samacharsecretary.com

डेटा लेबलिंग और एआई में बलरामपुर ने रचा इतिहास

रायपुर छत्तीसगढ़ का बलरामपुर-रामानुजगंज जिला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा लेबलिंग के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए प्रदेश का पहला ऐसा जिला बन गया है, जहाँ कॉग्निटिव डेटा एनोटेशन सेंटर की स्थापना की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य जिले के शिक्षित ग्रामीण युवाओं और स्व-सहायता समूह की महिलाओं को एआई आधारित अत्याधुनिक रोजगार और आजीविका के नए अवसर उपलब्ध कराना है। प्रिज्मा एआई के साथ हुआ एमओयू कलेक्ट्रेट कक्ष में जिला प्रशासन बलरामपुर-रामानुजगंज और प्रिज्मा एआई के बीच इस सेंटर की स्थापना के लिए एक गैर-वित्तीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस दौरान जिला पंचायत सीईओ श्री आशुतोष चतुर्वेदी, प्रिज्मा एआई के सीईओ डॉ. श्रीराम अय्यर, सीओओ श्री अमिताभ राय चौधरी, सीटीओ श्री विनीत कुमार झा तथा स्व-सहायता समूह की सदस्य सुश्री सपना व सुश्री अनुजा प्रमुख रूप से उपस्थित रहीं। पायलट चरण की मुख्य विशेषताएं  पायलट चरण के तहत बलरामपुर में 10 सीटों का सेंटर शुरू होगा, जिसमें एक समर्पित प्रशिक्षक और गुणवत्ता पर्यवेक्षक तैनात रहेंगे। चयनित प्रतिभागियों को एआई साक्षरता, डिजिटल कौशल, डेटा लेबलिंग, इमेज एवं ऑब्जेक्ट टैगिंग, वर्गीकरण, सत्यापन और गुणवत्ता समीक्षा का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। अभ्यर्थियों की पहचान, छंटनी और चयन एक संरचित प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। डिजिटल अर्थव्यवस्था से जुड़ेंगी लखपति दीदी  कलेक्टर बलरामपुर-रामानुजगंज श्रीमती चंदन त्रिपाठी ने बताया कि जिले में 12वीं उत्तीर्ण और स्नातक सदस्यों वाले स्व-सहायता समूहों का बड़ा दायरा है जो स्मार्टफोन और कंप्यूटर चलाने में दक्ष हैं। यह केंद्र पारंपरिक आजीविका से जुड़ी दीदियों को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़कर स्थानीय स्तर पर ही सम्मानजनक और नियमित आय दिलाएगा, जिससे लखपति दीदी के लक्ष्य को गति मिलेगी। व्यय और जिम्मेदारियों का विभाजन एमओयू के तहत केंद्र की तकनीक, संचालन, प्रशिक्षण, गुणवत्ता पर्यवेक्षण, प्रतिभागियों के पारिश्रमिक, प्रोत्साहन राशि और इंटरनेट कनेक्टिविटी का पूरा खर्च प्रिज्मा एआई द्वारा वहन किया जाएगा। वहीं, जिला प्रशासन परिसर व बुनियादी ढांचे की पहचान, हितग्राहियों के चयन, एनआरएलएम व कौशल विकास विभागों से समन्वय और सुरक्षा व्यवस्था में सहयोग करेगा। यह अनूठी पहल जनजातीय बहुल क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान में एक मील का पत्थर साबित होगी।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने मंत्रालय स्थित कार्यालय में आगंतुकों से की मुलाकात

रायपुर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने मंत्रालय, नवा रायपुर स्थित कार्यालय में आज विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे नागरिकों एवं आगंतुकों से मुलाकात की। मंत्री  अग्रवाल ने सभी से आत्मीयता से संवाद करते हुए उनकी समस्याओं, अपेक्षाओं और सुझावों को गंभीरता से सुना तथा संबंधित विषयों की जानकारी ली। मुलाकात के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों ने अपने-अपने क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं और आवश्यकताओं से मंत्री  अग्रवाल को अवगत कराया। मंत्री ने प्रत्येक आगंतुक की बात ध्यानपूर्वक सुनी और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि नागरिकों द्वारा प्रस्तुत समस्याओं का नियमानुसार परीक्षण कर उनका यथासंभव शीघ्र समाधान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, जिन मामलों में अन्य विभागों से समन्वय की आवश्यकता है, उनमें संबंधित विभागों से समन्वय कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि सरकार की योजनाओं और नीतियों का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होता है, जब उनका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। इसके लिए जनता से निरंतर संवाद और उनकी समस्याओं को समझना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि और सरकार के बीच जनता का सीधा संवाद लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाता है। उन्होंने कहा कि ’जनता से जुड़े रहना और उनकी बात सुनना ही सुशासन की पहली सीढ़ी है।' नागरिकों की समस्याओं को सुनकर उनके समाधान की दिशा में प्रभावी पहल करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आम नागरिकों की शिकायतों और सुझावों को संवेदनशीलता के साथ लेते हुए नियमानुसार समयबद्ध कार्रवाई की जाए। मंत्रालय में मंत्री से मिलने पहुंचे लोगों ने भी अपनी बात सुने जाने और समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक पहल किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की। इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों से आए नागरिकों ने अपने क्षेत्र के विकास, जनहित से जुड़े विषयों तथा अन्य आवश्यकताओं से संबंधित सुझाव भी साझा किए। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ के विकास में जनभागीदारी की महत्वपूर्ण भूमिका है। जनता के सुझावों और अनुभवों से शासन को जमीनी स्तर की आवश्यकताओं को समझने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि सरकार जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप विकास कार्यों को आगे बढ़ाने और जनहित से जुड़े विषयों पर प्रभावी कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है।

