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क्या सच में तेल लगाने से बढ़ते हैं बाल? जानें डर्मेटोलॉजिस्ट की राय

भारत में बालों में तेल लगाने की परंपरा सालों पुरानी है. अक्सर कहा जाता है कि नियमित तेल मालिश से बाल तेजी से लंबे और घने होते हैं. लेकिन क्या सच में ऐसा होता है? डर्मेटोलॉजिस्ट्स और इंटरनेशनल रिसर्च के मुताबिक, बालों में तेल लगाने से सीधे तौर पर नए बाल उगने या उनकी ग्रोथ स्पीड बढ़ने का पक्का वैज्ञानिक सबूत अभी तक नहीं मिला है. हालांकि कुछ तेल स्कैल्प को हेल्दी रखने, बालों को टूटने से बचाने और ड्रायनेस कम करने में जरूर मदद कर सकते हैं. यानी तेल बालों को मजबूत दिखा सकता है लेकिन इसे जादुई हेयर ग्रोथ इलाज मानना सही नहीं होगा. तेल बालों को कैसे फायदा पहुंचाता है? हेयर एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ऑयलिंग का सबसे बड़ा फायदा मॉइश्चर और प्रोटेक्शन है. अमेरिका की क्लीवलैंड क्लीनिक के अनुसार, हेयर ऑयलिंग स्कैल्प को हाइड्रेट रखने और बालों को टूटने से बचाने में मदद कर सकती है. हेल्थलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, ऑलिव ऑयल और दूसरे नेचुरल ऑयल बालों को मुलायम और कम फ्रिजी बना सकते हैं, लेकिन इससे बाल तेजी से बढ़ेंगे, इसका मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण अभी नहीं है. डर्मेटोलॉजिस्ट क्या कहते हैं? कई डर्मेटोलॉजिस्ट मानते हैं कि तेल बालों की क्वालिटी बेहतर कर सकता है, लेकिन हेयर ग्रोथ का मुख्य रोल जेनेटिक्स, हार्मोन, डाइट और हेल्थ का होता है. अमेरिकन ब्यूटी मैग्जीन Allure के मुताबिक, कैस्टर ऑयल को लेकर सोशल मीडिया पर कई दावे किए जाते हैं, लेकिन वैज्ञानिक रूप से यह साबित नहीं हुआ कि इससे बाल तेजी से बढ़ते हैं. कैस्टर ऑयल बालों को शाइनी बना सकता है, लेकिन हेयर ग्रोथ बढ़ाने के दावों के पीछे मजबूत रिसर्च नहीं है. कौन-से तेल थोड़ी मदद कर सकते हैं? कुछ रिसर्च में रोजमेरी ऑयल को लेकर पॉजिटिव रिजल्ट जरूर मिले हैं. रोजमेरी ऑयल स्कैल्प में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर कर सकता है और कुछ मामलों में हेयर फॉल कम करने में मदद कर सकता है. हालांकि एक्सपर्ट्स साफ कहते हैं कि किसी भी तेल को “मैजिक हेयर ग्रोथ सॉल्यूशन” नहीं माना जाना चाहिए. सही डाइट, प्रोटीन, आयरन, नींद और स्ट्रेस कंट्रोल भी उतने ही जरूरी हैं. ज्यादा तेल लगाना भी नुकसानदायक डॉक्टर्स का कहना है कि जरूरत से ज्यादा तेल लगाने से स्कैल्प में गंदगी, डैंड्रफ और फंगल इन्फेक्शन की समस्या बढ़ सकती है. कई बार भारी तेल पोर्स ब्लॉक कर देते हैं, जिससे स्कैल्प पर पिंपल्स या खुजली हो सकती है. इसलिए हफ्ते में 1-2 बार हल्की मालिश और सही तरीके से शैंपू करना बेहतर माना जाता है.

RBI ला रहा ‘किल स्विच’, एक क्लिक में बंद होंगे बैंक ट्रांजैक्शन

डिजिटल पेमेंट्स ने लोगों की जिंदगी आसान जरूर बनाई है, लेकिन इसके साथ साइबर ठगी और ऑनलाइन फ्रॉड के मामले भी तेजी से बढ़े हैं. खासकर पिछले कुछ वर्षों में फर्जी पुलिस कॉल, डिजिटल अरेस्ट और बैंकिंग फ्रॉड जैसी घटनाओं ने लाखों लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचाया है. अब भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) एक ऐसे सुरक्षा सिस्टम पर काम कर रहा है जो किसी भी संदिग्ध स्थिति में बैंकिंग ट्रांजैक्शन को तुरंत रोक सकता है. इसे ‘किल स्विच’ नाम दिया गया है. अगर यह सुविधा लागू होती है तो यूजर्स को अपने खाते की सुरक्षा पर पहले से कहीं ज्यादा नियंत्रण मिल सकता है. क्या है आरबीआई का ‘किल स्विच’ सिस्टम? ‘किल स्विच’ एक इमरजेंसी सुरक्षा फीचर होगा, जिसकी मदद से कोई भी ग्राहक अपने बैंक खाते से होने वाले सभी डिजिटल ट्रांजैक्शन को तुरंत रोक सकेगा. यदि किसी व्यक्ति को लगे कि वह साइबर ठगी का शिकार बन सकता है या उसके खाते से अनधिकृत लेनदेन होने का खतरा है, तो वह बैंकिंग ऐप के जरिए एक बटन दबाकर सभी वित्तीय गतिविधियों को अस्थायी रूप से बंद कर सकेगा. इसका उद्देश्य फ्रॉड के दौरान होने वाले नुकसान को शुरुआती चरण में ही रोकना है, ताकि अपराधियों को पैसा ट्रांसफर करने का मौका न मिले. डिजिटल अरेस्ट जैसे फ्रॉड ने बढ़ाई चिंता हाल के वर्षों में डिजिटल अरेस्ट नाम का साइबर अपराध तेजी से सामने आया है. इसमें ठग खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल पर डराते हैं. फर्जी दस्तावेज, नकली गिरफ्तारी वारंट और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर पीड़ितों से बड़ी रकम ट्रांसफर करवाई जाती है. ऐसे मामलों में कई लोग अपनी जीवनभर की बचत गंवा चुके हैं. इसी बढ़ते खतरे को देखते हुए सरकार और आरबीआई नये सुरक्षा उपायों पर विचार कर रहे हैं. सभी डिजिटल पेमेंट्स के लिए आयेगा ऑन-ऑफ फीचर आरबीआई सिर्फ किल स्विच तक सीमित नहीं रहना चाहता. केंद्रीय बैंक सभी प्रमुख डिजिटल पेमेंट माध्यमों के लिए स्विच ऑन-स्विच ऑफ सुविधा लाने की संभावना भी तलाश रहा है. इस व्यवस्था के तहत ग्राहक अपनी जरूरत के अनुसार यूपीआई, इंटरनेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, एटीएम निकासी और अंतरराष्ट्रीय ट्रांजैक्शन जैसी सेवाओं को कभी भी बंद या चालू कर सकेंगे. उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति रोज यूपीआई का उपयोग नहीं करता है, तो वह इसे बंद रख सकता है और जरूरत पड़ने पर कुछ सेकंड में दोबारा सक्रिय कर सकता है. ग्राहकों को मिलेगा ज्यादा नियंत्रण और सुरक्षा वर्तमान में कई बैंक कार्ड ट्रांजैक्शन के लिए ऑन-ऑफ सुविधा देते हैं, जिससे ग्राहक अपने कार्ड को सुरक्षित रख पाते हैं. आरबीआई अब इसी मॉडल को पूरे डिजिटल बैंकिंग इकोसिस्टम तक विस्तार देने पर विचार कर रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल धोखाधड़ी के मामलों में कमी आयेगी, बल्कि ग्राहकों का डिजिटल पेमेंट सिस्टम पर भरोसा भी मजबूत होगा. साथ ही यूजर्स अपनी जरूरत के हिसाब से बैंकिंग सेवाओं का इस्तेमाल कर पाएंगे. डिजिटल पेमेंट्स का भविष्य और नयी सुरक्षा रणनीति भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल पेमेंट बाजारों में शामिल हो चुका है. यूपीआई ट्रांजैक्शन लगातार नये रिकॉर्ड बना रहे हैं. ऐसे में सुरक्षा को मजबूत बनाना समय की जरूरत बन गया है. किल स्विच और ऑन-ऑफ बैंकिंग कंट्रोल जैसी सुविधाएं आने वाले समय में डिजिटल बैंकिंग को ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बना सकती हैं. यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या डिजिटल फ्रॉड की आशंका होने पर यूजर तुरंत अपने खाते को सुरक्षित मोड में डाल सकेगा और आर्थिक नुकसान से बच सकता है.

