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मेट्रो और फ्लाइओवर प्रोजेक्ट्स से बढ़ी परेशानी, भोपाल में 15 किलोमीटर तक ट्रैफिक का दबाव

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल इन दिनों बड़े बुनियादी ढांचागत विकास के दौर से गुजर रही है, लेकिन मानसून की आहट के बीच यही विकास आम जनता के लिए जी का जंजाल बन गया है। शहर में करीब 15 किलोमीटर के दायरे में मेट्रो रेल, सड़कों और फ्लाइओवर का काम सक्रिय रूप से चल रहा है। इस भारी निर्माण कार्य के कारण सबसे बड़ी समस्या विभिन्न जिम्मेदार विभागों जैसे मेट्रो कॉर्पोरेशन, नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस के बीच आपसी समन्वय की कमी के रूप में सामने आ रही है। विभागों में आपस में मढ़ा जा रहा दोष बीते मंगलवार को भेल क्षेत्र में लगे भीषण जाम को लेकर मेट्रो अधिकारियों और ट्रैफिक पुलिस के बीच तीखी बहस देखने को मिली। ट्रैफिक पुलिस ने जहां जाम के लिए मेट्रो निर्माण को जिम्मेदार ठहराया, वहीं एमपीएमआरसीएल के अधिकारियों ने इन आरोपों पर हैरानी जताई। मेट्रो अधिकारियों का दावा है कि वे 2 जून को लिखे पत्र और प्रशासन के साथ पूर्व में हुई बैठकों के अनुसार सभी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर का पूरी तरह पालन कर रहे हैं। इन प्रमुख इलाकों में स्थिति सबसे गंभीर वर्तमान में करौंद से मंडी, भदभदा से रंगमहल और रत्नगिरि से जेके रोड जैसे व्यस्त रूटों पर एलिवेटेड मेट्रो का काम चल रहा है। इसके साथ ही अयोध्या बायपास, कोलार और शाहपुरा क्षेत्रों में फ्लाइओवर और सड़कों के चौड़ीकरण का काम एक साथ चलने से पूरा शहर ट्रैफिक के मोर्चे पर ब्लॉक हो गया है। स्थानीय निवासी राजेश के मुताबिक, करौंद से ऑफिस पहुंचने में अब रोजाना 40 मिनट से ज्यादा का समय बर्बाद हो रहा है। भोपाल मेट्रो की रफ्तार बढ़ेगी, जुलाई से दोनों ट्रैक पर संचालन भोपाल मेट्रो को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों के बीच अब यात्रियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। अपनी धीमी रफ्तार और कम फ्रीक्वेंसी के कारण चर्चा में रही भोपाल मेट्रो जल्द ही नए अंदाज में दिखाई देगी। मेट्रो के सुभाष नगर से एम्स तक के प्रायोरिटी कॉरिडोर पर सिग्नलिंग सिस्टम का काम पूरा हो चुका है और जुलाई से इसके पूरी क्षमता के साथ संचालन की तैयारी शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का दावा है कि नए सिस्टम के लागू होने के बाद न केवल मेट्रो की गति बढ़ेगी, बल्कि ट्रेनों के फेरे भी बढ़ जाएंगे और यात्रियों को लंबे इंतजार से राहत मिलेगी। मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के अधिकारियों के अनुसार सुभाष नगर से एम्स तक करीब सात किलोमीटर लंबे ट्रैक पर आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया है। इसके बाद अब कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम को निरीक्षण के लिए आमंत्रित किया गया है। संभावना है कि अगले सप्ताह यह टीम भोपाल पहुंचकर पूरे सिस्टम का परीक्षण करेगी। यदि निरीक्षण के बाद हरी झंडी मिल जाती है तो जुलाई से नए सिस्टम के साथ मेट्रो का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। भोपाल