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बिना मोबाइल निकाले होगा पेमेंट! Jio AI Glass से आंखों के इशारे पर चलेगा UPI, जानें खासियतें

मुंबई  मार्वल्स की सुपरहीरो वाली मूवीज तो आने भी देखी होगी. इसमें एक करेक्टर है आयरन मैन, जिसका चश्मा इतना स्मार्ट है कि एक आदेश पर हर जानकारी उपलब्ध करा देता है. जियो ने भी ऐसा ही प्रोडक्ट पेश किया है, जो आपके एक इशारे पर बिना मोबाइल निकाले और स्कैन किए ही यूपीआई पेमेंट कर देता है. जियो ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 में एक कूल और फ्यूचरिस्टिक प्रोडक्ट शोकेस किया है. कंपनी ने अपनी पर्सनल AI वियरेबल रेंज में कैमरा ग्लास, ऑडियो ग्लास और ईयरफोन दिखाए हैं. इनमें स्कैन एंड पे, AI वॉयस असिस्टेंट, मल्टी-इंडियन लैंग्वेज सपोर्ट, लाइव ट्रांसलेशन, AI नोट टेकिंग और लाइव क्रिकेट कमेंट्री जैसे फीचर्स हैं।  एआई के इस प्रोडक्ट का सबसे दिलचस्प फीचर स्कैन एंड पे है. मतलब मोबाइल जेब में ही रहे और सामने QR कोड हो तो बस पेमेंट हो जाए. जियो का यह कैमरा ग्लास UPI QR कोड स्कैन करेगा, यूजर वॉयस कमांड देगा और कन्फर्मेशन के बाद पेमेंट हो जाएगा. UPI Circle के जरिये एक बार में 5,000 रुपये तक का भुगतान किया जा सकता है. यह सीमा जियो की नहीं, बल्कि UPI Circle के नियमों के तहत तय की गई और हर महीने इस सिस्टम से 15,000 रुपये तक यूपीआई भुगतान किया जा सकता है।  कैसे होगा ग्लास से पेमेंट इस ग्लास के जिरये दुकान पर पेमेंट करते वक्त मोबाइल निकालने, अनलॉक करने, ऐप खोलने और QR स्कैन करने जैसे कई स्टेप कम हो सकते हैं. यहां AI सिर्फ सवालों के जवाब देने वाला असिस्टेंट नहीं, बल्कि आपकी कमांड पर काम करने वाली टेक्नोलॉजी बन जाता है. कंपनी की कोशिश AI को मोबाइल स्क्रीन और कीबोर्ड से निकालकर आवाज और रोजमर्रा के इस्तेमाल से जोड़ने की है. जियो AI ग्लास का दूसरा बड़ा इस्तेमाल लाइव ट्रांसलेशन है. अलग-अलग भारतीय भाषाएं बोलने वाले दो लोग वियरेबल डिवाइस की मदद से एक-दूसरे की बात समझ सकेंगे. आप अपनी भाषा में बोलिए, सामने वाला अपनी भाषा में, बीच का काम AI संभालेगा।  पेमेंट से आगे बढ़ने की तैयारी जियो का मानना है कि बात सिर्फ पेमेंट और ट्रांसलेशन तक नहीं रुकती. मीटिंग में कोई जरूरी बात छूट न जाए, इसके लिए AI नोट टेकिंग है. वहीं, चलते-फिरते मैच से जुड़े रहना हो तो लाइव क्रिकेट कमेंट्री भी मिलेगी. यानी ऑफिस की मीटिंग हो या क्रिकेट का रोमांच, बार-बार मोबाइल देखने की जरूरत कम करने की कोशिश साफ दिखती है. जियो का कहना है कि इन वियरेबल्स का मकसद AI के जरिये प्रोडक्टिविटी और नॉलेज बढ़ाने के साथ रोजमर्रा के काम आसान करना है।  जियो एआई ग्लास हेडफोन से जुड़ा रहेगा भारतीय भाषाओं पर ज्यादा जोर जियो का मानना है कि इसका खास जोर वॉयस और भारतीय भाषाओं पर है, ताकि यूजर अपनी भाषा में AI और डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल कर सके. जियो का यह शोकेस वियरेबल टेक के अगले दौर की झलक देता है. स्मार्ट ग्लासेस का आइडिया नया नहीं है, लेकिन UPI पेमेंट, भारतीय भाषाएं, लाइव ट्रांसलेशन, AI नोट टेकिंग और क्रिकेट कमेंट्री जैसे फीचर्स इसे भारतीय यूजर के ज्यादा करीब लाते हैं। 

प्याज के छिलके फेंकने की गलती न करें, पौधों से लेकर किचन तक इन 5 तरीकों से आएंगे काम

