samacharsecretary.com

इंग्लैंड को मिली बड़ी जिम्मेदारी, 2031 तक वहीं होंगे WTC फाइनल मुकाबले

नई दिल्ली वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप जब से शुरू हुई है तब से इसका फाइनल मैच इंग्लैंड में ही खेला गया। अभी तक खेले तीन फाइनलों में से एक में भी इंग्लैंड की टीम नहीं पहुंची है। आईसीसी ने ये पहले ही तय कर दिया था कि चैंपियनशिप के शुरुआती तीन फाइनल इंग्लैंड की मेजबानी में होंगे। फिर संभावना जताई जा रही थी कि अब आईसीसी इसका वेन्यू बदलेगा और किसी अन्य देश को मेजबानी सौंपेगे। इस बारे में क्रिकेट की सर्वोच्च संस्था ने फैसला कर लिया है। आईसीसी की सिंगापुर में हुई वार्षिक आम बैठक में फैसला किया गया है कि 2031 तक होने वाले वर्ल़्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल मैच इंग्लैंड में ही खेले जाएंगे। यानी अगले तीन एडिशंस के फाइनल भी इंग्लैंड के मैदानों पर होंगे। इस कारण लिया फैसला इसकी मेजबानी की रेस में ऑस्ट्रेलिया और भारत भी थे। बीसीसीआई के पूर्व सचिन जय शाह आईसीसी के चेयरमैन है और इसलिए उम्मीद जताई जा रही थी कि हो सकता है कि भारत को मेजबानी मिल जाए, लेकिन बीसीसीआई को निराशा हाथ लगी है। आईसीसी ने इंग्लैंड में ही फाइनल कराने के पीछे तर्क दिया है कि इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड का पिछले तीन फाइनल का ट्रैक रिकॉर्ड शानदार है। साल 2021 में पहला फाइनल साउथैम्पटन में भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेला गया था। दूसरा फाइनल द ओवल में साल 2023 में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुआ था। तीसरा फाइनल इसी साल ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका के बीच लॉर्ड्स में खेला गया था। आईसीसी ने अपने बयान में कहा, "हाल ही में हुए फाइनल मैचों की मेजबानी के ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए बोर्ड 2027, 2029 और 2031 में होने वाले आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल की मेजबानी भी इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड को देने की पुष्टि करता है।" इंग्लैंड को जीतना होगा खिताब अभी तक तीनों फाइनलों में इंग्लैंड की टीम नहीं देखी गई है जबकि उसने बैजबॉल के नाम से काफी हाइप बनाया है। अब ये देखना होगा कि बेन स्टोक्स की कप्तानी वाली इंग्लैंड अगले तीन संस्करणों में से कितनी बार फाइनल में पहुंचने में सफल रहती है। इंग्लैंड की टीम भी खिताब जीतने की हकदार है।  

वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ लीजेंड्स 2025 : इंडिया चैंपियंस और पाकिस्तान चैंपियंस के बीच मुकाबला रद्द

