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सुशांत गोल्फ सिटी में 846 बड़े भूखंडों पर संकट, बैनामे रद्द कराने की तैयारी

लखनऊ यूपी की राजधानी लखनऊ में सुशांत गोल्फ सिटी में कंसोर्टियम की 1000 करोड़ की जमीन खरीदने वाले 846 प्रभावशाली लोगों की रजिस्ट्री अब निरस्त होगी। कंसोर्टियम के नियमों का उल्लंघन कर करीब 19-19 हजार वर्ग फुट के बड़े भूखंड खरीदने वालों के आवंटन और बैनामे निरस्त कराने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। खास बात यह है कि इन खरीदारों को एलडीए की ओर से किसी तरह का मुआवजा भी नहीं दिया जाएगा। प्रमुख सचिव आवास पी गुरुप्रसाद ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। अवैध बैनामों को ‘विधि शून्य’ घोषित कराने के लिए सक्षम न्यायालय में कानूनी चुनौती देने को भी कहा है। इन प्रभावशाली लोगों में आईएएस अधिकारियों, कारोबारियों, पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों, राजनेताओं और जनप्रतिनिधियों के शामिल हैं। 149.459 हेक्टेयर जमीन की बिक्री जांच के घेरे में: कंसोर्टियम की कुल 163.18 हेक्टेयर जमीन में से करीब 149.459 हेक्टेयर जमीन की बिक्री को लेकर सवाल उठे हैं। एलडीए को योजना का हैंडओवर मिलने के बाद इस जमीन की बिक्री और इससे जुड़े बैनामों की जांच कराई जाएगी। कंसोर्टियम से बेचे गए 846 भूखंडों का औसत आकार करीब 19 हजार आठ वर्ग फुट है। इतने बड़े भूखंडों का इस्तेमाल फार्महाउस या निवेश के लिए किए जाने की बात सामने आई है। एलडीए सक्षम न्यायालय में उचित प्रक्रिया के तहत बैनामों को चुनौती देकर निरस्त कराने की कार्रवाई करेगा। शासन ने ट्रांजेक्शन एडवाइजर रखने का दिया आदेश: एलडीए अब आईआरपी अथवा एनसीएलटी के माध्यम से परियोजना की देनदारियों और संपत्तियों को हासिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा। इसके लिए पेशेवर ट्रांजेक्शन एडवाइजर की मदद से संपत्तियों और देनदारियों का अध्ययन कराया जाएगा। इसके बाद परियोजना के टेकओवर की कार्ययोजना तैयार होगी। 12 गांवों के विवादित भूखंड हैं शामिल 846 भूखंड लखनऊ के 12 गांवों में हैं। यह सभी सुशांत गोल्फ सिटी टाउनशिप के भीतर हैं। इनमें बरौना में 243, पहाड़नगर टिकरिया में 156, सोनेई कजेहरा में 131, हसनपुर खेवली में 66, दाउदनगर में 64, निजामपुर मजिगांव में 59, माढर मऊ कला में 51, अहमामऊ में 24, मुजफ्फरनगर घुसवल में 22, यूसुफनगर बगियामऊ में 17, हरिहरपुर में आठ और देवामऊ में पांच भूखंड शामिल हैं। आईएएस, कारोबारी और नेताओं की खरीद फंसी इन 846 बड़े भूखंडों को खरीदने वालों में आईएएस अधिकारियों, कारोबारियों, पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों, राजनेताओं और जनप्रतिनिधियों के शामिल होने की बात सामने आई है। यही वजह है कि शासन ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रमुख सचिव आवास ने एलडीए को आईआरपी व एनसीएलटी के समक्ष मजबूती से पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं। मामला कंसोर्टियम एग्रीमेंट के उल्लंघन और डबल सेलिंग से जुड़ा है। हाईटेक टाउनशिप नीति के तहत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के भूमिधरों की जमीन को कंसोर्टियम व्यवस्था में शामिल किया गया था। व्यवस्था के अनुसार भूमिधर कंसोर्टियम के सदस्य रहते और परियोजना से मिलने वाले लाभ में हिस्सेदार होते। आरोप है कि अंसल बिल्डर की ओर से कंसोर्टियम सदस्यों को जमीन का भुगतान किए जाने के बाद भी कुछ सदस्यों ने उसी जमीन के हिस्से दूसरे लोगों को बेच दिए।

राजस्थान सरकार का नया बैंकिंग पैकेज, कर्मचारियों-पेंशनर्स को ₹3.50 करोड़ तक दुर्घटना बीमा

