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निवेशकों को मध्यप्रदेश की सरल निवेश नीति से करवायेंगे अवगत: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्पेन पहुँचे, बोले दुबई जैसे ही स्पेन का दौरा भी होगा सफल प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में औद्योगिक विकास की नई इबारत लिखेंगे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव निवेशकों को मध्यप्रदेश की सरल निवेश नीति से करवायेंगे अवगत: मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल        मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंगलवार की रात स्पेन के मैड्रिड पहुँचे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के सीधे सरल व्यक्तित्व से सभी अभिभूत हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव दुबई से विमान द्वारा मैड्रिड पहुंचे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश को उद्योग संपन्न राज्य बनाने के लिए उनका यह प्रवास दुबई के जैसे ही सफल होगा।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सशक्त नेतृत्व में मध्यप्रदेश सहित भारत के सभी राज्य एक छत के नीचे निवेश और उद्योग से रोजगार सम्पन्न बनाने के लिए निवेशकों को आमंत्रित कर रहे है।        मुख्यमंत्री डॉ यादव मध्यप्रदेश में वैश्विक निवेश और रोजगार के नये अवसरों को सृजित करने के लिये वहाँ के उद्योगपतियों को निवेश के लिये सरकार की सरल एवं उपयोगी नीतियों से अवगत करवायेंगे। इससे प्रदेश के आर्थिक विकास को गति मिलेगी। रोजगार सृजन के साथ तकनीकी उन्नयन और संस्कृति से अवगत होकर निवेशकों के माध्यम से मध्यप्रदेश को दीर्घकालीन लाभ मिलेगा। औद्योगिक विकास और आर्थिक रूप से समृद्ध मध्यप्रदेश बनाने में उनकी यह यात्रा कारगर साबित होगी।         मुख्यमंत्री डॉ. यादव निवेशकों को पर्यटन, आईटी एवं अधोसंरचना क्षेत्र में उद्योग स्थापित करने के लिये आकर्षित करेंगे।  

उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने स्व. श्री ब्रह्मानंद यादव के निधन पर किया शोक व्यक्त

भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के ससुर श्री ब्रह्मानंद यादव के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त की है। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि स्व. श्री यादव ने अपना जीवन शिक्षा के क्षेत्र में समर्पित किया। श्री देवड़ा ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति एवं परिवार को यह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।

स्वास्थ्य को चपत लगाने तीन गुना रफ्तार से आ रहा चिकनगुनिया, भोपाल में पॉजिटिविटी दर तीन गुना तक

 भोपाल  भोपाल शहर में चिकनगुनिया ने डेंगू का पीछे छोड़ दिया है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि इस साल अब तक चिकनगुनिया के मामले डेंगू से ज्यादा हैं। इसकी पॉजिटिविटी दर तीन गुना तक पहुंच चुकी है। विशेषज्ञ इसे कम रिपोर्टिंग का संकेत मानते हैं। रिपोर्ट के अनुसार इस साल अब तक चिकनगुनिया के 51 मरीज सामने आए हैं, जबकि डेंगू के 45 मामले हैं। पिछले तीन हफ्तों में चिकनगुनिया के केवल 192 टेस्ट किए गए, जिनमें तीन नए पॉजिटिव मामले सामने आए, वहीं डेंगू के 546 टेस्ट हुए और सिर्फ तीन नए मामले मिले। 2.47 प्रतिशत पॉजिटिविटी दर आंकड़ों के अनुसार, चिकनगुनिया बढ़ने की दर 7.02 प्रतिशत रही, जबकि डेंगू के बढ़ने की दर केवल 2.47 प्रतिशत रही। इससे यह अंदेशा मजबूत होता है कि चिकनगुनिया के कई मामले परीक्षण के बाहर छूट रहे हैं, यानी कम रिपोर्टिंग हो रही है। 28 जून को अंतिम सप्ताह में भी यही प्रवृत्ति दिखी। तब डेंगू के 272 जांच में से नौ ग्रस्त पाए गए। यानी 1.14 प्रतिशत डेंगू के मामले बढ़े। चिकनगुनिया की 57 जांच हुई और तीन संक्रमित पाए गए। ये हैं चिकनगुनिया के लक्षण -अचानक तेज बुखार आना। -गंभीर जोड़ों का दर्द होना। -मांसपेशियों में दर्द दर्द और जकड़न होना। -तेज और लगातार सिरदर्द होना। -अत्यधिक थकान और कमजोरी होना। -शरीर पर लाल चकत्ते, जो बुखार के कुछ दिनों बाद दिखाई देते हैं। -कुछ लोगों को मतली, उल्टी, आंखों में लाली और सूजन भी हो सकती है। स्वभाविक तौर से डेंगू की जांच अधिक हुई है और चिकनगुनिया की जांच कम हुई है। चिकनगुनिया के मामले डेंगू के मामलों से सिर्फ छह ज्यादा है। हम देखते हैं कि कहां चूक हुई है।– डॉ. मनीष शर्मा, सीएमएचओ, भोपाल