नई दिल्ली इंडिया चैंपियंस और पाकिस्तान चैंपियंस के बीच वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ लीजेंड्स 2025 (डब्ल्यूसीएल) का बहुप्रतीक्षित मुकाबला रद्द हो गया है। यह मैच रविवार को भारतीय समय के अनुसार रात 9 बजे से एजबेस्टन क्रिकेट ग्राउंड पर खेला जाना था, लेकिन कुछ खिलाड़ियों ने इस मुकाबले में खेलने से साफ इनकार कर दिया। डब्ल्यूसीएल ने इस मुकाबले को लेकर एक बयान जारी करते हुए लिखा, "हम डब्ल्यूसीएल में हमेशा क्रिकेट से प्रेम करते आए हैं। हमारा एकमात्र उद्देश्य खेल प्रेमियों को खुशनुमा और यादगार पल देना रहा है। जब हमें यह पता चला कि इस साल पाकिस्तान की हॉकी टीम भारत आ रही है, और हाल ही में भारत-पाकिस्तान की वॉलीबॉल प्रतियोगिता सहित अन्य खेलों में भी दोनों देशों के बीच मुकाबले हो रहे हैं, तो हमने सोचा कि डब्ल्यूसीएल में भारत और पाकिस्तान का मैच आयोजित करते हुए एक सकारात्मक याद लोगों को दी जा सके, लेकिन हो सकता है कि इसी प्रक्रिया में हम अनजाने में कई लोगों की भावनाएं आहत कर बैठे।" बयान में आगे कहा गया, "हमने अनजाने में भारत के उन महान क्रिकेटर्स को असहज कर दिया, जिन्होंने देश को गौरवान्वित किया है। इसीलिए, हमने फैसला लिया है कि भारत और पाकिस्तान के मैच को रद्द किया जाए। क्षमा चाहते हैं कि हमारी किसी भी पहल से किसी की भावनाएं आहत हुईं। आशा है आप हमारी भावना को समझेंगे।" भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज शिखर धवन शनिवार देर रात भारत-पाकिस्तान के मुकाबले से अपना नाम वापस लेने का ऐलान कर चुके थे। शिखर धवन ने एक्स पर एक ई-मेल का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा, "जो कदम 11 मई को लिया, उस पर आज भी वैसे ही खड़ा हूं। मेरा देश मेरे लिए सब कुछ है, और देश से बढ़कर कुछ नहीं होता। जय हिंद!" धवन ने जिस ई-मेल का स्क्रीनशॉट पोस्ट किया, उसमें लिखा है, "यह पत्र औपचारिक रूप से इस बात की पुनः पुष्टि और स्मरण हेतु है कि शिखर धवन आगामी डब्ल्यूसीएल लीग में पाकिस्तान टीम के खिलाफ किसी भी मैच में हिस्सा नहीं लेंगे। यह फैसला 11 मई 2025 को कॉल और व्हाट्सएप पर हमारी चर्चा के दौरान पहले ही बता दिया गया था। भारत और पाकिस्तान के बीच जियोपॉलिटिकल सिचुएशन और व्याप्त तनाव को मद्देनजर रखते हुए, धवन और उनकी टीम ने सोच-समझकर यह फैसला लिया है।" उल्लेखनीय है कि 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादी हमला हुआ, जिसमें 26 नागरिक मारे गए थे। इस हमले की जिम्मेदारी द रेजिस्टेंस फ्रंट ने ली थी। इसके बाद भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के जरिए पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया था।

क्रिकेट इतिहास बदलने को तैयार शुभमन गिल, यूसुफ का रिकॉर्ड खतरे में

नई दिल्ली  भारतीय टीम के कप्तान शुभमन गिल ने इंग्लैंड के खिलाफ शुरुआती दो टेस्ट मैच में दमदार प्रदर्शन किया है। हालांकि तीसरे टेस्ट में वह उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सके और दोनों पारियों में सस्ते में पवेलियन लौटे। शुभमन गिल के पास चौथे टेस्ट में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करने का मौका है। मैनचेस्टर में होने वाले मुकाबले में गिल इंग्लैंड में द्विपक्षीय टेस्ट सीरीज में किसी एशियाई बल्लेबाज द्वारा बनाए गए सर्वाधिक रन के रिकार्ड को तोड़ने के करीब हैं।   इंग्लैंड में एक टेस्ट सीरीज में एशियाई बल्लेबाज द्वारा सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड पाकिस्तान के मोहम्मद यूसुफ के नाम है। उन्होंने 2006 में 4 मैचों में 90.14 के औसत से 631 रन बनाए थे। उनका हाईएस्ट स्कोर 202 रहा। इस लिस्ट में भारत के स्टार बल्लेबाज शुभमन गिल दूसरे नंबर पर पहुंच गए हैं। शुभमन गिल ने तीन मैचों में 101.16 के औसत से 607 रन बना लिए हैं और वह मोहम्मद यूसुफ का रिकॉर्ड तोडऩे से सिर्फ 25 रन दूर हैं। इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर भारत के पूर्व क्रिकेटर राहुल द्रविड़ हैं। उन्होंने 2002 में इंग्लैंड में तीन मैचों में 602 रन बनाए थे। भारत के पूर्व कप्तान विराट कोहली ने 2018 में पांच मैचों में 593 रन बनाए थे। दिग्गज सुनील गावस्कर ने 1979 में 4 मैचों में 542 रन जड़े थे। पाकिस्तान के सलीम मलिक ने 1992 में पांच मैचों में 488 रन बनाए थे। गिल लॉर्ड्स में दो टेस्ट मैचों में 485 रन बनाकर उतरे थे। उन्होंने चार पारियों में तीन शतक लगाए और उनमें से एक को करियर की सर्वश्रेष्ठ 269 रनों की पारी में बदल दिया। तीसरे टेस्ट में बल्लेबाजी के लिए हालात बाकी सीरीज की तुलना में ज्यादा मुश्किल थे। दूसरी पारी में उन्हें एक सख्त नई गेंद का सामना करना पड़ा। बाकी हर बार, उन्हें एक पुरानी, नरम गेंद के सामने शुरुआत करने का फायदा मिला, जो ज्यादा असर नहीं कर रही थी। भारत इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स में तीसरा टेस्ट मैच 22 रन से हार गया और सीरीज में 1-2 से पिछड़ गया। दोनों टीमें 23 जुलाई से मैनचेस्टर में एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी के चौथे टेस्ट में आमने-सामने होंगी।  

