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प्रोटोकॉल विवाद में फंसे यूपी मंत्री का बेटा, निजी सचिव को पद से हटाया गया

लखनऊ योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह के पुत्र अभिषेक सिंह को प्रोटोकॉल दिलाने का पत्र जारी करना मंत्री के निजी सचिव को महंगा पड़ा। इस मामले नाराजगी जताते हुए स्वतंत्रदेव सिंह ने अपने निजी सचिव आनंद शर्मा को हटा दिया है। कहा जा रहा है कि मंत्री की बिना जानकारी में लाए निजी सचिव द्वारा यह पत्र जालौन के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को जारी किया गया था। हालांकि इस मामले के तूल पकड़ने और मीडिया में आने के बाद आनंद शर्मा ने पत्र को फर्जी करार दिया। बता दें कि मंत्री पुत्र अभिषेक सिंह को जालौन में आयोजित तिरंगा यात्रा में भाग लेने जाना था। कोई आधिकारिक पद न होने के बावजूद मंत्री के निजी सचिव द्वारा जालौन के डीएम-एसपी को मंत्री पुत्र को प्रोटोकॉल दिलाने के लिए पत्र जारी कर दिया गया था। यह पत्र गत दिवस वायरल हो गया था। शुक्रवार को जलशक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह द्वारा बिना जानकारी में लाए इस तरह का पत्र जारी करने पर पद से हटा दिया। विपक्ष साध रहा था निशाना जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के बेटे को प्रोटोकॉल देने को लेकर जारी हुए पत्र के वायरल होते ही विपक्ष सरकार पर हमलावर हो गया था। सपा और कांग्रेस के नेता इस पर सवाल खड़े कर रहे थे। 14 अगस्त को मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के निजी सचिव आनंद कुमार द्वारा जालौन के डीएम और एसपी को भेजे गए पत्र में अभिषेक सिंह को स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त के दिन प्रोटोकॉल दिए जाने का उल्लेख था। यह पत्र सोशल मीडिया में वायरल हो गया था। इसके बाद सवाल उठाया जाने लगा कि आखिर किस आधार पर मंत्री के परिवार के किसी सदस्य को प्रशासनिक प्रोटोकॉल दिया जा सकता है। विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को तत्काल घेरना शुरू कर दिया। कांग्रेस नेता विश्वविजय सिंह ने ‘एक्स’ पर लिखा- ‘वंशवाद को लेकर सर्वाधिक शोर मचाने वाली भाजपा के सरकार में अब मंत्री पुत्र को भी प्रोटोकॉल! जलशक्ति मंत्री के पुत्र को बिना किसी पद पर रहते प्रोटोकॉल देना यूपी भाजपा सरकार के नैतिक पतन की पराकाष्ठा है।’ सोशल मीडिया पर कई अन्य लोगों ने यह पत्र साझा करते हुए सवाल उठाए थे।  

अब दूसरे राज्यों में भी नहीं बच पाएंगे बिहार के गुनेहगार! STF ने दबोचे 64 कुख्यात