कोसी की बाढ़ ने मचाई तबाही, आलमनगर-चौसा में 6564 हेक्टेयर धान की फसल बर्बाद

मधेपुरा कोसी नदी के मुहाने पर बसे जिले के आलमनगर एवं चौसा प्रखंड में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। दोनों प्रखंडों की 16 पंचायतों के किसानों की खेतों में लगी फसलें पूरी तरह डूब गईं। आलमनगर की नौ पंचायतों में 2745 हेक्टेयर और चौसा प्रखंड की सात पंचायतों में 3819 हेक्टेयर में धान की फसल बर्बाद हुई है। 17 हजार प्रति हेक्टेयर की दर से किए गए आकलन के अनुसार चौसा प्रखंड में छह करोड़ 49 लाख 23 हजार रुपये और आलमनगर प्रखंड में चार करोड़ 66 लाख 65 हजार रुपये का नुकसान है। कृषि विभाग के सर्वे के अनुसार कुल मिलाकर 11 कराेड़ 15 लाख 88 हजार रुपये का नुकसान हुआ है। यह आंकड़ा 33 प्रतिशत से अधिक बर्बाद हुए फसलों की है। जबकि किसानों का कहना है कि क्षति इससे अधिक की है। मुआवजा की प्रक्रिया शुरू, 29 सितंबर तक लिया गया आवेदन कृषि विभाग के अनुसार मुख्यालय को फसल क्षति का आकलन रिपोर्ट भेज दिया गया है। मुआवजा की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। 23 सितंबर से 29 सितंबर तक किसानों से आवेदन लिया गया। 29 सितंबर की शाम पांच बजे तक कुल 21667 किसानों के द्वारा आनलाइन आवेदन किया गया है। इसके बाद तीन-चार स्तरों पर सत्यापन की प्रक्रिया के उपरांत मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। महाजन से कर्ज लेकर खेती की, अब जीविका पर संकट रतवारा गांव के किसान सुमन शर्मा बताते हैं कि धान रोपनी के समय बारिश नहीं होने के कारण मजबूरन पंपसेट सिंचाई कर मजदूरों की मदद से खेती की। जिस कारण लागत भी बढ़ गई। बाढ़ के कारण फसल बर्बाद होने से अब भारी नुकसान उठाना पड़ा है। कृषि ही एकमात्र जीविका का साधन है। गंगापुर पंचायत के कोलवारा टोला निवासी किसान अवधेश कुमार मंडल ने कहा कि हम जैसे छोटे किसान महाजन के कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं। कर्ज लेकर खेती की वह भी बाढ़ में डूब गया। खेतों में लगी धान की फसल बर्बाद हो गई है। सरकार 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान पर ही मुआवजा देती है। पंचायत स्तर पर सर्वे करवाकर मुख्यालय को फसल क्षति का रिपोर्ट भेज दिया गया है। 29 सितंबर तक किसानों से आवेदन लिए गए हैं। 30 सितंबर से आवेदन की सत्यापन की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके बाद संबंधित किसानों के खाते में मुआवजे की राशि अंतरित की जाएगी। – रितेश रंजन, जिला कृषि पदाधिकारी। पंचायतवार आंकड़े क्रमांक     पंचायत                    फसल क्षति (हेक्टेयर में) 1            आलमनगर पूर्वी              130 2            आलमनगर दक्षिणी          165 3            बरगांव                          250 4            बसनवाड़ा                       210 5            गंगापुर                          450 6            इटहरी                            310 7            खापुर                            360 8             रतवारा                           490 9             कुंजौरी                             380 कुल क्षति (आलमनगर)                      2745

अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर 100 वर्ष या अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक होंगे ‘शतायु सम्मान’ से सम्मानित

