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बीजेपी ने तीसरी बार शैलेंद्र सिंह पर जताया भरोसा सरायकेला खरसावां के संगठन को मिलेगी मजबूती

सरायकेला सरायकेला खरसावां जिला के वरिष्ठ भाजपा नेता शैलेंद्र कुमार सिंह को पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है. प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने तीसरी बार पार्टी का प्रदेश मंत्री मनोनीत किया है. मनोनयन के बाद प्रदेश मंत्री शैलेंद्र सिंह ने कहा कि पार्टी ने उन्हें जो जिम्मेवारी दी है, उस पर खरा उतरेंगे. संगठन की मजबूती के लिए पहले ही की तरह काम करते रहेंगे. उन्होंने कहा कि पार्टी के नीति सिद्धांतों के साथ साथ केंद्र सरकार की उपलब्धियों को जन जन तक पहुंचाएंगे. पार्टी के जिलाध्यक्ष हरेकृष्ण प्रधान समेत अन्य नेताओं ने उन्हें नई जिम्मेवारी के लिए बधाई दी है. 1992 से पार्टी में सक्रिय हैं शैलेन्द्र सिंह प्रदेश मंत्री शैलेंद्र कुमार सिंह ने स्नातक की पढ़ाई करने के बाद वर्ष 1992 में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की. इसके बाद से ही वे पार्टी में सक्रिय है. भाजपा नेता शैलेंद्र सिंह को तीसरी बार बीजेपी के मंत्री बनाया गया है. दो बार रह चुके हैं प्रदेश मंत्री शैलेंद्र कुमार सिंह पूर्व में दो बार प्रदेश मंत्री और एक टर्म सरायकेला खरसावां जिलाध्यक्ष रह चुके हैं. वर्ष 2007 से 2010 तक बीजेपी के सरायकेला खरसावां जिला अध्यक्ष थे. इसके बाद वर्ष 2010 से 2013 तक तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष डॉ दिनेशानंद गोस्वामी के टीम में प्रदेश मंत्री का कार्य सफलता पूर्वक किया. इसके बाद वर्ष 2013 से 2015 तक तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष डॉ रविंद्र राय के कार्यकाल में दूसरी बार प्रदेश सचिव बने थे. 1993 में पहली बार बने थे वार्ड अध्यक्ष शैलेंद्र कुमार सिंह वर्ष 1993 आदित्यपुर वार्ड संख्या 17 का वार्ड अध्यक्ष बने थे. 2000 में तत्कालीन जिलाध्यक्ष विनोद श्रीवास्तव की टीम में जिला महामंत्री बने थे. पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और मधु कोड़ा के गुड फेथ में हैं. अच्छे संगठक और रणनीतिकार माने जाते हैं.

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बिलासपुर में 26 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों का किया लोकार्पण और शिलान्यास

रायपुर.  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज बिलासपुर प्रवास के दौरान अरपा रिवर व्यू के समीप नवनिर्मित ‘अटल परिसर’ में भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रतिमा का अनावरण कर उन्हें नमन किया।मुख्यमंत्री साय ने शहर के समग्र विकास को नई दिशा देते हुए 26 करोड़ 93 लाख रुपये से अधिक लागत के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया।  मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि आधुनिक भारत के स्वप्न दृष्टा, प्रखर वक्ता, संवेदनशील कवि और छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माता थे। उन्होंने कहा कि अटल जी के नेतृत्व में 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ का गठन हुआ, जिसने प्रदेश को विकास की नई दिशा और पहचान प्रदान की। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अटल जी की प्रतिमा उनके ऐतिहासिक व्यक्तित्व, विचारों और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को सहेजने की एक सार्थक पहल है। उन्होंने कहा कि यह परिसर आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देगा और समाज में राष्ट्र निर्माण की भावना को और मजबूत करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा सभी नगरीय निकायों में ‘अटल परिसर’ के निर्माण का निर्णय लिया गया है, ताकि अटल जी के विचारों और आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाया जा सके। उन्होंने कहा कि 25 दिसंबर को प्रदेश के 115 नगरीय निकायों में अटल परिसरों का लोकार्पण किया जा चुका है और यह अभियान निरंतर आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बिलासपुर के सर्वांगीण विकास के लिए राज्य सरकार पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है और आज किए गए 26 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्य शहर की अधोसंरचना को सुदृढ़ करेंगे तथा नागरिक सुविधाओं को नई गति देंगे। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के माध्यम से शहर को आधुनिक और सुविधायुक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन में वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में उत्पन्न संकट के बावजूद भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मजबूती से खड़ा है। उन्होंने कहा कि देश की सुदृढ़ विदेश नीति और प्रभावी समन्वय के कारण आपूर्ति व्यवस्था सुचारु है तथा आम नागरिकों को किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अफवाहों से दूर रहें और जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभाएं। मुख्यमंत्री साय द्वारा इस अवसर पर लगभग 12.43 करोड़ रुपये की लागत से पूर्ण हुए विभिन्न निर्माण कार्यों का लोकार्पण किया गया। इनमें अटल परिसर निर्माण, मराठी कन्या शाला भवन में प्रथम तल निर्माण, इमलीपारा में व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स तथा रक्षित आरक्षी केंद्र का निर्माण प्रमुख रूप से शामिल हैं, जो शहरी विकास और नागरिक सुविधाओं को मजबूत करने में सहायक सिद्ध होंगे। इसके साथ ही मुख्यमंत्री साय ने लगभग 14.50 करोड़ रुपये की लागत के नए विकास कार्यों का भूमिपूजन भी किया। इनमें अरपा क्षेत्र में सड़क, नाला एवं पिचिंग कार्य, जरहाभाठा क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण एवं नवीनीकरण तथा उसलापुर में भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा एवं चबूतरा निर्माण जैसे कार्य शामिल हैं, जो शहर के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के साथ-साथ सांस्कृतिक पहचान को भी सशक्त करेंगे। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि अटल परिसर का निर्माण प्रदेश के लिए गौरव का विषय है और यह मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के दूरदर्शी नेतृत्व का परिणाम है। उन्होंने कहा कि अटल जी के योगदान को शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता और उनके आदर्श आज भी देश को दिशा दे रहे हैं।  इस अवसर पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, विधायक अमर अग्रवाल, धरमलाल कौशिक, धर्मजीत सिंह, सुशांत शुक्ला सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