सब्जी, दाल या सलाद बनाते समय प्याज हर भारतीय रसोई में रोज इस्तेमाल होता है. लेकिन हम प्याज छीलकर उसके सूखे छिलकों को बिना सोचे-समझे कूड़ेदान में फेंक देते हैं. क्या आप जानते हैं कि प्याज के छिलकों में प्याज से भी ज्यादा एंटी-ऑक्सीडेंट्स, सल्फर, पोटैशियम, कैल्सियम और क्वेर्सेटिन नाम का पाचक तत्व मौजूद होता है. ये सूखे छिलके न सिर्फ आपके पौधों के लिए सबसे बेहतरीन प्राकृतिक खाद का काम करते हैं बल्कि सफेद बालों को काला करने, सूप-करी का फ्लेवर बढ़ाने और त्वचा की रंगत सुधारने में कमाल का असर दिखाते हैं. अगर आप प्याज के छिलकों को फेंकने के बजाय इकट्ठा करें तो घर के 5 बड़े काम मुफ्त में हो जाएंगे. आइए जानते हैं प्याज के छिलकों के 5 शानदार इस्तेमाल. पौधों के लिए पोटैशियम रिच लिक्विड खाद इस्तेमाल: 2 मुट्ठी प्याज के छिलकों को 1 लीटर पानी में डालकर 24 घंटे के लिए ढककर छोड़ दें. 24 घंटे बाद पानी का रंग लाल-भूरा हो जाएगा. इसे छानकर पौधों की जड़ों में डालें. इसमें मौजूद पोटैशियम, आयरन और सल्फर से पौधों में कीड़े नहीं लगते और ढेरों फूल व फल आते हैं. सफेद बालों को काला करने का नेचुरल हेयर डाई इस्तेमाल: प्याज के छिलकों को कड़ाही में बिना तेल के तब तक भूनें जब तक वे पूरी तरह काले न हो जाएं. अब इस राख को पीसकर पाउडर बना लें. इसमें 1 चम्मच एलोवेरा जेल या नारियल तेल मिलाकर सफेद बालों पर लगाएं. यह बिना किसी केमिकल के बालों को तुरंत नेचुरल काला रंग देता है. सूप और करी का रंग व फ्लेवर बढ़ाएं इस्तेमाल: वेजिटेबल सूप, स्टू या किसी दाल-ग्रेवी को पकाते समय प्याज के साफ छिलकों को धोकर उबलते समय डाल दें. परोसने से पहले छिलके निकाल लें. इससे सूप या ग्रेवी को खूबसूरत नेचुरल रिच कलर और सोंधा फ्लेवर मिलता है. कीड़े-मकौड़ों के लिए नेचुरल पेस्टिसाइड स्प्रे इस्तेमाल: प्याज के छिलकों को पानी में 10-15 मिनट उबालें. ठंडा होने पर पानी को स्प्रे बोतल में भरें और 1/2 चम्मच डिशवॉश लिक्विड मिलाएं. इस स्प्रे को पौधों पर छिड़कने से कीड़े, एफिड्स और चींटियां तुरंत भाग जाती हैं. इम्युनिटी और गले की खराश के लिए टी इस्तेमाल: प्याज के छिलकों को अच्छी तरह धोकर 2 कप पानी में 5-7 मिनट तक उबालें. छानकर इसमें थोड़ा-सा शहद और नींबू का रस मिलाकर पिएं. इसमें मौजूद क्वेर्सेटिन एंटी-ऑक्सीडेंट इम्युनिटी बूस्ट करता है और मौसम बदलने पर होने वाली गले की खराश व सर्दी में राहत देता है.

Orkut की वापसी की तैयारी? 12 साल बाद फिर चर्चा में आया पुराना सोशल मीडिया, जानें क्या है फाउंडर का प्लान

