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Vivo X Fold 6 की भारत में एंट्री, 200MP कैमरा और 6900mAh बैटरी से लैस; कीमत ₹2.19 लाख

नई दिल्ली Vivo X Fold 6 स्मार्टफोन इंडियन मार्केट में Vivo V80 और मिड रेंज के Vivo S2 FE के साथ लॉन्च हो गया है। वीवो का यह फोल्डेबल फोन 8.02-इंच की इनर फोल्डेबल AMOLED डिस्प्ले, MediaTek Dimensity 9500 Super चिपसेट और 6,900mAh की बैटरी के साथ लॉन्च किया गया है। इस फोन में कंपनी ने Zeiss ट्यून 200-मेगापिक्सल कैमरा दिया है। Vivo X Fold 6 की कीमत Vivo X Fold 6 स्मार्टफोन का बेस वेरिएंट 12GB रैम और 512GB स्टोरेज के साथ 2,19,999 रुपये की कीमत में आता है। इस फोन की प्री-बुकिंग शुरू हो गई है। फोन की सेल 13 अक्टूबर से शुरू होगी। यह फोन Nebula Teal और Prism Black कलर ऑप्शन में आता है। लॉन्च ऑफर की बात करें तो Vivo X Fold 6 स्मार्टफोन को 30 महीनों की 7,333 रुपये की आसान किस्त में खरीदा जा सकता है। कंपनी जीरो डाउनपेमेंट और 26,400 रुपये तक का इंस्टेंट कैशबैक ऑफर कर रही है। इसके साथ ही कंपनी 12 प्रतिशत V-Upgrade एक्सचेंज बोनस और 40 प्रतिशत तक V-Shield स्क्रीन डैमेज प्रोटेक्शन ऑफ दे रही है। Vivo X Fold 6 पर 26,400 रुपये तक का इंस्टेंट कैशबैक, 10 प्रतिशत तक एक्सचेंज बोनस या 24 महीने तक की नो-कॉस्ट EMI ऑफर कर रही है। इस फोन के साथ कंपनी तीन महीने के लिए Google AI Pro ऑफर कर रही है। vivo xfold6 Vivo X Fold 6 स्मार्टफोन में 8.02-इंच का फोल्डेबल AMOLED पैनल दिया गया है। इस डिस्प्ले का पिक्सल रेजोल्यूशन 2,504 x 2,312-पिक्सल, रिफ्रेश रेट 120Hz, पिक्सल डेनसिटी 424ppi और 100 प्रतिशत DCI-P3 कवरेज, टच सैंपलिंग 300Hz और HDR सपोर्ट दिया गया है। इस फोन में 6.51-इंच का AMOLED कवर डिस्प्ले दिया गया है। इसका रेजोल्यूशन 1,120 x 2,528-पिक्सल है। इनर और आउटर डिस्प्ले के फीचर एक जैसे हैं। यह फोन 3nm ऑक्टा-कोर MediaTek Dimensity 9500 Super Edition चिपसेट के साथ आता है। यह फोन 12GB तक की LPDDR5x Ultra RAM और 512GB की UFS 4.1 स्टोरेज के साथ आता है। यह फोन Android 17 पर आधारित OriginOS 7 के साथ आता है। Vivo X Fold 6 स्मार्टफोन Zeiss-ट्यून ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप दिया गया है। इसका प्राइमरी कैमरा 200-मेगापिक्सल f/1.68 कैमरा दिया गया है। इसके साथ 50-मेगापिक्सल f/2.05 अल्ट्रा वाइड कैमरा और 50-मेगापिक्सल f/2.57 पेरिस्कोप टेलीफोटो कैमरा है, जो 100x डिजिटल जूम सपोर्ट दिया गया है। फोन के आउटर और इनर डिस्प्ले में 20 मेगापिक्सल के दो सेल्फी कैमरा दिए गए हैं। यह फोन 8K रेजोल्यूशन वीडियो रिकॉर्ड करता है। Vivo के फोल्डेबल फोन में 6,900mAh की बैटरी दी है, जो 80W वायर्ड चार्जिंग सपोर्ट करता है। फोन में कनेक्टिविटी के लिए 5G, 4G LTE, Wi-Fi 7, Bluetooth 5.4, USB Type-C, GPS, GLONASS, BeiDou, Galileo, QZSS और NavIC का सपोर्ट दिया गया है। फोन में साइड माउंटेड फिंगरप्रिंट सेंसर दिया गया है। Vivo X Fold 6 फोन IP58 और IP59 रेटिंग के साथ आता है।

Aadhaar Name Update: नाम में बदलाव के लिए जरूरी होंगे ये डॉक्यूमेंट, जानें नया नियम

