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MP अतिथि शिक्षकों को अलर्ट: 18 जुलाई से ई-अटेंडेंस नहीं तो मानदेय भी नहीं

भोपाल  मध्य प्रदेश में अतिथि शिक्षकों से जुड़ी जरुरी खबर सामने आई है। स्कूल शिक्षा विभाग ने अतिथि शिक्षकों के लिए “हमारे शिक्षक” ऐप पर ई-अटेंडेंस दर्ज करना अनिवार्य किया है, लेकिन कई शिक्षक इस नियम का पालन नहीं कर रहे हैं। विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए निर्देश जारी किए हैं कि 18 जुलाई, 2025 से जो अतिथि शिक्षक ई-अटेंडेंस नहीं लगाएंगे, उन्हें गैरहाजिर माना जाएगा और उनका मानदेय रोका जाएगा।  ई-अटेंडेंस के चौंकाने वाले आंकड़े विभाग ने सभी जिलों में अतिथि शिक्षकों की ई-अटेंडेंस की स्थिति की समीक्षा की तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। किसी भी जिले में 50 प्रतिशत से अधिक ऑनलाइन अटेंडेंस दर्ज नहीं हुई है। कई जिलों में यह आंकड़ा मात्र 10 से 20 प्रतिशत के बीच है, जबकि अनूपपुर जिले में ई-अटेंडेंस शून्य प्रतिशत रहा। स्कूल शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि “हमारे शिक्षक” ऐप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करना अब अनिवार्य है।  "हमारे शिक्षक" ऐप से अनिवार्य की गई उपस्थिति स्कूल शिक्षा विभाग ने इस शैक्षणिक सत्र से गेस्ट टीचर्स की अटेंडेंस मोबाइल ऐप "हमारे शिक्षक" के जरिए दर्ज करना अनिवार्य कर दिया है। इसके लिए सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। अब शिक्षक की उपस्थिति सिर्फ ऐप के माध्यम से ही मान्य मानी जाएगी। हालांकि, अभी तक कई गेस्ट टीचर्स इस आदेश का पालन नहीं कर रहे हैं। इस पर लोक शिक्षण आयुक्त ने नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि लगभग 80% अतिथि शिक्षकों ने ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं की है, जो कि बहुत ही निराशाजनक है। 18 जुलाई से अटेंडेंस नहीं तो वेतन नहीं मध्यप्रदेश में गेस्ट टीचर्स के लिए शुरू की गई ई-अटेंडेंस व्यवस्था जुलाई माह के पहले पंद्रह दिनों में बुरी तरह विफल साबित हुई है। अब स्कूल शिक्षा विभाग ने इसको लेकर सख्त रुख अपनाते हुए सभी जिलों शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 18 जुलाई से जिन अतिथि शिक्षक-शिक्षिकाओं की उपस्थिति (ई-अटेंडेंस) ‘हमारे शिक्षक’ ऐप के माध्यम से दर्ज नहीं होगी, उन्हें अनुपस्थित माना जाएगा और उनका मानदेय भी रोका जाएगा।” ई-अटेंडेंस नहीं लगाई तो रुकेगा मानदेय विभाग ने साफ कहा है कि सभी गेस्ट टीचर्स को सूचना दी जाए कि अगर वे "हमारे शिक्षक" ऐप से अटेंडेंस दर्ज नहीं करते हैं, तो उन्हें गैरहाजिर माना जाएगा और उनका मानदेय नहीं मिलेगा। यह ई-अटेंडेंस की व्यवस्था 1 जुलाई 2025 से शुरू की गई है। लेकिन पहले 15 दिन की समीक्षा में सामने आया कि 80% से ज्यादा गेस्ट टीचर्स ने ऐप से अटेंडेंस नहीं लगाई है। गेस्ट टीचर्स की ई-अटेंडेंस की रिपोर्ट जारी शिक्षा विभाग ने हमारे शिक्षक’ ऐप से अटेंडेंस नहीं लगाने वाले शिक्षकों को अब अनुपस्थित मानते हुए वेतन न देने का निर्णय लिया गया है। शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के गेस्ट टीचर्स की ई-अटेंडेंस पर आधारित रिपोर्ट जारी करते हुए निर्देश दिए हैं कि इसे सख्ती से लागू किया जाए। वहीं, अतिथि शिक्षक संघ ने आपत्ति जताते हुए स्पष्ट किया है कि जब तक उन्हें अवकाश जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलतीं, तब तक वे ऐप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज नहीं करेंगे। गेस्ट टीचर्स ने नहीं लगाई ई-अटेंडेंस दरअसल, स्कूल शिक्षा विभाग ने इस शैक्षणिक सत्र से गेस्ट टीचर्स की उपस्थिति मोबाइल ऐप ‘हमारे शिक्षक’ के माध्यम से दर्ज करना अनिवार्य कर दिया है। बावजूद इसके, बड़ी संख्या में अतिथि शिक्षक अब तक इस निर्देश का पालन नहीं कर रहे हैं। इस लापरवाही पर लोक शिक्षण आयुक्त ने गंभीर नाराजगी जताते हुए कहा कि लगभग 80% गेस्ट टीचर्स ने ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं की है, जो कि अत्यंत चिंताजनक और निराशाजनक स्थिति है।” शिक्षकों का एक वर्ग इस व्यवस्था का कर रहा विरोध विभाग का कहना है कि यह कदम शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए उठाया गया है। हालांकि, शिक्षकों का एक वर्ग इस व्यवस्था का विरोध कर रहा है, उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या और ऐप की तकनीकी खामियों के कारण यह प्रणाली अव्यवहारिक है। इस सख्ती के बाद अब देखना होगा कि अतिथि शिक्षक इस नियम का पालन करते हैं या विरोध और तेज होता है। डिंडोरी जिले में 50 प्रतिशत से ज्यादा उपस्थिति शिक्षा विभाग द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, मध्यप्रदेश के 55 जिलों में से केवल डिंडोरी ऐसा जिला है जहां अपेक्षाकृत बेहतर ई-अटेंडेंस दर्ज की गई है। यहां 57% गेस्ट टीचर्स ने ‘हमारे शिक्षक’ ऐप के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज की। इसके बाद झाबुआ में 48%, खरगोन में 45%, तथा नरसिंहपुर और शहडोल में 44-44% गेस्ट टीचर्स की अटेंडेंस दर्ज की गई। वहीं दूसरी ओर, अनूपपुर जिला सबसे पीछे रहा, जहां 17 गेस्ट टीचर्स में से किसी ने भी एक भी दिन उपस्थिति दर्ज नहीं की। इसी तरह निवाड़ी और अलीराजपुर में मात्र 7-7% और मऊगंज और हरदा में 8-8% अटेंडेंस ही रिकॉर्ड की गई है। यह आंकड़े ई-अटेंडेंस व्यवस्था की जमीनी स्थिति को लेकर गंभीर चिंता पैदा करते हैं। "जब तक अवकाश की सुविधा नहीं मिलेगी, नहीं लगाएंगे ई-अटेंडेंस" अतिथि शिक्षक संघ के अध्यक्ष सुनील परिहार ने स्कूल शिक्षा विभाग की ई-अटेंडेंस अनिवार्यता पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि पिछले 17 सालों में अतिथि शिक्षकों को एक भी अवकाश की सुविधा नहीं दी गई है, जबकि अतिथि विद्वानों को यह सुविधा उपलब्ध है। परिहार ने कहा, हमारे पास न तो दुर्घटना बीमा है और न ही महिला शिक्षकों को प्रसूति अवकाश मिलता है। कई अतिथि शिक्षक ऐसे हैं जिन्हें मात्र ₹10,000 मानदेय मिलता है और वे पिछले चार महीनों से बेरोजगार हैं। कई के पास स्मार्टफोन तक नहीं हैं, ऐसे में वे ई-अटेंडेंस कैसे लगाएं?

MP अतिथि शिक्षकों को अलर्ट: 18 जुलाई से ई-अटेंडेंस नहीं तो मानदेय भी नहीं

भोपाल  मध्य प्रदेश में अतिथि शिक्षकों से जुड़ी जरुरी खबर सामने आई है। स्कूल शिक्षा विभाग ने अतिथि शिक्षकों के लिए “हमारे शिक्षक” ऐप पर ई-अटेंडेंस दर्ज करना अनिवार्य किया है, लेकिन कई शिक्षक इस नियम का पालन नहीं कर रहे हैं। विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए निर्देश जारी किए हैं कि 18 जुलाई, 2025 से जो अतिथि शिक्षक ई-अटेंडेंस नहीं लगाएंगे, उन्हें गैरहाजिर माना जाएगा और उनका मानदेय रोका जाएगा।  ई-अटेंडेंस के चौंकाने वाले आंकड़े विभाग ने सभी जिलों में अतिथि शिक्षकों की ई-अटेंडेंस की स्थिति की समीक्षा की तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। किसी भी जिले में 50 प्रतिशत से अधिक ऑनलाइन अटेंडेंस दर्ज नहीं हुई है। कई जिलों में यह आंकड़ा मात्र 10 से 20 प्रतिशत के बीच है, जबकि अनूपपुर जिले में ई-अटेंडेंस शून्य प्रतिशत रहा। स्कूल शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि “हमारे शिक्षक” ऐप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करना अब अनिवार्य है।  "हमारे शिक्षक" ऐप से अनिवार्य की गई उपस्थिति स्कूल शिक्षा विभाग ने इस शैक्षणिक सत्र से गेस्ट टीचर्स की अटेंडेंस मोबाइल ऐप "हमारे शिक्षक" के जरिए दर्ज करना अनिवार्य कर दिया है। इसके लिए सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। अब शिक्षक की उपस्थिति सिर्फ ऐप के माध्यम से ही मान्य मानी जाएगी। हालांकि, अभी तक कई गेस्ट टीचर्स इस आदेश का पालन नहीं कर रहे हैं। इस पर लोक शिक्षण आयुक्त ने नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि लगभग 80% अतिथि शिक्षकों ने ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं की है, जो कि बहुत ही निराशाजनक है। 18 जुलाई से अटेंडेंस नहीं तो वेतन नहीं मध्यप्रदेश में गेस्ट टीचर्स के लिए शुरू की गई ई-अटेंडेंस व्यवस्था जुलाई माह के पहले पंद्रह दिनों में बुरी तरह विफल साबित हुई है। अब स्कूल शिक्षा विभाग ने इसको लेकर सख्त रुख अपनाते हुए सभी जिलों शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 18 जुलाई से जिन अतिथि शिक्षक-शिक्षिकाओं की उपस्थिति (ई-अटेंडेंस) ‘हमारे शिक्षक’ ऐप के माध्यम से दर्ज नहीं होगी, उन्हें अनुपस्थित माना जाएगा और उनका मानदेय भी रोका जाएगा।” ई-अटेंडेंस नहीं लगाई तो रुकेगा मानदेय विभाग ने साफ कहा है कि सभी गेस्ट टीचर्स को सूचना दी जाए कि अगर वे "हमारे शिक्षक" ऐप से अटेंडेंस दर्ज नहीं करते हैं, तो उन्हें गैरहाजिर माना जाएगा और उनका मानदेय नहीं मिलेगा। यह ई-अटेंडेंस की व्यवस्था 1 जुलाई 2025 से शुरू की गई है। लेकिन पहले 15 दिन की समीक्षा में सामने आया कि 80% से ज्यादा गेस्ट टीचर्स ने ऐप से अटेंडेंस नहीं लगाई है। गेस्ट टीचर्स की ई-अटेंडेंस की रिपोर्ट जारी शिक्षा विभाग ने हमारे शिक्षक’ ऐप से अटेंडेंस नहीं लगाने वाले शिक्षकों को अब अनुपस्थित मानते हुए वेतन न देने का निर्णय लिया गया है। शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के गेस्ट टीचर्स की ई-अटेंडेंस पर आधारित रिपोर्ट जारी करते हुए निर्देश दिए हैं कि इसे सख्ती से लागू किया जाए। वहीं, अतिथि शिक्षक संघ ने आपत्ति जताते हुए स्पष्ट किया है कि जब तक उन्हें अवकाश जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलतीं, तब तक वे ऐप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज नहीं करेंगे। गेस्ट टीचर्स ने नहीं लगाई ई-अटेंडेंस दरअसल, स्कूल शिक्षा विभाग ने इस शैक्षणिक सत्र से गेस्ट टीचर्स की उपस्थिति मोबाइल ऐप ‘हमारे शिक्षक’ के माध्यम से दर्ज करना अनिवार्य कर दिया है। बावजूद इसके, बड़ी संख्या में अतिथि शिक्षक अब तक इस निर्देश का पालन नहीं कर रहे हैं। इस लापरवाही पर लोक शिक्षण आयुक्त ने गंभीर नाराजगी जताते हुए कहा कि लगभग 80% गेस्ट टीचर्स ने ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं की है, जो कि अत्यंत चिंताजनक और निराशाजनक स्थिति है।” शिक्षकों का एक वर्ग इस व्यवस्था का कर रहा विरोध विभाग का कहना है कि यह कदम शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए उठाया गया है। हालांकि, शिक्षकों का एक वर्ग इस व्यवस्था का विरोध कर रहा है, उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या और ऐप की तकनीकी खामियों के कारण यह प्रणाली अव्यवहारिक है। इस सख्ती के बाद अब देखना होगा कि अतिथि शिक्षक इस नियम का पालन करते हैं या विरोध और तेज होता है। डिंडोरी जिले में 50 प्रतिशत से ज्यादा उपस्थिति शिक्षा विभाग द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, मध्यप्रदेश के 55 जिलों में से केवल डिंडोरी ऐसा जिला है जहां अपेक्षाकृत बेहतर ई-अटेंडेंस दर्ज की गई है। यहां 57% गेस्ट टीचर्स ने ‘हमारे शिक्षक’ ऐप के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज की। इसके बाद झाबुआ में 48%, खरगोन में 45%, तथा नरसिंहपुर और शहडोल में 44-44% गेस्ट टीचर्स की अटेंडेंस दर्ज की गई। वहीं दूसरी ओर, अनूपपुर जिला सबसे पीछे रहा, जहां 17 गेस्ट टीचर्स में से किसी ने भी एक भी दिन उपस्थिति दर्ज नहीं की। इसी तरह निवाड़ी और अलीराजपुर में मात्र 7-7% और मऊगंज और हरदा में 8-8% अटेंडेंस ही रिकॉर्ड की गई है। यह आंकड़े ई-अटेंडेंस व्यवस्था की जमीनी स्थिति को लेकर गंभीर चिंता पैदा करते हैं। "जब तक अवकाश की सुविधा नहीं मिलेगी, नहीं लगाएंगे ई-अटेंडेंस" अतिथि शिक्षक संघ के अध्यक्ष सुनील परिहार ने स्कूल शिक्षा विभाग की ई-अटेंडेंस अनिवार्यता पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि पिछले 17 सालों में अतिथि शिक्षकों को एक भी अवकाश की सुविधा नहीं दी गई है, जबकि अतिथि विद्वानों को यह सुविधा उपलब्ध है। परिहार ने कहा, हमारे पास न तो दुर्घटना बीमा है और न ही महिला शिक्षकों को प्रसूति अवकाश मिलता है। कई अतिथि शिक्षक ऐसे हैं जिन्हें मात्र ₹10,000 मानदेय मिलता है और वे पिछले चार महीनों से बेरोजगार हैं। कई के पास स्मार्टफोन तक नहीं हैं, ऐसे में वे ई-अटेंडेंस कैसे लगाएं?

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा को दी बधाई

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के 29वें मुख्य न्यायाधिपति की शपथ लेने पर न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा को बधाई दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उनका अनुभव, न्याय के प्रति प्रतिबद्धता, दूरदृष्टि और अनुशासन निश्चित ही भारतीय न्याय व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में कहा कि सचदेवा अपने कार्यकाल में संवैधानिक मूल्यों की रक्षा, मौलिक अधिकारों की प्रतिष्ठा और शीघ्र एवं निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करें तथा न्याय एवं संविधान की गरिमा को नई दिशा दें, यही शुभकामनाएं हैं। 

अंधेरे से उजाले की ओर: पूवर्ती गांव के अर्जुन की उड़ान

रायपुर नक्सलवाद से प्रभावित बस्तर अंचल का एक नाम जो आज उम्मीद और बदलाव की मिसाल बनकर उभरा है – वह है माडवी अर्जुन। सुकमा जिले के अति-दुर्गम और माओवादी हिंसा से वर्षों त्रस्त रहे पूवर्ती गांव के इस बालक ने जवाहर नवोदय विद्यालय, पेंटा (दोरनापाल) में छठवीं कक्षा में चयन पाकर इतिहास रच दिया है। यह केवल एक छात्र की जीत नहीं, बल्कि उस उम्मीद का संकेत है जो अब बस्तर के कोने-कोने में अंकुरित हो रही है।  माडवी अर्जुन जिस पूवर्ती गांव का रहने वाला है , दरअसल वह नक्सलियों के कमांडर हिड़मा का पैतृक गांव है। एक दौर था, जब  पूवर्ती नक्सलियों का गढ़ माना जाता था। यहाँ माओवादी जन अदालत लगाकर आतंक और ग्रामीणों भाग्य का फैसला सुनाते थे। अब वही पूवर्ती गांव,  शिक्षा और विकास के नए सूरज की किरणें देख रहा है। अर्जुन की इस उपलब्धि ने यह दिखा दिया है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन हों, अगर अवसर और मार्गदर्शन मिले तो सफलता जरूर मिलती है। अर्जुन वर्तमान में बालक आश्रम सिलगेर में पढ़ाई कर रहा था। उसके घर में न बिजली है, न पक्की छत। उसके माता-पिता खेती और मजदूरी कर किसी तरह घर चलाते हैं। फिर भी, अर्जुन ने कठिन परिस्थितियों को पीछे छोड़ते हुए अपनी मेहनत और आश्रम शिक्षकों के समर्पण से यह उपलब्धि अर्जित की। बीते डेढ़ वर्षों में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा चलाए जा रहे नक्सल उन्मूलन अभियान ने बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों में परिवर्तन की नींव रखी है। पूवर्ती जैसे क्षेत्र जहां पहले सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं थीं, अब वहां सड़क निर्माण, सुरक्षा बलों के कैंप, गुरुकुल विद्यालय, स्वास्थ्य सेवाएं और उचित मूल्य दुकानें शुरू हो चुकी हैं। पूवर्ती में अब बच्चों की पढ़ाई के लिए सुरक्षा बलों की देखरेख में चल रहे  गुरुकुल ने एक प्रेरणादायी माहौल देना शुरू किया है। अर्जुन की सफलता इसी सतत प्रयास की पहली बड़ी उपलब्धि है। जिला कलेक्टर श्री देवेश ध्रुव ने कहा कि पूवर्ती जैसे दुर्गम और माओवाद प्रभावित गांव से नवोदय विद्यालय में चयन, न केवल अर्जुन की मेहनत का परिणाम है, बल्कि यह जिले की शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन का भी संकेत है। हम हर बच्चे को आगे बढ़ाने का मौका देना चाहते हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि माडवी अर्जुन की सफलता छत्तीसगढ़ की बदलती तस्वीर का प्रतीक है। यह उस नव-छत्तीसगढ़ की झलक है, जहाँ अंधेरे की जगह अब उजाले की बातें हो रही हैं। पूवर्ती जैसे गांव से राष्ट्रीय स्तर के नवोदय स्कूल  तक का सफर दर्शाता है कि हमने जो बीज शिक्षा, सुरक्षा और विकास का बोया है, वह अब फल देने लगा है। अर्जुन को मेरी ओर से ढेरों बधाई और शुभकामनाएं। अब पूवर्ती क्षेत्र से केवल एक अर्जुन नहीं, हजारों अर्जुन निकलेंगे और छत्तीसगढ़ के भविष्य को संवारेंगे। राज्य सरकार हर बच्चे के सपनों को पंख देने के लिए कटिबद्ध है। माडवी अर्जुन की यह यात्रा केवल एक छात्र की कहानी नहीं, बल्कि यह उस बदलाव की दास्तान है, जिसे बस्तर जी रहा है। नक्सलवाद की दीवारें अब दरक रही हैं और शिक्षा की रोशनी बस्तर के घर-आंगनों में फैल रही है।बदलते बस्तर की यह शुरुआत है। अब अर्जुनों की कतार लगेगी और पूवर्ती जैसे गांव विकास की नई इबारत लिखेंगे।

अंधेरे से उजाले की ओर: पूवर्ती गांव के अर्जुन की उड़ान

रायपुर नक्सलवाद से प्रभावित बस्तर अंचल का एक नाम जो आज उम्मीद और बदलाव की मिसाल बनकर उभरा है – वह है माडवी अर्जुन। सुकमा जिले के अति-दुर्गम और माओवादी हिंसा से वर्षों त्रस्त रहे पूवर्ती गांव के इस बालक ने जवाहर नवोदय विद्यालय, पेंटा (दोरनापाल) में छठवीं कक्षा में चयन पाकर इतिहास रच दिया है। यह केवल एक छात्र की जीत नहीं, बल्कि उस उम्मीद का संकेत है जो अब बस्तर के कोने-कोने में अंकुरित हो रही है।  माडवी अर्जुन जिस पूवर्ती गांव का रहने वाला है , दरअसल वह नक्सलियों के कमांडर हिड़मा का पैतृक गांव है। एक दौर था, जब  पूवर्ती नक्सलियों का गढ़ माना जाता था। यहाँ माओवादी जन अदालत लगाकर आतंक और ग्रामीणों भाग्य का फैसला सुनाते थे। अब वही पूवर्ती गांव,  शिक्षा और विकास के नए सूरज की किरणें देख रहा है। अर्जुन की इस उपलब्धि ने यह दिखा दिया है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन हों, अगर अवसर और मार्गदर्शन मिले तो सफलता जरूर मिलती है। अर्जुन वर्तमान में बालक आश्रम सिलगेर में पढ़ाई कर रहा था। उसके घर में न बिजली है, न पक्की छत। उसके माता-पिता खेती और मजदूरी कर किसी तरह घर चलाते हैं। फिर भी, अर्जुन ने कठिन परिस्थितियों को पीछे छोड़ते हुए अपनी मेहनत और आश्रम शिक्षकों के समर्पण से यह उपलब्धि अर्जित की। बीते डेढ़ वर्षों में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा चलाए जा रहे नक्सल उन्मूलन अभियान ने बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों में परिवर्तन की नींव रखी है। पूवर्ती जैसे क्षेत्र जहां पहले सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं थीं, अब वहां सड़क निर्माण, सुरक्षा बलों के कैंप, गुरुकुल विद्यालय, स्वास्थ्य सेवाएं और उचित मूल्य दुकानें शुरू हो चुकी हैं। पूवर्ती में अब बच्चों की पढ़ाई के लिए सुरक्षा बलों की देखरेख में चल रहे  गुरुकुल ने एक प्रेरणादायी माहौल देना शुरू किया है। अर्जुन की सफलता इसी सतत प्रयास की पहली बड़ी उपलब्धि है। जिला कलेक्टर श्री देवेश ध्रुव ने कहा कि पूवर्ती जैसे दुर्गम और माओवाद प्रभावित गांव से नवोदय विद्यालय में चयन, न केवल अर्जुन की मेहनत का परिणाम है, बल्कि यह जिले की शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन का भी संकेत है। हम हर बच्चे को आगे बढ़ाने का मौका देना चाहते हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि माडवी अर्जुन की सफलता छत्तीसगढ़ की बदलती तस्वीर का प्रतीक है। यह उस नव-छत्तीसगढ़ की झलक है, जहाँ अंधेरे की जगह अब उजाले की बातें हो रही हैं। पूवर्ती जैसे गांव से राष्ट्रीय स्तर के नवोदय स्कूल  तक का सफर दर्शाता है कि हमने जो बीज शिक्षा, सुरक्षा और विकास का बोया है, वह अब फल देने लगा है। अर्जुन को मेरी ओर से ढेरों बधाई और शुभकामनाएं। अब पूवर्ती क्षेत्र से केवल एक अर्जुन नहीं, हजारों अर्जुन निकलेंगे और छत्तीसगढ़ के भविष्य को संवारेंगे। राज्य सरकार हर बच्चे के सपनों को पंख देने के लिए कटिबद्ध है। माडवी अर्जुन की यह यात्रा केवल एक छात्र की कहानी नहीं, बल्कि यह उस बदलाव की दास्तान है, जिसे बस्तर जी रहा है। नक्सलवाद की दीवारें अब दरक रही हैं और शिक्षा की रोशनी बस्तर के घर-आंगनों में फैल रही है।बदलते बस्तर की यह शुरुआत है। अब अर्जुनों की कतार लगेगी और पूवर्ती जैसे गांव विकास की नई इबारत लिखेंगे।

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में लंबित कार्यों और सत्र तैयारियों की समीक्षा

भोपाल  मुख्य सचिव अनुराग जैन की अध्यक्षता में विधानसभा के आगामी सत्र की तैयारी और लंबित कार्यों की समीक्षा बैठक हुई। बैठक में शून्यकाल, अपूर्ण उत्तर, आश्वासन, लोकलेखा समिति की सिफारिशें, विधानसभा में विभागों के प्रशासनिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करने पर चर्चा की गयी। मुख्य सचिव जैन ने निर्देश दिए कि सभी विभाग प्रमुख अपने काम समय-सीमा में करें। कार्य की साप्ताहिक समीक्षा भी की जाये। मुख्य सचिव जैन ने बैठक में 5 वीं राष्ट्रीय मुख्य सचिव कांफ्रेंस की तैयारियों के भी निर्देश दिये। उन्होंने अतिरिक्त कोर्ट केस, राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण, मानवाधिकार आयोग, अनुसूचित जाति/ जनजाति आयोग के प्रकरणों में राज्य शासन की ओर से समय-सीमा में जवाब प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिये। बैठक में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, जे.एन. कंसोटिया, अशोक वर्णवाल, संजय शुक्ल, मनु श्रीवास्तव, श्रीमती रश्मि अरूण शमी, प्रमुख सचिव विवेक पोरवाल, संदीप यादव सहित विभागों के सचिव, अपर सचिव एवं उप सचिव उपस्थित थे।  

सरकारी स्कूल में शिक्षक पर धर्मांतरण का आरोप, धार्मिक भावना आहत करने को लेकर FIR दर्ज