महाभारत काल में लंबी उम्र का रहस्य, भीष्म-द्रोणाचार्य कैसे रहते थे इतने दीर्घायु?

आज की भागदौड़ वाली जिंदगी में बदलते लाइफस्टाइल के कारण भारतीयों का शरीर धीरे धीरे बीमारियों का घर बनता जा रहा है. जिसके कारण भारतीयों की लाइफ एक्सपेक्टेंसी कुल 60 से 70 साल रह गई है. लेकिन, क्या आपको पता है कि महाभारत काल में लोग आज के मुकाबले ज्यादा लंबी उम्र जीते थे. कहा जाता है कि उस दौर में कई लोग 80-90 साल से भी ज्यादा जिए थे. कुछ मान्यताओं के मुताबिक यह भी बताया गया है कि उस समय दिन और साल की गणना आज के समय से अलग थी, जिससे उस युग का रहस्य और भी बढ़ जाता है. महाभारत ग्रंथ के मुताबिक, भगवान कृष्ण भी 100 साल से ज्यादा जिए थे. उनकी लंबी उम्र का कारण आध्यात्मिक जीवन, अनुशासन, योग और सात्विक आहार था. वहीं, आज के समय में भी पूरी दुनिया में कई ऐसे लोग हैं जो 100 साल से ज्यादा जीते हैं. उनकी लाइफस्टाइल भी इन्हीं चीजों पर निर्भर करती है. इसी काल में कई महान योद्धा हुए, जिनमें खासतौर पर द्रोणाचार्य और भीष्म पितामह अपनी लंबी उम्र के लिए सबसे ज्यादा जाने जाते हैं. कहते हैं कि भीष्म पितामह को तो इच्छामृत्यु का वरदान मिला हुआ था. कहा जाता है कि महाभारत युद्ध में गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी उन्होंने करीब 20 दिन तक प्राण नहीं त्यागे थे और फिर अपनी इच्छा से देह त्याग दिया था. लंबी उम्र जीने के पीछे के सीक्रेट गुरु द्रोणाचार्य गीता के मुताबिक, द्रोणाचार्य की लंबी उम्र का श्रेय उनके योग, व्यायाम, युद्ध-कला और सादगी भरे जीवन को जाता है. द्रोणाचार्य युद्ध-कला के महान आचार्य थे और कौरव-पांडव के गुरु भी थे. उनके बारे में कहा जाता है कि वे अच्छा आहार लेते थे. इसी वजह से उनका शरीर मजबूत रहता था. भीष्म पितामह वहीं भीष्म पितामह, जिनकी उम्र अलग-अलग ग्रंथों में 110 से 120 साल के बीच बताई गई है. उन्होंने अपना पूरा जीवन एक ऋषि की तरह सख्त अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के साथ जीया था. भीष्म पितामह का सादा जीवन भी उनकी सेहत बनाए रखने में बड़ा कारण माना जाता है. उस समय खानपान में प्राकृतिक और शुद्ध चीजों को ज्यादा महत्व दिया जाता था. जो लंबी उम्र के लिए फायदेमंद मानी जाती थीं. इसके अलावा, इनका आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन करना भी इनकी फिटनेस का राज था. कहा जाता है कि दोनों ही योद्धाओं ने कठिन अभ्यास और बढ़िया अनुशासन के कारण इतनी लंबी उम्र पाई थी. वे अपने कर्तव्यों को पूरी लगन से निभाते थे. दोनों एक हर दिन के तय दिनचर्या का पालन करते थे, जिससे उनका शरीर फिट और मन साफ रहता था. क्या खाते थे भीष्म पितामह? महाभारत ग्रंथ के अनुसार, भीष्म पितामह सात्विक आहार लेते थे. उनके खाने में ताजे फल, सब्जियां, साबुत अनाज, मेवे और दूध-घी जैसी चीजें शामिल थीं. कहा जाता है कि भीष्म बहुत नियंत्रित तरीके से भोजन करते थे और कभी भी जरूरत से ज्यादा नहीं खाते थे. यह आदत उन्हें स्वास्थ्य रखने और बीमारियों से बचाने में मदद करती थी. इन्हीं मान्यताओं के अनुसार पता चलता है कि भीष्म पितामह नॉन वेज नहीं खाते थे. ये थीं दिनचर्या माना जाता है कि महाभारत काल में लोग साफ-सुथरे माहौल, अच्छे लाइफस्टाइल और शारीरिक अनुशासन की वजह से लंबी उम्र जीते थे. कहा जाता है कि उस दौर में लोग 100 साल की उम्र में भी उतने ही फिट रहते थे, जितने आज के समय में 70 साल के लोग होते हैं. इसी तरह एक और महान ऋषि थे वेदव्यास, जिन्हें महाभारत का रचयिता माना जाता है. प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, उनकी उम्र करीब 130 साल तक बताई जाती है. वेदव्यास का जन्म सत्यवती और ऋषि पराशर से हुआ था, और उनके जन्म से जुड़ी एक अनोखी और प्रसिद्ध कहानी भी सुनने को मिलती है. पांडवों की क्या थी उम्र? वैसे तो पांडवों की उम्र का कोई पुख्ता सबूत नहीं है. लेकिन, पांडवों के बड़े भाई युधिष्ठिर की 90 से 100 साल तक जिए थे. वहीं, भीम इनसे 1 से 2 साल छोटे थे, अर्जुन 3 से 4 साल छोटे थे और नकुल-सहदेव अर्जुन से 10 से 15 छोटे थे. महाभारत युद्ध के दौरान युधिष्ठिर की उम्र करीब 70 से 75 साल की थी. युद्ध के बाद, पांडवों ने हस्तिनापुर पर 36 साल तक शासन किया था, जिसके बाद उन्होंने अपनी स्वर्ग की यात्रा शुरू की थी. धृतराष्ट्र की क्या उम्र थी? महाभारत ग्रंथ के मुताबिक, धृतराष्ट्र का जन्म नियोग प्रथा से हुआ था, जिसमें ऋषि वेदव्यास ने राजा विचित्रवीर्य की मृत्यु के बाद उन्हें जन्म दिया. वे पांडु और विदुर के बड़े भाई थे. माना जाता है कि महाभारत युद्ध के समय उनकी उम्र करीब 90-100 साल के बीच थी. इससे इस बात अंदाजा लगाया जा सकता है कि उस समय दुर्योधन और उसके भाई-बहन करीब 50-60 साल के थे. युद्ध के बाद धृतराष्ट्र, गांधारी और कुंती के साथ लगभग 15 साल तक हस्तिनापुर में रहे. इसके बाद वे जंगल में चले गए (वनवास ले लिया), जहां 2-3 साल बाद जंगल में लगी आग में उनकी मृत्यु हो गई बताई जाती है. महाभारत काल में एक साल कितने समय का होता था? जानकारी के मुताबिक, महाभारत काल में साल की गणना चंद्र और सूर्य दोनों के आधार पर होती थी, यानी समय को चांद और सूरज दोनों के हिसाब से माना जाता था. चंद्र वर्ष करीब 354 दिनों का होता था, जिसमें 12 महीने होते थे. उस वक्त का हर महीना लगभग 29-30 दिन का माना जाता है. इस साल को सौर वर्ष के साथ संतुलित रखने के लिए बीच-बीच में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता था, जिसे अधिक मास कहा जाता है.

