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स्मार्ट मीटर से बिल कम करना अपने हाथ में है, गुना के घरेलू स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं ने बताए फायदे

भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की पहल पर पूरे कंपनी कार्यक्षेत्र के 16 जिलों में घरेलू स्मार्ट मीटर लगाने का काम तीव्र गतिसे चल रहा है। गुना वृत्त में लगभग तीन माह पहले लगाए जा चुके स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं से बातचीत में अनेक सकारात्मक पहलू सामने आए है। अधिकतर उपभोक्ताओं ने फायदा होने की बात कही है। गुना शहर के उपभोक्ता श्री विष्णु धाकड़ ने बताया कि उनके यहां दो महीने पहले स्मार्ट मीटर लगा था, शुरू में उन्हें डर था कि कहीं स्मार्ट मीटर से बिल तो अधिक नहीं आएगा लेकिन जैसे ही अगले महीने बिल आया तो देखा कि कहीं कोई ऐसी गड़बड़ी नहीं आई। इस महीने 80 रुपये बिल आया है, जिसे जमा भी कर दिया है। इसी तरह एक और उपभोक्ता श्री देवीदयाल ने बताया कि उनके यहां उनकी सहमति से स्मार्ट मीटर लगाया गया है। उन्होंने बताया कि इस महीने उनका बिल कम ही आया है। मीटर से किसी तरह की कोई परेशानी नहीं है, बल्कि अब तो एप के माध्मय से हम अपने घर के बिजली उपयोग को भी नियंत्रित करना सीख गए हैं, क्योंकि उपकरणों  पर नियंत्रण करने से बिल में काफी कमी आई है। इसी तरह गुना के ही उपभोक्ता श्री अक्षय कुमार ने बताया कि स्मार्ट मीटर से कहीं कोई गलत बिल नहीं आया, हमारा बिल 550 रुपये आया है। रीडिंग लेने में कोई गड़बड़ी नहीं है, बल्कि अब तो अपने आप दूरसंचार प्रणाली से रीडिंग हो रही है और निर्धारित तिथि को सही रीडिंग का बिल मोबाइल पर दिया जा रहा है। उन्होंने भी कहा कि अब तो बिल कम करना अपने हाथ में है। दिन के टैरिफ में 20 प्रतिशत की छूट स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं जिसमें सार्वजनिक जल कार्य, स्ट्रीट लाइट और एलटी औद्योगिक उपभोक्ता शामिल हैं, के लिए ऑफ पीक/ सौर समय सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक की अवधि के दौरान उपभोग की गई ऊर्जा के लिए ऊर्जा प्रभार की सामान्य दर पर 20 प्रतिशत की छूट प्रदान की जा रही है। यह छूट 10 किलोवाट तक स्वीकृत लोड / अनुबंध मांग वाले उपभोक्ताओं को मिल रही है। घरेलू स्मार्ट मीटर के फायदे 1. ऊर्जा की खपत को ट्रैक करने और ऊर्जा की बचत करने में मदद करता है। 2. बिजली की खपत को सटीक रूप से मापता है, जिससे बिल में कोई गलती नहीं होती। 3. एप के जरिए मोबाइल पर रियल-टाइम डेटा देखकर ऊर्जा की खपत को नियंत्रित कर सकते हैं। 4. ऊर्जा की गुणवत्ता के बारे में जानकारी मिलती है, ताकि ऊर्जा की खपत को बेहतर बना सकते हैं। 5. ऊर्जा की खपत को कम करने से पर्यावरण पर पड़ने वाला प्रभाव कम होता है।  

मध्यप्रदेश पुलिस का जन-जागरूकता अभियान “नशे से दूरी – है जरूरी”

