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गर्मी में एसी का सही इस्तेमाल,6–8 घंटे चलाना सुरक्षित, 24–26°C तापमान सबसे बेहतर

अप्रैल में ही गर्मी इस बार रिकॉर्डतोड़ रही है. गर्मियों ने अपना ऐसा रंग दिखाया कि ज्यादातर घरों में लगातार एसी चलने लगे हैं. बाहर की तपिश में एसी की ठंडी हवा न केवल सुकून देती है, बल्कि भट्टी जैसे गर्म हो रहे घर को जीने के लायक भी बनाती है. हालांकि, एसी से गर्मी से छुटकारा तो मिल जाता है, लेकिन इसका ज्यादा इस्तेमाल बिजली के बिल को भी तेजी से बढ़ाता है. इतना ही नहीं हर समय एसी की हवा खाने से सेहत पर भी असर पड़ सकता है. ऐसे में एसी को समझदारी से चलाना बहुत जरूरी है, ताकि ठंडक भी मिले और नुकसान भी न हो. ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या इस भीषण गर्मी में बिना अपनी जेब और सेहत को नुकसान पहुंचाए चैन की नींद ली जा सकती है? इसके साथ ही आखिर दिन में कितने घंटे एसी चलाना सही रहता है? आइए जानते हैं कि एक दिन में कितने घंटे एसी चलाना चाहिए. कितनी देर तक एसी चलाना सही है? अगर आप अपने कमरे को ठंडा करने के लिए लगातार एसी चलाए रखते हैं, तो आप बहुत बड़ी गलती कर रहे हैं. लंबे समय तक एसी चलाना सही नहीं माना जाता है. क्योंकि एसी की हवा में ज्यादा देर बैठने से स्किन रूखी होती है और इसके साथ ही कई हेल्थ समस्याएं भी हो सकती है. ऐसे में कोशिश करें कि एसी को एक बार में करीब 6–8 घंटे तक ही इस्तेमाल करें. जब कमरा अच्छी तरह ठंडा हो जाए, तो कुछ देर के लिए एसी बंद कर दें या फिर पंखा चला लें. इससे तीन फायदे होते हैं. पहला एसी पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता और उसके खराब होने के चांस घट जाते हैं, दूसरा आपकी स्किन/ सेहत सही बनी रहती है और साथ ही बिजली की खपत भी कम होती है. इस हिसाब से आप एसी को एक दिन में 12-14 घंटे चला सकते हैं. ज्यादा एसी में रहने के नुकसान हर समय एसी में बैठे रहना भी सेहत के लिए सही नहीं माना जाता. इस पर कई तरह की रिसर्च की गई हैं जिनके अनुसार, जब आप लगातार ठंडी जगह पर रहते हैं तो शरीर कम कैलोरी बर्न करता है, क्योंकि उसे अपने टेंपरेचर को बैलेंस रखने के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती. इसका असर धीरे-धीरे शरीर पर दिखने लगता है. इससे वजन बढ़ने का खतरा रहता है, स्किन सूखने लगती है और सिर दर्द या थकान भी महसूस हो सकती है. इसलिए जरूरी है कि आप बीच-बीच में एसी से बाहर निकलें और नेचुरल हवा में रहें. किस टेंपरेचर पर चलाना होता है बेस्ट? अगर आप चाहते हैं कि आपका एसी कमरे को अच्छे से ठंडा भी करे और बिजली का बिल भी ज्यादा न आए, तो इसे सही टेंपरेचर पर चलाना बहुत जरूरी है. एक्स्पर्ट की मानें तो एसी के टेंपरेचर को 24°C से 26°C के बीच रखना सबसे बढ़िया माना जाता है. इस टेंपरेचर पर कमरा ठंडा भी रहता है और बिजली की खपत भी कम होती है. 16°C या 18°C पर एसी चलाने से बिजली की खपत ज्यादा होती है.  

