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पंचायतों के उप निर्वाचन में 56.62 एवं नगर परिषद सुसनेर में 75.96 प्रतिशत हुआ मतदान

भोपाल नगरीय निकाय एवं त्रिस्तरीय पंचायतों के उप निर्वाचन वर्ष 2026 पूर्वाध के घोषित कार्यक्रम अनुसार 29 सितम्बर, 2026 को मतदान सम्पन्न हुआ। जिला आगर-मालवा की नगर परिषद सुसनेर के अध्यक्ष पद के लिए 75.96 प्रतिशत मतदान हुआ। पंचायत उप निर्वाचन के लिये 56.62 प्रतिशत मतदान हुआ। नगर परिषद सुसनेर के अध्यक्ष पद के लिए मतगणना 3 अक्टूबर को होगी। सरपंच, जनपद पंचायत सदस्य एवं जिला पंचायत सदस्य की विकास खण्ड मुख्यालय पर ई.व्ही.एम. से की जाने वाली मतगणना 3 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से होगी। इसी दिन सरपंच एवं जनपद पंचायत सदस्य के निर्वाचन परिणामों की घोषणा की जायेगी। जिला पंचायत सदस्यों एवं पंच पद के लिए परिणामों की घोषणा 5 अक्टूबर 2026 को प्रात: 10.30 बजे से की जायेगी। पंचायत उप निर्वाचन के तहत जिला पंचायत सदस्य के 7, जनपद पंचायत सदस्य के 28, सरपंच के 110 और 4090 पंच पद के लिये उप निर्वाचन होना था।  

दुर्लभ एवं प्रतिबंधित प्रजाति के वन्य-जीव कछुओं की अंतर्राज्यीय तस्करी

भोपाल  स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स, क्षेत्रीय इकाई इंदौर द्वारा अंतर्राज्यीय स्तर पर जलीय वन्य-जीवों की अवैध तस्करी करने वाले संगठित गिरोह के खिलाफ की गई कार्रवाई में महत्वपूर्ण सफलता हासिल हुई है। जिला एवं सत्र न्यायालय इंदौर द्वारा वन अपराध प्रकरण में शामिल मुख्य आरोपी कमल मेहता की नियमित जमानत याचिका को निरस्त कर दिया गया है। 19 अगस्त, 2026 को स्टेट टाइगर फोर्स इंदौर की टीम ने गोपनीय सूचना के आधार पर तीन इमली चौराहा, इंदौर से आरोपी रोहन और केशव को गिरफ्तार किया था। उनके कब्जे से 30 नग जीवित दुर्लभ एवं प्रतिबंधित प्रजाति के कछुए (विभिन्न प्रजातियों के) जप्त किये गये। पूछताछ के दौरान आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर अंतर्राज्यीय गिरोह का खुलासा हुआ और कनाडिया रोड स्थित 'श्री पेट शॉप' (आरोपी कमल मेहता के परिसर) की तलाशी ली गई। वहाँ से अनुसूची-I एवं II के तहत संरक्षित एक इंडियन स्टार टॉरटॉइस तथा एक रोज रिंग पैराकिट पक्षी बरामद किया गया। प्रकरण में अब तक आरोपी कमल मेहता और उसके अंतर्राज्यीय गिरोह के सदस्यों के कब्जे से कुल 33 नग जीवित दुर्लभ एवं प्रतिबंधित प्रजाति के कछुए जप्त किये जा चुके हैं। इस गिरोह के तार मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र से जुड़े हुए हैं। आरोपी कमल मेहता के विरुद्ध वन्य-जीव संरक्षण अधिनियम के तहत अपराध पंजीबद्ध है। एसटीएफ द्वारा आरोपी को 23 सितंबर, 2026 को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था। एसटीएसएफ की ओर से जिला एवं सत्र न्यायालय इंदौर में सशक्त पक्ष रखते हुए अवगत कराया गया कि आरोपी एक संगठित अंतर्राज्यीय वन्य-जीव तस्करी गिरोह का हिस्सा है। जमानत मिलने पर आरोपी द्वारा साक्ष्यों को प्रभावित करने, विवेचना में बाधा डालने की प्रबल संभावना है। जिला एवं सत्र न्यायालय इंदौर ने प्रकरण में दुर्लभ वन्य-जीवों की अंतर्राज्यीय तस्करी की गंभीरता और आरोपी की प्रथम दृष्ट्या संलिप्तता को देखते हुए 28 सितंबर, 2026 को आरोपी कमल मेहता की जमानत याचिका निरस्त करने का आदेश पारित किया। प्रकरण में विवेचना जारी है।  

युवा, शोधकर्ता और युवा वैज्ञानिक जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों पर करेंगे संवाद