लूणी नदी में पानी की आवक तेज़, प्रशासन ने लोगों से सावधानी बरतने को कहा

बाड़मेर मानसून की अच्छी बारिश के बाद मारवाड़ की जीवनदायिनी लूणी नदी में पानी की बढ़ती आवक को देखते हुए जिला प्रशासन ने आमजन से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। जिला प्रशासन ने लूणी नदी की रपटों से निश्चित दूरी बनाए रखने और नदी बहाव क्षेत्र में नहाने से परहेज करने की सख्त हिदायत दी है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। दरअसल जिले के समदड़ी क्षेत्र में लूणी नदी में बरसात के पानी की आवक हुई है। इससे स्थानीय लोगों में उत्साह का माहौल नजर आ रहा है। अगले एक-दो दिन में बालोतरा तक लूणी का पानी पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। पानी की आवक के बाद प्रशासन भी पूरी तरह से सतर्क हो गया है। जिला प्रशासन ने आमजन से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। इसके साथ ही लूणी नदी पर बनी सभी रपटों पर वाहनों और पैदल आवाजाही को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है। पुलिस और सिविल डिफेंस की टीमें इन स्थानों पर तैनात कर दी गई हैं ताकि किसी प्रकार की जनहानि न हो। जिला कलेक्टर सुशील कुमार यादव ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि वे पानी के तेज बहाव में प्रवेश न करें और न ही सेल्फी लेने या वीडियो बनाने के लिए नदी के किनारों या रपटों के करीब जाएं। उन्होंने कहा कि पानी का बहाव अप्रत्याशित हो सकता है और ऐसे में कोई भी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। ग्रामीणों और विशेषकर बच्चों से नदी किनारे न जाने का आग्रह किया गया है। स्थानीय प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों, पुलिस और आपदा प्रबंधन टीमों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। लूणी नदी में पानी की आवक किसानों और पर्यावरण के लिए एक शुभ संकेत है, लेकिन इसके साथ ही सावधानी बरतना भी अत्यंत आवश्यक है।  

सोच से परे प्रेम कहानी: शादीशुदा महिला ने छोड़ा परिवार, प्रेमी के लिए सब कुछ कुर्बान