  15 से 30 जुलाई तक प्रदेशभर में चलेगा विशेष अभियान भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्रेरणा से प्रदेश को नशामुक्त बनाने की दिशा में मध्यप्रदेश पुलिस ने एक वृहद जन-जागरूकता अभियान "नशे से दूरी – है जरूरी"की शुरुआत की है। यह अभियान 15 से 30 जुलाई 2025 तक पूरे राज्य में संचालित किया जाएगा। पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा के मार्गदर्शन में यह अभियान पुलिस मुख्यालय की नारकोटिक्स विंग द्वारा चलाया जा रहा है। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (नारकोटिक्स)श्री के. पी. वेंकटेश्वर राव ने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य किशोरों और युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराना, उन्हें इस लत से दूर रखना और जो लोग पहले से नशे की गिरफ्त में हैं, उन्हें उचित परामर्श और सहयोग प्रदान कर पुनर्वास की दिशा में मार्गदर्शन देना है। इस जन-जागरूकता अभियान में विभिन्न शासकीय विभाग, गैर-सरकारी संगठन (NGO), धर्माचार्य, समाजसेवी, जनप्रतिनिधि, और ग्राम एवं नगर सुरक्षा समितियाँ सक्रिय रूप से भाग लेंगी। समाज के सभी वर्गों के सहयोग से समाज के हर वर्ग तक संदेश पहुँचाया जाएगा कि नशा केवल व्यक्ति ही नहीं, पूरे समाज को प्रभावित करता है इससे दूरी रखना नितांत आवश्यक है। यह अभियान स्कूलों, कॉलेजों, सार्वजनिक स्थलों और डिजिटल माध्यमों के ज़रिए जन-जागृति फैलाने का कार्य करेगा।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नव नियुक्त राज्यपालों को दी बधाई

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रो. आशिम कुमार घोष को हरियाणा, श्री पी. अशोक गजपति राजू को गोवा और श्री कविंद्र गुप्ता को लद्दाख का उपराज्यपाल नियुक्त होने पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया 'एक्स' पर कहा कि निश्चित ही नवनियुक्त राज्यपाल और उपराज्यपाल के सुदीर्घ प्रशासनिक अनुभव का लाभ संबंधित राज्यों के विकास और लोक कल्याण को नई दिशा देने के लिए मिलेगा।

नर्मदापुरम में 3.0 गीगावॉट सोलर सेल यूनिट की तैयारी, 700 से अधिक रोजगार सृजन की संभावना- मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल  दुबई यात्रा के दूसरे दिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से ग्रियू एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ एवं निदेशक विनय ठडानी और प्रतिनिधियों ने मुलाक़ात की। बैठक में नर्मदापुरम जिले में प्रस्तावित 3.0 गीगावॉट क्षमता की सोलर सेल परियोजना के लिए राज्य सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली अनुकूल औद्योगिक सहायता पर विस्तार से चर्चा हुई। यह महत्वाकांक्षी परियोजना न केवल अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में प्रदेश की भागीदारी को सशक्त करेगी, बल्कि इससे 700 से अधिक लोगों को रोजगार मिलने की संभावनाएं भी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में हरित ऊर्जा परियोजनाओं को आवश्यक प्रोत्साहन देने और उद्योगों को अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता दोहराई। यह परियोजना राज्य के पर्यावरणीय लक्ष्यों को मजबूती देने के साथ-साथ स्थानीय आर्थिक विकास को भी गति प्रदान करेगी। बैठक में यह भी स्पष्ट हुआ कि मध्यप्रदेश सतत ऊर्जा नवाचार का एक उभरता हुआ केंद्र बनता जा रहा है।  

जैन समाज ने की मुख्यमंत्री साय से मुलाकात, सामाजिक विषयों पर हुई चर्चा

विधानसभा भ्रमण पर आए प्रतिनिधियों ने साझा किए अनुभव, मानव सेवा के कार्यों में समाज की भूमिका की दी जानकारी रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज विधानसभा परिसर में दुर्ग जिले से आए जैन समाज के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को जैन समाज द्वारा मानव सेवा एवं सामाजिक उत्थान के लिए संचालित विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने विधानसभा परिसर के भ्रमण और सदन की कार्यवाही के अवलोकन के अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि यह उनके लिए एक प्रेरणादायक अवसर रहा। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली को निकट से देखने का अवसर मिलना गौरवपूर्ण अनुभव है। मुख्यमंत्री श्री साय ने जैन समाज की सेवा भावना की सराहना करते हुए कहा कि समाज की सकारात्मक गतिविधियाँ प्रदेश के समावेशी विकास में सहायक सिद्ध हो रही हैं। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को उनके सामाजिक कार्यों के लिए शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर दुर्ग विधायक श्री गजेंद्र यादव भी उपस्थित रहे।

