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गर्मी में नींबू पानी से ज्यादा हाइड्रेटिंग है तरबूज का शरबत, विटामिन और इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर यह ड्रिंक तुरंत देगा एनर्जी

भीषण गर्मी में शरीर को हाइड्रेटेड रखने और शरीर के तापमान को कम करने के लिए कुछ ना कुछ ठंडी हेल्दी ड्रिंक्स पीते रहना चाहिए लेकिन शरीर को ठंडा रखने के लिए ज्यादातर लोग नींबू के शरबत पर ही निर्भर रहते हैं. लेकिन आपको बता दें कि हाइड्रेशन के मामले में तरबूज बहुत ही अच्छा माना जाता है.   तरबूज का शरबत के फायदे विटामिन A, C और पोटेशियम से भरपूर तरबूज का शरबत न केवल प्यास बुझाता है बल्कि इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को पूरा कर तुरंत ताकत से भर देता है. बाजार के मिलावटी जूस के बजाय घर पर बना यह शुद्ध और ठंडा शरबत आपको दिन भर की थकान से राहत देगा. साथ ही इसे घर पर बनाना भी बेहद आसान है. यहां हम आपको इसकी रेसिपी शेयर कर रहे हैं. शरबत बनाने के लिए तैयार कर लें ये चीजें तरबूज: 3-4 कप (कटा हुआ और बीज निकले हुए) नींबू का रस: 1 बड़ा चम्मच पुदीना के पत्ते: 8-10 ताजी पत्तियां काला नमक: आधा छोटा चम्मच चीनी/शहद: 1 चम्मच (अगर तरबूज कम मीठा हो) चाट मसाला: एक चुटकी बर्फ के टुकड़े बनाने का तरीका तरबूज को छोटे टुकड़ों में काट लें और जितना संभव हो सके इसके बीज निकाल दें. कुछ छोटे क्यूब्स को सर्विंग के लिए अलग रख लें. एक मिक्सर जार में तरबूज के टुकड़े, ताजी पुदीने की पत्तियां, नींबू का रस और काला नमक डालें. इसे अच्छी तरह ब्लेंड करके जूस तैयार कर लें. अगर आपको बिल्कुल साफ जूस पसंद है तो इसे छान लें. वरना इसके पल्प के साथ भी यह काफी टेस्टी लगता है. तैयार जूस में एक चुटकी चाट मसाला मिलाएं जो इसके स्वाद को दोगुना कर देगा. गिलास में बर्फ के टुकड़े और पहले से बचाकर रखे हुए तरबूज के छोटे क्यूब्स डालें. ऊपर से ठंडा-ठंडा जूस डालें और पुदीने की पत्ती से सजाकर तुरंत सर्व करें.

पसीने की बदबू से छुटकारा दिलाएगा मोगरे का देसी इत्र, बिना किसी खर्च के घर पर इस जादुई तरीके से करें तैयार

गर्मियों के बढ़ते तापमान में लोगों को बहुत पसीना आता है. पसीने की चिपचिपाहट और उससे आने वाली बदबू से लोग बहुत परेशान रहते हैं. इस बदबू से बचने के लिए लोग महंगे से महंगे ब्रांडेड सेंट, परफ्यूम और डियो खरीदते हैं. यही चीजें खरीदने में कुछ लोग तो हजारों रुपए खर्च कर देते हैं. लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि ये तेज खुशबू वाले डियो पसीने की बदबू को दबाने के बजाय कई बार और भी अजीब महक देने लगते हैं? ऊपर से इनमें मौजूद केमिकल्स स्किन को नुकसान भी पहुंचाते हैं. इतना ही नहीं इनकी महक बहुत जल्दी उड़ भी जाती है. ऐसे में अगर हम आपसे कहें कि इस चिलचिलाती गर्मी में आप 100% नेचुरल इत्र अपने घर पर बना सकते हैं, वो भी बिना किसी खर्च और केमिकल के. तो क्या आप यकीन करेंगे? आज हम आपको एक ऐसा जादुई तरीका बताने वाले हैं जिससे आप मोगरे के फूलों से देसी इत्र बना सकते हैं. ये न सिर्फ आपको दिनभर तरोताजा रखेगा, बल्कि पसीने की बदबू की छुट्टी भी कर देगा. इंग्रेडिएंट्स मोगरा का इत्र बनाने के लिए आपको       ताजे मोगरे (जैस्मिन) के फूल     सुई-धागा     कांच की ढक्कन वाली साफ और सूखी बोतल       थोड़ा सा सेलो टेप कैसे बनाएं मोगरे का इत्र? 1. मोगरे का इत्र बनाने के लिए सबसे पहले मोगरे के फूलों को सुई-धागे में पिरोकर एक लंबा गजरा बना लें. लेकिन आपको ध्यान देना रखना है कि फूल बिल्कुल ताजे हों, तभी खुशबू अच्छी आएगी. 2. अब एक कांच की बोतल लें और इस गजरे को उसके अंदर लटकाएं. गजरा इस तरह लटकाएं कि फूल बोतल की दीवार से न छुएं और नीचे भी न टिके. इसका मतलब साफ है कि गजरा बिल्कुल बीच में हवा में लटका होना चाहिए. 3. गजरे के धागे वाले हिस्से को बोतल के ढक्कन के बीच में सेलो टेप से चिपका दें. इससे फूल अपनी जगह पर टिके रहेंगे. 4. अब बोतल को अच्छी तरह बंद करके 2 दिन के लिए तेज धूप में रख दें. ये स्टेप बहुत जरूरी है क्योंकि धूप की गर्मी से फूलों की खुशबू बाहर निकलती है. 5. दो दिन बाद आप देखेंगे कि फूल सूखकर हल्के नारंगी हो गए हैं. बोतल के अंदर पानी जैसी बूंदें जमा हो गई हैं. यही बूंदें असली मोगरे का इत्र है. बस आपका इत्र तैयार है. कैसे करें स्टोर? इस इत्र को आप छोटी रोल-ऑन बोतल या स्प्रे वाली बोतल में भरकर रख सकते हैं. इस इत्र को थोड़ी सी मात्रा में लगाना भी काफी होता है, क्योंकि इसकी खुशबू लंबे समय तक बनी रहती है.