क्या आपको Orkut याद है? अगर आप मिलेनियल हैं तो पता ही होगा, लेकिन GenZ के लिए ये नाम नया लग सकता है. बता दें कि इसे सोशल मीडिया का OG प्लेटफॉर्म कहा जाता था. वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, जहां दोस्तों के प्रोफाइल देखना, एक-दूसरे की प्रोफाइल पर मैसेज छोड़ना और अपनी पसंद की कम्युनिटी से जुड़ना इंटरनेट का खास एक्सपीरिएंस हुआ करता था. फीड की जगह स्क्रैप होते थे. लोग अपने दोस्तों को स्क्रैप लिखते थे, जिनके ज्यादा स्क्रैप होते थे वो पॉपुलर माने जाते थे. अब करीब 12 साल बाद Orkut एक बार फिर चर्चा में है. इसके फाउंडर Orkut Buyukkokten ने लोगों से एक नए सोशल नेटवर्क को बनाने के लिए सपोर्ट मांगा है. उनका मकसद ऐसा इंटरनेट तैयार करना है, जहां लाइक, व्यूज और एल्गोरिदम से ज्यादा अहमियत असली लोगों, दोस्ती और आपसी जुड़ाव को मिले. गूगल और Orkut कनेक्शन गूगल में काम करने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर ऑर्कुट बायूकॉकटेन ने 2004 में Orkut नाम का प्लेटफॉर्म बनाया था. इसे गूगल के इंटर्नल प्रोजेक्ट के तौर पर तैयार किया गया था. हालांकि Orkut को गूगल ने 2014 में शटडाउन कर दिया, लेकिन Orkut.com के मालिक ऑर्कुट बायूकॉकटेन ही रहे, क्योंकि उन्हीं के पास इसके ट्रेडमार्क और राइट्स हैं. यह खबर ऐसे समय आई है, जब Instagram, Facebook और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर AI से तैयार कंटेंट, फर्जी प्रोफाइल और एल्गोरिदम के बढ़ते असर को लेकर चर्चा हो रही है. Orkut के फाउंडर का मानना है कि सोशल मीडिया लोगों को जोड़ने के बजाय उनका ध्यान खींचने और उन्हें ज्यादा समय तक स्क्रीन पर बनाए रखने पर केंद्रित हो गया है. ऐसे में वह इंटरनेट को फिर से इंसानों के करीब लाना चाहते हैं. बेहद पॉपुलर था Orkut Orkut की शुरुआत 2004 में हुई थी और दिलचस्प ये है कि इसके फाउंडर ने अपने ही नाम पर प्लेटफॉर्म का नाम रखा. इसके फाउंडर का नाम भी Orkut है. वो गूगल के इंजीनियर थे. ये भारत और ब्राजील में सबसे ज्यादा पॉपुलर हुआ. 2014 में इसे गूगल ने बंद कर दिया. क्या सच में वापस आ रहा है Orkut? सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि Orkut की पुरानी वेबसाइट और उसके पुराने अकाउंट अभी दोबारा शुरू नहीं हुए हैं. फिलहाल इसकी ऑफिशियल वेबसाइट पर एक अभियान चल रहा है, जिसके जरिए लोगों से पूछा जा रहा है कि क्या वे असली लोगों, दोस्ती और कम्युनिटी पर आधारित नया सोशल नेटवर्क चाहते हैं. इस अभियान के लिए लोग अपना नाम दर्ज करा सकते हैं और एक सपोर्टर कार्ड भी पा सकते हैं. लेकिन नाम दर्ज कराने का मतलब यह नहीं है कि आपका पुराना अकाउंट वापस मिल जाएगा या नए प्लेटफॉर्म पर आपका यूजरनेम सुरक्षित हो गया है. कंपनी ने अभी यह भी नहीं बताया है कि नया सोशल नेटवर्क कब लॉन्च होगा. क्यों खास था Orkut? Orkut को जनवरी 2004 में लॉन्च किया गया था. इसे Google के इंजीनियर Orkut Buyukkokten ने बनाया था. उस दौर में भारत और ब्राजील जैसे देशों में यह काफी पॉपुलर हुआ. लोग अपनी प्रोफाइल बनाते थे, दोस्तों को जोड़ते थे और अपनी पसंद के सबजेक्ट पर बनी कम्युनिटी में बातचीत करते थे. इसकी खासियत सिर्फ दोस्तों की लिस्ट बनाना नहीं थी. यूजर्स एक-दूसरे की प्रोफाइल पर स्क्रैप यानी पब्लिक मैसेज छोड़ सकते थे और अपने दोस्तों के लिए टेस्टिमोनियल लिख सकते थे. कम्युनिटी में लोग फिल्मों, संगीत, कॉलेज, शहरों और अपनी रोजमर्रा की पसंद से जुड़े विषयों पर बातचीत करते थे. आज के सोशल मीडिया की तरह हर पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की होड़ उस समय इतनी बड़ी नहीं थी. Orkut पर लोगों को अपनी पसंद के समूहों में जुड़ने और एक-दूसरे से बातचीत करने का अलग अनुभव मिलता था. हालांकि, समय के साथ Facebook और दूसरे प्लेटफॉर्म ज्यादा लोकप्रिय हो गए. आखिरकार Google ने सितंबर 2014 में Orkut को बंद कर दिया. AI से क्यों परेशान हैं Orkut के संस्थापक? Orkut ने अपनी वेबसाइट पर लिखे खुले पत्र में आज के सोशल मीडिया के बदलते स्वरूप पर चिंता जताई है. उनका कहना है कि सोशल नेटवर्किंग का असली मकसद लोगों को जोड़ना था, लेकिन अब कई प्लेटफॉर्म का जोर यूजर्स का ध्यान बनाए रखने पर है. उनके मुताबिक, AI से तैयार पोस्ट, बॉट्स और नकली तस्वीरों या वीडियो के बढ़ते इस्तेमाल से यह पहचानना मुश्किल हो सकता है कि स्क्रीन के दूसरी तरफ असली इंसान है या नहीं. सोशल मीडिया की खास बात यही थी कि लोग किसी दूसरे इंसान से जुड़ते थे. अगर यह भरोसा कमजोर होता है, तो ऑनलाइन बातचीत का अनुभव भी बदल सकता है. हालांकि, ऑर्कुट AI को पूरी तरह खारिज नहीं करते. उनकी सोच है कि AI का इस्तेमाल लोगों की जगह लेने के बजाय उन्हें नए दोस्त बनाने, पुराने दोस्तों को खोजने और अपनी पसंद की कम्युनिटी से जुड़ने में मदद करने के लिए होना चाहिए. यानी तकनीक का इस्तेमाल इंसानी रिश्तों को बेहतर बनाने के लिए हो, न कि उनकी जगह लेने के लिए. क्या लोग सच में पुराने सोशल मीडिया को मिस कर रहे हैं? Orkut की वापसी की चर्चा के पीछे पुरानी यादें जरूर हैं, लेकिन इसके साथ एक बड़ा सवाल भी जुड़ा है. क्या लोग आज के सोशल मीडिया से थक चुके हैं और ऐसा प्लेटफॉर्म चाहते हैं, जहां उन्हें हर समय ट्रेंडिंग पोस्ट, वायरल वीडियो और एल्गोरिदम से तय होने वाले कंटेंट के बीच न रहना पड़े? Orkut की आधिकारिक वेबसाइट पर चल रहे अभियान को दुनिया के कई देशों से समर्थन मिला है. रिपोर्ट के मुताबिक अब तक 115 देशों के लोगों से 2.6 लाख से ज्यादा सपोर्ट दर्ज किए जा चुके थे. यह आंकड़ा लोगों की दिलचस्पी दिखाता है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि नया सोशल नेटवर्क सफल होगा या सभी पुराने यूजर्स उस पर लौट आएंगे. किसी भी नए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए सिर्फ पुरानी यादें काफी नहीं होंगी. उसे यूजर्स की प्राइवेसी, फर्जी अकाउंट, ऑनलाइन सुरक्षा और कंटेंट मॉडरेशन जैसी चुनौतियों का भी हल निकालना होगा. साथ ही यह भी देखना होगा कि लोग रोजमर्रा की जिंदगी में इसे इस्तेमाल करने के लिए क्यों चुनेंगे. अब आगे क्या होगा? फिलहाल Orkut की वापसी को एक शुरुआती पहल … Read more

Starlink विवाद: भारत में सर्विस शुरू होने से पहले अटकी मंजूरी, चीन-रूस समेत कई देशों में बैन