अत्यंत दुर्लभ घड़ियाल के 30 बच्चे और 36 बटागुर कछुए किये जप्त

स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स की बड़ी कार्रवाई भोपाल प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य-जीव के निर्देश पर स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स मध्यप्रदेश द्वारा सूचना तंत्र विकसित कर क्षेत्रीय इकाई भोपाल, शिवपुरी के साथ संयुक्त रूप से कार्यवाही करते हुए सबलगढ़-मुरैना मार्ग पर घेराबंदी कर जौरा शहर थाने के पास 12 जुलाई को 3 व्यक्तियों से अत्यंत दुर्लभ प्रजाति के घड़ियाल के 30 बच्चे और 36 बटागुर कछुए जप्त करने में सफलता प्राप्त की है। विवरण में बताया गया कि फोर्स द्वारा वाहन रोककर तलाशी ली गयी, जिसमें सवार 3 व्यक्ति विजय पिता शाशिकांत गोंड निवासी थाटीपुर ग्वालियर, राजू आदिवासी पिता जगदीश निवासी मउरानीपुर जिला झांसी और रामवीर सिंह पिता शिव सिंह निवासी सूर्य बिहार कॉलोनी ग्वालियर के पास से अत्यंत दुर्लभ 30 घड़ियाल के बच्चे और 14 बटागुर कछुए की जप्ती की गयी। स्टेट टाइगर फोर्स द्वारा आरोपियों से पूछताछ के बाद आरोपी विजय गोंड के ग्वालियर स्थित निवास से 22 बटागुर कछुए जप्त किये गये। इन आरोपियों पर वन एक्ट के तहत कार्रवाई कर प्रकरण दर्ज किया है इसमें स्थानीय पुलिस एवं वन मण्डल मुरैना द्वारा भी सहयोग किया गया। इन तीनों आरोपियों को शिवपुरी न्यायालय में प्रस्तुत कर फारेस्ट रिमाण्ड पर लेकर पूछताछ की जायेगी। इन आरोपियों पर पूर्व में भी इस प्रकार के प्रकरण दर्ज हैं, जिस पर इन्हें सजा भी हो चुकी है। पूछताछ के दौरान बताया गया कि यह जलीय जीव कोलकाता के रास्ते बांग्लादेश भेजे जा रहे थे। प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य-जीव ने बताया किजलीय जीव ग्वालियर की चंबल नदी में मुख्यत: पाये जाते हैं, जो अत्यंत दुर्लभ प्रजाति के हैं। केन्द्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा इन्हें बचाने के प्रयास किये जा रहे हैं। इन संकटप्रद प्रजातियों का जलीय पारिस्थितिकी में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान है। अन्य देशों के अलावा मुख्यत: पश्चिमी यूरोपीय देश में इनकी भारी डिमाण्ड होने के कारण इनकी तस्करी की जाती है।  