मुरादाबाद यूपी के संभल में दो बच्चियों की मां को जाने क्या हुआ। न उम्र का ख्याल रहा न समाज की चिंता। उसने अपनी उम्र से 20 साल छोटे लड़के से संबंध बनाए और फिर एक दिन अपनी दोनों बच्चियों को लेकर उसी के घर मुरादाबाद के छजलैट पहुंच गई। यही नहीं महिला ने उम्र में काफी छोटे उस युवक से कथित रूप से शादी भी कर ली। बाद में पति उसे खोजते-खोजते अपनी मां के साथ वहां पहुंचा तो अपनी पत्नी का रुख देखकर दंग रह गया। पति और सास ने महिला को समझाने की बहुत कोशिश की लेकिन उसने उनके साथ जाने से साफ इनकार कर दिया। बाद में वह अपने प्रेमी और दोनों बच्चियों के साथ मां थाने पहुंच गई। वहां देर शाम तक विवाद चलता रहा। महिला के परिजन भी संभल से छजलैट पहुंच गए, विवाहिता ने वापस जाने से इंकार कर दिया। वह दो बेटियों को लेकर प्रेमी के साथ चली गई। मुरादाबाद के छजलैट थाना क्षेत्र के गांव भैंडी फरीदपुर का रहने वाला युवक का फेसबुक के जरिए संभल के असमोली थाना क्षेत्र के गांव निवासी विवाहिता से प्रेम प्रसंग हो गया। पहले तो दोनों में फोन पर ही बातें चलीं, लेकिन कई बार युवक और विवाहिता मुरादाबाद में एक-दूसरे से भी मिले। इस दौरान युवक ने विवाहिता को अपने साथ अपने घर शादी करके ले जाने की बात कही। जिस पर विवाहिता ने बच्चों को साथ लाने की बात कही। युवक ने बच्चों को भी अपनाने की बात कही। विवाहिता 10 दिन पहले एक 16 वर्ष और 13 वर्ष की बेटी को साथ लेकर छजलैट के गांव में आ गई। यही नहीं उसने युवक के साथ कथित तौर शादी भी कर ली। जब विवाहिता को पति और अन्य ने तलाश किया तो छजलैट क्षेत्र के गांव का पता लगा। मंगलवार को विवाहिता के परिजन थाने पहुंचे। विवाहिता अपने 20 वर्षीय प्रेमी और बेटियों के साथ थाने पहुंच गई। विवाहिता का पति और सास विवाहिता को ले जाने की जिद पर अड़े रहे, लेकिन उसने जाने से साफ इंकार कर दिया। वह प्रेमी और दो बेटियों के साथ वापस प्रेमी के घर चली गई।  

अदालत में अपील लगाने सरकारी वकील मांग रही थी रिश्वत, लोकायुक्त ने दबोचा

जबलपुर  जबलपुर में लोकायुक्त टीम ने एक महिला सरकारी वकील कुक्कू दत्त को 15 हजार रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा है। महिला सरकारी वकील ने शिकायतकर्ता से उसकी केस की पैरवी करने के बदले में 15 हजार रुपए की मांग की थी। फरियादी ने इसी की शिकायत जबलपुर लोकायुक्त पुलिस से कर दी, जिसकी पुष्टि होने के बाद लोकायुक्त ने घेराबंदी कर जाल बिछाया और महिला सरकारी वकील को 15 हजार की रिश्वत लेते रंगेहाथ दबोच लिया। फिलहाल, लोकायुक्त टीम महिला वकील के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई कर रही है। क्या कहता है नियम? दरअसल, पिछले दिनों मध्य प्रदेश शासन ने शहर के सिविल लाइन क्षेत्र में रहने वाले बिहारी लाल की केस की पैरवी करने के लिए सरकारी महिला वकील को नियुक्त किया था। शासन के निर्देश पर नियुक्त सरकारी वकील फरियादी से पैसे नहीं मांग सकता। फिर भी महिला वकील कुक्कू दत्त शिकायतकर्ता से 15 हजार रुपए मांग रही थीं। दरअसल पिछले दिनों मध्य प्रदेश शासन ने सिविल लाइन निवासी बिहारी लाल की केस की पैरवी करने के लिए सरकारी महिला वकील को नियुक्त किया था। शासन के निर्देश के अनुसार नियुक्त सरकारी वकील फरियादी से पैसे की नहीं मांग सकता। लेकिन उसके बावजूद सरकारी महिला वकील ने शिकायतकर्ता से 15 हजार रुपए की मांग की थी। यही नहीं, पीड़ित का कहना है कि महिला वकील ने उसे कहा था कि यदि उसने उसे 15000 रुपए नहीं दिए तो वह उसके केस में काम नहीं करेगी। जिसके चलते वह फिर से अपना केस हार जाएगा। शिकायतकर्ता का आरोप पीड़ित का ये भी आरोप है कि, सरकारी महिला वकील ने उसे ये भी धमकी दी थी कि, अगर वो उसे 15 हजार नहीं देता तो वो केस पर किसी करह का काम नहीं करेगी, जिसके पर्णाम स्वरूप वो केस हार जाएगा।