वॉट्सऐप ने कार यूजर्स के लिए लॉन्च किया नया कारप्ले ऐप, अब इंफोटेनमेंट सिस्टम पर ही देख सकेंगे कॉल हिस्ट्री और चैट्स

इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप वॉट्सऐप ने एक बड़ा ऐलान कर दिया है, जिसके तहत एक नया ऐप लॉन्च किया है. वॉट्सऐप का नया ऐप कार प्ले के लिए जारी किया है, जिसका फायदा कार वालों को होगा. दरअसल, एंड्रॉयड ऑटो की तरह ही कार प्ले होता है, जिसको कार के इंफोटेनमेंट सिस्टम में यूज किया जाता है. इसमें यूजर्स का स्मार्टफोन ब्लूटूथ या वायर के जरिए कार के इंफोटेनमेंट सिस्टम से कनेक्ट हो जाता है. इसके बाद फोन पर आने वाले मैसेज, कॉल और नेविगेशन की सुविधा इंफोटेनमेंट सिस्टम पर मिलती है. यह अपडेट वॉट्सऐप के iOS वर्जन 26.13.74 के साथ आया है. न्यू अपडेट को भारत समेत ग्लोबल मार्केट के लिए लॉन्च कर दिया है. यह फीचर पहले बीटा वर्जन में देखा जा चुका है और अब इसको बड़े लेवल पर रोलआउट किया गया है. अभी तक कारप्ले पर वॉट्सऐप मैसेज रिसीव किए जा सकते थे. अब कार प्ले के लिए अलग ऐप आ गया है, जिसकी मदद से यूजर्स वॉट्सऐप कॉल को भी इंफोटेनमेंट सिस्टम पर देख सकेंगे और जवाब दे सकेंगे.   वॉट्सऐप कार प्ले के तहत मिलेंगे ये फीचर वॉट्सऐप के कार प्ले ऐप की मदद से यूजर्स इंफोटेनमेंट सिस्टम पर कॉल रिसीव कर सकेंगे. इसमें चैट्स व कॉल हिस्ट्री के लिए अलग-अलग टैब भी हैं. इसकी मदद से यूजर्स हाल ही में किए गए कॉल हिस्ट्री को भी देख सकेंगे. ड्राइविंग के दौरान पूरा चैट विंडो ओपन करने की जरूरत नहीं होगी. वॉट्सऐप पर आने वाले मैसेज का रिप्लाई करने के लिए वॉयस डिटेक्शन का सपोर्ट मिलता है. इसमें यूजर्स हैंड्स-फ्री रिप्लाई कर सकते हैं. सिरी पर निर्भरता को कम किया वॉट्सऐप के न्यू ऐप में एक और बदलाव किया है कि अब Siri पर निर्भरता कम हो जाएगी. पहले ड्राइवर को कार प्ले में वॉट्सऐप मैसेज पढ़ने और जवाब देने के लिए Siri का यूज करना पड़ता था. अब ये सभी फीचर्स सीधे ऐप के इंटरफेस में ही शामिल कर दिए गए हैं.