राज्य में 1,79,000 बॉटल नैनो डीएपी भंडारित, निरंतर आपूर्ति जारी

रायपुर,  राज्य में रासायनिक उर्वरको कोई कमी नहीं हैं। खरीफ सीजन 2025 के लिए सभी प्रकार के रासायनिक उर्वरक सहकारी समितियों एवं नीजि विक्रय केंद्रों में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। वैश्विक परिस्थिति के चलते डीएपी खाद के आयात में कमी को देखते हुए प्रदेश सरकार द्वारा इसके विकल्प के रूप में अन्य रासायनिक उर्वरकों की भरपूर आपूर्ति एवं वितरण की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। राज्य में डीएपी की आपूर्ति में कमी से किसानों को किसी भी तरह की दिक्कत न हो इसको ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार द्वारा इसके विकल्प के रूप में 179000 बॉटल नैनो डीएपी, एनपीके उर्वरक का लक्ष्य से 25 हजार मेट्रिक टन अधिक तथा एसएसपी का निर्धारित लक्ष्य से 50 हजार मेट्रिक टन का अतिरिक्त भंडारण किया गया है। पोटाश के निर्धारित लक्ष्य 60 हजार मेट्रिक टन के विरूद्ध अब तक 77 हजार मेट्रिक टन से अधिक म्यूरेट ऑफ पोटाश का भंडारण किया गया है। नैनो डीएपी जो कि ठोस डीएपी के विकल्प के रूप में बीज/थरहा, जड़ उपचार एवं बोआई/रोपाई के पश्चात खड़ी फसल में छिड़काव के लिए  उपयोगी है। नैनो डीएपी की निरंतर आपूर्ति राज्य में सरकार द्वारा सुनिश्चित की गई है। चालू खरीफ सीजन के लिए डीएपी उर्वरक के निर्धारित 3.10 लाख मेट्रिक टन लक्ष्य के विरूद्ध अब तक 1 लाख 63 मेट्रिक टन से अधिक का भंडारण हो चुका है। डीएपी की आपूर्ति निरंतर जारी है। अभी जुलाई माह में 48 हजार मेट्रिक टन डीएपी उर्वरक की आपूर्ति राज्य को होगी। राज्य के सहकारी क्षेत्र में उर्वरकों का भंडारण प्राथमिकता के आधार पर कराया गया है। राज्य के सहकारी क्षेत्र में डीएपी उर्वरक की उपलब्धता राज्य की कुल उपलब्धता का 62 प्रतिशत है। कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार अब तक कुल 13.18 लाख मेट्रिक टन का भंडारण किया जा चुका है, जो गत वर्ष इसी अवधि में भंडारित 12.79 लाख मेट्रिक टन से लगभग 38 हजार मेट्रिक टन अधिक है। इस वर्ष एनपीके और एसएसपी का लक्षित मात्रा से क्रमशः 25,266 मेट्रिक टन एवं 71,363 मेट्रिक टन अधिक भंडारण किया गया है, जो डीएपी के विकल्प के रूप में उपयोग किया जा रहा है। राज्य में यूरिया 6 लाख मेट्रिक टन अधिक का भंडारण हुआ है। जुलाई एवं आगामी माह में यूरिया के शेष मात्रा की आपूर्ति होगी। यहां यह उल्लेखनीय है कि धान में यूरिया का उपयोग तीन बार किया जाता है। प्रथम बार बोआई/रोपाई के समय में, दूसरी बार कंसा निकलने के समय में बोआई/रोपाई से तीन चार सप्ताह बाद एवं तीसरी बार गभोट अवस्था में बोआई/रोपाई के 7 से 8 सप्ताह बाद, इस प्रकार यूरिया का सितम्बर माह के मध्य तक उपयोग किया जाता है। डीएपी उर्वरक का 1.63 लाख मेट्रिक टन भंडारण हुआ है। जुलाई माह के सप्लाई प्लान के अनुसार राज्य को 48 हजार 850 मेट्रिक टन डीएपी और मिलेगी। कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जुलाई माह में 25 हजार टन एनपीके की आपूर्ति संभावित है। एनपीके की अतिरिक्त आपूर्ति को मिलाकर कुल अतिरिक्त एनपीके 50 हजार 266 मेट्रिक टन से 22 हजार मेट्रिक टन डीएपी प्रतिपूर्ति होगी। इसी तरह एसएसपी की कुल अतिरिक्त आपूर्ति 1.47 लाख मेट्रिक टन से 50 हजार मेट्रिक टन डीएपी की प्रतिपूर्ति होगी। इस प्रकार राज्य में एनपीके और एसएसपी के अतिरिक्त आपूर्ति से 72 हजार मेट्रिक टन डीएपी की प्रतिपूर्ति सुनिश्चित होगी।      मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि डीएपी खाद की कमी को लेकर किसानों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। इसके विकल्प के रूप में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा अन्य रासायनिक उर्वरक जैसे- नैनो डीएपी, एनपीके और एसएसपी की भरपूर व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इंदिरा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विभाग के अधिकारियों के सुझाव के अनुरूप किसान डीएपी के बदले उक्त उर्वरकों का प्रयोग कर बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। सोसायटियों से किसानों को उनकी डिमांड के अनुसार खाद-बीज का पर्याप्त भंडारण किया गया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से आया राजधानी भोपाल में निवेश, केन्स इलेक्ट्रॉनिक्स स्थापित करेगी भोपाल में अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण इकाई