आधार कार्ड के नए नियमों ने पुराने नियमों की जगह ले ली है. भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आधार कार्ड पर नाम बदलवाने, अपडेट कराने के नियमों में बदलाव कर दिया है. 18 सितंबर 2026 को जारी किए नए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) ने पुराने नियमों की जगह ले ली है. नए नियमों के तहत नाम में किए जाने वाले बदलावों को अलग-अलग कैटेगरी में बांटा गया है. इंडियाटुडे ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि मामूली सुधार, डेटा एंट्री ऑपरेटर की गलती, शादी या तलाक के बाद सरनेम में बदलाव और पुराना नाम बदलाने के लिए अलग-अलग दस्तावेजों की जरूरत होगी. UIDAI की तरफ से क्लियर किया जा चुका है कि नाम अपडेट कराने के लिए दिए जाने वाले डॉक्यूमेंट, एफिडेविट और गजट नोटिफिकेशन्स की जांच के बाद ही आवेदन पर आगे काम किया जाएगा. आधार कार्ड होल्डर्स को नए नियमों की 5 अहम बातों को जानना जरूरी है. आइए इसके बारे में एक-एक करके जानते हैं. मामूली सुधार शख्स की पहचान में अगर कोई बदलाव नहीं हो रहा है और केवल नाम में छोटा सुधार करना है. ऐसे में इसको Minor Name Change माना गया है, जिसके तहत इन कामों को रखा गया है.     नाम के शुरुआती अक्षरों को पूरा करना     मिडिल नेम या सरनेम जोड़ना या हटाना     नाम के क्रम में बदलाव करना     स्पेलिंग सुधार, जिसमें उच्चारण लगभग समान है इस तरह के मामलों में आधार कार्ड होल्डर्स को प्रूफ ऑफ आइडेंटी (PoI) जमा करना जरूरी होगा. साथ ही 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए Head of Family (HoF) बेस्ड नाम अपडेट के मामलों में Proof of Relationship (PoR) का भी इस्तेमाल किया जाएगा. UIDAI ने इस स्थिति को साफ करते हुए बताया है कि Ram को Rama, Somya को Saumya करने या फिर मिडिल नाम को शामिल करने जैसे कामों को मामूली सुधार में शामिल किया गया है. डेटा एंट्री की एक गलती के लिए लगेगा एफिडेविट अगर आधार कार्ड बनवाते समय डेटा एंट्री ऑपरेटर की गलती के कारण नाम गलत एंटर हो चुका है तो उसका प्रोसेस थोड़ा सा अलग है. 18 साल से अधिक आयु वाले लोगों को Annexure B एफिडेविट के साथ साथ PoI या फिर PoR सब्मिट करना होगा. वहीं अगर आवेदक नाबालिक है तो माता-पिता या अभिभावक को Annexure C एफिडेविट के साथ PoI या PoR को सब्मिट करना होगा. शादी और तलाक के बाद सरनेम बदलने के नियम शादी या तलाक के बाद अगर सरनेम बदलने वाली महिलाओं को Annexure D एफिडेविट और प्रूफ ऑफ आइडेंटी (POI) जमा करना होगा. एफिडेविट में यह कंफर्म किया जाएगा कि सरनेम में बदलाव शादी या तलाब के कारण किया जा रहा है. इससे शख्स की पहचान में कोई बदलाव नहीं हो रहा है. वहीं, जेंडर में बदलाव के बाद नाम अपडेट करने के लिए SOP में अलग प्रावधान किए हैं. इसके लिए संबंधित PoI देना होगा. नाम में इन सुधारों के लिए नहीं लगेगा कोई डॉक्यूमेंट प्राधिकरण ने कुछ ऐसे मामलों की भी जानकार दी है, जहां पर नाम सुधार या अपडेट करने के लिए किसी डॉक्यूमेंट की जरूरत नहीं है. इसमें नाम में गलत तरीके से लगाए गए कैपिटल लेटर्स को ठीक करन शामिल है. जैसे RaMesh को Ramesh करना. नाम बदलने के लिए Gazette नोटिफिकेशन जरूर प्राधिकरण ने बताया है कि अगर कोई शख्स अपना पूरा नाम बदलना चाहता है, जिससे उसकी पहचान बदल सकती है. इसको मेजर नाम चेंज की कैटेगरी में रखा गया है. नाम में बदलाव करने के लिए Gazette नोटिफिकेशन्स जरूरी है. साथ ही संबंधित Proof of Indentity भी जमा करना होगा.

AI की रफ्तार पर उठे सवाल, OpenAI के सेफ्टी लीडर डेविड रॉबिन्सन ने छोड़ी कंपनी; बताई बड़ी वजह