भोपाल जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और सतत विकास के लक्ष्यों को प्रभावी रूप से प्राप्त करने में युवाओं, शोधकर्ताओं एवं युवा वैज्ञानिकों की भूमिका को सशक्त बनाने के उद्देश्य से 30 सितंबर को भोपाल में प्री-सीओपी31 परामर्श संवाद आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम एमपीसीएसटी, विज्ञान भवन, नेहरू नगर, भोपाल में होगा। संवाद का विषय “सही राह पर आगे बढ़ते हुए-जलवायु एवं सतत विकास के बीच समन्वय को सुदृढ़ करना और राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में राज्य की भूमिका को बढ़ाना” है। कार्यक्रम का आयोजन मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, नर्मदा समग्र, मध्यप्रदेश राज्य नीति आयोग, पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन (ईपीसीओ) तथा अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। कार्यक्रम में जलवायु परिवर्तन और सतत विकास से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं, युवा वैज्ञानिकों एवं युवाओं के साथ संवाद होगा। कार्यक्रम में ‘क्लाइमेट शाला’ का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद “जलवायु एवं एसडीजी समन्वय तथा मध्यप्रदेश की प्राथमिकताएं” विषय पर पैनल चर्चा होगी और संवाद सत्र आयोजित किया जाएगा।कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए जाएंगे।  

आजीविका डबरी से लक्ष्मी प्रसाद को मिला दोहरा लाभ, मछली पालन से आमदनी और खेती को सिंचाई का सहारा

रायपुर, खेत में बनी आजीविका डबरी ने सरगुजा जिले के लक्ष्मी प्रसाद के परिवार के लिए आय और सिंचाई, दोनों का रास्ता खोल दिया है। डबरी में संग्रहित पानी में मछली पालन कर परिवार अतिरिक्त आमदनी अर्जित कर रहा है, वहीं इसी पानी का उपयोग साग-सब्जी और गेहूं की खेती की सिंचाई में भी किया जा रहा है। पिछले वर्ष से मछली पालन कर रहे लक्ष्मी प्रसाद ने मछली बिक्री से लगभग एक लाख रुपये की आय अर्जित की है। बतौली विकासखंड निवासी लक्ष्मी प्रसाद बताते हैं कि उनकी माता के नाम से ग्रामीण रोजगार योजना के तहत परिवार की जमीन पर आजीविका डबरी का निर्माण कराया गया है। डबरी बनने के बाद उन्होंने इसे केवल जल संग्रहण तक सीमित नहीं रखा, बल्कि मछली पालन शुरू कर इसे अतिरिक्त आमदनी का माध्यम बनाया। इससे परिवार को खेती के साथ आजीविका का एक और साधन मिला है। मछली पालन से लगभग एक लाख रुपये की आमदनी लक्ष्मी प्रसाद के अनुसार डबरी में मछली उत्पादन का आकलन करीब 20 क्विंटल तक है। मछली की बिक्री से उन्हें लगभग एक लाख रुपये की आमदनी हुई है। वे हर साल डबरी में करीब 8 से 10 किलो मछली बीज डालते हैं और मछलियों की बढ़वार एवं उत्पादन के अनुसार बिक्री करते हैं। लक्ष्मी प्रसाद बताते हैं, “पिछले साल से मछली पालन कर रहा हूं। करीब 20 क्विंटल का आकलन है और मछली बेचकर लगभग एक लाख रुपये की आमदनी हुई है। हर साल 8 से 10 किलो मछली बीज डालते हैं।” साग-सब्जी और गेहूं की खेती को भी मिल रहा पानी आजीविका डबरी ने परिवार के लिए सिंचाई की सुविधा भी बढ़ाई है। डबरी में संग्रहित पानी का उपयोग साग-सब्जी और गेहूं की फसल की सिंचाई के लिए किया जा रहा है। इससे आवश्यकता के समय खेतों तक पानी पहुंचाने में मदद मिल रही है। एक ही जल संरचना का उपयोग मछली पालन और खेती दोनों में होने से परिवार को दोहरा लाभ मिल रहा है। मछली पालन से जहां अतिरिक्त आय का स्रोत तैयार हुआ है, वहीं सिंचाई की सुविधा से खेती को भी सहारा मिला है। जल संरक्षण के साथ आजीविका का बना आधार डबरी में बरसाती पानी के संग्रहण और उसके आजीविका गतिविधियों में उपयोग ने लक्ष्मी प्रसाद के परिवार के लिए नई संभावनाएं तैयार की हैं। उपलब्ध जल संसाधन का बेहतर उपयोग कर परिवार खेती के साथ मछली पालन को भी आगे बढ़ा रहा है। लक्ष्मी प्रसाद ने आजीविका डबरी की सुविधा मिलने पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि डबरी से मछली पालन के जरिए आय मिलने के साथ खेती-बाड़ी के लिए पानी उपलब्ध होने से परिवार को दोहरा लाभ मिल रहा है। सेवा संकल्प अभियान के तहत लक्ष्मी प्रसाद की यह ‘सेवा की कहानी’ बताती है कि जल संरक्षण के लिए तैयार छोटी संरचना को आजीविका से जोड़कर ग्रामीण परिवार खेती के साथ आय के अतिरिक्त साधन भी विकसित कर सकते हैं। आजीविका डबरी उनके परिवार के लिए जल संरक्षण, सिंचाई और मछली पालन—तीनों का उपयोगी आधार बन गई है।

हुनर ने दी आत्मनिर्भरता की राह, ब्यूटी पार्लर से किरण को हर माह 12 से 20 हजार रुपये तक की आय