 उज्जैन  मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के झारडा थाना क्षेत्र के ग्राम नागपुरा स्थित शासकीय माध्यमिक विद्यालय में शिक्षक शकील मोहम्मद पर गंभीर आरोप लगे हैं। उन पर भारत माता की तस्वीर जलाने, देवी-देवताओं की तस्वीरें तोड़ने और छात्रों पर धर्म परिवर्तन का दबाव डालने का आरोप है।  कुरान पढ़ने और नमाज सीखने के लिए डाला दबाव  छात्र अनुराग राठौर और अन्य विद्यार्थियों ने बताया कि 11 जुलाई को छुट्टी के बाद शकील मोहम्मद ने कक्षा में धार्मिक प्रतीकों का अपमान किया। उन्होंने भारत माता और अन्य देवी-देवताओं की तस्वीरों को जलाया और तोड़ा। छात्रों का कहना है कि शिक्षक ने उन्हें कुरान पढ़ने और नमाज सीखने के लिए दबाव डाला। साथ ही, उन्होंने धमकी दी कि यदि किसी ने इस बारे में बताया तो उनकी जान ले लेंगे। ग्रामवासी रोहित राठौर की शिकायत के आधार पर झारडा थाना पुलिस ने आरोपी शिक्षक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 298 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने) और 351(3) (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर जांच शुरू कर दी है।  हिंदू संगठनों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश  एसडीओपी सुनील कुमार वरकडे ने बताया कि मामला संवेदनशील है, और सभी तथ्यों की गहन जांच की जा रही है। साक्ष्यों के आधार पर विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी। घटना की जानकारी मिलने के बाद हिंदू संगठनों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। उन्होंने थाने का घेराव कर शिक्षक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।  

‘देश की डेमोग्राफी बदलना चाहती है विपक्ष’ — डिप्टी सीएम शर्मा का आरोप, ममता ने बीजेपी पर उठाए सवाल

रायपुर प्रदेश की भाजपा सरकार लगातार छत्तीसगढ़ में पहचान छुपाकर या बदलकर रह रहे बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें वापिस भेजने की कार्रवाई कर रही है. लेकिन पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि अगर बांग्लाभाषियों पर उत्पीड़न नहीं रुका, तो गंभीर नतीजा भुगतना होगा. उनके इस बयान पर अब डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने पलटवार किया है. डिप्टी सीएम शर्मा ने कहा कि विपक्षी पार्टियां देश की डेमोग्राफी बदलना चाहती हैं. फर्जी आधार बनवाकर लोग बंगाल से छत्तीसगढ़ आ रहे हैं. बोलने के लहजे और एक्सेंट से सब साफ पता चल जाता है. पूछने पर गांव, जन्म स्थान तक नहीं बता पाते हैं. बता दें, पश्चिम बंगाल में चुनाव होने हैं. PM मोदी के बंगाल दौरे से ठीक पहले कोलकाता में आयोजित एक रैली में CM ममता बनर्जी ने BJP सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि देश भर में पश्चिम बंगाल के मजदूरों को बांग्लादेशी बताकर उनका उत्पीड़न किया जा रहा है. CM ममता ने कहा- “मैं बंगालियों के प्रति केंद्र और भाजपा के रवैए से निराश और शर्मिंदा हूं.” उन्होंने सवाल किया कि आखिर उनको बंगालियों से इतनी नाराज़गी क्यों है? “आगे से मैं और ज़्यादा बांग्ला बोलूंगी. CM ममता बनर्जी ने चेतावनी देते हुए आगे कहा कि “बीजेपी में हिम्मत है तो मुझे डिटेंशन शिविर में बंद कर दिखाए. बंगाल के लोगों को डिटेंशन शिविरों में रखने की स्थिति में राज्य के लोग BJP को चुनाव के जरिए राजनीतिक डिटेंशन शिविर में भेज देंगे. अगर बांग्लाभाषियों का उत्पीड़न नहीं रुका तो भाजपा को इसका गंभीर राजनीतिक नतीजा भुगतना होगा.” छत्तीसगढ़ को स्वच्छ सर्वेक्षण पुरस्कार मिलने पर डिप्टी सीएम शर्मा ने दी बधाई छत्तीसगढ़ के निकायों को स्वच्छता के लिए आज राष्ट्रीय स्वच्छ सर्वेक्षण पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इसपर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ को स्वच्छता में आज राष्ट्रीय सम्मान मिला है. दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उपमुख्यमंत्री अरुण साव एवं रायपुर नगर निगम की टीम को सम्मानित किया है. उन्होंने आगे कहा कि निकायों ने अच्छा काम किया है, इसलिए स्वच्छता में इनाम मिला, लेकिन अभी और काम बाकी है. इसके साथ ही उन्होंने डिप्टी सीएम अरुण साव और टीम को बधाई दी है.    विधानसभा में भारतमाला प्रोजेक्ट पर हंगामा भारतमाला प्रोजेक्ट पर विधानसभा में संभावित हंगामे को लेकर डिप्टी सीएम शर्मा ने कहा कि कांग्रेस खुद घोटालेबाज है. “यह तो वही बात हो गई, उल्टा चोर कोतवाल को डांटे. मुख्यमंत्री ने कार्रवाई की है. जो दोषी हैं वो जेल जाएंगे. स्वास्थ्यकर्मियों की हड़ताल डिप्टी सीएम शर्मा ने स्वास्थ्यकर्मियों की हड़ताल पर भी बयान दिया. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को सभी की चिंता है. आपके (मीडिया) माध्यम से ध्यान खींचा जा रहा है, जरूर देखा जाएगा. आने वाले समय में सब ठीक होगा.

