प किसानों के खेतों तक पहुंच चुके हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में निर्धारित 200 सोलर पम्पों का लक्ष्य भी पूरा किया गया है। सिंचाई के लिए सौर ऊर्जा आधारित पम्प किसानों को खेतों तक पानी पहुंचाने में सहारा दे रहे हैं। इससे कृषि कार्यों को समय पर करने और उपलब्ध जल स्रोतों का उपयोग करने में सुविधा मिल रही है।  दूरस्थ अंचलों में सौर ऊर्जा बन रही विकास की साथी सुकमा में सौर ऊर्जा का विस्तार केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। कोन्टा विकासखंड के जगरगुंडा में सोलर स्ट्रीट लाइट स्थापित की गई है। वहीं पोलमपल्ली, चिंतागुफा, चिंतलनार और भेज्जी में 4.8 किलोवाट क्षमता के सोलर स्ट्रीट लाइट संयंत्रों की स्थापना स्वीकृत है। नगरीय निकाय क्षेत्रों में खराब स्ट्रीट लाइटों के सुधार का कार्य भी जारी है। इस तरह एक ओर गांवों की गलियां और चौक-चौराहे रोशन हो रहे हैं, तो दूसरी ओर घरों तक पेयजल और खेतों तक सिंचाई पहुंचाने में सौर ऊर्जा मददगार बन रही है। इससे ग्रामीणों के समय और श्रम की बचत के साथ उनकी दैनिक गतिविधियों में सुविधा बढ़ रही है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी का विजन, गांवों के जीवन में दिख रहा बदलाव प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने ग्रामीण भारत के विकास के संदर्भ में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता और ग्रामीणों के जीवन को आसान बनाने को सरकार की प्राथमिकताओं से जोड़ा है। सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी उनका जोर स्वच्छ ऊर्जा, आत्मनिर्भरता और आम नागरिकों को ऊर्जा उत्पादन में भागीदार बनाने पर रहा है। पीएम सूर्य घर जैसी पहल के माध्यम से घरों में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने तथा किसानों को सौर ऊर्जा से जोड़ने की दिशा में केंद्र सरकार की नीतियां इसी व्यापक ऊर्जा आत्मनिर्भरता की सोच को आगे बढ़ाती हैं। सौर ऊर्जा से जुड़े इस राष्ट्रीय विजन का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि ऊर्जा का लाभ केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचे। सुकमा में सौर हाईमास्ट, सोलर पम्प और सोलर स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाओं का विस्तार इसी आवश्यकता के अनुरूप स्थानीय स्तर पर हो रहे प्रयासों को दर्शाता है। आज सुकमा में सौर ऊर्जा रात की रोशनी, घरों के पेयजल और खेतों की सिंचाई इन तीनों जरूरतों को पूरा करने में सहयोगी बन रही है। 71 सोलर … Read more

विकास की नई रफ्तार से बदल रहा छत्तीसगढ़, अधोसंरचना को मिल रही मजबूती : अरुण साव

रायपुर छत्तीसगढ़ में विकास का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। राज्य की अधोसंरचना को नई मजबूती दी जा रही है। सड़क, परिवहन और कनेक्टिविटी से लेकर आवास, जलापूर्ति और सार्वजनिक परिवहन तक के लिए आने वाले समय की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकास की आधारभूत संरचना तैयार की जा रही है। मजबूत अधोसंरचना आर्थिक विकास की बुनियाद है और राज्य सरकार इसे सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। अधोसंरचना विकास पर अब तक 12 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री  अरुण साव ने आज 'विकसित छत्तीसगढ़ कॉन्क्लेव-2026' में ये बातें कहीं। उप मुख्यमंत्री  साव ने नवा रायपुर में इकोनॉमिक टाइम्स ग्रुप द्वारा आयोजित 'छत्तीसगढ़ कॉन्क्लेव-2026' के विशेष सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ तेजी से आगे बढ़ रहा है। विकास की इस रफ्तार को बनाए रखने के लिए राज्य में अधोसंरचना के विस्तार पर लगातार काम किए जा रहे हैं। बेहतर सड़कें, सुगम परिवहन और मजबूत कनेक्टिविटी न केवल लोगों की आवाजाही को आसान बनाती हैं, बल्कि उद्योग, व्यापार और निवेश के लिए भी अनुकूल वातावरण तैयार करती हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश समावेशी विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। केंद्र सरकार उन राज्यों और क्षेत्रों की विकास संबंधी जरूरतों पर भी विशेष ध्यान दे रही है, जो लंबे समय तक विकास की मुख्यधारा में अपेक्षाकृत पीछे रहे हैं।  साव ने विशेष रूप से पूर्वोत्तर राज्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां कनेक्टिविटी, अधोसंरचना और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे देश के अलग-अलग हिस्सों के बीच विकास का संतुलन मजबूत हो रहा है और दूरस्थ क्षेत्रों को भी व्यापक आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने के अवसर बढ़ रहे हैं।  साव ने कहा कि छत्तीसगढ़ में विकास का लाभ अधिक से अधिक क्षेत्रों और लोगों तक पहुंचाने के लिए अधोसंरचना को लगातार मजबूत किया जा रहा है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण और शहरों की बढ़ती आबादी के साथ लोगों की जरूरतें भी बदल रही हैं। ऐसे में केवल वर्तमान जरूरतों के लिए नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर शहरी सुविधाओं और अधोसंरचना का विकास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आर्थिक प्रगति के लिए मजबूत अधोसंरचना जरूरी है। सड़कों और परिवहन सुविधाओं के विस्तार से कनेक्टिविटी बेहतर होती है और इसका सीधा लाभ आर्थिक गतिविधियों को मिलता है। छत्तीसगढ़ में इसी दृष्टि से अधोसंरचना विकास को विकास की गति से जोड़ते हुए काम किया जा रहा है। कॉन्क्लेव में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक  नीलेश महादेव क्षीरसागर ने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के साथ शहरों की जरूरतों का स्वरूप भी बदल रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप आधुनिक शहरी अधोसंरचना तैयार की जा रही है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0, बेहतर जलापूर्ति और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में राज्य सरकार प्रभावी ढंग से काम कर रही है। कॉन्क्लेव में छत्तीसगढ़ के विकास, अधोसंरचना, शहरीकरण और निवेश से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में इकोनॉमिक टाइम्स के सीनियर एसोसिएट एडीटर  अर्पित गुप्ता, टीपीआरईसी (TPREC) के सीईओ एवं मैनेजिंग डायरेक्टर  संजय बांगा तथा अनिएक्स (Anniex) के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर  नीरव शाह भी मौजूद थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल से पूजा के डॉक्टर बनने के सपने को मिला संबल

