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मां दुर्गा और शिव जी की कृपा पाने के लिए नवरात्रि में अपनाएं ये पवित्र विधि

शारदीय नवरात्र (Shardiya Navratri) हर साल भक्ति और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह समय मां दुर्गा की कृपा प्राप्त करने और जीवन में सुख-समृद्धि लाने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि नवरात्र के दौरान पूजा-पाठ करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस खास अवसर पर भगवान शिव की पूजा भी विशेष फलदायी मानी जाती है। कहा जाता है कि नवरात्र में शिव जी के 108 नामों का जाप करने से परम कल्याण और आध्यात्मिक उन्नति मिलती है। ऐसे करें पूजा सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। मां दुर्गा के सामने घी का दीपक जलाएं। इसके बाद भगवान शिव के 108 नामों का श्रद्धापूर्वक जाप करें। अंत में माता रानी और भोलेनाथ की आरती करें। ऐसा करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और भक्त को देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है। ।।भगवान शिव के 108 नाम।। ॐ महाकाल नमः ॐ रुद्रनाथ नमः ॐ भीमशंकर नमः ॐ नटराज नमः ॐ प्रलेयन्कार नमः ॐ चंद्रमोली नमः ॐ डमरूधारी नमः ॐ चंद्रधारी नमः ॐ भोलेनाथ नमः ॐ कैलाश पति नमः ॐ भूतनाथ नमः ॐ नंदराज नमः ॐ नन्दी की सवारी नमः ॐ ज्योतिलिंग नमः ॐ मलिकार्जुन नमः ॐ भीमेश्वर नमः ॐ विषधारी नमः ॐ बम भोले नमः ॐ विश्वनाथ नमः ॐ अनादिदेव नमः ॐ उमापति नमः ॐ गोरापति नमः ॐ गणपिता नमः ॐ ओंकार स्वामी नमः ॐ ओंकारेश्वर नमः ॐ शंकर त्रिशूलधारी नमः ॐ भोले बाबा नमः ॐ शिवजी नमः ॐ शम्भु नमः ॐ नीलकंठ नमः ॐ महाकालेश्वर नमः ॐ त्रिपुरारी नमः ॐ त्रिलोकनाथ नमः ॐ त्रिनेत्रधारी नमः ॐ बर्फानी बाबा नमः ॐ लंकेश्वर नमः ॐ अमरनाथ नमः ॐ केदारनाथ नमः ॐ मंगलेश्वर नमः ॐ अर्धनारीश्वर नमः ॐ नागार्जुन नमः ॐ जटाधारी नमः ॐ नीलेश्वर नमः ॐ जगतपिता नमः ॐ मृत्युन्जन नमः ॐ नागधारी नमः ॐ रामेश्वर नमः ॐ गलसर्पमाला नमः ॐ दीनानाथ नमः ॐ सोमनाथ नमः ॐ जोगी नमः ॐ भंडारी बाबा नमः ॐ बमलेहरी नमः ॐ गोरीशंकर नमः ॐ शिवाकांत नमः ॐ महेश्वराए नमः ॐ महेश नमः ॐ संकटहारी नमः ॐ महेश्वर नमः ॐ रुंडमालाधारी नमः ॐ जगपालनकर्ता नमः ॐ पशुपति नमः ॐ संगमेश्वर नमः ॐ दक्षेश्वर नमः ॐ घ्रेनश्वर नमः ॐ मणिमहेश नमः ॐ अनादी नमः ॐ अमर नमः ॐ आशुतोष महाराज नमः ॐ विलवकेश्वर नमः ॐ अचलेश्वर नमः ॐ ओलोकानाथ नमः ॐ आदिनाथ नमः ॐ देवदेवेश्वर नमः ॐ प्राणनाथ नमः ॐ शिवम् नमः ॐ महादानी नमः ॐ शिवदानी नमः ॐ अभयंकर नमः ॐ पातालेश्वर नमः ॐ धूधेश्वर नमः ॐ सर्पधारी नमः ॐ त्रिलोकिनरेश नमः ॐ हठ योगी नमः ॐ विश्लेश्वर नमः ॐ नागाधिराज नमः ॐ सर्वेश्वर नमः ॐ उमाकांत नमः ॐ बाबा चंद्रेश्वर नमः ॐ त्रिकालदर्शी नमः ॐ त्रिलोकी स्वामी नमः ॐ महादेव नमः ॐ गढ़शंकर नमः ॐ मुक्तेश्वर नमः ॐ नटेषर नमः ॐ गिरजापति नमः ॐ भद्रेश्वर नमः ॐ त्रिपुनाशक नमः ॐ निर्जेश्वर नमः ॐ किरातेश्वर नमः ॐ जागेश्वर नमः ॐ अबधूतपति नमः ॐ भीलपति नमः ॐ जितनाथ नमः ॐ वृषेश्वर नमः ॐ भूतेश्वर नमः ॐ बैजूनाथ नमः ॐ नागेश्वर नमः।।