रायपुर कभी प्रशिक्षण के जरिए सीखा गया ब्यूटीशियन का हुनर आज श्रीमती किरण केरकेट्टा की आत्मनिर्भरता का आधार बन गया है। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत छह माह का प्रशिक्षण लेने के बाद किरण ने छोटे स्तर पर अपना ब्यूटी पार्लर शुरू किया। धीरे-धीरे ग्राहक बढ़े और उनका हुनर नियमित आजीविका में बदल गया। आज वे अपने व्यवसाय से प्रतिमाह लगभग 12 से 20 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर परिवार के खर्च में सहयोग कर रही हैं। इतना ही नहीं, अपने साथ दूसरे लोगों को रोजगार और प्रशिक्षण से जोड़कर उन्हें भी आगे बढ़ने का अवसर दे रही हैं। अम्बिकापुर के पटेलपारा निवासी किरण केरकेट्टा बताती हैं कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के माध्यम से उन्हें छह माह का ब्यूटीशियन प्रशिक्षण मिला। प्रशिक्षण के दौरान सीखे हुनर को उन्होंने स्वरोजगार से जोड़ने का निर्णय लिया और अपना छोटा सा ब्यूटी पार्लर शुरू किया। मेहनत के साथ उनका काम आगे बढ़ा और धीरे-धीरे ग्राहक जुड़ते गए। 12 से 20 हजार रुपये तक की मासिक आय से परिवार को मिला आर्थिक सहारा किरण के अनुसार वर्तमान में ब्यूटी पार्लर से उन्हें प्रतिमाह लगभग 12 से 20 हजार रुपये तक की आमदनी हो जाती है। इस आय से वे परिवार की जरूरतों और घर के खर्च में सहयोग कर पा रही हैं। कौशल प्रशिक्षण से मिला हुनर उनके लिए अब केवल एक कला नहीं, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता का माध्यम बन गया है। किरण अपनी खुशी साझा करते हुए कहती हैं, “पीएम कौशल विकास के माध्यम से मुझे अपने पैरों पर खड़े होने का मौका मिला। छह महीने ब्यूटीशियन का कोर्स करने के बाद मैंने अपना छोटा सा ब्यूटी पार्लर शुरू किया। इससे 12 से 20 हजार रुपये तक इनकम हो जाती है और घर का खर्च भी चल जाता है।” खुद बढ़ीं आगे, अब दूसरों को भी हुनर से जोड़ रहीं किरण किरण की सफलता केवल उनकी अपनी आजीविका तक सीमित नहीं है। अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के साथ उन्होंने कुछ लोगों को रोजगार से भी जोड़ा है। इसके अलावा दो से चार महिलाएं उनके पास ब्यूटीशियन का काम सीख रही हैं। इस तरह उन्हें प्रशिक्षण से मिला हुनर अब दूसरे लोगों के लिए भी सीखने और आगे बढ़ने का माध्यम बन रहा है। किरण का कहना है कि कौशल विकास के माध्यम से उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला और अब उनके काम से दूसरे लोगों को भी लाभ मिल रहा है। उन्होंने इस अवसर के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। कौशल से स्वरोजगार और स्वरोजगार से दूसरों के लिए अवसर सेवा संकल्प अभियान के तहत किरण केरकेट्टा की यह ‘सेवा की कहानी’ कौशल प्रशिक्षण से स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता तक के सफर को सामने लाती है। छह माह के प्रशिक्षण से मिले हुनर को उन्होंने अपनी मेहनत से नियमित आमदनी के साधन में बदला। आज वे स्वयं आर्थिक रूप से सशक्त होने के साथ अन्य महिलाओं को भी हुनर सीखने और आजीविका की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से मल्हनिया जलाशय में बदली मछुआरों की जिंदगी

रायपुर  प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार द्वारा मत्स्य क्षेत्र को आधुनिक तकनीक, अधोसंरचना और बेहतर आजीविका के अवसरों से जोड़ने के उद्देश्य से संचालित प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का प्रभाव अब गांवों तक दिखाई दे रहा है। योजना के अंतर्गत अंतर्देशीय मत्स्यपालन, केज कल्चर और आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि मछुआरों और मछली किसानों की आय तथा रोजगार के अवसरों में वृद्धि हो।  छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के गौरेला विकासखंड स्थित ग्राम देवरगांव का मल्हनिया जलाशय इसका एक उदाहरण बनकर सामने आया है। यहां प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और जिला खनिज न्यास निधि (डीएमएफटी) के सहयोग से जय बूढ़ा देव मल्हनिया आदिवासी मछुआ सहकारी समिति मर्यादित के सदस्यों ने पारंपरिक मत्स्याखेट के साथ आधुनिक पिंजरा मछली पालन यानी केज कल्चर को अपनाया है। इससे समिति के सदस्यों के लिए मछली उत्पादन, आय और रोजगार का नया आधार तैयार हुआ है। 54 केज ने बदली आजीविका की तस्वीर वर्ष 2002 से संचालित जय बूढ़ा देव मल्हनिया आदिवासी मछुआ सहकारी समिति में वर्तमान में 44 मछुआ आदिवासी सदस्य जुड़े हुए हैं। इनमें 26 सदस्य विशेष पिछड़ी जनजाति (पीवीटीजी) बैगा समुदाय से हैं। पहले समिति के सदस्य मुख्य रूप से जलाशय में पारंपरिक मत्स्याखेट कर मछली बेचकर अपनी आजीविका चलाते थे। जलाशय की लीज सहित अन्य खर्चों के बाद समिति की वार्षिक आय लगभग ढाई से तीन लाख रुपये तक सीमित थी। मछुआरों की आजीविका को अधिक स्थायी और आय को बेहतर बनाने के उद्देश्य से मत्स्य पालन विभाग एवं जिला प्रशासन ने आधुनिक पिंजरा मछली पालन को बढ़ावा दिया। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और डीएमएफटी के संयुक्त सहयोग से मल्हनिया जलाशय में कुल 54 केज स्थापित किए गए हैं। केन्द्र की योजना, स्थानीय मेहनत और तकनीक का संगम प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का एक प्रमुख उद्देश्य मत्स्य उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के साथ मछुआरों एवं मछली किसानों की आय में वृद्धि और रोजगार के अवसर पैदा करना है। योजना में जलाशयों में केज कल्चर सहित अंतर्देशीय मत्स्यपालन को आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है।  मल्हनिया जलाशय में योजना का यही उद्देश्य स्थानीय स्तर पर साकार होता दिखाई दे रहा है। केज में उन्नत प्रजातियों की मछलियों का पालन किया जा रहा है। पारंपरिक मत्स्याखेट के अनुभव के साथ आधुनिक तकनीक जुड़ने से समिति के सदस्यों को अधिक उत्पादन और बेहतर बाजार अवसर प्राप्त हो रहे हैं। एक साल में 10 से 15 लाख रुपये की मछली बिक्री केज कल्चर शुरू होने के बाद समिति की आर्थिक गतिविधियों में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। समिति द्वारा एक वर्ष में लगभग 10 से 15 लाख रुपये की मछली का विक्रय किया गया है। वर्तमान में केजों में लगभग 10 से 15 टन मछली उपलब्ध है। इस गतिविधि से समिति की आय के साथ-साथ सदस्यों को नियमित रोजगार का अवसर मिल रहा है। समिति के सदस्यों के अनुसार, केज कल्चर से उन्हें प्रतिमाह लगभग 6 से 7 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है। इससे परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल रही है और आजीविका के लिए केवल पारंपरिक मत्स्याखेट पर निर्भरता कम हुई है। मछुआरों के हुनर को मिली आधुनिक तकनीक की ताकत मल्हनिया जलाशय की कहानी यह दिखाती है कि जब पारंपरिक आजीविका को आधुनिक तकनीक और संस्थागत सहयोग का साथ मिलता है, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नए अवसर पैदा हो सकते हैं। वर्षों से जलाशय से जुड़े मछुआरों ने अपने पारंपरिक अनुभव को केज कल्चर की नई तकनीक के साथ जोड़ा है। इस बदलाव से मछुआरा समिति की आर्थिक गतिविधियां बढ़ी हैं और सदस्यों को वर्षभर रोजगार से जुड़ने का अवसर मिला है। विशेष रूप से बैगा समुदाय के सदस्यों की भागीदारी इस पहल को आजीविका सशक्तिकरण के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बनाती है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विजन से गांवों तक पहुंची आधुनिक मत्स्य तकनीक प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के माध्यम से मत्स्य क्षेत्र में उत्पादन, उत्पादकता, तकनीक, मूल्य श्रृंखला और मछुआरों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण को प्रमुखता दी है। योजना के आधिकारिक उद्देश्यों में मत्स्य क्षेत्र की क्षमता का सतत उपयोग, आधुनिक तकनीक का विस्तार, उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि, रोजगार सृजन तथा मछुआरों और मछली किसानों की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा शामिल है।  इसी व्यापक दृष्टिकोण का स्थानीय उदाहरण मल्हनिया जलाशय में दिखाई देता है, जहां सरकारी योजना के सहयोग से पारंपरिक मत्स्याखेट को आधुनिक केज कल्चर से जोड़ा गया है। इससे मछली उत्पादन के साथ ग्रामीण परिवारों के लिए आय के अतिरिक्त अवसर तैयार हुए हैं। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में योजनाओं का जमीनी क्रियान्वयन केन्द्र सरकार की योजनाओं का वास्तविक लाभ हितग्राहियों तक पहुंचाने में राज्य स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन और स्थानीय प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना को स्थानीय आवश्यकताओं और उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप आगे बढ़ाने के प्रयासों का यह उदाहरण सामने आया है। मल्हनिया जलाशय में 54 केज की स्थापना, मछुआरा सहकारी समिति की भागीदारी और डीएमएफटी के सहयोग का समन्वय यह दर्शाता है कि केन्द्र की योजना, राज्य स्तर का क्रियान्वयन, जिला प्रशासन का सहयोग और हितग्राहियों की मेहनत मिलकर आजीविका के नए अवसर तैयार कर सकते हैं। आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते मछुआरे आज मल्हनिया जलाशय के मछुआरों के लिए केज कल्चर केवल मछली पालन की एक नई तकनीक नहीं, बल्कि अपनी पारंपरिक आजीविका को अधिक व्यवस्थित और आय-सृजनकारी बनाने का माध्यम बन गया है। 44 सदस्यों वाली समिति के लिए 54 केज के माध्यम से विकसित यह गतिविधि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में रोजगार और आय के नए अवसरों को मजबूत कर रही है। मल्हनिया जलाशय में आया यह बदलाव प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की उस व्यापक सोच से जुड़ता है, जिसमें आधुनिक तकनीक, रोजगार और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग के माध्यम से ग्रामीण परिवारों की आर्थिक क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया है। यह सफलता की कहानी बताती है कि सही योजना, तकनीकी सहयोग, स्थानीय प्रशासन की सक्रियता और हितग्राहियों की मेहनत साथ आए तो जलाशय का पानी केवल मछली उत्पादन का साधन नहीं रहता, बल्कि ग्रामीण परिवारों के लिए स्थायी आजीविका और आर्थिक आत्मनिर्भरता का आधार भी बन सकता है।

कचरा मुक्त एवं धूल मुक्त शहरों के निर्माण के साथ युवाओं और उद्योगों की सहभागिता से सर्कुलर इकोनॉमी को मिलेगा बढ़ावा

भोपाल  स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के अंतर्गत शहरी स्वच्छता, सैनिटेशन एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में देश के चयनित 50 शहरों को मॉडल शहर के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा प्रारंभ की गई प्रगति-50 पहल में मध्यप्रदेश के भोपाल एवं उज्जैन शहरों का चयन किया गया है। चयनित शहरों में स्वच्छता, सैनिटेशन, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन तथा नागरिक सहभागिता के क्षेत्र में समयबद्ध एवं परिणाम आधारित कार्यों को गति दी जाएगी। प्रगति-50 पहल के संबंध में आज आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में मध्यप्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ऑनलाइन शामिल हुए। नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त श्री संकेत भोंडवे सहित विभागीय अधिकारी एवं संबंधित नगरीय निकायों के अधिकारी भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सहभागिता की ।बैठक में स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के अंतर्गत नई पहलों, तकनीकी नवाचारों तथा प्रगति-50 शहरों में स्वच्छता के परिणामों को गति देने के लिए निगरानी एवं क्रियान्वयन व्यवस्था पर चर्चा हुई। मंत्री श्री विजयवर्गीय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत की संकल्पना के अनुरूप मध्यप्रदेश PRAGATI-50 के लिए संकल्पित होकर कार्य करेगा। इंदौर, भोपाल और उज्जैन में विस्तृत कार्ययोजना बनाकर हम उत्कृष्ट कार्य कर प्रदेश और इन महानगरों की प्रतिष्ठा बढ़ाने का काम करेंगे। उज्जैन सिंहस्थ की दृष्टि से इन तीनों शहरों का समग्र विकास अति महत्वपूर्ण है। इस पहल से इन शहरों में स्टार्टअप और इंडस्ट्रियल सेक्टर के विस्तार में गति आएगी। युवा स्वच्छता के लीडर बन पाएंगे।” उज्जैन में सिंहस्थ की दृष्टि से विशेष तैयारी वर्ष 2028 में आयोजित होने वाले सिंहस्थ महापर्व की दृष्टि से स्वच्छता एवं सैनिटेशन अधोसंरचना को प्राथमिकता के आधार पर सुदृढ़ करने में इस पहल की बड़ी भूमिका होगी। घाटों, सार्वजनिक शौचालयों, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन तथा भीड़-आधारित स्वच्छता व्यवस्था को उन्नत किया जाएगा। क्षिप्रा नदी की स्वच्छता, उपयोगित जल प्रबंधन एवं पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन के लिए समन्वित कार्ययोजना तैयार की जाएगी। ज़ीरो वेस्ट ईवेंट और सर्कुलर सैनिटेशन मैनेजमेंट की अवधारणा को अपनाने की दिशा में प्रयास किया जाएगा। मिशन मोड पर होगा काम, युवाओं की सहभागिता का लक्ष्य इस पहल के अंतर्गत कचरा मुक्त और धूल मुक्त शहरों की अवधारणा को साकार करने के लिए मिशन मोड पर कार्य किया जाएगा। स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण, घर-घर कचरा संग्रहण, एमआरएफ, कम्पोस्टिंग एवं वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रसंस्करण को सुदृढ़ किया जाएगा। सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता, सौंदर्यीकरण एवं दर्शनीय स्वच्छता और सुंदरता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। वेस्ट-टू-वेल्थ और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा दिया जाएगा। युवाओं, स्टार्टअप्स एवं उद्योगों की स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन में सहभागिता बढ़ाई जाएगी। स्वच्छता क्षेत्र में नवाचार एवं उद्यमिता को प्रोत्साहित किया जाएगा। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के लिए भोपाल के लिए विशेष कार्ययोजना वर्ष 2027 में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की दृष्टि से भोपाल को स्वच्छ, हरित एवं निवेश-अनुकूल महानगर के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, उपयोगित जल का पुनः उपयोग, सार्वजनिक स्वच्छता, सौंदर्यीकरण एवं दृश्य स्वच्छता को प्राथमिकता दी जाएगी। कचरा संभावित स्थलों के उन्मूलन और सार्वजनिक स्थलों के कायाकल्प पर विशेष जोर दिया जाएगा। वेस्ट-टू-वेल्थ, सर्कुलर इकोनॉमी तथा पीपीपी आधारित परियोजनाओं को प्रोत्साहन करना भी इस पहल में शामिल है। इसके अंतर्गत समयबद्ध क्रियान्वयन एवं परिणाम आधारित निगरानी भी सुनिश्चित की जाएगी। प्रदेश में स्टार्टअप एवं नवाचार को प्रोत्साहन स्वच्छता क्षेत्र में नवाचार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक चयनित स्टार्टअप को प्रारंभिक स्तर पर 20 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की पहल पर कार्य किया जाएगा। आईआईटी कानपुर की सहभागित व सहयोग के साथ स्वच्छता, अपशिष्ट प्रबंधन, पुनर्चक्रण, सर्कुलर इकोनॉमी एवं तकनीकी नवाचार से जुड़े नए उद्यमों को प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा।  

आधार कॉर्ड, निवास प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र या जन्मतिथि के उल्लेख वाली प्रमाणित अंकसूची उपलब्ध कराना अनिवार्य

रायपुर  राज्य शासन के खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा रायपुर जिले में संचालित गैर-आवासीय खेल अकादमियों में प्रवेश और प्रवेश के नवीनीकरण के लिए 30 सितम्बर और 1 अक्टूबर को चयन ट्रायल का आयोजन किया गया है। ट्रायल के आधार पर गैर-आवासीय बालक-बालिका तीरंदाजी, बालिकाओं के फुटबॉल, बालक-बालिका हॉकी एवं बालक-बालिका एथलेटिक्स के खिलाड़ियों का चयन प्रशिक्षण के लिए किया जाएगा। चयन ट्रायल में भाग लेने के इच्छुक खिलाड़ी 30 सितम्बर को रायपुर के कोटा स्थित स्वामी विवेकानंद स्टेडियम में प्रातः 7 बजे से 11 बजे तक पंजीयन करा सकते हैं। चयन ट्रायल में शामिल होने के लिए आधार कॉर्ड, निवास प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र या जन्मतिथि के उल्लेख वाली प्रमाणित अंकसूची उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि 30 सितम्बर को खिलाड़ियों का पंजीयन, दस्तावेज परीक्षण, चिकित्सीय परीक्षण और शारीरिक दक्षता परीक्षण किया जाएगा। वहीं 1 अक्टूबर को खेल कौशल का परीक्षण किया जाएगा। चयन ट्रायल स्वामी विवेकानंद स्टेडियम कोटा, तीरंदाजी एरिना (बालिका खेल छात्रावास के सामने) और हॉकी स्टेडियम पिच-02 में सुबह 7 बजे से आयोजित किए गए हैं। चयन ट्रायल में राज्य के बालक-बालिका खिलाड़ी तथा अन्य राज्यों के 13 से 17 आयु वर्ग के खिलाड़ी शामिल हो सकते हैं। अकादमियों के लिए खिलाड़ियों का चयन उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर चयन समिति द्वारा किया जाएगा। खेल अकादमी संचालन नियम, 2014 के तहत अंतिम रूप से चयनित खिलाड़ियों को निःशुल्क प्रशिक्षण, खेल परिधान, प्लेइंग किट, बीमा एवं खेलवृत्ति आदि सुविधाएं शासन द्वारा उपलब्ध कराई जाएंगी।