मेट्रो एक सीमित व्यवस्था के तहत संचालित हो रही है। वर्तमान में सिग्नलिंग सिस्टम पूरी तरह लागू नहीं होने के कारण मेट्रो केवल एक ट्रैक पर चल रही है। यही वजह है कि यात्रियों को काफी लंबा इंतजार करना पड़ता है। अभी ट्रेनें दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक सीमित समय के लिए चलाई जा रही हैं और उनकी फ्रीक्वेंसी लगभग 75 मिनट रखी गई है। इससे कई लोग मेट्रो का नियमित उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। अभी सुभाष नगर से एम्स तक डाउन ट्रैक पर ही ट्रेन दोनों दिशाओं में संचालित की जा रही है। यानी जिस ट्रैक से ट्रेन आगे जाती है, उसी ट्रैक से वापस भी लौटती है। अप ट्रैक का उपयोग नहीं हो पाने के कारण मेट्रो की पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं हो रहा है। यही वजह है कि ट्रेनों की संख्या और गति दोनों प्रभावित हो रही हैं। सिग्नलिंग सिस्टम किसी भी मेट्रो नेटवर्क की रीढ़ माना जाता है। यह सिस्टम तय करता है कि ट्रेन किस गति से चलेगी, ट्रेनों के बीच कितना अंतर रहेगा और किसी भी आपात स्थिति में किस प्रकार नियंत्रण किया जाएगा। आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम के बिना एक साथ कई ट्रैक पर सुरक्षित संचालन संभव नहीं होता। भोपाल मेट्रो में अब जो तकनीक लागू की जा रही है, वह दिल्ली मेट्रो जैसी आधुनिक व्यवस्था पर आधारित है। इस तकनीक के लागू होने के बाद सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि मेट्रो दोनों ट्रैक पर एक साथ दौड़ सकेगी। इससे ट्रेनों के बीच का अंतर काफी कम हो जाएगा और यात्रियों को हर थोड़ी देर में मेट्रो उपलब्ध हो सकेगी। अधिकारियों का मानना है कि इससे मेट्रो की लोकप्रियता भी बढ़ेगी और यात्री संख्या में इजाफा होगा।  कई यात्रियों का कहना है कि 75 मिनट का इंतजार सार्वजनिक परिवहन के लिए काफी लंबा समय है। ऐसे में लोग बस, ऑटो या निजी वाहनों को प्राथमिकता देते हैं। लेकिन नए सिस्टम के बाद यह स्थिति बदल सकती है। मेट्रो प्रबंधन की योजना है कि सिग्नलिंग सिस्टम चालू होने के बाद नया टाइम टेबल जारी किया जाए। इसमें सुबह और शाम के व्यस्त समय को ध्यान में रखते हुए ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जाएगी। खासतौर पर कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों, विद्यार्थियों और नियमित यात्रियों को इसका लाभ मिलेगा। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो आने वाले महीनों में भोपाल मेट्रो शहर के प्रमुख सार्वजनिक परिवहन साधनों में शामिल हो सकती है। भोपाल और इंदौर मेट्रो परियोजना के तहत कुल लगभग 30 किलोमीटर लंबे रूट पर काम किया जा रहा है। वर्तमान में केवल सीमित हिस्से में संचालन हो रहा है, लेकिन धीरे-धीरे पूरे नेटवर्क को विकसित किया जा रहा है। ऐसे में सिग्नलिंग सिस्टम का पूरा होना परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यात्रियों को अब CMRS की अंतिम मंजूरी का इंतजार है। निरीक्षण रिपोर्ट सकारात्मक आने के बाद भोपाल मेट्रो न सिर्फ तेज रफ्तार से दौड़ेगी, बल्कि अधिक ट्रेनों और बेहतर समय-सारिणी के साथ शहर की परिवहन व्यवस्था को नई दिशा देने का काम भी करेगी।