10,000 स्टेप्स का नियम हर किसी के लिए जरूरी नहीं, डॉक्टरों ने दी चेतावनी

 आज के समय में फिटनेस फ्रीक और फिटनेस के लिए अवेयर रहने वाले लोग अक्सर पैदल चलने को भी महत्व देते हैं. अगर किसी से भी पूछो कि वह दिन में कितने स्टेप्स चलता है तो हर किसी का जवाब होता है, 10 हजार कदम. ऐसे में हर कोई अपनी स्मार्टवॉच में 10,000 कदम का आंकड़ा ही सिलेक्ट करता है और दिनभर उसके मुताबिक ही चलता है. डॉक्टर्स की मानें तो यह 'जादुई नंबर' हर किसी के लिए सुरक्षित नहीं है. बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बिना अपनी शारीरिक क्षमता को समझे इतना ज्यादा पैदल चलना आपके जोड़ों के लिए मुसीबत बन सकता है. खासकर उन लोगों के लिए जो पहले से ही किसी फिजिकल समस्या से जूझ रहे हैं. 10,000 स्टेप्स का चलना कितना जरूरी? पीडी हिंदुजा हॉस्पिटल और एमआरसी सेंटर के ऑर्थोपेडिक्स डॉ. प्रदीप मूनोट का कहना है, अधिकतर लोग मानते हैं कि जितना अधिक चलेंगे, उतने फिट रहेंगे. लेकिन मेडिकल साइंस के अनुसार, 10,000 कदम का कोई ठोस वैज्ञानिक आधार नहीं है. डॉक्टर का कहना है कि यह केवल एक मार्केटिंग स्ट्रेटजी के तौर पर शुरू हुआ था कि सबको 10 हजार कदम चलना चाहिए. ओवरवेट लोगों या बुजुर्गों के लिए अचानक से इतने कदम चलने से एक्स्ट्रा लोड पड़ सकता है जिससे घुटने के कार्टिलेज (हड्डियों के बीच की कुशनिंग) घिसने लगती है.   जोड़ों पर कैसे पड़ता है असर? डॉ. प्रदीम का कहना है, जब हम चलते हैं तो हमारे शरीर के वजन का पूरा भार घुटनों पर आता है. अगर कोई व्यक्ति गलत जूतों में या कठोर जगह पर 10 हजार कदम चलता है तो उसे ओवरयूज़ इंजरी हो सकती है. यदि आपको वॉक के समय घुटनों में सूजन, दर्द या कटकट की आवाज आने लगे तो समझ लीजिए कि आपके जोड़ों पर लोड आ रहा है और और तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए. जबरदस्ती 10 हजार कदम चलने का गोलपूरा करना ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है. वॉकिंग का क्या है सही तरीका? फिट रहने के लिए केवल कदमों की गिनती काफी नहीं है. डॉक्टरों का सुझाव है कि 7,000 से 8,000 कदम भी सेहत के लिए पर्याप्त होते हैं. पैदल चलने के साथ-साथ स्ट्रेंथ ट्रेनिंग भी जरूरी है ताकि मसल्स भी मजबूत बने रहें और जोड़ों पर अधिक लोड न पड़े. चलने के लिए हमेशा अच्छे कुशन वाले जूतों का चुनाव करें और कंक्रीट की जगह घास या नरम सतह पर टहलें.  