Elon Musk की स्टारलिंक को लाइलेंस को लेकर उठा विवाद बढ़ता जा रहा है. मस्क लगातार भारत पर तीखे बयान जारी कर रहे हैं. इस पर भारत भी अपनी प्रतिक्रिया दे चुका है. हालांकि भारत कोई इकलौता देश नहीं है, जहां स्टारलिंक की सर्विस नहीं मिलती है. चीन से लेकर रूस तक ना जाने कितने देश हैं, जहां ये स्टारलिंक सर्विस बैन है. और बहुत से देशों में अप्रूवल का इंतजार किया जा रहा है. ऐसे में सिर्फ भारत को लेकर Elon Musk के बयान कई लोगों को हैरान कर रहे हैं. Starlink ने बताया कहां-कहां उपलब्ध है सर्विस Starlink का ऑफिशियल पोर्टल है, जहां ग्लोबल मैप की मदद से खुद कंपनी ने दिखाया है कि कहां-कहां पर सर्विस उपलब्ध है, किन देशों जल्द शुरू होगी और कहां पर स्टारलिंक सर्विस को बैन किया जा चुका है. स्टारलिंक पोर्टल पर दिखाया है कि कनाडा, अमेरिका, ब्राजील, स्वीडन, लंदन, ऑस्ट्रिया जैसे देशों सर्विस उपलब्ध है. भारत, पाकिस्तान, नेपाल, ईरान समेत कई देशों में स्थानीय अथॉरिटी की तरफ से अप्रूवल का इंतजार किया जा रहा है, जिसके बाद जल्द ही स्टारलिंक की सर्विस शुरू होगी. चीन, रूस, अफगानिस्तान, सीरिया का नाम शामिल हैं, जहां पर स्टारलिंक की सर्विस बैन है. फरवरी 2026 में एलॉन मस्क ने बताया था कि स्पेसएक्स ने अपनी सर्विस को रूस में बैन कर दिया है. यह कदम स्टारलिंक के अनाधिकृत इस्तेमाल को रोकने के लिए लिया गया है. ईरान में भी सरकार की पाबंदी मौजूद रान में इंटरनेट और कम्युनिकेशन सर्विस पर सरकारी कंट्रोल के बीच स्टारलिंक अहम टॉपिक बन चुका था. ईरान में इंटरनेट बंद होन के बाद बहुत से लोग स्टारलिंक सर्विस का इस्तेमाल करते थे. स्टारलिंक पोर्टल पर ईरान में सर्विस को बंद दिखाया है. जनवरी में रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि ईरान में सरकारी इंटरनेट बंद होने की वजह से कई लोग चोरी-छिपे स्टारलिंक की मदद से इंटरनेट एक्सेस कर रहे हैं. चीन में क्यों नहीं चलता है Starlink? चीन में विदेशी सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर के लिए सख्त नियम हैं. देश का दूरसंचार और इंटरनेट सिस्टम सख्त सरकारी कंट्रोल में है. ऐसे में स्टारलिंक को चीन में मंजूरी नहीं मिल पाई है. सरकार दे चुकी है अपनी प्रतिक्रिया भारत सरकार के मंत्रालय ने बताया है कि भारत के नियम सभी के लिए एक समान हैं. साथ ही तीन कंपनियों को लाइसेंस जारी किया है, जिसमें Elon Musk की स्टारलिंक कंपनी भी शामिल है. अभी सिक्योरिटी अप्रूवल मिलना बाकी है. Starlink क्या है? Starlink, असल में बिना मोबाइल टावर के घर तक या कहें कि यूजर तक हाई स्पीड इंटरनेट सर्विस को पहुंचाती है. इसके लिए वह सैटेलाइट का इस्तेमाल करती है. स्टारलिंक अमेरिकी कंपनी है.

Flipkart की सेल सभी के लिए शुरू, iPhone 17 से लेकर AC तक खरीदने का मौका, जानें डील्स

Flipkart पर बिग बिलियन डेज सेल की शुरुआत सभी के लिए हो चुकी है. सेल के दौरान कई स्मार्टफोन, iPhone, AC और मोबाइल असेसरीज आदि को सस्ते दाम में खरीदा जा सकेगा. लाइफस्टाइल प्रोडक्ट आदि को भी सस्ते दाम में खरीदा जा सकेगा. Flipkart Sale शुरू होने से पहले iPhone 17 की 79,999 रुपये की डील दिखाई थी लेकिन कुछ घंटे के अंदर ही कंपनी ने रेट्स में बदलाव कर दिया. अब iPhone 17 को 81,999 रुपये में लिस्ट किया है, जिसमें सभी ऑफर्स को शामिल किया है. हाल ही में iPhone 17  की सुरुआती कीमत 82,900 रुपये से बढ़ाकर 99,900 रुपये की जा चुकी है. iPhone 15 पर मिल रही डील्स Flipkart Sale में iPhone 15 को बेहद ही सस्ते दाम में खरीदने का मौका मिल रहा है. इस हैंडसेट की कीमत 59,999 रुपये में लिस्ट है. इसमें सभी ऑफर्स को शामिल किया गया है. दूसरे iPhone पर भी बंपर डिस्काउंट   फ्लिपकार्ट सेल के दौरान iPhone 17 Pro और 17 Pro Max को भी डिस्काउंट कीमत में लिस्ट किया है. सभी ऑफर्स के साथ इनकी बेहद ही कम कीमत में लिस्ट है. Samsung Galaxy S25 5G की इतनी है कीमत Samsung Galaxy S25 5G स्मार्टफोन को लॉन्चिंग प्राइस की तुलना में काफी सस्ते में खरीदने का मौका मिल रहा है. सेल के दौरान 54,999 रुपये में लिस्ट किया है,जिसमें सभी ऑफर्स को शामिल किया गया है. बीते साल इस हैंडसेट को 79,900 रुपये में लिस्ट किया था.   AC पर बंपर ऑफर फ्लिपकार्ट सेल के दौरान एयर कंडीशनर (AC) पर बंपर ऑफर दिए जा रहे हैं. सेल पेज पर बताया है कि 1 Ton AC को 22,990 रुपये की शुरुआती कीमत में खरीदा जा सकेगा. फ्लिपकार्ट पर AC के ढेरों ऑफ्शन मौजूद हैं. यह विंडो और Split AC के कई ऑप्शन मौजूद हैं.

कॉल रिकॉर्डिंग से मीटिंग नोट्स तक, क्रेडिट कार्ड जैसा AI डिवाइस Plaud सेल में हुआ सस्ता

दिवाली पर अगर इस बार किसी को ऐसा गैजेट गिफ्ट करना चाहते हैं जो सिर्फ दिखने में स्मार्ट न हो, बल्कि रोजमर्रा के काम भी आए, तो AI की दुनिया से एक दिलचस्प विकल्प सामने आया है. AI नोट लेने वाले गैजेट बनाने वाली कंपनी Plaud ने भारत में दिवाली के लिए अपने चार डिवाइस पर खास ऑफर का ऐलान किया है. इस ऑफर में कंपनी का सबसे महंगा Plaud Note Pro भी ₹4,000 सस्ता मिल रहा है. कंपनी के मुताबिक, यह ऑफर 8 अक्टूबर से 19 अक्टूबर 2026 तक चलेगा. खास बात यह है कि Plaud का यह गैजेट सिर्फ आवाज रिकॉर्ड नहीं करता. रिकॉर्ड की गई बातचीत को AI टेक्स्ट में बदलता है, उसकी समरी बनाता है और जरूरी बातों को अलग करके सामने रख सकता है. यानी मीटिंग में सामने बैठे व्यक्ति की बात सुनते हुए हर लाइन लिखने की जरूरत काफी कम हो सकती है. ₹13,990 से शुरू हुई Plaud की दिवाली सेल Plaud के चार डिवाइस इस ऑफर का हिस्सा हैं. Plaud Note Pro की कीमत ऑफर में ₹16,990 रखी गई है. Plaud NotePin S ₹15,990 में, Plaud Note ₹14,990 में और Plaud Note Pin ₹13,990 में मिलेगा. कंपनी की मौजूदा भारतीय वेबसाइट पर इन डिवाइस की कीमतें क्रमशः ₹20,990, ₹19,990, ₹16,990 और ₹16,990 हैं. यानी ऑफर के दौरान Note Pro और NotePin S पर ₹4,000 तक की बचत हो सकती है. Plaud Note पर ₹2,000 और NotePin पर ₹3,000 तक कम कीमत मिल रही है. यह ऑफर ऐसे समय आया है जब भारत में दिवाली से पहले ऑनलाइन शॉपिंग सीजन शुरू हो रहा है. Amazon की Great Indian Festival सेल भी 8 अक्टूबर से शुरू हो रही है और इसमें Plaud के AI नोट लेने वाले डिवाइस भी ऑफर में शामिल हैं. आखिर Plaud है क्या? पहली नजर में Plaud Note Pro किसी छोटे रिकॉर्डर या पुराने जमाने के डिक्टाफोन जैसा लग सकता है. लेकिन इसके अंदर का सिस्टम काफी अलग है. इसका काम सिर्फ आवाज को रिकॉर्ड करके रखना नहीं है. इसका असली काम रिकॉर्ड हुई बातचीत को उपयोगी जानकारी में बदलना है. मसलन, आपने किसी क्लाइंट के साथ 45 मिनट की मीटिंग की. इस दौरान आपने कई बातें सुनीं, कुछ सवाल पूछे और सामने वाले ने कई काम बताए. मीटिंग खत्म होने के बाद आपको पूरी बातचीत दोबारा सुनने की जरूरत पड़ सकती है. Plaud का सिस्टम इसी जगह काम आता है. रिकॉर्डिंग को AI ट्रांसक्रिप्ट में बदला जा सकता है और फिर उससे सारांश, जरूरी बातें और आगे किए जाने वाले काम निकाले जा सकते हैं. कंपनी के अनुसार उसका AI सिस्टम 112 भाषाओं में ट्रांसक्रिप्शन, स्पीकर की पहचान और अलग-अलग तरह के सारांश बनाने में सक्षम है. यानी यह सिर्फ रिकॉर्डर नहीं है. इसे एक तरह का डिजिटल नोट असिस्टेंट समझा जा सकता है. पत्रकार, छात्रों और प्रोफेशनल्स के लिए क्यों काम का? इस गैजेट का सबसे बड़ा इस्तेमाल उन लोगों के लिए है जिनका काम बातचीत पर टिका है. पत्रकारों के लिए इंटरव्यू इसका सबसे सीधा उदाहरण है. इंटरव्यू के दौरान लगातार नोट्स लिखने के बजाय पत्रकार बातचीत पर ध्यान दे सकता है और बाद में ट्रांसक्रिप्ट से जरूरी हिस्से निकाल सकता है. इसी तरह कॉरपोरेट मीटिंग, क्लाइंट कॉल, सेल्स मीटिंग, रिसर्च, लेक्चर या इंटरव्यू में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. Plaud ने भारत में लॉन्च के समय भी अपने डिवाइस को प्रोफेशनल्स, बिजनेस लीडर्स, सेल्स टीम, रिसर्चर्स, पत्रकारों और क्रिएटर्स को ध्यान में रखकर पेश किया था. Plaud Note Pro में ऐसा क्या खास है? चारों डिवाइस में सबसे ज्यादा फीचर Plaud Note Pro में मिलते हैं. यह क्रेडिट कार्ड के करीब आकार का डिवाइस है और इसमें चार माइक्रोफोन के साथ आवाज रिकॉर्ड करने की सुविधा दी गई है. कंपनी के अनुसार इसका ऑडियो पिकअप करीब 5 मीटर तक है. इसमें एक AMOLED डिस्प्ले भी है. इसका इस्तेमाल फोन कॉल और आमने-सामने की मीटिंग दोनों के लिए किया जा सकता है. कंपनी के मुताबिक इसकी 500mAh बैटरी Enhance Mode में 30 घंटे और Endurance Mode में 50 घंटे तक लगातार रिकॉर्डिंग कर सकती है. इसमें 64GB स्टोरेज दिया गया है. यानी अगर किसी को रोज कई मीटिंग करनी पड़ती हैं तो Note Pro सबसे ज्यादा फीचर वाला विकल्प है. हालांकि इसकी सामान्य कीमत ₹20,990 है, इसलिए ₹16,990 का दिवाली ऑफर इसे पहले के मुकाबले ज्यादा दिलचस्प बनाता है. NotePin S उन लोगों के लिए है जिन्हें छोटा और पहनने वाला गैजेट चाहिए Plaud का दूसरा बड़ा डिवाइस NotePin S है. इसका डिजाइन अलग है. इसे कपड़ों पर पिन किया जा सकता है या लैनयार्ड और रिस्टबैंड के साथ पहना जा सकता है. इसमें सबसे खास चीज एक फिजिकल रिकॉर्ड बटन है. इसे लंबे समय तक दबाकर रिकॉर्डिंग शुरू की जा सकती है, जबकि छोटा प्रेस करके बातचीत के किसी खास हिस्से को हाईलाइट किया जा सकता है. बाद में AI को यह समझने में मदद मिलती है कि बातचीत का कौन सा हिस्सा ज्यादा महत्वपूर्ण था. NotePin S का वजन करीब 17.4 ग्राम है और इसमें 64GB स्टोरेज के साथ करीब 20 घंटे तक रिकॉर्डिंग का दावा किया गया है. एक बात ध्यान रखना जरूरी है AI रिकॉर्डर खरीदना सिर्फ हार्डवेयर खरीदना नहीं है. इस तरह के डिवाइस का असली फायदा उसके AI सॉफ्टवेयर से आता है. Plaud में भी रिकॉर्डिंग को ट्रांसक्रिप्ट और सारांश में बदलने के लिए उसका AI सिस्टम इस्तेमाल होता है. कंपनी की वेबसाइट के अनुसार हर महीने 300 मिनट का AI ट्रांसक्रिप्शन Starter Plan में मिलता है. ज्यादा इस्तेमाल करने वालों को दूसरे प्लान की जरूरत पड़ सकती है. इसलिए सिर्फ डिवाइस की कीमत देखकर फैसला करना सही नहीं होगा