टीकमगढ़ के डायल-112 हीरोज : ट्रैक्टर-बोलेरो की टक्कर में घायल 20 व्यक्तियों को त्वरित सहायता से पहुँचाया अस्पताल

भोपाल.  टीकमगढ़ जिले के थाना बड़ागांव क्षेत्र में डायल-112 जवानों की तत्पर एवं समन्वित कार्रवाई से ट्रैक्टर एवं बोलेरो की टक्कर में घायल 20 व्यक्तियों को समय पर अस्पताल पहुँचाकर उपचार उपलब्ध कराया गया। इस हादसे में त्वरित राहत कार्य के चलते सभी घायलों को शीघ्र चिकित्सकीय सहायता मिल सकी। दिनांक 28 मार्च 2026 को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112, भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना बड़ागांव क्षेत्र अंतर्गत ग्राम गोपालपुरा के पास ट्रैक्टर एवं बोलेरो की टक्कर में लगभग 20 व्यक्ति घायल हो गए हैं एवं तत्काल पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही बड़ागांव थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 एफआरव्ही वाहन को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। मौके पर पहुँचकर डायल-112 स्टाफ आरक्षक श्री लक्ष्मण लोधी एवं पायलट श्री शैलेश त्रिपाठी ने दुर्घटना में बड़ी संख्या में घायल व्यक्तियों को देखकर तत्काल राहत एवं बचाव कार्य प्रारंभ किया। डायल-112 जवानों ने त्वरित एवं समन्वित कार्रवाई करते हुए एफआरव्ही वाहन एवं चिकित्सा वाहनों की सहायता से सभी घायलों को शीघ्रता से शासकीय अस्पताल, बड़ागांव पहुँचाया। डायल-112 की त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई से सभी घायलों को समय पर उपचार उपलब्ध हो सका। डायल-112 हीरोज श्रृंखला के अंतर्गत यह घटना दर्शाती है कि मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा आपात परिस्थितियों में बड़े हादसों में भी त्वरित राहत एवं सहायता प्रदान करने हेतु सदैव सजग, संवेदनशील एवं प्रतिबद्ध है। 

जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन एवं सतत विकास की दिशा में मध्यप्रदेश सरकार का महा अभियान