छह लेन फ्लाईओवर से ट्रैफिक राहत, रोजाना 1.43 लाख वाहन प्रभावित

चंडीगढ़ ट्रिब्यून चौक पर फ्लाईओवर निर्माण के लिए आगे कदम बढ़े हैं। केंद्र सरकार ने इस प्रोजेक्ट की दिशा में प्रक्रिया तेज कर दी है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने करीब 4.5 किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने के लिए सलाहकार एजेंसी नियुक्त कर दी है। अधिकारियों के अनुसार इस परियोजना पर लगभग 300 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। एजेंसी तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपेगी। प्रस्तावित छह लेन फ्लाईओवर बनने के बाद ट्रिब्यून चौक से जीरकपुर बॉर्डर तक पूरा मार्ग सिग्नल फ्री हो जाएगा, जिससे रोजाना हजारों वाहन चालकों को राहत मिलने की उम्मीद है। दो हिस्सों में बनेगा फ्लाईओवर अधिकारियों के अनुसार सेक्टर-32 स्थित जीएमसीएच चौक से सीधे जीरकपुर बॉर्डर तक एकल फ्लाईओवर बनाना संभव नहीं था, क्योंकि पोल्ट्री फार्म चौक के पास रेलवे ओवरब्रिज पहले से मौजूद है। इसी कारण परियोजना को दो हिस्सों में बांटा गया है। योजना के तहत पहला फ्लाईओवर ट्रिब्यून चौक पर बनाया जाएगा, जबकि दूसरा फ्लाईओवर रेलवे ओवरब्रिज के पास से शुरू होकर जीरकपुर बॉर्डर पर बने फ्लाईओवर से जुड़ेगा। इससे पोल्ट्री फार्म चौक, हल्लोमाजरा लाइट प्वॉइंट और पुराने एयरपोर्ट लाइट प्वाॅइंट पर लगने वाले जाम में कमी आने की संभावना है। प्रतिदिन गुजरते हैं 1.43 लाख वाहन ट्रिब्यून चौक शहर के सबसे व्यस्त ट्रैफिक जंक्शनों में शामिल है। यहां से प्रतिदिन करीब 1.43 लाख वाहन गुजरते हैं, जिनमें 1.35 लाख से अधिक यात्री वाहन शामिल हैं। सुबह और शाम कार्यालय समय के दौरान इस मार्ग पर अक्सर लंबा जाम लग जाता है। प्रशासन का मानना है कि फ्लाईओवर बनने के बाद ट्रैफिक का दबाव कम होगा और लोगों का सफर तेज एवं सुरक्षित बनेगा। हाईकोर्ट ने पेड़ों की कटाई पर लगाई रोक इसी बीच पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने ट्रिब्यून चौक फ्लाईओवर परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी है। अदालत में दायर याचिका में कहा गया कि फ्लाईओवर परियोजना शहर के मास्टर प्लान और हेरिटेज स्वरूप के खिलाफ है। वहीं यूटी प्रशासन ने अदालत में कहा कि मास्टर प्लान-2031 में फ्लाईओवर निर्माण की अनुमति है और पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए 5:1 अनुपात में 2,799 पौधे लगाने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। उल्लेखनीय है कि ट्रिब्यून चौक फ्लाईओवर परियोजना का ठेका हाल ही में सिंगला कंस्ट्रक्शन को 147.98 करोड़ रुपये में दिया गया है। 1.6 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट में रोटरी और अंडरपास भी शामिल होंगे। निर्माण कार्य मई 2026 से शुरू होकर दो वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।  

Tribune Chowk से Zirakpur बॉर्डर तक फ्लाईओवर प्रोजेक्ट मंजूर, जल्द शुरू होगी DPR की तैयारी