वनप्लस ने लॉन्च किया 9000mAh बैटरी वाला दमदार फोन, एक बार चार्ज करने पर चलेगा ढाई दिन

स्मार्टफोन इंडस्ट्री में आजकल ढेरों स्मार्टफोन ऐसे लॉन्च हुए हैं, जिनके अंदर मेगा बैटरी का यूज किया है. यानी फोन में 7000mAh से लेकर  9000mAh बैटरी पैक तक के कई फोन मिल जाएंगे.  मंगलवार को वनप्लस ने भी 9000mAh की बैटरी वाला फोन लॉन्च किया है. बड़ा बैटरी पैक देने से स्मार्टफोन को सिंगल चार्ज में ज्यादा चलाया जा सकेगा. वनप्लस का दावा है कि 9000mAh बैटरी वाला वनप्लस नॉर्ड 6 एक बार फुल चार्जिंग के बाद ढाई दिन तक का बैटरी बैकअप देने की काबिलियत रखता है. आज के समय में लोगों का स्क्रीन टाइम बढ़ चुका है. ऑफिस के काम से लेकर इंडियन प्रीमियर लीक (IPL 2026) के मैच देखने तक में मोबाइल का यूज होता है. ऐसे में ज्यादा बैटरी बैकअप से यूजर्स को फायदा मिलता है. यूजर्स को बार-बार चार्जिंग की जरूरत नहीं होती है. मेगा बैटरी पैक होने के नुकसान भी     स्मार्टफोन में मेगा बैटरी पैक देने के कई नुकसान भी हैं. इसकी वजह से मोबाइल की थिकनेस बढ़ जाती है और फोन ज्यादा बल्की नजर नजर आता है.     मेगा बैटरी पैक की वजह से स्मार्टफोन में चार्जिंग टाइम में इजाफा हो जाता है. ऐसे में यूजर्स को मोबाइल बैटरी को फुल चार्ज करने में ज्यादा समय लगेगा.     स्मार्टफोन में ज्यादा बड़ी बैटरी होने की वजह से उसमें ओवर हीटिंग से संबंधित समस्या सामने आने लगती है. मोबाइल में ओवर हीटिंग की वजह से मोबाइल की परफोर्मेंस प्रभावित होती है और वह कई बार हैंग भी हो सकता है.     मेगा बैटरी होने की वजह से स्मार्टफोन में ब्लास्ट होने का खतरा बढ़ जाता है. अगर बैटरी पर ज्यादा प्रेशर बनता है तो बैटरी में आग लग सकती है. ऐपल और सैमसंग जैसी कंपनियां क्यों नहीं करती सैमसंग और ऐपल के फ्लैगशिप हैंडसेट भारत समेत दुनियाभर में पॉपुलर हैं. इसके बावजूद ये कंपनियां अपने हैंडसेट में मेगा बैटरी जैसे 7000mAh या 9000mAh बैटरी का यूज नहीं करती हैं. इसके पीछे कई वजह हैं, जैसे स्मार्टफोन थिकनेस, फोन सेफ्टी, इंटरनेशनल स्टैंडर्ड और एफिसिएंसी मैनेजमेंट. सैमसंग और ऐपल अपनी फ्लैगशिप सीरीज में भले ही 5000mAh से कम साइज का बैटरी पैक यूज करते हैं, उसके बावजूद उसमें बेहतर बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम को प्रोवाइड कराते हैं. ऐसे में छोटा बैटरी पैक होने के बावजूद फुल डे बैटरी बैकअप मिलता है.

ब्यूटी टूल या मल्टी-टास्किंग गैजेट? जानें हेयर स्ट्रेटनर से चिप्स के पैकेट सील करने और प्रेस करने का तरीका