भोपाल.  जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन एवं सतत विकास को सुदृढ़ आधार प्रदान करने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान अभियान चलाया जा रहा है। 19 मार्च से शुरू हुआ यह अभियान 30 जून 2026 तक चलेगा। प्रदेश सरकार द्वारा चलाया जा रहा यह महा अभि‍यान केवल प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य के समग्र विकास, ग्रामीण आजीविका सुदृढ़ीकरण एवं भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण जन-अभियान के रूप में स्थापित हो रहा है। इस वर्ष अभियान के अंतर्गत पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा संचालित प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-वाटरशेड विकास 2.0 एवं 1.0 के कार्यों को भी शामिल किया गया है। वाटरशेड विकास 2.0 के अंतर्गत 68 कंटूर ट्रेंच, 91 गेबियन संरचनाएं, 842 खेत-तालाब, 26 स्टॉप डैम, 204 चेक डैम, 281 तालाब, 76 रिचार्ज शाफ्ट तथा 19 अन्य जल संरचनाओं का निर्माण किया जाएगा। इन कार्यों के माध्यम से वर्षा जल का अधिकतम संचयन, भू-जल पुनर्भरण, मृदा संरक्षण एवं जल उपलब्धता में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित की जाएगी, जिससे किसानों को सिंचाई सुविधा में विस्तार एवं कृषि उत्पादन में वृद्धि का प्रत्यक्ष लाभ प्राप्‍त हो सकेगा। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-वाटरशेड विकास 1.0 के अंतर्गत पूर्व में निर्मित स्टॉप डैम एवं चेक डैम की मरम्मत एवं नवीनीकरण के कार्य भी किए जाएंगे। इससे न केवल इन संरचनाओं की कार्यक्षमता पुनर्स्थापित होगी, बल्कि जल संरक्षण के पूर्व प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी। अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन, पारदर्शिता एवं सतत निगरानी के लिए आधुनिक तकनीकी माध्यमों का उपयोग किया जाएगा। वाटरशेड विकास 2.0 के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों की निगरानी WMS पोर्टल के माध्यम से की जाएगी, जिससे कार्यों की वास्तविक समय (Real-Time) पर प्रगति का आकलन संभव हो सकेगा। वहीं, वाटरशेड विकास 1.0 के कार्यों का चयन सिपरी सॉफ्टवेयर के माध्यम से कर उन्हें मनरेगा पोर्टल से जोड़ा गया है, जिससे उनके अनुश्रवण, गुणवत्ता नियंत्रण एवं समयबद्ध क्रियान्वयन को सुनिश्चित किया जा सके। 