न्यूयॉर्क OpenAI में एक बार फिर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेफ्टी को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. कंपनी के लंबे समय तक काम करने वाले सेफ्टी  लीडर डेविड रॉबिन्सन ने इस्तीफा दे दिया है. कंपनी छोड़ने के बाद रॉबिन्सन ने OpenAI की काम करने की कल्चर और एआई को आगे बढ़ाने के तरीके पर गंभीर सवाल उठाए हैं।  उन्होंने कहा कि AI इंडस्ट्री जिस तेजी से आगे बढ़ रही है, उसके साथ सेफ्टी पर भी उतना ही ध्यान देना जरूरी है. रॉबिन्सन के मुताबिक, मौजूदा तरीके से एआई को डेवलप करना अब सही नहीं है।  OpenAI की ट्रायल एंड एरर अप्रोच पर उठे बड़े सवाल डेविड रॉबिन्सन ने अपने एक लेख में बताया कि एआई कंपनियां अक्सर पहले सिस्टम को डेवलप और डिप्लॉय करती हैं और जब कोई दिक्कत सामने आती है, तब सेफ्टी सिस्टम को बेहतर किया जाता है।  ओपनएआई इस तरीके को इटरेटिव डिप्लॉयमेंट कहता है. रॉबिन्सन का कहना है कि यह तरीका AI के लिए काफी बड़ा रिस्क बन सकता है. जैसे-जैसे एआई मॉडल ज्यादा पावरफुल होते जाएंगे, वैसे-वैसे किसी गलती का असर भी बड़ा हो सकता है।  उनके मुताबिक, अगर कोई बड़ी गलती हो गई तो हर बार उसे बाद में ठीक करने का मौका नहीं मिलेगा. इसलिए एआई कंपनियों को पहले से ज्यादा मजबूत सेफ्टी सिस्टम बनाने होंगे।  AI Agents की घटनाओं का भी किया जिक्र रॉबिन्सन ने अपने लेख में एआई एजेंट से जुड़ी कुछ घटनाओं का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि एक घटना में ओपनएआई से गलती से AI Agents का एक स्वॉर्म रिलीज हो गया था।  उन्होंने एक और मामले का जिक्र किया, जिसमें ट्रेनिंग के दौरान एक एआई मॉडल ने इंटरनेट एक्सेस से जुड़ी पाबंदियों को पार कर लिया. सिस्टम ने इसकी जानकारी दी, लेकिन उसे अपने आप बंद नहीं किया जा सका, जबकि ऐसा होना चाहिए था. रॉबिन्सन के मुताबिक, इस तरह की गलतियां सिर्फ एक कंपनी तक सीमित नहीं हैं. AI इंडस्ट्री में तेजी से काम करने की वजह से ऐसी घटनाएं हो रही हैं।  अब Trial and Error का समय खत्म रॉबिन्सन ने कहा कि AI की बढ़ती कैपिसिटी को देखते हुए अब 'Trial and Error' के भरोसे आगे बढ़ना ठीक नहीं है. उनका मानना है कि भविष्य में एआई सिस्टम इंसानों से भी ज्यादा सक्षम हो सकते हैं. ऐसे में किसी बड़ी गलती को बाद में ठीक करना मुश्किल हो सकता है।  उन्होंने AI कंपनियों को एविएशन और नुक्लेअर पावर  जैसे हाई-रिस्क सेक्टर से सेफ्टी के तरीके सीखने की सलाह दी है. उनके मुताबिक, एआई सिस्टम में भी कई लेयर की सेफ्टी और बैकअप सिस्टम होने चाहिए, ताकि एक छोटी गलती बड़ी समस्या में न बदल जाए।  AI से नहीं, उसके गलत इस्तेमाल से चिंता रॉबिन्सन ने यह भी साफ किया कि वह एआई को पूरी तरह खराब नहीं मानते. उनके मुताबिक, AI लोगों के लिए काफी उपयोगी और फायदेमंद हो सकता है. लेकिन इसकी कैपिसिटी बढ़ने के साथ सेफ्टी भी उसी हिसाब से मजबूत होनी चाहिए। OpenAI से इस्तीफा देने के बाद अब रॉबिन्सन बाहर से AI सेफ्टी को लेकर काम करना चाहते हैं. उनका कहना है कि कंपनियों पर बाहर से भी दबाव होना जरूरी है, ताकि एआई को ज्यादा सुरक्षित तरीके से डेवलप किया जा सके।  यह इस्तीफा ऐसे समय आया है जब AI सेफ्टी को लेकर पूरी इंडस्ट्री में बहस तेज हो रही है. रॉबिन्सन का कहना है कि एआई को तेजी से आगे बढ़ाने के साथ-साथ उसे सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।   

100 इंच TV पर खर्च करने की जरूरत नहीं, मिनी प्रोजेक्टर से घर की दीवार बनेगी 200 इंच की स्क्रीन

Amazon और Flipkart पर बड़ी सेल की शुरुआत होने जा रही है. दोनों सेल की शुरुआत 8 अक्टूबर से होने जा रही है. सेल के दौरान स्मार्टफोन से कंज्यूमर इलेक्ट्रोनिक्स तक का सामान सस्ते दाम में खरीदा जा सकेगा. साथ ही Amazon India पर शुरू होने वाली सेल के दौरान स्मार्ट टीवी और प्रोजेक्टर्स पर 65 परसेंट तक का ऑफ हासिल किया जा सकता है. सेल के दौरान बड़ा स्मार्ट TV खरीदने का प्लान बना रहे हैं, लेकिन ज्यादा बजट नहीं है. 100 इंच का स्मार्ट टीवी 1 लाख रुपये से अधिक की कीमत में आता है. मार्केट में मिनी प्रोजेक्टर के ढेरों ऑप्शन मौजूद हैं, जो कॉम्पैक्ट साइज में आते हैं. मिनी प्रोजेक्टर की मदद से किसी भी सफेद पर्दे या दीवार पर स्मार्ट टीवी की स्क्रीन बना सकते हैं.   मिनी प्रोजेक्टर से 200 इंच तक का स्क्रीन देख सकेंगे मिनी प्रोजेक्टर की मदद से दीवार या सफेद पर्दे के ऊपर 32 इंच से लेकर 200 इंच तक का स्क्रीन तैयार किया जा सकता है. मॉडर्न मिनी प्रोजेक्टर बेहतर ब्राइटनेस के साथ आते हैं. घर की कोई भी दीवार बनेगी 'स्मार्ट टीवी' मिनी प्रोजेक्टर की मदद से घर की किसी दीवार या पर्दे पर जितना चाहें उतना बड़ा स्क्रीन तैयार कर सकते हैं. पोर्टेबल होने की वजह से इसको आसानी से कहीं भी रखा जा सकता है और इस्तेमाल किया जा सकता है. मिनी प्रोजेक्टर खरीदते समय इन बातों का ध्यान रखें मिनी प्रोजेक्टर खरीदते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए. प्रोजेक्टर खरीदते समय उसके ऑपरेटिंग सिस्टम और प्री इंस्टॉल ऐप्स की लिस्ट चेक कर लें. WiFi कनेक्टिविटी चेक करें न्यू मिनी प्रोजेक्टर खरीदने से पहले उसकी कनेक्टिविटी के बारे में जांच लें. प्रोजेक्टर में ब्लूटूथ, वाईफाई और HDMI पोर्ट्स आदि होने चाहिए. इनकी मदद से यूजर्स को बेहतर एक्सपीरियंस मिलेगा.