मंगलवार का राशिफल: किस पर बरसेगा सूर्यदेव का आशीर्वाद? जानिए आज की राशियों का हाल

मेष मेष राशि वालों आज अप्रत्याशित चुनौतियों से गुजरना पड़ सकता है। आगे बढ़ने के लिए ध्यान और विश्राम के संतुलन की आवश्यकता होगी। धैर्य और क्रिएटिविटी पर जोर देना महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि सभी योजनाएं उम्मीद के मुताबिक सामने नहीं आएंगी। वृषभ आज ऑफिस रोमांस एक अच्छा विचार नहीं है। टाइम स्पेन्ड करने और स्ट्रेस फ्री रहने का बैलेंस बनाए रखने के लिए एक्टिव रहना महत्वपूर्ण है। यह सिंगल लोगों के लिए अपने पिछले अनुभव से सीखने और अपनी कमजोरियों का पता लगाने का एक सुनहरा क्षण है। मिथुन आज के दिन पॉजिटिव दृष्टिकोण आपको ढेर सारे नए दोस्त दिला सकता है और आपको आपके भावी जीवनसाथी के करीब ला सकता है। आपकी लव लाइफ सुख और कठिनाई को जगाते हुए सुर्खियों में रहेगी। धन का उपयोग सावधानी से करें। कर्क आज के दिन कम्युनिकेशन लड़खड़ा सकता है, जिससे गलतफहमियां और बहस हो सकती है। अपने गुस्से को कंट्रोल से बाहर जाने देने के बजाय, गहरी सांस लें और चीजों को अपने साथी की आंखों से देखने की कोशिश करें। सिंह आज के दिन आपके घर में खुशी का एहसास होगा। पास्ट पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय इस समय का उपयोग लंबे समय तक चलने वाली यादें बनाने में करें। आज का दिन आपके पार्टनर के साथ आपके रिश्ते में कुछ उतार-चढ़ाव की उम्मीद लेकर आता है। कन्या आज के दिन ईमानदारी से कनेक्शन बनाने का समय है। आने वाले किसी भी प्रेम प्रस्ताव को सुनें। फिर भी विवाह की चर्चा करते समय सतर्क रहें क्योंकि हर एक कदम धैर्य और सावधानी के साथ विचार-विमर्श के साथ उठाया जाना चाहिए। तुला आज के दिन जब आप परीक्षाओं से गुजरेंगे तो धैर्य आपका दोस्त होगा क्योंकि आगे नई शुरुआत हो सकती है। एक्टिव रूप से सुनें, क्लियरिटी के लिए सवाल पूछें और सहानुभूति के साथ विवादों को संभालें। मुश्किलों के बावजूद, विकास और कनेक्शन बनाने का भी समय हो सकता है। वृश्चिक आज के दिन आपका कॉन्फिडेंस बढ़ेगा और सही लोग आपकी तरफ आकर्षित भी होंगे। जानकारी प्राप्त करने के लिए दोस्तों और परिवार के साथ कम्युनिकेशन के माध्यम खुले रखें। बड़ी पार्टी और समारोह की योजना बनाने के बजाय, अपने परिवार के साथ कुछ समय का आनंद लें। धनु आज के दिन धार्मिक काम में भाग लेने के लिए कहा जा सकता है, जो रिश्ते को मजबूत करने का एक शानदार तरीका है। इस समय का उपयोग अपने रिश्ते को स्ट्रॉंग करने, बेहतर बनाने और भावनात्मक लगाव को गहरा करने में करें। गेस्ट आपके घर आ सकते हैं। मकर आज के दिन आपके शब्द वजनदार हैं, जो घाव भर सकते हैं या घाव खुरेद भी सकते हैं। खुद को प्रेजेंट करने के तरीके में सतर्क रहें ताकि आप अनजाने में उन लोगों को ठेस न पहुंचाए, जिनसे आप प्यार करते हैं। कुंभ आज के दिन अपने इंट्यूशन पर भरोसा रखें और लोगों को जानने के लिए समय निकालें। पारिवारिक मामलों और आध्यात्मिक पहलुओं की खोज करने का है। आपको और आपके पार्टनर को रिश्तेदारों के फंक्शन में इन्वाइट किया जा सकता है। मीन आज के दिन आपकी बारी खुद को परखने की है न कि किसी रिश्ते के पीछे भागने की। उन भावनाओं और विचारों से जुड़ने के लिए समय निकालें, जो सबसे अधिक मायने रखते हैं। ऐसी गतिविधियों में इनवॉल्व रहें, जो आपको खुशी और संतुष्टि प्रदान करें।