बाल झड़ने की समस्या का नया समाधान: स्टेम सेल रिसर्च से गंजेपन के इलाज की उम्मीद

 बाल गिरना आज के समय में अधिकतर महिला और पुरुष की समस्या बन चुका है. इसके कारण कई लोग परेशान रहते हैं लेकिन उन्हें अपने हेयर फॉल को रोकने का सही तरीका नहीं मिलता. ऐसे में कई लोग सोचते हैं कि काश उनके झड़े हुए बाल दोबारा आ जाएं. पहले तो ऐसा पॉसिबल नहीं था लेकिन अब ऐसे लोगों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी आई है. हाल ही में हुई एक रिसर्च ने गंजेपन के इलाज के पुराने दावों को चुनौती देते हुए यह साबित किया है कि बालों का झड़ना अब लाइलाज नहीं रहा. वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि बालों की जड़ें यानी स्टेम सेल्स पूरी तरह खत्म नहीं होतीं. यानी वे सिर्फ सो जाती हैं और सही तकनीक से उन्हें फिर से एक्टिव किया जा सकता है. क्या कहती है यह नई रिसर्च? स्टेम सेल रिव्यूज एंड रिपोर्ट्स (Stem Cell Reviews and Reports) में पब्लिश्ड स्टडी के मुताबिक, बालों के झड़ने का मुख्य कारण केवल हार्मोन या जेनेटिक्स नहीं है. रिसर्चर्स ने पाया कि हमारे सिर की त्वचा का वातावरण यानी एक्सट्रासेलुलर मैट्रिक्स (ECM) जब सख्त हो जाती है तो वहां मौजूद स्टेम सेल्स को बढ़ने का सिग्नल नहीं मिल पाता. इसे आसान भाषा में ऐसे समझिए कि जैसे बंजर जमीन पर बीज नहीं पनपते वैसे ही कठोर हुए स्कैल्प में बाल नहीं उग पाते. एक्सपर्ट्स और डॉक्टर्स की राय रिसर्च के को-राइटर और क्लिनिकल साइंटिस्ट डॉ. देबराज शोम (Dr. Debraj Shome) का कहना है, अब तक हम सिर्फ बालों के स्ट्रैंड्स पर ध्यान दे रहे थे लेकिन असली खेल स्कैल्प के इकोसिस्टम का है. दरअसल, हार्मोन और जेनेटिक्स की कहानी हमेशा से अधूरी थी. स्टेम सेल्स के आसपास का भौतिक वातावरण उतना ही मायने रखता है जितना कि खुद कोशिकाएं. दरअसल, माइक्रोनीडलिंग और बायोमटेरियल स्कैफोल्ड्स जैसी तकनीकों से स्कैल्प के सख्त टिश्यूज को फिर से नरम बनाया जा सकता है जिससे बाल दोबारा उगने लगते हैं. कैसे होगा दोबारा हेयर ग्रोथ? स्टडी में पाया गया कि जब स्कैल्प को मैकेनिकल स्टिमुलेशन के जरिए सुधारा जाता है तो शरीर के अंदर 'Wnt' और 'YAP/TAZ' जैसे महत्वपूर्ण बायोलॉजिकल पाथवे फिर से एक्टिव हो जाते हैं. क्लिनिकल ट्रायल के दौरान देखा गया कि केवल 12 हफ्तों के भीतर बालों की डेंसिटी में 20 से 30 प्रतिशत तक का सुधार हुआ था. यह उन लोगों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है जिन पर मिनोक्सिडिल जैसी दवाएं असर करना बंद कर चुकी हैं.

गर्मी में ठंडक और स्वाद का कॉम्बो: अचारी लौकी सलाद बनाने की आसान रेसिपी

 गर्मियों के मौसम में जब कुछ हल्का और चटपटा खाने का मन होता है तो अक्सर सलाद खाने का मन करता है. लेकिन क्या आपने कभी अचारी लौकी सलाद ट्राई किया है. इसमें लौकी की ठंडक और अचार के मसालों का चटपटा स्वाद मिलता है जो खाने का मजा कई गुना बढ़ा देता है. इसका स्वाद इतना लाजवाब होता है कि लौकी न खाने वाले भी इसे मांग-मांगकर खाते हैं. खास बात यह है कि यह सलाद बिना तेल के बनता है और झटपट तैयार हो जाता है, इसलिए हेल्दी डाइट फॉलो करने वालों के लिए भी यह एक बेहतर ऑप्शन है.  आइए जानते हैं कि लौकी का अचारी सलाद कैसे बनता है और इसे बनाने के लिए किन-किन चीजों की जरूरत होती है. इंग्रेडिएंट्स (ingredients) 1 कप कद्दूकस की हुई या हल्की उबली लौकी 1/2 कप दही 1 चम्मच अचारी मसाला (अचार का मसाला या घर का बना) 1/2 चम्मच भुना जीरा पाउडर चुटकी भर काली मिर्च 1 चम्मच नींबू का रस नमक स्वादानुसार थोड़ा सा हरा धनिया (गार्निश के लिए) लौकी का अचारी सलाद कैसे बनाते हैं?     लौकी का अचारी सलाद बनाने के लिए सबसे पहले लौकी को हल्का उबाल लें या कद्दूकस करके उसमें थोड़ा नमक मिलाकर 5 मिनट रख दें. इसके बाद उसका पानी अच्छी तरह निचोड़ लें.     अब एक बाउल में दही को अच्छी तरह फेंट लें. इसमें अचारी मसाला, नमक, भुना जीरा पाउडर, काली मिर्च और नींबू का रस डालकर अच्छे से मिलाएं.     अब इसमें तैयार की हुई लौकी डालें और अच्छी तरह मिक्स करें. ऊपर से हरा धनिया डालकर गार्निश करें और सलाद को हल्का ठंडा करके सर्व करें.     अचारी मसाले के लिए आप घर के आम या मिक्स अचार का मसाला इस्तेमाल कर सकते हैं. चाहें तो इसमें थोड़ा कटा हुआ प्याज या टमाटर भी डाल सकते हैं, इससे इसका स्वाद और बढ़ जाएगा.  

