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मोबाइल पर कैसे आएगा इमरजेंसी अलर्ट? जानिए नई सेल ब्रॉडकास्ट टेक्नोलॉजी

शनिवार को देशभर में सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम (Cell Broadcast System) का बड़े पैमाने पर टेस्ट किया गया है. साफ है कि आने वाले समय में यह सर्विस आम लोगों के लिए नियमित तौर पर इस्तेमाल में लाई जाएगी. यानी आगे जब भी कोई बड़ी आपदा जैसे भूकंप, बाढ़, साइकलोन या कोई सिक्योरिटी थ्रेट का खतरा होगा, तो सरकार सीधे आपके फोन पर तेज आवाज के साथ इमरजेंसी अलर्ट भेज सकेगी. यह कोई सामान्य SMS नहीं होगा, बल्कि टावर से एक साथ पूरे इलाके में ब्रॉडकास्ट होने वाला मैसेज होगा, जिसे पाने के लिए न इंटरनेट की जरूरत होगी और न ही किसी ऐप की. हालांकि कमजोर नेटवर्क में भी काम करेगा, लेकिन एक शर्त है. इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यही मानी जा रही है कि यह कमजोर नेटवर्क में भी काम कर सकता है. यानी जहां कॉल ड्रॉप हो रही हो, इंटरनेट न चल रहा हो, वहां भी अलर्ट आने की संभावना रहेगी, क्योंकि यह SMS की तरह कतार में नहीं फंसता, बल्कि सीधे टावर से पुश होता है. लेकिन यहां एक जरूरी बात समझनी होगी क‍ि अगर आपके फोन में बिल्कुल “No Service” है, यानी टावर का कोई सिग्नल ही नहीं मिल रहा, तो फिर यह सिस्टम भी काम नहीं करेगा. बिना स‍िम के फोन पर भी दिख सकता है अलर्ट आने वाले समय में इस सिस्टम की एक और खास बात लोगों को चौंका सकती है, यह नंबर पर नहीं, बल्कि एरिया पर काम करता है. यानी अगर आपका फोन ऑन है और किसी नेटवर्क का सिग्नल पकड़ रहा है, तो बिना स‍िम के भी इमरजेंसी अलर्ट स्क्रीन पर फ्लैश हो सकता है. यही वजह है कि इसे आपदा के समय ज्यादा कारगर कम्‍युन‍िकेशन टूल माना जा रहा है. फिर भी कुछ लोग रह जाएंगे ‘आउट ऑफ कवरेज’ हालांकि यह सिस्टम काफी एडवांस्ड है, लेकिन पूरी तरह फूलप्रुफ नहीं है. जिन इलाकों में नेटवर्क कवरेज ही नहीं है, वहां रहने वाले लोग इन अलर्ट से वंचित रह सकते हैं. इसी तरह अगर फोन स्‍व‍िच ऑफ है या बैटरी खत्म है, तो कोई भी चेतावनी नहीं पहुंचेगी. एयरप्‍लेन मोड में भी फोन नेटवर्क से कट जाता है, इसलिए वहां भी अलर्ट नहीं आएगा. इसके अलावा पुराने फीचर फोन्स या ऐसे स्‍मार्टफोन जिनमें यह फीचर सपोर्ट नहीं करता है, वे भी इस सिस्टम के दायरे से बाहर रहेंगे. कई बार यूजर्स खुद सेट‍िंग्‍स में जाकर इमरजेंसी अलर्ट को disable कर देते हैं, ऐसे में भी यह सर्विस उन तक नहीं पहुंच पाएगी. आने वाले समय की ‘लाइफ-सेवर’ टेक्नोलॉजी आगे चलकर सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम को देश के आपदा प्रबंधन ढांचे का अहम हिस्सा बनाया जाएगा. इसे आप ऐसे समझ सकते हैं जैसे आपके इलाके में लगा एक ड‍िज‍िटल लाउडस्पीकर. अगर आप उसकी रेंज में हैं और आपका फोन नेटवर्क से जुड़ा है, तो वार्न‍िंग आपको तुरंत मिल जाएगी. लेकिन अगर आप उस रेंज से बाहर हैं या आपने खुद को नेटवर्क से ड‍िसकनेक्‍ट कर रखा है, तो यह अलर्ट आप तक नहीं पहुंचेगा. यानी साफ है क‍ि यह तकनीक तेज, असरदार और कई मामलों में लाइफ सेवर साबित होगी, लेकिन इसकी अपनी सीमाएं भी हैं, जिन्हें समझना उतना ही जरूरी है.