45 की उम्र में भी त्वचा दिखेगी जवां? घर पर बनाएं मुल्तानी मिट्टी का नेचुरल फेस पैक

 उम्र बढ़ने के साथ चेहरे पर टैनिंग, झाइयां, फाइन लाइन्स और ओपन पोर्स की समस्या होना आम बात है. लेकिन आजकल खराब लाइफस्टाइल और प्रदूषण की वजह से कई महिलाओं को उम्र से पहले ये दिक्कत होने लगती है. अगर आपकी स्किन भी चमक खो चुकी है तो इसके लिए महंगे ब्यूटी पार्लर जाकर फेशियल कराने या केमिकल युक्त प्रोडक्ट्स लगाने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. बल्कि किचन की कुछ प्राकृतिक चीजों से आप अपनी खोई हुई सुंदरता वापस पा सकती हैं. यहां हम आपको मुल्तानी मिट्टी में टमाटर का जूस और एलोवेरा से बनने वाला फेस पैक बता रहे हैं जो स्किन के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है. मुल्तानी मिट्टी त्वचा से अतिरिक्त तेल और गंदगी को खींचकर चेहरे को टाइट करती है. एलोवेरा जेल गहराई से मॉइश्चराइज करके झुर्रियों को मिटाता है और टमाटर में मौजूद लाइकोपीन व विटामिन-C जिद्दी टैनिंग और काले धब्बों को साफ करके गालों पर प्राकृतिक गुलाबी निखार लाता है. हफ्ते में 2 बार इसे लगाने से 45 की उम्र में भी त्वचा 25 जैसी खिली-खिली और जवां दिखने लगती है. आइए जानते हैं इसे बनाने और लगाने का सही तरीका. सामग्री: 1 बड़ा चम्मच मुल्तानी मिट्टी पाउडर 1 बड़ा चम्मच ताजा एलोवेरा जेल (या स्टोर-बॉस प्योर जेल) 1 बड़ा चम्मच ताजा टमाटर का रस (छानकर बीज अलग किया हुआ) 1/2 छोटा चम्मच गुलाब जल (पेस्ट को स्मूथ बनाने के लिए) बनाने का तरीका एक कटोरी में 1 चम्मच मुल्तानी मिट्टी लें. इसमें 1 चम्मच एलोवेरा जेल, 1 चम्मच ताजा टमाटर का रस और थोड़ा-सा गुलाब जल मिलाएं. सभी चीजों को चम्मच की मदद से अच्छे से फेंट लें ताकि कोई गुठली न रहे और एक स्मूथ पैक तैयार हो जाए. अपना चेहरा माइल्ड फेस वॉश से धोकर सुखा लें. अब इस पैक को चेहरे और गर्दन पर नीचे से ऊपर की तरफ एक समान लगाएं. इसे 15-20 मिनट के लिए चेहरे पर लगा रहने दें जब तक कि यह 80% सूख न जाए. (पूरा सूखने न दें, हल्का गीला रहने पर ही धो लें). चेहरे पर पानी छिड़ककर 1 मिनट हल्के हाथों से गोलाकार में मसाज करें और सादे पानी से धो लें. इसके बाद एलोवेरा जेल या हल्का मॉइश्चराइजर लगा लें. हफ्ते में 2 बार इसका इस्तेमाल करें.

भारत में टेक जॉब्स 1.23 लाख के पार, लेकिन फ्रेशर्स के लिए घटी नौकरियां; अनुभवी लोगों की बढ़ी मांग