कल्पेश याग्निक आत्महत्या केस में फर्जी जमानतदार, महिला आरोपी दोबारा गिरफ्तार

इंदौर  वरिष्ठ पत्रकार कल्पेश याग्निक ने 2018 में मुंबई के रहने वाली महिला सलोनी अरोड़ा से परेशान होकर आत्महत्या कर ली थी. इस मामले में पुलिस ने महिला को गिरफ्तार किया था, जिसको पिछले दिनों जमानत मिल गई है. जिस व्यक्ति ने उनकी जमानत दी थी, उसने पर पूर्व में कई लोगों को फर्जी तरीके से जमानत दिलवाई थी, जिसके चलते एक बार फिर पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर मुंबई से महिला और जमानत देने वाले इंदौर निवासी केदार को गिरफ्तार किया है. नए केस में फंसी सलोनी अरोड़ा वरिष्ठ पत्रकार कल्पेश याग्निक की आत्महत्या मामले में आरोपी सलोनी अरोड़ा एक नए केस में फंस गईं. उन पर फर्जी कागजात पर जमानत लेने का मामला दर्ज हुआ है. सलोनी के साथ जमानतदार केदार डाबी को भी इंदौर क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार कर लिया है और अब उनसे पूछताछ की जाएगी. इंदौर क्राइम ब्रांच ने यह कार्रवाई नीरज याग्निक की शिकायत पर की थी. नीरज स्वर्गीय कल्पेश याग्निक के भाई हैं. उनकी शिकायत पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी. आत्महत्या मामले में हुई थी गिरफ्तार दरअसल मामला यह है कि साल 2018 में वरिष्ठ पत्रकार कल्पेश याग्निक जिस अखबार में काम करते थे, उसी दफ्तर में आत्महत्या कर ली थी. उस समय यह मामला काफी सुर्खियों में था. मृतक कल्पेश याग्निक के साथ काम कर चुकी मुंबई निवासी महिला सलोनी अरोड़ा पर ब्लैकमेल करने सहित अन्य आरोप लगे थे, जिसे पुलिस ने मुंबई से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. करीब 1 साल बाद साल 2019 में सलोनी को कोर्ट से जमानत मिल गई थी. फर्जी कागज से कराई थी जमानत सलोनी की जमानत उनकी भाभी डिंपल संजय अरोड़ा ने कराई थी. कोई विवाद सामने आया उसके चलते उनकी भाभी ने साल 2021 में कोर्ट में अर्जी डालकर जमानत वापस ले ली थी. उसके बाद उनकी जमानत केदार डाबी नामक व्यक्ति के द्वारा कराई गई थी. जिस केदार डाबी ने सलोनी की जमानत करवाई थी. उसे पुलिस ने फर्जी जमानत कांड के मामले में गिरफ्तार किया था. हाई कोर्ट ने केदार डाबी को सशर्त पर जमानत दी थी कि वह अब किसी भी व्यक्ति की जमानत नहीं करवाएगा. इसके बावजूद उसने सलोनी की जमानत करवा दी. धोखाधड़ी सहित अन्य धाराएं लगी जब इस मामले की जानकारी पुलिस को लगी तो पुलिस ने सलोनी की जमानत को खारिज करवा दिया. वहीं इस मामले में नीरज याग्निक की शिकायत पर सलोनी और उनकी जमानत करवाने वाले केदार