आजकल हर लड़की खुद को अप-टू-डेट रखना चाहती है, जिसके लिए अक्सर वो पार्लर जाती हैं. लेकिन रोजाना पार्लर जाना मुमकिन नहीं है. ऐसे में बालों को स्टाइल करने के लिए अब घर पर ही कर्लर और हेयर स्ट्रेटनर जैसी मशीन लाए रखती हैं. बालों को सीधा करने के लिए वो हेयर स्ट्रेटनर का इस्तेमाल करती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये गैजेट सिर्फ बालों को 'सिल्की-स्मूद' बनाने के ही काम नहीं आता? दरअसल, आपके ड्रेसिंग टेबल पर रखा ये छोटा सा टूल आपके घर के कई कामों को आसान बना सकता है. हेयर-स्ट्रेटनर को 'मल्टी-टास्किंग जीनियस' कहना गलत नहीं होगा. किचन से लेकर बच्चों के स्कूल प्रोजेक्ट्स तक, हेयर स्ट्रेटनर मशीन घर के कई ऐसे कामों को चुटकियों में निपटा सकती है जिसके लिए हम अक्सर परेशान होते हैं. इसे सिर्फ एक ब्यूटी प्रोडक्ट समझना छोड़ दीजिए. चलिए जानते हैं हेयर स्ट्रेटनर के कुछ ऐसे जादुई इस्तेमाल जो आपकी डेली लाइफ को बेहद आसान बना देंगे. 1. पैकेट को एयर-टाइट सील करें: आपके बालों को सीधा करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले हेयर स्ट्रेटनर घर में खुले पैकेट्स को आसानी से सील कर सकता है. सोचिए, घर में अक्सर चिप्स, बिस्किट या नमकीन का पैकेट आधा बच जाता है और खुला रह जाने से वह जल्दी सील जाते हैं. ऐसे में पैकेट को वापस सील करना जरूरी है. कैसे करें: हेयर स्ट्रेटनर को हल्का गर्म करें और पैकेट के खुले हिस्से को उसके बीच में दबा दें. गर्मी से प्लास्टिक चिपक जाएगा और पैकेट फिर से सील हो जाएगा. अब आपके चिप्स-नमकीन जैसे स्नैक्स लंबे समय तक क्रिस्पी बने रहेंगे.   2. झटपट कपड़ों की प्रेस करें: यूं को घर कपड़ों की सिलवटें हटाने के लिए प्रेस का इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन अगर आपको कहीं जल्दी जाना है और कपड़ों पर हल्की सिलवटें दिख जाएं, तो स्ट्रेटनर आपकी मदद कर सकता है. कैसे करें: ऐसा करने के लिए हेयर स्ट्रेटनर को गर्म करें और शर्ट के कॉलर, कफ या बटन के बीच के हिस्सों पर हल्के हाथ से चलाएं. इस गैजेट से कपड़ों की छोटी-छोटी सिलवटें तुरंत हटाना आसान हो जाता है. 3. क्राफ्ट और DIY प्रोजेक्ट्स में मददगार: अगर आप या आपके बच्चे क्राफ्टिंग पसंद करते हैं, तो स्ट्रेटनर एक मजेदार टूल साबित हो सकता है. बच्चों के स्कूल प्रोजेक्ट्स को आसान बनाने के लिए इसे इस्तेमाल कर सकते हैं. कैसे करें: सोचिए अगर आपको फोम शीट को मोड़ना हो या रिबन को कर्ल देना हो तो आप स्ट्रेटनर की मदद से इन्हें आसानी से मनचाहा शेप दे सकते हैं. स्कूल प्रोजेक्ट्स के लिए ये बहुत काम का है. 4. बेड को दें होटल जैसा परफेक्ट लुक: जब आप कभी होटल के कमरे में जाते तो देखते ही लगता है कि वहां का बेड हमेशा इतना सलीकेदार दिखता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये ऐसा क्यों दिखता है?   कैसे करें: चादर बिछाने के बाद उसके किनारों और तकिए के कवर के बॉर्डर पर आप हल्के हाथ से स्ट्रेटनर चला सकते हैं. इससे कपड़ा एकदम फ्लैट और शार्प दिखेगा और आपका बेड बिल्कुल होटल जैसा लगेगा. इन बातों का जरूर रखें ध्यान: 1. तापमान का ध्यान रखें: हेयर स्ट्रेटनर का इस्तेमाल करते हुए हमेशा तापमान का ध्यान रखना जरूरी है. प्लास्टिक या नाजुक कपड़ों पर इस्तेमाल करते समय स्ट्रेटनर को हमेशा लो हीट पर रखें. 2. साफ-सफाई जरूरी है: अगर आप इसका इस्तेमाल खाने का पैकेट सील करने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं, तो पहले उसकी सूखे कपड़े से अच्छे से साफ-सफाई कर लें. क्योंकि उस पर बाल लगे हो सकते हैं.

घर की खिड़कियां भी बदल सकती हैं आपकी किस्मत, जानें किस दिशा में खिड़की होना लाता है सुख-समृद्धि