यात्रियों के लिए जिलों में सुविधायुक्त बस स्टैंड और अन्य प्रबंध किए जाएं

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के नागरिकों के हित में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की शुरूआत की गई है। प्रदेश में वर्ष 2005 में राज्य परिवहन निगम बंद किया गया था। राष्ट्रवादी विचारक पं. दीनदयाल उपाध्याय की जयंती, 25 सितम्बर से प्रदेश में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंतर्गत 351 इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों के संचालन की शुरूआत हुई है, जिसका निरंतर विस्तार किया जाएगा। अगले पांच वर्ष में 14 हजार 981 बसों के संचालन का लक्ष्य है। इस सेवा में पूर्व से संचालित फिट बसों का उपयोग भी किया जा रहा है, अत: नागरिकों सहित किसी को भी भ्रमपूर्ण जानकारी पर विश्वास नहीं करना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंर्तगत नागरिकों की सुविधा के लिए आवश्यक सुविधाओं के विकास के संबंध में जिलों के कलेक्टर्स और पुलिस अधीक्षक को वीडियो कांफ्रेंसिंग द्वारा निर्देशित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में सेवा संकल्प माह के अंतर्गत प्रारंभ इस सुविधा से स्थानीय प्रशासन द्वारा यात्रियों को व्यवस्थित बस संचालन का लाभ दिलवाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं। संबंधित जिलों में प्रशासन के स्तर पर नागरिकों और बस आपरेटर्स को आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाए। सेवा के प्रदेशव्यापी विस्तार के साथ सभी जिलों में प्रशासनिक अमला नागरिकों की सुविधा के लिए सजग भूमिका का निर्वहन करेगा। वर्तमान में जिन रूट्स पर बसों का संचालन किया जा रहा है वहां मैदानी अमले द्वारा सहयोगी रवैया अपनाया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिन स्थानों पर बस डिपो या टर्मिनल बंद स्थिति में हो तो उन्हें स्वच्छता अभियान चलाकर और बैठक एवं अन्य सुविधाओं का विकास कर उपयोगी बनाया जाए। जहां स्टाप या बस स्टैंड खत्म हो चुके हैं वहां भूमि उपलब्ध करवाकर यह सुविधा विकसित की जाए। परमिट के अलावा जो बसें चल रही हैं उनके व्यवस्थित और अनुशासित संचालन को प्राथमिकता दी जाए। निजी बस ऑपरेटरों के फिटनेस, परमिट की शर्तें, ड्राइवर का बस संचालन और व्यवहार के लिए मजिस्ट्रेट एवं पुलिस अधिकारी से नियमित निरीक्षण की व्यवस्था की जाए। क्षेत्रीय कंपनियों के साथ शहरों में आवश्यक अधोसंरचना विकास के लिए स्थानीय प्रशासन सहयोग करे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बसों के बाधारहित संचालन के लिए थाना पुलिस और ट्रैफिक पुलिस का सहयोग दिलवाया जाए। इसके साथ ही जिला स्तरीय परिवहन सलाहकार समिति की नियमित बैठकें की जाएं। जिला कलेक्टर टीएल बैठक में क्षेत्रीय कंपनी के ईडी से भी प्रत्येक सप्ताह चर्चा करें।राज्य परिवहन उपक्रम की ओर से सभी जिला स्तरीय परिवहन सलाहकार समितियों के समक्ष रूट प्रस्तुतिकरण और सुझाव प्राप्त करने की काईवाई भी सुनिश्चित की जाए। आम जनता के हित में सभी एजेंसियों के बीच परस्पर आवश्यक संवाद रहे। परिवहन मंत्री  उदय प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का अधिक से अधिक नागरिकों को लाभ दिलवाने के लिए निजी बस ऑपरेटरों को आवश्यक प्रोत्साहन दिया जा रहा है। यात्रियों से प्राप्त सुझावों पर भी प्रशासन की ओर से जरूरी प्रबंध किए जाएं। मुख्य सचिव  अशोक बर्णवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा मध्यप्रदेश शासन की महत्वाकांक्षी योजना है। परिवहन क्षेत्र में यात्रियों को बेहतर सुविधा मिले इसलिए बस ऑपरेटर्स से प्रशासन का नियमित संवाद हो। विभिन्न तरह की भ्रांतियां को समाप्त किया जाए। जो पूर्व से संचालित फिट बसें हैं, उनका संचालन किया जा रहा है। अनेक आधुनिक तकनीक भी अपनाई गई हैं, जिसमें यात्री एप के माध्यम से यात्रा के संबंध में बेहतर प्लान कर यात्रा कर सकता है। परिवहन सचिव  मनीष सिंह ने प्रजेंटेशन में बताया कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तीन प्रमुख स्तंभ हैं- बस संचालन, इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम और इंफ्रास्ट्रक्चर। वर्तमान में प्रारंभ की गई बसों की संख्या निरंतर बढ़ाई जाएगी। यात्रियों को लाभान्वित करने के साथ निजी ऑपरेटर को उसके कार्य और व्यवसाय का जायज लाभ हो, इसका ध्यान रखा गया है। राज्य परिवहन उपक्रम के लिए भोपाल में कार्यालय की व्यवस्था की गई है। आने वाले तीन माह में भोपाल, इंदौर, उज्जैन और सागर में क्षेत्रीय सहायक कंपनियों के लिए शत-प्रतिशत कार्यालय भवन उपलब्ध होंगे। इसके साथ ही जबलपुर, रीवा और ग्वालियर में भी क्षेत्रीय सहायक कंपनियों के लिए कार्यालय भवन की व्यवस्था की जा रही है। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के लिए आवश्यक कुल 1190 में से 400 पदों के लिए नियुक्ति की कार्रवाई भी पूर्ण की जाएगी। विशेषज्ञ पद भी भरे जाएंगे। प्रदेश में गत 10 माह में यात्री संख्या और रूट सर्वे के माध्यम से जो आकलन किया गया और आवश्यक बसों की संख्या का अनुमान लगाया गया उसके अनुसार प्रदेश में सात क्षेत्र में 3636 मार्गो पर 13006 बसों की व्यवस्था की जाना है। चरणबद्ध विस्तार भी किया जाएगा। वर्ष 2031 तक प्रदेश में 14981 बसों के संचालन में सफलता मिलेगी। राज्य स्तरीय आईटीएमएस प्लेटफार्म एक विशेष सुविधा है। चलो मोबिलिटी के अंतर्गत आईटीएमएस का अंतरिम रूप से प्रयोग करते हुए आवश्यक माड्यूल निर्धारित किए गए हैं। परिवहन सचिव  मनीष सिंह ने सुगम बस संचालन के लिए अधोसंरचना विकास के लिए महत्वपूर्ण बिंदुओं की भी जानकारी दी।  