352 करोड़ के निवेश से सृजित होंगे 1000 से अधिक रोजगार के अवसर भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश को इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अग्रणी बनाने के प्रयास लगातार किये जा रहे है। इसी क्रम में केन्स इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड (KEMPL) द्वारा भोपाल के बड़वई आईटी पार्क में अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण इकाई की स्थापना की जा रही है। केन्स टेक्नोलॉजी इंडिया लिमिटेड (KTIL) की इस अनुषांगिक कंपनी की यह इकाई लगभग 5 एकड़ क्षेत्र में स्थापित की जाएगी। इसमें 352 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा और इससे 1000 से अधिक कुशल युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इकाई में 2026 से उत्पादन शुरू होने की संभावना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशानुसार प्रदेश में उद्योग संवर्धन के लिए बनाई गई नीतियों में मध्यप्रदेश सेमीकंडक्टर पॉलिसी-2025 भी शामिल है। यह नीति वैश्विक और देशी निवेशकों को आकर्षित करने के उद्देश्य से बनाई गई है। राज्य सरकार की इंडस्ट्री-फ्रैंडली नीतियों, उत्कृष्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर और प्रशिक्षित मानव संसाधनों की उपलब्धता से इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर मैन्यूफैक्चरर्स प्रदेश में निवेश के लिए आकर्षित हो रहे हैं। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री संजय दुबे ने कहा कि केन्स टेक्नोलॉजी की इकाई भोपाल में स्थापना होने से यह स्पष्ट है कि आईटी और संबंधित क्षेत्रों के लिये बनाई गई नीतियां उद्योग जगत को राज्य में निवेश के लिये आकर्षित कर रही है। केन्स टेक्नोलॉजी इंडिया लिमिटेड के सीईओ श्री रघु पनिक्कर ने कहा कि मध्यप्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण इकाई की स्थापना करना कंपनी के लिए अत्यंत उत्साहजनक है। प्रदेश की सेमीकंडक्टर पॉलिसी और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सक्रिय सहयोग इकाई की स्थापना सुगम हो सकी है। नई इकाई से कंपनी वैश्विक मांग पूरा कर भारत की ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग पॉवर को अधिक सशक्त करेगी। देश में आठ उन्नत निर्माण इकाइयों का संचालन कर रही केन्स टेक्नोलॉजी इंडिया लिमिटेड की भोपाल में स्थापित होने जा रही यह इकाई कंपनी का मध्य भारत में पहला बड़ा निवेश है। कंपनी ऑटोमोबाइल, एयरोस्पेस, रक्षा, औद्योगिक, चिकित्सा, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और अंतरिक्ष क्षेत्रों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद बनाती है। इस परियोजना में सरफेस माउंट टेक्नोलॉजी (SMT) लाइनों की स्थापना की जाएगी, जो विभिन्न उद्योगों के लिए हाई-प्रेसीजन इलेक्ट्रॉनिक असेंबली और उत्पादों का निर्माण करेंगी। प्रदेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रयासों से सीसीआईपी (Collaborative Centre for Innovation and Policy) के माध्यम से इस इकाई की स्थापना हो रही है।  

रीवा इंजीनियरिंग कॉलेज के सुदृढ़ीकरण से विंध्य क्षेत्र के समग्र विकास को मिलेगी गति : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