अब किसी कोने में नहीं छिप पाएंगे अपराधी, बिहार पुलिस का ऑपरेशन जारी पटना,  बिहार में अपराध करके दूसरे राज्यों में छिपने वाले अपराधियों के दिन अब लद गए हैं। इस साल जनवरी से अब तक पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने देशभर के कई राज्यों से 64 कुख्यात और इनामी अपराधियों को दबोचा है। सबसे ज्यादा 14 अपराधी दिल्ली से पकड़े गए, जबकि पश्चिम बंगाल से 9 की गिरफ्तारी हुई है। यहां से दबोचे गए 64 कुख्‍यात एडीजी (अभियान एवं मुख्यालय) कुंदन कृष्णन ने बताया कि भगोड़े अपराधियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। संगठित आपराधिक गिरोहों का सफाया STF की प्राथमिकता है। उन्होंने खुलासा किया कि दिल्ली और पश्चिम बंगाल के बाद उत्तर प्रदेश और गुजरात 7-7 अपराधी, झारखंड से 6, हरियाणा से 5, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश से 4-4, हिमाचल और पंजाब से 2-2 समेत राजस्थान, गोवा, उड़ीसा, उत्तराखंड, कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर और मणिपुर से भी अपराधियों को पकड़ा गया है। नक्‍सल पड़े कमजोर, अपराधियों पर फोकस एडीजी मुख्‍यालय कुंदन कृष्णन ने बताया कि बिहार में नक्सली हिंसा अब कमजोर पड़ चुकी है। जिसके बाद STF का फोकस अपराधी गिरोहों और उनकी सप्लाई चेन तोड़ने पर है। यही वजह है कि इस साल अब तक 857 अपराधी गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 752 था। बताते चलें 2024 में 44 नक्सली गिरफ्तारी हुई। ज‍बकि इस साल अब तक 101 नक्सली पकड़े जा चुके हैं। इनामी बदमाशों की गिरफ्तारियां STF ने कई बड़े इनामी अपराधियों को दबोचा है। एडीजी मुख्‍यालय और अभियान ने बताया कि इनामी बदमाशों की लिस्‍ट में बुटन चौधरी, 2 लाख का इनामी बदमाश था। जिसे महाराष्ट्र के उदवंतनगर से 18 अगस्त को गिरफ्तार किया गया। दिल्‍ली से सुबोध सिंह को दबोचा गया। यह इंटर-स्टेट सोना लुटेरा था। जिसे 5 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया। विकास उर्फ जॉन राइट भी इनामी बदमाश था। इस पर 2 लाख का इनामी घोषित था। जिसे दिल्‍ली से गिरफ्तार किया गया। वहीं, 1 लाख के इनामी नक्सली राजेश यादव को महाराष्ट्र से पकड़ा गया और मनीष नाम के 50 हजारी अपराधी को दिल्ली के पहाड़गंज से दबोचा गया। मनीष सीवान-गोपालगंज का नामी बदमाश था। ऑपरेशन में जवानों को मिली सर्वोच्‍च गति एडीजी कृष्णन ने बताया कि अपराधियों को पकड़ने के ऑपरेशन में STF के कई जवानों ने जान गंवाई है। गुजरात के सूरत में ऑपरेशन के दौरान हुए हादसे में दारोगा मुकुंद मुरारी, जेसी विकास कुमार, जेसी जीवधारी कुमार, दारोगा संतोष कुमार और मिथिलेस पासवान की मौत हो गई थी। जिन्‍होंने पुलिस सेवा के दौरान सर्वोच्‍च गति प्राप्‍त की।