चंडीगढ़ चंडीगढ़ के सबसे व्यस्त और जाम प्रभावित मार्गों में शामिल ट्रिब्यून चौक से जीरकपुर बॉर्डर तक लोगों को जल्द ट्रैफिक जाम से राहत मिलने की उम्मीद है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने पोल्ट्री फार्म चौक से जीरकपुर बॉर्डर तक प्रस्तावित फ्लाईओवर प्रोजेक्ट को मिली मंजूरी। अधिकारियों के अनुसार एनएच-05 पर ट्रैफिक को सुगम बनाने के लिए जीएमसीएच-32 चौक से सीधे जीरकपुर बॉर्डर तक एक ही फ्लाईओवर बनाना संभव नहीं था, क्योंकि पोल्ट्री फार्म चौक के पास रेलवे ओवरब्रिज पहले से मौजूद है। इसी वजह से परियोजना को दो हिस्सों में विभाजित किया गया है। ट्रैफिक जाम से राहत मिलने की उम्मीद योजना के तहत पहला फ्लाईओवर ट्रिब्यून चौक पर बनाया जाएगा, जबकि दूसरा रेलवे ओवरब्रिज के पास से शुरू होकर जीरकपुर बॉर्डर पर हाल ही में बने फ्लाईओवर तक जाएगा। इससे पोल्ट्री फार्म चौक, हल्लोमाजरा लाइट प्वाइंट और पुराने एयरपोर्ट लाइट प्वाइंट पर लगने वाले ट्रैफिक जाम से राहत मिलने की उम्मीद है। पूरा मार्ग होगा सिग्नल-फ्री फ्लाईओवर बनने के बाद ट्रिब्यून चौक से जीरकपुर बॉर्डर तक पूरा मार्ग सिग्नल-फ्री हो जाएगा। फिलहाल सुबह और शाम ऑफिस समय में इस रूट पर भारी जाम लगना आम बात है। सलाहकार एजेंसी मौजूदा सड़क ढांचे का अध्ययन कर विभिन्न डिजाइन विकल्पों का मूल्यांकन करेगी और तकनीकी व आर्थिक दृष्टि से सबसे उपयुक्त मॉडल की सिफारिश करेगी। हाईकोर्ट ने पेड़ों की कटाई पर लगाई रोक इधर, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने ट्रिब्यून चौक फ्लाईओवर परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई पर फिलहाल रोक लगा दी है। यह आदेश उस याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें परियोजना को शहर की विरासत और मास्टर प्लान-2031 के विपरीत बताया गया था। याचिकाकर्ता का कहना था कि मास्टर प्लान-2031 के तहत चंडीगढ़ को पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों के अनुकूल शहर के रूप में विकसित किया जाना है। फ्लाईओवर से शहर की दृश्य पहचान और गैर-मोटर चालित परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। हालांकि प्रशासन ने अदालत में दलील दी कि मास्टर प्लान में फ्लाईओवर निर्माण की अनुमति है और केवल सेक्टर-1 से 30 तक का क्षेत्र हेरिटेज जोन में आता है। प्रशासन ने यह भी बताया कि पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए 5:1 अनुपात में 2,799 पेड़ लगाने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। मई 2026 से शुरू होगा निर्माण प्रशासन के अनुसार ट्रिब्यून चौक फ्लाईओवर का ठेका सिंगला कंस्ट्रक्शन को 147.98 करोड़ रुपये में दिया गया है, जो अनुमानित लागत से करीब 31 प्रतिशत कम है। लगभग 1.6 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट में रोटरी और अंडरपास भी शामिल होंगे। निर्माण कार्य मई 2026 में शुरू होकर अगले दो वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में ट्रिब्यून चौक से प्रतिदिन करीब 1.43 लाख वाहन गुजरते हैं, जिनमें अधिकांश यात्री वाहन शामिल हैं। फ्लाईओवर बनने के बाद यहां लगने वाले भारी ट्रैफिक जाम से लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।  

इंदौर में बड़ा गणपति चौराहे पर फ्लाईओवर निर्माण में देरी, सीवर शिफ्टिंग और ट्रैफिक डायवर्टेशन बनीं बड़ी बाधा