विपरीत मौसम में भी पहुंचा प्रशासन: गृह मंत्री ने दादिया में 12 करोड़ के लोन किए वितरित

जयपुर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह आज गुरुवार को जयपुर दौरे पर पहुंचे। उनका दादिया में आयोजित सहकार एवं रोजगार उत्सव में शामिल होने का कार्यक्रम था। शाह दोपहर करीब 12:15 बजे जयपुर एयरपोर्ट पहुंचे, जहां से उन्हें हेलिकॉप्टर द्वारा सभास्थल दादिया जाना था लेकिन खराब मौसम के कारण हेलिकॉप्टर उड़ान नहीं भर सका, जिस कारण वे सड़क मार्ग से करीब 22 किलोमीटर दूर स्थित दादिया पहुंचे। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री शाह ने राजस्थान पुलिस के 100 नए वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके बाद उन्होंने सहकारी उत्पादों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया और सरकारी नौकरी प्राप्त करने वाले चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। इसके साथ ही गोपाल क्रेडिट कार्ड योजना के तहत 1400 गोपालकों को 12 करोड़ रुपये के ऋण वितरित किए गए। इसके साथ ही शाह ने वर्चुअली 500 मीट्रिक टन क्षमता के 24 अनाज गोदामों और 64 मिलेट्स (मोटा अनाज) केंद्रों का उद्घाटन किया। कार्यक्रम के दौरान मंच की साज-सज्जा और बैठने की व्यवस्था ने भी राजनीतिक संकेत दिए। मंच पर अमित शाह के बाएं पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और दाएं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को स्थान दिया गया। इसके अतिरिक्त उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी, प्रेमचंद बैरवा, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, सहकारिता मंत्री गौतम कुमार दक, पशुपालन व डेयरी मंत्री जोराराम कुमावत और मुख्य सचिव सुधांश पंत भी मंच पर मौजूद रहे।

स्वच्छता में नंबर वन इंदौर ने अनोखे अंदाज़ में मनाया जश्न, आतिशबाजी के बाद खुद की सफाई, जिम्मेदारी भी निभाई