गर्मियों में ग्लोइंग स्किन के लिए चंदन, गुलाब जल और खीरे के आसान उपाय

 गर्मियों में स्किन का खास ख्याल रखना बेहद जरूरी होता है. तेज धूप, पसीना और उमस की वजह से चेहरा डल और बेजान नजर आने लगता है. ऐसे में लोग इससे बचने के लिए महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स या पार्लर का सहारा लेते हैं. लेकिन घर में मौजूद कुछ नेचुरल चीजों की मदद से भी आप गर्मियों में अपनी स्किन को हेल्दी, फ्रेश और ग्लोइंग बनाए रख सकते हैं. आइए जानते हैं गर्मियों में स्किन की देखभाल के लिए कुछ आसान और असरदार घरेलू उपाय. चंदन चंदन को स्किन के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है. इसमें ठंडक पहुंचाने और सूजन कम करने वाले गुण होते हैं जो धूप से झुलसी चेहरे को राहत देने में मदद करते हैं. यह सनबर्न, टैनिंग, हीट रैशेज और एक्स्ट्रा ऑयल की समस्या को कम करने में भी असरदार माना जाता है. गर्मियों में स्किन को हेल्दी और फ्रेश रखने के लिए आप चंदन पाउडर में गुलाब जल मिलाकर चेहरे पर फेस पैक के तौर पर लगा सकते हैं. फिर 15 मिनट बाद चेहरे को ठंडे पानी से धोकर मॉइश्चराइजर लगा लें. गुलाब जल गुलाब जल का इस्तेमाल सदियों से भारतीय स्किनकेयर में किया जाता रहा है. यह चेहरे को ठंडक देने के साथ उसे रिफर्श भी रखता है. गुलाब जल स्किन का PH बैलेंस बनाए रखने, पोर्स टाइट करने और रेडनेस कम करने में मदद करता है. गर्मियों में आप गुलाब जल को फ्रिज में रखकर टोनर के तौर पर चेहरे पर स्प्रे कर सकते हैं. इससे चेहरे पर तुरंत फ्रेशनेस महसूस होती है. खीरा खीरा गर्मियों में त्वचा के लिए सबसे फायदेमंद चीजों में से एक माना जाता है. इसमें भरपूर पानी और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो स्किन को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं. यह चेहरे की सूजन, डार्क सर्कल्स और सनबर्न को कम करने में भी असरदार है. आप खीरे का रस चेहरे पर लगा सकते हैं या फिर एलोवेरा जेल के साथ इसका फेस मास्क बनाकर इस्तेमाल कर सकते हैं. दही दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स और लैक्टिक एसिड चेहरे को एक्सफोलिएट करने में मदद करते हैं. यह चेहरे को ठंडक देने के साथ उसे सॉफ्ट और हाइड्रेटेड बनाए रखने में मदद करता है. दही सन टैन कम करने और स्किन बैरियर को मजबूत बनाने में भी फायदेमंद माना जाता है. गर्मियों में सादे दही को चेहरे और गर्दन पर लगभग 15 मिनट लगाकर रखें, फिर ठंडे पानी से धो लें.