इंदौर। इंदौर के व्यस्त बड़ा गणपति चौराहे पर प्रस्तावित फ्लाईओवर का निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हो पाया है। करीब डेढ़ साल पहले इस परियोजना के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन जमीन पर काम शुरू होने में तकनीकी और यातायात से जुड़ी बाधाएं सामने आ रही हैं। लगभग 30 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस फ्लाईओवर के लिए सबसे बड़ी चुनौती सीवर और पानी की लाइनों को शिफ्ट करना है। एक साल से इसकी प्रक्रिया जारी है, लेकिन काम शुरू नहीं हो पा रहा है। फ्लाईओवर निर्माण के लिए चौराहे पर करीब 800 मीटर लंबी ट्रांजिट सीवर लाइन और 500 मीटर पानी की लाइन हटाई जानी है। इसके लिए अलग से टेंडर प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है और लगभग 11 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके लिए आइडीए ने करीब छह माह पहले दो करोड़ रुपये के करीब राशि नगर निगम को हस्तांतरित कर दी है। 15 दिनों में लाइन शिफ्टिंग का काम शुरू होगा संभावना है कि अगले 15 दिनों में लाइन शिफ्टिंग का काम शुरू हो जाएगा। हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि वर्षाकाल से पहले सीवरेज और पानी की लाइनों का काम पूरा किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त टीमें और संसाधन लगाए जाएं, ताकि निर्माण कार्य समय पर पूरा हो सके और सिंहस्थ से पहले फ्लाईओवर तैयार किया जा सके। यातायात परिवर्तन चुनौती चौराहा पर लाइन शिफ्टिंग के साथ ही निर्माण कार्य शुरू करना मुश्किल होगा, क्योंकि इससे यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो सकती है। बड़ा गणपति चौराहा शहर का महत्वपूर्ण ट्रैफिक पाइंट है, जहां से महू नाका, पश्चिमी रिंग रोड से एयरपोर्ट की ओर जाने वाले वाहन गुजरते हैं। इस यातायात को सुचारु बनाए रखने के लिए वैकल्पिक मार्ग तैयार करना भी बड़ी चुनौती है। अधिकारियों का मानना है कि चंदन नगर से कालानी नगर तक बनने वाली सड़क पूरी होने के बाद ट्रैफिक को वहां डायवर्ट किया जा सकता है। गत दिनों हुई बैठक में भी इसका सुझाव दिया गया है कि इस सड़क के तैयार होने के बाद ही फ्लाईओवर निर्माण शुरू किया जाए।

मध्य प्रदेश में चतुर्भुज फ्लाईओवर का आगाज, सागर में बढ़ेगी कनेक्टिविटी और सफर होगा आसान