जयपुर राजस्थान सरकार ने राजकीय कार्मिकों, 70 वर्ष तक की आयु के पात्र पेंशनर्स तथा राज्य स्वायत्तशासी निकायों एवं सार्वजनिक उपक्रमों के कर्मचारियों के लिए कम्पोजिट सैलरी अकाउंट पैकेज (सीएसएपी) लागू किया है। इस पैकेज के माध्यम से लाभार्थियों को एकीकृत एवं सुगम बैंकिंग सेवाओं के साथ वित्तीय एवं बीमा सुरक्षा उपलब्ध होगी। इस पैकेज के माध्यम से लाभार्थियों को एकीकृत एवं सुगम बैंकिंग सेवाओं के साथ वित्तीय एवं बीमा सुरक्षा उपलब्ध होगी। सीएसएपी के लिए 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को सूचीबद्ध किया गया है। राजस्थान सरकार का महत्वपूर्ण कदम पात्र कार्मिक एवं पेंशनर्स अपनी सुविधा और पसंद के अनुरूप एम्पैनल्ड बैंकों में से किसी एक का चयन कर सकते हैं। इसके लिए वे अपने मौजूदा बैंक खाते को सीएसएपी खाते में परिवर्तित करा सकते हैं अथवा नया खाता खुलवाकर पैकेज का लाभ ले सकते हैं। राजस्थान सरकार की यह पहल कार्मिकों एवं पात्र पेंशनर्स के वित्तीय कल्याण, सामाजिक सुरक्षा तथा सुविधाजनक बैंकिंग सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। जीरो बैलेंस खाते से लेकर रियायती ऋण तक की सुविधाएं वित्त विभाग के संयुक्त शासन सचिव हरीश लड्ढा ने कहा कि सीएसएपी के तहत उन्नत बैंकिंग सुविधाओं से युक्त जीरो बैलेंस सैलरी अकाउंट उपलब्ध होगा। एनईएफटी, आरटीजीएस, आईएमपीएस एवं यूपीआई के माध्यम से धन हस्तांतरण की सुविधा निःशुल्क रहेगी। इसके अतिरिक्त आवास, शिक्षा, वाहन एवं व्यक्तिगत आवश्यकताओं के लिए ऋण पर रियायती ब्याज दर, ऋण प्रसंस्करण शुल्क में छूट तथा लॉकर किराए में रियायत जैसी सुविधाएँ भी उपलब्ध होंगी। पारिवारिक बैंकिंग सहित अन्य बैंकिंग सुविधाओं का लाभ भी पैकेज के अंतर्गत मिलेगा। दुर्घटना एवं जीवन बीमा के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा वित्त विभाग के संयुक्त शासन सचिव हरीश लड्ढा ने कहा कि पैकेज में लाभार्थियों के लिए व्यापक बीमा सुरक्षा का प्रावधान किया गया है। इसके तहत 3.50 करोड़ रुपए तक का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा, 4.00 करोड़ रुपए तक का एयर दुर्घटना बीमा तथा 20 लाख रुपए तक का टर्म लाइफ इंश्योरेंस उपलब्ध होगा। इसके साथ ही स्वयं एवं परिवार के लिए हेल्थ इंश्योरेंस तथा अतिरिक्त टॉप-अप सुविधा भी प्रदान की जाएगी। उन्होंने बताया कि सीएसएपी के अंतर्गत उन्नत सुविधाओं वाले डेबिट एवं क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराए जाएँगे। लाभार्थियों को एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस, रिवॉर्ड प्रोग्राम एवं कैशबैक जैसी सुविधाओं का लाभ भी मिलेगा। इसके साथ कार्ड से संबंधित बेहतर डिजिटल सेवाएँ और अन्य बैंकिंग सुविधाएं भी पैकेज का हिस्सा होंगी। सूचीबद्ध बैंकों के नाम जानिए हरीश लड्ढा ने बताया कि इस कार्य के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, कैनरा बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र एवं पंजाब एंड सिंध बैंक को सूचीबद्ध किया गया है।