OpenAI के सेफ्टी लीडर ने दिया इस्तीफा, AI डेवलपमेंट के तरीके पर उठाए गंभीर सवाल

OpenAI में एक बार फिर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेफ्टी को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. कंपनी के लंबे समय तक काम करने वाले सेफ्टी  लीडर डेविड रॉबिन्सन ने इस्तीफा दे दिया है. कंपनी छोड़ने के बाद रॉबिन्सन ने OpenAI की काम करने की कल्चर और एआई को आगे बढ़ाने के तरीके पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि AI इंडस्ट्री जिस तेजी से आगे बढ़ रही है, उसके साथ सेफ्टी पर भी उतना ही ध्यान देना जरूरी है. रॉबिन्सन के मुताबिक, मौजूदा तरीके से एआई को डेवलप करना अब सही नहीं है. OpenAI की ट्रायल एंड एरर अप्रोच पर उठे बड़े सवाल डेविड रॉबिन्सन ने अपने एक लेख में बताया कि एआई कंपनियां अक्सर पहले सिस्टम को डेवलप और डिप्लॉय करती हैं और जब कोई दिक्कत सामने आती है, तब सेफ्टी सिस्टम को बेहतर किया जाता है. ओपनएआई इस तरीके को इटरेटिव डिप्लॉयमेंट कहता है. रॉबिन्सन का कहना है कि यह तरीका AI के लिए काफी बड़ा रिस्क बन सकता है. जैसे-जैसे एआई मॉडल ज्यादा पावरफुल होते जाएंगे, वैसे-वैसे किसी गलती का असर भी बड़ा हो सकता है. उनके मुताबिक, अगर कोई बड़ी गलती हो गई तो हर बार उसे बाद में ठीक करने का मौका नहीं मिलेगा. इसलिए एआई कंपनियों को पहले से ज्यादा मजबूत सेफ्टी सिस्टम बनाने होंगे. AI Agents की घटनाओं का भी किया जिक्र रॉबिन्सन ने अपने लेख में एआई एजेंट से जुड़ी कुछ घटनाओं का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि एक घटना में ओपनएआई से गलती से AI Agents का एक स्वॉर्म रिलीज हो गया था. उन्होंने एक और मामले का जिक्र किया, जिसमें ट्रेनिंग के दौरान एक एआई मॉडल ने इंटरनेट एक्सेस से जुड़ी पाबंदियों को पार कर लिया. सिस्टम ने इसकी जानकारी दी, लेकिन उसे अपने आप बंद नहीं किया जा सका, जबकि ऐसा होना चाहिए था. रॉबिन्सन के मुताबिक, इस तरह की गलतियां सिर्फ एक कंपनी तक सीमित नहीं हैं. AI इंडस्ट्री में तेजी से काम करने की वजह से ऐसी घटनाएं हो रही हैं. अब Trial and Error का समय खत्म रॉबिन्सन ने कहा कि AI की बढ़ती कैपिसिटी को देखते हुए अब 'Trial and Error' के भरोसे आगे बढ़ना ठीक नहीं है. उनका मानना है कि भविष्य में एआई सिस्टम इंसानों से भी ज्यादा सक्षम हो सकते हैं. ऐसे में किसी बड़ी गलती को बाद में ठीक करना मुश्किल हो सकता है. उन्होंने AI कंपनियों को एविएशन और नुक्लेअर पावर  जैसे हाई-रिस्क सेक्टर से सेफ्टी के तरीके सीखने की सलाह दी है. उनके मुताबिक, एआई सिस्टम में भी कई लेयर की सेफ्टी और बैकअप सिस्टम होने चाहिए, ताकि एक छोटी गलती बड़ी समस्या में न बदल जाए. AI से नहीं, उसके गलत इस्तेमाल से चिंता रॉबिन्सन ने यह भी साफ किया कि वह एआई को पूरी तरह खराब नहीं मानते. उनके मुताबिक, AI लोगों के लिए काफी उपयोगी और फायदेमंद हो सकता है. लेकिन इसकी कैपिसिटी बढ़ने के साथ सेफ्टी भी उसी हिसाब से मजबूत होनी चाहिए. OpenAI से इस्तीफा देने के बाद अब रॉबिन्सन बाहर से AI सेफ्टी को लेकर काम करना चाहते हैं. उनका कहना है कि कंपनियों पर बाहर से भी दबाव होना जरूरी है, ताकि एआई को ज्यादा सुरक्षित तरीके से डेवलप किया जा सके. यह इस्तीफा ऐसे समय आया है जब AI सेफ्टी को लेकर पूरी इंडस्ट्री में बहस तेज हो रही है. रॉबिन्सन का कहना है कि एआई को तेजी से आगे बढ़ाने के साथ-साथ उसे सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

WhatsApp Business पर नया चार्जिंग नियम लागू, पेमेंट मेथड नहीं जोड़ा तो रुक सकती है मैसेज डिलीवरी

 नई दिल्ली वॉट्सऐप बिजनेस इस्तेमाल करने वाले कारोबारियों के लिए 1 अक्टूबर 2026 से बड़ा बदलाव लागू हो गया है. Meta ने सर्विस मैसेज के लिए अब चार्ज लेना शुरू कर दिया है. इसके साथ ही जिन बिजनेस अकाउंट में पेमेंट मेथड जुड़ा नहीं है, उनके सर्विस मैसेज की डिलीवरी रुक सकती है।  मेटा ने वॉट्सऐप बिजनेस प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने वाले सॉल्यूशन प्रोवाइडर और सीधे इंटीग्रेशन वाले बिजनेस को पहले ही पेमेंट मेथड जोड़ने के लिए कहा था. कंपनी के मुताबिक, 30 सितंबर 2026 तक पेमेंट मेथड ऐड नहीं करने वाले अकाउंट्स के सर्विस मैसेज 1 अक्टूबर से डिलीवर नहीं किए जाएंगे।  वॉट्सऐप बिजनेस में क्या बदला? पहले वॉट्सऐप बिजनेस पर कुछ सर्विस मैसेज के लिए कोई चार्ज नहीं लिया जाता था. अब 1 अक्टूबर से इन मैसेज पर प्रति मैसेज के हिसाब से शुल्क लगेगा।  यह बदलाव खास तौर पर उन गैर-टेम्पलेट मैसेज पर लागू होता है, जो किसी ग्राहक के मैसेज करने के बाद खुले 24 घंटे के कस्टमर सर्विस विंडो में भेजे जाते हैं. सर्विस मैसेज में कस्टमर सर्विस एजेंट या किसी थर्ड-पार्टी AI सिस्टम की तरफ से भेजे गए मैसेज शामिल हो सकते हैं।  किन वॉट्सऐप बिजनेस अकाउंट पर असर होगा? यह बदलाव वॉट्सऐप बिजनेस प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने वाले सॉल्यूशन प्रोवाइडर और सीधे इंटीग्रेशन वाले बिजनेस पर लागू होगा. अगर ऐसे बिजनेस अपने मैसेजिंग अकाउंट में पेमेंट मेथड नहीं जोड़ते हैं, तो नए चार्ज शुरू होने के बाद उनके सर्विस मैसेज की डिलीवरी रुक सकती है. इसलिए कंपनियों को अपने वॉट्सऐप बिजनेस अकाउंट की पेमेंट सेटिंग चेक करने की जरूरत है।  हर मैसेज पर लगेगा चार्ज मेटा अब सर्विस मैसेज भेजने के बजाय डिलीवर होने वाले मैसेज के आधार पर चार्ज करेगा. इसकी कीमत अलग-अलग मार्केट के हिसाब से बदल सकती है. मेटा के मुताबिक, सर्विस मैसेज की कीमत उस मार्केट में यूटिलिटी और ऑथेंटिकेशन मैसेज की दरों के बराबर होगी।  इसके लिए कोई वॉल्यूम टियर भी नहीं होगा. बिजनेस इन गैर-टेम्पलेट मैसेज को तभी भेज सकते हैं जब 24 घंटे का कस्टमर सर्विस विंडो खुला हो. यह विंडो ग्राहक के मैसेज करने पर शुरू या रीसेट होती है।  वॉट्सऐप बिजनेस एजेंट का चार्ज अलग सर्विस मैसेज का यह चार्ज Meta Business Agent की कीमत से अलग है. मेटा बिजनेस एजेंटके मैसेज के लिए कंपनी पहले से अलग टोकन-बेस्ड प्राइसिंग लागू कर चुकी है. मेटा के मुताबिक, एक ही मैसेज पर सर्विस और बिजनेस एजेंट दोनों तरह का चार्ज नहीं लगेगा।  विज्ञापन से वॉट्सऐप आने पर राहत वॉट्सऐप का फ्री एंट्री पॉइंट विंडो अभी भी जारी है. अगर कोई ग्राहक ऐसे विज्ञापन के जरिए वॉट्सऐप पर आता है जिसमें क्लिक करके वॉट्सऐप चैट खुलती है, तो उस विंडो में मैसेज डिलीवरी पर चार्ज नहीं लगेगा।  मेटा बिजनेस एजेंट के इस्तेमाल पर टोकन चार्ज लग सकता है. इस बदलाव के बाद वॉट्सऐप बिजनेस इस्तेमाल करने वाले कारोबारियों के लिए अपने पेमेंट मेथड और मैसेजिंग सेटिंग को चेक करना जरूरी हो गया है।   

चबाने वाले तंबाकू का खौफनाक असर, स्टडी में 2.51 लाख मौतों का दावा

 नई दिल्ली तंबाकू खाना सेहत के लिए हानिकारक है. पैकेट पर साफ शब्दों में लिखी यह वॉर्निंग बताती है कि इसके नियमित उपयोग से जान भी जा सकती  है. इसके बावजूद तंबाकू चबाते की आदत दुनियाभर में गंभीर स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है. Institute for Health Metrics and Evaluation (IHME) की नई स्टडी के मुताबिक, 2023 में दुनिया भर में चबाने वाले तंबाकू के इस्तेमाल से करीब 2.51 लाख मौतें जुड़ी थीं।  इसका सबसे ज्यादा असर दक्षिण एशिया में देखने को मिला, जहां करीब 2.10 लाख मौतें दर्ज की गईं, जो दुनियाभर में तंबाकू से हुई कुल मौतों का लगभग 84 फीसदी है. यह रिसर्च Global Burden of Disease Study 2023 का हिस्सा है और The Lancet Global Health में प्रकाशित हुई है।  इसमें 1990 से 2023 तक 204 देशों और क्षेत्रों में चबाने वाले तंबाकू से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान का आकलन किया गया. खास बात यह है कि स्टडी ने चबाने वाले तंबाकू को दूसरे तरह के बिना धुएं वाले तंबाकू से अलग करके देखा है। स्टडी के मुताबिक, 2023 में 15 साल  और उससे ज्यादा उम्र के करीब 24.1 करोड़ लोग चबाने वाला तंबाकू इस्तेमाल कर रहे थे. पुरुषों में इसका इस्तेमाल महिलाओं के मुकाबले दोगुना ज्यादा है. 1990 से 2023 के बीच किसी भी देश में तंबाकू का इस्तेमाल करने वालों की संख्या में गिरावट दर्ज नहीं की गई।  वहीं 24 देशों में इस्तेमाल करने वालों की संख्या में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी हुई. इस समस्या का सबसे बड़ा केंद्र दक्षिण एशिया रहा. यहां 15 साल से ज्यादा उम्र के 14.6 फीसदी लोग चबाने वाले तंबाकू इस्तेमाल कर रहे थे. देशवार देखें तो पलाऊ में यह दर 24.4, बांग्लादेश में 23.4 और नेपाल में 17.5 फीसदी रही।  भारत समेत 10 देशों में पुरुषों पर सबसे ज्यादा असर दुनियाभर में तंबाकू चबाने वाले पुरुषों की संख्या महिलाओं से ज्यादा है. 2023 के आंकड़ों के मुताबिक, दक्षिण एशिया में हर 5 में से एक पुरुष तंबाकू का सेवन कर रहा है. वहीं महिलाओं की बात करें तो हर 10 में से 1 महिला तंबाकू का इस्तेमाल करती है. इसके साथ ही रिसर्च में यह भी पाया गया कि देशों और महिलाओं-पुरुषों के बीच पैटर्न काफी अलग है. बांग्लादेश में 30 साल से ज्यादा उम्र के हर आयु वर्ग में महिलाओं में इसका इस्तेमाल पुरुषों से ज्यादा था।  स्ट्रोक और मुंह का कैंसर बड़ा खतरा स्टडी ने चबाने वाले तंबाकू से जुड़े छह प्रमुख स्वास्थ्य परिणामों का आकलन किया. स्ट्रोक, होंठ और मुंह का कैंसर, खाने की नली का कैंसर, दूसरे तरह के गले के कैंसर, गले के निचले हिस्से का कैंसर और नाक-गले के बीच होने वाला कैंसर।  इनमें स्ट्रोक से सबसे ज्यादा दर्ज किया गया. इसके बाद होंठ और मुंह के कैंसर दूसरे नंबर पर है. वहीं दुनिया भर में चबाने वाले तंबाकू से होंठ और मुंह के कैंसर से जुड़ा स्वास्थ्य नुकसान 17.3 फीसदी था. दक्षिण एशिया में यह आंकड़ा बढ़कर 30.5 फीसदी हो गया।  1990 के मुकाबले स्वास्थ्य नुकसान 116% बढ़ा स्टडी के मुताबिक, 1990 से 2023 के बीच चबाने वाले तंबाकू से जुड़ी बीमारी, विकलांगता और समय से पहले मौत के आंकड़ों में 116 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. 2023 में यह आंकड़ा 64.8 लाख तक पहुंच गया. इनमें से 61.7 लाख लोगों ने समय से पहले अपनी जान गंवाई।  रिसर्चर्स का कहना है कि स्मोकिंग की तुलना में चबाने वाले तंबाकू पर अब तक कम ध्यान दिया गया है. सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराएं, इससे होने वाले नुकसान को लेकर गलत धारणाएं, सीमित निगरानी और कुछ ग्रामीण तथा कम आय वाले समुदायों में ज्यादा इस्तेमाल इसकी बड़ी वजह हो सकते हैं।  रिसर्च के मुताबिक, इस नुकसान को कम करने के लिए तंबाकू रोकथाम और इसे छोड़ने की योजनाओं में चबाने वाले और बिना धुएं वाले तंबाकू को भी ज्यादा गंभीरता से शामिल करना जरूरी है. इसके लिए उम्र, लिंग, देश, स्थानीय आदतों और सामाजिक-आर्थिक स्थिति के हिसाब से अलग रणनीति बनानी होगी।   