शारदीय नवरात्रि में अपनाएं ये 9 विशेष भेंटें, जीवन में मिलेगी सकारात्मक ऊर्जा, शांति और समृद्धि

हिंदू धर्म में नवरात्रि का पर्व साल में दो बार बेहद धूमधाम से मनाया जाता है. इस बार शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 22 सितंबर 2025 से हो रही है. नवरात्रि का मतलब सिर्फ व्रत रखना या पूजा करना नहीं है, बल्कि यह माता दुर्गा की साधना, भक्ति और आत्मशक्ति को जगाने का पावन समय माना जाता है. इन नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है और हर दिन का अपना महत्व होता है. मान्यता है कि अगर इन दिनों माता को उनके प्रिय रंगों और वस्तुओं से प्रसन्न किया जाए तो जीवन से दुख-दर्द दूर हो जाते हैं और खुशियां घर आ जाती हैं. आइए जानते हैं नवरात्रि 2025 में कौन से खास उपाय करने चाहिए. नवरात्रि के 9 दिनों में मां को अर्पित करें ये खास वस्तुएं 1. पहला दिन – मां शैलपुत्री नवरात्रि की शुरुआत मां शैलपुत्री की पूजा से होती है. इस दिन पीले रंग के वस्त्र, फूल और मिठाई चढ़ाना बेहद शुभ माना जाता है. यह रंग ऊर्जा और नई शुरुआत का प्रतीक है. ऐसा करने से जीवन में नए अवसर खुलते हैं और धन-समृद्धि का मार्ग बनता है. 2. दूसरा दिन – मां ब्रह्मचारिणी मां ब्रह्मचारिणी साधना और संयम की देवी मानी जाती हैं. इन्हें हरे रंग की चीजें बेहद प्रिय हैं. इस दिन हरे वस्त्र, पत्तियां और श्रृंगार सामग्री अर्पित करने से आत्मबल बढ़ता है और जीवन में शांति आती है. 3. तीसरा दिन – मां चंद्रघंटा तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा में पीले और हरे रंग का संयोजन अर्पित करना शुभ माना जाता है. यह संयोजन साहस, संतुलन और आत्मविश्वास को मजबूत करता है. 4. चौथा दिन – मां कुष्मांडा मां कुष्मांडा को नारंगी रंग बेहद प्रिय है. इस दिन नारंगी वस्त्र, फल और मिठाई चढ़ाने से आत्मविश्वास बढ़ता है और रुके हुए काम बनने लगते हैं. 5. पांचवां दिन – मां स्कंदमाता मां स्कंदमाता की पूजा में सफेद रंग की चीजें अर्पित करनी चाहिए. यह रंग शांति और पवित्रता का प्रतीक है. माना जाता है कि इससे घर में खुशहाली और मानसिक सुकून बना रहता है. 6. छठा दिन – मां कात्यायनी छठे दिन मां कात्यायनी को लाल रंग की वस्तुएं जैसे वस्त्र, पुष्प और फल अर्पित करें. लाल रंग विजय और शक्ति का प्रतीक है. इस उपाय से शत्रु बाधा दूर होती है और आत्मविश्वास बढ़ता है. 7. सातवां दिन – मां कालरात्रि मां कालरात्रि की पूजा में नीले रंग की वस्तुएं अर्पित करना शुभ माना जाता है. यह रंग नकारात्मक शक्तियों को दूर करता है और भय से मुक्ति दिलाता है. 8. आठवां दिन – मां महागौरी आठवें दिन मां महागौरी को गुलाबी रंग की वस्तुएं अर्पित करें. गुलाबी रंग प्रेम, करुणा और सकारात्मकता का प्रतीक है. इससे रिश्तों में मिठास बढ़ती है और घर का माहौल सुखद रहता है. 9. नौवां दिन – मां सिद्धिदात्री नवरात्रि के अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा में बैंगनी रंग की वस्तुएं चढ़ानी चाहिए. यह रंग आध्यात्मिक उन्नति और गूढ़ ज्ञान का प्रतीक है. ऐसा करने से साधक को सफलता और उन्नति का वरदान मिलता है.

माता की सवारी से जुड़ी शुभ-अशुभ संकेत: नवरात्रि में क्या देखें और कब?