झारखंड के जंगलों में सफारी का रोमांच शुरू, 2028 तक बनेगी टाइगर सफारी

रांची झारखंड के जंगलों में रोमांच और वन्यजीवों के करीब जाने का इंतजार अब खत्म होने वाला है। मौसम और तैयारियों ने इस बार सफारी का रास्ता समय पर साफ कर दिया है। वहीं, जंगल पर्यटन को लेकर वन विभाग की तैयारियां सिर्फ सफारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए भी कई योजनाओं पर काम तेज हो गया है। राज्य के जंगलों में होने वाली सफारी एक अक्टूबर से प्रारंभ हो जाएगी। पिछले साल पीटीआर और दलमा में सफारी अक्टूबर के तीसरे सप्ताह से शुरु की गई थी, लेकिन इस साल मौसम साफ रहने और कच्ची मिट्टी के ट्रैक की समय पर मरम्मत हो जाने की वजह से सही समय पर सफारी प्रारंभ हो रही है। इसके लिए आनलाइन बुकिंग भी हो रही है। मुख्य वन संरक्षक, वन्य प्राणी एसआर नटेश ने बताया कि जंगल सफारी में वन प्रबंधन ने खुले वाहन से सफारी का रोमांचक प्रयोग किया है। इस साल भी पर्यटकों को बैटरी आधारित नए वाहन से जंगलों का सौंदर्य देखने को मिलेगा। मानसून ब्रेक के दौरान वन विभाग वन्यजीवों के आंकड़े जुटाता है। अक्टूबर के दूसरे सप्ताह कर इसकी जानकारी केंद्रीय वन्यजीव प्रबंधन संस्थान को दी जाएगी। दिसंबर में केंद्र सरकार की तरफ से ये आंंकड़े जारी किए जाते हैं। नए सफारी पर तेजी से चल रहा काम राज्य सरकार ने लातेहार जिले में टाइगर सफारी बनाने की घोषणा की है। इसके लिए वन विभाग की उपलब्ध जमीन को चिह्नित कर लिया गया है। वर्ष 2028 के पहले टाइगर सफारी को प्रारंभ करने की योजना है। नवंबर में केंद्रीय वन्य जीव संस्थान की टीम प्रस्तावित स्थल का दौरा करने आएगी। इसके साथ ही गिरिडीह और दुमका में बनने वाले चिड़ियाघर के लिए भी डीपीआर तैयार की जा रही है।  

तेलीबाग चौराहे पर जाम से मिलेगी राहत, 858 मीटर लंबा फ्लाईओवर मंजूर

लखनऊ यूपी की राजधानी लखनऊ में तेलीबाग चौराहे पर रोजाना जाम झेलने वालों को अब राहत मिलने वाली है। यहां चार लेन वाले 858.06 मीटर लंबा फ्लाईओवर बनने जा रहा है। इस फ्लाईओवर के निर्माण को मंजूरी मिल गई है। इसे 145.99 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाएगा। फ्लाईओवर बन जाने से पांच लाख से अधिक लोगों को जाम से निजात मिलेगी। लखनऊ-रायबरेली मार्ग पर स्थित तेलीबाग चौराहा शहर के व्यस्तम चौराहों में से एक है। यहां पर सुबह और शाम पीक ऑवर में लोगों को भीषण जाम का सामना करना पड़ता है। तीज-त्योहारों में तो चौराहे से वाहनों को निकालने में ट्रैफिक पुलिसकर्मियों के पसीने तक छूट जाते हैं। लोगों को आधा-आधा घंटा तक चौराहे पर ही जाम से जूझना पड़ता है। घंटों जाम में जूझने की वजह से बच्चों को स्कूल और बड़ों को आफिस पहुंचने में देरी होती है। इस समस्या को देखते हुए सरोजनीनगर के विधायक राजेश्वर सिंह ने यहां पर फ्लाईओवर बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा था। शासन के निर्देश पर सेतु निगम ने इसका खाका तैयार कर अनुमोदन के लिए भेजा। व्यय वित्त समिति की हुई बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगा दी गई है। सेतु निगम के अधिकारियों ने बताया कि अब शासन से धनराशि स्वीकृति का इंतजार है। आगरा एवं कानपुर से आने वाले वाहन निर्बाध निकल सकेंगे : तेलीबाग चौराहे पर फ्लाईओवर बन जाने से आगरा और कानपुर एक्सप्रेस-वे की तरफ से आने वाले वाहन बिना बाधा के चौराहे से निकल सकेंगे। रायबरेली रोड, आलमबाग रोड पर स्थित और पीजीआई की कॉलोनियों सहित कैंटोनमेंट, वृंदावन योजना से रोजाना आने-जाने वालों को सुविधा हो जाएगी। दो साल में मिलने लगेगी फ्लाईओवर की सुविधा सेतु निगम के अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा वित्तीय वर्ष में निर्माण के लिए शासन से धनराशि आवंटित होगी। धनराशि मिलते ही निर्माण कार्य के लिए निविदाएं आमंत्रित करने सहित अन्य औपचारिकताएं पूरी करने के बाद निर्माण कार्य शुरू होगा। संभावना है कि डेढ़ से दो साल में लोगों को इस फ्लाईओवर की सुविधा मिलने लगेगी। पीजीआई के मरीजों को भी राहत मिलेगी कानपुर, आगरा के अलावा शहर में आलमबाग, कृष्णा नगर, कैंटोनमेंट आदि क्षेत्रों से पीजीआई जाने वाले मरीजों को राहत मिलेगी। कैंटोनमेंट से रायबरेली रोड और आलबाग व पीजीआई रोड से शहीद पथ तक सीधे निर्बाध रूप से वाहनों का आवागमन सुलभ हो सकेगा। प्रस्ताव में निर्माण के दौरान लखनऊ शहर के पालोहरुखेड़ा, इमलिया बाग समेत आसपास के क्षेत्रों से जुड़े यातायात को भी ध्यान में रखा गया है।