भारतीय टीम की टेंशन बढ़ी: आकाशदीप की चोट ने चौथे टेस्ट में खेलना किया मुश्किल

नई दिल्ली  भारतीय टीम इंग्लैंड के खिलाफ बुधवार से शुरू होने वाले चौथे टेस्ट से पहले खिलाड़ियों की चोटों से परेशान है। ऋषभ पंत, अर्शदीप और अब आकाशदीप की चोट ने भारतीय टीम की मुश्किलें बढ़ा दी है। अर्शदीप के बाद अब आकाशदीप भी मैनचेस्टर टेस्ट से बाहर होने के कगार पर हैं। भारतीय टीम लॉर्ड्स टेस्ट में मिली 22 रनों से हार के बाद पांच मैचों की टेस्ट सीरीज में 1-2 से पीछे है। सीरीज को बराबर करने के लिए भारत को चौथा मैच जीतना काफी जरूरी है लेकिन इस मैच से पहले खिलाड़ियों की इंजरी ने भारत को बदलाव के लिए मजबूर कर दिया है। इंग्लैंड के खिलाफ दूसरा और तीसरा टेस्ट मैच खेलने वाले आकाशदीप ग्रोइन की चोट से जूझ रहे हैं। लॉर्ड्स में खेले गए मैच के दौरान भी आकाशदीप को पीठ में दिक्कत हो रही थी। वह चौथे दिन दर्द में दिखे थे। तीसरे टेस्ट में आकाशदीप सिर्फ एक विकेट हासिल कर सके थे। वहीं दूसरे टेस्ट में उन्होंने 10 विकेट चटकाए थे। आकाशदीप 23 जुलाई को होने वाले टेस्ट के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है। उनकी चोट ने भारत की मुश्किलें बढ़ा दी है। क्योंकि अर्शदीप सिंह को नेट सत्र के दौरान साइ सुदर्शन का एक शॉट बचाते समय बायें हाथ में चोट लगी थी। आकाशदीप और अर्शदीप के अलावा विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत भी चोटिल हैं और उनके बतौर विकेटकीपर बल्लेबाज खेलने पर संशय है। आकाशदीप और अर्शदीप के चोटिल होने के बाद जसप्रीत बुमराह का खेलना तय माना जा रहा है क्योंकि इसके बाद भारत के पास ज्यादा विकल्प नहीं हैं। प्रसिद्ध कृष्णा काफी महंगे साबित हुए हैं और इस वजह वह तीसरे टेस्ट से बाहर हुए थे। हालांकि चोटिल गेंदबाजों की संख्या बढ़ने के कारण भारत ने मैच से पहले आकाश दीप और अर्शदीप सिंह के कवर के तौर पर तेज गेंदबाज अंशुल कम्बोज को टीम में शामिल किया है।  

21वीं सदी की IND vs ENG बेस्ट XI, आकाश चोपड़ा ने रोहित-धोनी समेत कई दिग्गजों को नहीं दी जगह