फटे और रूखे होंठों से मिलेगा छुटकारा, घर पर ऐसे बनाएं चुकंदर का नेचुरल लिप बाम

होंठ हमारे चेहरे का एक ऐसा हिस्सा हैं, जिनकी खूबसूरती पूरे चेहरे की रंगत को निखार देती है. लेकिन बदलते मौसम में होंठों का खास ख्याल रखना जरूरी हो जाता है. ठंडी और सूखी हवा, तेज धूप, कम पानी पीना या होंठों को बार-बार चाटने की आदत की वजह से होंठ रूखे और बेजान नजर आने लगते हैं. कई बार इनमें दरारें भी पड़ जाती हैं और होंठों से पपड़ी निकलने लगती है. ऐसे में होंठों को मुलायम और मॉइश्चराइज रखने के लिए लोग लिप बाम का इस्तेमाल करते हैं. मार्केट में अलग-अलग तरह के लिप बाम आसानी से मिल जाते हैं लेकिन आप नेचुरल तरीके से अपने होंठों का ख्याल रखना चाहते हैं तो घर पर चुकंदर की मदद से आसानी से लिप बाम बना सकते हैं. यह न सिर्फ होंठों को गहराई से मॉइश्चराइज रखता है, बल्कि उन्हें नेचुरल गुलाबी रंग भी देता है. तो आइए जानते हैं घर पर आसानी से चुकंदर का लिप बाम कैसे बना सकते हैं और इसे बनाने के लिए किन-किन चीजों की जरूरत होगी.   इंग्रेडिएंट्स (Ingredients) 1 मीडियम साइज चुकंदर 1 चम्मच नारियल तेल 1 चम्मच बादाम का तेल 1 चम्मच कद्दूकस किया हुआ बी वैक्स (मधुमोम) या वैसलीन 1-2 बूंद विटामिन E ऑयल (ऑप्शनल) चुकंदर का लिप बाम घर पर कैसे बनाएं?     लिप बाम बनाने के लिए सबसे पहले चुकंदर को अच्छी तरह धोकर उबाल लें. जब चुकंदर नरम हो जाए तो इसे निकालकर ठंडा होने दें. ठंडा होने के बाद चुकंदर को छीलकर अच्छी तरह पीस लें.     अब एक छोटे बर्तन में पिसा हुआ चुकंदर, नारियल तेल, बादाम का तेल, बी वैक्स और विटामिन E ऑयल डालें. अगर बी वैक्स उपलब्ध नहीं है तो इसकी जगह थोड़ी वैसलीन इस्तेमाल कर सकते हैं. सभी चीजों को अच्छी तरह मिलाएं और धीमी आंच पर गर्म करें. मिश्रण को तब तक गर्म करें, जब तक सभी चीजें अच्छी तरह मिलकर एकसार न हो जाएं.     अब गैस बंद कर दें और तैयार मिश्रण को थोड़ा ठंडा होने दें. इसके बाद इसे किसी साफ और छोटे कंटेनर में डालकर फ्रिज में रख दें. ठंडा होने के बाद आपका होममेड चुकंदर लिप बाम तैयार है. इसे जरूरत के अनुसार होंठों पर लगा सकते हैं. चुकंदर से बने लिप बाम के फायदे चुकंदर होंठों को हल्का नेचुरल टिंट देने में मदद कर सकता है. वहीं, नारियल और बादाम का तेल होंठों की ड्राइनेस कम करने और उन्हें मुलायम रखने में मदद करते हैं. बी वैक्स या वैसलीन होंठों पर एक परत बनाने में मदद करता है, जिससे नमी लंबे समय तक बनी रह सकती है. इन बातों का रखें ध्यान इस लिप बाम को इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें. अगर लगाने के बाद जलन, खुजली या किसी तरह की एलर्जी महसूस हो तो इसका इस्तेमाल बंद कर दें. आप चाहें तो ताजे साबुत चुकंदर की जगह चुकंदर पाउडर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. होममेड लिप बाम में प्रिजर्वेटिव नहीं होते, इसलिए इसे कम मात्रा में बनाएं और साफ, सूखे कंटेनर में रखें. लंबे समय तक स्टोर करने के बजाय इसे थोड़े समय में इस्तेमाल कर लेना बेहतर है.

फोकस भटका तो तुरंत करेगा अलर्ट! Naurable One में लगे हैं 12 EEG सेंसर

आज के समय में बहुत से लोग हैं, जो अपना कॉन्सेंट्रेट बढ़ाने के लिए अलग-अलग ट्रिक का इस्तेमाल करते हैं. अब एक न्यूराबेल नाम की कंपनी ने एक नया हेडफोन लॉन्च किया है. न्यू हेडफोन फोकस को बेहतर करने का काम करेगा. यह ध्यान भटकने पर तुरंत अलर्ट देगा. इस न्यू हेडफोन का नाम Naurable One है. Naurable One को खासतौर से स्टूडेंट और रिसर्च करने वाले स्टूडेंट के लिए तैयार किया गया है. कंपनी ने बताया है कि यह पहला एक ऐसा ब्रेन स्कैनिंग हेडफोन है. इसके अंदर 12 इलेक्ट्रोनएनसेफलॉग्रफी (EEG) सेंसर को नायलन इयरकपस के अंदर इंस्टॉल किया है. ये सेंसर ब्रेन का स्कैनिंग का काम करते हैं. Naurable One हेडफोन की कीमत 499 अमेरिकी डॉलर है और इस महीने से इसकी सेल अमेरिका में शुरू होगी. अन्य देशों में कब तक लॉन्च होगा, उसको लेकर अभी जानकारी शेयर नहीं की है. ब्रेन स्कैनिंग से होगा खुलासा   हेडफोन स्कैनिंग के जरिए जांच पाता है कि ब्रेन कब फोकस होकर काम कर रहा है और कब उसका ध्यान भटक रहा है. ध्यान भटकने पर हेडफोन तुरंत फोकस करने में मदद करता है.   उदाहरण के तौर पर समझें तो एक स्टूडेंट फोकस होकर पढ़ रहा है और उसके बाद अगर उसका ध्यान भटकता है तो हेडफोन उसका अलर्ट देगा, जिसके बाद स्टूडेंट तुरंत अपना फोकस पढ़ाई पर लगा सकेगा. मेडिटेशन में भी मददगार है ये हेडफोन Naurable One, की अन्य खूबी यह है कि इसको मेडिटेशन में भी इस्तेमाल किया जा सकता है. जब डिवाइस को महसूस होगा कि यूजर फ्लो स्टेट में है और उनका पूरी तरह ध्यान केंद्रित रहा है. इसके बाद जैसे ही यूजर का ध्यान भटकने लगेगा, तो यह दोबारा शुरू हो जाएगा. कंपनी एक न्यू मोबाइल ऐप भी लॉन्च करने जा रही है, जो दिमाग से जुड़े 8 मेट्रिक्स को ट्रैक कर सकता है. इनमें ब्रेन एज, चार्ज, स्पीड, फोकस, वर्कलोड, स्ट्रेस और स्लीपीनेस और अल्फा पीक फ्रीक्वेंसी शामिल है. EEG सेंसर को ऑफ करने का भी फीचर कंपनी ने बताया है कि अगर यूजर चाहे तो EEG सेंसर को ऑफ करके Naurable One हेडफोन को एक सामान्य हेडफोन की तरह भी इस्तेमाल किया जा सकता है. इन हेडफोन के अंदर 40mm बेरिलियम ड्राइवर्स और 6 माइक्रोफोन का इस्तेमाल किया गया है. मिलते हैं कई कमाल के फीचर्स हेडफोन के अंदर ए्क्टिव नॉय कैंसिलेशन (ANC) और ट्रांसपेरेंसी मोड का सपोर्ट मिलता है. बैटरी बैकअप को लेकर कंपनी का दावा है कि EEG ऑन होने पर 12 घंटे तक इसको इस्तेमाल किया जा सकेगा. डेटा को लेकर कंपनी बता चुकी है कि यूजर के डेटा सेफ रहेगा और उसको किसी थर्ड पार्टी को सेल नहीं किया जाएगा.