कोकोनट लस्सी रेसिपी: गर्मी में ठंडक देने वाला हेल्दी ड्रिंक

 गर्मियों के मौसम में जब पारा चढ़ने लगता है तो शरीर को हाइड्रेटेड और पेट को ठंडा रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है. वैसे तो उत्तर भारत में लस्सी सबसे लोकप्रिय समर ड्रिंक है लेकिन अगर आप वही साधारण लस्सी पीकर बोर हो चुके हैं तो क्यों ना कुछ नया ट्राई किया जाए. ऐसे में कोकोनट यानी नारियल की लस्सी आपके लिए परफेक्ट हो सकती है. नारियल की लस्सी के फायदे कोकोनट लस्सी न केवल स्वाद में बेहतरीन है बल्कि नारियल की तासीर ठंडी होने के कारण यह आपके पेट को दोगुनी ठंडक पहुंचाती है. यह एक ऐसा प्रीमियम ड्रिंक है जो आपको ताजगी के साथ-साथ भरपूर ऊर्जा भी देती है. आइए जानते हैं इसे बनाने की बेहद आसान और झटपट रेसिपी. लस्सी के लिए आपको चाहिए होंगी ये चीजें ताजा दही (गाढ़ा) – 2 कप नारियल का दूध या कद्दूकस किया हुआ ताजा नारियल – 1 कप नारियल पानी (लस्सीको पतला करने के लिए) – 1/2 कप चीनी या मिश्री पाउडर – स्वादानुसार इलायची पाउडर – एक चुटकी बर्फ के टुकड़े  – 4-5 बारीक कटा हुआ सूखा नारियल और कटे हुए बादाम बनाने का तरीका एक मिक्सर जार या ब्लेंडर में गाढ़ा दही और नारियल का दूध डालें. अगर आप ताजा नारियल इस्तेमाल कर रहे हैं तो उसे पहले बारीक पीस लें. इसमें स्वादानुसार चीनी, इलायची पाउडर और थोड़े से बर्फ के टुकड़े डालें. अब सभी सामग्रियों को 1-2 मिनट के लिए अच्छी तरह ब्लेंड करें जब तक कि लस्सी एकदम स्मूथ और झागदार न हो जाए. अगर लस्सी बहुत गाढ़ी लग रही है तो आप इसमें थोड़ा नारियल पानी मिला सकते हैं. तैयार कोकोनट लस्सी को गिलास में निकालें. ऊपर से नारियल के लच्छे या ड्राई फ्रूट्स सजाएं और इसे ठंडा-ठंडा सर्व करें.

सत्तू शरबत रेसिपी: गर्मी में देसी प्रोटीन ड्रिंक जो रखे शरीर को ठंडा

भीषण गर्मी और तपती लू के बीच जब शरीर की ऊर्जा कम होने लगती है तो ऐसे में देसी प्रोटीन शेक कहा जाने वाला सत्तू शरबत आपके  लिए किसी वरदान से कम नहीं. सत्तू की तासीर स्वाभाविक रूप से ठंडी होती है जो पेट की जलन को शांत करने और शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करती है. इसमें मौजूद हाई फाइबर पाचन तंत्र को दुरुस्त रखते हैं और लंबे समय तक भूख नहीं लगने देते जिससे यह वजन घटाने वालों के लिए भी आदर्श है. बिना चीनी और बिना किसी भारी मसाले के तैयार यह शरबत न केवल आपको हाइड्रेटेड रखता है बल्कि चिलचिलाती धूप में भी आपको तरोताजा महसूस कराता है. सत्तू शरबत बनाने के लिए आपको चाहिए होंगी ये चीजें सत्तू – 4 बड़े चम्मच ठंडा पानी – 2 गिलास काला नमक – स्वादानुसार भुना हुआ जीरा पाउडर – 1/2 छोटा चम्मच नींबू का रस – 1 बड़ा चम्मच ताजा पुदीना पत्तियां – 5-6 (कुचली हुई) बारीक कटी हरी मिर्च और प्याज बनाने का तरीका एक जग में सत्तू डालें और थोड़ा ठंडा पानी डालकर अच्छी तरह मिलाएं ताकि कोई गुठली न रहे. अब बचा हुआ ठंडा पानी डालें और इसे अच्छी तरह फेंटें. इसमें काला नमक, भुना जीरा पाउडर और नींबू का रस मिलाएं。 कुचली हुई पुदीना पत्तियां डालें, जो इसकी ठंडक और खुशबू को बढ़ा देंगी. अगर आप चाहें तो इसमें बारीक कटा प्याज और हरी मिर्च डालकर इसे और भी चटपटा बना सकते हैं. बर्फ के टुकड़े डालें और तुरंत सर्व करें.