सागर  एक महानगर की तरह आकार ले रहे सागर शहर में मध्य प्रदेश के पहले चतुर्भुज फ्लाईओवर की उम्मीद को अब पंख लग गए हैं. दरअसल, केंद्र सरकार के भूतल परिवहन मंत्री नितिन गड़करी ने सेतुबंधन योजना के तहत सागर के उपनगर मकरोनिया के यातायात दबाव को कम करने के लिए 155 करोड़ की लागत से फ्लाईओवर का डीपीआर बनाने के लिए टेंडर के लिए स्वीकृति दे दी है. खास बात ये है कि इसके साथ ही मकरोनिया से जबलपुर और कानपुर रोड को जोड़ने के लिए फोरलेन की स्वीकृति भी मिल गयी है. इसके पहले भी मकरोनिया फ्लाईओव्हर के लिए स्वीकृति मिल गयी थी, लेकिन स्थानीय व्यापारियों के विरोध के चलते प्रोजेक्ट रुक गया था. सागर में बनेगा मध्य प्रदेश का पहला चतुर्भुजी फ्लाईओवर आखिरकार सागर शहर के उपनगर मकरोनिया में यातायात दबाव कम करने के लिए केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्रालय ने चार भुजाओं वाले फ्लाईओवर के डीपीआर बनाने के लिए टेंडर की प्रक्रिया को हरी झंडी दे दी है. पिछले करीब तीन सालों से मकरोनिया पर चार दिशाओं में चार भुजाओं वाले फ्लाईओवर के लिए प्रयासरत स्थानीय विधायक प्रदीप लारिया के प्रयासों से ये प्रोजेक्ट स्वीकृति की ओर बढ़ रहा है. जल्द ही इस फ्लाईओवर का डीपीआर बनाने के लिए टेंडर बुलाए जाएंगे. डीपीआर बनने के बाद फ्लाईओवर के लिए अंतिम स्वीकृति मिलेगी. चार भुजाओं वाले फ्लाईओवर में क्या खास है दरअसल, सागर का मकरोनिया चौहारा एक ऐसा चौराहा है, जहां से कानपुर, जबलपुर, नागपुर, झांसी मार्ग जुड़ते हैं. यहीं से छतरपुर, रीवा, जबलपुर, सिवनी, छिंदवाड़ा, झांसी, ललितपुर और सभी मार्ग जुड़ते हैं. इसके साथ ही सागर के उपनगर के रूप में विकसित हो रहे इस इलाके में बड़ी-बड़ी कंपनियों के शोरूम और आउटलेट्स आने के कारण काफी ट्रैफिक का दबाव रहता है. बाहर और स्थानीय यातायात के दबाव के चलते इस चौराहे पर हमेशा जाम की स्थिति रहती है. इसलिए विधायक प्रदीप लारिया द्वारा यहां पर चार भुजाओं वाला एक चतुर्भुजी फ्लाईओवर का प्रस्ताव सेतुबंधन योजना के तहत केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी के समक्ष रखा गया था. चतुर्भुज फ्लाईओवर की खासियत     मकरोनिया चौराहा सागर पर बनेगा फ्लाईओवर     2.2 किमी लंबा होगा फ्लाईओवर     155 करोड़ रुपए आयेगी फ्लाईओवर की लागत     कानपुर, नागपुर, झांसी मार्ग और सागर शहर की कनेक्टिविटी कानपुर-जबलपुर रोड के लिए फोरलेन इसके अलावा मकरोनिया चौराहे से कानपुर रोड और जबलपुर रोड को कनेक्ट करने के लिए फोरलेन के लिए भी लगभग हरी झंडी मिल गयी है. फिलहाल ये मार्ग मकरोनिया से लेकर बहेरिया तक टू-लेन है. जिस पर कानपुर और जबलपुर तरफ से आने वाले भारी वाहनों का दबाव रहता है. दूसरी तरफ नेशनल हाइवे 44 से भी इसी मार्ग के जरिए कनेक्टिविटी है, जो आगे जाकर भोपाल, बीना और दूसरे मार्गों से जुड़ता है. अब ये फोरलेन बन जाने के कारण यातायात की रफ्तार बढ़ेगी. क्या कहना है स्थानीय विधायक का नरयावली विधायक प्रदीप लारिया ने बताया कि "आए दिन मकरोनिया में जाम की स्थिति बनी रहती है. यहां पर फ्लाईओव्हर की आवश्यकता थी. उसके लिए सेतुबंधन योजना के जरिए 2022 में फ्लाईओवर स्वीकृत कराया था, लेकिन व्यापारियों के विरोध के कारण फ्लाईओवर नहीं बन पाया. फिर से इसके लिए प्रयास के बाद फ्लाईओवर की हमें प्रारंभिक स्वीकृति मिली है. अभी डीपीआर के टेंडर के लिए स्वीकृति मिली है. हमें 155 करोड़ के फ्लाईओवर और साथ ही मकरोनिया से बहेरिया तक 15 करोड़ के फोरलेन की सौगात मिली है. कुल मिलाकर 180 करोड़ के डीपीआर की स्वीकृति मिली है. साथ ही छतरपुर तक के पुल पुलिया, सागर कानपुर मार्ग बनने के दौरान छूटे हैं, उनको भी इस डीपीआर में समाहित किया है. बहुत जल्दी डीपीआर के लिए टेंडर होंगे, फिर डीपीआर बनेगी और डीपीआर से बाद अंतिम स्वीकृति मिलेगी. कुल मिलाकर फ्लाईओवर का मार्ग अब खुल गया है और मकरोनिया अब इस फ्लाईओव्हर के कारण तेज गति से विकास करेगा. "

₹2200 करोड़ का मेगा फ्लाईओवर: भारत में बनने जा रहा सबसे लंबा एलिवेटेड रोड, जानें किसकी जिम्मेदारी