बधाई के बहाने 1 लाख की मांग, हिसार में किन्नरों पर कार्रवाई, पुलिस आई बीच

हिसार  हिसार में पुलिस कर्मचारी के घर पोता होने पर बधाई मांगने पहुंचे किन्नरों द्वारा एक लाख रुपए का शगुन मांगने पर हंगामा हो गया। परिवार ने 5 हजार से ज्यादा रकम न देने से मना कर दिया, जबकि किन्नर 1 लाख रुपए लेने पर अड़े रहे। विवाद बढ़ने पर किन्नरों ने ऊंची आवाज में बोलना शुरू कर दिया। मामला अधिक उलझता देख परिवार ने डायल 112 को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस को देख किन्नरों के तेवर ढीले पड़ गए। 2 घंटे तक चले हंगामे के बाद में किन्नर परिवार की मर्जी से दो हजार रुपए पैसे लेने पर राजी हो गए। जानकारी के मुताबिक यह मामला हिसार के गांव शिकारपुर का है। गांव के रहने वाले पुलिस हवलदार सतबीर घोड़ेला के परिवार में 6 दिन पहले पोते का जन्म हुआ था। आज इसकी खबर किन्नरों को चली तो वे बधाई मांगने पहुंच गए। सतबीर के बेटे प्रवीण ने बताया कि घर में आते ही किन्नरों ने मंगल गीत गाने शुरू कर दिए। यह देख आसपास के लोगों की भीड़ जुट गई। परिवार ने भी किन्नरों का स्वागत किया, मगर मंगल गीतों के बाद जब बधाई देने का वक्त आया तो किन्नरों ने एक लाख रुपए की मांग रख दी जिसे सुनकर परिवार के होश उड़ गए। परिवार ने पहले  5 हजार और दो सूट देने की बात कही थी।  प्रवीण ने किन्नरों को बताया कि हमारे खेत पानी में डूबे हुए हैं और अभी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। इसके बाद किन्नरों ने 51 हजार देने की बात कही। प्रवीण के मुताबिक जब वो नहीं माने तो मजबूर होकर मुझे डायल 112 बुलानी पड़ी। सूचना मिलते ही पुलिस पहुंची और मामले की जानकारी ली। पुलिसकर्मी संदीप कुमार ने बताया कि परिवार का आरोप था कि किन्नर जबरदस्ती कर रहे हैं और मान नहीं रहे। उधर पुलिस को देख किन्नरों के तेवर भी ढीले पड़ गए। पुलिसकर्मियों के समझाने पर किन्नर परिवार की मर्जी से पैसे लेने पर राजी हो गए। वहीं इस मामले में किन्नरों ने कहा कि यह परिवार नौकरी पेशे वाला परिवार है, इसलिए यहां हमने 11000 रुपए मांगे। गांव में गरीब घरों में हम 200 से 300 रुपए भी लेते हैं। परन्तु यह परिवार नहीं माना। बाद में परिवार ने जो खुशी से दिया, हमने ले लिया।

भीषण सड़क दुर्घटना से कोहराम: टेंपो के परखच्चे उड़ने से 5 लोगों की गई जान

पीलीभीत पीलीभीत जिले के जहानानाबाद क्षेत्र में शनिवार दोपहर भीषण सड़क हादसा हुआ। कार और टेंपो की टक्कर से टेंपो में सवार मासूम समेत पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि पांच अन्य लोग घायल हो गए। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायलों को जहानाबाद सीएचसी पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने घायलों का उपचार शुरू किया। हादसा जहानाबाद क्षेत्र के बिसेन गांव के पास हरिद्वार नेशनल हाईवे पर हुआ। राहगीरों के अनुसार टेंपो पीलीभीत की ओर से आ रहा था। टेंपों में करीब 10 लोग सवार थे। इस दौरान अमरिया की ओर से आई कार से टेंपो की आमने-सामने की भिंड़त हो गई। जोरदार टक्कर में टेंपो क्षतिगस्त होकर पलट गया। हादसे के बाद मौके पर हड़कंप मच गया। चीख पुकार के बीच मौके पर भारी भीड़ एकत्र हो गई। चालक कार छोड़कर फरार हो गया। सूचना पर जहानाबाद पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। सभी घायलों को जहानाबाद सीएचसी ले जाया गया। जहां मासूम समेत पांच लोगों को चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। जबकि घायल पांच अन्य लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल भेजा गया है। जहां उनका उपचार जारी है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पंचायतनामे की प्रक्रिया शुरू कर दी। हादसे में इनकी हुई मौत हादसे में नगर पंचायत नौगवां पकड़िया निवासी राजदा (45 वर्ष) पत्नी अल्ताफ, उनकी दो वर्षीय नातिन हमजा पुत्री सुल्तान, जानिसार पुत्र जागीर शाह निवासी पश्चिम बंगाल, टेंपो चालक विजय (30 वर्ष) पुत्र लीलाधर निवासी खमड़िया दलेलगंज और फरीदा की मौत हुई है। घायलों में मृतक मासूम की मां मुस्कान, फरजंद अली, सहरीना व फैजुल आदि शामिल हैं। इनका उपचार चल रहा है। अस्पताल पहुंचे डीएम ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि पांच लोगों की मौत हुई है। बाकी लोग घायल हैं। उनका उपचार चल रहा है। एक गंभीर घायल को बरेली रेफर किया गया है। 

4.25 करोड़ पौधे और 4,500 महिलाएं जुड़ीं रेशम से, गांव की अर्थव्यवस्था को मिला नया आधार