भोपाल  सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह के मुख्य आतिथ्य में एक अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित होगा। वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, स्वास्थ्य और गरिमापूर्ण जीवन के संकल्प पर आधारित कार्यक्रम आर.सी.वी.पी. नरोन्हा प्रशासन अकादमी, भोपाल के स्वर्ण जयंती सभागार में प्रातः 11 बजे होगा। कार्यक्रम में 500 से अधिक वरिष्ठजन एवं गणमान्य नागरिक शामिल होंगे। अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर प्रदेश के सभी जिलों में वरिष्ठ नागरिकों के लिए विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। 100 वर्ष की उम्र पूरी करने वाले वरिष्ठजनों का होगा विशेष सम्मान प्रदेश के प्रत्येक जिले में 100 वर्ष अथवा उससे अधिक आयु पूरी कर चुके वरिष्ठ नागरिकों को चिन्हित कर ‘शतायु सम्मान’ से सम्मानित किया जाएगा। शतायु वरिष्ठजनों को शॉल और श्रीफल भेंट कर उनके दीर्घ जीवन और समाज को दिए योगदान का अभिनंदन किया जाएगा। वृद्धाश्रमों में निवासरत वरिष्ठजनों तथा अन्य बुजुर्गों से संवाद कर उनकी आवश्यकताओं और समस्याओं की जानकारी भी ली जाएगी। वरिष्ठजनों की सक्रिय सहभागिता और मनोरंजन के लिए कैरम, लूडो, शतरंज, गीत-संगीत सहित विभिन्न इंडोर गतिविधियां और प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। इन आयोजनों का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को सामाजिक रूप से सक्रिय रखने के साथ उनके बीच संवाद और सहभागिता का वातावरण तैयार करना है। स्वास्थ्य जांच से लेकर डिजिटल साक्षरता तक विशेष पहल वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, जिला चिकित्सालयों, सिविल डिस्पेंसरी और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों के समन्वय से विशेष स्वास्थ्य परीक्षण शिविर लगाए जाएंगे। इनमें रक्तचाप, मधुमेह, नेत्र परीक्षण सहित सामान्य स्वास्थ्य जांच की सुविधा उपलब्ध रहेगी। बदलते डिजिटल परिवेश में वरिष्ठ नागरिकों को सक्षम बनाने के लिए मोबाइल फोन, इंटरनेट, डिजिटल सेवाओं और कम्प्यूटर के उपयोग संबंधी प्रशिक्षण एवं जागरूकता शिविर भी आयोजित किए जाएंगे। इससे वरिष्ठजन डिजिटल सेवाओं का अधिक सहजता से उपयोग कर सकेंगे। अधिकारों और सहायता व्यवस्था की भी दी जाएगी जानकारी वरिष्ठ नागरिकों को माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम-2007 एवं मध्यप्रदेश नियम-2009 के अंतर्गत उपलब्ध अधिकारों, सहायता और शिकायत निवारण व्यवस्था की जानकारी दी जाएगी। उनकी समस्याओं और शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए संचालित एल्डरलाइन हेल्प लाइन 14567 के संबंध में भी व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। वर्ष 2026 की अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस की थीम “गरिमा के साथ वृद्धावस्थाः वृद्ध नागरिकों के लिए देखभाल और समर्थन प्रणालियों को मजबूत करने का महत्व” को केंद्र में रखते हुए प्रदेशभर के आयोजनों में वरिष्ठजनों के सम्मान, देखभाल, स्वास्थ्य, अधिकार और सामाजिक सहभागिता पर विशेष जोर रहेगा। जिला स्तरीय कार्यक्रमों में मंत्री, सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया है।  

रांची ने लगाई 74 पायदान की छलांग, Oxford की ग्लोबल सिटी रैंकिंग में 792वें नंबर पर