हाई ब्लड प्रेशर बना बड़ा खतरा, AIIMS विशेषज्ञ ने बताया हार्ट अटैक से बचने का आसान फॉर्मूला

नई दिल्ली  भारत का हर पांचवां वयस्क उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) से पीड़ित है। शहरी क्षेत्र के हर तीसरे और ग्रामीण क्षेत्र के हर चौथे व्यक्ति को हाई बीपी है। देश में यह तेजी से बड़े स्वास्थ्य संकट के रूप में उभर रहा है। यही वजह है कि यह तेजी से बढ़ती गैर-संचारी (संक्रामक) बीमारियों में शामिल है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-पांच (एनएफएचएस-पांच) के अनुसार देश में 15 वर्ष से अधिक आयु की लगभग 24 प्रतिशत पुरुष और 21 प्रतिशत महिलाएं उच्च रक्तचाप से प्रभावित हैं। यह भी सामने आया है कि बड़ी संख्या में लोगों को अपने उच्च रक्तचाप की जानकारी तक नहीं होती। दिल्ली जैसे महानगरों में बदलती जीवनशैली, तनाव, अधिक नमक व जंक फूड का सेवन, शारीरिक गतिविधि में कमी और मोटापा इसके प्रमुख कारण हैं। 40 साल से अधिक उम्र के पुरुषों का खतरा अधिक दिल्ली पर आधारित हालिया अध्ययन में बड़ी संख्या में लोगों में प्री-हाइपरटेंशन और उच्च रक्तचाप के मामले सामने आए हैं, विशेष रूप से 40 वर्ष से अधिक आयु के लोगों और पुरुषों में इसका खतरा अधिक पाया गया। एम्स के हृदय रोग विशेषज्ञ  डाॅ. ने बताया कि हर साल लाखों लोगों की जान लेने वाली यह बीमारी अधिकांशत: बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचाती रहती है और ज्यादातर पीड़ित इससे अनजान रहते हैं। डाॅ.  के अनुसार भारत में 30 करोड़ से अधिक वयस्क हाई बीपी से पीड़ित हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में हर चौथा और शहरी क्षेत्रों में हर तीसरा व्यक्ति हाई पीबी से प्रभावित है। हर साल करीब 16 लाख लोगों की जान इसके कारण जाती है। यह टीबी से होने वाली मौत से कई गुना अधिक है। डाॅके अनुसार यदि लोगों का ब्लड प्रेशर औसतन सिर्फ दो अंक भी कम हो जाए, तो हर साल एक लाख से 1.6 लाख तक मौतों को रोका जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति का ब्लड प्रेशर 140 से घटकर 138 हो जाए, तो इसे दो अंक (ब्लड प्रेशर नापने वाली इकाई एमएमएचजी) की कमी माना जाएगा। ऐसा होने पर देश में हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी की बीमारी के मामलों में बड़ी गिरावट आ सकती है। दिल, दिमाग और किडनी पर भारी पड़ रहा हाई ब्लड प्रेशर अध्ययन की प्रमुख शोधकर्ता सामंथा ओ'कोनेल के मुताबिक, सबसे चिंताजनक बात यह है कि लोगों में बीमारी के प्रति जागरूकता, इलाज और नियंत्रण, तीनों ही बेहद कमजोर हैं। यह समस्या केवल गरीब देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि विकसित देशों में भी स्थिति संतोषजनक नहीं है। आज हाइपरटेंशन हार्ट अटैक, स्ट्रोक, किडनी फेलियर और डिमेंशिया (भूलने की बीमारी) का सबसे बड़ा कारण है। लेकिन सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि ज्यादातर मामलों में इसके शुरुआती लक्षण दिखाई नहीं देते। इंसान अंदर ही अंदर बीमार होता रहता है और उसे पता तब चलता है जब पानी सिर से ऊपर गुजर जाता है। यहां तक कि जांच के बाद भी इसे नियंत्रित करना आसान नहीं होता। कई बार डॉक्टर इलाज से जुड़े नवीनतम दिशानिर्देशों का पालन नहीं कर पाते, जबकि मरीज नियमित रूप से दवाएं लेने और लंबे समय तक जीवनशैली में बदलाव बनाए रखने में संघर्ष करते हैं। अध्ययन में एक और चिंताजनक पहलु यह सामने आया है कि 2020 में दुनिया भर में हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित 20 फीसदी से भी कम लोगों का रक्तचाप नियंत्रित था। अमीर देशों में नियंत्रण की दर 40.2 फीसदी रही, जबकि निम्न और मध्यम आय वाले देशों में स्थिति कहीं ज्यादा बदतर है, जहां महज 13.6 फीसदी मरीज ही इसे कंट्रोल कर पा रहे हैं। अध्ययन की वरिष्ठ शोधकर्ता कैथरीन मिल्स का कहना है भले ही इस दिशा में कुछ प्रगति हुई हो, लेकिन वैश्विक स्तर पर रक्तचाप पर अभी भी बेहद कम नियंत्रण है। विडम्बना यह है कि प्रभावी दवाएं और इलाज मौजूद होने के बावजूद दुनिया इस बीमारी को काबू में नहीं कर पा रही। एशिया और अफ्रीका सबसे ज्यादा प्रभावित 119 देशों के 60 लाख से ज्यादा वयस्कों के आंकड़ों पर आधारित यह अध्ययन अब तक के सबसे व्यापक विश्लेषणों में से एक माना जा रहा है। नतीजे दर्शाते हैं कि 2020 तक दक्षिण अमेरिका, कैरिबियन और उप-सहारा अफ्रीका में हाइपरटेंशन की दर सबसे अधिक थी। वहीं कुल मरीजों की संख्या के लिहाज से पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र पहले स्थान पर रहे, जबकि दक्षिण एशिया दूसरे स्थान पर रहा। शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि कमजोर और समृद्ध देशों के बीच असमानता लगातार बढ़ रही है। 2000 में अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर वाले 70 फीसदी लोग निम्न और मध्यम आय वाले देशों में रह रहे थे, जो 2020 तक बढ़कर 83 फीसदी हो गए हैं। उच्च रक्तचाप से जूझ रहे हैं भारत में 30 फीसदी से ज्यादा वयस्क विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा जारी रिपोर्ट 'ग्लोबल रिपोर्ट ऑन हाइपरटेंशन 2025' से पता चला है कि भारत में 21 करोड़ से ज्यादा वयस्क उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं। मतलब की देश की 30 फीसदी से ज्यादा वयस्क आबादी इस समस्या से जूझ रही है। इससे भी बड़ी चिंता की बात यह है कि इनमें से महज 39 फीसदी (8.22 करोड़) ही जानते हैं कि वो इस समस्या से पीड़ित हैं, जबकि करीब 83 फीसदी मरीजों यानी 17.3 करोड़ से ज्यादा का रक्तचाप नियंत्रित नहीं है। मतलब कि देश में हाई ब्लड प्रेशर के 17 फीसदी मरीजों में ही रक्तचाप नियंत्रित है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने इसपर किए अध्ययन में खुलासा किया है कि देश में करीब 34 फीसदी लोग प्री-हाइपरटेंशन का शिकार हैं। वहीं यदि देश में जिलों के आधार पर देखें तो यह आंकड़ा 15.6 फीसदी से 63.4 फीसदी दर्ज किया गया है। सच कहें तो देश में जिस तरह से खानपान की गुणवत्ता में गिरावट आ रही है और जीवनशैली बदल रही है, उसके चलते स्वास्थ्य से जुड़ी अनगिनत समस्याएं पैदा हो रही हैं, ऊपर से तनाव यह सभी मिलकर भारतीयों को अंदर ही अंदर घुन की तरह खाए जा रहे हैं। कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ता आर्थिक बोझ विशेषज्ञों के मुताबिक हाई ब्लड प्रेशर अब महज स्वास्थ्य से जुड़ा संकट नहीं रहा, बल्कि यह आर्थिक चुनौती भी बनता जा रहा है। कमजोर देशों में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को पहले ही संक्रामक रोगों, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य … Read more