पटना, बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार का ‘जीविका दीदियों’ का ये विजन आज सुपर हिट साबित हो रहा है। वो न केवल बिहार के विकास में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और वैचारिक विकास की नई कहानी लिख रही है। उनकी भूमिका अब हर क्षेत्र में नजर आ रही है। उन्‍होंने वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में भी महत्‍वपूर्ण रोल अदा किया है। आज जीविका दीदियों की 60,000 से ज्यादा सक्रीय ग्राम संगठन हैं। 4.25 करोड़ लगाए पेड़ जीविका गांव की महिलाओं के लिए केवल आजीविका के नए रास्ते खोल नहीं रही हैं, बल्कि वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग और मनरेगा का भी सहयोग कर रहीं हैं। जिसका नतीजा है कि अब तक 987 पौधशालाएं तैयार की गई हैं। जिसके जरिए 4.25 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं। महिलाओं को मिल रही अलग पहचान यही नहीं, मुख्यमंत्री कोशी मलवरी परियोजना के तहत 4,500 महिलाओं को मलबरी की खेती और रेशम कीट पालन से जोड़ा गया है। इससे हजारों परिवारों को स्थायी आय का नया जरिया मिला है। जो महिलाओं को आत्‍मनिर्भर तो बना ही रहा है, उन्‍हें समाज में अलग पहचान भी दिला रहा है। सोलर लैंप बना रहीं दीदियां जीविका की सक्रीय महिला समूह की महिलाएं आज सोलर लैंप बनाने का भी काम कर रही हैं। जिसे नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सहयोग से किया जा रहा है। बिहार सरकार के आंकड़ों के मुताबिक इस काम में 372 महिलाएं लगी हुई हैं। जिन्‍हें रोजगार तो मिल ही रहा है, गांव भी रोशन हो रहे हैं। आज इन महिलाओं के पहचान एक उद्यमी के रूप में भी बन रही है। गया जिले की जे-डब्लूआईआरईएस कंपनी भी इस काम को गति दे रही है। 33 जिलों के सामुदायिक पुस्‍तकालयों में दबदबा  इसके अलावा शिक्षा के क्षेत्र में भी पहल हो रही है। बिहार के 33 जिलों के 110 प्रखंडों में सामुदायिक पुस्तकालय सह कैरियर विकास केंद्र स्थापित किए गए हैं। जहां ग्रामीण बच्चों को पढ़ाई और करियर मार्गदर्शन मिल रहा है। आर्थिक आत्मनिर्भरता से लेकर सामाजिक बदलाव तक, जीविका महिलाओं की यह यात्रा बिहार के गांवों को नई पहचान दिला रही है।

तोमर गैंग पर बड़ी कार्रवाई, करोड़ों की संपत्ति जब्त

रायपुर राजधानी में फरार चल रहे कुख्यात तोमर बंधुओं वीरेंद्र तोमर और रोहित तोमर पर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है. बुधवार को सेशन कोर्ट द्वारा तोमर बंधुओं की अग्रिम जमानत खारिज किए जाने और संपत्ति कुर्क करने की मंजूरी मिलने के बाद आज जिला प्रशासन की टीम ने उनकी संपत्तियों को कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. 3,000 स्क्वायर फीट की संपत्ति कुर्क SDM नंद कुमार चौबे, तहसीलदार पुलिस की टीमों ने तोमर बंधुओं के भाठागांव स्थित तोमर बंधुओं के साईं विला मकान और जमीन को कुर्क किया है. कुर्क की गई संपत्ति कुल 3,000 स्क्वायर फीट है, जिसमें वीरेंद्र और रोहित दोनों भाइयों की 1,500-1,500 स्क्वायर फीट की संपत्ति है. इसके अलावा राजधानी के आसपास स्थित उनकी तीन और जमीनों की कुर्की की कागजी कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है. बता दें, तोमर बंधुओं के लगातार 2 महीने से फरार रहने के चलते SSP डॉ. लाल उमेद सिंह ने पहले ही दोनों भाइयों की गिरफ्तारी पर 5-5 हजार का इनाम घोषित कर रखा है. साथ ही पुलिस ने उनकी संपत्तियों को कुर्क करने की मांग कोर्ट से की थी, जिसे बुधवार को अदालत ने मंंजूरी दे दी. कोर्ट से कलेक्टर को कुर्की के आदेश मिलने के बाद प्रशासनिक टीम ने यह कार्रवाई शुरू की. बचाव पक्ष की आपत्ति तोमर बंधुओं के वकील ने कुर्की आदेश पर आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि उन्होंने 18 अगस्त को आवेदन दायर किया था. जिस पर 20 अगस्त को सुनवाई तय थी. लेकिन उससे पहले ही बिना पक्ष सुने कुर्की आदेश जारी कर दिया गया, जो न्यायसंगत नहीं है. इस पर अब गुरुवार को कोर्ट में सुनवाई होगी.