नई दिल्ली पूर्व भारतीय क्रिकेटर और मौजूदा एक्सपर्ट आकाश चोपड़ा ने 21वीं सदी में खेलने वाले भारतीय और इंग्लिश क्रिकेटरों की एक संयुक्त टेस्ट XI चुनी है। इस टीम में सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, विराट कोहली और एलिस्टर कुक जैसे कई दिग्गज है, वहीं ऋषभ पंत और जसप्रीत बुमराह जैसे युवा खिलाड़ियों को भी जगह मिली है। हालांकि पूर्व कप्तान रोहित शर्मा और एमएस धोनी जैसे कई बड़े नाम लिस्ट से गायब है। आईए एक नजर डालते हैं आकाश चोपड़ा की 21वीं सदी की इंडिया वर्सेस इंग्लैंड XI पर- आकाश चोपड़ा ने अपने यूट्यूब चैनल पर इस टीम को चुनते हुए कहा, "सलामी बल्लेबाज कौन होना चाहिए? मुझे लगता है कि इसमें कोई सवाल या संदेह नहीं है। आपको वीरेंद्र सहवाग को एक तरफ रखना होगा। उनके नाम दो तिहरे शतक और ढेरों रन हैं। उनके अलावा, एलिस्टर कुक को भी कोई चुनौती नहीं दे रहा है। एक लगातार मारता है, दूसरा जिद के साथ अड़ा रहता है, लेकिन दोनों रन बनाते हैं। इसके बाद सबसे मुश्किल सवाल आता है – राहुल द्रविड़ या जो रूट? मैं इस सवाल पर पूरी तरह से बंटा हुआ हूं। चूंकि मैं भारतीय हूं और जैमी के साथ खेल चुका हूं, इसलिए मैं निश्चित तौर पर राहुल भाई को अपनी टीम में रखना चाहूंगा, लेकिन अगर आप जो रूट को अपनी टीम में रखते हैं तो मैं आपसे बहस नहीं करूंगा। नंबर 4 पर कोई प्रतिस्पर्धा नहीं है। मैं सचिन तेंदुलकर के साथ हूं। आप इसके खिलाफ क्यों बहस करेंगे? वह अब तक के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी हैं। आप सोच रहे होंगे कि क्या कोई और वहां हो सकता था नहीं। पांचवें नंबर पर चर्चा चल रही है। केविन पीटरसन या विराट कोहली हो सकते हैं। अगर आप अंग्रेज हैं तो आप पीटरसन को चुनना चाहेंगे, लेकिन फिर विराट कोहली भी हैं। मुझे नहीं पता कि आप विराट कोहली को कैसे बाहर रख सकते हैं। इसलिए मैं पांचवें नंबर पर विराट कोहली को रखूंगा। नंबर 6 पर मैंने ऋषभ पंत को चुना है। अचानक, ऐसा लग रहा है कि मैं एक भारतीय टीम बना रहा हूं। जब मैं किसी विकेटकीपर के बारे में सोचता हूं, तो मुझे इंग्लैंड का कोई भी ऐसा खिलाड़ी याद नहीं आता जिसके बारे में आप कह सकें कि उसका नाम टीम में होना चाहिए। नंबर 7 पर मेरे पास बेन स्टोक्स हैं। यहां बेन स्टोक्स और एंड्रयू फ्लिंटॉफ के बीच मुकाबला था। फ्लिंटॉफ का प्रदर्शन शानदार रहा है। 2005 की एशेज को कौन भूल सकता है? लेकिन बेन स्टोक्स, जो बड़े मौकों पर कमाल करते हैं। 21वीं सदी में हमारे पास उनसे मुकाबला करने वाला कोई नहीं है। इसके बाद, मैंने रविचंद्रन अश्विन का नाम रखा है। अगर मैच इंग्लैंड में होंगे तो मैं केवल एक स्पिनर के साथ खेलूंगा। आप ग्रीम स्वान के बारे में भी सोच सकते हैं, लेकिन आप अश्विन को कैसे बाहर रख सकते हैं? आप हरभजन सिंह के बारे में भी सोच सकते हैं, लेकिन लंबे समय तक उनके प्रदर्शन को देखते हुए, मुझे रविचंद्रन अश्विन को चुनना होगा। इसके बाद, मैं तीन तेज गेंदबाज रखूंगा, जिनमें सर जिमी एंडरसन सबसे ऊपर हैं। वह चैंपियन हैं। जसप्रीत बुमराह भी टीम में रहेंगे, चाहे मैच भारत में हो या इंग्लैंड में। अगर मैच इंग्लैंड में हो रहे हैं, तो मैं 11वें नंबर पर जहीर खान के बारे में सोचूंगा, लेकिन स्टुअर्ट ब्रॉड को रखूंगा। वह इन परिस्थितियों में एक बेहतरीन गेंदबाज हैं। भारत में मुझे एक और स्पिनर की जरूरत होगी। फिर मैं रवींद्र जडेजा का नाम रखूंगा।" आकाश चोपड़ा की 21वीं सदी की IND vs ENG XI- वीरेंद्र सहवाग, सर एलिस्टर कुक, राहुल द्रविड़, सचिन तेंदुलकर, विराट कोहली, ऋषभ पंत, बेन स्टोक्स, रविचंद्रन अश्विन, जेम्स एंडरसन, जसप्रित बुमरा, स्टुअर्ट ब्रॉड/रवींद्र जड़ेजा  