डाबी के खिलाफ धोखाधड़ी सहित फर्जी दस्तावेज लगाकर जमानत लेने के मामले में प्रकरण दर्ज किया है. पुलिस ने केदार डाबी को तो पहले ही गिरफ्तार कर लिया था. अब सलोनी को भी गिरफ्तार कर लिया गया है और उसे इंदौर लाया जा रहा है. इन धाराओं में केस दर्ज इंदौर पुलिस ने सलोनी के खिलाफ IPC की धारा 115, 120बी (षड्यंत्र), 420 (धोखाधड़ी), 465, 466, 467, 470, 471, 474 (फर्जी दस्तावेज तैयार करना और उपयोग करना) के तहत केस दर्ज किया है। सलोनी अरोरा के अलावा इस मामले में सिमरोल निवासी केदार डाबी और आनंद नगर निवासी मधु श्रीवास्तव को भी आरोपी बनाया है। केदार डाबी पेशेवर जमानतदार है। कैसे हुआ फर्जीवाड़ा?     वरिष्ठ पत्रकार कल्पेश याग्निक की आत्महत्या के बाद सलोनी अरोरा पर ने जुलाई 2018 को ब्लैकमेलिंग और आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज हुआ था।     सलोनी अरोरा ने पहले डिंपल अरोरा की जमानत दी, लेकिन बाद में बदलकर केदार डाबी को जमानतदार बनाया।     जनवरी 2024 में केदार डाबी ने फर्जी ऋण पुस्तिका (लोन बुक) के आधार पर सलोनी के लिए ₹5 लाख की जमानत पेश की। मधु श्रीवास्तव ने केदार के शपथपत्र को सत्यापित करने वाली गवाह के तौर पर हस्ताक्षर किए।  हाईकोर्ट का पुराना ऑब्ज़र्वेशन नीरज याग्निक के अनुसार, केदार डाबी के खिलाफ पहले भी फर्जी जमानत से जुड़े मामले दर्ज हो चुके हैं। डाबी आदतन पेशेवर जमानतदार है, यह टिप्पणी भी कर चुका है। कोर्ट में 3 साल से पेश नहीं हुई सलोनी जनवरी 2024 में जमानत के समय को छोड़कर, सलोनी 3 वर्षों से कोर्ट में पेश नहीं हुई। नीरज याग्निक का कहना है कि यह पूरी योजना न्यायालय की प्रक्रिया को धोखा देने और देश छोड़कर भागने की तैयारी का हिस्सा हो सकती थी। क्या है कल्पेश याग्निक आत्महत्या केस? 14 जुलाई 2018 को वरिष्ठ पत्रकार कल्पेश याग्निक ने दैनिक भास्कर ऑफिस की छत से कूदकर आत्महत्या कर ली थी। जांच में सामने आया कि पूर्व सहकर्मी सलोनी अरोरा उन्हें लंबे समय से ब्लैकमेल कर रही थी। तब से यह मामला 28वें न्यायाधीश हेमंत रघुवंशी की कोर्ट में ट्रायल पर है।  अग्रिम कार्रवाई में जुटी पुलिस इंदौर डीसीपी राजेश त्रिपाठी ने बताया," आरोपी सलोनी अरोड़ा ने जमानतदार केदार डाबी के साथ मिलकर फर्जी कागज लगाकर जमानत ली थी. जिसकी शिकायत मिलने पर जांच की गई तो जमानत फर्जी पाई गई. इसी के आधार पर पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर आरोपी सलोनी अरोड़ा और फर्जी जमानतदार को अरेस्ट कर लिया है. पुलिस मामले की अग्रिम कार्रवाई में जुट गई है." 