पंचायतों के उप निर्वाचन में 56.62 एवं नगर परिषद सुसनेर में 75.96 प्रतिशत हुआ मतदान

भोपाल नगरीय निकाय एवं त्रिस्तरीय पंचायतों के उप निर्वाचन वर्ष 2026 पूर्वाध के घोषित कार्यक्रम अनुसार 29 सितम्बर, 2026 को मतदान सम्पन्न हुआ। जिला आगर-मालवा की नगर परिषद सुसनेर के अध्यक्ष पद के लिए 75.96 प्रतिशत मतदान हुआ। पंचायत उप निर्वाचन के लिये 56.62 प्रतिशत मतदान हुआ। नगर परिषद सुसनेर के अध्यक्ष पद के लिए मतगणना 3 अक्टूबर को होगी। सरपंच, जनपद पंचायत सदस्य एवं जिला पंचायत सदस्य की विकास खण्ड मुख्यालय पर ई.व्ही.एम. से की जाने वाली मतगणना 3 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से होगी। इसी दिन सरपंच एवं जनपद पंचायत सदस्य के निर्वाचन परिणामों की घोषणा की जायेगी। जिला पंचायत सदस्यों एवं पंच पद के लिए परिणामों की घोषणा 5 अक्टूबर 2026 को प्रात: 10.30 बजे से की जायेगी। पंचायत उप निर्वाचन के तहत जिला पंचायत सदस्य के 7, जनपद पंचायत सदस्य के 28, सरपंच के 110 और 4090 पंच पद के लिये उप निर्वाचन होना था।  

दुर्लभ एवं प्रतिबंधित प्रजाति के वन्य-जीव कछुओं की अंतर्राज्यीय तस्करी

भोपाल  स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स, क्षेत्रीय इकाई इंदौर द्वारा अंतर्राज्यीय स्तर पर जलीय वन्य-जीवों की अवैध तस्करी करने वाले संगठित गिरोह के खिलाफ की गई कार्रवाई में महत्वपूर्ण सफलता हासिल हुई है। जिला एवं सत्र न्यायालय इंदौर द्वारा वन अपराध प्रकरण में शामिल मुख्य आरोपी कमल मेहता की नियमित जमानत याचिका को निरस्त कर दिया गया है। 19 अगस्त, 2026 को स्टेट टाइगर फोर्स इंदौर की टीम ने गोपनीय सूचना के आधार पर तीन इमली चौराहा, इंदौर से आरोपी रोहन और केशव को गिरफ्तार किया था। उनके कब्जे से 30 नग जीवित दुर्लभ एवं प्रतिबंधित प्रजाति के कछुए (विभिन्न प्रजातियों के) जप्त किये गये। पूछताछ के दौरान आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर अंतर्राज्यीय गिरोह का खुलासा हुआ और कनाडिया रोड स्थित 'श्री पेट शॉप' (आरोपी कमल मेहता के परिसर) की तलाशी ली गई। वहाँ से अनुसूची-I एवं II के तहत संरक्षित एक इंडियन स्टार टॉरटॉइस तथा एक रोज रिंग पैराकिट पक्षी बरामद किया गया। प्रकरण में अब तक आरोपी कमल मेहता और उसके अंतर्राज्यीय गिरोह के सदस्यों के कब्जे से कुल 33 नग जीवित दुर्लभ एवं प्रतिबंधित प्रजाति के कछुए जप्त किये जा चुके हैं। इस गिरोह के तार मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र से जुड़े हुए हैं। आरोपी कमल मेहता के विरुद्ध वन्य-जीव संरक्षण अधिनियम के तहत अपराध पंजीबद्ध है। एसटीएफ द्वारा आरोपी को 23 सितंबर, 2026 को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था। एसटीएसएफ की ओर से जिला एवं सत्र न्यायालय इंदौर में सशक्त पक्ष रखते हुए अवगत कराया गया कि आरोपी एक संगठित अंतर्राज्यीय वन्य-जीव तस्करी गिरोह का हिस्सा है। जमानत मिलने पर आरोपी द्वारा साक्ष्यों को प्रभावित करने, विवेचना में बाधा डालने की प्रबल संभावना है। जिला एवं सत्र न्यायालय इंदौर ने प्रकरण में दुर्लभ वन्य-जीवों की अंतर्राज्यीय तस्करी की गंभीरता और आरोपी की प्रथम दृष्ट्या संलिप्तता को देखते हुए 28 सितंबर, 2026 को आरोपी कमल मेहता की जमानत याचिका निरस्त करने का आदेश पारित किया। प्रकरण में विवेचना जारी है।  