आमतौर पर घर की खिड़कियों को रोशनी और हवा आने का माध्यम माना जाता है। लेकिन वास्तु शास्त्र में इन्हें सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश द्वार के रूप में भी देखा जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार खिड़कियों की दिशा, संख्या और उनकी स्थिति का सीधा प्रभाव घर के माहौल और वहां रहने वाले लोगों के जीवन पर पड़ता है। यदि इन बातों पर ध्यान न दिया जाए, तो आर्थिक दिक्कतें, मानसिक तनाव और रिश्तों में दूरी जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए खिड़कियों से जुड़े वास्तु नियमों को समझना और समय रहते सुधार करना बेहद जरूरी है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं। दिशा का महत्व वास्तु के अनुसार दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम दिशा में बड़ी खिड़कियां होना शुभ नहीं माना जाता। इससे घर की स्थिरता प्रभावित होती है और धन संचय में बाधा आ सकती है। ऐसी स्थिति में मोटे पर्दे या मजबूत फ्रेम का उपयोग करके इस प्रभाव को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। वहीं, उत्तर और पूर्व दिशा में खिड़कियां होना अधिक लाभकारी माना गया है, क्योंकि इन दिशाओं से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है। खिड़कियों की संख्या खिड़कियों की संख्या भी वास्तु में अहम मानी जाती है। आमतौर पर सम संख्या को शुभ माना जाता है, जबकि विषम संख्या असंतुलन पैदा कर सकती है। इसके अलावा, यह भी ध्यान रखना चाहिए कि कुल संख्या का अंत शून्य पर न हो। यह छोटी-सी बात लग सकती है, लेकिन वास्तु शास्त्र में इसका विशेष महत्व बताया गया है। खुलने की दिशा अगर खिड़कियां बाहर की ओर खुलती हैं, तो इसे ऊर्जा के बाहर जाने का संकेत माना जाता है। इससे मेहनत का फल टिक नहीं पाता। बेहतर यही है कि खिड़कियां अंदर की ओर खुलें। यदि ऐसा करना संभव न हो, तो अंदर की ओर पर्दे या हरे पौधे लगाकर ऊर्जा के संतुलन को बनाए रखा जा सकता है।   खराब खिड़कियों को नजरअंदाज न करें टूटी हुई या आवाज करने वाली खिड़कियां घर में नकारात्मकता बढ़ा सकती हैं। इससे वातावरण भारी और असहज महसूस होता है। इसलिए समय-समय पर उनकी मरम्मत कराना जरूरी है। साफ और सही स्थिति में रखी गई खिड़कियां सकारात्मक माहौल बनाए रखने में मदद करती हैं।

मार्क जकरबर्ग ने बदली टीम और रणनीति, ‘म्यूज स्पार्क’ के जरिए AI की रेस में सबसे आगे निकलने की तैयारी

फेसबुक की पेरेंटल कंपनी मेटा ने बुधवार को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) की इंडस्ट्री में बड़ा ऐलान किया है. कंपनी ने नए AI मॉडल को लॉन्च किया है, जिसका नाम म्यूज स्पार्क है. यह कंपनी के न्यू AI डिविजन का बनाया नया प्रोडक्ट है, जिसको लेकर कंपनी ने बीते करीब एक साल में बड़े स्तर पर इनवेस्टमेंट की है. लॉन्चिंग से पहले इस प्रोजेक्ट को इंटरनल नाम दिया गया था, जो 'एवोकाडो' था. अब म्यूज स्पार्क को मेटा के स्टैंडअलोन AI ऐप पर लॉन्च कर दिया है. अब आने वाले दिनों में इसको को मेटा के ऐप के लिए जारी किया जाएगा, जिसमें वॉट्सऐप, इंस्टाग्राम और मेटा एआई स्मार्ट ग्लास के नाम शामिल हैं. गूगल और ओपनएआई को देगा टक्कर वॉट्सऐप, इंस्टाग्राम में मिलने वाला मेटा एआई कई जगह पिछड़ने लगा था. अब म्यूज स्पार्क की मदद से कंपनी को बड़े फायदे की उम्मीद कर रही है. राइटिंग और रीजनिंग के मामले में म्यूज स्पार्क ने बेहतर रिजल्ट दिया है, जिसकी वजह से यह ओपनएआई, गूगल और एंथ्रोपिक के बेहतरीन मॉडल के लेवल के आसपास पहुंच चुका है. रिपोर्ट्स में कोडिंग को लेकर बड़ा अंतर दिखाया गया है. मौजूदा समय में एआई रेस में कोडिंग काबिलियत एक जरूरी स्टैंडर्ड बन चुके हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, कोडिंग के मामले में म्यूज स्पार्क अपने राइवल्स से थोड़ा पीछे रह गया है. मार्क जकरबर्ग ने बीते साल बनाई AI टीम मार्क जकरबर्ग AI को लेकर बीते करीब एक साल से बड़ी इनवेस्टमेंट कर रहे हैं और इंडस्ट्री के कई बड़े टैलेंट को उन्होंने अपनी AI टीम में मोटी रकम देकर शामिल किया है. जकरबर्ग ने 29 साल के एलेक्जेंटर वांग को मोटी रकम देकर कंपनी में शामिल कर चुके हैं और उनको चीफ एआई ऑफिसर की पोस्ट दी, साथ ही कंपनी ने लामा-4 मॉडल पर काम करने वाली पुरानी टीम को बदल दिया. नए टीम में ओपनएआई, गूगल और अन्य राइवल्स कंपनियों से नए लोगों को मोटी रकम देकर मेटा में शामिल किया गया. म्यूज स्पार्क को अभी बंद मॉडल रखा मेटा ने म्यूज स्पार्क के साथ एक बड़ा बदलाव किया है और इसके कोड को मौजूदा समय में प्राइवेट रखा है. इसको क्लोज्ड मॉडल भी कह सकते हैं. बताते चलें कि मेटा अपने एआई मॉडल्स को ओपेन सोर्स करता था, जिसकी मदद से डेवलपर्स को कोड यूज करने की परमिशन मिलती थी. मेटा का बड़ा इनवेस्टमेंट जकरबर्ग ने एआई डेवलपमेंट के लिए बड़े इनवेस्टमेंट की तैयारी करके रखी है. एआई डेवलपमेंट के नए डेटा सेंटर पर 600 अरब डॉलर खर्च करने का प्लान बनाया हुआ है. साल 2026 में मेटा लगभग 135 अरब डॉलर तक खर्च करने का प्लान बनाया है, जो बीते साल की तुलना में लगभग दोगुना है. बीते साल कंपनी ने 72 अरब डॉलर की इनवेस्टमेंट की थी. म्यूज स्पार्क को लेकर कंपनी ने बड़ा दांव लगाया है और इससे कंपनी अपने राइवल्स से आगे निकलना चाहती है. गूगल, ओपनएआई और एन्थ्रॉपिक जैसे नाम मेटा से काफी आगे निकल चुके थे. म्यूज स्पार्क कंपनी के लिए कितना फायदेमंद साबित होगा, वो तो आने वाले दिनों में ही पता चलेगा. 