रांची झारखंड की राजधानी रांची ने ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स के Global Cities Index 2026 में अपनी स्थिति में सुधार किया है. 1000 वैश्विक शहरों की इस रैंकिंग में रांची 74 पायदान ऊपर चढ़कर 866वें स्थान से 792वें स्थान पर पहुंच गई है. 2025 के मुकाबले रांची की रैंकिंग में यह सुधार शहर के बदलते शहरी स्वरूप को लेकर ध्यान खींचता है. ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स का ग्लोबल सिटीज इंडेक्स दुनिया के 1000 प्रमुख शहरों की तुलना करता है. इसमें शहरों का आकलन पांच प्रमुख श्रेणियों के आधार पर किया जाता है. इनमें Economics, Human Capital, Quality of Life, Environment और Governance शामिल हैं. प्रत्येक श्रेणी को 0 से 100 के पैमाने पर स्कोर दिया जाता है और इनका इस्तेमाल शहर का समग्र स्कोर तैयार करने में किया जाता है. 25 अंक का रहा रांची का ओवरऑल स्कोर 2026 के इंडेक्स में रांची का ओवरऑल स्कोर 25.0 रहा और शहर को वैश्विक स्तर पर 792वां स्थान मिला. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार रांची का Economics स्कोर 28.0, Human Capital 32.0, Quality of Life 32.1, Environment 44.0 और Governance 57.4 रहा. न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स ग्लोबल सिटीज इंडेक्स 2026 में रांची 74 पायदान ऊपर चढ़कर 866वें से 792वें स्थान पर पहुंच गई है. बेहतर कनेक्टिविटी, शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रमुख शिक्षा और स्वास्थ्य संस्थानों की मौजूदगी शहर के बदलते शहरी स्वरूप में योगदान दे रही है. इन आंकड़ों से पता चलता है कि रांची के प्रदर्शन में अलग-अलग क्षेत्रों के बीच अंतर है. Governance और Environment के स्कोर अन्य श्रेणियों की तुलना में अधिक रहे, जबकि Economics और Human Capital के स्कोर अपेक्षाकृत कम रहे. केवल समग्र रैंकिंग के आधार पर शहर के सभी क्षेत्रों में समान सुधार का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता. पांच पैमानों पर होता है शहरों का आकलन ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स के अनुसार Economics श्रेणी में शहर की आर्थिक संरचना, आकार और विकास की संभावनाओं को देखा जाता है. Human Capital में प्रतिभा, कौशल और श्रमबल की ताकत को शामिल किया जाता है. Quality of Life में लोगों के कल्याण, रहने योग्य परिस्थितियों और सुविधाओं तक पहुंच का आकलन होता है. इसी तरह Environment श्रेणी में पर्यावरणीय गुणवत्ता और स्थिरता तथा Governance में संस्थागत क्षमता और नागरिक प्रशासन की प्रभावशीलता को शामिल किया जाता है. इन सभी पांच श्रेणियों के आधार पर शहर का समग्र स्कोर और रैंक तैयार की जाती है. झारखंड के अन्य शहर भी रैंकिंग में शामिल 2026 के इंडेक्स में रांची के अलावा झारखंड के जमशेदपुर, धनबाद और बोकारो भी शामिल हैं. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जमशेदपुर 844वें स्थान पर रहा, जबकि पिछले वर्ष वह 833वें स्थान पर था. धनबाद की रैंकिंग 979वें से सुधरकर 965वें स्थान पर पहुंची. वहीं बोकारो 978वें से खिसककर 987वें स्थान पर रहा. रांची की 74 स्थानों की छलांग भारतीय शहरों में दर्ज उल्लेखनीय सुधारों में शामिल है. रिपोर्ट के अनुसार प्रयागराज की रैंकिंग में 70, लखनऊ में 58 और विशाखापत्तनम में 54 स्थान का सुधार दर्ज हुआ है. दुनिया के 1000 शहरों को एक पैमाने पर परखता है इंडेक्स ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स के मुताबिक Global Cities Index का उद्देश्य दुनिया के प्रमुख शहरों की ताकत, कमजोरियों और भविष्य की संभावनाओं की तुलनात्मक तस्वीर पेश करना है. 2026 के संस्करण में दुनिया के 1000 बड़े शहरों को एक समान ढांचे में परखा गया है. संस्था के अनुसार इंडेक्स आर्थिक पूर्वानुमानों और मानकीकृत गुणात्मक आंकड़ों को मिलाकर शहरों की स्थिति का आकलन करता है. 2026 की वैश्विक रैंकिंग में न्यूयॉर्क पहले, लंदन दूसरे और पेरिस तीसरे स्थान पर रहे. ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि एशिया के कई शहर वैश्विक आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और भारतीय शहर आने वाले वर्षों में आर्थिक विस्तार के प्रमुख केंद्रों में शामिल हो सकते हैं.