युवा, शोधकर्ता और युवा वैज्ञानिक जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों पर करेंगे संवाद

भोपाल जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और सतत विकास के लक्ष्यों को प्रभावी रूप से प्राप्त करने में युवाओं, शोधकर्ताओं एवं युवा वैज्ञानिकों की भूमिका को सशक्त बनाने के उद्देश्य से 30 सितंबर को भोपाल में प्री-सीओपी31 परामर्श संवाद आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम एमपीसीएसटी, विज्ञान भवन, नेहरू नगर, भोपाल में होगा। संवाद का विषय “सही राह पर आगे बढ़ते हुए-जलवायु एवं सतत विकास के बीच समन्वय को सुदृढ़ करना और राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में राज्य की भूमिका को बढ़ाना” है। कार्यक्रम का आयोजन मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, नर्मदा समग्र, मध्यप्रदेश राज्य नीति आयोग, पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन (ईपीसीओ) तथा अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। कार्यक्रम में जलवायु परिवर्तन और सतत विकास से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं, युवा वैज्ञानिकों एवं युवाओं के साथ संवाद होगा। कार्यक्रम में ‘क्लाइमेट शाला’ का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद “जलवायु एवं एसडीजी समन्वय तथा मध्यप्रदेश की प्राथमिकताएं” विषय पर पैनल चर्चा होगी और संवाद सत्र आयोजित किया जाएगा।कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए जाएंगे।  

आजीविका डबरी से लक्ष्मी प्रसाद को मिला दोहरा लाभ, मछली पालन से आमदनी और खेती को सिंचाई का सहारा