ड्रग्स नेटवर्क का पर्दाफाश: भंवरी की कुबूलनामे से हिली पुलिस, जानें क्या उगला सच

जालौर चितलवाना पुलिस ने बाड़मेर निवासी इंस्टाग्राम इनफ्लुएंसर भंवरी उर्फ भाविका चौधरी को 152 ग्राम एमडी ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया था। पुलिस पूछताछ में सामने आया कि उसे यह मादक पदार्थ चंदनी देवी नामक महिला से मिलता था और हर बार सप्लाई के बदले उसे करीब 10 हजार रुपये मिलते थे। भाविका चौधरी का पति गुजरात में काम करता है, इसी कारण उसका गुजरात आना-जाना बना रहता था ताकि किसी को शक न हो। बाड़मेर पुलिस को भंवरी के ड्रग तस्करी नेटवर्क की जानकारी पहले से थी। पुख्ता सूचना मिलने पर पुलिस ने नजर रखनी शुरू की और इस बार भंवरी रोडवेज बस के जरिए ड्रग्स लेकर गुजरात जा रही थी। बस के जालौर सीमा में प्रवेश करने पर चितलवाना पुलिस को सूचना दी गई और नाकाबंदी कर उसे पकड़ा गया। चितलवाना थाने में आरोपी के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट में मामला दर्ज किया गया है। सरवाना थानाधिकारी सूरजभान सिंह के अनुसार, भंवरी को अदालत में पेश कर 18 जुलाई तक 5 दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है। फिलहाल उससे तस्करी के नेटवर्क और अन्य साथियों के बारे में पूछताछ की जा रही है। पुलिस उसके कॉल डिटेल्स और सोशल मीडिया अकाउंट्स की भी जांच कर रही है ताकि पता लगाया जा सके कि यह उसका पहला प्रयास था या उसने पहले भी ड्रग्स की सप्लाई की है। इनफ्लुएंसर होने के बावजूद भंवरी ने जल्दी पैसा कमाने के लिए तस्करी का रास्ता चुना, जो अब उसे भारी पड़ गया है। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ में ड्रग तस्करी के इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश होगा।  

केंद्र सरकार ने MP में नए कॉलेजों को मान्यता देने से पहले काउंसिल के गठन की शर्त रखी

भोपाल  मध्य प्रदेश के पैरामेडिकल कॉलेजों को तीन वर्ष बाद मान्यता मिलने जा रही है। मध्य प्रदेश पैरामेडिकल काउंसिल ने 2023-24 के सत्र के लिए 166 कॉलेजों को मान्यता के लिए चिह्नित किया है, इनमें 22 सरकारी हैं। मान्यता के लिए 32 नए कॉलेजों की तरफ से भी आवेदन आए थे, जिनमें 15 निरीक्षण में उपयुक्त पाए गए हैं, पर अभी यह असमंजस है कि नए कॉलेज खुलेंगे या नहीं। कारण, केंद्र सरकार ने साफ कहा है कि जब तक हमारी काउंसिल नहीं बन जाती नए कॉलेजों को मान्यता नहीं दी जाए। इस पर बीच का रास्ता निकालकर नए कॉलेजों की मान्यता के संबंध इसी सप्ताह शासन स्तर पर निर्णय होना है। इसके अतिरिक्त 2024-25 के सत्र की मान्यता भी एक माह के भीतर जारी हो जाएगी। इसकी प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। बता दें, केंद्र सरकार द्वारा हेल्थ केयर एलाइड साइंस कमीशन के गठन में देरी के चलते मान्यता उलझी हुई थी। कुछ राज्यों में पैरामेडिकल काउंसिल थी और कुछ में नहीं। सभी जगह पाठ्यक्रम भी अलग-अलग चल रहे थे। इसमें एकरूपता लाने के लिए केंद्र ने नेशनल कमीशन फार एलाइड साइंस एंड हेल्थ केयर प्रोफेशनल (एनसीएचपी) बनाया है। इसके बाद राज्यों की काउंसिल और चयन, भर्ती, यूजी और पीजी के लिए चार अलग-अलग बोर्ड बनने थे। कमीशन बनने के बाद राज्यों ने अपनी काउंसिल भंग कर दी, पर केंद्र के रेगुलेशन अभी तक तैयार नहीं हो पाए, इस कारण प्रदेश में शिक्षा सत्र 2023-24 और सत्र 2024-25 की मान्यता नहीं दी गई। मार्च में कैबिनेट ने प्रदेश की पैरामेडिकल काउंसिल को पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया। अब नवंबर से 2025-26 का सत्र भी प्रारंभ होना है। इस तरह इस वर्ष तीन सत्रों के लिए कॉलेजों को मान्यता दी जानी है। केंद्र के रेगुलेशन पर नई काउंसिल बनने के बाद यह होगा लाभ पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए प्रदेश स्तर पर बोर्ड होगा। एक राज्य से डिग्री या डिप्लोमा करने वालों का दूसरे राज्यों में भी पंजीयन हो सकेगा। सभी राज्यों के पाठ्यक्रमों में एकरूपता आ जाएगी।