गर्मियों में गुलाब जल से स्किन केयर: नेचुरल ग्लो पाने के आसान तरीके

 गर्मियों के मौसम में तेज धूप, पसीना और धूल-मिट्टी हमारी स्किन की सारी चमक छीन लेते हैं. अक्सर इसके कारण चेहरा डल, बेजान और ऑयली नजर आने लगता है. ऐसे में इस मौसम में स्किन का खास ख्याल जरूरी हो जाता है. अच्छी बात यह है कि घर में मौजूद कुछ चीजों से आप आसानी से अपनी स्किन का ध्यान रख सकते हैं. गुलाब जल उन्हीं में से एक है, जिसका इस्तेमाल लंबे समय से स्किन केयर के लिए किया जाता रहा है. यह न सिर्फ चेहरे को ठंडक देता है, बल्कि स्किन के PH लेवल को भी बैलेंस बनाए रखता है. इसे रोजाना चेहरे पर लगाने से स्किन से जुड़ीं समस्याएं कम होती हैं और चेहरा नेचुरली ग्लो करता है. आज हम आपको बताएंगे कि गर्मियों में आप गुलाब जल का इस्तेमाल करके कैसे ग्लोइंग और बेदाग स्किन पा सकते हैं. गुलाब जल और बेसन का पैक गर्मियों के मौसम में धूप और गर्मी के कारण स्किन डल और बेजान हो जाती है. ऐसे में इससे बचने के लिए आप गुलाब जल और बेसन का फेस पैक चेहरे पर लगा सकते हैं. इस फेस पैक को बनाने के लिए 1 चम्मच बेसन में 1 चम्मच में गुलाब जल मिलाकर पेस्ट बना लें. इस पेस्ट को चेहरा धोने के बाद अच्छे से लगाएं और 10–15 मिनट के लिए छोड़ दें. फिर ठंडे पानी से चेहरा धो लें. बेहतर रिजल्ट के लिए हफ्ते में कम से कम दो बार यह पैक जरूर लगाएं. गुलाब जल और मुल्तानी मिट्टी गर्मी के दिनों में स्किन ऑयली हो जाती है. ऑयली स्किन के कारण पिंपल्स जैसी समस्याएं हो सकती हैं जो आपकी खूबसूरती को कम कर देती हैं. इससे बचने के लिए 1 चम्मच मुल्तानी मिट्टी में 2–3 चम्मच गुलाब जल मिलाकर पेस्ट बना लें. चेहरा अच्छे से धोने के बाद इस फेस पैक को 10–15 मिनट तक लगाकर रखें. जब यह सूख जाए तो ठंडे पानी से चेहरा धो लें और बाद में मॉइश्चराइजर लगा लें. टोनर के तौर पर गर्मी में चेहरे को फ्रेश रखने के लिए आप गुलाब जल को टोनर के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं. यह चेहरे को ठंडक देता है और ताजगी बनाए रखता है. आप इसे एक स्प्रे बोतल में भरकर फ्रिज में रख सकती हैं और चेहरा धोने के बाद चेहरे पर स्प्रे कर सकती हैं.  

जियोफोन और जियोभारत फोन के रिचार्ज प्लान्स का नाम बदला, अब ‘4G Feature Phone Plans’