नीतीश कुमार ने जताया शोक: पटना हादसे में 8 की मौत, घायलों की हालत नाज़ुक

 पटना पटना के बाहरी इलाके में शनिवार को एक मिनी वैन और ट्रक की आमने-सामने की टक्कर में आठ लोगों की मौत हो गई और चार अन्य घायल हो गए। पुलिस ने यह जानकारी दी। वहीं, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना जिले के शाहजहांपुर थाना क्षेत्र के सिगरियामा में ट्रक और ऑटो रिक्शा में हुई टक्कर में आठ लोगों की मौत पर गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है। 'यह घटना काफी दु:खद' नीतीश कुमार ने कहा कि यह घटना काफी दु:खद है। सभी मृतक नालंदा जिले के हिलसा थाना क्षेत्र के मलामा गांव के निवासी थे। मुख्यमंत्री ने इस दुर्घटना में घायल लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की चिर शान्ति तथा उनके परिजनों को दु:ख की इस घड़ी में धैर्य धारण करने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की है। बता दें कि यह दुर्घटना दनियावां- हिलसा सड़क मार्ग पर तब हुई, जब एक ऑटो और हाइवा वाहन की आमने- सामने की टक्कर हो गई। सभी आठ मृतक नालंदा जिले के हिलसा थाना क्षेत्र के रेडी मालामा गांव के निवासी थे। वे फतुहा त्रिवेणी में गंगा स्नान के लिये जा रहे थे। सुबह करीब पौने सात बजे दनियावां पहुंचते ही तेज रफ्तार हाइवा से ऑटो की सीधी भिड़ंत हो गई, जिससे ऑटो में सवार आठ लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। दुर्घटना में घायल पांच लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) भेजा गया है।  