सेवा की कहानी: नन्हे कदमों को मिला बेहतर माहौल, पंडरीपानी खास में नया आंगनबाड़ी भवन बना पोषण और सीखने का केंद्र

रायपुर कभी किराए के सीमित भवन में संचालित होने वाला आंगनबाड़ी केंद्र अब बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा के लिए सुविधायुक्त केंद्र बन गया है। सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत पंडरीपानी (खास) में नवीन आंगनबाड़ी भवन बनने से 36 बच्चों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण में सीखने और पोषण संबंधी गतिविधियों से जुड़ने का अवसर मिल रहा है। नया भवन माताओं और किशोरी बालिकाओं के लिए भी स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाओं का महत्वपूर्ण केंद्र बन रहा है। सेवा संकल्प अभियान के तहत ग्राम स्तर पर बच्चों और महिलाओं के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने की दिशा में तैयार इस भवन में शिक्षण कक्ष, रसोई, भंडारण कक्ष, शौचालय और खुला परिसर जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इससे आंगनबाड़ी की विभिन्न गतिविधियों को नियमित और व्यवस्थित रूप से संचालित करने में सहूलियत हुई है। किराए के सीमित भवन से मिली मुक्ति, बच्चों को मिला अपना आंगनबाड़ी केंद्र पंडरीपानी (खास) में आंगनबाड़ी केंद्र वर्षों से किराए के भवन में संचालित हो रहा था। पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण बच्चों की पोषण, प्रारंभिक शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों के संचालन में परेशानी होती थी। बच्चों के लिए बेहतर वातावरण की आवश्यकता को देखते हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 में नवीन आंगनबाड़ी भवन स्वीकृत किया गया। नया भवन बनने के बाद केंद्र की गतिविधियों के लिए स्थायी स्थान उपलब्ध हुआ है। बच्चों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण मिलने के साथ पोषण एवं स्वास्थ्य गतिविधियों को भी बेहतर ढंग से संचालित किया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार भवन बनने के बाद बच्चों की उपस्थिति अधिक नियमित हुई है और समुदाय की भागीदारी में भी वृद्धि हुई है। 36 बच्चों के साथ माताओं और किशोरी बालिकाओं को भी मिल रही सुविधा नवीन आंगनबाड़ी भवन का लाभ केंद्र से जुड़े 36 बच्चों के साथ 2 शिशुवती माताओं और 10 किशोरी बालिकाओं को भी मिल रहा है। यहां टीकाकरण, माताओं की बैठक और पोषण सप्ताह जैसी गतिविधियों के आयोजन के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध हुआ है। इस तरह नया आंगनबाड़ी भवन बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा तक सीमित न रहकर पोषण, स्वास्थ्य और सामुदायिक गतिविधियों के संचालन का भी महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है। माताओं और किशोरी बालिकाओं को भी आवश्यक सेवाओं और गतिविधियों से जुड़ने के लिए बेहतर स्थान मिला है। अभिसरण से 11.69 लाख रुपये में बना भवन, 459 मानव दिवस का सृजन नवीन आंगनबाड़ी भवन के निर्माण के लिए कुल 11.69 लाख रुपये स्वीकृत किए गए। इसमें महिला एवं बाल विकास विभाग (आईसीडीएस) से 3.69 लाख रुपये और वीबी जी राम जी से 8 लाख रुपये का अभिसरण किया गया। निर्माण कार्य के दौरान 459 मानव दिवस का सृजन भी हुआ। इस प्रकार बच्चों के लिए स्थायी परिसंपत्ति तैयार होने के साथ स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों को रोजगार का अवसर भी मिला। ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित करने के बाद ग्राम पंचायत पंडरीपानी के माध्यम से कार्य का क्रियान्वयन किया गया। निर्माण के दौरान तकनीकी मार्गदर्शन, नियमित पर्यवेक्षण और गुणवत्ता नियंत्रण के साथ समुदाय की भागीदारी भी सुनिश्चित की गई। “अब सभी गतिविधियां सुचारू रूप से हो रही हैं” आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती सुलेखा बताती हैं कि नया भवन मिलने के बाद केंद्र में संचालित होने वाली गतिविधियां अब सुचारू रूप से हो रही हैं। माताओं, किशोरी बालिकाओं और छोटे बच्चों को आवश्यक सुविधाएं एक ही छत के नीचे सुरक्षित वातावरण में उपलब्ध हो रही हैं। सेवा संकल्प अभियान के तहत पंडरीपानी (खास) का यह नवीन आंगनबाड़ी भवन बताता है कि विभागीय अभिसरण से तैयार बुनियादी अधोसंरचना किस तरह बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा की सेवाओं को बेहतर बनाने के साथ माताओं और किशोरी बालिकाओं के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती है।