बस्तर ओलंपिक के लिए पंजीयन 1 अक्टूबर से

रायपुर बस्तर क्षेत्र के युवाओं को मुख्य धारा से जोड़ने, उनकी रचनात्मकता एवं खेल प्रतिभा को निखारने तथा उन्हें अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध कराने बस्तर ओलंपिक के तीसरे संस्करण के लिए पंजीयन 1 अक्टूबर से प्रारंभ होंगे। तीन चरणों में आयोजित होने वाले बस्तर ओलंपिक के विकासखंड स्तरीय आयोजन नवम्बर में होंगे। खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने बस्तर संभाग के आयुक्त और सभी जिलों के कलेक्टरों को बस्तर ओलंपिक के आयोजन का व्यापक प्रचार-प्रसार करते हुए ज्यादा से ज्यादा खिलाड़ियों को इसमें भाग लेने के लिए प्रेरित करने के निर्देश दिए हैं। बस्तर ओलंपिक में जूनियर वर्ग में 14 से 17 वर्ष आयु के बालक-बालिकाएं तथा सीनियर वर्ग में महिला एवं पुरुष प्रतिभागी हिस्सा ले सकेंगे। नक्सल हिंसा में दिव्यांग हुए प्रतिभागियों एवं पुनर्वासित सदस्यों की प्रतिभागिता सीधे संभाग स्तर पर सुनिश्चित की जाएगी। 1 से 30 अक्टूबर तक होगा पंजीयन बस्तर ओलंपिक के तहत आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के लिए 1 अक्टूबर से 30 अक्टूबर तक पंजीयन किए जाएंगे। नवम्बर और दिसम्बर में विकासखंड, जिला और संभाग स्तर पर इनके चरणबद्ध आयोजन होंगे। विकासखंड स्तर की प्रतियोगिताएं 1 नवम्बर से 13 नवम्बर तक, जिला स्तर की प्रतियोगिताएं 16 नवम्बर से 25 नवम्बर तक तथा संभाग स्तर की प्रतियोगिताएं 7 दिसम्बर से 11 दिसम्बर तक प्रस्तावित हैं।  बस्तर ओलंपिक के अंतर्गत एथलेटिक्स में 100 मीटर, 200 मीटर एवं 400 मीटर दौड़, लंबी कूद, ऊंची कूद, शॉटपुट, डिस्कस थ्रो, जैवलिन थ्रो और 4×100 मीटर रिले रेस शामिल हैं। तीरंदाजी (30 मीटर एवं 50 मीटर), बैडमिंटन, फुटबॉल, कराते, कबड्डी, खो-खो और वॉलीबॉल की भी स्पर्धाएं होंगी। हॉकी एवं वेटलिफ्टिंग का आयोजन सीधे जिला स्तर पर किया जाएगा। वहीं सीनियर महिला वर्ग के लिए रस्साकसी को प्रदर्शनात्मक खेल के रूप में शामिल किया गया है।  बस्तर ओलंपिक के पिछले दो संस्करण रहे काफी सफल बस्तर के युवाओं को मुख्य धारा से जोड़ने, उनकी रचनात्मकता एवं खेल प्रतिभा को पहचान कर खिलाड़ी के रूप में तैयार करने वर्ष 2024 में राज्य शासन द्वारा बस्तर ओलंपिक के पहले संस्करण का आयोजन किया गया था। पहले संस्करण में एक लाख 65 हजार खिलाड़ियों ने भागीदारी की थी। वहीं वर्ष 2025 में आयोजित दूसरे संस्करण में 3 लाख 91 हजार खिलाड़ियों ने पंजीयन कराया था। बस्तर के युवाओं को प्रेरित करने पहले संस्करण में विशिष्ट प्रदर्शन करने वाले 13 और दूसरे संस्करण के 18 खिलाड़ियों को यूथ आइकॉन के रूप में चिन्हित किया गया था।

‘लाल टोपी वालों के कारनामे भूली नहीं है यूपी की जनता’, अखिलेश पर अनिल राजभर का तीखा हमला

लखनऊ समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के हरे और लाल रंग को लेकर दिए बयान पर उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने 2012 से 2017 के बीच की सपा सरकार का जिक्र करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता ने उस दौरान ‘लाल रंग के असर’ को खूब देखा और महसूस किया है। अनिल राजभर ने कहा कि लाल टोपी पहनकर समाजवादी पार्टी के लोग गरीबों की जमीन पर कब्जा किया करते थे और मां-बहनों की इज्जत-आबरू पर हाथ डालने की कोशिश करते थे। उन्होंने कहा कि लाल टोपी देखकर व्यापारी अपना शटर बंद कर देते थे। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के लोग रंग बदलने में माहिर हैं। सत्ता में रहते हैं तो लाल टोपी पहनकर जनता का शोषण करते हैं और सरकार से बाहर आते ही उन्हें क्रांति दिखाई देने लगती है। पुरानी पेंशन के मुद्दे पर भी अखिलेश को घेरा पुरानी पेंशन बहाली के मुद्दे पर अनिल राजभर ने अखिलेश यादव से सवाल किया कि पुरानी पेंशन छीनी किसने थी। उन्होंने 28 मार्च 2005 का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव की सरकार थी और इसी सरकार ने ‘नई पेंशन’ को लेकर नोटिफिकेशन जारी किया था। उन्होंने कहा कि जनता इस बात को नहीं भूली है और समाजवादी पार्टी की ‘चाल और चलन’ को अच्छी तरह जानती है। जयंत चौधरी के मुद्दे पर भी अखिलेश पर हमला अखिलेश यादव के जयंत चौधरी पर निशाना साधने को लेकर भी अनिल राजभर ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी डर रही है और पार्टी के मुखिया को नींद नहीं आ रही है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को जो सबका अपमान करने का शौक है, वह उन्हें कहीं का नहीं छोड़ेगा। अनिल राजभर ने चौधरी चरण सिंह और उनके परिवार के सम्मान का जिक्र करते हुए कहा कि देश की राजनीति में चौधरी साहब और उनके परिवार का सम्मान किसी से छिपा नहीं है। उन्होंने कहा कि चौधरी साहब के परिवार का जो अपमान किया गया है, उसका सबक प्रदेश के किसान, गरीब, पिछड़े और दलित समाजवादी पार्टी को सिखाएंगे। पत्रकारों को समाजवाद पढ़ने की सलाह पर भी पलटवार अखिलेश यादव की ओर से पत्रकारों को समाजवाद पढ़ने की सलाह दिए जाने पर भी अनिल राजभर ने निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव कैमरों के सामने असहज हो जाते हैं और किसी की जाति, चैनल या घर के बारे में पूछने लगते हैं। अनिल राजभर ने कहा कि समाजवादी पार्टी के मुखिया को किसी पर भरोसा नहीं है और किसी का अपमान करने में उन्हें एक-एक क्षण की भी देरी नहीं लगती।