महिला स्वास्थ्य का आधार है मासिक धर्म, जानें इसे नियमित रखने के सरल उपाय

मासिक धर्म को हर महीने होने वाली साधारण प्रक्रिया के तौर पर देखा जाता है, लेकिन यह केवल सामान्य प्रक्रिया नहीं, बल्कि महिला के शरीर के शुद्धिकरण की प्राकृतिक प्रक्रिया मानी जाती है। आयुर्वेद में इसे “आर्तव चक्र” कहा गया है और महिला स्वास्थ्य का मूल आधार माना गया है, लेकिन आज के समय में खराब जीवनशैली की वजह से मासिक धर्म में गड़बड़ी, दर्द होना, पेडू पर सूजन आना, और गर्भाशय में सिस्ट का होना तेजी से बढ़ती समस्याएं बनती जा रही हैं। इससे हार्मोन संतुलन और प्रजनन क्षमता पर फर्क पड़ता है।  चरक संहिता और सुश्रुत संहिता में मासिक धर्म को “आर्तव प्रवृत्ति” कहा गया है, जो हर महीने 3 से लेकर 5 दिनों तक होता है। हालांकि, जीवन शैली बिगड़ने से मासिक चक्र में गड़बड़ी हो जाती है, और इसके पीछे का कारण है शरीर के तीनों दोष। वात दोष असंतुलन से कमर दर्द और शरीर में ऐंठन बनी रहती है, और पित्त दोष असंतुलन से रक्त का प्रवाह अधिक हो जाता है और शरीर में जलन और गर्मी महसूस होती है, जबकि कफ दोष असंतुलन से शरीर भारी और सुस्त महसूस करता है। आयुर्वेद में मासिक धर्म को नियमित करने के कई उपाय बताए गए हैं, जिसमें पहला उपाय है संतुलित आहार। संतुलित आहार में हरी पत्तेदार सब्जियां और मौसमी फल खाने की सलाह दी जाती है। इसके साथ ही तैलीय, मसालेदार और जंक फूड खाने से परहेज करना चाहिए। आयुर्वेदिक औषधियां भी मासिक धर्म को नियमित करने में मदद कर सकती हैं। अशोक, शतावरी और लोध्र जैसे औषधीय तत्व हार्मोन संतुलन में सहायक होते हैं और मासिक धर्म को नियमित कर दर्द से राहत दिलाते हैं। हालांकि सेवन से पहले सही मात्रा और समाधान के लिए चिकित्सक की सलाह जरूर लें। मासिक धर्म को नियमित करने के लिए नियमित दिनचर्या का होना भी जरूरी है। देर रात तक जागना और नींद की कमी हार्मोनल असंतुलन बढ़ा सकती है। समय पर सोना-उठना आवश्यक है और इसके साथ ही रोजाना सुबह योग और प्राणायाम जरूर करें। भद्रासन, पवनमुक्तासन और अनुलोम-विलोम मासिक धर्म को नियमित करने में मददगार हैं।