चेतेश्वर पुजारा ने चुनी भारत-इंग्लैंड की हैरतअंगेज टेस्ट XI, सचिन तेंदुलकर और जेम्स एंडरसन का काटा पत्ता

नई दिल्ली  भारत और इंग्लैंड के बीच इन दिनों पांच टेस्ट मैचों की सीरीज खेली जा रही है। इस सीरीज का नाम एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी है। सीरीज के दौरान अनुभवी बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा ने भारत-इंग्लैंड की अपनी पसंदीदा कंबाइड टेस्ट इलेवन चुनी है। पुजारा की टीम थोड़ी हैरतअंगेज है क्योंकि उन्होंने भारत के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर और इंग्लैंड के दिग्गज तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन का पत्ता काट दिया। भारतीय टीम से बाहर चल रहे पुजारा की संयुक्त इलेवन में भारत और इंग्लैंड के 21वीं सदी के खिलाड़ी शामिल हैं। उन्होंने पूर्व भारतीय कप्तान और विकेटकीपर एमएस धोनी के साथ-साथ इंग्लैंड के पूर्व दिग्गज बैटर एलिस्टर कुक को भी इलेवन में नहीं रखा।   37 वर्षीय पुजारा ने अपनी टीम का खुलासा ईएसपीएनक्रिकइन्फो के 'द ड्राफ्ट' सेगमेंट में किया, जहां उन्हें 21वीं की सदी की संयुक्त भारत-इंग्लैंड टेस्ट इलेवन बनाने लिए कहा गया। पुजारा ने सलामी बल्लेबाज के रूप में एलेक स्टीवर्ट और राहुल द्रविड़ को चुना। पूर्व विकेटकीपर स्टीवर्ट ने अपने करियर में 133 टेस्ट मैच खेले और 8463 रन बनाए। द्रविड़ ने 164 टेस्ट में 13288 रन जुटाए। पुजारा की संयुक्त इलेवन के मध्य क्रम में जो रूट, विराट कोहली और वीवीएस लक्ष्मण हैं। रूट फिलहाल इंडिया सीरीज में खेल रहे हैं। वह 156 टेस्ट में 13259 रन बना चुके हैं। मई 2025 में कोहली टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने वाले कोहली ने 123 मैच में 9230 रन जोड़े। लक्ष्मण ने अपने करियर में 134 टेस्ट मैचों 8781 रन बनाए। पुजारा की कंबाइड भारत-इंग्लैंड टेस्ट इलेवन में चार ऑलराउंडर हैं। उन्होंने इंग्लैंड टेस्ट टीम के मौजूदा कप्तान बेन स्टोक्स और पूर्व धाकड़ ऑलराउंडर एंड्रयू फ्लिंटॉफ के साथ-साथ भारत के रविंद्र जडेजा और आर अश्विन को शामिल किया है। स्पिन ऑलराउंडर जडेजा इंग्लैंड दौरे पर बल्ले से धमाल मचा रहे हैं। अश्विन इस सदी में इंग्लैंड के खिलाफ भारत के सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं। उन्होंने 24 मैचों में 114 विकेट लिए। अश्विन ने पिछले साल इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कह दिया था। पुजारा ने तेज गेंदबाजी आक्रमण की जिम्मेदारी भारतीय पेसर जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद शमी को सौंपी। बुमराह इंग्लैंड में कदर काट रहे जबकि शमी भारतीय स्क्वॉड का हिस्सा नहीं हैं। इंग्लैंड के पूर्व तेज गेंदबाज मैथ्यू होगार्ड को संयुक्त इलेवन में 12वें खिलाड़ी के रूप में चुना गया। चेतेश्वर पुजारा की भारत-इंग्लैंड कंबाइड टेस्ट XI: एलेक स्टीवर्ट, राहुल द्रविड़, जो रूट, विराट कोहली, वीवीएस लक्ष्मण, बेन स्टोक्स, एंड्रयू फ्लिंटॉफ, रविद्र जडेजा, रविचंद्रन अश्विन, जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद शमी।  