शारदीय नवरात्रि की शुरुआत आज 22 सितंबर से हो रही है 2 अक्टूबर को नवरात्रि का समापन होगा. नवरात्रि का पर्व भारतीय संस्कृति और आस्था का सबसे प्रमुख त्योहार है. नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधिपूर्वक पूजा की जाती है. इस महापर्व का एक विशेष रहस्य यह भी है कि हर वर्ष मां दुर्गा किस वाहन पर सवार होकर आती हैं और किस पर विदा लेती हैं. यह परंपरा केवल धार्मिक विश्वास नहीं, बल्कि ज्योतिषीय गणना और पौराणिक मान्यताओं पर आधारित है.  रविवार और सोमवार को हो आगमन तो मां दुर्गा की सवारी का निर्धारण नवरात्रि आरंभ होने वाले दिन के आधार पर किया जाता है. अगर नवरात्रि का आरंभ सोमवार या रविवार को होता है, तो माता हाथी पर सवार होकर आती हैं. हाथी पर आगमन को बेहद शुभ माना जाता है क्योंकि यह समृद्धि, उन्नति और अच्छी वर्षा का संकेत देता है. शनिवार और मंगलवार को हो आगमन तो अगर नवरात्रि की शुरुआत शनिवार या मंगलवार को होती है, तो माता घोड़े पर सवार होकर आती हैं. घोड़े पर आगमन को अशांत परिस्थितियों, युद्ध, राजनीतिक अस्थिरता या प्राकृतिक आपदाओं का सूचक माना जाता है. गुरुवार और शुक्रवार को आगमन गुरुवार और शुक्रवार को नवरात्रि शुरू होने पर माता पालकी पर आती हैं, जो घर-घर में सुख-शांति और धन-धान्य की वृद्धि का संकेत देता है. बुधवार को हो आगमन तो बुधवार को नवरात्रि का आरंभ होने पर मां दुर्गा नौका पर सवार होकर आती हैं. नाव पर आगमन अत्यंत शुभ माना गया है क्योंकि यह भक्तों की मनोकामनाओं की पूर्ति और जीवन में सकारात्मक परिणामों का संकेत देता है. माता का आगमन ही नहीं प्रस्थान का भी महत्व केवल आगमन ही नहीं, बल्कि माता के प्रस्थान की सवारी का भी विशेष महत्व है. विजयादशमी के दिन माता जिस दिन विदा लेती हैं, उसी दिन के आधार पर उनकी वापसी का वाहन निर्धारित होता है. माता के प्रस्थान का मतलब रविवार और सोमवार को माता का प्रस्थान भैंसे पर माना जाता है, जो दुख और रोग की वृद्धि का संकेत देता है. मंगलवार और शनिवार को मुर्गे पर विदाई मानी जाती है, जो अस्थिरता का प्रतीक है. बुधवार और शुक्रवार को हाथी पर वापसी को अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि यह भरपूर समृद्धि और खुशहाली लाता है. गुरुवार को अगर माता का प्रस्थान होता है, तो यह नर वाहन अर्थात पालकी पर होता है, जिसे संतुलित और मध्यम परिणाम देने वाला माना जाता है. शारदीय नवरात्रि 2025 हाथी पर माता का आगमन वर्ष 2025 में पंचांग के अनुसार शारदीय नवरात्रि 22 सितंबर दिन सोमवार से आरंभ हो रही है. इसका अर्थ है कि मां दुर्गा इस बार हाथी पर सवार होकर आ रही हैं. यह संकेत है कि आने वाले वर्ष में भरपूर वर्षा, उर्वरता और समृद्धि का वातावरण रहेगा. यह मान्यता केवल लोक आस्था नहीं, बल्कि प्रकृति और ब्रह्मांडीय ऊर्जा के परिवर्तन का द्योतक है. पौराणिक दृष्टि से देखा जाए तो मां दुर्गा का मुख्य वाहन शेर है, जो शक्ति, पराक्रम और साहस का प्रतीक है. लेकिन नवरात्रि के नौ दिनों में बदलती हुई सवारियां ब्रह्मांडीय चक्र और प्रकृति के विविध रूपों को दर्शाती हैं. यही कारण है कि भक्त माता की हर सवारी को शुभ संकेत और भविष्य का दर्पण मानते हैं.

सफलता का राज़: इन लोगों से दूरी बनाना है ज़रूरी

सफल होने के लिए महान लोगों की बातों को जरूर मानना चाहिए। ये ना केवल आपको सफलता दिलाती है बल्कि लाइफ में मिलने वाले बड़े धोखे से भी बचाने में मदद करती है। चाणक्य एक महान कूटनीतिज्ञ थे और उन्होंने अपने राजा को शत्रुओं और छल करने वाले लोगों से बचाने के लिए कई तरह की नीति की बातें बताई थी। उनमे से कुछ बाते हर इंसान के जीवन में लागू होती है। 1) चाणक्य ने कहा कि भाग्य भी उन्हीं लोगों का साथ देता है जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य पर टिके रहते हैं। 2) ऐसे इंसान पर कभी भी भरोसा नहीं करना चाहिए जो आपसे बात करते हुए इधर-उधर देखता हो। इसका मतलब है कि वो किसी से छुपकर आपसे मिल रहा है। 3) शरीर में आए रोग, शत्रु और किसी ऋण को कभी भी छोटा नहीं समझना चाहिए। जितना जल्दी हो सके इसको खत्म करने की कोशिश करनी चाहिए। 4) मूर्ख लोगों से कभी भी वाद-विवाद करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। ये आपके समय और दिमाग को नष्ट करते हैं। 5) किसी इंसान के ऊंचा और महान बनने के लिए केवल उसके कर्म और गुण ही जिम्मेदार हो सकते हैं। 6) अगर आप किसी दूसरे शहर गए हैं और वहां आपकी जीविका का साधन नहीं है तो ऐसे जगह पर एक पल भी नहीं रुकना चाहिए। 7) जिस जगह पर आपकी इज्जत ना होती हो वहां एक पल भी नहीं रुकना चाहिए। 8) यहीं नहीं जगह कोई भी हो कुछ मित्र जरूर पास होने चाहिए। अगर ऐसी जगह जहां आपके मित्र ना हो वहां भी नहीं ठहरना चाहिए। 9)जिन जगहों पर ज्ञान की बातें ना होती हों, ऐसी जगह पर बिना समय गंवाएं हट जाना चाहिए।  