प्रेग्नेंसी में योगासन के अनगिनत लाभ, आयुष मंत्रालय ने किया खुलासा

नई दिल्ली  गर्भावस्था एक महिला के जीवन में बदलाव, शक्ति और नई शुरुआत का खूबसूरत सफर है। इस दौरान मां की सेहत का खास ख्याल रखना जरूरी है क्योंकि मां स्वस्थ रहेगी तो बच्चा भी स्वस्थ रहेगा। भारत सरकार का आयुष मंत्रालय गर्भवती महिलाओं को योग करने की सलाह देता है। योग न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद है। प्रेग्नेंसी के दौरान योग करने से कई समस्याएं कम हो जाती हैं। आमतौर पर महिलाओं को पीठ दर्द, सिरदर्द, मतली और सांस लेने में तकलीफ होती है। नियमित योग इन परेशानियों को काफी हद तक कम कर देता है। योग आसनों से शरीर में लचीलापन आता है, मांसपेशियां मजबूत होती हैं और प्रसव के समय जरूरी ताकत और सहनशक्ति मिलती है। योग नींद की गुणवत्ता भी सुधारता है। गर्भावस्था में कई महिलाएं नींद की समस्या से जूझती हैं। योग से गहरी और आरामदायक नींद आती है। साथ ही यह स्ट्रेस और एंग्जायटी को कम करने में बहुत मदद करता है। प्रेग्नेंसी के दौरान तनाव का होना आम है, लेकिन योग से मन शांत रहता है और मां बच्चे से गहरा भावनात्मक जुड़ाव महसूस करती है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, योग मां का पालन-पोषण करता है ताकि वह आने वाले बच्चे का अच्छे से पालन-पोषण कर सके। यह मां को शांत, संतुलित और ऊर्जावान बनाए रखता है। गर्भावस्था के हर पड़ाव पर योग मां को शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार करता है। मदर्स डे (10 मई) के अवसर पर आयुष मंत्रालय ने खास अपील की है कि हर गर्भवती मां योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करे। मंत्रालय का कहना है कि “मां का पहला तोहफा सेहत है”। वह योग अपनाकर खुद को स्वस्थ रख सकती है और बच्चे को भी स्वस्थ जीवन दे सकती है। योग के आसान और सुरक्षित आसन गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए हैं। इन्हें डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह से करना चाहिए। सही तरीके से किए गए योग से न सिर्फ प्रसव आसान होता है बल्कि प्रसव के बाद रिकवरी भी तेज होती है।

चींटियों से छुटकारा पाने का आसान तरीका! डिटॉल और हींग वाला स्प्रे करेगा काम

किचन घर का एक ऐसा कोना है जहां साफ-सफाई सबसे जरूरी हो जाती है क्योंकि यहां आपका खाना-पीना बनता है जो सीधे आपकी सेहत पर असर करता है. लेकिन खाने-पीने की चीजों की वजह से किचन में चींटिया और कॉकरोच जैसे कीड़े-मकोड़े खिचें चले आते हैं. चीनी का एक दाना या खाने की हल्की सी महक भी चींटियों की पूरी फौज को दावत दे देती है. बाजार में मिलने वाले कीटनाशक स्प्रे खाने की जगह पर इस्तेमाल करना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है. ऐसे में मशहूर शेफ पंकज भदौरिया की ट्रिक आपके काफी काम आ सकती है. उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर कुछ समय पहले ये ट्रिक शेयर की थी. इस नुस्खे की सबसे अच्छी बात यह है कि इससे चींटियों को कोई नुकसान पहुंचाए बिना उन्हें भगाया जा सकता है जिससे आपकी रसोई भी सुरक्षित और साफ बनी रहती है. पंकज भदौरिया ने दी ये टिप शेफ पंकज के अनुसार, चींटियों को भगाने के लिए एक स्प्रे बॉटल लीजिए. इसमें 2 चम्मच डिटॉल मिलाएं और एक चम्मच पिसी हुई हींग. अब इसे अच्छी तरह शेक कर लीजिए. वो बताती हैं कि हींग और डिटॉल की महक चींटियों को दूर रखती है. इसे आप किचन समेत घर में कहीं भी स्प्रे कर सकते हैं और चींटियों से छुटकारा पा सकते हैं. ये तरीके भी आ सकते हैं काम यहां हम आपको कुछ और घरेलू नुस्खे भी बता रहे हैं जो आपके घर को चींटियों से मुक्त रख सकते हैं. चींटियों को भगाने के लिए सफेद सिरका भी काफी शक्तिशाली हथियार है. इसके लिए एक स्प्रे बोतल में बराबर मात्रा में पानी और सफेद सिरका मिलाएं. जहां भी आपको चींटियों की कतार दिखे या उनके घुसने की जगह हो (जैसे खिड़कियों के कोने, दराजों के नीचे या स्लैब के किनारे), वहां इस मिश्रण का छिड़काव करें.