कूनो में जन्मी चीता ‘मुखी’ का तीसरा जन्म-दिन गौरव का क्षण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कूनो में जन्मी चीता 'मुखी' का तीसरा जन्म-दिन प्रदेश के साथ ही पूरे देश के वन्य-जीव संरक्षण के लिए गौरव का क्षण है। प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में जन्मी भारतीय चीता 'मुखी' ने 29 मार्च को तीन वर्ष की आयु पूर्ण कर ली है। यह परियोजना के लिये एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मध्यप्रदेश में संचालित 'चीता परियोजना' लगातार सफलता के नए आयाम स्थापित कर रही है। चीता ‘मुखी’ की कहानी भारत में चीतों की पुनर्स्थापना के प्रयासों के दृढ़ संकल्प, श्रेष्ठ वैज्ञानिक प्रबंधन और संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक बन गई है। कूनो नेशनल पार्क में 29 मार्च को ‘मुखी’ के तीसरे जन्म-दिवस के अवसर पर एक विशेष और भावनात्मक वातावरण देखने को मिला। एक नन्हे शावक से आत्म-विश्वास लबरेज फर्राटे भरती वयस्क चीता और अब एक माँ बनने तक की मुखी की यात्रा प्रेरणादायक रही है। यह यात्रा इस बात का संकेत है कि भारत में चीतों के संरक्षण और पुनर्वास के प्रयास सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। कठिन परिस्थितियों में जन्म और जीवन की शुरुआत चीता मुखी का जन्म 29 मार्च 2023 को नामीबिया से लाई गई ‘ज्वाला’ की कोख से हुआ था। वह चार शावकों के समूह में एकमात्र जीवित बची थी। भीषण गर्मी के कारण उसके अन्य तीन भाई-बहन जीवित नहीं रह सके। प्रारंभिक परिस्थितियाँ चुनौतीपूर्ण थीं, लेकिन कूनो नेशनल पार्क के पशु चिकित्सकों और वन्य-जीव विशेषज्ञों की सतत निगरानी और देखभाल से मुखी आज पूर्णतः स्वस्थ है। विशेष देखभाल में हुआ पालन-पोषण जन्म के साथ ही तीन शावकों की मृत्यु के सदमें में डूबी माँ ज्वाला ने मुखी को भी अस्वीकार कर दिया था। वन विभाग और कूनो के पशु चिकित्सकों ने मुखी का विशेष देखभाल के साथ पालन-पोषण किया। उसे भारतीय जलवायु के अनुकूल बनाने के लिए वैज्ञानिक तरीकों से प्रशिक्षित और संरक्षित किया गया। समर्पित और समन्वित प्रयासों का परिणाम यह रहा कि मुखी स्वस्थ रूप से विकसित होकर एक ताकतवर और आत्मनिर्भर चीता बन सकी। दूसरी पीढ़ी के चीतों का जन्म नवंबर 2025 में मात्र 33 महीने की आयु में मुखी ने पाँच स्वस्थ शावकों को जन्म देकर इतिहास रच दिया। यह पहला अवसर था जब भारत में जन्मे किसी चीते ने स्वयं शावकों को जन्म दिया। इसके साथ ही भारतीय भूमि पर चीतों की दूसरी पीढ़ी का आगमन हुआ, जिसने मध्यप्रदेश में ‘चीता परियोजना’ की सफलता का परचम ग्लोबल वन्य-जीव संरक्षण जगत में लहरा दिया। चीता परियोजना की सफलता का प्रतीक तीन वर्ष की आयु पूर्ण कर चुकी मुखी पूरी तरह विकसित और स्वस्थ है और अपने प्राकृतिक आवास में सफलतापूर्वक अपने शावकों के साथ फर्राटे भर रही है। यह उपलब्धि सिद्ध कर रही है कि कूनो नेशनल पार्क का पर्यावरण और वन्य जीव प्रबंधन प्रवासी चीतों के प्राकृतिक जीवन चक्र के लिए अनुकूल सिद्ध हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार वन्य-जीव संरक्षण के क्षेत्र में वैज्ञानिक प्रबंधन और नवाचार को बढ़ावा दे रही है। मुखी की सफलता न केवल कूनो नेशनल पार्क बल्कि पूरे देश के लिए वन्य-जीव संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गई है। बढ़ती संख्या से सफल सिद्ध हो रहा चीता संरक्षण अभियान कूनो में भारत में जन्मी पहली चीता ‘मुखी’ की सफलता और उसके पाँच शावकों के जन्म के बाद कूनो तथा गांधी सागर क्षेत्र में चीतों की कुल संख्या 32 तक पहुँच चुकी है। यह उपलब्धि भारत में चीतों के सफल पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत है। गांधी सागर में पुनर्वास की दिशा में कदम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गांधी सागर अभयारण्य को चीतों के लिए अनुकूल आवास के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। उन्होंने वहाँ ‘सॉफ्ट रिलीज बोमा’ का भूमि-पूजन कर नई साइट पर चीतों को बसाने की प्रक्रिया को गति प्रदान की है, जिससे भविष्य में चीतों के लिए अतिरिक्त सुरक्षित आवास उपलब्ध होगा। अंतर्राज्यीय सहयोग से संरक्षण परियोजना को मिला बल चीता संरक्षण को और सुदृढ़ बनाने के लिए मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच संयुक्त चीता संरक्षण परिसर विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। यह पहल क्षेत्रीय स्तर पर वन्य-जीव संरक्षण को नया आयाम प्रदान करेगी। ईको-टूरिज्म और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा चीतों की बढ़ती संख्या के कारण कूनो और चंबल क्षेत्र में ईको-टूरिज्म की संभावनाएँ भी तेजी से बढ़ रही हैं। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है। तकनीकी निगरानी से सुनिश्चित हो रही सुरक्षा चीतों की सुरक्षा और गतिविधियों की निगरानी के लिए रेडियो ट्रैकिंग, ड्रोन और फील्ड टीमों की मदद से सतत निगरानी की जा रही है। इससे चीतों की सुरक्षा के साथ उनके व्यवहार और आवास के अनुकूलन का वैज्ञानिक अध्ययन भी संभव हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कूनो नेशनल पार्क की कूनो नदी में घड़ियाल और कछुओं को छोड़कर चंबल अंचल को पर्यटन और जैव-विविधता के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित करने पर भी जोर दिया है। मुखी का तीसरा जन्म-दिवस केवल एक वन्य-जीव की उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत में चीतों की वापसी की ऐतिहासिक की यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। इससे सिद्ध हो रहा है कि समर्पित प्रयासों और दूरदर्शी नेतृत्व के साथ वन्य-जीव संरक्षण के क्षेत्र में प्रदेश नई सफलताएँ हासिल कर रहा है।  