मतदाताओं को बड़ी राहत, SIR पूरा होने वाले राज्यों में फॉर्म-6 से हटाई गई अतिरिक्त घोषणा

रांची विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया के आखिरी दिन बुधवार यानी 30 सितंबर 2026 को झारखंड के लाखों मतदाताओं को बड़ी राहत मिली है. निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया पूरी कर चुके राज्यों में ऑनलाइन मतदाता नामांकन फॉर्म-6 से SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा को हटा दिया है. इसके बाद नए मतदाताओं को फॉर्म-6 भरते समय अपने माता-पिता या दादा-दादी के पुराने मतदाता रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी देने की जरूरत नहीं होगी. यह बदलाव उन राज्यों में लागू किया गया है जहां SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. अब नहीं देनी होगी माता-पिता की पुरानी जानकारी SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा में नए आवेदकों से यह जानकारी मांगी जा रही थी कि वे या उनके माता-पिता अथवा दादा-दादी पहले के किसी गहन पुनरीक्षण के दौरान तैयार मतदाता सूची में दर्ज थे या नहीं. यदि परिवार का कोई सदस्य पुरानी मतदाता सूची में दर्ज था, तो उससे जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध कराने का विकल्प था. फॉर्म-6 से यह हिस्सा हटने के बाद सामान्य मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया में ऐसी जानकारी नहीं मांगी जाएगी. गैर-SIR अवधि में सिर्फ वैधानिक फॉर्म-6 निर्वाचन आयोग के अनुसार, SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा केवल पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान लागू रहने वाली आवश्यकता थी. SIR पूरा होने के बाद गैर-SIR अवधि में मतदाता पंजीकरण के लिए निर्वाचन पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित सामान्य फॉर्म-6 का इस्तेमाल किया जाएगा. यानी नए मतदाता अब निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकेंगे. ईसीआईनेट और CEO पोर्टल से भी हटाया गया विकल्प SIR पूरी कर चुके राज्यों में ईसीआईनेट ऐप और पोर्टल के अलावा संबंधित मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पोर्टल से भी अतिरिक्त घोषणा वाला हिस्सा हटा दिया गया है. वहीं जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया अभी जारी है, वहां यह घोषणा ईसीआईनेट पोर्टल पर उपलब्ध रहेगी. इसका मतलब है कि यह बदलाव सभी राज्यों में एक साथ लागू नहीं हुआ है, बल्कि SIR की स्थिति के आधार पर व्यवस्था अलग रखी गई है. 26 सितंबर की बैठक के बाद आया फैसला फॉर्म-6 से अतिरिक्त घोषणा हटाने का फैसला मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी की सदस्यता वाले पूर्ण निर्वाचन आयोग की 26 सितंबर की बैठक के बाद आया. बैठक के बाद आयोग ने स्पष्ट किया था कि फॉर्म-6 के साथ जोड़ी गई घोषणा SIR के लिए थी. गैर-SIR अवधि में नियमों के अनुसार निर्धारित फॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा. फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर उठे थे सवाल फॉर्म-6 में SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा जोड़े जाने का मुद्दा विवाद में रहा था. निर्वाचन आयुक्त विवेक जोशी ने इस बदलाव पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि निर्वाचन पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित वैधानिक फॉर्म में नियमों में संशोधन किए बिना बदलाव नहीं किया जा सकता. निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने भी इस आपत्ति से सहमति जताई थी. संधू ने घोषणा को बताया था अनधिकृत ईसीआईनेट पर ऑनलाइन फॉर्म-6 की प्रक्रिया में SIR से जुड़ी घोषणा जोड़े जाने के बाद संधू ने भी आपत्ति दर्ज कराई थी. उन्होंने इसे अनधिकृत और अवैध बताते हुए हटाने की मांग की थी. हालांकि निर्वाचन आयोग ने अपने सार्वजनिक बयानों में कहा कि फॉर्म-6 में कोई संशोधन नहीं किया गया था, बल्कि SIR के दौरान एक अतिरिक्त आवश्यकता जोड़ी गई थी. आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया था हवाला निर्वाचन आयोग ने यह भी कहा था कि बिहार में SIR से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इस अतिरिक्त घोषणा को बरकरार रखा था. आयोग के मुताबिक, इसलिए इसे SIR की प्रक्रिया से जुड़ी आवश्यकता के रूप में लागू किया गया था. अब SIR पूरी कर चुके राज्यों में इसे हटाने के फैसले से सामान्य मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया और SIR प्रक्रिया के बीच अंतर स्पष्ट किया गया है. चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को लेकर भी चर्चा यह फैसला ऐसे समय आया है जब ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीने की अवधि में कम से कम 14 मौकों पर आयोग के फैसलों और आदेशों पर आपत्तियां दर्ज कराई थीं. रिपोर्ट के अनुसार, दोनों ने कुछ फैसले उनकी जानकारी के बिना लिए जाने की बात भी कही थी. आयोग ने कहा, SIR के आदेश सर्वसम्मत थे हालांकि 26 सितंबर के अपने बयान में निर्वाचन आयोग ने कहा था कि SIR से जुड़े आदेशों को तीनों निर्वाचन आयुक्तों की सर्वसम्मत मंजूरी प्राप्त थी. ऐसे में फॉर्म-6 से SIR की अतिरिक्त घोषणा हटाने का ताजा फैसला आयोग की 26 सितंबर की बैठक के बाद लागू व्यवस्था के रूप में सामने आया है. SIR पूरी कर चुके राज्यों में अब मतदाता नामांकन के लिए सामान्य वैधानिक फॉर्म-6 ही इस्तेमाल किया जाएगा.