पूरी दुनिया में ठप पड़ा ChatGPT, यूजर्स के अटके काम; हिस्ट्री और लॉगिन में आ रही दिक्कत

नई दिल्ली OpenAI का AI चैटबॉट ChatGPT इस समय भारत समेत दुनिया भर में अचानक ठप हो गया। इस प्लेटफॉर्म के अचानक डाउन होने से हजारों यूजर्स प्रभावित हुए हैं। यूजर्स को लॉगिन, जवाब मिलने और पुरानी चैट को लोड करने में परेशानी आ रही, जिससे कई लोगों का काम बीच में ही रुक गया। ऑनलाइन आउटेज मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म Downdetector पर अमेरिका में 4,300 से अधिक यूजर्स ने AI प्लेटफॉर्म के साथ समस्याओं की सूचना दी है। वहीं, भारत में अब तक लगभग 470 शिकायतें दर्ज की गई हैं। लगभग 85%, लोगों ChatGPT का यूज करने में परेशानी हो रही है, जबकि 6 प्रतिशत ने लॉगिन में समस्या बताई है। शेष 6 प्रतिशत ने वेबसाइट के साथ समस्याओं की जानकारी दी है। शुक्रवार सुबह लगभग 8 बजे से ही यूजर्स को चैटजीपीटी का इस्तेमाल करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। दफ्तर का काम कर रहे प्रोफेशनल्स, कोडिंग सीख रहे इंजीनियर्स और परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र जैसे ही अपने सवालों के जवाब के लिए चैटजीपीटी पर गए, उन्हें केवल एक खाली स्क्रीन या फिर एरर मैसेज दिखाई देने लगे। डाउनडिटेक्टर के अनुसार, भारत के बड़े शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद से सबसे ज़्यादा शिकायतें मिलीं। चैटजीपीटी ठप होते ही सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया और लोगों ने अपनी-अपनी दिक्कतों को लेकर शिकायतों की बाढ़ ला दी। OpenAI ने भी माना है कि उनके सिस्टम में गड़बड़ी आई है। कंपनी ने अपने स्टेटस पेज पर इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि कुछ यूजर्स को बातचीत करने या जवाब पाने में दिक्कत हो सकती है। कंपनी ने बताया कि उन्होंने समस्या को कम करने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं और वे इस सुधार पर लगातार नजर रख रहे हैं। यूजर्स को हो रही ये परेशानी चैटजीपीटी डाउन होने पर यूजर्स को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है: जवाब नहीं मिल रहा और ऐप हो रहे क्रेश जब यूजर कोई सवाल टाइप कर रहा है तो चैटजीपीटी कोई जवाब नहीं दे रहा और स्क्रीन पर केवल ब्लिंक हुआ कर्सर या खाली जगह दिखाई दे रही है। एंड्रॉयड और आईफोन (iOS) दोनों के मोबाइल ऐप्स खुलते ही अपने आप बंद हो रहे हैं या हैंग हो जा रहे हैं। पुरानी चैट गायब और लॉगिन में समस्या स्क्रीन की बाईं तरफ (Left Side) जहां पुरानी सारी बातचीत और प्रोजेक्ट्स सेव रहते हैं, वह हिस्सा पूरी तरह खाली या सफेद दिखाई दे रहा है। कई यूजर्स अपने अकाउंट से अपने आप लॉगआउट हो गए हैं और जब वे दोबारा लॉगिन करने की कोशिश कर रहे हैं, तो पेज लोड ही नहीं हो रहा है। वहीं यूजर्स का चैटजीपीटी खुल तो रहा है, लेकिन वह इतना धीमा चल रहा है कि एक छोटा सा जवाब लिखने में भी कई मिनट लगा रहा है। चैटजीपीटी के बंद होने से उन यूजर्स को सबसे ज्यादा परेशानी हुई जिनके रोज के काम इसी पर टिके हैं। चाहे पढ़ाई कर रहे स्टूडेंट्स हों, दफ्तर में काम करने वाले प्रोफेशनल्स या फिर कंटेंट क्रिएटर्स सबके काम पर अचानक ब्रेक लग गया। इससे यह बात बिल्कुल साफ हो गई है कि अब एआई टूल्स की निर्भरता बहुत ज्यादा बढ़ गई है।