जानें मंदिर में कौन-सी गलतियां बनती हैं वास्तु दोष का कारण

घर के हर हिस्से में वास्तु नियमों का ध्यान रखवी जरूरी माना गया है। इसी के साथ मंदिर भी घर का एक महत्वपूर्ण स्थान है, जिसमें यदि आप वास्तु नियमों  का ध्यान रखते हैं, तो इससे मिलने वाले सकारात्मक परिणाम बढ़ जाते हैं।   रखें इन बातों का ध्यान कभी भी घर के मंदिर को सीधा फर्श पर नहीं रखना चाहिए। इसी हमेशा थोड़ी ऊंचाई पर रखें। इसके साथ ही आपके मंदिर में हवा और रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था भी होनी चाहिए। इन नियमों का ध्यान रखने से सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। इसके साथ ही आपका मंदिर शांत स्थान पर होना चाहिए, ताकि पूजा-पाठ के दौरान कोई विघ्न न पड़े। मंदिर में साफ-सफाई का भी पूरा ध्यान रखना चाहिए, ताकि आपको वास्तु दोष का सामना न करना पड़े। वहीं अगर आपके मंदिर के नीचे जूते-चप्पल रखे हैं, तो यह भी वास्तु दोष का कारण बन सकता है। मूर्ति रखने के नियम वास्तु शास्त्र में माना गया है कि मंदिर में कभी भी शनिदेव और भगवान शिव की मूर्ति को एक साथ नहीं रखना चाहिए। इसके साथ ही घर के मंदिर में मां काली, राहु, केतु, और शनि देव की मूर्ति रखने भी बचना चाहिए। वरना आपको नकारात्मक परिणाम मिलने लगते हैं। अगर आपके मंदिर में शिवलिंग स्थापित हैं, तो उसके पास बहुत अधिक मूर्ति न रखें और एक से अधिक शिवलिंग भी अपने मंदिर में न रखें। मंदिर की सही दिशा वास्तु शास्त्र में मंदिर रखने के लिए उत्तर-पूर्वी कोने यानी ईशान कोण को सबसे उत्तम माना गया है। इसी के साथ मंदिर का मुख पूर्व की ओर होना चाहिए। इन नियमों का ध्यान रखने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि  का माहौल बना रहता है। इसी के साथ इस बात का भी ध्यान रखें कि मंदिर के पास बेडरूम या बाथरूम नहीं होना चाहिए। वरना आपको वास्तु दोष का सामना करना पड़ सकता है। रख सकते हैं ये चीजें सकारात्मक परिणाम देखने के लिए आप अपने मंदिर में तुलसी का पौधा, गंगाजल और कलश आदि रख सकते हैं। इससे आपको अद्भुत परिणाम देखने को मिल सकते हैं। साथ ही घर में सुख-शांति और खुशहाली आती है।  

हर दिन अलग भोग, अलग शुभ संकेत: नवरात्रि 2025 में माता को प्रसन्न कैसे करें

नवरात्रि के नौ दिनों में हर दिन माता रानी को अलग-अलग भोग अर्पित करने की परंपरा है. जालोर के ज्योतिषाचार्य पंडित भानुप्रकाश दवे बताते हैं कि मां को घी, शक्कर, दूध, मालपुआ, केला, शहद, पान, नारियल और अंत में हलवा-पूरी-चना चढ़ाने से देवी प्रसन्न होती हैं और घर-परिवार में सुख, समृद्धि व शांति का आशीर्वाद देती हैं. नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है. इस दिन माता को घी का भोग लगाया जाता है. घी पवित्रता और शक्ति का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि घी का नैवेद्य अर्पित करने से जीवन में ऊर्जा, स्वास्थ्य और दीर्घायु प्राप्त होती है. यह भोग घर के वातावरण को भी शुद्ध और पवित्र बनाता है. दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना होती है. इस दिन माता को शक्कर का भोग अर्पित किया जाता है. शक्कर जीवन में मिठास और सौभाग्य का प्रतीक है. माना जाता है कि इस दिन शक्कर चढ़ाने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और भक्त की कठिनाइयां दूर होती हैं. तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है. इस दिन माता को दूध का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है. दूध शुद्धता, संतुलन और पोषण का प्रतीक है. इस भोग से माता प्रसन्न होती हैं और भक्त को मानसिक शांति, धैर्य और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं. चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा होती है. इस दिन माता को मालपुआ का भोग अर्पित किया जाता है. मालपुआ वैभव, स्वाद और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. इसे अर्पित करने से जीवन में आर्थिक उन्नति और घर में खुशहाली बनी रहती है. पांचवें दिन मां स्कंदमाता की आराधना की जाती है. इस दिन माता को केले का भोग चढ़ाया जाता है. केला पवित्रता और सादगी का प्रतीक है. इसे अर्पित करने से संतान सुख प्राप्त होता है और परिवार में शांति का वातावरण बना रहता है. छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है. इस दिन माता को शहद का भोग लगाया जाता है. शहद मिठास और सेहत का प्रतीक है. इसे चढ़ाने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, स्वास्थ्य लाभ और रिश्तों में मधुरता आती है. सातवें दिन मां कालरात्रि की उपासना होती है. इस दिन माता को पान का भोग अर्पित किया जाता है. पान शुभता और सौभाग्य का प्रतीक है. इसे अर्पित करने से भक्त को भय से मुक्ति मिलती है और साहस तथा आत्मबल की प्राप्ति होती है. आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है. इस दिन माता को नारियल का भोग चढ़ाया जाता है. नारियल पूर्णता और पवित्रता का प्रतीक है. इसे अर्पित करने से भक्त की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का संचार होता है. नवरात्रि के अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है. इस दिन माता को हलवा, पूरी और चने की सब्जी का भोग लगाया जाता है. यह भोग पूर्णता और संतोष का प्रतीक है. इस दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व है. माना जाता है कि इस दिन का भोग माता को प्रसन्न कर जीवन में सफलता और सिद्धि प्रदान करता है.

नवपंचम राजयोग बनेगा दिवाली पर, इन 3 राशियों की किस्मत में आ रहा है पैसा ही पैसा

 ज्योतिष शास्त्र में ग्रह-नक्षत्रों का गोचर जातक के जीवन में कई तरह के बदलाव लाता है. हर पर्व-त्योहार पर ग्रहों की विशेष स्थिति बनती है, जो सभी 12 राशियों पर शुभ और अशुभ प्रभाव डालती है. इस साल दिवाली का पर्व 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा और इस दिन ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद शक्तिशाली योग बनने वाला है. द्रिक पंचांग के अनुसार, इस बार दिवाली पर शनि और बुध का विशेष संयोग बनेगा, जिससे नवपंचम राजयोग का निर्माण होगा. ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि यह राजयोग विशेष रूप से कुछ राशियों के लिए धन, सफलता और उन्नति के द्वार खोल सकता है. वृषभ राशि (Taurus): वृषभ राशि के जातकों के लिए यह योग बेहद खास रहने वाला है. आपको मनचाही उपलब्धियां मिल सकती हैं. करियर में प्रगति होगी. व्यापार में बड़ा लाभ होने के योग हैं. इस दौरान आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा. परिवार में शुभ समाचार मिलेगा और सामाजिक मान-सम्मान में वृद्धि होगी. शनि-बुध का ये दुर्लभ संयोग आपको साल के अंत में खूब लाभ देने वाला है. कर्क राशि (Cancer): दिवाली पर बन रहे इस खास राजयोग का सीधा असर कर्क राशि के जातकों पर दिखाई देगा. लंबे समय से अटके कार्यों में सफलता मिल सकती है. पुराने अटके पैसे वापस मिल सकते हैं और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी. नौकरीपेशा लोगों को आय के नए स्रोत प्राप्त हो सकते हैं. जीवन में सुख-सुविधाएं बनी रहेंगी. संतान की ओर से शुभ समाचार मिल सकता है.  मकर राशि (Capricorn) शनि और बुध का यह दुर्लभ संयोग आपके लिए नई उपलब्धियों और तरक्की के द्वार खोलने वाला है. कार्यक्षेत्र में किसी बड़ी जिम्मेदारी की प्राप्ति हो सकती है. इस दौरान भाग्य पूरी तरह आपका साथ देगा.दांपत्य जीवन में चल रही दूरियां और गलतफहमियां खत्म होंगी, रिश्तों में मधुरता आएगी. व्यापारियों को अचानक बड़े मुनाफे का लाभ हो सकता है. व्यापार में लंबे समय से जो घाटा आप झेल रहे थे, उस पर अंकुश लग सकता है.

आज का राशिफल सोमवार 22 सितंबर: बदलेगी इन राशियों की किस्मत, देखें दैनिक राशिफल

मेष: आज के दिन प्रेम संबंध अच्छी सिचूऐशन में हैं। उत्पादक बनने के लिए पेशेवर चुनौतियों का समाधान करें। स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। आर्थिक सफलता मिलेगी और यह आपको अपने धन को बढ़ाने के लिए नए विकल्प आजमाने के लिए भी प्रेरित करेगी। वृषभ: आज के दिन ऑफिस और निजी जीवन दोनों ही उत्पादक हैं। संतुलन बनाए रखें। आपकी सफल वित्तीय स्थिति आपको महत्वपूर्ण निर्णय लेने में मदद करेगी। स्वास्थ्य पर ध्यान देने की आवश्यकता है। अपने मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें। मिथुन: मिथुन राशि वालों के लिए आज का दिन उतार-चढ़ाव भरा रहने वाला है। करियर में आपको चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। किसी भी प्रोजेक्ट में निवेश करने से पहले सलाह जरूर लें। लव लाइफ में टेंशन का माहौल बन सकता है। कर्क: आज के दिन आपकी आर्थिक स्थिति बेहतर रहेगी। आपका पार्टनर आपके लिए सरप्राइज डेट प्लान कर सकता है। वहीं, आपको स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत है। प्रॉपर्टी के मसलों में ध्यान दें, हानि हो सकती है। छात्रों के लिए भी ये दिन अच्छा रहने वाला है। सिंह: आज का दिन आपके लिए सकारात्मक रहने वाला है। पार्टनर के साथ वैकेशन पर भी जाने की संभावना है। वहीं, अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें। प्रॉपर्टी से जुड़ी कोई अच्छी खबर मिल सकती है। आपको करियर में सफलता मिलेगी। कन्या: आज के दिन प्रेम संबंधों में मधुरता बनाए रखने के लिए जीवन में आ रही मुश्किलों का इल्जाम साथी के सिर न डालें। व्यावसायिक सफलता का अनुभव भी करेंगे। आपके जीवन में छोटी-मोटी आर्थिक परेशानियां भी रहेंगी। तुला: आज के दिन व्यापार में थोड़ी बहुत दिक्कतें आ सकती हैं, जिसे आप अपनी सूझबूझ के साथ आसानी से हल कर लेंगे। आपकी आय में वृद्धि होगी। कार्यक्षेत्र में सफलता मिलेगी। प्रेम-संबंधों में मधुरता आएगी। बेवजह की यात्रा से बचें। वृश्चिक: आज के दिन आपकी सेहत और आर्थिक स्थिति दोनों दमदार रहने वाली हैं। वृश्चिक राशि के लोग जीवन को खुशहाल बनाने के लिए लव लाइफ में आ रही दिक्कतों को सुझाएं। रोमांस में कुछ लोग डूबे रहेंगे। धनु: आज के दिन व्यापार से जुड़ी कोई अच्छी खबर मिल सकती है। बच्चों के साथ कहीं घूमने जाने का प्लान बना सकते हैं। सालों से रुका हुआ धन मिलने की संभावना है। काम के सिलसिले में विदेश यात्रा पर जा सकते हैं। मकर: आज के दिन ऑफिस में पॉलिटिक्स से दूर रहना आपके लिए बेहतर रहेगा। हर सोमवार शिव जी की उपासना करें। सेहत में सुधार होगा। जीवनसाथी के साथ चल रही मतभेदों को बैठकर बातचीत कर सुलझाएं। कुंभ: आज के दिन स्वास्थ्य अच्छा रहने वाला है। आपका दिन फायदेमंद माना जा रहा है। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। व्यापार में धन लाभ होने की संभावना है। बिजनेस कर रहे लोगों को कोई अच्छी डील भी मिल सकती है। मीन: मीन राशि के लोगों को रिश्तों में छोटी-मोटी समस्याएं आ सकती हैं लेकिन बात-चीत कर इन दिक्कतों को सुलझाना बेहतर रहेगा। प्रोफेशनल लाइफ में अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के लिए चुनौतियों का बखूबी सामना करें।

नवरात्रि की शुरुआत: कल से कलश स्थापना कैसे करें और इसका आध्यात्मिक महत्व

शारदीय नवरात्रि 22 सितंबर से शुरू है. शारदीय नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना करते हैं. उसके साथ ही मां दुर्गा की पूजा प्रारंभ होती है. कलश स्थापना का मुहूर्त सुबह और दोपहर दोनों समय है. कलश स्थापना के लिए पूजा सामग्री की व्यवस्था आज ही कर लें. आइए जानते हैं शारदीय नवरात्रि में कलश स्थापना की विधि, सामग्री और महत्व के बारे में. शारदीय नवरात्रि 22 सितंबर सोमवार से शुरू है. इस दिन नवरात्रि का पहला दिन है. हिंदू कैलेंडर के अनुसार, आश्विन शुक्ल प्रतिपदा के दिन शारदीय नवरात्रि की शुरूआत होती है. उस दिन दिन कलश स्थापना करके मां दुर्गा की पूजा करते हैं. नवरात्रि के 9 दिनों तक कलश पूजा स्थान पर ही रहता है. दुर्गा विसर्जन के दिन कलश को हटाया जाता है. नवरात्रि के प्रथम दिन कलश स्थापना के बाद मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजा करते हैं. तिरुपति के ज्योतिषाचार्य डॉ. कृष्ण कुमार भार्गव से जानते हैं शारदीय नवरात्रि में कलश स्थापना कैसे करें? कलश स्थापना का मुहूर्त क्या है? शारदीय नवरात्रि शुभ मुहूर्त आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि का शुभारंभ: 22 सितंबर, सोमवार, 01:23 ए एम से आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि का समापन: 23 सितंबर, मंगलवार, 02:55 ए एम पर शुक्ल योग: प्रात:काल से लेकर शाम 07:59 पी एम तक ब्रह्म योग: शाम 07:59 पी एम से पूर्ण रात्रि तक उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र: प्रात:काल से 11:24 ए एम तक हस्त नक्षत्र: 11:24 ए एम से पूरे दिन कलश स्थापना शुभ मुहूर्त 1. अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: सुबह में 06:09 बजे से सुबह 07:40 बजे तक 2. शुभ-उत्तम मुहूर्त: सुबह 09:11 बजे से सुबह 10:43 बजे तक 3. कलश स्थापना अभिजीत मुहूर्त: 11:49 बजे से दोपहर 12:38 बजे तक कलश स्थापना सामग्री मिट्टी या पीतल का कलश, गंगाजल, जौ, आम के पत्ते, अशोक के पत्ते, केले के पत्ते, सात प्रकार के अनाज, जटावाला नारियल, गाय का गोबर, गाय का घी, अक्षत्, धूप, दीप, रोली, चंदन, कपूर, माचिस, रुई की बाती, लौंग, इलायची, पान का पत्ता, सुपारी, फल, लाल फूल, माला, पंचमेवा, रक्षासूत्र, सूखा नारियल, नैवेद्य, मां दुर्गा का ध्वज या पताका, दूध से बनी मिठाई आदि. नवरात्रि कलश स्थापना कैसे करें? शारदीय नवरात्रि के पहले दिन स्नान के बाद व्रत और पूजा का संकल्प करें. फिर पूजा स्थान पर ईशान कोण में एक चौकी रखें और उस पर पीले रंग का कपड़ा बिछा दें. उसके बाद उस पर सात प्रकार के अनाज रखें. फिर उस पर कलश की स्थापना करें. कलश के ऊपर रक्षासूत्र बांधें और रोली से तिलक लगाएं. इसके बाद कलश में गंगा जल डालें और पवित्र जल से उसे भर दें. उसके अंदर अक्षत्, फूल, हल्दी, चंदन, सुपारी, एक सिक्का, दूर्वा आदि डाल दें और सबसे ऊपर आम और अशोक के पत्ते रखें. फिर एक ढक्कन से कलश के मुंख को ढंक दें. उस ढक्कन को अक्षत् से भरें. सूखे नारियल पर रोली या चंदन से तिलक करें और उस पर रक्षासूत्र लपेटें. फिर इसे ढक्कन पर स्थापित कर दें. उसके बाद प्रथम पूज्य गणेश जी, वरुण देव समेत अन्य देवी और देवताओं का पूजन करें. इस प्रकार से कलश स्थापना करें. उसके पास मिट्टी डालकर उसमें जौ डालें और पानी से उसे सींच दें. इस जौ में पूरे 9 दिनों तक पानी डालना है. ये जौ अंकुरित होकर हरा भरा हो जाएगा. हरा जौ सुख और समृद्धि का प्रतीक होता है. कलश के पास ही एक अखंड ज्योति भी जलाएं, जो महानवमी तक जलनी चाहिए. कलश स्थापना का महत्व नवरात्रि में कलश स्थापना करने के बाद मां दुर्गा का आह्वान करते हैं. कलश स्थापना करके ही त्रिदेवों ब्रह्मा, विष्णु और महेश के साथ अन्य देवी और देवताओं को इस पूजा का साक्षी बनाते हैं. धर्म शास्त्रों में कलश को मातृ शक्ति का प्रतीक मानते हैं. नवरात्रि के 9 दिनों में कलश में सभी देवी और देवताओं का वास होता है.