राजस्थान में बेटियों को सशक्त बनाने की पहल, 20 करोड़ से बनेगा गर्ल्स सैनिक स्कूल

अजमेर. अजमेर के शैक्षिक इतिहास में जल्द नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। हाथीखेड़ा क्षेत्र में 30 एकड़ क्षेत्र में 20 करोड़ रुपए की लागत से बालिका सैनिक स्कूल बनेगा। इसके वर्क ऑर्डर शीघ्र जारी होंगे। इसके साथ ही सुंदर विलास स्थित मॉडल बालिका स्कूल को सावित्री बालिका प्राथमिक विद्यालय भवन में शिफ्ट किया जाएगा। ऐसे में करीब 300 छात्राओं को अन्य स्कूलों में शिफ्ट होने की समस्या भी समाप्त हो जाएगी। अजमेर उत्तर क्षेत्र की स्कूलों में डीएमएफटी फंड से 5 करोड़ रुपए के विकास कार्य करवाए जाएंगे। इससे क्षेत्र में शैक्षिक आधारभूत सुविधाओं को मजबूती मिलेगी। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने शनिवार को सर्किट हाउस में अजमेर में शिक्षा विभाग से संबंधित अधिकारियों की बैठक ली। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से हाथीखेड़ा क्षेत्र में बनने वाले बालिका सैनिक स्कूल की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने जयपुर में अधिकारियों को फोन कर वर्क ऑर्डर अप्रेल में जारी करने के निर्देश दिए। बालिका सैनिक स्कूल करीब 20 एकड़ जमीन पर बनने जा रहा है। इसके निर्माण पर करीब 20 करोड़ रुपए की लागत आएगी। इस परियोजना से बालिकाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ अनुशासनात्मक माहौल भी मिलेगा। छात्राओं को बेहतर वातावरण मिलेगा देवनानी ने शहर में बालिका शिक्षा की एक बड़ी समस्या का समाधान भी किया। उन्होंने सुंदर विलास स्थित मॉडल बालिका सीनियर सेकेंडरी स्कूल के भवन संबंधी समस्या पर चर्चा करते हुए इसे सावित्री बालिका प्राथमिक विद्यालय के भवन में संचालित करने के निर्देश दिए। इससे छात्राओं और स्टाफ को दूसरे स्कूलों में मर्ज नहीं करना पड़ेगा। अधिकारियों ने बताया कि प्राथमिक विद्यालय भवन में पर्याप्त कक्षा कक्ष हैं। सेफ्टी ऑडिट भी करवा ली गई है। जल्द ही इसकी मरम्मत व रंग-रोगन करवा कर बालिकाओं के लिए संचालित करवा दिया जाएगा। इससे छात्राओं को बेहतर वातावरण मिलेगा। देवनानी ने अधिकारियों से शहर में जीर्ण-शीर्ण विद्यालयों व कक्षों के बारे में विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने को कहा। उन्होंने कहा कि बारिश के समय किसी तरह की दुर्घटना न हो, इसके लिए जर्जर भवनों की मरम्मत कराई जाए। पीडब्ल्यूडी भी इस दिशा में काम करे। बच्चों को किसी तरह के खतरे में नहीं पढ़ाया जाना चाहिए। सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश भी दिए गए। विकास कार्यों की जानकारी भी ली उन्होंने शिक्षा विभाग और अजमेर विकास प्राधिकरण के अधिकारियों से डीएमएफटी फंड से स्कूलों में होने वाले विकास कार्यों की जानकारी भी ली। उन्होंने कहा कि 5 करोड़ रुपए से होने वाले ये विकास कार्य जल्द शुरू करवाए जाएं ताकि विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल सके। देवनानी ने विधायक कोष से स्कूलों में होने वाले कामों की भी समीक्षा की। कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश भी दिए गए। विधानसभा अध्यक्ष ने अधिकारियों से स्कूलों के सेकेंडरी बोर्ड परीक्षा परिणाम की भी जानकारी ली। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में अधिक विद्यार्थी 75 प्रतिशत से अधिक अंक लाएं। स्कूल स्टाफ का मूल्यांकन भी इसी आधार पर हो। उन्होंने निर्देश दिए कि शिक्षा विभाग नामांकन बढ़ाए। कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए। आंगनबाड़ी के स्कूल जाने लायक बच्चों का नामांकन किया जाए। शिक्षक स्कूल समय के अतिरिक्त क्षेत्र में संपर्क कर बच्चों को शिक्षा से जोड़ें। इसी तरह अन्य विषयों पर भी चर्चा की गई। बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी दर्शना शर्मा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