समय की मांग अनुसार नवीन कोर्स करें संचालित दीर्घकालिक विकास योजना पर विस्तृत चर्चा कर दिए निर्देश रीवा उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि रीवा इंजीनियरिंग कॉलेज विंध्य क्षेत्र का एक प्रमुख तकनीकी शिक्षण संस्थान है, जिसकी सुदृढ़ता न केवल क्षेत्रीय तकनीकी शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाएगी, बल्कि विंध्य क्षेत्र के समग्र विकास को भी गति देगी। उन्होंने कहा कि रीवा इंजीनियरिंग कॉलेज के तकनीकी सशक्तिकरण से आने वाले समय में विंध्य अंचल उच्च शिक्षा के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित होगा। यह संस्थान स्थानीय युवाओं की आकांक्षाओं को साकार करने के साथ-साथ प्रदेश की तकनीकी क्षमताओं को भी विस्तार देगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मंत्रालय, भोपाल में रीवा इंजीनियरिंग कॉलेज की दीर्घकालिक विकास योजना पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में प्रमुख सचिव तकनीकी शिक्षा श्री विवेक पोरवाल एवं रीवा इंजीनियरिंग कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आर.पी. तिवारी उपस्थित रहे। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार तकनीकी शिक्षा को वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित करने हेतु दृढ़ संकल्पित है। उन्होंने कहा कि शिक्षण गुणवत्ता के लिए योग्य शिक्षकों की भर्ती अहम है। उन्होंने निर्देश दिए कि वर्तमान पाठ्यक्रम के विधिवत संचालन के लिए स्वीकृत पदों की पूर्ति के साथ नवीन पाठ्यक्रम के लिए विषय विशेषज्ञों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का आधार उत्कृष्ट शिक्षण संकाय होता है। सभी विभागों में योग्य, अनुभवी एवं नवाचारोन्मुख फैकल्टी की शीघ्र भर्ती की जाए ताकि छात्रों को वैश्विक स्तर की तकनीकी शिक्षा मिल सके। इसके लिए रीवा इंजीनियरिंग कॉलेज को विभाग आवश्यक सहयोग प्रदान करे। समय की मांग अनुसार नवीन कोर्स का संचालन करें। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने निर्देश दिए कि प्रस्तावित योजनाओं को शीघ्र अनुमोदन की प्रक्रिया में लाया जाए। प्राचार्य डॉ. तिवारी ने कॉलेज की 5 वर्षीय एवं 20 वर्षीय सुदृढ़ीकरण योजना प्रस्तुत की। उन्होंने 88.30 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक पाठ्यक्रमों की शुरुआत, अधोसंरचना विकास और अन्य सुविधाओं के विस्तार का रोडमैप प्रस्तुत किया। प्रस्तावित योजना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, इलेक्ट्रिकल व्हीकल टेक्नोलॉजी, ऑटोमेशन एवं फायर टेक एंड सेफ्टी इंजीनियरिंग जैसे समसामयिक विषयों में 5 नवीन यूजी प्रोग्राम तथा साइबर सिक्योरिटी, कंस्ट्रक्शन टेक्नोलॉजी, डिजिटल कम्युनिकेशन, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीन डिजाइन, इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग, एडवांस प्रोडक्शन सिस्टम सहित 9 पीजी प्रोग्राम प्रारंभ किए जाने का प्रस्ताव शामिल है। साथ ही 17.53 करोड़ रुपये की लागत से सेंट्रल लाइब्रेरी, 12.33 करोड़ रुपए लागत से स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और 1.45 करोड़ रुपए लागत से इन्क्यूबेशन सेंटर के निर्माण कार्य विकास योजना में शामिल है।  

सावन का पहला सोमवार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा महाकाल के चरणों में नमन किया

पहली सवारी में शामिल श्रद्धालुओं का किया स्वागत भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सावन का पहला सोमवार, बाबा महाकाल की सवारी, हम सबका सौभाग्य है। सावन सोमवार की सवारी में बाबा महाकाल अपने भक्तों के हालचाल जानने के लिए साल में एक बार नगर भ्रमण के लिए निकलते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 'एक्स' पर बाबा महाकाल के श्री चरणों में नमन और वंदन कर अत्यंत प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि बाबा की सवारी में लघु मध्यप्रदेश के दर्शन हों, इसके लिए हमारी सरकार ने निर्णय लिया है कि बाबा महाकाल प्रदेश के मंडला, डिंडोरी, बालाघाट, धार, झाबुआ एवं छिंदवाड़ा जिले के जनजातीय भाई-बहनों द्वारा उपयोग में लाए जाने वाले पुरा वाद्य-यंत्रों के साथ ही अपनी यात्रा पर निकलेंगे। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार के मंत्रीगण भी हर सावन सोमवार को बाबा महाकाल की सवारी में शामिल होकर प्रदेश की खुशहाली के लिए बाबा का आशीर्वाद पाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि सोमवार को पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहृलाद पटेल, जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट और कौशल विकास एवं रोजगार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा उज्जैन जिले के प्रभारी मंत्री श्री गौतम टेटवाल सहित अन्य मंत्रीगण भी बाबा की सवारी में शामिल हो रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चूंकि वे दुबई प्रवास पर हैं, इसलिए बाबा की सवारी के दर्शन नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बाबा की सवारी उज्जैन की गरिमा को और बढ़ाएगी। मुख्यमंत्री ने बाबा की सवारी में शामिल होने वाले सभी मंत्रीगण को अपनी ओर से शुभकामनाएं भी दी हैं।