रिलायंस जियो को लेकर बड़ी जानकारी सामने आ रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने जियोफोन (JioPhone) और जियोफोन प्राइमा (Jio Phone Prima) प्लान्स को हटा दिया है। इसके अलावा, 'जियोभारत' (JioBharat) फोन के रिचार्ज प्लान्‍स का नाम बदलकर ‘ 4G Feature Phone Plans ’ कर दिया है। जियोफोन डेटा ऐड-ऑन का नाम ‘4G Feature Phone Add-ons’ कर दिया गया है। कहा जाता है कि ट्राई के निर्देशों के बाद यह कदम उठाया गया है। ट्राई जियोफोन और जियोभारत फोन से जुड़े रिचार्जों को सभी तरह की डिवाइस चलाने वाले ग्राहकों के लिए लाने का निर्देश दिया था। Jio रिचार्ज से सस्‍ते होते थे जियोफोन और जियोभारत के रिचार्ज पूरे मामले को आसान भाषा में समझते हैं।     दरअसल, रिलायंस जियो की ओर से जियोफोन और जियोभारत फोन के अलग रिचार्ज लाए जाते थे।     जियोफोन और जियोभारत, कंपनी के फीचर फोन हैं, जिन्‍हें 4G यूजर्स के लिए पेश किया जाता है।     कंपनी इन फोन्‍स के लिए कम कीमत में रिचार्ज उपलब्‍ध कराती थी, क्‍योंकि ग्राहक 4जी नेटवर्क पर होते थे। ट्राई ने दिया था अहम निर्देश टेलिकॉमटॉक की रिपोर्ट के अनुसार, इसी महीने ट्राई ने जियो को उसके ड‍िवाइस संबंधी टैरिफ प्‍लान्‍स में बदलाव करने और उन्‍हें सभी डिवाइस यूजर्स के लिए उपलब्‍ध कराने का निर्देश दिया था। ऐसा लगता है कि कंपनी ने ट्राई की बातों को मानते हुए रिचार्ज प्‍लान्‍स का नाम बदलकर ‘4G Feature Phone Plan’ और ‘4G Feature Phone Add-on’ कर दिया है। हालांकि अभी यह स्‍पष्‍ट नहीं है कि इन रिचार्ज को सिर्फ जियाफोन और जियोभारत फोन यूजर्स करा सकेंगे या कोई भी 4जी स्‍मार्टफोन यूजर कर पाएगा जिसके पास जियो का सिम है।     123 रुपये का प्‍लान जिसमें अनलिमिटेड वॉयस कॉल, 0.5 GB/दिन डेटा और 300 SMS दिए जाते हैं। इसकी वैलिड‍िटी 28 दिनों की है।     234 रुपये वाला प्‍लान भी कंपनी 4G यूजर्स को देती है। इसमें अनलिमिटेड कॉलिंग, 0.5 GB डेटा प्रत‍िदिन और 300 SMS दिए जाते हैं। इसकी वैलिड‍िटी 56 दिन है।     369 रुपये का प्‍लान भी है जिसमें अनलिमिटेड कॉलिंग, 0.5 GB डेटा प्रतिदिन दिया जाता है। इसकी वैलिड‍िटी 84 दिन है।     कंपनी 1234 रुपये में 336 दिन की वैलिडि‍टी 4G फीचर फोन प्लान पर देती आई है। इस बदलाव से क्‍या होगा? पहली नजर में यह बदलाव सिर्फ नाम बदलना महसूस होता है। अगर यह 4जी फोन यूजर्स के लिए ही है तो इसका एक अर्थ यह हो सकता है कि कंपनी अब जियोभारत और जियोफोन ग्राहकों के अलावा अन्‍य फीचर फोन यूजर्स को भी ये प्‍लान उपलब्‍ध कराए। हालांकि इस बारे में अभी आध‍िकारिक जानकारी का इंतजार है।  