भारत के टेक्नोलॉजी जॉब मार्केट से एक बहुप्रतीक्षित और राहत भरी खबर आई है. देश में टेक नौकरियों की संख्या पिछले 18 महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है. अक्टूबर में एक्टिव जॉब्स का आंकड़ा 1.23 लाख के पार हो गया है. लेकिन, अगर आप कॉलेज पासआउट हैं और यह सोच रहे हैं कि बाजार खुलने का सीधा फायदा आपको मिलेगा, तो ठहरिए—आंकड़ों की इस चमक के पीछे एक बड़ा कैच (पेच) छुपा है. स्टाफिंग फर्म 'Xpheno' की ताजा 'एक्टिव टेक जॉब्स आउटलुक' रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2026 में नौकरियों की मांग सितंबर के मुकाबले 5% और पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले 17% बढ़ी है. हालांकि, रिकवरी की यह बयार सबके लिए एक जैसी नहीं है, इस बाजार पर पूरी तरह से अनुभवी पेशेवरों का कब्जा दिख रहा है. 1.23 लाख नौकरियां… आखिर किसे मिल रहा है मौका? आंकड़ों का हिसाब-किताब देखें तो मिड-सीनियर (अनुभवी) रोल्स की मांग सबसे ज्यादा है. अकेले इस सेगमेंट में 68,000 वेकेंसी हैं, जो कुल ओपनिंग्स का 55% हिस्सा हैं. इसमें सालाना आधार पर 19% का उछाल दर्ज किया गया है. दूसरी तरफ, फ्रेशर्स या एंट्री-लेवल नौकरियों की संख्या महज 15,000 पर सिमट कर रह गई है. हालांकि यह आंकड़ा पिछले साल से 15% ज्यादा है, लेकिन सितंबर के मुकाबले इसमें 6% की गिरावट दर्ज की गई है. साफ संदेश है कि बाजार तो बड़ा हो रहा है, लेकिन मलाई अनुभवी हाथों के हिस्से ही आ रही है. हायरिंग लेवल का पूरा गणित मिड-सीनियर: 68,000 (कुल का 55%, YoY +19%) एंट्री-लेवल: 15,000 (YoY +15%, लेकिन MoM -6%) मिड-जूनियर: 7,000 (MoM +40%, YoY +17%) सीनियर रोल्स: 2,000 (मांग का छोटा हिस्सा) अन्य/अपरिभाषित पद: 31,000 कंपनियों को कैसी स्किल्स की तलाश है? इस रिकवरी को सबसे ज्यादा सहारा आईटी सर्विसेज से मिल रहा है, जहां 66,000 एक्टिव नौकरियां हैं जो पिछले साल अक्टूबर से 57% ज्यादा हैं. कंपनियां अब सिर्फ डिग्री देखकर नौकरियां नहीं बांट रहीं. Xpheno के मुताबिक, एआई इंजीनियरिंग (AI Engineering), डेटा एनालिस्ट और टेक्निकल लीडरशिप जैसे रोल्स की जबरदस्त डिमांड है. टॉप 6 आईटी कंपनियों के डेटा से पता चलता है कि इन खास रोल्स में टैलेंट पूल पिछले दो तिमाहियों में 14% से 22% तक बढ़ा है. कोर टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग रोल्स 61,000 नौकरियों के साथ सबसे आगे हैं. इसके बाद टेक बिजनेस डेवलपमेंट व सेल्स (14,000), टेक कंसल्टिंग (5,000) और आईटी प्रोजेक्ट मैनेजमेंट (3,000) का नंबर आता है. वर्क-फ्रॉम-होम का जमाना खत्म, ऑफिस वापसी का दौर ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) में 18,000 वेकेंसी हैं, जो पिछले साल के मुकाबले 64% ज्यादा हैं. लेकिन सबसे बड़ा बदलाव काम करने के तरीके में आया है. वर्क-फ्रॉम-ऑफिस (WFO): 1 लाख नौकरियां (कुल मांग का 81%) पूरी तरह ऑफिस से काम करने वाली हैं. रिमोट और हाइब्रिड: वर्क-फ्रॉम-होम (रिमोट) नौकरियों में 23% और हाइब्रिड रोल्स में 19% की भारी गिरावट आई है. बेंगलुरु का दबदबा कायम, लेकिन टियर-2 और 3 शहरों ने चौकाया टेक जॉब्स के मामले में 31,000 नौकरियों के साथ बेंगलुरु देश का सबसे बड़ा हब बना हुआ है. इसके बाद हैदराबाद (14,000) और दिल्ली-एनसीआर (9,000) का नंबर आता है. लेकिन असली चौंकाने वाला आंकड़ा टियर-2 और टियर-3 शहरों से आया है. छोटे शहरों में एक्टिव टेक नौकरियों की संख्या बढ़कर 40,000 पहुंच गई है, जिसमें सालाना आधार पर 67% की रिकॉर्ड तेजी देखी गई है.

PM मोदी का बड़ा बयान- गांव से शहर तक पहुंची 5G कनेक्टिविटी, भारत बन रहा डिजिटल पावरहाउस

इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 का आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्घाटन किया. IMC 2026 देश का बड़ा टेक और टेलीकॉम इवेंट है. इसका आयोजन 7 से 10 अक्टूबर तक नई दिल्ली के यशोभूमि में हो रहा है. इस बार IMC का 10वां एडिशन है. नरेंद्र मोदी ने IMC 2026 का उद्घाटन करते समय सबसे पहले लोगों का धन्यवाद किया. उन्होंने बताया कि आज भारत के लिए एक विशेष दिन है.  साथ ही उन्होंने बताया कि कल ही उन्हें देश की सेवा करते हुए 25 साल पूरे हुए हैं. उद्घाटन के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अभिनेता नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि दी. नरेंद्र मोदी ने बताया है कि बीते 10-12 सालों में मोबाइल फोन गर्वनेंस का टूल बनकर सामने आया है. यह हमारे डिजिटल इंडिया का को रहा है. आज दूर सुदूर गांव और गरीब के बच्चे भी मोबाइल की वजब से बेहतर एजुकेशन पा रहे हैं. कोरोना माहामारी के दौरान भी मिला फायदा – मोदी मोबाइल से कोरोना महामारी के दौरान भी काम और पढ़ाई जारी रही, जो नई टेक्नोलॉजी की वजह से संभव हुआ. दूर-दराज के गांवों के बच्चे भी डिजिटल लर्निंग का फायदा उठा पा रहे हैं. उन्होंने ऑनलाइन एजुकेशन के लिए ‘दीक्षा’ प्लेटफॉर्म के बारे में भी बात की. प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि अब सरकारी योजना और सब्सिडी का लाभ आम लोगों तक आसानी से पहुंच रहा है. साथ ही उन्होंने बताया है कि भारत में टेलिकॉम सेक्टर का विस्तार हुआ है. रिमोट एरिया में भी टेलिकॉम का विस्तार हुआ और डेटा भी अफोर्डेबल हुआ है. आज भारत में 50 करोड़ लोग किसी ना किसी तरह से गेमिंग सेक्टर से जुड़ा है. लोग गेमिंग से जुड़ने के साथ ही ई स्पोर्ट्स में कॉन्ट्रीब्यूट भी कर रहा है. सस्ते डेटा की वजह से सभी को फायदा हुआ है. सिर्फ कंटेंट क्रिएशन की इंडस्ट्री भारत में हजारों करोड़ रुपये की हो चुकी है. फोन की सिक्योरिटी और नेटवर्क सिक्योरिटी हम सभी की प्राथमिकता है. अब लोगों को पता रहता है कि फोन कौन कर रहा है और मैसेज कौन कर रहा है. साथ ही लोगों को पता रहता है कि कॉल और मैसेज फेक हैं या नहीं. उन्होंने बताया है कि साइबर फ्रॉड और साइबर क्राइम सीमाएं नहीं मानते हैं. इसके लिए जरूरी कि साइबर फ्रॉड से मुकालबा करने के लिए एक ग्लोबल फ्रेम वर्क तैयार करना चाहिए. पीएम ने कहा कि ऐसे मैकेनिज्म तैयार करें जिससे साइबर फ्रॉड को रोका जा सके. इंडिया मोबाइल कांग्रेस की थीम ‘Scale Without Boundaries’ है. यहां 5G, 6G, AI, IoT, सैटेलाइट कम्युनिकेशन और दूसरी नई टेक्नोलॉजी देखने को मिल रही हैं. दुनियाभर की बड़ी टेक और टेलीकॉम कंपनियां, स्टार्टअप और इंडस्ट्री के बड़े नाम इस इवेंट में हिस्सा ले रहे हैं. आइए जानते हैं क्या होगा इस इवेंट में. फ्यूचर टेक्नोलॉजी की झलक IMC 2026 एशिया का बड़ा टेक्नोलॉजी शोकेस होने वाला इवेंट है. इस इवेंट में देश और दुनिया की बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों से लेकर नए-नए स्टार्टअप अपने प्रोडक्ट्स और भविष्य में इस्तेमाल होने वाली टेक्नोलॉजी की झलक दिखा रहे है. इस इवेंट में टेलीकॉम को 5G से 6G तक कैसे लेकर जाया जाए, इस पर भी बात होगी. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को देश में ही कैसे बनाया जा सके और लोगों के भले के लिए इसका इस्तेमाल कैसे हो, इस पर भी चर्चा होगी. स्टार्टअप्स अपने AI प्रोडक्ट्स की झलक दिखा सकते हैं. इसके अलावा, इस साल कुछ नई चीजें भी जोड़ी गई हैं, जैसे स्मार्ट मोबिलिटी और इंडस्ट्रियल रोबोटिक्स. आने वाले समय में बड़े स्तर पर इनका इस्तेमाल किया जा सकता है.इनका डेमोंस्ट्रेशन और एग्जिबिशन भी लगाया गया है. कैसे हिस्सा लें इस इवेंट में IMC 2026 के इवेंट में जाकर नई टेक्नोलॉजी को समझने और डेमोंस्ट्रेशन देखने के लिए आप रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं. स्टूडेंट्स और विजिटर्स के लिए फ्री एंट्री दी गई है. रजिस्ट्रेशन करने के लिए IMC के ऑफिशियल रजिस्ट्रेशन पोर्टल से रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है.  