लॉर्ड्स पर टैमी ब्यूमोंट की इस हरकत पर मचा बवाल, अपील करती रही टीम इंडिया, मगर नहीं मिला थर्ड अंपायर का साथ

नई दिल्ली भारतीय महिला बनाम इंग्लैंड महिला वनडे सीरीज का दूसरा मुकाबला ‘क्रिकेट का मक्का’ कहे जाने वाले लॉर्ड्स के मैदान पर खेला गया। जब इस मैदान पर आखिरी बार दोनों टीमें भिड़ी थी तो दीप्ति शर्मा के मांकडिंग ने बवाल मचाया था। काफी दिनों तक उनकी यह हरकत सुर्खियों में रही थी। इस बार इंग्लैंड की ओपनर टैमी ब्यूमोंट की ‘ऑब्स्ट्रक्टिंग द फील्ड’ यानी फील्डिंग में बाधा बनने की हरकत सुर्खियों में है। भारतीय खिलाड़ी इसको लेकर अपील करते रहे, हालांकि थर्ड अंपायर ने उन्हें आउट नहीं दिया। टैमी ब्यूमोंट की ‘ऑब्स्ट्रक्टिंग द फील्ड’ की घटना इंग्लैंड की पारी के पांचवें ओवर के दौरान घटी। दीप्ति शर्मा की गेंद पर ब्यूमोंट ने शॉट खेला जिसे जेमिमा रोड्रिग्स ने डाइव लगाकर पकड़ा और थ्रो सीधा विकेट कीपर की ओर फेंका। रन लेने का प्रयास कर रही टैमी ब्यूमोंट को जब दिखा कि जेमिमा गेंद को पकड़ चुकी है तो उन्होंने तुरंत क्रीज के अंदर लौटने का फैसला किया। टैमी ब्यूमोंट क्रीज के अंदर पहुंच चुकी थी, मगर जब थ्रो उनकी तरफ आ रहा था तो उन्होंने पैड लगाकर उसे रोकने की कोशिश की। टैमी ब्यूमोंट को ऐसा करता देख भारतीय प्लेयर्स ने अपील की जिसके बाद ऑन फील्ड अंपायर्स ने चर्चा की और फैसला थर्ड अंपायर को सौंप दिया। थर्ड अंपायर ने पाया कि टैमी ब्यूमोंट ने जब गेंद पर पैड लगाने की कोशिश की तब उनका एक पैर क्रीज के अंदर पहुंच चुका था, जिस वजह से उन्हें नॉट आउट करार दिया गया। हालांकि ऐसा कोई नियम नहीं है कि क्रीज के अंदर पहुंचने के बाद बल्लेबाज को फील्डिंग में जानबूझकर बाधा बनने की आजादी होती है। क्या कहता है ऑब्स्ट्रक्टिंग द फील्ड का नियम खेल की शर्तों के नियम 37.1.1 में कहा गया है कि, "यदि बल्लेबाज, धारा 37.2 की परिस्थितियों को छोड़कर, और गेंद खेल में होने पर, जानबूझकर शब्दों या कार्यों द्वारा फील्डिंग पक्ष को बाधित करने या विचलित करने का प्रयास करता है, तो उसे क्षेत्ररक्षण में बाधा डालने के लिए आउट माना जाएगा।" 37.1.2 यदि स्ट्राइकर, खंड 37.2 की परिस्थितियों को छोड़कर, गेंदबाज द्वारा फेंकी गई गेंद को प्राप्त करते समय, जानबूझकर गेंद को उस हाथ से मारती है जिसमें बल्ला नहीं है, तो उसे फील्डिंग में बाधा पहुंचाने का दोषी माना जाएगा। यह नियम तब भी लागू होगा जब वह पहली स्ट्राइक हो, दूसरी या बाद की स्ट्राइक हो। गेंद प्राप्त करने का कार्य गेंद पर खेलने और अपने विकेट की रक्षा में गेंद को एक से अधिक बार मारने, दोनों तक विस्तारित होगा।  

अश्विन ने टेस्ट टीम में हरभजन को फ्रंटलाइन स्पिनर के रूप में रिप्लेस किया था, दोनों ने ‘मनमुटाव’ पर तोड़ी चुप्पी