शरीर की साधना का अद्भुत खेल है बॉडी बिल्डिंग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि बॉडी बिल्डिंग शरीर की साधना का अद्भुत खेल है। यह साधना संगमरमर की मूर्तियों पर रेखा उकेरने जैसा कठिन कार्य है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेलों को नई ऊंचाइयां मिल रही हैं और नई शिक्षा नीति में भी खेलों को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंडियन बॉडी बिल्डर फेडरेशन को 5 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की। साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय खिलाड़ी और पद्मसे सम्मानित प्रेमचंद डिगरा का सम्मान भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को इंदौर के बॉस्केटबाल कॉम्पलेक्स में 17वीं सीनियर मेन्स-विमेंस नेशनल बॉडी बिल्डिंग चैंपियनशिप के भव्य आयोजन को संबोधत कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दो दिवसीय बॉडी बिल्डिंग चैंपियनशिप-2026 के विजेताओं को सम्मानित किया और बॉडी बिल्डिंग में सहभागिता करने वाले खिलाड़ियों की प्रतिभा की सराहना की। प्रतियोगिता इंडियन बॉडी बिल्डर फेडरेशन, मुंबई के तत्वावधान में राज्य शरीर सौष्ठव संस्था द्वारा आयोजित की गई, जिसमें देश भर से आए खिलाड़ियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने प्रतियोगिता के फाइनल राउंड में पंजाब के टोनू कुमार, केरलम के रियाज टीके, कर्नाटक के प्रशांत कानूकर, उत्तराखंड के पंकज सिंह बिष्ट और तेलंगाना के हरीश वालूगुंडा सहित पांच खिलाड़ियों ने बॉडी बिल्डिंग की सात अनिवार्य मुद्राओं का उत्साहवर्द्धन किया। कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, विधायक रमेश मेंदोला, मधु वर्मा, महेंद्र हार्डिया, गोलू शुक्ला, श्रीमती मालिनी गौड़, इंदौर सम्भागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह,कलेक्टर शिवम वर्मा, नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल सहित जनप्रतिनिधि एवं अन्य राज्यों से आए खिलाड़ी एवं खेल प्रेमी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव वाराणसी में 31 मार्च को रखेंगे मध्यप्रदेश का ओडीओपी मॉडल

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व और संकल्प से मध्यप्रदेश में ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ओडीओपी) को एक प्रभावी आर्थिक मॉडल के रूप में विकसित किया गया है, जो स्थानीय उत्पादों को पहचान से आगे बढ़ाकर उन्हें बाजार, निर्यात और रोजगार से जोड़ रहा है। इसी सशक्त और परिणामोन्मुख मॉडल को वाराणसी में 31 मार्च को आयोजित सहयोग सम्मेलन में साझा किया जयेगा और यूपी के नवाचारों से अवगत होंगे। ओडीओपी से स्थानीय उत्पादकों के आर्थिक सशक्तिकरण का मॉडल ओडीओपी के माध्यम से प्रत्येक जिले की विशिष्टता को चिन्हित कर उसे उत्पादन, प्रोसेसिंग, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और बाजार उपलब्धता से जोड़ा गया है। मध्यप्रदेश में यह पहल केवल पारंपरिक उत्पादों के संरक्षण तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसे एक समग्र वैल्यू चेन के रूप में विकसित किया गया है, जिससे कारीगरों, किसानों और सूक्ष्म उद्यमियों को स्थायी आर्थिक अवसर प्राप्त हो रहे हैं। सहयोग सम्मेलन में ओडीओपी से स्थानीय उत्पादकों और कारीगरों के आर्थिक सशक्तिकरण का मॉडल साझा किया जायेगा। प्रदेश के हर जिले की विशिष्टता को मिला आर्थिक विस्तार श्योपुर का अमरूद, मुरैना-भिंड की सरसों, ग्वालियर का सैंडस्टोन, अशोकनगर की चंदेरी हैंडलूम, रतलाम का नमकीन, उज्जैन का बाटिक प्रिंट, धार का बाघ प्रिंट, झाबुआ का कड़कनाथ, बुरहानपुर की जरी-जरदोजी, सीहोर का बासमती, बैतूल का सागौन, बालाघाट का चिन्नौर चावल, मंडला-डिंडोरी का कोदो-कुटकी, सतना का टमाटर, शहडोल की हल्दी जैसे विविध उत्पादों को ODOP के अंतर्गत संगठित कर बाजार से जोड़ा गया है। यह व्यापकता यह दर्शाती है कि प्रदेश के हर हिस्से की आर्थिक क्षमता को व्यवस्थित रूप से विकसित किया जा रहा है। मध्यप्रदेश के ओडीओपी को सिल्वर अवॉर्ड से राष्ट्रीय स्तर पर मिली मान्यता मध्यप्रदेश के इन समग्र प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है। मध्यप्रेश के ओडीओपी मॉडल को अवॉर्ड-2024 में सिल्वर अवॉर्ड प्राप्त हुआ। यह उपलब्धि प्रदेश के कारीगरों, किसानों और उद्यमियों की दक्षता और सरकार द्वारा विकसित सुदृढ़ इकोसिस्टम का परिणाम है। निर्यात, कौशल और बाजार को जोड़ता एकीकृत इकोसिस्टम प्रदेश में ओडीओपी को निर्यात संवर्धन, कौशल विकास और उद्यमिता से जोड़ते हुए कार्यशालाओं, प्रदर्शनियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से बाजार उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। ब्रांडिंग, पैकेजिंग, जीआई टैगिंग और ई-कॉमर्स के माध्यम से उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाया जा रहा है, जिससे स्थानीय उत्पाद वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं। एमपी यूपी सम्मेलन से उभरेंगे नए अवसर और समन्वय एमपी-यूपी सम्मेलन में दोनों राज्यों के मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और नीति-निर्माताओं की सहभागिता के साथ ओडीओपी के प्रभावी क्रियान्वयन और भविष्य की दिशा पर केंद्रित रहेगा। इस मंच के माध्यम से मध्यप्रदेश अपने अनुभवों को साझा करते हुए यह प्रदर्शित करेगा कि ओडीओपी को किस प्रकार व्यवहारिक, रोजगारोन्मुख और निर्यात-आधारित मॉडल के रूप में लागू किया जा सकता है। ‘लोकल टू ग्लोबल’ दृष्टि को मिलेगा ठोस विस्तार मध्यप्रदेश-उत्तर प्रदेश सम्मेलन से ओडीपी उत्पादों के लिए नए बाजार अवसर विकसित होंगे, निर्यात को गति मिलेगी और कारीगरों तथा उद्यमियों को व्यापक प्लेटफॉर्म प्राप्त होगा। दोनों राज्यों के बीच सहयोग और सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान सुदृढ़ होगा, जिससे ओडीओपी को राष्ट्रीय स्तर पर एक सशक्त आर्थिक मॉडल के रूप में और मजबूती मिलेगी। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में ‘एक जिला एक उत्पाद’ के अंतर्गत प्रदेश के 50 से अधिक जिलों की विशिष्ट उत्पादकता को चिन्हित कर उसे एक सशक्त आर्थिक ढांचे से जोड़ा गया है। श्योपुर का अमरूद, मुरैना-भिंड की सरसों, ग्वालियर का सैंडस्टोन टाइल्स, अशोकनगर की चंदेरी हैंडलूम, उज्जैन का बाटिक प्रिंट, धार का बाघ प्रिंट, रतलाम का नमकीन, झाबुआ का कड़कनाथ, बुरहानपुर की जरी-जरदोजी, बड़वानी का केला, खरगोन की मिर्च, इंदौर का आलू, सागर के कृषि उपकरण, मंदसौर का लहसुन, नीमच का धनिया, आगर मालवा-राजगढ़-छिंदवाड़ा का संतरा, टीकमगढ़-निवाड़ी का अदरक, देवास-हरदा का बांस, बैतूल का सागौन, बालाघाट का चिन्नौर चावल, नरसिंहपुर की तुअर दाल, सिवनी का सीताफल, सीधी का कालीन, सतना का टमाटर, शहडोल की हल्दी तथा मंडला, डिंडोरी, सिंगरौली और अनूपपुर का कोदो-कुटकी जैसे विविध उत्पादों को वैल्यू चेन आधारित दृष्टिकोण के साथ विकसित किया जा रहा है। उत्पादन से लेकर ब्रांडिंग, पैकेजिंग और बाजार उपलब्धता तक एकीकृत समर्थन के माध्यम से यह पहल स्थानीय कारीगरों, किसानों और उद्यमियों को स्थायी आय, बेहतर बाजार और निर्यात के अवसर प्रदान कर रही है, जिससे प्रदेश में संतुलित और समावेशी आर्थिक विकास को नई गति मिल रही है।

जालंधर में पेट्रोल डीजल की सप्लाई सामान्य और एडीसी अमनिंदर कौर की अपील

पंजाब खाड़ी देश देश में हो रहे युद्ध के कारण देश भर में लगातार अफवाह उड़ती जा रही है। इसका असर पंजाब में भी देखने को मिल रहा है। पंजाब में प्रशासन के अनुसार अभी गैस और पेट्रोल पर्याप्त मात्रा में है, लेकिन लोगों ने यह अफवाह को और हवा दे दी है कि अब गैस के साथ पेट्रोल और डीजल की भी कमी होने वाली है।यही कारण है कि लोग इसके स्टोरेज में लगे है और इसका खामियाजा अन्य को झेलना पड़ रहा है। सप्लाई पूरी तरह सामान्य अब पंजाब में हालात बदलते पैट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कमी को लेकर फैल रही अफवाहों के बीच प्रशासन ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट करते हुए कहा है कि सप्लाई पूरी तरह सामान्य है और किसी प्रकार की कोई किल्लत नहीं है। अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (जनरल) अमनिंदर कौर ने मीडिया को जानकारी दी है कि जालंधर जिले के लगभग 280 पैट्रोल पंपों और सभी गैस एजैंसियों पर पर्याप्त मात्रा में सप्लाई जारी है।  स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में उन्होंने कहा कि प्रशासनिक टीमें लगातार फील्ड में सक्रिय हैं। पेट्रोल पंपों व गैस एजैंसियों के साथ निरंतर संपर्क बनाए हुए हैं। स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और कहीं भी सप्लाई बाधित नहीं हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हाल के दिनों में पेट्रोल पंपों पर लगी लंबी कतारें किसी वास्तविक कमी के कारण नहीं, बल्कि अफवाहों के चलते लोगों द्वारा घबराहट में की गई अतिरिक्त खरीदारी का परिणाम थीं। शिक्षा और स्वास्थ्य संस्थानों को प्राथमिकता के आधार पर गैस की आपूर्ति दी जा रही अमनिंदर कौर ने बताया कि जिले में रोजाना लगभग 460 किलोलीटर पेट्रोल और 600 किलोलीटर डीजल की खपत होती है, और इसके अनुसार पर्याप्त मात्रा में सप्लाई सुनिश्चित की जा रही है। इसके साथ ही सरकार के निर्देशों के अनुसार आवश्यक सेवाओं के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य संस्थानों को प्राथमिकता के आधार पर गैस की आपूर्ति दी जा रही है, वहीं होटल, रैस्टोरेंट और शादी समारोहों के लिए भी गैस की उपलब्धता बनाए रखी गई है। उन्होंने जिला वासियों से अपील की कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर विश्वास न करें और अनावश्यक रूप से पैट्रोल-डीजल या गैस का भंडारण न करें। ऐसा करने से तुरंत प्रभाव से कमी पैदा होती है और आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। प्रशासन ने पेट्रोल पंप संचालकों और एसोसिएशनों को भी निर्देश दिए हैं कि पेट्रोल और डीजल केवल वाहनों में ही भरा जाए, न कि बोतलों या अन्य कंटेनरों में। इसके अलावा अधिकारियों द्वारा छुट्टियों के दिनों में भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है और सभी एजैंसियों से नियमित संपर्क बनाए रखा जा रहा है। कमेटी की है गठित इस पूरे मामले की निगरानी के लिए ए.डी.सी. (जनरल) की अध्यक्षता में उच्च अधिकारियों की एक जिला स्तरीय कमेटी गठित की जा चुकी है जोकि इस पूरे घटनाक्रम पर निगरानी रख रही है। यह कमेटी पैट्रोल-डीजल व गैस की सप्लाई, वितरण व्यवस्था और एजैंसियों की गतिविधियों पर नजर रख रही है, ताकि उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि व्हाट्सएप हैल्पलाइन नंबर 9646-222-555 जारी किया गया है, ताकि गैस सिलैंडरों की सुचारू सप्लाई सुनिश्चित बनाने के साथ-साथ कालाबाजारी पर निगरानी रखी जा सके।  

खराब मौसम और गीले मैदान ने रोकी चांडिल प्रखंड के अभ्यर्थियों की राह बदली गई भर्ती की तारीख

सरायकेला झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले में बारिश के चलते होमगार्ड बहाली की प्रक्रिया पर असर पड़ा है. गीले मैदान और खराब मौसम के कारण निर्धारित तिथि पर होने वाली दौड़ को रद्द कर दिया गया है. अब अभ्यर्थियों के लिए यह दौड़ 8 अप्रैल को आयोजित की जाएगी, जिसमें वे शामिल होकर अपना प्रदर्शन करेंगे. कब होने वाली थी प्रक्रिया सरायकेला के बिरसा स्टेडियम में 28 मार्च 2026 (शनिवार) को होने वाली होमगार्ड बहाली प्रक्रिया बारिश के कारण प्रभावित हो गई. देर रात हुई भारी बारिश से मैदान पूरी तरह गीला हो गया, जिसके चलते अभ्यर्थियों की दौड़ कराना संभव नहीं हो सका. चांडिल प्रखंड के अभ्यर्थी नहीं दे सके दौड़ जिला जनसंपर्क पदाधिकारी अविनाश कुमार ने बताया कि चांडिल प्रखंड के युवाओं की शारीरिक परीक्षा के तहत दौड़ आयोजित होनी थी, लेकिन खराब मौसम के कारण इसे स्थगित करना पड़ा. अब 8 अप्रैल को होगी दौड़ अधिकारियों ने बताया है कि अब यह दौड़ 8 अप्रैल को आयोजित की जाएगी. इस दिन सभी अभ्यर्थी बहाली प्रक्रिया में हिस्सा लेंगे और निर्धारित नियमों के अनुसार चयन प्रक्रिया पूरी की जाएगी. अभ्यर्थियों के लिए बेहतर इंतजाम था भर्ती प्रक्रिया के दौरान अभ्यर्थियों की सुविधा और सुरक्षा का विशेष ख्याल रखा गया. उनके लिए पेयजल, शौचालय, पंडाल सहित सभी जरूरी व्यवस्था उपलब्ध कराई गई थी. मौसम का ध्यान में रखते हुए छाया और बैठने की जगह भी थी जिससे किसी भी अभ्यर्थी को असुविधा न हो.