रायपुर, खेत में बनी आजीविका डबरी ने सरगुजा जिले के लक्ष्मी प्रसाद के परिवार के लिए आय और सिंचाई, दोनों का रास्ता खोल दिया है। डबरी में संग्रहित पानी में मछली पालन कर परिवार अतिरिक्त आमदनी अर्जित कर रहा है, वहीं इसी पानी का उपयोग साग-सब्जी और गेहूं की खेती की सिंचाई में भी किया जा रहा है। पिछले वर्ष से मछली पालन कर रहे लक्ष्मी प्रसाद ने मछली बिक्री से लगभग एक लाख रुपये की आय अर्जित की है। बतौली विकासखंड निवासी लक्ष्मी प्रसाद बताते हैं कि उनकी माता के नाम से ग्रामीण रोजगार योजना के तहत परिवार की जमीन पर आजीविका डबरी का निर्माण कराया गया है। डबरी बनने के बाद उन्होंने इसे केवल जल संग्रहण तक सीमित नहीं रखा, बल्कि मछली पालन शुरू कर इसे अतिरिक्त आमदनी का माध्यम बनाया। इससे परिवार को खेती के साथ आजीविका का एक और साधन मिला है। मछली पालन से लगभग एक लाख रुपये की आमदनी लक्ष्मी प्रसाद के अनुसार डबरी में मछली उत्पादन का आकलन करीब 20 क्विंटल तक है। मछली की बिक्री से उन्हें लगभग एक लाख रुपये की आमदनी हुई है। वे हर साल डबरी में करीब 8 से 10 किलो मछली बीज डालते हैं और मछलियों की बढ़वार एवं उत्पादन के अनुसार बिक्री करते हैं। लक्ष्मी प्रसाद बताते हैं, “पिछले साल से मछली पालन कर रहा हूं। करीब 20 क्विंटल का आकलन है और मछली बेचकर लगभग एक लाख रुपये की आमदनी हुई है। हर साल 8 से 10 किलो मछली बीज डालते हैं।” साग-सब्जी और गेहूं की खेती को भी मिल रहा पानी आजीविका डबरी ने परिवार के लिए सिंचाई की सुविधा भी बढ़ाई है। डबरी में संग्रहित पानी का उपयोग साग-सब्जी और गेहूं की फसल की सिंचाई के लिए किया जा रहा है। इससे आवश्यकता के समय खेतों तक पानी पहुंचाने में मदद मिल रही है। एक ही जल संरचना का उपयोग मछली पालन और खेती दोनों में होने से परिवार को दोहरा लाभ मिल रहा है। मछली पालन से जहां अतिरिक्त आय का स्रोत तैयार हुआ है, वहीं सिंचाई की सुविधा से खेती को भी सहारा मिला है। जल संरक्षण के साथ आजीविका का बना आधार डबरी में बरसाती पानी के संग्रहण और उसके आजीविका गतिविधियों में उपयोग ने लक्ष्मी प्रसाद के परिवार के लिए नई संभावनाएं तैयार की हैं। उपलब्ध जल संसाधन का बेहतर उपयोग कर परिवार खेती के साथ मछली पालन को भी आगे बढ़ा रहा है। लक्ष्मी प्रसाद ने आजीविका डबरी की सुविधा मिलने पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि डबरी से मछली पालन के जरिए आय मिलने के साथ खेती-बाड़ी के लिए पानी उपलब्ध होने से परिवार को दोहरा लाभ मिल रहा है। सेवा संकल्प अभियान के तहत लक्ष्मी प्रसाद की यह ‘सेवा की कहानी’ बताती है कि जल संरक्षण के लिए तैयार छोटी संरचना को आजीविका से जोड़कर ग्रामीण परिवार खेती के साथ आय के अतिरिक्त साधन भी विकसित कर सकते हैं। आजीविका डबरी उनके परिवार के लिए जल संरक्षण, सिंचाई और मछली पालन—तीनों का उपयोगी आधार बन गई है।

हुनर ने दी आत्मनिर्भरता की राह, ब्यूटी पार्लर से किरण को हर माह 12 से 20 हजार रुपये तक की आय