Elon Musk के आरोपों पर सरकार का जवाब, कहा- ‘सैटकॉम के लिए सभी कंपनियों के नियम समान’

भारत सरकार ने गुरुवार को अमेरिकी बिजनेसमैन एलॉन मस्क (Elon Musk) के आरोपों पर जवाब दिया है. सरकार ने मस्क के उन आरोपों को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाए हैं कि भारत में स्टारलिंग की सैटेलाइट कम्युनिकेशन (Satcom) सर्विस को रोका जा रहा है. मस्क के आरोपों पर जवाब देते हुए भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि देश में हर एक सैटकॉम लाइसेंस होल्डर के लिए सिक्योरिटी स्टैंडर्ड को फॉलो करना जरूरी है. सरकार ने जोर देकर कहा है कि सैटेलाइट सर्विस समेत सभी टेलिकॉम सर्विस के लिए देश में एक समान और गैर-भेदभावपूर्ण रेगुलेशन सिस्टम मौजूद है. सरकार ने एक बयान में कहा कि यह कहना कि रेगुलेशन सिस्टम या उसे लागू करने की प्रक्रिया भेदभावपूर्ण है, यह आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद और गलत धारणा पर आधारित हैं. मस्क ने सिस्टम पर लगाएं गंभीर आरोप दरअसल, बुधवार को मस्क ने आरोप लगाया था कि भारत में कुछ 'ओलिगार्क्स' (प्रभावशाली कारोबारी समूह) अपनी मोनोपॉली को बनाए रखने के लिए उनकी कंपनी की सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विस को रोक दिया है. सोशल मीडिया पोस्ट सर्कुलेट हो रहा टेलीकॉम मंत्रालय ने गुरुवार को बताया है कि सोशल मीडिया पर एक पोस्ट सर्कुलेट हो रहा है, जिसमें भारत के सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाओं के नियामक सिस्टम की निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े किए हैं. टेलीकॉम सर्विस के लिए एक समान नियम मंत्रालय ने कहा, सरकार ने सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाओं समेत सभी टेलीकम्युनिकेशन सर्विस समेत सभी टेलीकॉम सर्विस के लिए एक समान और गैर भेदभावपूर्ण ऑथराइजेशन फ्रेमवर्क लागू किया है. भारत में तीन कंपनियों को लाइसेंस भारत सरकार ने तीन सैटेलाइट कम्युनिकेशन कंपनियों को देश में सर्विस शुरू करने के लिए लाइसेंस दिया है. इनमें मस्क की स्टारलिंक, जियो सैटकॉम और यूटेलसैट वनवेब शामिल हैं. हालांकि इन सभी कंपनियों को अपनी सर्विस को शुरू करने से पहले स्पेक्ट्रम और सिक्योरिटी अप्रूवल हासिल करने होंगे. टेलीकॉम मंत्रालय के मुताबिक, लाइसेंस की शर्तों के तहत हर एक सैटकॉम लाइसेंस होल्डर्स को सिक्योरिटी संबंधित नियमों को फॉलो करने की पुष्टि करनी होगी. सिक्योरिटी पैरामीटर्स को फॉलो करना जरूरी मंत्रालय ने आगे बताया है कि इसका मकसद कि भारत के लिए प्रोवाइड कराई जा रही सर्विस अलग-अलग सिक्योरिटी पैरामीटर्स को पूरा करें. इससे सभी यूजर्स और उनके डेटा की सिक्योरिटी सुनिश्चित की जा सके. इस प्रोसेस के तहत तीनों लाइसेंस होल्डर्स की सुरक्षा पैरामीटर्स की जांच अभी जारी है.