lNIPE में प्रशिक्षिका के यौन उत्पीड़न मामले में हाई कोर्ट ने पीड़िता को 40 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश सुनाया

ग्वालियर  लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान (lNIPE) की महिला योग प्रशिक्षिका के यौन उत्पीड़न मामले में हाई कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पीड़िता को 40 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश सुनाया है। इस राशि में से 35 लाख रुपये तत्कालीन कुलपति डॉ. दिलीप कुमार दुरेहा को देने होंगे, जबकि शेष 5 लाख रुपये राज्य सरकार देगी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार यह राशि संबंधित पुलिस अधिकारियों से वसूलेगी, जिन्होंने मामले में तीन साल तक लापरवाही बरती। यह फैसला न केवल यौन उत्पीड़न के खिलाफ न्याय की मिसाल बना है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि संस्थानों और प्रशासन की निष्क्रियता किस तरह पीड़ितों के लिए मानसिक, भावनात्मक और करियर से जुड़ी तकलीफें खड़ी करती है। हाई कोर्ट का आदेश हाई कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि पीड़िता को सिर्फ यौन उत्पीड़न का सामना नहीं करना पड़ा, बल्कि संस्थान और पुलिस की निष्क्रियता ने उसके साथ अन्याय को और भी गहरा किया। कोर्ट ने एलएनआईपीई पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है और पीड़िता को स्थानांतरण का विकल्प देने के निर्देश दिए हैं। पीड़िता को मिली धमकियां पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया कि उत्पीड़न की घटना के बाद भी डॉ. दुरेहा लगातार दबाव बनाते रहे और मानसिक रूप से प्रताड़ित करते रहे। उसने 14 अक्टूबर 2019 को केंद्रीय खेल मंत्रालय को शिकायत दी थी, लेकिन संस्थान स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। सहयोगियों की भूमिका भी संदिग्ध शिकायत में यह भी बताया गया कि तत्कालीन डायरेक्टर जनक सिंह शेखावत, योग विभाग की एचओडी इंदु वोरा, सहायक अध्यापिका पायल दास और समन्वयक विवेक पांडे ने आरोपों को दबाने की कोशिश की। उन्होंने न केवल सबूत मिटाए, बल्कि सीसीटीवी फुटेज भी बदलवा दिए और शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया। हाई कोर्ट की जांच समिति की रिपोर्ट महिला आयोग की सिफारिश पर बनी आंतरिक शिकायत समिति (ICC) की जांच में भी पुष्टि हुई कि डॉ. दुरेहा ने अपने पद का दुरुपयोग कर पीड़िता को प्रताड़ित किया और संस्थान की कार्यसंस्कृति को दूषित किया। कोर्ट ने इस रिपोर्ट को आधार बनाते हुए पीड़िता को न्याय दिलाने का निर्णय लिया।