रायपुर कभी प्रशिक्षण के जरिए सीखा गया ब्यूटीशियन का हुनर आज श्रीमती किरण केरकेट्टा की आत्मनिर्भरता का आधार बन गया है। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत छह माह का प्रशिक्षण लेने के बाद किरण ने छोटे स्तर पर अपना ब्यूटी पार्लर शुरू किया। धीरे-धीरे ग्राहक बढ़े और उनका हुनर नियमित आजीविका में बदल गया। आज वे अपने व्यवसाय से प्रतिमाह लगभग 12 से 20 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर परिवार के खर्च में सहयोग कर रही हैं। इतना ही नहीं, अपने साथ दूसरे लोगों को रोजगार और प्रशिक्षण से जोड़कर उन्हें भी आगे बढ़ने का अवसर दे रही हैं। अम्बिकापुर के पटेलपारा निवासी किरण केरकेट्टा बताती हैं कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के माध्यम से उन्हें छह माह का ब्यूटीशियन प्रशिक्षण मिला। प्रशिक्षण के दौरान सीखे हुनर को उन्होंने स्वरोजगार से जोड़ने का निर्णय लिया और अपना छोटा सा ब्यूटी पार्लर शुरू किया। मेहनत के साथ उनका काम आगे बढ़ा और धीरे-धीरे ग्राहक जुड़ते गए। 12 से 20 हजार रुपये तक की मासिक आय से परिवार को मिला आर्थिक सहारा किरण के अनुसार वर्तमान में ब्यूटी पार्लर से उन्हें प्रतिमाह लगभग 12 से 20 हजार रुपये तक की आमदनी हो जाती है। इस आय से वे परिवार की जरूरतों और घर के खर्च में सहयोग कर पा रही हैं। कौशल प्रशिक्षण से मिला हुनर उनके लिए अब केवल एक कला नहीं, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता का माध्यम बन गया है। किरण अपनी खुशी साझा करते हुए कहती हैं, “पीएम कौशल विकास के माध्यम से मुझे अपने पैरों पर खड़े होने का मौका मिला। छह महीने ब्यूटीशियन का कोर्स करने के बाद मैंने अपना छोटा सा ब्यूटी पार्लर शुरू किया। इससे 12 से 20 हजार रुपये तक इनकम हो जाती है और घर का खर्च भी चल जाता है।” खुद बढ़ीं आगे, अब दूसरों को भी हुनर से जोड़ रहीं किरण किरण की सफलता केवल उनकी अपनी आजीविका तक सीमित नहीं है। अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के साथ उन्होंने कुछ लोगों को रोजगार से भी जोड़ा है। इसके अलावा दो से चार महिलाएं उनके पास ब्यूटीशियन का काम सीख रही हैं। इस तरह उन्हें प्रशिक्षण से मिला हुनर अब दूसरे लोगों के लिए भी सीखने और आगे बढ़ने का माध्यम बन रहा है। किरण का कहना है कि कौशल विकास के माध्यम से उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला और अब उनके काम से दूसरे लोगों को भी लाभ मिल रहा है। उन्होंने इस अवसर के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। कौशल से स्वरोजगार और स्वरोजगार से दूसरों के लिए अवसर सेवा संकल्प अभियान के तहत किरण केरकेट्टा की यह ‘सेवा की कहानी’ कौशल प्रशिक्षण से स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता तक के सफर को सामने लाती है। छह माह के प्रशिक्षण से मिले हुनर को उन्होंने अपनी मेहनत से नियमित आमदनी के साधन में बदला। आज वे स्वयं आर्थिक रूप से सशक्त होने के साथ अन्य महिलाओं को भी हुनर सीखने और आजीविका की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से मल्हनिया जलाशय में बदली मछुआरों की जिंदगी