आधार फ्रॉड से बचना है तो आज ही बनाएं वर्चुअल आईडी, सुरक्षित रहेगा आपका बैंक खाता और निजी डेटा

क्या आपको भी डर है कि तमाम जगहों पर आधार नंबर शेयर करने की वजह से आपके साथ आधार से जुड़ा किसी तरह का फ्रॉड हो सकता है? दरअसल इस तरह की खबरे आए दिन आती रहती हैं, जहां लोगों के आधार नंबर का गलत फायदा उठाते हुए उनके बैंक अकाउंट खाली कर दिए जाते हैं। हालांकि आप इस तरह के खतरे को लगभग खत्म कर सकते हैं, अगर आप अपने आधार नंबर के लिए VID बना लें। VID यानी कि वर्चुअल आईडी एक 16 नंबर की पहचान होती है, जिसे आप आधार नंबर शेयर करने की जगह पर साझा कर सकते हैं। इससे आपका आधार नंबर लीक होने और उसका गलत इस्तेमाल होने की संभावना न के बराबर रह जाती है। गौर करने वाली बात है कि आधार के लिए VID को जेनरेट करना भी काफी आसान है और आप इसे अपने फोन पर भी कर सकते हैं। अब सवाल यह है कि आखिर यह वर्चुअल आईडी काम कैसे करती है और आधार नंबर से यह कैसे और कितनी अलग है? क्या है VID? VID यानी कि वर्चुअल आईडी को आप आधार नंबर का एक डिजिटल सुरक्षा कवच मान सकते हैं। यह एक 16 नंबरों की अस्थायी संख्या होती है। इसका काम आपके असल आधार नंबर को सुरक्षित रखना होता है। इसे आप आधार वेरिफिकेशन के लिए जेनरेट कर सकते हैं और जितनी बार चाहें बदल सकते हैं। ऐसे में जिन जगहों पर आधार की जरूरत पड़ती है, वहां आपका आधार नंबर शेयर न होकर अलग-अलग 16 अंकों के अस्थायी नंबर शेयर होते हैं। इससे आपके साथ आधार के जरिए होने वाले किसी भी तरह के फ्रॉड का कोई चांस नहीं रहता। कैसे काम करता है VID? VID एक बार इस्तेमाल होने वाला मास्क नंबर होता है। इसका काम आपके असली आधार नंबर को छिपाकर, आधार से जुड़े आपके काम करवाना होता है। जब आप किसी संस्थान जैसे कि बैंक या सिम कार्ड स्टोर आदि को अपनी VID देते हैं, तो आपका आधार ऑथेंटिकेशन तो हो जाता है लेकिन संस्थान के पास आपका आधार नंबर नहीं पहुंचता। UIDAI का सर्वर आपके द्वारा शेयर की गई VID को आपके आधार नंबर से लिंक करके पहचानता है और एजेंसी को सिर्फ यह कन्फर्म करता है कि आपकी पहचान सही है। VID की खासियत क्या है? VID की सबसे बड़ी खासियत है कि यह अस्थायी होता है और आप जितने चाहें उतने VID जेनरेट कर सकते हैं। जैसे ही आप नया VID बनाएंगे, पुराना वाला अपने आप रद्द हो जाएगा। ऐसे में आपकी VID भले लीक हो जाए, लेकिन वह किसी काम की नहीं रहती। इसकी दूसरी खासियत है कि VID के जरिए वेरिफिकेशन करने पर सामने वाली संस्था को सिर्फ उतनी ही जानकारी मिलती है, जितनी सामने वाले के साथ शेयर करना जरूरी होती है। वहीं अगर आप आधार कार्ड को शेयर करते हैं, तो आपके कार्ड पर मौजूद सारी जानकारी सामने वाले के साथ शेयर होती है। कैसे जेनरेट करें VID?     VID जेनरेट करने के लिए आपको सबसे पहले https://myaadhaar.uidai.gov.in/ पर जाएं और अपने आधार नंबर की मदद से लॉग-इन करें।     इसके बाद Dashboard पर Generate Virtual ID पर क्लिक करें।     अब दो ऑप्शन में से Generate ID पर क्लिक करें     इसके बाद आपकी VID आपको दिखने लगेगी और साथ ही रजिस्टर्ड नंबर पर भी भेज दी जाएगी।