स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव की पहल पर भरदा में जलभराव की समस्या का त्वरित समाधान

रायपुर दुर्ग जिले के ग्राम भरदा में विगत 26 सितंबर को अतिवृष्टि और जलभराव से उत्पन्न गंभीर स्थिति का जायजा लेने पहुंचे कैबिनेट मंत्री  गजेंद्र यादव की त्वरित पहल से ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है। राहत शिविर में प्रभावित परिवारों से भेंट के दौरान ग्रामीणों और किसानों द्वारा की गई मांग पर संज्ञान लेते हुए, जिला प्रशासन ने 12.87 लाख रूपए की लागत से पक्की निकासी नाली निर्माण के लिए प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान कर दी है।     आवंटन कुल 12.87 लाख रूपए के इस निर्माण कार्य में 2.56 लाख रूपए मजदूरी मद के लिए और 10.31 लाख रूपए सामग्री मद के लिए आवंटित किए गए हैं। यह कार्य वीबी-जी रामजी (विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन की गारंटी) योजना के तहत कराया जाएगा। यह निकासी नाली पुरुषोत्तम निषाद के घर से केशव ठाकुर के घर तक बनाई जाएगी, जिससे बारिश के दौरान मार्ग पर होने वाले जलजमाव से स्थायी रूप से मुक्ति मिलेगी। स्थानीय स्तर पर रोजगार और सुविधाएं   जिला पंचायत दुर्ग के सीईओ ने जानकारी दी कि इस योजना के तहत विकास कार्यों को स्थानीय मूलभूत आवश्यकताओं से जोड़ा जा रहा है। इसके तहत मांग करने वाले पात्र ग्रामीणों को 15 दिवस के भीतर 300 रूपए प्रतिदिन की निर्धारित मजदूरी दर पर रोजगार भी उपलब्ध कराया जाएगा। नाली निर्माण की त्वरित स्वीकृति और फसल क्षति के तत्काल सर्वेक्षण के निर्देशों पर ग्रामवासियों ने स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेंद्र यादव, कलेक्टर और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय देवेंद्र नगर चौक से लाल चौक तक नशामुक्ति पदयात्रा में हुए शामिल