रायपुर  प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार द्वारा मत्स्य क्षेत्र को आधुनिक तकनीक, अधोसंरचना और बेहतर आजीविका के अवसरों से जोड़ने के उद्देश्य से संचालित प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का प्रभाव अब गांवों तक दिखाई दे रहा है। योजना के अंतर्गत अंतर्देशीय मत्स्यपालन, केज कल्चर और आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि मछुआरों और मछली किसानों की आय तथा रोजगार के अवसरों में वृद्धि हो।  छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के गौरेला विकासखंड स्थित ग्राम देवरगांव का मल्हनिया जलाशय इसका एक उदाहरण बनकर सामने आया है। यहां प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और जिला खनिज न्यास निधि (डीएमएफटी) के सहयोग से जय बूढ़ा देव मल्हनिया आदिवासी मछुआ सहकारी समिति मर्यादित के सदस्यों ने पारंपरिक मत्स्याखेट के साथ आधुनिक पिंजरा मछली पालन यानी केज कल्चर को अपनाया है। इससे समिति के सदस्यों के लिए मछली उत्पादन, आय और रोजगार का नया आधार तैयार हुआ है। 54 केज ने बदली आजीविका की तस्वीर वर्ष 2002 से संचालित जय बूढ़ा देव मल्हनिया आदिवासी मछुआ सहकारी समिति में वर्तमान में 44 मछुआ आदिवासी सदस्य जुड़े हुए हैं। इनमें 26 सदस्य विशेष पिछड़ी जनजाति (पीवीटीजी) बैगा समुदाय से हैं। पहले समिति के सदस्य मुख्य रूप से जलाशय में पारंपरिक मत्स्याखेट कर मछली बेचकर अपनी आजीविका चलाते थे। जलाशय की लीज सहित अन्य खर्चों के बाद समिति की वार्षिक आय लगभग ढाई से तीन लाख रुपये तक सीमित थी। मछुआरों की आजीविका को अधिक स्थायी और आय को बेहतर बनाने के उद्देश्य से मत्स्य पालन विभाग एवं जिला प्रशासन ने आधुनिक पिंजरा मछली पालन को बढ़ावा दिया। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और डीएमएफटी के संयुक्त सहयोग से मल्हनिया जलाशय में कुल 54 केज स्थापित किए गए हैं। केन्द्र की योजना, स्थानीय मेहनत और तकनीक का संगम प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का एक प्रमुख उद्देश्य मत्स्य उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के साथ मछुआरों एवं मछली किसानों की आय में वृद्धि और रोजगार के अवसर पैदा करना है। योजना में जलाशयों में केज कल्चर सहित अंतर्देशीय मत्स्यपालन को आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है।  मल्हनिया जलाशय में योजना का यही उद्देश्य स्थानीय स्तर पर साकार होता दिखाई दे रहा है। केज में उन्नत प्रजातियों की मछलियों का पालन किया जा रहा है। पारंपरिक मत्स्याखेट के अनुभव के साथ आधुनिक तकनीक जुड़ने से समिति के सदस्यों को अधिक उत्पादन और बेहतर बाजार अवसर प्राप्त हो रहे हैं। एक साल में 10 से 15 लाख रुपये की मछली बिक्री केज कल्चर शुरू होने के बाद समिति की आर्थिक गतिविधियों में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। समिति द्वारा एक वर्ष में लगभग 10 से 15 लाख रुपये की मछली का विक्रय किया गया है। वर्तमान में केजों में लगभग 10 से 15 टन मछली उपलब्ध है। इस गतिविधि से समिति की आय के साथ-साथ सदस्यों को नियमित रोजगार का अवसर मिल रहा है। समिति के सदस्यों के अनुसार, केज कल्चर से उन्हें प्रतिमाह लगभग 6 से 7 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है। इससे परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल रही है और आजीविका के लिए केवल पारंपरिक मत्स्याखेट पर निर्भरता कम हुई है। मछुआरों के हुनर को मिली आधुनिक तकनीक की ताकत मल्हनिया जलाशय की कहानी यह दिखाती है कि जब पारंपरिक आजीविका को आधुनिक तकनीक और संस्थागत सहयोग का साथ मिलता है, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नए अवसर पैदा हो सकते हैं। वर्षों से जलाशय से जुड़े मछुआरों ने अपने पारंपरिक अनुभव को केज कल्चर की नई तकनीक के साथ जोड़ा है। इस बदलाव से मछुआरा समिति की आर्थिक गतिविधियां बढ़ी हैं और सदस्यों को वर्षभर रोजगार से जुड़ने का अवसर मिला है। विशेष रूप से बैगा समुदाय के सदस्यों की भागीदारी इस पहल को आजीविका सशक्तिकरण के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बनाती है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विजन से गांवों तक पहुंची आधुनिक मत्स्य तकनीक प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के माध्यम से मत्स्य क्षेत्र में उत्पादन, उत्पादकता, तकनीक, मूल्य श्रृंखला और मछुआरों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण को प्रमुखता दी है। योजना के आधिकारिक उद्देश्यों में मत्स्य क्षेत्र की क्षमता का सतत उपयोग, आधुनिक तकनीक का विस्तार, उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि, रोजगार सृजन तथा मछुआरों और मछली किसानों की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा शामिल है।  इसी व्यापक दृष्टिकोण का स्थानीय उदाहरण मल्हनिया जलाशय में दिखाई देता है, जहां सरकारी योजना के सहयोग से पारंपरिक मत्स्याखेट को आधुनिक केज कल्चर से जोड़ा गया है। इससे मछली उत्पादन के साथ ग्रामीण परिवारों के लिए आय के अतिरिक्त अवसर तैयार हुए हैं। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में योजनाओं का जमीनी क्रियान्वयन केन्द्र सरकार की योजनाओं का वास्तविक लाभ हितग्राहियों तक पहुंचाने में राज्य स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन और स्थानीय प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना को स्थानीय आवश्यकताओं और उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप आगे बढ़ाने के प्रयासों का यह उदाहरण सामने आया है। मल्हनिया जलाशय में 54 केज की स्थापना, मछुआरा सहकारी समिति की भागीदारी और डीएमएफटी के सहयोग का समन्वय यह दर्शाता है कि केन्द्र की योजना, राज्य स्तर का क्रियान्वयन, जिला प्रशासन का सहयोग और हितग्राहियों की मेहनत मिलकर आजीविका के नए अवसर तैयार कर सकते हैं। आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते मछुआरे आज मल्हनिया जलाशय के मछुआरों के लिए केज कल्चर केवल मछली पालन की एक नई तकनीक नहीं, बल्कि अपनी पारंपरिक आजीविका को अधिक व्यवस्थित और आय-सृजनकारी बनाने का माध्यम बन गया है। 44 सदस्यों वाली समिति के लिए 54 केज के माध्यम से विकसित यह गतिविधि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में रोजगार और आय के नए अवसरों को मजबूत कर रही है। मल्हनिया जलाशय में आया यह बदलाव प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की उस व्यापक सोच से जुड़ता है, जिसमें आधुनिक तकनीक, रोजगार और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग के माध्यम से ग्रामीण परिवारों की आर्थिक क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया है। यह सफलता की कहानी बताती है कि सही योजना, तकनीकी सहयोग, स्थानीय प्रशासन की सक्रियता और हितग्राहियों की मेहनत साथ आए तो जलाशय का पानी केवल मछली उत्पादन का साधन नहीं रहता, बल्कि ग्रामीण परिवारों के लिए स्थायी आजीविका और आर्थिक आत्मनिर्भरता का आधार भी बन सकता है।