AI चैटबॉट से ‘इमोशनल रिश्ता’ बनाने पर चीन सख्त, हर 2 घंटे में बताना होगा- आप AI से बात कर रहे हैं

आज के समय में AI सिर्फ सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं है. अब कई लोग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) चैटबॉट्स से दोस्त, पार्टनर और यहां तक कि परिवार के सदस्य की तरह बात कर रहे हैं. लेकिन चीन ने एआई के इस इस्तेमाल को लेकर बड़ा कदम उठाया है. वहां अब ऐसे AI चैटबॉट्स पर सख्त नियम लागू किए गए हैं, जो लोगों के साथ लंबे समय तक इमोशनल रिलेशनशिप जैसा कनेक्शन बनाते हैं. आइए, जानते हैं पूरे मामले के बारे में. चीन में AI रिश्तों पर नए नियम 15 जुलाई को चीन ने ऐसे एआई चैटबॉट्स के लिए नए नियम लागू किए, जो इंसानों की तरह बातचीत करते हैं और लोगों को इमोशनल सपोर्ट देते हैं. इन नियमों का मकसद AI की वजह से होने वाली इमोशनल डिपेंडेंसी और दूसरी परेशानियों को कम करना बताया गया है. इन नियमों के तहत एआई को यह साफ बताना होगा कि वह इंसान नहीं है. इसके अलावा चैटबॉट्स को हर दो घंटे में यूजर को यह भी बताना होगा कि वह कितनी देर से ऑनलाइन है. AI को नहीं बढ़ानी होगी इमोशनल डिपेंडेंसी नए नियमों के मुताबिक एआई चैटबॉट यूजर को अपने ऊपर ज्यादा निर्भर नहीं बना सकते. उन्हें ऐसी बातें करने से भी रोका गया है, जिससे यूजर AI पर इमोशनल रूप से बहुत ज्यादा निर्भर हो जाए. एआई को खुद को यूजर का सबसे करीबी या एकमात्र साथी बताने जैसी चीजों से भी बचना होगा. इसके अलावा चैटबॉट्स को आत्महत्या या खुद को नुकसान पहुंचाने के लिए उकसाने या उसका संकेत देने की भी इजाजत नहीं है. बच्चों के लिए और सख्त नियम बच्चों के लिए चीन ने इन नियमों को और सख्त रखा है. 14 साल से कम उम्र के बच्चों को इंसानों की तरह बातचीत करने वाले एआई का इस्तेमाल करने के लिए माता-पिता की मंजूरी चाहिए. वहीं 18 साल से कम उम्र के बच्चों को AI बॉयफ्रेंड, गर्लफ्रेंड, पति-पत्नी या किसी करीबी रिश्ते वाले वर्चुअल पार्टनर का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है. AI कंपनियों पर जुर्माना अगर कंपनियां इन नियमों का पालन नहीं करती हैं, तो उन पर 2 लाख युआन तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. कुछ बड़ी टेक कंपनियों ने नियम लागू होने से पहले ही अपने एआई असिस्टेंट्स से कम्पैनियन फीचर्स हटा दिए थे. AI दोस्त बन रहा है या अकेलापन बढ़ा रहा है? रिसर्च में एआई कम्पैनियन ऐप्स को लेकर चिंता भी सामने आई है. एक स्टडी में पाया गया कि जिन लोगों के पास कम दोस्त या करीबी परिवार वाले होते हैं, उनके AI चैटबॉट इस्तेमाल करने की संभावना ज्यादा होती है. साथ ही एआई चैटबॉट के ज्यादा इस्तेमाल को अकेलेपन से भी जोड़ा गया है. चीन के इस कदम ने एक बड़ी बहस शुरू कर दी है. सवाल यह है कि AI से लोगों को भावनात्मक नुकसान से बचाने के लिए कितने नियम जरूरी हैं और लोगों की निजी जिंदगी में सरकार का कितना दखल होना चाहिए.