भारत से भिड़ंत को तैयार मलेशिया की पुरुष हॉकी टीम, कप्तान ने जताई बड़ी चुनौती

राजगीर मलेशिया की पुरुष हॉकी टीम आज सुबह प्रतिष्ठित हीरो एशिया कप 2025 में भाग लेने के लिए बिहार के शहर राजगीर पहुंची। पिछली बार जकार्ता में हुए फाइनल में मलेशिया को कोरिया के हाथों 1-2 से हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन इस बार कप्तान ने साफ कहा कि टीम जीतने के इरादे से आई है। "टीम जीतने के इरादे से आई" मलेशिया की पुरुष हॉकी टीम के कप्तान मरहान जलील ने कहा कि प्रतियोगिता के प्रबल दावेदारों में एक भारत को हराना उनके लिए बड़ी चुनौती है। पिछली बार इस प्रतियोगिता के फाइनल में जकार्ता में अपने गृह मैदान पर मलेशिया को कोरिया के हाथों 1-2 से हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन इस बार कप्तान ने साफ कहा कि टीम जीतने के इरादे से आई है। कप्तान जलील ने कहा कि ‘‘राजगीर आकर बेहद उत्साहित हूं। हमारी तैयारी अच्छी रही हैं और एक शानदार टूर्नामेंट की उम्मीद से मैदान में उतर रहे हैं। मेज़बान भारत को हराना आसान नहीं होगा क्योंकि उन्होंने प्रो लीग में कई शीर्ष टीमों के साथ खेला है और उनके पास बेहतरीन अनुभव और अंतरराष्ट्रीय हॉकी का एक्सपोज़र है।'' "हमारी कोशिश पहले सुपर 4 में पहुंचने की होगी" कप्तान जलील ने कहा कि मौजूदा चैंपियन कोरिया भी इस टूर्नामेंट में देखने योग्य टीम होगी। इस साल मलेशिया की टीम उनके खिलाफ खेल चुकी हैं और वे बेहद फिट तथा तेज नज़र आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश पहले सुपर 4 में पहुंचने की होगी। टीम के मुख्य कोच सरजीत कुंदन ने गर्मजोशी भरे स्वागत पर खुशी जताते हुए कहा, “सबसे पहले तो हम इस शानदार स्वागत के लिए आभारी हैं। हमें खुशी है कि हम समय से पहले यहां पहुंचे और कुछ वॉर्म-अप मैच भी खेल पाएंगे। हम एक युवा टीम हैं और हमारा लक्ष्य 2028 ओलंपिक और अगले साल के एशियाई खेलों की तैयारी करना है। हाल ही में हमने ऑस्ट्रेलिया और कोरिया का दौरा किया और अब सुल्तान अजलान शाह टूर्नामेंट भी खेलना है। यहां हमारा मकसद अच्छा खेलना है। हम इस प्रतियोगिता में दूसरी वरीयता प्राप्त टीम हैं और उम्मीद है कि पदक जीतेंगे।” बता दें कि राजगीर में 12वां एशिया कप हॉकी टूर्नामेंट 29 अगस्त से शुरू हो रहा है। मलेशिया 29 अगस्त को टूर्नामेंट का उद्घाटन मैच बांग्लादेश के खिलाफ खेलेगी। मलेशिया पूल-बी में कोरिया, बांग्लादेश और चीनी ताइपे के साथ है, जबकि पूल-ए में भारत, जापान, चीन और कज़ाख़स्तान शामिल हैं। मैचों का सीधा प्रसारण सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क पर होगा।  

महादेव सट्टा एप कांड: गिरफ्तारी वारंट रद्द कराने कोर्ट पहुंचे आरोपी

रायपुर ऑनलाइन गेमिंग पर सरकार के प्रतिबंध लगाए जाने के बाद महादेव सट्टा एप के सरगनाओं में खलबली मची हुई है. एप के संचालकनकर्ता सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल ने गिरफ्तारी वारंट खारिज करने के लिए ईडी की विशेष अदालत में आवेदन लगाया है, जिसमें 3 महीने के भीतर खुद पेश होने की बात कही है. मामले में ईडी कोर्ट में अगली सुनवाई 3 नवंबर को होगी. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के वकील सौरभ पांडे ने बताया कि महादेव ऑनलाइन सट्टा एप के आरोपी सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल बीते दिनों कोर्ट में पेश नहीं हुए थे. विशेष न्यायालय ने दोनों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था. उस गैर जमानती वारंट को कैंसिल करने के लिए सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल हाईकोर्ट में आवेदन लगाया था. जिसे वृहद सुनवाई के बाद न्यायालय ने आवेदन को निरस्त कर दिया था. रवि उप्पल ने सुप्रीम कोर्ट में आवेदन लगाया था. जो आज तक तक पेंडिंग पड़ी है. लेकिन आज एक बार फिर वारंट को कैंसिल करने आवेदन लगाया है. साथ ही अपनी सुरक्षा की तैयारियों का हवाला देते हुए कोर्ट में पेश होने के लिए तीन महीने का समय मांगा है. अगर ये बिना किसी शर्त के अपनी बात रखते हैं, तो इस विषय पर सोचा जा सकता है. लेकिन इन्होंने इस बार भी शर्तें रखी है. इस पर भविष्य में न्यायालय फैसला सुनाएगी.