गर्मियों में आयुर्वेदिक स्किनकेयर: वात, पित्त और कफ के अनुसार सही देखभाल

गर्मी ने धीरे-धीरे अपना प्रकोप दिखाना शुरू कर दिया है। इस मौसम में मेरे पास आने वाले कई लोग ऑयलीनेस बढ़ने, मुंहासे से लेकर टैनिंग होने, सेंसिटिविटी बढ़ने और स्किन डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं लेकर आते हैं। आयुर्वेद कहता है कि इसके लिए कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट की जगह चंदन, उशीरा, लोध्र, त्रिफला और यष्टिमधु जैसी औषधीय गुणों से भरपूर चीजों का इस्तेमाल कर लंबे समय तक बरकरार रहने वाले सकारात्मक परिणाम पाए जा सकते हैं। ऐसा इसलिए संभव है क्योंकि आयुर्वेद सिर्फ ऊपरी चीजें देखकर इलाज नहीं करता, बल्कि वो पहले शरीर की प्रकृति को समझने पर जोर देता है और फिर उपचार शुरू करता है। यही वजह है कि इसका फायदा गहराई से मिलता है और प्रभाव लंबे समय तक नजर आता है। गर्मियों का स्किन पर असर अष्टाङ्गहृदयम् जैसे पौराणिक आयुर्वेदिक ग्रंथों के अनुसार, ग्रीष्म ऋतु एक ऐसा समय है, जब तेज गर्मी के कारण शरीर की ताकत और नमी धीरे-धीरे कम होती चली जाती है। इस दौरान शरीर में पित्त (शरीर की हीट एनर्जी) भी जमा होने लगता है। वातावरण में बढ़ती शुष्कता और पित्त का जमा होना, ये मिलकर ऐसा मेल बनाते हैं, जिससे त्वचा का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ जाता है। इस मौसम में गर्मी के कारण पसीने भी ज्यादा आता है, जो स्रोतोरोध (स्किन के माइक्रोचैनल से जुड़े ब्लॉकेज) को जन्म देता है। अगर मौसम के अनुसार सही देखभाल न दी जाए, तो व्यक्ति को कई तरह की त्वचा संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इनमें इन्फ्लेमेशन, रेडनेस, पिंपल्स और डलनेस आदि शामिल हैं। नतीजन अक्सर गर्मियों में लोगों की स्किन थकी, अनइवन और रिएक्टिव नजर आती है। प्रकृति के आधार पर कैसा हो गर्मियों में आयुर्वेदिक स्किनकेयर वात प्रधान वात प्रधान लोगों की त्वचा प्राकृतिक रूप से रूखी होती है। गर्मियों में बाहरी शुष्कता के कारण ये समस्या और ज्यादा बढ़ जाती है।     इस तरह की प्रकृति वाले लोग मुडगा (हरा चना) को जेंटल क्लीनिंग के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। ये बिना नैचरल ऑयल को डैमेज किए त्वचा की सफाई करता है।     यष्टिमधु (मुलेठी) को दूध में मिलाकर लगाने से स्किन के खोए हाइड्रेशन को वापस लाया जा सकता है। ये स्किन के टेक्सचर को भी बेहतर बनाता है।     लाइट टेक्सचर के ऑयल भी स्किन के मॉइस्चर को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। इससे गर्मी के कारण स्किन को कम नमी के चलते होने वाले नुकसान का जोखिम भी कम हो जाता है। पित्त प्रधान पित्त प्रधान स्किन आमतौर पर काफी ज्यादा सेंसिटिव होती है, जिस वजह से इन्हें मुंहासों की समस्या, रेडनेस, इन्फ्लेमेशन और पिगमेंटेशन होने की आशंका काफी ज्यादा रहती है। गर्मियों में ये जोखिम और बढ़ जाता है। इन समस्याओं को मैनेज करने के लिए स्किन को ठंडक देने वाले तरीके अपनाने की जरूरत होती है।   ठंडे पानी या गुलाब जल से चेहरा धोने पर जलन की समस्या कम करने में मदद मिलती है।   स्किन को शांत करने, गर्मी कम करने और रंगत को सुधारने के लिए चंदन, उशीरा और लोध्र (सिम्प्लोकोस रेसमोसा) के क्लासिक कॉम्बिनेशन को इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। कफ प्रधान कफ प्रधान लोगों की स्किन काफी ऑयली होती है। इस वजह से स्किन के ऐसे पार्ट्स जहां पहले से ही ज्यादा नमी मौजूद होती है, वहां के पोर्स बंद होने का ज्यादा खतरा रहता है इस तरह की स्किन वाले आयुर्वेद लोध्र (सिम्प्लोकोस रेसमोसा)और त्रिफला (आंवला, हरीतकी, बिभीतकी) का पाउडर लगा सकते हैं। ये स्किन को साफ रखने और ऑयल को सोखने में मदद करता है। इस औषधीय पाउडर के इस्तेमाल से जेंटल एक्सफोलिएशन होता है, जो त्वचा की गंदगी को साफ करता है और प्राकृतिक संतुलन को फिर से स्थापित करता है। इससे स्किन कंजेशन को रोकने में मदद मिलती है। औषधीय लेप से रखें गर्मी में त्वचा का ख्याल शार्ंगधर संहिता जैसे ग्रंथों में लेप को स्किनकेयर का एक अहम पहलू बताया गया है। आम फेसपैक के उलट, ये औषधीय गुणों से भरा फॉर्मूलेशन खास स्किन कंडीशन को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाता है, ताकि असरदार रिजल्ट्स मिल सकें। उदाहरण के लिए:     चंदन-उशिरा-लोधरा से बना लेप शरीर की गर्माहट और गर्मी से हुई टैनिंग को मैनेज करने में मददगार साबित होता है।     लोधरा-त्रिफला का लेप मुंहासों वाली स्किन की समस्याओं के लिए असरदार माना जाता है।     रूखी त्वचा और डलनेस के लिए मुलेठी को दूध में मिलाकर लगाने की सलाह दी जाती है। इन्हें लगाने का सही तरीका भी काफी महत्व रखता है। लेप की पतली लेयर स्किन पर लगाएं और वो पूरी तरह से सूखे, उससे पहले उसे हटा लें। ऐसा करने से स्किन और ज्यादा ड्राई नहीं होगी।

गर्मी में बच्चों को हाइड्रेटेड रखने के 5 आसान ड्रिंक्स

न्यूट्रिशनिस्ट कहती हैं क‍ि बच्चे बड़ों की तुलना में जल्दी डिहाइड्रेशन का शिकार हो सकते हैं, क्योंकि उनका मेटाबॉलिज्‍म तेज होता है और वे पसीने के जरिए ज्यादा मात्रा में पानी खो देते हैं। 1- कंसंट्रेशन पर असर पड़ सकता है डॉक्‍टर भावना आगे बताती हैं क‍ि शोध बताते हैं कि अगर बच्चों के शरीर में थोड़ी भी पानी की कमी हो जाए, तो इसका सीधा असर उनकी एनर्जी, ध्यान लगाने की क्षमता और ओवर ऑल हेल्‍थ पर पड़ सकता है। 2-हीट एग्जॉशन का रहता है खतरा एक्‍सपर्ट कहती हैं क‍ि शरीर का तापमान बनाए रखने, बच्‍चों को पाचन में मदद करने और पोषक तत्वों को शरीर में पहुंचाने में पानी बहुत जरूरी होता है। गर्मी में ज्यादा पसीना आने से शरीर से पानी के साथ- साथ सोडियम और पोटेशियम जैसे जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स भी कम हो सकते हैं। अगर इनकी पूर्ति न की जाए, तो थकान, चक्कर आना और गंभीर मामलों में हीट एग्जॉशन (गर्मी से थकावट) जैसी समस्या हो सकती है। 1. नींबू पानी सामग्री: नींबू का रस, पानी, एक चुटकी नमक, चीनी या गुड़ विधि: सभी सामग्रियों को ठंडे पानी में मिलाकर अच्छे से मिक्स करें। लाभ: यह विटामिन C से भरपूर, इलेक्ट्रोलाइट्स की पूर्ति करता है और इम्यूनिटी बढ़ाता है। 2. छाछ सामग्री: दही, पानी, भुना जीरा पाउडर, नमक विधि: दही को पानी में मिलाकर उसमें मसाले डालें और अच्छे से फेंट लें। लाभ: पाचन में मदद करती है, शरीर को ठंडक देती है और प्रोबायोटिक्स से भरपूर होती है। नार‍ियल का पानी और आम पन्‍ना नार‍ियल का पानी और आम पन्‍ना 3. नारियल पानी सामग्री: ताजा नारियल पानी विधि: सीधे ताजा परोसें, किसी तैयारी की जरूरत नहीं। लाभ: प्राकृतिक इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर, डिहाइड्रेशन से बचाता है और ऊर्जा बनाए रखता है। 4. आम पन्ना सामग्री: कच्चा आम, चीनी या गुड़, भुना जीरा पाउडर, काला नमक विधि: कच्चे आम को उबालकर उसका गूदा निकालें और बाकी सामग्री व पानी के साथ मिलाएं। लाभ: लू से बचाव करता है और विटामिन A व C से भरपूर होता है। 5. तरबूज का रस सामग्री: ताजे तरबूज के टुकड़े विधि: ब्लेंड करें और चाहें तो छान लें। लाभ: पानी की मात्रा अधिक होती है, शरीर को ठंडक देता है और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है। ​ 6- घर का बना फ्रूट स्मूदी​ सामग्री: केला, आम या सेब, दूध या दही विधि: सभी चीजों को ब्लेंड करके स्मूदी तैयार करें। लाभ: ऊर्जा देता है, पोषक तत्वों से भरपूर होता है और बच्चों को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है। ​ बच्चों के डेली रूटीन में ये समर ड्रिंक्स शामिल करना उन्हें हाइड्रेटेड और पोषित रखने का एक आसान और असरदार तरीका है। कम सामग्री और सरल विधि से बने ये ड्र‍िंक्‍स गर्मी से प्राकृतिक रूप से बचाव करते हैं। इसलिए माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों को इन ताजगी भरे ड्रिंक्स का नियमित सेवन कराएं, ताकि वे पूरे मौसम में स्वस्थ, ऊर्जावान और फिट बने रहें।

स्मार्टफोन खरीदते समय 89% लोग AI फीचर्स को दे रहे हैं सबसे ज्यादा अहमियत

स्मार्टफोन खरीदते समय आप किन बातों या कहें कि किन फीचर्स का ध्यान रखते हैं. एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें बताया है कि 89 परसेंट लोग स्मार्टफोन खरीदते समय आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस (AI) फीचर्स पर ध्यान दे रहे हैं. पहले भले ही कैमरे, बैटरी, प्रोसेसर और डिस्प्ले पर ध्यान दिया जाता हो, लेकिन अब लोगों का फोकस AI पर है. काउंटरप्वाइंट रिसर्च ने फ्लिपकार्ट के साथ मिलकर एक रिपोर्ट तैयार की है. इस रिपोर्ट का नाम स्मार्टफोन इनसाइट रिपोर्ट 2026 है. भारतीय मार्केट में कंज्यूमर की बदलती आदत को दिखाया गया है. साथ ही बताया है कि अब यूजर्स स्पेसिपिकेशन्स से आगे बढ़कर AI पर ध्यान दे रहे हैं, जिसमे Gen-z भी हैं. रिपोर्ट के मुताबिक स्मार्टफोन चुनने में अब सबसे अहम भूमिका AI निभा रहा है. रिपोर्ट में बताया है कि 89 परसेंट यूजर्स ने बताया है कि AI फीचर्स उनके हैंडसेट खरीदने के फैसले को प्रभावित करता है. AI की मदद से यूजर्स अपने डेली के टास्क को आसान बना रहे हैं. सर्चिंग से लेकर वॉयस असिस्टेंट तक को AI बेहतर बना रहा है. कई मोबाइल कंपनियां खुद का AI मॉडल दे रहे हैं. सैमसंग से गूगल तक मार्केट में कई AI मॉडल मार्केट में गूगल के AI फीचर्स के अलावा भी कई मॉडल मौजूद हैं. जहां सैमसंग का Galaxy AI है. वहीं वीवो और शाओमी के भी AI मॉडल हैं. मोटोरोला का Moto AI नाम है. सैमसंग ने गूगल जेमिनी के कई फीचर्स को ऑप्टीमाइज करके अपने हैंडसेट को दिया है, जिससे उनकी उपयोगिता और बेहतर हो गई है. ये स्पीड 15-20 हजार रुपये के सेगमेंट में भी फैल रही है, जहां आमतौर पर प्रीमियम फीचर्स बहुत ही कम देखने को मिलते हैं. 33 परसेंट लोग EMI पर स्मार्टफोन खरीद रहे- रिपोर्ट रिपोर्ट में एक अन्य खुलासा ये भी किया है कि 33 परसेंट लोग ऐसे हैं, जो आसान किस्तों (EMI) का ऑप्शन लेकर प्रीमियम हैंडसेट को खरीद रहे हैं.

गर्मी में राहत देने वाला एसी कब बन सकता है सेहत के लिए खतरा

 ऑफिस हो या घर, बिना एसी के गर्मी में समय काटना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में गर्मी और उमस से बचने के लिए लोग अपना अधिकतर समय एयर कंडीशनर (AC) में बिताते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि एसी धीरे-धीरे आपको बीमार कर सकती है. डॉक्टर्स और हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, AC का गलत इस्तेमाल शरीर के मेटाबॉलिज्म से लेकर फेफड़ों तक समस्या पैदा कर सकता है. एयर कंडीशनिंग खुद बीमारी नहीं बनाती, लेकिन बहुत तेज़ ठंड, ड्राय हवा और गंदे फिल्टर शरीर पर असर डाल सकते हैं. तो आइए वो कौन सी बीमारियां हैं जो लंबे समय तक एसी में रहने से होती हैं और उनसे कैसे बचा जा सकता है, इस बारे में जान लीजिए. AC से कैसे बढ़ती हैं परेशानियां? एसी की ठंडी हवा न केवल नमी सोख लेती है बल्कि यह हमारे गले और नाक की म्यूकस मेम्ब्रेन को भी सुखा देती है. इससे सर्दी-खांसी और साइनस जैसी समस्याएं होने लगती हैं. मीडिया  के पल्मोनरी एक्सपर्ट के हवाले से कहा गया है कि अधिक सूखी हवा सांस की नली में जलन पैदा कर सकती है और खांसी, गले में खराश, नाक बंद होने जैसी दिक्कतें बढ़ा सकती है. वहीं डॉक्टरों का भी कहना है कि AC कमरे की नमी कम कर देता है, जिससे सांस की नली और गला सूखने लगते हैं. हेल्थलाइन के मुताबिक, गंदे एसी से निकलने वाली हवा सिक बिल्डिंग सिंड्रोम का कारण बनती है, जिससे सिरदर्द और थकान महसूस होती है. इसलिए अगर एसी की सर्विस समय पर न हो तो उसके फिल्टर में बैक्टीरिया और मोल्ड पनपने लगते हैं.  यदि किसी रूप में खराब वेंटिलेशन है तो उस रूम में सिक बिल्डिंग सिंड्रोम (Sick building syndrome) का जोखिम बढ़ सकता है जिससे सिरदर्द, चक्कर, थकान, नाक और सांस की तकलीफ हो सकती हैं. CDC भी साफ कहता है कि कम वेंटिलेशन और कमजोर एयर सर्कुलेशन इनडोर एयर क्वालिटी को बिगाड़ सकते हैं. जोड़ों का दर्द और ड्राई स्किन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, लंबे समय तक कम तापमान में बैठने से मसल्स में खिंचाव और जोड़ों में अकड़न की समस्या देखी जाती है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें पहले से ही अर्थराइटिस है. इसके अलावा एसी हवा की नमी पूरी तरह खत्म कर देता है जिससे स्किन और आंखों में सूखापन आ जाता है. मेडिकल न्यूज टुडे की रिपोर्ट बताती है कि एयर कंडीशनिंग से त्वचा की प्राकृतिक नमी छिन जाती है जिससे खुजली और डर्मेटाइटिस की समस्या बढ़ सकती है. थर्मल शॉक और थकान जब हम तपती धूप से सीधे बेहद ठंडे कमरे में आते हैं तो शरीर के तापमान में अचानक बदलाव आता है. इसे थर्मल शॉक कहा जा सकता है. तापमान में यह अचानक उतार-चढ़ाव शरीर में थकान पैदा कर देता है और कमजोरी महसूस कराता है. एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि एसी का तापमान हमेशा 24 से 26 डिग्री के बीच रखना चाहिए ताकि बैलेंस बना रहे. गंदा AC भी बनता है वजह  पुराने या ठीक से साफ न किए गए एसी, मोल्ड और एलर्जी को हवा में फैला सकते हैं जिससे एलर्जी और सांस की समस्या बढ़ सकती है. एक्सपर्ट चेतावनी देते हैं कि गंदे फिल्टर, कॉइल और डक्ट्स में धूल, फफूंद और बैक्टीरिया जमा हो सकते हैं. साफ AC एलर्जी कम करने में मदद कर सकता है, लेकिन खराब रखरखाव वाला HVAC सिस्टम माइक्रोबियल एलर्जन का घर बन सकता है इसलिए फिल्टर समय पर बदलना और साल में एक बार सर्विस कराना जरूरी माना गया है.