स्मार्टफोन खरीदना हुआ महंगा! OnePlus, Realme और Xiaomi ने बढ़ाई कीमतें, 6 हजार तक का इजाफा

भारत में स्मार्टफोन महंगे हो गए हैं. अब अगर आपको न्यू स्मार्टफोन खरीदना है तो 6 हजार रुपये तक एक्स्ट्रा खर्च करने होंगे. कीमत बढ़ाने वाली कंपनियों में शाओमी, रियलमी, वनप्लस और नथिंग जैसे नाम शामिल हैं.  नई कीमतों को ऑफिशियल वेबसाइट पर अपडेट किया जा चुका है. भारत में कंपनियों ने अपने मिड रेंज और प्रीमियम सेगमेंट के स्मार्टफोन को महंगा कर दिया गया है. ये नई कीमत ऑफिशयल पोर्टल पर अपडेट हो चुकी हैं. स्मार्टफोन महंगे क्यों हुए हैं? स्मार्टफोन इंडस्ट्री लगातार बढ़ती कंपोनेंट्स की बढ़ती कीमतों का सामना कर रही है. खासकर मेमोरी और स्टोरेज चिप्स की कीमत में बढ़ोत्तरी हुई है. आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) की मांग भी तेजी से बढ़ रही है, जिसकी वजह से टेक कंपनियां अपने डेटा सेंटर के लिए बड़ी मात्रा में RAM और GPU चिप्स खरीद रही हैं. ऐसे में स्मार्टफोन्स में इस्तेमाल होने वाले जरूरी कंपोनेंट्स की कमी हो चुकी है. रैम मैन्युफैक्चरर अब हाई एंड बैंडविड्थ मेमोरी पर फोकस कर रही हैं. ऐसे में सप्लाई चेन प्रभावित हुई है. OnePlus ने महंगे किए फोन OnePlus की ऑफिशियल वेबसाइट पर हैंडसेट महंगे किए जा चुके हैं. जब हमने वनप्लस के ऑफिशियल पोर्टल पर विजिट किया तो पाया कि OnePlus 15 और OnePlus 15R की नई कीमतें जारी की जा चुकी हैं. OnePlus 15 को भारत में 72,999 रुपये में लॉन्च किया था अब कंपनी ने कीमत बढ़ाकर नई कीमत 77,999 रुपये कर दी है, जिसमें 12GB RAM + 256GB स्टोरेज वेरिएंट मिलता है. वनप्लस 15 के टॉप एंड वेरिएंट यानी 16GB RAM + 512GB स्टोरेज अब 85,999 रुपये में लिस्ट किया है. यहां पर 6 हजार रुपये तक का इजाफा देखने को मिला. वनप्लस 15R की कीमत में करीब 2500 रुपये तक का इजाफा किया गया है. शुरुआती पहले वेरिएंट पहले 50,499 रुपये में था, जो अब 52,999 रुपये में आता है. दूसरे वेरिएंट की कीमत 55,499 रुपये से बढ़ाकर 57,999 रुपये की जा चुकी है. रियलमी ने महंगे किए फोन रियलमी ने भी स्मार्टफोन को महंगा कर दिया है. अभी करीब 6 हैंडसेट की कीमत में इजाफा हुआ है. हर एक स्टोरेज वेरिएंट की कीमत में करीब 1 हजार रुपये का इजाफा दिया गया है. इसमें रियलमी सी71 5जी, रियलमी 15x 5G, रियलमी 15T 5G, रियलमी C85 5G, रियलमी 16 Pro 5G और रियलमी 16 प्रो + 5G हैंडसेट शामिल हैं. शाओमी के भी स्मार्टफोन हुए महंगे चीनी स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरर ने अपने स्मार्टफोन की कीमत में इजाफा कर दिया है. ऑफिशियल पोर्टल पर कंपनी ने अपने हैंडसेट की कीमत को रिवाइज कर दिया है. इसमें  Redmi Note 15 सीरीज के हैंडसेट के नाम शामिल हैं.