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर में देवेंद्र नगर चौक से लाल चौक तक आयोजित नशामुक्ति पदयात्रा में शामिल हुए। बड़ी संख्या में स्कूली छात्र-छात्राओं, युवाओं, महिलाओं, जनप्रतिनिधियों और नागरिकों के साथ मुख्यमंत्री  साय ने पदयात्रा कर नशामुक्त और स्वस्थ समाज के निर्माण का संदेश दिया। पदयात्रा के समापन पर मुख्यमंत्री  साय ने लाल चौक स्थित लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि नशामुक्त और स्वस्थ छत्तीसगढ़ ही विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव बनेगा। नशा केवल किसी एक व्यक्ति को प्रभावित नहीं करता, बल्कि उसका दुष्प्रभाव पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है। विशेष रूप से युवाओं को नशे से बचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने प्रदेशवासियों से स्वयं नशे से दूर रहने और अपने आसपास के लोगों को भी नशामुक्त जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करने की अपील की। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि युवा किसी भी प्रदेश की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं। युवा स्वस्थ होंगे, शिक्षित और कुशल होंगे तथा अपनी ऊर्जा सकारात्मक कार्यों में लगाएंगे तो प्रदेश तेजी से आगे बढ़ेगा। राज्य सरकार युवाओं के लिए शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार, स्वरोजगार, खेल और उद्यमिता के अवसरों का विस्तार कर रही है। हमारा प्रयास है कि छत्तीसगढ़ का प्रत्येक युवा अपनी प्रतिभा और क्षमता का उपयोग अपने परिवार, समाज और प्रदेश की प्रगति में करे। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती 25 सितम्बर से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती 2 अक्टूबर तक नशामुक्ति पदयात्रा सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। महात्मा गांधी ने संयम, स्वच्छता और स्वस्थ जीवन का संदेश दिया था। ऐसे में नशामुक्ति का यह अभियान उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का भी सशक्त माध्यम है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने अपने सार्वजनिक जीवन में सेवा को सर्वोपरि रखा है। 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में प्रारंभ हुई उनकी शासन की यात्रा के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर देशभर में सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत विभिन्न जनसेवा गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। अभियान के माध्यम से स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य, सामाजिक जागरूकता और जनसेवा के विभिन्न कार्यों में व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि इसी अभियान के अंतर्गत प्रधानमंत्री  मोदी के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना के साथ प्रदेशभर में ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। साथ ही युवाओं को सेवा और राष्ट्र निर्माण के भाव से जोड़ने के उद्देश्य से विभिन्न कार्यक्रम किए जा रहे हैं। गुजरात के वडनगर से निकले बाइक राइडर्स का रायपुर पहुंचने पर स्वागत किया गया। इस यात्रा में बस्तर के युवा भी उत्साहपूर्वक सहभागी बने। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि बस्तर लंबे समय तक नक्सलवाद की समस्या से प्रभावित रहा, जिसके कारण वहां विकास की गति बाधित हुई। आज क्षेत्र में शांति और विकास के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, संचार तथा रोजगार के अवसरों के विस्तार पर तेजी से कार्य हो रहा है। उन्होंने कहा कि युवाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रदेश में रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर सृजित करने के लिए नई औद्योगिक नीति के माध्यम से निवेश को प्रोत्साहित किया जा रहा है। सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर सहित आधुनिक और उभरते क्षेत्रों में निवेश से प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास के नए द्वार खुलेंगे। हमारा लक्ष्य ऐसी युवा पीढ़ी तैयार करना है, जो नशे से दूर रहकर अपने सामर्थ्य, परिश्रम और नवाचार से विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सहभागी बने। मुख्यमंत्री  साय ने विधायक  पुरंदर मिश्रा द्वारा विगत 27 वर्षों से नशामुक्ति, वृक्षारोपण और स्वच्छता जैसे सामाजिक विषयों को लेकर पदयात्रा आयोजित किए जाने की सराहना की। उन्होंने कहा कि समाज में परिवर्तन केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि जनभागीदारी से आता है। जब कोई अभियान समाज का अभियान बन जाता है, तभी उसके स्थायी और व्यापक परिणाम सामने आते हैं। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि यह प्रसन्नता की बात है कि इन पदयात्राओं से प्रेरित होकर अब तक हजारों लोगों ने नशामुक्ति का संकल्प लिया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नशामुक्ति पदयात्रा सप्ताह भी अनेक लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बनेगा और विशेष रूप से युवाओं को स्वस्थ एवं उद्देश्यपूर्ण जीवन की ओर प्रेरित करेगा। मुख्यमंत्री  साय ने उपस्थित छात्र-छात्राओं और युवाओं से आह्वान किया कि वे नशामुक्ति के संदेश को अपने परिवार, मित्रों और समाज तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि एक स्वस्थ युवा, एक स्वस्थ परिवार और एक जागरूक समाज मिलकर ही स्वस्थ, सशक्त और विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण करेंगे। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद मती लक्ष्मी वर्मा, विधायक  पुरंदर मिश्रा, राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष  संजय वास्तव, राज्य केश शिल्पी कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष  गौरीशंकर वास, फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मती मोना सेन, राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष  अमरजीत छाबड़ा, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष मती ममता साहू सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, छात्र-छात्राएं, युवा, महिलाएं एवं आमजन उपस्थित थे।