OnePlus Pad 4 लॉन्च: 13.2 इंच डिस्प्ले और 13380mAh बैटरी वाला दमदार प्रीमियम टैबलेट

वनप्‍लस ने OnePlus Pad 4 को भारत में लॉन्‍च कर दिया है। यह कंपनी का प्रीमियम फ्लैगश‍िप टैबलेट है, जिसे ‘स्‍नैपड्रैगन 8 एलीट जेन 5 चिपसेट’ से पैक किया गया है। टैबलेट में 13.2 इंच का 3.4K रेजॉलूशन डिस्प्ले है और 13380 एमएएच की बड़ी बैटरी दी गई है। इतनी बड़ी बैटरी के बावजूद यह काफी पतला है और कंपनी दावा करती है कि इस टैबलेट के साथ यूजर्स को PC लेवल की परफॉर्मेंस मिलेगी। OnePlus Pad 4 के प्राइस और उपलब्‍धता     8GB+256GB मॉडल की कीमत 54,999 रुपये है।     12GB+512GB मॉडल के दाम 59,999 रुपये हैं।     इस टैबलेट की सेल 5 मई 2026 से Amazon, Flipkart, OnePlus.in और ऑफलाइन स्टोर्स पर शुरू होगी। कुछ बैंक कार्ड्स पर 5000 रुपये का डिस्काउंट दिया जा रहा है साथ ही 5,499 रुपये प्राइस वाला OnePlus Stylo Pro फ्री दिया जाएगा। OnePlus Pad 4 के स्‍पेस‍िफ‍िकेशंस और फीचर्स     OnePlus Pad 4 एक बड़े डिस्‍प्‍ले वाला पतला और प्रीमियम टैबलेट है।     इसमें 13.2 इंच का 3.4K डिस्प्ले, 144 हर्त्‍ज रिफ्रेश रेट और 1 हजार निट्स की ब्राइटनैस दी गई है।     टैब में 7:5 'ReadFit' आस्पेक्ट रेश्यो दिया गया है, जिससे डॉक्‍युमेंट्स पढ़ने और मल्‍टीटास्‍क‍िंग में आसानी होती है।     OnePlus Pad 4 में Snapdragon 8 Elite Gen 5 चिपसेट, 12GB RAM और 512GB स्टोरेज है।     यह वनप्‍लस का सबसे पावरफुल टैबलेट है और 13,380mAh बैटरी के साथ सबसे बड़े टैब्‍स में शामिल है।     इसे चार्ज करने के लिए बॉक्‍स में 80वॉट की सुपरवूक चार्जिंग मिलती है। दावा है कि फुल चार्ज के बाद यह 54 दिनों     का स्‍टैंडबाय और 20 घंटे का वीड‍ियो प्‍लेबैक दे सकता है।     हैवी परफॉर्मेंस के दौरान टैब में कोई रुकावट ना आए, इसके लिए टैब में 'Cryo-velocity Cooling System' दिया गया है, जो टैब को ठंडा रखता है।     ‘वनप्‍लस पैड 4’ रन करता है OxygenOS 16 पर। कंपनी ने इसमें माउस-कीबोर्ड शेयरिंग फीचर दिया है, जिससे यह लैपटॉप जैसा एक्‍सपीरियंस देता है। OnePlus Pad 4 के अन्‍य फीचर्स     मेटल यूनिबॉडी के साथ आने वाला OnePlus Pad 4 सिर्फ 5.94mm स्‍लीक है। इसका वेट 672 ग्राम है। इसमें 8 स्‍पीकर्स (4 वूफर्स और 4 ट्वीटर) का सेटअप है।     टैब में एआई फीचर्स दिए गए हैं। इनमें एआई राइटर, एआई समरी, एआई पेंटर, एआई क्‍लीयर कॉल आदि शामिल हैं। 50 हजार से अधिक प्राइस, क्‍या OnePlus Pad 4 खरीदना चाहिए? वनप्‍लस का प्रीमियम और फ्लैगश‍िप टैबलेट हर मोर्चे पर अडवांस, फास्‍ट और बेहतरीन नजर आता है। NBT टेक के पास यह डिवाइस मौजूद है। हम इसे र‍िव्‍यू कर रहे हैं। अब तक के एक्‍सपीरियंस में वनप्‍लस पैड 4 एक सॉलिड खिलाड़ी बनकर उभरा है। परफॉर्मेंस से लेकर डिस्‍प्‍ले और बैटरी क्षमता में यह दमदार है। वनप्‍लस का सबसे बड़ी बैटरी वाला टैब है। अगर बजट इजाजत देता है तो आप ब‍िना हिचक इसे खरीद सकते हैं।