दिल्ली के विवेक विहार में AC ब्लास्ट से बड़ा हादसा! 9 लोगों की मौत, जानें कैसे होता है AC में आग लगने का खतरा

दिल्ली के विवेक विहार स्थित एक घर में आग लग गई. आग लगने की वजह एयर कंडीशनर (AC) ब्लास्ट को बताया गया है, जिसकी वजह से घर में मौजूद 9 लोगों की मौत हो चुकी है. कई लोग बुरी तरह से झुलस गए. फायर कर्मी ने बताया है कि सुबह करीब 3:47 बजे सूचना मिली थी. इसके बाद मौके पर 14 फायर टेंडर पहुंचीं और आग बुझाने का काम किया. शुरुआत जांच में बताया गया है कि आग लगने की वजह AC में ब्लास्ट बताया है. आजकल गर्मी से राहत पाने के लिए बहुत से लोग घरों में AC का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में ये जानना जरूरी है कि AC ब्लास्ट होने के मुख्य कारण क्या है और उनसे बचाव कैसे किया जा सकता है. AC में ब्लास्ट या आग लगने के 5 बड़े कारण AC में इलेक्ट्रिक शॉट सर्किट गर्मी से राहत पाने के लिए बहुत से लोग AC का यूज करते हैं. ऐसे में AC अगर कई घंटे चल रही है और इलेक्ट्रिक तार लूज है या खराब क्वालिटी का है, तो उसमें शॉट सर्किट हो सकता है, जिसकी वजह से आग लगती है. बचाव के लिए जरूरी है कि AC सर्विसिंग कराने के साथ-साथ इलेक्ट्रिशियन से तार भी चेक करा लें. ओवरलोड या फ्लक्चुएशन AC में आग लगने का दूसरा सबसे बड़ा और अहम कारण इलेक्ट्रिक वॉल्टेज का फ्लक्चुएट होना है. इसकी वजह से AC के पार्ट्स खराब या जल जाते हैं. AC में लगने वाली आग मिनटों में पूरे घर में फैल जाती है.  वॉल्टेज फ्लेक्चुएशन से AC को बचाने के लिए स्टेबलाइजर का यूज जरूर करें. AC में धूल और गंदगी होना AC के अंदर एक बड़ा मैकेनिज्म होता है, जिसको ठंडा करने के लिए पंखा भी लगा होता है. कई AC काफी गंदे होते हैं और उनपर ढेर सारी धूल मिट्टी जमा होती है. ऐसे AC में आग लग जाती है. बचाव के लिए जरूरी है कि AC को रेगुलर क्लीन कराएं. सस्ते पार्ट्स का इस्तेमाल AC में आग लगने की एक अन्य वजह खराब क्वालिटी के पार्ट्स भी होते हैं. अगर AC रिपेयरिंग के दौरान घटिया क्वालिटी के पार्ट्स का यूज होते हैं, तो उसकी वजह से भी आग लग सकती है. ये बहुत जानलेवा हो सकती है. खराब इंस्टॉलेशन या मेंटेनेंस लोकल मेकेनिक के द्वारा अगर खराब तरीके से इंस्टॉलेशन होती है, उसकी वजह से भी AC में आग लग सकती है. इसलिए जरूरी है कि कंपनी के मैकेनिक से काम करना चाहिए, जिनको खासतौर से ब्रांड ट्रेनिंग देता है. 