नई दिल्ली भारत में यातायात और ट्रैफिक जाम की समस्या से निपटने के लिए फ्लाईओवर निर्माण में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। वर्तमान में देश का सबसे लंबा फ्लाईओवर (Longest Flyover in India) बनने का गौरव केरल के अरूर-थुरावूर एलिवेटेड हाईवे को मिलने वाला है। नेशनल हाईवे 66 (NH 66) पर बन रहा यह अनोखा रास्ता न केवल यात्रा का समय बचाएगा, बल्कि वास्तुकला का भी बेजोड़ नमूना होगा। प्रोजेक्ट की खासियत और लागत नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) द्वारा निर्मित यह एलिवेटेड हाईवे 12.75 किलोमीटर लंबा और छह लेन चौड़ा है। लगभग 2,200 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार हो रहा यह प्रोजेक्ट देश का सबसे लंबा 'सिंगल-पिलर' वाला स्काईवे है। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है और मई 2026 तक इसके पूरी तरह तैयार होने की उम्मीद है। यह फ्लाईओवर दक्षिण भारत के राज्यों के बीच व्यापार और परिवहन के नजरिए से गेम-चेंजर साबित होगा।     तेज सफर: यह तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच तेज और निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।     कम होगा खर्च: बेहतर रास्ता मिलने से ट्रांसपोर्टेशन की लागत में भी कमी आएगी।     रिकॉर्ड निर्माण: प्रोजेक्ट के सभी 360 सपोर्टिंग पिलर और 3,000 गर्डर का काम पूरा हो चुका है। वर्तमान में गर्डर फिटिंग, एग्जिट रैंप और टोल प्लाजा पर काम युद्ध स्तर पर जारी है। 2,500 मजदूरों का 'डे-नाइट' मिशन केरल के रोड इंफ्रास्ट्रक्चर में यह प्रोजेक्ट मील का पत्थर साबित होने वाला है। इसे समय पर पूरा करने के लिए लगभग 2,500 मजदूर और 350 अत्याधुनिक मशीनें चौबीसों घंटे काम कर रही हैं। पूरा होने के बाद यह फ्लाईओवर न केवल नेशनल रिकॉर्ड बनाएगा, बल्कि NH 66 पर यातायात की तस्वीर भी बदल देगा। सफर के लिए देना होगा टोल इस हाई-टेक फ्लाईओवर से गुजरने वाले यात्रियों का कीमती समय तो बचेगा, लेकिन इस सुविधा के लिए उन्हें अपनी जेब भी ढीली करनी होगी। छह-लेन वाले इस एलिवेटेड स्ट्रेच का उपयोग करने वाले मोटर चालकों को अलग से टोल टैक्स चुकाना होगा।  

मध्यप्रदेश के बजट में जबलपुर के लिए 300 करोड़ का फ्लाईओवर, ट्रैफिक जाम पर लगेगी लगाम