ऑफिस में बैठकर काम से बढ़ रहा कमर दर्द, सही पोस्टर और ब्रेक से मिल सकती है राहत

आजकल ऑफिस में लंबे समय तक बैठकर काम करना आम हो गया है, लेकिन इससे कमर दर्द की समस्या भी तेजी से बढ़ रही है. लगातार एक ही पोजिशन में बैठने से पीठ और कमर की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है, जिससे दिन के अंत में दर्द और जकड़न महसूस होती है. कई लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन समय रहते ध्यान न देने पर यह समस्या बढ़ सकती है. सही बैठने का तरीका, बीच-बीच में ब्रेक लेना और हल्की एक्सरसाइज करने से इस दर्द से राहत पाई जा सकती है. कुछ आसान आदतें अपनाकर आप अपनी कमर को स्वस्थ और मजबूत रख सकते हैं. 1. सही पोस्टर रखें ऑफिस में बैठते समय हमेशा अपनी पीठ को सीधा रखें और कुर्सी के बैक सपोर्ट से सटाकर बैठें. कोशिश करें कि आपके कंधे ढीले रहें और झुककर काम न करें. पैरों को जमीन पर सीधा टिकाकर रखें, उन्हें हवा में लटकने न दें. गलत पोस्टर में लंबे समय तक बैठने से कमर की मांसपेशियों पर दबाव बढ़ता है, जिससे दर्द और जकड़न की समस्या हो सकती है. 2. हर 30-40 मिनट में ब्रेक लें लगातार एक ही जगह बैठकर काम करना कमर दर्द का बड़ा कारण है. इसलिए हर 30-40 मिनट में 2-3 मिनट का छोटा ब्रेक जरूर लें. इस दौरान आप खड़े होकर थोड़ा चल सकते हैं या हल्का स्ट्रेच कर सकते हैं. इससे शरीर की मांसपेशियों को आराम मिलता है और ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर होता है.  3. आरामदायक कुर्सी का इस्तेमाल करें ऑफिस में काम करते समय ऐसी कुर्सी का चुनाव करें जिसमें अच्छा बैक सपोर्ट हो. कुर्सी की ऊंचाई ऐसी हो कि आपके पैर आराम से जमीन पर टिक सकें. अगर कुर्सी में लंबर सपोर्ट नहीं है, तो आप कुशन या छोटा तकिया लगाकर अपनी कमर को सपोर्ट दे सकते हैं. सही कुर्सी आपके पोस्टर को सुधारने में मदद करती है.  4. स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करें कमर दर्द से राहत पाने के लिए रोजाना कुछ आसान स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करना बहुत फायदेमंद होता है. आप forward bend, back stretch और body twisting जैसी एक्सरसाइज कर सकते हैं. ये एक्सरसाइज मांसपेशियों की जकड़न को कम करती हैं और शरीर को लचीला बनाती हैं. दिन में 5-10 मिनट भी स्ट्रेचिंग करने से फर्क महसूस होगा. 5. गर्म सिकाई करें अगर दिनभर काम करने के बाद कमर में दर्द या भारीपन महसूस हो, तो गर्म सिकाई बहुत राहत देती है. आप गर्म पानी की बोतल या हीट पैड का इस्तेमाल कर सकते हैं. 10-15 मिनट तक सिकाई करने से मांसपेशियां रिलैक्स होती हैं और दर्द कम होता है. यह एक आसान और असरदार घरेलू उपाय है. 6. सही गद्दे का चुनाव करें रात में सोते समय गद्दे का सही होना भी बहुत जरूरी है. बहुत ज्यादा सॉफ्ट गद्दा आपकी कमर को सही सपोर्ट नहीं देता, जबकि बहुत हार्ड गद्दा भी असहज हो सकता है. मीडियम फर्म गद्दा कमर के लिए सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि यह शरीर को संतुलित सपोर्ट देता है और दर्द से बचाव करता है.  7. पानी और पोषण का ध्यान रखें अक्सर लोग पानी पीने और सही खानपान को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह भी कमर दर्द का एक कारण हो सकता है. शरीर में पानी की कमी से मांसपेशियां जल्दी थक जाती हैं. दिनभर पर्याप्त पानी पिएं और अपनी डाइट में कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन्स शामिल करें, ताकि आपकी मांसपेशियां मजबूत और स्वस्थ बनी रहें.

गर्मी से राहत: पुदीना और गुड़ की लस्सी बनाएगी शरीर को अंदर से ठंडा और तरोताजा

मई-जून की झुलसा देने वाली गर्मी और गर्म हवाओं और लू के कारण शरीर का तापमान तेजी से बढ़ने लगता है जिससे डिहाइड्रेशन, पेट में जलन और थकान जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं. ऐसे में ज्यादातर लोग बाजार में मिलने वाली कोल्ड ड्रिंक्स पीने लगते हैं जो सेहत के लिए बेहद नुकसानदेह होती हैं. इस समर सीजन में खुद को अंदर से कूल और एनर्जेटिक रखने के लिए आप घर पर पुदीना और गुड़ की ठंडी-ठंडी लस्सी ट्राई कर सकते हैं. दही के प्रोबायोटिक्स, पुदीने की प्राकृतिक ठंडक और गुड़ के पोषक तत्व मिलकर एक ऐसा चमत्कारी ड्रिंक बनाते हैं जो आपके डाइजेशन को दुरुस्त रखता है और पेट की गर्मी को शांत करता है. आइए जानते हैं इस देसी और हेल्दी लस्सी को मिनटों में बनाने की बेहद आसान रेसिपी. पुदीना और गुड़ की लस्सी रेसिपी की सामग्री ताजा गाढ़ा दही: 2 कप (चिल्ड) ताजी पुदीना पत्तियां: ½ कप गुड़ का पाउडर या कद्दूकस किया गुड़: 3-4 चम्मच (स्वादानुसार) भुना हुआ जीरा पाउडर: ½ छोटा चम्मच काला नमक: ½ छोटा चम्मच चाट मसाला: ¼ छोटा चम्मच ठंडा पानी या बर्फ के टुकड़े: आवश्यकतानुसार बनाने का आसान तरीका सबसे पहले एक छोटे ब्लेंडर जार में ताजी पुदीने की पत्तियां, गुड़ का पाउडर और 2-3 चम्मच ठंडा पानी डालें. इसे अच्छी तरह ब्लेंड करके एक स्मूथ पेस्ट तैयार कर लें. अब एक बड़े मिक्सिंग जार या ब्लेंडर में ठंडा गाढ़ा दही डालें. इसमें तैयार किया हुआ पुदीना-गुड़ का पेस्ट, भुना जीरा पाउडर, काला नमक और चाट मसाला ऐड करें. सारे मिश्रण को कुछ सेकंड के लिए अच्छी तरह ब्लेंड कर लें या पारंपरिक मथानी से मथ लें ताकि सारे फ्लेवर आपस में मिल जाएं और लस्सी झागदार बन जाए. अगर लस्सी ज्यादा गाढ़ी लगे, तो थोड़ा ठंडा पानी मिला सकते हैं. तैयार लस्सी को सर्विंग गिलासों में निकालें. ऊपर से बर्फ के टुकड़े डालें और पुदीने की पत्ती या चुटकी भर भुने जीरे पाउडर से गार्निश करके तुरंत ठंडी-ठंडी सर्व करें.