चुकंदर का जूस हर किसी के लिए फायदेमंद नहीं! इन लोगों के लिए बन सकता है खतरनाक

आजकल लोग अपनी फिटनेस का खास ख्याल रखने लगे हैं और इसी वजह से जिम जाने वाले और हेल्थ कॉन्शियस लोग सब्जियों का जूस अधिक पीने लगे हैं. इसी कड़ी में सुबह-सुबह हेल्दी ड्रिंक के नाम पर चुकंदर का जूस पीना आजकल ट्रेंड बन चुका है. सोशल मीडिया से लेकर फिटनेस एक्सपर्ट्स तक, हर कोई इसके फायदे गिनाता है. लेकिन हर चीज के फायदे के साथ कुछ नुकसान भी होते हैं. उसी तरह चुकंदर का जूस जिसे हेल्दी मानकर लोग पी रहे हैं, वो कुछ लोगों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. चुकंदर का जूस पोषक तत्वों से भरपूर जरूर है, लेकिन यह हर शरीर पर एक जैसा असर नहीं करता. कई बार इसको ज्यादा पीना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है. इसलिए इस जूस को पीने से पहले यह जान लीजिए कि क्या यह आपके लिए सही है या नहीं. डाइजेशन से जुड़ी दिक्कतों से परेशान लोग जिन लोगों को अक्सर डाइजेशन की समस्या रहती है,उनको इस जूस से परहेज करना चाहिए. कुछ लोगों को चुकंदर का जूस पीने के बाद पेट फूलना, ऐंठन, गैस या दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं. एक्सपर्ट्स के अनुसार, चुकंदर में मौजूद प्राकृतिक नाइट्रेट्स और फाइबर कुछ लोगों के डाइजेस्टिव सिस्टम पर तेज असर डाल सकते हैं, खासकर जब इसे खाली पेट पिया जाए. पेशाब का लाल होना अगर चुकंदर का जूस पीने के बाद आपका पेशाब या मल लाल दिखाई दे, तो घबराने की जरूरत नहीं है. इसे बीटुरिया कहा जाता है. हार्वर्ड मेडिकल स्कूल (HMS)के हेल्थ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि यह चुकंदर के प्राकृतिक पिगमेंट के कारण होता है और आमतौर पर हानिकारक नहीं होता है. किडनी स्टोन वालों के लिए खतरा चुकंदर में ऑक्सलेट की मात्रा अधिक होती है. इस वजह से किडनी स्टोन वाले मरीजों को इससे परहेज करना चाहिए. अमेरिका की नेशनल किडनी फाउंडेशन (NKF) के अनुसार, ज्यादा ऑक्सलेट शरीर में कैल्शियम के साथ मिलकर किडनी स्टोन बनने का खतरा बढ़ा सकता है, जिन लोगों को पहले से किडनी स्टोन की समस्या है, उन्हें इसका सीमित सेवन करना चाहिए. लो ब्लड प्रेशर वालों के लिए सावधानी चुकंदर का जूस ब्लड प्रेशर कम करने में मदद करता है. लेकिन अगर आपका बीपी पहले से कम है या आप उसकी दवाई ले रहे हैं. तो यह ज्यादा लो का कारण बन सकता है, जिससे चक्कर और कमजोरी महसूस हो सकती है. किन लोगों को चुकंदर के जूस से बचना चाहिए?     किडनी स्टोन या किडनी रोग वाले लोग     लो ब्लड प्रेशर के मरीज     डायबिटीज वाले लोग     कमजोर पाचन तंत्र वाले लोग     प्रेग्नेंट महिलाएं चुकंदर का जूस पीने का सही तरीका क्या है? चुकंदर का जूस पूरी तरह खराब नहीं है, लेकिन इसे जितना ज्यादा, उतना बेहतर समझ कर पीना गलती हो सकती है. एक लिमिट में ही किसी भी चीज का सेवन सही होता है और शुरुआत में इसे पीने के बाद अपने शरीर में होने वाले रिएक्शन का भी ध्यान रखें. अगर कुछ भी बदलाव नजर आए तो पहले तुरंत जूस पीना बंद कर दें और डॉक्टर से सलाह लें.