सिर्फ 16 महीने बाद यूपी की सियासी परीक्षा, नए गुणा-गणित में जुटी पार्टियां

लखनऊ सियासी मंचों से भले ही लोक कल्याणकारी उद्देश्यों की बातें की जाएं, सियासत की धुरी को लोगों के अच्छे और सरल जीवन यापन पर केंद्रित करने के दावे हों लेकिन फिलहाल यूपी की राजनीतिक हकीकत इससे बिलकुल इतर नज़र आ रही है। यूपी में नेताओं की ‘परीक्षा’ यानी विधानसभा चुनाव अभी 16 महीने दूर हैं लेकिन कमोबेश सभी सियासी दल खासतौर पर राजग में सहयोगी दल से लेकर खुद भाजपा के विधायक जातीय जोड़-घटाना करने में जुट गए हैं। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव वर्ष 2027 के फरवरी-मार्च में होने हैं। ऐसे में विपक्षी दल सपा पीडीए को मजबूत करने में जुटी है। सपा जिलों-जिलों में ‘पीडीए’ सम्मेलन शुरू कर रही है। कांग्रेस के प्रवक्ता मनीष हिन्दवी कहते हैं कि मंडल हो या फिर जिला स्तर पर कांग्रेस ‘संगठन सृजन’ के तहत यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि संगठन में 60 फीसदी हिस्सेदारी दलितों, मुस्लिमों और अन्य पिछड़ों की हो। प्रदेश कांग्रेस कमेटी में ओबीसी एडवाइजरी काउंसिल गठित की गई है और 14 जुलाई को भागीदारी न्याय सम्मेलन किया गया। खुद भाजपा में जातीय जोड़-घटाना जोरों पर है। प्रदेश अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया अटकी होने के मद्देनज़र जातीय खेमे प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष अपनी दावेदारी के संकेत दे रहे हैं। पहले आंवला में भाजपा के कद्दावर मंत्री धर्मपाल सिंह के जरिये लोध सम्मेलन किया गया। वहीं कुर्मियों की ओर से ‘सरदार पटेल बौद्धिक मंच’ के बैनर तले लखनऊ में सम्मेलन किया गया। इसके कर्ताधर्ता इंजीनियर अवनीश सिंह थे। उन्हें जलशक्ति मंत्री का सबसे करीबी माना जाता है। इस सम्मेलन में अपना दल के नेता आशीष पटेल ने भी जोरशोर से शिरकत की। इसके जरिये भी सियासी संदेश देने की कोशिश की गई। इसी तर्ज पर अलीगढ़ में गुरुवार को पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की पुण्यतिथि पर ‘हिन्दू गौरव दिवस’ के रूप में श्रद्धांजलि समारोह आयोजित कर ताकत दिखाई गई। वैसे यह कार्यक्रम हर वर्ष होता रहा है लेकिन चुनावों के मद्देनज़र इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दूसरी ओर अति अन्य पिछड़ी जातियों की सियासत करने वाले निषाद पार्टी के मुखिया संजय निषाद ने भी पुरानी मांग उठाना शुरू कर दी है। ‌उन्होंने दिल्ली में ताकत दिखाकर भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को संदेश देने का प्रयास किया है कि अति पिछड़ी जातियों को एससी का दर्जा देने की उनके दल की मांग पर ध्यान दिया जाए। क्षत्रिय विधायकों में भी लामबंदी के प्रयास क्षत्रिय विधायकों ने भी लखनऊ के एक होटल में कुटुंब सम्मेलन कर अपनी ताकत दिखाने की कोशिश की। इसमें सपा से हटाए गए क्षत्रिय विधायकों अभय सिंह व राकेश सिंह ने भी शिरकत की थी। राजनीतिक विश्लेषक पूर्व आईजी अरुण कुमार गुप्ता कहते हैं-‘छोटे दलों ने यह कवायद विधानसभा चुनाव में टिकटों की दावेदारी के मद्देनज़र की है। इसे ताकत दिखाने और सत्तारूढ़ दल व विपक्ष के बीच तवज्जो मिलने की सौदेबाजी के रूप में भी देखा जा रहा है। वहीं सत्तारूढ़ दल के धड़ों की यह मशक्कत प्रदेश अध्यक्ष के पद पर चयन की दावेदारी के रूप में भी देखी जा रही है।