नई दिल्ली  भारत के पूर्व स्पिनर आर अश्विन और हरभजन सिंह का शुमार दिग्गज गेंदबाजों में होता है। दोनों ने अपने करियर में लंबे समय तक सफलता के झंडे गाड़े। अश्विन ने 106 टेस्ट में 24.00 की औसत से 537 विकेट चटकाए। वहीं, हरभजन ने 103 टेस्ट में 32.46 की औसत से 417 शिकार किए। अश्विन ने भारतीय टेस्ट टीम में हरभजन को फ्रंटलाइन स्पिनर के रूप में रिप्लेस किया था, जिसके बाद दोनों के बीच मनमुटाव और जलन की अटकलें लगना शुरू हो गई थीं। हालांकि, दोनों पूर्व दिग्गज स्पिनर ने अब आपसी मनमुटाव की अटकलों पर चुप्पी तोड़ी है।   अश्विन और भज्जी 'कुट्टी स्टोरीज विद ऐश' में मनमुटाव की कंट्रोवर्सी पर चर्चा करते हुए नजर आए। भज्जी ने बेबाक सवाल का बेबाक जवाब दिया। अश्विन ने हरभजन से पूछा, ''जलन की चर्चा रही। इससे पहले कि मैं आपको इसका जवाब दूं, मैं कुछ स्पष्ट कर दूं। लोग हर चीज को अपने नजरिए से देखते हैं। मिसाल के तौर पर, अगर वे मुझ पर कोई टिप्पणी कर रहे हैं तो वे मानते हैं कि दूसरे लोग दुनिया को उनकी नजर से देखेंगे। जैसे की यह जो बात है कि आप उस शख्स से जलते हैं जो आज आपका इंटरव्यू ले रहा है। इसपर आप क्या कहेंगे?" अश्विन को रिप्लाई देते हुए हरभजन ने कहा, ''"क्या आपको लगता है कि मैं आपसे जलता हूं? आप आज मेरे साथ बैठे हो और हमने काफी बातचीत की है। क्या आपको लगता है कि मैं उस तरह का इंसान हूं?" वहीं, अश्विन ने कहा, ''अगर आपको कभी जलन हुई भी हो तो यह जायज है। यह मेरा पॉइंट है। मैं इसे कभी गलत तरीक़े से नहीं लूंगा क्योंकि हम सब इंसान हैं। स्वाभाविक रूप से ऐसा होता है।" इसके बाद, अश्विन ने अपना और वॉशिंगटन सुंदर का उदहारण दिया। अश्विन ने ऑस्ट्रेलिया दौरे पर अचानक इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविद कहा दिया था। अश्विन के रिटायरमेंट के बाद कहा गया कि उन्होंने सुंदर को प्लेइंग इलेवन में तरजीह दिए जाने के कारण इंटरनेशनल क्रिकेट छोड़ने का फैसला किया। अश्विन ने इस बारे में कहा, ''कुछ लोगों का मानना है कि मैंने वॉशिंगटन सुंदर की वजह से संन्यास लिया। यह सब लोगों का नजरिया है। यह दूसरे लोगों का देखने का तरीक है।"  

जेम्स एंडरसन बोले- ट्रॉफी पर सचिन तेंदुलकर के साथ नाम देखना एक अजीब लेकिन गर्व का पल

लंदन  इंग्लैंड के महान तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन ने स्वीकार किया कि सचिन तेंदुलकर के साथ ट्रॉफी पर अपना नाम देखकर वह अजीब महसूस करते हैं और उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया के महानतम क्रिकेटरों में से एक के साथ अपना नाम होना बहुत बड़ा सम्मान है। इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड ने भारत और इंग्लैंड के बीच टेस्ट श्रृंखला की ट्रॉफी का नाम एंडरसन तेंदुलकर ट्रॉफी रखा है। पहले इसका नाम पटौदी ट्रॉफी था जो भारत के पूर्व कप्तान इफ्तिखार अली खान पटौदी और उनके बेटे मंसूर अली खान पटौदी के नाम पर था।   एंडरसन ने स्काय स्पोटर्स से कहा, ‘‘यह जरूरी नहीं कि आपके नाम पर ट्रॉफी का होना कितना बड़ा है, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि आपके नाम के साथ सचिन तेंदुलकर का नाम है, जो मेरे लिए अब तक के सबसे महान क्रिकेटरों में से एक हैं।’’ उन्होंने कहा , ‘‘मैं ट्रॉफी पर अपने साथ उनका नाम देखता हूं तो बड़ा अजीब लगता है। मैं उनका काफी सम्मान करता हूं। मैने बचपन से उन्हें देखा है और उनके खिलाफ खेला है । वह इतने महान क्रिकेटर रहे हैं जिन्होंने पूरे देश की उम्मीदों का बोझ अपने पूरे कैरियर में उठाया है। उनके साथ इस तरह का कुछ साझा करना बहुत बड़ा सम्मान है।’’ तेंदुलकर ने 200 और एंडरसन ने 188 टेस्ट खेले हैं। पिछले साल क्रिकेट को अलविदा कहने वाले एंडरसन ने 704 विकेट लिये हैं। 5 मैच की तेंदुलकर-एंडरसन ट्रॉफी 2025 के तीन मैच खेले जा चुके हैं। मेजबान इंग्लैंड 2-1 से सीरीज में आगे हैं। सीरीज का चौथा और बेहत महत्वपूर्ण मैच 23 जुलाई से मैनचेस्टर में खेला जाना है।  

शुभमन गिल से मैनचेस्टर टेस्ट में बड़ी पारी की उम्मीद: मांजरेकर

नई दिल्ली भारतीय टीम के पूर्व क्रिकेटर और कमेंटेटर संजय मांजरेकर का मानना है कि शुभमन गिल इंग्लैंड के खिलाफ 23 जुलाई से मैनचेस्टर में होने वाले चौथे टेस्ट मैच में फॉर्म में वापसी करेंगे। गिल ने पहले दो मैचों में बल्ले से दमदार प्रदर्शन किया था, लेकिन लॉर्ड्स में खेले गए तीसरे टेस्ट मैच में उनका बल्ला खामोश रहा और वह 16 तथा 6 रन की पारी ही खेल सके थे। भारत को लॉर्ड्स टेस्ट में 22 रनों से हार का सामना करना पड़ा था और टीम फिलहाल पांच मैचों की सीरीज में 1-2 से पिछड़ गई है। भारतीय टीम अब आठ दिनों के अंतराल के बाद बुधवार से इंग्लैंड का सामना करने उतरेगी। मांजरेकर का मानना है कि इससे शुभमन गिल को आत्ममंथन करने और खेल पर ध्यान केंद्रित करने का मौका मिलेगा। मांजरेकर ने कहा, मेरा मानना है कि गिल के अंदर अपनी फॉर्म को आगे भी बरकरार रखने की क्षमता है। इस ब्रेक के दौरान, शायद वह आत्ममंथन करे और अपने दोस्तों और पिता के साथ बातचीत करे। उसे बस अपनी कप्तानी, क्षेत्ररक्षण, रणनीति और बल्लेबाजी पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है। अगर वह ऐसा करता है, तो मेरा मानना है कि रन बनाने वाली मशीन, जो कभी गति में थी, अब पूरी तरह से तैयार है और ओल्ड ट्रैफर्ड में फिर से दौड़ने लगेगी। भारतीय बल्लेबाजों के प्रदर्शन पर भी रखी राय इसके अलावा मांजरेकर ने लॉर्ड्स में भारत के बल्लेबाजी प्रदर्शन पर भी टिप्पणी की और कहा कि गिल के योगदान के बिना भी टीम ने पहली पारी में अच्छा प्रदर्शन किया, जो एक अच्छा संकेत है। मांजरेकर ने कहा, उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन भारत को इस बात पर भी विचार करना होगा कि लॉर्ड्स में खेले गए तीसरे टेस्ट मैच में गिल ने बल्ले से कोई योगदान नहीं दिया। इसके बावजूद, भारत का बल्लेबाजी क्रम इंग्लैंड को चुनौती देने में कामयाब रहा। यह एक अच्छी बात है कि हम पूरी तरह से गिल पर निर्भर नहीं हैं। कप्तानी की जिम्मेदारी संभालने के बाद से ही गिल अपने करियर के सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में हैं और अब तक सीरीज में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी हैं। उन्होंने तीन मैचों में 607 रन बनाए हैं। उन्होंने सीरीज की शुरुआत लीड्स में पहले टेस्ट में 147 रनों की शानदार पारी के साथ की और उसके बाद बर्मिंघम में दोनों पारियों में क्रमशः 269 और 161 रनों की पारी खेली।