इंदौर का स्वच्छता मॉडल बना ग्लोबल आइकन, 50 देशों के प्रतिनिधि हुए प्रेरित इंदौर की सफाई को कांग्रेस सांसद ने बताया मिसाल, कहा – यूरोप नहीं, यहां से सीखें स्वच्छता में नंबर वन इंदौर ने अनोखे अंदाज़ में मनाया जश्न, आतिशबाजी के बाद खुद की सफाई, जिम्मेदारी भी निभाई इंदौर पिछले कई वर्षों से ‘स्वच्छ सर्वेक्षण’ में सबसे साफ शहर बनकर उभरा इंदौर अब वैश्विक स्तर पर स्वच्छता के लिए जाना जाने लगा है। इसके सख्त सफाई और कचरा प्रबंधन नीतियों ने इसे एक अंतरराष्ट्रीय केंद्र भी बना दिया है, जहां दुनियाभर के देश अपने प्रतिनिधियों को भेजकर इसकी प्रणाली सीखने की प्रेरणा पा रहे हैं। कुछ साल के अंदर कई दल इंदौर आ चुके हैं और उन्होंने यहां से सीखी स्वच्छता की बातों को अपने देशों में भी लागू किया है। अब तक देश के अलग अलग शहरों के 100 से अधिक प्रतिनिधि स्वच्छता मॉडल को देखने के लिए आ चुके हैं।  दुनियाभर के 50 से अधिक देशों के प्रतिनिधि भी यहां पर आकर स्वच्छता के गुर सीख चुके हैं। फ्रांस से लेकर फिजी और जाम्बिया तक के देशों ने इंदौर के सफाई मॉडल पर विश्वास दिखाया है। देश-विदेश से आए प्रतिनिधियों ने इसकी उत्कृष्टता को सराहा और उसे सीखने की इच्छा जताई है, जो स्वच्छ भारत और ग्लोबल सिटी मॉडल की दिशा में एक मजबूत कदम है।   प्रवासी भारतीय सम्मेलन में भी स्वच्छता रही मुख्य आकर्षण साल 2023 में इंदौर में प्रवासी भारतीय सम्मेलन आयोजित किया गया। इस दौरान दुनियाभर के देशों से लोग इंदौर आए। यहां पर सभी के लिए स्वच्छता आकर्षण का मुख्य केंद्र रही। विदेशी दलों को नगर निगम की टीम पर्यटन स्थलों के साथ में स्वच्छता के मुख्य केंद्रो पर भी ले गई।  बांग्लादेश ने भेजा विशेष दल बांग्लादेश के ज्वाइंट सेक्रेटरी निरोद चंद्र मंडल के नेतृत्व में 13 बांग्लादेशी प्रतिनिधियों का दल इंदौर आया। इन्होंने शहर में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी इकट्ठा की। इसके साथ ही सॉलिड वेस्ट मैनजमेंट सिस्टम को भी समझा बारीकी से समझा। विदेशी प्रतिनिधिमंडल आए 22 सदस्यीय विदेशी टीम इंदौर आई। यह 6 अलग-अलग देशों से थी। इन्होंने इंदौर के बायो‑CNG संयंत्र, घर-घर कूड़ा संग्रह, कंपोस्टिंग समाधान और सफाई स्टाफ की प्रशिक्षण विधियों का ज्ञान साझा किया। इस टीम में यह देश शामिल थे… फ्रांस (France) उरुग्वे (Uruguay) फिजी (Fiji) जाम्बिया (Zambia) ग्वाटेमाला (Guatemala) होंडूरस (Honduras)  प्रदेशों ने भी भेजे अपने दल उत्तर प्रदेश का एक दस-सदस्यीय दल  जिसमें “Safai Mitra” एवं राज्य के अधिकारी शामिल थे, नवंबर 2022 में इंदौर आया। उन्होंने इंदौर की बायो-CNG संयंत्र सुविधा को समझा और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन मॉडल की पूरी जानकारी ली और अपनी नगरपालिकाओं में इसके मॉडल को लागू करने की योजना बनाई। हैदराबाद की मेयर और 40 GHMC निगम सदस्य सितंबर 2024 में आए, ताकि इंदौर के door-to-door collection, स्रोत पर कचरा विभाजन (segregation), और सफाई कर्मचारियों के सशक्त बनावट मॉडल को सीख सकें।  