 जबलपुर   जबलपुर शहर के गढ़ा क्षेत्र में त्रिपुरी चौक, मेडिकल तिराहा और मेडिकल कॉलेज के सामने रोजाना लगने वाले भीषण जाम से राहत दिलाने के लिए लगभग ढाई से तीन किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर के निर्माण की तैयारी की जा रही है। लोक निर्माण विभाग की ओर से इसका प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। राज्य सरकार के बजट (MP Budget 2026) में स्वीकृति मिलने की स्थिति में यह जबलपुर शहर का सातवां फ्लाईओवर होगा। इस फ्लाईओवर के बन जाने से गढ़ा, त्रिपुरी चौक और मेडिकल क्षेत्र के रहवासियों को रोजाना लगने वाले जाम से बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही ए्बुलेंस, फायर ब्रिगेड सहित अन्य इमरजेंसी सेवाओं को भी जाम में फंसना नहीं पड़ेगा। ऐसा हो सकता है फ्लाईओवर का स्वरूप करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित इस फ्लाईओवर (Flyover Construction) की एक रैंप आईसीएमआर के सामने उतारे जाने की संभावना है, जबकि दूसरा रैंप सूपाताल क्षेत्र में बनाया जा सकती है। इसके अतिरिक्त साइड रैंप संजीवनी नगर और धनवंतरी नगर चौराहा की ओर उतारे जाने की योजना है। इससे मेडिकल मार्ग पर यातायात का दबाव काफी हद तक कम होगा और मरीजों, डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ व मेडिकल छात्रों को सुगम आवागमन मिलेगा। वर्तमान में त्रिपुरी चौक से पंडा की मढिय़ा होते हुए इमरती तालाब और गंगा नगर तिराहा तक प्रतिदिन जाम की स्थिति बनी रहती है। इस मार्ग से गुजरने वाली 40 से अधिक कॉलोनियों के रहवासी लंबे समय से यातायात अव्यवस्था से परेशान हैं। दो फ्लाईओवर चालू, एक निर्माणाधीन शहर में मदनमहल-दमोहनाका और कटंगा फ्लाईओवर पहले ही चालू हो चुके हैं, जबकि सगड़ा फ्लाईओवर निर्माणाधीन है। पेंटीनाका फ्लाईओवर का काम रक्षा विभाग से एनओसी मिलते ही शुरू होना है। बंदरिया तिराहासा ईं मंदिर फ्लाईओवर को पहले ही स्वीकृति मिल चुकी है, वहीं विजयनगर-धनवंतरी नगर फ्लाईओवर को बजट की मंजूरी मिलना बाकी है। इसके अलावा रेलवे पुल नंबर-2 से रद्दी चौकी फ्लाईओवर का प्राकलन तैयार किया जा रहा है और आईएसबीटी से आईटीआई फ्लाईओवर परियोजना पाइपलाइन में है, जिसके लिए केन्द्रीय रिजर्व निधि से फंड मिलना प्रस्तावित है। इन सबके बीच गढ़ा क्षेत्र में प्रस्तावित फ्लाईओवर शहर का सातवां फ्लाईओवर होगा।

तीन दिन में 83 हजार रुपए का जुर्माना वसूला, MP फ्लाईओवर पर रीलबाजों की धूम

जबलपुर कुछ दिन पहले जबलपुर में मध्यप्रदेश के सबसे लंबे फ्लाईओवर का केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने उद्घाटन किया था. उद्घाटन के बाद से ही फ्लाईओवर पर बड़ी संख्या में रील बनाने के लिए लोग पहुंच रहे थे, जिससे यातायात पर असर पड़ रहा था और दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई थी. लेकिन अब ऐसे रीलबाज़ों और पुल पर स्टंट करने वालों के खिलाफ जबलपुर पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए 190 लोगों का चालान काटा है. उद्घाटन के बाद से ही रोमांच और मनोरंजन का केंद्र बन गया है दरअसल, 23 अगस्त को एमपी के इस सबसे लंबे फ्लाईओवर का उद्घाटन किया गया, लेकिन उसके बाद से ही यह फ्लाईओवर लोगों के लिए अब रोमांच और मनोरंजन का केंद्र बनता जा रहा है. सोशल मीडिया पर कई ऐसी रील्स और वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिसमें युवा फ्लाईओवर पर स्टंट, डांस और फोटोशूट करते नजर आ रहे हैं.  190 से ज्यादा लोगों के चालान काटे गए रीलबाजों की इन हरकतों से फ्लाईओवर के उपर ट्रैफिक व्यवस्था बाधित होने लगी और ब्रिज पर भीड़ के चलते कानून-व्यवस्था पर भी असर पड़ने लगा, जिसके बाद पुलिस को सख्ती बरतनी पड़ी. जबलपुर एसपी सूर्यकांत शर्मा के निर्देश पर मदनमहल थाना पुलिस ने फ्लाईओवर पर गश्त बढ़ाई और बीते तीन दिनों में पुल पर नियम तोड़ने वाले 190 से ज्यादा लोगों के चालान काटे गए, जिससे करीब 83 हजार रुपए का जुर्माना वसूला गया. पुलिस का कहना है कि फ्लाईओवर का इस्तेमाल सिर्फ यातायात के लिए किया जाए. रील बनाने, डांस, स्टंट, फोटोशूट करने वालों पर पुलिस की लगातार नजर रहेगी और ऐसे मामलों में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा.