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दिमागी थकान से परेशान? ये 7 आदतें तुरंत बदलें और पाएं मदद

क्या आपने कभी ऐसा महसूस किया है कि आपका फिजिकल काम ज्यादा नहीं था लेकिन फिर भी आपका मन भारी और थका हुआ लग रहा है? आपका शरीर ठीक है, लेकिन मानसिक थकान आपको लगातार घेर रही है, जैसे कोई अनजाना बोझ आपके मन पर है. अक्सर ऐसा हमारी रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतों की वजह से होता है, जिन्हें हम पहचान भी नहीं पाते. आइए हम सात ऐसी आम आदतों पर नज़र डालते हैं, जो आपकी मेंटल एनर्जी को धीरे-धीरे खत्म कर देती हैं. साथ ही लेख के अंत में मैं एक बहुत ही प्रभावी अभ्यास भी बताऊंगा, जो आपकी मानसिक ऊर्जा को फिर से ताजा कर सकता है. पहली आदत: अपनी बातों को बार-बार दूसरों को समझाना. कभी-कभी हम अपने फैसलों, भावनाओं या सीमाओं को बार-बार बताने लगते हैं, सोचते हैं कि अगर पूरी बात न कहें तो लोग क्या सोचेंगे. ऐसा करने से मन में थकावट होती है. इसलिए याद रखें, आपकी पसंद को हर किसी की मंजूरी की जरूरत नहीं होती. जब भी ऐसा महसूस हो, खुद से कहें, "यह मेरे लिए अभी सही लग रहा है." और फिर बात वहीं छोड़ दें. दूसरी आदत: हर किसी की समस्या सुलझाने की कोशिश करना. कभी-कभी हम लोगों की भावनाओं को सुनने की बजाय तुरंत समाधान देने लगते हैं. इससे आप अपने साथ-साथ दूसरों का बोझ भी उठाने लगते हैं और थक जाते हैं. कभी-कभी सिर्फ सुनना ही काफी होता है.  तीसरी आदत: एक साथ कई काम करना या मल्टीटास्किंग. हमारा दिमाग मल्टीटास्किंग के लिए नहीं बना है. जब आप एक से ज्यादा काम करते हैं, तो दिमाग तेजी से काम के बीच स्विच करता है, जिससे बहुत थकावट होती है. इसलिए एक काम पर पूरा ध्यान दें. चौथी आदत: पुराने विवाद या बातों को बार-बार याद करना. ऐसा करने से मन में स्ट्रेस बढ़ता है. जब ऐसा हो, तो खुद से कहें कि "वो समय अब खत्म हो चुका है," और अपने दिमाग को इसे छोड़ने की आदत डालें. पांचवीं आदत: दूसरों की खुशी के लिए बिना मन से "हां" कहना. कई बार हम दूसरों को निराश न करने के लिए चीज़ें बिना सोचे-समझे स्वीकार कर लेते हैं, जिसका असर हमारे मन पर पड़ता है. इससे बचने के लिए थोड़ा सोच-समझ कर जवाब दें. छठी आदत: बहुत ज्यादा शोर, सोशल मीडिया, खबरों और वीडियो में उलझना. यह हमारे नर्वस सिस्टम को थका देता है. रोजाना कम से कम 20 मिनट फोन से दूर बैठें, चाय पिएं या खुली हवा में सैर करें. सातवीं आदत: अपनी भावनाओं को अनदेखा करना. जब आप चिंतित, उदास या चिड़चिड़े महसूस करते हैं तो खुद को कुछ पल दें, उस भावना को समझें और जरूरत पड़ने पर लिखें या बोलें. इससे आपकी भावनाएं कंट्रोल रहती हैं. ये चीजें कर सकती हैं मदद सांसों पर ध्यान देना. रोजाना 2 मिनट शांति से बैठकर अपनी सांसों पर ध्यान दें, बिना उसे बदलने की कोशिश किए.  यह दिमाग और शरीर दोनों को आराम देता है और आपकी मानसिक शांति को बहाल करता है.

भूलकर भी न करें ये खरीदारी! पितृपक्ष में पितृ दोष का खतरा

पितृपक्ष के दिनों में कुछ नियमों का सख्ती से पालन करना होता है, अन्यथा इसके बुरे प्रभाव जीवन में देखने को मिलते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस दिनों किन कार्यों को करने से बचना चाहिेए। हिंदू धर्म में पितृपक्ष को विशेष महत्व दिया जाता है। हर साल पितृपक्ष भाद्रपद मास की शुक्ल पूर्णिमा से आरंभ होकर आश्विन अमावस्या पर समाप्त होते हैं। लगभग पंद्रह दिनों तक चलने वाले इस समय में लोग अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और उनकी आत्मा की शांति के लिए तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करते हैं। इस दौरान पितरों को याद करने से परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है और सुख-समृद्धि आती है। पितृपक्ष के दिनों में कुछ नियमों का सख्ती से पालन करना होता है, अन्यथा इसके बुरे प्रभाव जीवन में देखने को मिलते हैं। इन दिनों शुभ कार्य, धार्मिक अनुष्ठान या किसी चीज की खरीदारी करने की मनाही होती है। ऐसा करके आप पितरों को अप्रसन्न कर सकते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस दिनों किन कार्यों को करने से बचना चाहिेए।  पितृ दोष क्या है? ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब पूर्वजों की आत्माएं अप्रसन्न होतीं है, तो इससे वंशजों के जीवन में कष्ट और बाधाएं उत्पन्न होने लगती हैं। इस स्थिति को पितृ दोष कहा जाता है। मान्यता है कि पितृपक्ष में पूर्वज धरती पर आते हैं और अपने परिवार को आशीर्वाद देते हैं। इस दौरान अगर उन्हें उचित सम्मान और श्रद्धा न मिले, तो वे नाराज हो जाते हैं। इसलिए इस अवधि में किए गए कर्म अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। पितृपक्ष में क्या न करें पितृपक्ष में कुछ कार्य वर्जित बताए गए हैं जिन्हें इस अवधि में भूलकर भी नहीं करना चाहिए। पितृपक्ष में नए कपड़े, जूते या चप्पल खरीदना अशुभ माना जाता है। इस दौरान विवाह, सगाई या अन्य मांगलिक आयोजन करना वर्जित है। इस समय तामसिक भोजन जैसे मांस, मछली, अंडा, प्याज और लहसुन आदि के सेवन से भी बचें। इस समय सोना-चांदी खरीदना भी अशुभ माना जाता। जितना संभव हो धार्मिक कार्य करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें। दूसरों के प्रति अपमानजनक व्यवहार न रखें और बड़ों का सम्मान करें। पितरों को प्रसन्न करने के लिए करें मंत्र जाप पितृ पक्ष में मंत्रोच्चारण का विशेष महत्व है। इन मंत्रों का जाप करने से पितर प्रसन्न होते हैं। ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥ ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय च धीमहि तन्नो रुद्र: प्रचोदयात। ॐ पितृगणाय विद्महे जगत धारिणी धीमहि तन्नो पितृो प्रचोदयात्।

विश्वकर्मा पूजा को लेकर भ्रम? यहां देखें इस साल का सटीक दिन और शुभ समय

भारत एक ऐसा देश है, जहां हर महीने कोई-ना-कोई त्योहार (विश्वकर्मा पूजा) मनाया जाता है। चाहे वह पूरे देश भर में मनाया जाए या फिर कोई रीजनल त्योहार हो, जिसे लोग बहुत ही उत्साह के साथ मनाते हैं। इनमें होली, दिवाली, नवरात्र और छठ पूजा मुख्य त्योहार है। जिसके लिए लोग बड़ी बेसब्री से इंतजार करते हैं। वहीं, हर साल सितंबर के महीने में विश्वकर्मा पूजा भी मनाया जाता है। यह दिन ब्रह्मांड के दिव्या वास्तुकार भगवान विश्वकर्मा को समर्पित है। इस खास मौके पर लोग लोहे के औजार की पूजा करते हैं, जिससे उनके कारोबार में उन्नति हो सके। इसकी कामना भी करते हैं, पिछले कुछ सालों से ऐसी स्थिति उत्पन्न हो रही है कि लोगों के मन में विश्वकर्मा पूजा की तिथि को लेकर संशय बना रहता है। इस बार भी लोगों के मन में यह कंफ्यूजन बनी हुई है कि विश्वकर्मा पूजा 16 या 17 सितंबर को मनाई जाएगी। इस खास मौके पर बड़े-बड़े फैक्ट्री में भगवान की विशालकाय मूर्ति भी स्थापित की जाती है। पूजा के दौरान आप भगवान को धूप, दीप, अगरबत्ती, फल और मिठाई चढ़ाई जाती है। कई स्थानों पर मेला भी लगाया जाता है। विश्वकर्मा पूजा 2025 वैदिक पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 17 सितंबर 2025 को पड़ रही है। यह तिथि 16 सितंबर की रात 12 बजकर 21 मिनट से शुरू होगी और 17 सितंबर की रात 11 बजकर 39 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में इस साल 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा मनाई जाएगी। महत्व हिंदू धर्मग्रंथों में भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का वास्तुकार और शिल्पकार बताया गया है। मान्यता है कि उन्होंने न केवल स्वर्गलोक का निर्माण किया, बल्कि द्वारका नगरी, इंद्रपुरी, यमपुरी और भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र जैसे दिव्य अस्त्र-शस्त्र भी बनाए। इंद्र का वज्र भी उन्हीं की देन है। यही कारण है कि उन्हें सृष्टि का पहला इंजीनियर और आर्किटेक्ट माना जाता है। इस पूजा को कारीगरों और मशीनों का त्योहार भी कहा जाता है। ऐसे करें पूजा इस दिन लोग अपने साइकिल, गाड़ी, लोहे के औजार, मशीन, कलपुर्जे, दुकान आदि की पूजा करते हैं। ऐसा माना जाता है कि उनके आशीर्वाद से बिजनेस में उन्नति होती है और सालों भर लोगों का काम, धंधा अच्छे से सफलतापूर्वक चलता रहता है। इस दिन भगवान को खुश करने के लिए आप कुछ नियमों का भी पालन कर सकते हैं, जिससे वह आपके तरक्की के रास्ते में आने वाले सारी रूकावटों को दूर कर सकते हैं और सालों भर अपनी कृपा दृष्टि आप पर बनाए रखेंगे। विश्वकर्मा पूजा के दिन आप अपनी गाड़ी, फैक्ट्री, औजार को पानी से धो सकते हैं। यह फिर उसकी साफ-सफाई कर सकते हैं। उसके बाद विधि-विधान पूर्वक उनकी पूजा-अर्चना करें।

जानें करवा चौथ का व्रत कब है और कैसे करें सही पूजा

सनातन धर्म में करवा चौथ व्रत का खास महत्व है। यह पर्व चंद्र देव को समर्पित होता है। इस शुभ अवसर पर विवाहित महिलाएं संध्याकाल में स्नान-ध्यान के बाद चंद्र देव की पूजा करती हैं। साथ ही अखंड सौभाग्य के लिए करवा माता के निमित्त व्रत रखती हैं। करवा चौथ हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है. इस दिन सुहागन महिलाएं अपने जीवनसाथी की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए निर्जला व्रत रखती हैं. करवा चौथ में रात के समय में चंद्रमा को देखकर अर्घ्य देते हैं, उसके बाद व्रती अपने पति के हाथों में जल पीकर व्रत को पूरा करते हैं. चंद्रोदय के बाद ही करवा चौथ का पारण किया जाता है. आइए जानते हैं कि इस साल करवा चौथ कब है? करवा चौथ का मुहूर्त क्या है? 2025 में करवा चौथ कब है? दृक पंचांग के अनुसार, करवा चौथ के लिए आवश्यक कार्तिक कृष्ण चतुर्थी तिथि इस साल 9 अक्टूबर दिन गुरुवार को रात 10 बजकर 54 मिनट पर शुरू होगी. चतुर्थी ति​थि का समापन 10 अक्टूबर दिन शुक्रवार को शाम 7 बजकर 38 मिनट पर होगाा. उदयाति​थि के आधार पर करवा चौथ 10 अक्टूबर दिन शुक्रवार को है. करवा चौथ का शुभ मुहूर्त 10 अक्टूबर को करवा चौथ की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम को 5 बजकर 57 मिनट से शाम 7 बजकर 11 मिनट तक है. इस दिन करवा चौथ की पूजा के लिए करीब सवा घंटे का शुभ समय प्राप्त होगा. करवा चौथ की पूजा प्रदोष काल में करने का विधान है. करवा चौथ का चांद कब निकलेगा? करवा चौथ की शाम व्रती महिलाओं को चांद के निकलने की प्रतीक्षा होती है. यह व्रत चंद्रमा के अर्घ्य देने के बाद ही पूरा होता है. ऐसे में करवा चौथ का चांद रात 8 बजकर 13 मिनट पर निकलेगा. 14 घंटे का होगा करवा चौथ व्रत इस साल का करवा चौथ व्रत करीब 14 घंटे का होगा. करवा चौथ व्रत का प्रारंभ सूर्योदय के साथ होता है और इसका समापन चंद्रोदय होने पर होता है. इस आधार पर देखा जाए तो करवा चौथ का व्रत सुबह में 6 बजकर 19 मिनट से शुरू होगा और रात 8 बजकर 13 मिनट तक रहेगा. इस तरह से व्रती महिलाएं 13 घंटे 54 मिनट तक निर्जला व्रत रखेंगी. करवा चौथ शुभ योग (Karva Chauth Shubh Yog) ज्योतिषियों की मानें तो कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है। साथ ही शिववास योग का भी संयोग बन रहा है। इस तिथि पर देवों के देव महादेव कैलाश पर विराजमान रहेंगे। वहीं, संध्याकाल में 07 बजकर 38 मिनट से नंदी की सवारी करेंगे. इस दौरान पूजा-पाठ करने से व्रती को दोगुना फल प्राप्त होगा। पंचांग     सूर्योदय – सुबह 05 बजकर 31 मिनट पर     सूर्यास्त – शाम 05 बजकर 16 मिनट पर     चंद्रोदय– शाम 07 बजकर 42 मिनट पर     चंद्रास्त- सुबह 08 बजकर 46 मिनट पर     ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 03 बजकर 53 मिनट से 04 बजकर 42 मिनट तक     विजय मुहूर्त – दोपहर 01 बजकर 21 मिनट से 02 बजकर 08 मिनट तक     गोधूलि मुहूर्त – शाम 05 बजकर 16 मिनट से 05 बजकर 40 मिनट तक     निशिता मुहूर्त – रात्रि 10 बजकर 59 मिनट से 11 बजकर 48 मिनट तक    

आज का राशिफल 09 सितंबर 2025: इन राशियों को मिलेगा सौभाग्य, हर काम बनेगा आसान

मेष आज का राशिफल बताता है कि आप कुछ नए और रोमांचक साहसिक कार्य शुरू कर सकते हैं। इस समय जीवन एक बड़े रोमांच जैसा लगता है, और आप अपनी लाइफ में हर मिनट को पसंद कर रहे हैं। शायद आप इन सभी अद्भुत अनुभवों को याद रखने के लिए जर्नलिंग करने या ढेर सारी तस्वीरें लेने का प्रयास कर सकते हैं। वृषभ आज हो सकता है कि आप चीजों को अपने तरीके से करने की इच्छा महसूस कर रहे हों, भले ही दूसरे लोग आपको ऐसा न करने के लिए कह रहे हों। अगर आप शॉर्टकट अपनाने का प्रयास करेंगे तो बाद में आपको पछताना पड़ सकता है। मिथुन आज अपनी मेंटल हेल्थ पर फोकस करें। हो सकता है किसी पुरानी चीज का अंत किसी नई चीज की शुरुआत के लिए जगह बना रहा हो। अपने काम पर ध्यान दें। अचानक से आपके खर्च बढ़ सकते हैं। तनाव पर ध्यान दें। कर्क आज का राशिफल इस ओर इशारा कर रहा है की कभी-कभी दूसरों की सलाह सुनना भी जरूरी है। हो सकता है कि आप पास्ट के प्रति थोड़ा उदास महसूस कर रहे हों, लेकिन याद रखें कि भविष्य में बहुत सारी रोमांचक संभावनाएं हैं। सिंह आज का दिन आपके लिए फोकस बढ़ाने की मांग कर रहा है। आप एक नए दृष्टिकोण के साथ फिर से शुरुआत करने के लिए तैयार हैं। आप जो कुछ भी सीख चुके हैं, उसे अपना रहे हैं और अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए ज्ञान का उपयोग भी कर रहे हैं। कन्या आज का दिन आपको अपनी पोजीशन से आगे बढ़ने में मदद करेगा। आपके कामकाजी जीवन में भी सकारात्मक बदलाव हो सकता है। बस सेहत पर ध्यान दें। तुला आज के दिन क्रिएटिव तरीके आजमाने पर आप अधिक उत्पादक बन सकते हैं। सेहत से जुड़े मुद्दों को लेकर लापरवाही न बरतें। पैसों के मामले में थोड़ा उतार-चढ़ाव बना रहेगा। वृश्चिक आज के दिन का का सदुपयोग आगे पढ़ाई करके, अपना खुद का व्यवसाय शुरू करके या यहां तक ​​कि विदेश यात्रा करके अपने पेशेवर प्रोफाइल को बढ़ाने के लिए करें। चाहे आप सिंगल हों या रिश्ते में हों, यह दिल के मामलों में दिमाग को चुनने का समय है। धनु आज का राशिफल इस बारे का संकेत देता है कि कभी-कभी अच्छी चीजें अचानक से खुद-ब-खुद ही हो जाती हैं। जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव हो सकते हैं। हो सकता है कि आपको कोई बड़ा मौका मिले। मकर आज आपका आधिकारिक प्रदर्शन शानदार होगा। इससे आपके करियर में अधिक अवसरों को बढ़ने का रास्ता मिलेगा। आर्थिक रूप से आप आज अच्छे हैं और कोई बड़ी बीमारी आपको परेशान नहीं करेगी। कुंभ आज का आपका दिन बदलावों से भरपूर रहन वाला है। आपके खिलाफ बहुत कुछ चल रहा है और हर चीज पर नजर रखना कठिन है। पॉलिटिक्स में न उलझने के लिए एक शेड्यूल बनाने या नई जिम्मेदारियां लेने का प्रयास करें। मीन आज आप खुद को नई सीमाओं की ओर आकर्षित होते हुए पा सकते हैं। चाहे वह पेशेवर लेवल पर नए करियर पथ का रास्ता खोलना हो या पर्सनल लेवल पर ज्ञान और स्किल्स की खोज करके आगे बढ़ना हो।

पितृपक्ष के बाद घर या जमीन खरीदने का सही मौका: सितंबर से दिसंबर तक के टॉप मुहूर्त

इस बार पितृपक्ष 8 सितंबर से शुरू होकर 21 सितंबर को समाप्त होंगे। इसके बाद आप मकान या जमीन की खरीदारी जरूर कर सकते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं सितंबर से दिसंबर तक सम्पत्ति क्रय के लिए शुभ मुहूर्त कौन कौन से रहने वाले हैं।  कुछ ही दिनों में पितृ पक्ष शुरू होने वाले हैं। इस दौरान कोई भी शुभ कार्य करने की मनाही होती है। यदी आप घर या जमीन की खरीदारी के बारे में सोच रहे हैं, तो पितृपक्ष के बाद ही इस कार्य के बारे में विचार करें। धार्मिक परंपरा के अनुसार पितृपक्ष के दौरान ऐसे कार्य करने पर सख्त मनाही होती है। इस बार पितृपक्ष 8 सितंबर से शुरू होकर 21 सितंबर को समाप्त होंगे। इसके बाद आप मकान या जमीन की खरीदारी जरूर कर सकते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं सितंबर से दिसंबर तक सम्पत्ति क्रय के लिए शुभ मुहूर्त कौन कौन से रहने वाले हैं।     दिनांक आरंभ काल समाप्ति काल सितंबर 25, 2025, बृहस्पतिवार  शाम 07:09 बजे सुबह 06:11 बजे, 26 सितंबर सितंबर 26, 2025, शुक्रवार  सुबह 06:11 बजे सुबह 06:12 बजे, 27 सितंबर  अक्तूबर 16, 2025 सुबह 06:22 बजे सुबह 06:23 बजे, अक्तूबर 17 अक्तूबर 17, 2025 सुबह 06:23 बजे सुबह 06:24 बजे, अक्तूबर 18 अक्तूबर 23, 2025, बृहस्पतिवार  सुबह 06:27 बजे सुबह 06:28 बजे, अक्तूबर 24 अक्तूबर 24, 2025, शुक्रवार  सुबह 06:28 बजे सुबह 06:28 बजे, अक्तूबर 25 नवंबर 7, 2025, शुक्रवार सुबह 12:33 बजे सुबह 06:38 बजे, नवंबर 08 नवंबर 13, 2025, बृहस्पतिवार सुबह 06:42 बजे सुबह 06:43 बजे, नवंबर 14 नवंबर 14, 2025, शुक्रवार सुबह 06:43 बजे रात 09:20 बजे नवंबर 20, 2025, बृहस्पतिवार  सुबह 06:48 बजे सुबह 06:49 बजे, नवंबर 21 नवंबर 21, 2025, शुक्रवार  सुबह 06:49 बजे दोपहर 01:56 बजे  नवंबर 28, 2025, शुक्रवार सुबह 02:49 बजे सुबह 06:55 बजे, नवंबर 29 दिसंबर 5, 2025, शुक्रवार सुबह 11:46 बजे सुबह 07:00 बजे, दिसंबर 06 दिसंबर 11, 2025, बृहस्पतिवार  सुबह 07:04 बजे सुबह 03:55 बजे, दिसंबर 12 दिसंबर 18, 2025, बृहस्पतिवार सुबह 07:08 बजे शाम 08:07 बजे दिसंबर 19, 2025, शुक्रवार सुबह 10:51 बजे सुबह 07:09 बजे, दिसंबर 20 दिसंबर 26, 2025, शुक्रवार  सुबह 09:00 बजे सुबह 07:12, दिसंबर 27  

जानें कौन सी सब्जियां पितरों को नहीं भाती, टालें पितृ असंतोष

पितृ पक्ष के दौरान कुछ विशेष नियम हैं जिनका सख्ती से पालन करने से पितरों की तृप्ति होती है, उनकी आत्मा को शांति मिलती है। साथ ही परिवार पर सुख-समृद्धि बनी रहती है। इसलिए पितृ पक्ष के दौरान इन परंपराओं को गंभीरता से अपनाना अत्यंत आवश्यक है। पितृ पक्ष, जिसे पितृ अमावस्या या पितृ काल भी कहा जाता है, एक महत्वपूर्ण धार्मिक अवधि है जो इस वर्ष 7 सितंबर से 21 सितंबर 2025 तक रहेगी। यह वह समय होता है जब हमारे पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए विशेष पूजा, श्राद्ध कर्म और तर्पण आदि किए जाते हैं। इस पावन अवसर पर लोग अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथियों के अनुसार विशेष श्राद्ध अनुष्ठान करते हैं ताकि उनकी आत्मा को शांति और मुक्ति मिल सके। पितृ पक्ष के दौरान ब्राह्मणों को भोजन कराने की भी विशेष प्रथा है, जिसे पितृ भोजन कहा जाता है। ऐसा करने से माना जाता है कि पूर्वज तृप्त होते हैं और अपने वंशजों की सुख-समृद्धि के लिए आशीर्वाद देते हैं। यह समय परिवार में एकता और परंपराओं के सम्मान का प्रतीक भी होता है। पितृ पक्ष के ये कर्म न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि यह हमें अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता और सम्मान की भावना भी सिखाते हैं। पितरों के भोजन में किन सब्ज़ियों से बचें पितृ पक्ष के दौरान पितरों के लिए बनाए जाने वाले भोजन में कुछ खास सब्जियों को शामिल नहीं किया जाता। खासकर पत्ता गोभी और कुम्हड़ा की सब्जी पितरों के भोजन में बिल्कुल नहीं बनानी चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि पुराणों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितर इन सब्जियों को ग्रहण नहीं करते। यदि इन्हें पितरों के लिए बनाए गए भोजन में शामिल किया जाए या ब्राह्मणों को खिलाया जाए, तो माना जाता है कि पितर अतृप्त होकर लौट जाते हैं। इससे न केवल पितरों की शांति बाधित होती है बल्कि परिवार पर भी दोष लगता है। इसलिए यह एक महत्वपूर्ण नियम है कि पितरों के भोजन में इन सब्जियों का पूर्णतः त्याग किया जाए। अश्विन माह में खाने से परहेज करें पितृ पक्ष जो कि अश्विन माह में आता है, इस समय कई प्रकार की जड़ वाली सब्जियों से बचने की सलाह दी जाती है। इस दौरान शकरकंद, मूली, गाजर, शलजम, चुकंदर, अरबी, सूरन जैसी सब्जियों का सेवन नहीं करना चाहिए। इन सब्जियों में ठंडी और भारी प्रकृति होती है, जो धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार पवित्र भोजन के लिए उचित नहीं मानी जातीं। पितृ पक्ष के दौरान शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है, इसलिए इस तरह की सब्जियों का परहेज करना जरूरी होता है।  दालों के सेवन पर रोक पितृ पक्ष के समय कुछ विशेष प्रकार की दालों से भी दूर रहना चाहिए। इनमें चना दाल, सत्तू, मसूर और उड़द की दाल शामिल हैं। ये दालें भारी होती हैं और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पावन अवधि में इनका सेवन वर्जित माना गया है। श्राद्ध और तर्पण जैसे अनुष्ठानों के समय हल्का और सरल भोजन ही बनाया जाता है, जो पितरों की तृप्ति के लिए उपयुक्त हो। प्याज-लहसुन से बचाव पितृ पक्ष में बनाए जाने वाले भोजन में प्याज और लहसुन का उपयोग पूरी तरह से वर्जित होता है। इन दोनों सामग्रियों को अहिंसा और शुद्धता के सिद्धांतों के विपरीत माना जाता है। श्राद्ध के भोजन में इनका प्रयोग न करने से भोजन की पवित्रता बनी रहती है और पूर्वजों को प्रसन्न किया जा सकता है। इससे अनुष्ठान का प्रभाव भी बढ़ता है। भोजन बनाते समय सावधानी पितृ पक्ष के दौरान भोजन बनाते समय विशेष स्वच्छता और पवित्रता का ध्यान रखना जरूरी है। भोजन बनाने से पहले स्नान अवश्य करें और पूरी सफाई के साथ भोजन तैयार करें। इसके अलावा, अनुष्ठान और भोजन के दौरान चप्पल पहनने से बचना चाहिए, क्योंकि यह असम्मान और अशुद्धि का प्रतीक माना जाता है। इन बातों का ध्यान रखने से अनुष्ठान सफल होते हैं और पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। 

मृत्यु के बाद पहला श्राद्ध कैसे करें? जानें नियम और धार्मिक कारण

हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व है. पितृपक्ष के दौरान अपने पितरों या पूर्वजों का श्राद्ध और पिंडदान किया जाता है. ऐसा करने से पितरों और मृत आत्माएं तृप्त होती है. साल 2025 में पितृपक्ष की शुरुआत 7 सितंबर से हो चुकी है जो 22 सितंबर यानी सर्वपितृ अमावस्या तक चलेंगे. पितृपक्ष के दौरान पितरों का तर्पण, पिंडदान करना शुभ माना जाता है, मान्यता है ऐसा करने से पितृ खुश होते हैं और आशीर्वाद देते हैं. लेकिन श्राद्ध करने के कई नियम हैं जिनका पालन अवश्य करना चाहिए. जानते हैं किसी की मृत्यु के बाद पहला श्राद्ध कब करना चाहिए. क्या हैं श्राद्ध करने के नियम जानें इसका धार्मिक कारण. कई बार लोग सही जानकारी ना होने की वजह से किसी की भी मृत्यु के बाद उनका श्राद्ध कर देते हैं. लेकिन इस बात का खास ख्याल रखना चाहिए और प्रथम वर्ष श्राद्ध नहीं करना चाहिए. पहले श्राद्ध से जुड़ी जरूरी बातें     पहला श्राद्ध एक वर्ष पूर्ण होने के बाद करना चाहिए. शास्त्रों के अनुसार, मृत्यु के बाद जब मृतक की पहली बरसी आती है, तब पहला श्राद्ध किया जाता है. श्राद्ध कर्म हमेशा तिथि के अनुसार करें. अगर आप तिथि का हिसाब ना लगा सकते हो तो किसी पंडित से तिथि के बारे में जान सकते हैं.     जिनकी मृत्यु किसी भी माह के शुक्ल पक्ष या कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया आदि किसी भी तिथि पर अगर हुई है तो उन लोगों का श्राद्ध पितृपक्ष में उसी तिथि पर किया जाता है.     तिथि पर ही श्राद्ध करने का विशेष महत्व होता है. श्राद्ध हमेशा उसी तिथि पर करना चाहिए जिस तिथि पर मृत्यु होती है.     अगर किसी की बरसी पितृ पक्ष में आ जाए तो उस दिन किया गया श्राद्ध और भी अधिक फलदायी माना जाता है. कब करें पहला श्राद्ध ? पितृ की वार्षिक यानी बरसी के बाद श्राद्ध किया जा सकता है. इसलिए कोशिश करें जब तक वार्षिक यानी बरसी ना हो जाए तब तक श्राद्ध ना करें. वार्षिक या बरसी व्यक्ति की मृत्यु के सालभर के अंदर ही होती है. किसी का भी पहला श्राद्ध आत्मा को शांति और संतोष प्रदान करता है. श्राद्ध कर्म करने से पितरों का आशीर्वाद और उनकी कृपा प्राप्त होती है.

सरकारी नौकरी चाहने वालों के लिए प्रेमानंद जी का सफलता मंत्र, जानें 100% सफल होने का तरीका

हमारे देश में सरकारी नौकरी का क्रेज किसी से छिपा नहीं है। हर साल लाखों छात्र अलग-अलग सरकारी नौकरियों का सपना लिए तैयारी शुरू करते हैं। इस रेस में कोई तय समय नहीं होता, कभी कोई सालभर में अपना मुकाम हासिल कर लेता है, तो किसी को कड़ी मेहनत के बाद भी सफलता नहीं मिलती। जाहिर है लाखों की भीड़ में जब आप उतरते हैं, वो गला काट प्रतिस्पर्धा फेस करते हैं, तो मन में घबराहट भी होती है। और जब कड़ी मेहनत के बाद भी कई सालों तक कोई रिजल्ट नहीं मिलता तो मन निराशा में भी घिर जाता है। प्रेमानंद जी महाराज ने अपने एक सत्संग के दौरान इसी विषय पर विस्तार में बताया है। उनके बताए इस मंत्र को अगर छात्र अपने जीवन में उतार लें, तो जरूर सफलता उनके हाथ लगेगी। और यदि असफल भी हुए तो उसे बेहतर तरीके से डील कर पाने में भी मदद मिलेगी। हमेशा उत्साह के साथ करें तैयारी प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि छात्र जीवन में हमेशा उत्साह होना चाहिए। चाहे आप सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हों या बेसिक पढ़ाई; हमेशा पूरे जोश, लगन और उत्साह के साथ करें। कोई भी काम मिल रहा है तो उसे चुनौती की तरह लें और टालने की बजाए तुरंत करने की आदत डालें। जब आप जरूरी काम को सही समय पर करने की आदत डाल लेंगे तो मानसिक रूप से भी आप स्ट्रेस फ्री ही रहेंगे। हंसते-खेलते जोश के साथ आपकी तैयारी भी बेहतर होगी और परिणाम भी हमेशा अच्छा ही मिलेगा। प्रॉपर प्लानिंग के साथ करें तैयारी प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि तैयारी करने से पहले उसकी पूरी योजना बनाना जरूरी है। रोज का काम रोज करने की आदतें डालें और डेली प्लानिंग करें। आज आपको क्या करना है इसकी प्रॉपर प्लानिंग बनाएं। रात में प्लान बनाकर सोएं तो और भी बेहतर होगा। इससे आपको अगले दिन काम करने में आसानी होगी और आप अपने पूरे दिन का अच्छा उपयोग कर पाएंगे। चिंता की बजाय चिंतन करें चिंता करना चिता के समान है। इससे मिलता तो कुछ नहीं उल्टा नुकसान ही होता है। प्रेमानंद जी महाराज भी कहते हैं कि छात्र हो या कोई भी व्यक्ति, चिंता तो बिल्कुल भी नहीं करनी चाहिए। चिंता की जगह अगर आप चिंतन करें तो ज्यादा बेहतर होगा। सोचें कि कैसे खुद को बेहतर कर सकते हैं, आगे की योजना बनाएं। अपनी तैयारी ऐसी रखें कि एक महीने बाद परीक्षा है, तो आज भी अगर कोई आपसे सवाल पूछे तो आप बता पाएं। ऐसी तैयारी करने वाले छात्र को जरूर सफलता मिलती है।  

बेहतर नींद के वास्तु टिप्स, अपनाएं और देखें स्वास्थ्य पर असर

कई लोगों को यह समस्या बनी रहती है कि उनकी नींद बार-बार टूटती जिस कारण नींद पूरी नहीं हो पाती। ऐसे में व्यक्ति को कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं भी घेर लेती हैं। आप इस समस्या के समाधान के लिए कुछ वास्तु टिप्स अपना सकते हैं, जिससे आपको काफी फायदा देखने को मिलेगा। चलिए जानते हैं इस बारे में। क्या होनी चाहिए बेड की दिशा वास्तु शास्त्र में माना गया है कि, अगर आप उत्तर और पश्चिम दिशा में सिर करके सोते हैं, तो इससे रोगों में वृद्धि होती है और व्यक्ति की उम्र घटने लगती है। सोते समय आपका सिर पूर्व या दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए। इसलिए आपका बेड भी दक्षिण दिशा में ही होना चाहिए। ध्यान रखें ये बातें रंगों का भी नींद पर काफी असर पड़ता है। वास्तु शास्त्र में माना गया है कि बेडरूम की दीवारों से लेकर बेडशीट का रंग हल्का ही होना चाहिए। इससे आपको नींद की समस्या में आराम देखने को मिल सकता है। इस बात का भी ध्यान रखें कि सोते समय अपने पैर दरवाजे की तरफ नहीं रखने चाहिए, वरना इससे भी आपकी सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। न करें ये गलती सोने से पहले सभी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक सामान जैसे फॉन, लैपटॉप आदि को अपने पास से हटा देना चाहिए और दूर रखकर सोना चाहिए। वास्तु शास्त्र में यह माना गया है कि इलेक्ट्रॉनिक सामान को अपने पास रखकर सोते हैं, तो इससे नींद में तो बाधा उत्पन्न होती ही है, साथ ही सेहत पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। इसके साथ ही आपके बेड के नीचे भी कोई सामान नहीं रखा होना चाहिए। ऐसा करने से वास्तु दोष उत्पन्न हो सकता है, जिससे बार-बार नींद टूटने की समस्या बनी रहती है। क्या है सोने का सही समय शास्त्रों में इस बात का वर्णन मिलता है कि कभी भी सूर्यास्त के तुरंत बाद और गोधूलि बेला में नहीं सोना चाहिए। सोने के लिए सबसे अच्छा समय रात्रि के पहले प्रहर को माना गया है। वहीं, उठने के लिए ब्रह्म मुहूर्त को सबसे उत्तम बताया गया है। इसके साथ ही दिन में सोने से भी कई प्रकार के रोग उत्पन्न हो सकते हैं।