इन सभी दलों ने इंदौर के कई पहलुओं को समझा, जिनमें मुख्य रूप से यह बातें शामिल थी… wet waste से bio-CNG उत्पादन, बायो‑CNG संयंत्र (Asia's largest) dry waste का पुनः उपयोग  100% door-to-door कचरा संग्रह होम कंपोस्टिंग टेक्निक zero-landfill नीति सफाई संगठनों (Safai Mitras) की कार्यप्रणाली 'Reduce‑Reuse‑Recycle' मॉडल आईआईएम ने शुरू किया कोर्स, देशभर से आ रहे अधिकारी इंदौर आईआईएम द्वारा शुरू की गई पहल अन्वेषण से देशभर में स्वच्छता के लिए जागरूकता बढ़ रही है। अन्वेषण आईआईएम इंदौर द्वारा चलाया जा रहा कोर्स है जिसमें देशभर के निगम आयुक्त और वरिष्ठ अधिकारी स्वच्छता से जुड़ी ट्रेनिंग लेते हैं। अपशिष्ट प्रबंधन और वॉश (WASH: Water, Sanitation and Hygiene – जल, स्वच्छता और सफाई) पर केंद्रित अन्वेषण की कई बैच निकल चुकी हैं। चार दिवसीय कार्यक्रम में देश के कई राज्यों के नगर निगम आयुक्त और वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं। अन्वेषण की यह बैच अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छता के माध्यम से देशभर के अधिकारियों को एक मंच पर लाने का काम करती है। आईआईएम इंदौर के निदेशक प्रो. हिमांशु राय ने कहा कि कार्यक्रम के दौरान प्राप्त ज्ञान और अंतर्दृष्टि का उपयोग कर सभी अधिकारी अपने संबंधित शहरों में स्थायी अपशिष्ट प्रबंधन प्रथाओं को लागू कर रहे हैं। इससे स्वच्छ भारत अभियान में महत्वपूर्ण योगदान हो रहा है।  इंदौर की सफाई को कांग्रेस सांसद ने बताया मिसाल, कहा – यूरोप नहीं, यहां से सीखें इंदौर का स्वच्छता का डंका न सिर्फ देश में बल्कि दुनियाभर में बजता है। भारत में ही हर पार्टी के नेता इंदौर की स्वच्छता के गुर सिखाने के लिए अपने दल भेजते रहते हैं। समय समय पर देशभर के जनप्रतिनिधि इंदौर की तारीफ भी करते रहते हैं।  कांग्रेस सांसद बोले स्वच्छता सीखने यूरोप क्यों जा रहे, इंदौर जाइए इस साल मार्च में चेन्नई का विशेष दल स्वच्छता के गुर सीखने यूरोप जा रहा था। कांग्रेस के सांसद कार्ति चिदंबरम इस पर नाराज हो गए और कहा कि चेन्नई नगर निगम के अधिकारियों को कचरा प्रबंधन के गुर सीखने के लिए यूरोप क्यों जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए सबसे पहले इंदौर का दौरा किया जाना चाहिए।  रायपुर की महापौर बोली इंदौर जैसे काम करेंगे, नंबर वन बनेंगे पिछले महीने इंदौर आई रायपुर नगर निगम की महापौर मीनल चौबे ने इंदौर में दो दिवसीय कार्यक्रम में स्वच्छता की बारीकियां सीखी। यहां से लौटने के बाद रायपुर की स्वच्छता और विकास के लिए कई ठोस कदमों की घोषणा की। महापौर ने बताया कि इंदौर से मिले अनुभव और मॉडल को रायपुर में अपनाकर शहर को स्वच्छता के मामले में नई ऊंचाइयों पर ले जाने का प्रयास किया जाएगा। महापौर चौबे ने कहा कि रायपुर में इंदौर की तरह सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए आमजन को जागरूक किया जाएगा। इसमें एनजीओ की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही शहर के सभी 10 जोनों में आरआरआर (रियूज, रिड्यूस, रिसाइकल) केंद्र खोलकर उनके प्रभावी संचालन के लिए एनजीओ के सहयोग से रणनीति बनाई जाएगी।  भागलपुर की महापौर बोली इंदौर की ट्रेनिंग से हुआ फायदा भागलपुर की महापौर वसुंधरा लाल ने अपने शहर के सफाई कर्मचारियों को इंदौर भेजा ताकि वे वहां की सफाई व्यवस्था को समझकर भागलपुर में लागू कर सकें। वसुंधरा ने कहा कि इंदौर में सफाई व्यवस्था की ट्रेनिंग … Read more