7000mAh बैटरी और Android 16 के साथ लॉन्च हुआ Motorola G37 Power, कीमत 15,999 रुपये

आज के समय में फ्लैगशिप ही नहीं, बल्कि बजट स्मार्टफोन्स की कीमतें भी लगातार बढ़ती जा रही हैं. ऐसे में 15 की रेंज में ऐसा फोन ढूंढना आसान नहीं है, जो बैटरी, परफॉर्मेंस, कैमरा और सॉफ्टवेयर हर मामले में अच्छा एक्सपीरियंस दे सके. ज्यादातर बजट फोन्स में कहीं न कहीं कोई बड़ा समझौता देखने को मिल ही जाता है. इसी बीच Motorola ने अपना नया बजट मॉडल Motorola G37 Power 15,999 रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च कर दिया है, जो बड़ी 7000mAh बैटरी, क्लीन Android एक्सपीरियंस, मजबूत बिल्ड क्वालिटी और भरोसेमंद परफॉर्मेंस के साथ एक बैलेंस्ड पैकेज देने का दावा करता है. इस कीमत में इसके फीचर्स काफी दमदार नजर आते हैं, हालांकि असली सवाल यही है कि क्या यह फोन रोजमर्रा के इस्तेमाल में भी उतना ही शानदार साबित होता है? Motorola G37 Power Review: डिजाइन Motorola G37 Power का डिजाइन पहली नजर में काफी अच्छा लगता है. फोन के पीछे सिंथेटिक लेदर फिनिश दी गई है, जिसकी वजह से हाथ में पकड़ने पर ग्रिप बेहतर मिलती है और फोन फिसलता नहीं है. अच्छी बात यह है कि लंबे समय तक इस्तेमाल करने के बाद भी यह ज्यादा भारी नहीं लगता. फोन का बैक डिजाइन काफी साफ-सुथरा और प्रीमियम लगता है. कैमरा मॉड्यूल भी जरूरत से ज्यादा बड़ा नहीं बनाया गया, जिससे फोन का लुक सिंपल लेकिन स्टाइलिश दिखाई देता है. इसमें साइड में फिंगरप्रिंट स्कैनर मिलता है, जो ज्यादातर समय फास्ट और सही तरीके से काम करता है. हालांकि, अगर हाथ गीले या पसीने वाले हों, तो कभी-कभी स्कैनर थोड़ा परेशान कर सकता है. बिल्ड क्वालिटी की बात करें, तो Motorola ने इसमें Gorilla Glass 7i प्रोटेक्शन, MIL-STD-810H मिलिट्री-ग्रेड सर्टिफिकेशन और IP64 रेटिंग दी है. यानी फोन रोजमर्रा के हल्के झटकों, धूल और पानी की छींटों से काफी हद तक सुरक्षित रहता है. सबसे अच्छी बात यह है कि कंपनी ने इसमें 3.5mm हेडफोन जैक और microSD कार्ड स्लॉट भी दिया है. यानी आप चाहें तो स्टोरेज को 1TB तक बढ़ा सकते हैं, जो आजकल बजट फोन्स में कम देखने को मिलता है. Motorola G37 Power Review: डिस्प्ले Motorola G37 Power में 6.67 इंच का बड़ा LCD डिस्प्ले मिलता है, जो वीडियो देखने और एंटरटेनमेंट के लिए काफी अच्छा लगता है. हालांकि फोन में HD+ रिजॉल्यूशन दिया गया है, इसलिए डिस्प्ले सबसे ज्यादा शार्प नहीं कहा जा सकता. फिर भी YouTube वीडियो देखना, सोशल मीडिया स्क्रॉल करना और वेब ब्राउजिंग जैसे काम आराम से हो जाते हैं. बड़ी स्क्रीन की वजह से कंटेंट देखने में मजा आएगा. फोन का 120Hz रिफ्रेश रेट इसकी सबसे अच्छी बातों में से एक है. इसकी वजह से स्क्रॉलिंग और ऐप्स के बीच स्विच करना काफी स्मूद लगता है, जिससे फोन इस्तेमाल करते समय लैग कम महसूस होता है. डिस्प्ले में 1050 निट्स तक की ब्राइटनेस मिलेगी, जिससे धूप में स्क्रीन ठीक-ठाक दिखाई देगा. हालांकि AMOLED डिस्प्ले जैसी ज्यादा ब्राइटनेस और डीप कलर्स यहां नहीं मिलते. फिर भी कीमत के हिसाब से यह ठीक है. Motorola G37 Power Review: परफॉर्मेंस Motorola G37 Power की सबसे मजबूत बात इसकी परफॉर्मेंस है. इसमें MediaTek Dimensity 6400 प्रोसेसर, 8GB तक RAM और 256GB UFS 2.2 स्टोरेज मिलती है. रोजमर्रा के इस्तेमाल में फोन काफी स्मूद चलेगा. कॉलिंग, सोशल मीडिया, वीडियो स्ट्रीमिंग, ब्राउजिंग और हल्की फोटो एडिटिंग जैसे काम बिना किसी बड़ी दिक्कत के हो जाते हैं. मल्टीटास्किंग भी उम्मीद से बेहतर है. कई ऐप्स के बीच स्विच करने पर फोन ज्यादा स्लो नहीं लगेगा. गेमिंग की बात करें, तो BGMI और Call of Duty Mobile जैसे गेम्स बैलेंस्ड सेटिंग्स पर अच्छे से चल जाते हैं. हालांकि, यह फोन हार्डकोर गेमिंग के लिए नहीं बनाया गया है. लंबे समय तक गेम खेलने पर फोन थोड़ा गर्म जरूर होता है, लेकिन ज्यादा परेशान नहीं करता. Motorola G37 Power Review: सॉफ्टवेयर Motorola हमेशा से अपने क्लीन सॉफ्टवेयर एक्सपीरियंस के लिए जाना जाता है और G37 Power में भी यही देखने को मिलता है. फोन Android 16 पर चलता है और इसमें Hello UI मिलता है. सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें बेवजह के एड्स और बहुत ज्यादा प्री-इंस्टॉल ऐप्स नहीं मिलेंगे. Moto Gestures जैसे फीचर्स रोजमर्रा के इस्तेमाल को आसान बनाते हैं. जैसे कि, फोन को ट्विस्ट करके कैमरा खोलना और chop-chop जेस्चर से टॉर्च ऑन करना काफी काम का लगता है. साथ ही इसमें कंपनी Android 17 अपडेट देने का भी वादा कर रही है. Motorola G37 Power Review: बैटरी Motorola G37 Power की सबसे बड़ी खासियत इसकी 7000mAh बैटरी है. नॉर्मल इस्तेमाल में फोन आराम से डेढ़ से दो दिन तक चल सकता है. गेमिंग, वीडियो स्ट्रीमिंग और 5G इस्तेमाल के बाद भी बैटरी काफी अच्छी बैकअप देती है. फोन में 30W TurboPower चार्जिंग सपोर्ट मिलता है, जिससे बैटरी को 0 से 100% तक चार्ज होने में करीब 85 मिनट लगते हैं. Motorola G37 Power Review: कैमरा फोन में 50MP प्राइमरी कैमरा दिया गया है. दिन की रोशनी में कैमरा अच्छी डिटेल तस्वीरें क्लिक करेगा. पोर्ट्रेट मोड भी कीमत के हिसाब से अच्छा काम करता है और बैकग्राउंड ब्लर काफी नेचुरल लगता है. सेल्फी कैमरा भी सोशल मीडिया इस्तेमाल के लिए ठीक-ठाक रिजल्ट देता है. हालांकि, कम रोशनी में कैमरा परफॉर्मेंस निराश कर सकती है. रात में फोटो में नॉइज और थोड़ी सॉफ्टनेस देखने को मिल सकती है. क्या खरीदना चाहिए? अगर आप 20 हजार रुपये से कम कीमत में ऐसा स्मार्टफोन चाहते हैं, जो बड़ी बैटरी, भरोसेमंद परफॉर्मेंस, साफ-सुथरा सॉफ्टवेयर और मजबूत बिल्ड क्वालिटी दे, तो Motorola G37 Power एक अच्छा ऑप्शन साबित हो सकता है. हालांकि, इसका LCD डिस्प्ले सबसे बेहतरीन नहीं है और लो-लाइट कैमरा भी एवरेज है, लेकिन फोन का ओवरऑल बैलेंस इसे बजट सेगमेंट में मजबूत दावेदार बनाता है.

भारत में प्रोटीन डाइट का क्रेज: 2 साल में 150% बढ़े ऑर्डर, बदली खाने की आदतें

भारत में प्रोटीन डाइट लेने वालों की मात्रा दिन-ब-दिन बढ़ रही है. अब सिर्फ जिम जाने वालों या फिटनेस इन्फ्लुएंसर्स तक सीमित नहीं है बल्कि आम घरों की रसोई में भी अब प्रोटीन प्रोडक्ट्स अपनी जगह बना रहे हैं. क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म इंस्टामार्ट के नए आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 2 सालों में उनके प्लेटफॉर्म पर प्रोटीन से जुड़े प्रोडक्ट्स के ऑर्डर्स में 150 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है. यही नहीं, लोगों द्वारा इन चीजों पर किया जाने वाला खर्च भी अब करीब 3 गुना हो चुका है. बाजार में बदलते इस ट्रेंड को देखते हुए कंपनियों ने भी अपनी तैयारी तेज कर दी है और प्रोटीन वाली चीजों की अधिक पूर्ति करने में लगी है. अंडे और पनीर का दबदबा बरकरार भले ही मार्केट में नए-नए पैकेजों वाले न्यूट्रिशन प्रोडक्ट्स आ गए हों लेकिन आज भी भारतीय घरों में प्रोटीन के पारंपरिक ऑप्शंस ही सबसे ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं. ऑनलाइन शॉपिंग कार्ट्स में अंडे और पनीर की जोड़ी नंबर वन बनी हुई है. इसके बाद सबसे ज्यादा डिमांड चिकन और अंडे के कॉम्बिनेशन की देखी जा रही है. इनके अलावा मखाना, ओट्स, प्रोटीन बार्स, ग्रीक योगर्ट और चने की बिक्री में भी काफी तेजी आई है. नए प्रोडक्ट्स की बात करें तो प्रोटीन चिप्स की डिमांड साल-दर-साल करीब 300 प्रतिशत बढ़ी है जबकि प्रोटीन योगर्ट की बिक्री में 280 प्रतिशत का उछाल आया है. आंकड़ों के अनुसार, प्रोटीन उत्पादों के लिए ऑर्डर देने का सबसे व्यस्त समय सुबह 7 बजे से 11 बजे के बीच था, जो मुख्य रूप से नाश्ते से संबंधित खरीदारी के कारण था. पीनट बटर बना नंबर वन सर्च इंटरनेट पर सर्च करने के मामले में भारतीयों की पहली पसंद पीनट बटर बनकर उभरा है. इंस्टामार्ट पर प्रोटीन कैटेगरी में इसे सबसे ज्यादा सर्च किया गया है, जिसके बाद दूसरे नंबर पर ग्रीक योगर्ट रहा. पारंपरिक भारतीय फूड्स की बात करें तो सोया चंक्स की मांग दोगुनी से ज्यादा हो गई है, जबकि टोफू की सेल में 87 प्रतिशत की तेजी आई है. अब लोग सत्तू, बेसन, भुने चने और मिलेट्स (बाजरा) को भी प्रोटीन के नजरिए से देख रहे हैं और इन्हें अपनी डाइट का हिस्सा बना रहे हैं. छोटे शहरों में सबसे तेज रफ्तार यह बदलाव सिर्फ दिल्ली या बेंगलुरु जैसे बड़े महानगरों तक सीमित नहीं है. हालांकि कुल डिमांड में बेंगलुरु अब भी सबसे आगे है, लेकिन टियर-2 और छोटे शहरों में इसकी रफ्तार सबसे तेज है. नागपुर, जयपुर, चंडीगढ़, भुवनेश्वर, गुवाहाटी और विजाग जैसे शहरों में प्रोटीन प्रोडक्ट्स की मांग तेजी से बढ़ रही है. इस क्रेज का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चेन्नई के एक यूजर ने पीनट बेस्ड प्रोटीन फूड्स पर एक बार में 2 लाख 71 रुपये 385 खर्च कर दिए थए. वहीं बेंगलुरु के एक अन्य यूजर ने सिर्फ प्रोटीन बार्स खरीदने के लिए 2 लाख 09 हजार 626 का ऑर्डर दिया था. पारंपरिक चीजों की ओर लोगों का रुख इस बदलाव से पारंपरिक भारतीय चीजों पर फिर से लोगों का फोकस हो रहा है. सोया चंक्स की मांग दोगुनी से अधिक हो गई, टोफू की मांग में लगभग 87% की वृद्धि हुई, जबकि मखाना, चना सत्तू, बेसन और भुने हुए चने की मांग में भी अच्छी वृद्धि देखी गई क्योंकि उपभोक्ता इन परिचित खाद्य पदार्थों को प्रोटीन के नज़रिए से देखने लगे. अंकुरित बाजरा और ओट्स आधारित नाश्ते के मिश्रण की मांग में भी तेजी से वृद्धि हुई क्योंकि प्रोटीन का सेवन अब एक्सरसाइज के बाद की दिनचर्या से हटकर नियमित भोजन का हिस्सा बन गया है.