आंखों का फड़कना महज अंधविश्वास नहीं, शरीर में छिपी इन 5 कमियों का हो सकता है संकेत

आंखों के फड़कने को ज्यादातर लोग नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कई मामलों में यह शरीर का संकेत हो सकता है कि आपको थोड़ा आराम करना चाहिए या शरीर के इशारे को समझना चाहिए। आंखों का फड़कना आमतौर पर हानिकारक नहीं होता, लेकिन बार-बार या अधिक समय तक ऐसा होना शरीर में किसी असंतुलन का संकेत हो सकता है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि शरीर आपको क्या संकेत दे रहा है। अगर आंखों का फड़कना कई दिनों या हफ्तों तक बना रहे, आंखों में लालिमा, सूजन या दर्द हो, आंखें बार-बार अपने आप बंद हो जाएं या चेहरे के अन्य हिस्सों में हलचल महसूस हो, तो गंभीर संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत अपनी जांच कराएं। आंख फड़कने के कारण आमतौर पर लाइफस्टाइल से जुड़ी इन गलत आदतों के कारण आंख फड़कती है-     नींद की कमी- पर्याप्त आराम न मिलने से आंखों की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है, जिससे वे फड़कने लगती हैं।     तनाव- स्ट्रेस लेवल बढ़ने पर शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिसका असर मांसपेशियों पर पड़ता है। इसमें आंखों का फड़कना भी शामिल है।     ज्यादा स्क्रीन टाइम- फोन और लैपटॉप पर लंबे समय तक काम करने से आंखें थक जाती हैं और फड़कने लगती हैं।     चाय-कॉफी या शराब का अधिक सेवन- कैफीन या शराब के ज्यादा सेवन से नर्वस सिस्टम (तंत्रिका तंत्र) ज्यादा एक्टिव हो जाता है, जिससे मांसपेशियों की गति प्रभावित हो सकती है और आंख फड़कने की समस्या शुरू हो जाती है।     पोषण की कमी- हेल्दी डाइट न लेने से भी आंखें फड़कने की समस्या हो सकती है। मैग्नीशियम, विटामिन बी12 और पोटेशियम की कमी से आंखें फड़कने की तकलीफ हो सकती है। अपनी डाइट में हरी सब्जियां, फल, मेवे और डेयरी प्रोडक्ट शामिल करें। आंख फड़कने के गंभीर संकेत आंख फड़कना एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन कई बार ऐसा गंभीर समस्या के कारण भी हो सकता है। यदि आंखों का फड़कना चेहरे के अन्य हिस्सों में फैल जाए या आंख अपने आप बंद होने लगे, तो इसे नजरअंदाज न करें। कई बार आंखों के फड़कने की वजह निम्नलिखित रोग भी हो सकते हैं-     ब्लेफेरोस्पाज्म     पार्किंसंस     मल्टीपल स्केलेरोसिस     फेशियल नर्व डिसऑर्डर शरीर के इन संकेतों नजरअंदाज न करें शरीर में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों को अक्सर हम नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन ऐसा करना सही नहीं है। मन और शरीर आपस में गहरा संबंध है। अगर मानसिक स्वास्थ्य ठीक नहीं तो इसके लक्षण शरीर पर भी नजर आते हैं। काम या निजी जीवन का तनाव, लगातार चिंता या गहरी सोच, पर्याप्त आराम न मिलने से होने वाली मानसिक थकान, ये सभी समस्याएं सूक्ष्म रूप से शरीर को प्रभावित कर सकती हैं, जिसके कारण आंखों का फड़कना शुरू हो सकता है। शरीर के इन संकेतों नजरअंदाज नहीं करना चाहिए-     आंखों में ड्राइनेस- लंबे समय तक स्क्रीन के इस्तेमाल से आंखों में ड्राईनेस की समस्या हो सकती है।     आखों में एलर्जी या जलन- धूल और प्रदूषण के कारण आखों में एलर्जी या जलन हो सकती है।     थकान- शरीर पर ज्यादा जोर डालने से मांसपेशियों के फड़कने की समस्या हो सकती है। आंखों का फड़कना बहुत ज्यादा थकान का संकेत हो सकता है। आंखों का फड़कना कैसे रोकें आंखों का फड़कना रोकने के लिए ये उपाय किए जा सकते हैं-     7 से 8 घंटे की पर्याप्त नींद लें     स्क्रीन टाइम से ब्रेक लें     कैफीन और शराब से परहेज करें     मेडिटेशन और ब्रीदिंग एक्सरसाइज करें     हेल्दी डाइट लें आंख फड़कने के संकेत समझें आंखों की मांसपेशियां बेहद संवेदनशील होती हैं। ये मामूली परेशानी से भी फड़कने लगती हैं। आंखों का फड़कना भले ही मामूली लगे, लेकिन कई बार ये शरीर की शुरुआती चेतावनी के संकेत हो सकते हैं। इस पर ध्यान देने से बड़ी समस्याओं को बढ़ने से पहले ठीक किया जा सकता है। पर्याप्त नींद, हेल्दी डाइट, मेडिटेशन, चाय-कॉफी और शराब से दूरी और स्क्रीन टाइम को कंट्रोल करके आंखों के फड़कने की समस्या को रोका जा सकता है।  

Redmi A7 Pro 5G की लॉन्च डेट कंफर्म, 6300mAh बैटरी और ‘iPhone जैसी नॉच’ के साथ 13 अप्रैल को देगा दस्तक

Xiaomi का रेडमी ब्रांड भारत में नया स्मार्टफोन लेकर आ रहा है, जिसका नाम Redmi A7 Pro 5G है. कंपनी ने कंफर्म कर दिया है कि 13 अप्रैल को यह हैंडसेट लॉन्च होगा और कंपनी ने इसके साथ किंग ऑफ पावर एंड स्टाइल टैगलाइन का यूज किया है. Xiaomi के ऑफिशियल पोर्टल पर एक माइक्रोसाइट तैयार की है, जहां पर Redmi A7 Pro 5G को लेकर डिटेल्स शेयर की है. यह एक अफोर्डेबल 5G फोन है. कंपनी ने स्मार्टफोन का बैक पैनल, प्रोसेसर और बैटरी आदि के बारे में डिटेल्स शेयर की है. Xiaomi ने अनवील कर दिया है कि Redmi A7 Pro 5G में 6300mAh की बैटरी दी गई है. कंपनी ने बताया है कि एक बार फुल चार्जिंग के बाद यह हैंडसेट पूरे दिन आसानी से इस्तेमाल किया जा सकेगा. हालांकि चार्जिंग कैपिसिटी को लेकर कोई ऑफिशियली जानकारी नहीं दी गई है. Redmi A7 Pro 5G का डिस्प्ले Redmi A7 Pro 5G में 6.9 इंच का डिस्प्ले दिया जाएगा. ऑफिशियल पोर्टल पर लिस्ट डिटेल्स में बताया गया है कि यह सेगमेंट का सबसे बड़ा और स्मूद डिस्प्ले मिलेगा. ऑफिशियल पोर्टल पर बताया गया है कि इसमें शाओमी हाइपरलैंड दिया जाएगा. जहां आईफोन की तरह की तरह नॉच के पास नोटिफिकेशन्स और कुछ कंट्रोल्स नजर आएंगे. Redmi A7 Pro 5G का कैमरा Redmi A7 Pro 5G के बैक पैनल को दिखाया जा चुका है, जिससे पता चलता है कि इसमें डुअल कैमरा लेंस मिलेगा. साथ ही कंपनी ने ऑफिशियल पोर्टल पर बताया गया है कि इसमें 32MP का डुअल AI कैमरा है. ऑफिशिल पोर्टल पर इस हैंडसेट के जरिए दिखाया गया है कि यह एक ड्यूरेबल हैंडसेट है. हालांकि अभी ड्यूरेबिलिटी की रेटिंग और सर्टिफिकेशन आदि के बारे में डिटेल्स नहीं दी है.