रायपुर प्रतिभा, मेहनत और दृढ़ संकल्प के सामने आर्थिक अभाव और विपरीत परिस्थितियां भी बाधा नहीं बन सकतीं। सरगुजा जिले की आदिवासी बेटी कुमारी पूजा सिंह ने अपने संघर्ष और लगन से इसे साबित कर दिखाया है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाली और 66 प्रतिशत दिव्यांगता के बावजूद पूजा ने नीट-2026 में सफलता हासिल कर मेडिकल कॉलेज जगदलपुर में प्रवेश प्राप्त किया है। उनके डॉक्टर बनने के सपने को आर्थिक परिस्थितियों के कारण रुकने न देने के लिए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के निर्देश पर कलेक्टर  अजीत वसंत ने जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) मद से शिक्षण शुल्क के लिए 2 लाख 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल से अब पूजा के लिए मेडिकल शिक्षा की राह आसान हुई है। राज्य शासन की मंशा है कि आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभावान विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा आर्थिक अभाव के कारण बाधित न हो। पूजा की पारिवारिक परिस्थितियों और उनकी उपलब्धि को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा उन्हें आवश्यक आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराया गया है। कलेक्टर  अजीत वसंत ने पूजा की सफलता की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद पूजा ने जिस लगन, आत्मविश्वास और मेहनत के साथ नीट में सफलता हासिल की है, वह अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणादायी है। मजदूर मां की मेहनत और बेटी के हौसले ने दिखाई सफलता की राह कुमारी पूजा सिंह विकासखंड सीतापुर के ग्राम राधापुर की निवासी हैं। उनका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। पूजा के पिता  चक्रधर सिंह दूसरी शादी के बाद अपनी दूसरी पत्नी के साथ निवास करते हैं। ऐसे में परिवार के भरण-पोषण और बेटी की पढ़ाई की जिम्मेदारी उनकी मां के कंधों पर रही। पूजा की मां के पास स्वयं की कृषि भूमि नहीं है। परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए वे गांव में दूसरे लोगों के खेतों में मजदूरी करती हैं। सीमित आय और संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी बेटी की पढ़ाई जारी रखने में कोई कसर नहीं छोड़ी। मां की मेहनत और बेटी के दृढ़ संकल्प ने मिलकर पूजा के सपने को आगे बढ़ाया। शासकीय स्कूल से पढ़ाई, घर पर रहकर चार साल की नीट तैयारी पूजा ने अपनी प्रारंभिक एवं पूर्व माध्यमिक शिक्षा ग्राम राधापुर में पूरी की। इसके बाद उन्होंने शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सीतापुर से हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी की पढ़ाई पूरी की। वर्ष 2022 में उन्होंने कक्षा 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए बड़े शहर जाकर महंगी कोचिंग ले सकें। इसके बावजूद पूजा ने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया। उन्होंने वर्ष 2022 से 2026 तक लगातार चार वर्षों तक घर पर रहकर नीट परीक्षा की तैयारी की। 66 प्रतिशत दिव्यांगता और आर्थिक चुनौतियों के बीच भी उन्होंने डॉक्टर बनने के अपने संकल्प को कमजोर नहीं पड़ने दिया। चार साल की मेहनत लाई रंग, मेडिकल कॉलेज जगदलपुर में मिला प्रवेश पूजा की निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास का परिणाम वर्ष 2026 में सामने आया। उन्होंने नीट परीक्षा में सफलता हासिल की और काउंसलिंग के माध्यम से मेडिकल कॉलेज जगदलपुर में प्रवेश प्राप्त किया। सीमित संसाधनों के बीच एक मजदूर मां की बेटी का मेडिकल कॉलेज तक पहुंचना उनके परिवार के साथ-साथ पूरे सरगुजा जिले के लिए गौरव की उपलब्धि है। पूजा की सफलता यह संदेश देती है कि कठिन परिस्थितियां लक्ष्य की राह में स्थायी बाधा नहीं होतीं। यदि संकल्प मजबूत हो और मेहनत निरंतर जारी रहे तो सीमित संसाधनों में भी बड़े सपनों को साकार किया जा सकता है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल से मिली आर्थिक सहायता ने अब यह सुनिश्चित किया है कि पूजा की मेडिकल शिक्षा आर्थिक तंगी के कारण बाधित न हो। मां की मेहनत, बेटी का संघर्ष और शासन का सहयोग—इन तीनों के समन्वय ने पूजा के डॉक्टर बनने के सपने को नई उड़ान दी है। पूजा की यह सफलता सरगुजा सहित प्रदेश के उन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े लक्ष्य निर्धारित कर उन्हें हासिल करने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं।