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बांधवगढ़ में बढ़ रहा गौर का कुनबा, कान्हा में वन भैंसा पुनर्स्थापना से मजबूत होगा पारिस्थितिकी तंत्र

भोपाल  कहानी बदलाव की मध्यप्रदेश के बांधवगढ़ एवं कान्हा टाइगर रिजर्व में बड़े शाकाहारी वन्यजीवों के संरक्षण और पुनर्स्थापना के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं। बांधवगढ़ में गौर (इंडियन बायसन) की संख्या बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, वहीं कान्हा टाइगर रिजर्व में वन भैंसा (वाइल्ड बफेलो) को पुनः बसाने की प्रक्रिया जारी है। गौर और वन भैंसा देखने में कुछ समान प्रतीत हो सकते हैं, लेकिन दोनों अलग-अलग प्रजातियों से संबंधित हैं और इनके आवास तथा खान-पान में भी अंतर है। बांधवगढ़ में पुनः स्थापित किया गया गौर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक  अनुपम सहाय के अनुसार गौर, जिसे भारतीय बायसन भी कहा जाता है, एशिया का सबसे बड़ा जंगली गौवंश है। बांधवगढ़ में गौर वर्ष 1998 में विलुप्त हो गया था। इसके बाद वर्ष 2011-12 में कान्हा से 50 गौर लाकर बांधवगढ़ में पुनः स्थापित किए गए। इनकी संख्या बढ़कर लगभग 170 तक पहुंची। आनुवंशिक विविधता बनाए रखने के उद्देश्य से सतपुड़ा से भी गौर लाने की योजना बनाई गई। फरवरी 2025 में 23 गौर, जिनमें 18 मादा और 5 नर शामिल थे, बांधवगढ़ लाए गए। इसके बाद जनवरी 2026 में दूसरे चरण में 27 गौर, जिनमें 22 मादा और 5 नर शामिल थे, लाए गए। इस प्रकार 50 नए गौर लाने का लक्ष्य पूरा किया गया। इन वन्यजीवों की निगरानी के लिए वीएचएफ कॉलर, हॉर्न स्लीव और ईयर टैग लगाए गए हैं। वर्तमान में बांधवगढ़ लैंडस्केप में गौर की संख्या लगभग 220 से 240 के बीच बताई गई है। कान्हा में वन भैंसा पुनर्स्थापना की दिशा में प्रयास कान्हा टाइगर रिजर्व में वन भैंसा यानी वाइल्ड बफेलो को पुनः बसाने का कार्य किया जा रहा है। कान्हा टाइगर रिजर्व के उप संचालक  पी.के. वर्मा के अनुसार तीन वर्ष में 50 वन भैंसे लाने की योजना है। प्रथम चरण में 28 अप्रैल 2026 को वन भैंसों की पहली खेप लाई गई। अब तक दो खेप में चार-चार की संख्या में कुल 8 वन भैंसे कान्हा पहुंच चुके हैं। वन भैंसों को प्रारंभिक अवधि में बाड़े में रखा जाएगा। इनकी संख्या बढ़ने के बाद आवश्यकता के अनुसार धीरे-धीरे इन्हें प्राकृतिक रहवास क्षेत्रों में छोड़ा जाएगा। कुछ वन भैंसों को बाहर और कुछ को निर्धारित क्षेत्र में रखा जाएगा, ताकि इनकी संख्या और आबादी को व्यवस्थित रूप से बढ़ाया जा सके। गौर और वन भैंसा में अंतर गौर गौवंश से संबंधित है, जबकि वन भैंसा भैंस वंश से संबंधित है। गौर की पहचान उसके विशाल शरीर, कंधे पर उभरे कूबड़, पीले-सफेद निचले पैरों और घुमावदार सींगों से की जा सकती है। वहीं वन भैंसा अपेक्षाकृत छोटा होता है और उसके कंधे पर गौर की तरह स्पष्ट कूबड़ नहीं होता। वन भैंसा सामान्यतः गीले घास के मैदानों, दलदली क्षेत्रों और जल स्रोतों के आसपास पाया जाता है। गौर घास के साथ-साथ जंगल में उपलब्ध अन्य वनस्पतियों को भी खाता है, जबकि वन भैंसा कठोर और ऊंची घास को भी खा सकता है। जल एवं नमी वाले क्षेत्रों में उगने वाली ऊंची घास को नियंत्रित करने में वन भैंसे की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र के प्राकृतिक इंजीनियर गौर और वन भैंसा जैसे बड़े शाकाहारी वन्यजीव जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके द्वारा घास और वनस्पतियों के सेवन से अत्यधिक ऊंची घास नियंत्रित होती है तथा नए कोमल पत्ते और घास विकसित होने का अवसर मिलता है। इससे चीतल, सांभर सहित अन्य शाकाहारी वन्यजीवों को भोजन उपलब्ध होता है। इस प्रकार बड़े शाकाहारी वन्यजीव वन क्षेत्र में वनस्पति संरचना को संतुलित रखने और अन्य वन्यजीवों के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करने में योगदान देते हैं। यही कारण है कि गौर और वन भैंसे जैसे वन्यजीवों को जंगल के प्राकृतिक इंजीनियर भी कहा जाता है। इनके संरक्षण और पुनर्स्थापना से मध्यप्रदेश के वन क्षेत्रों में जैव विविधता एवं पारिस्थितिकी तंत्र को और अधिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।  

सेवा संकल्प अभियान के तहत अरपा उद्गम स्थल पर नदी घाट स्वच्छता और जल संरक्षण का संदेश

रायपुर सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आज जल संसाधन विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग एवं नगरीय प्रशासन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में नगर पालिका परिषद पेण्ड्रा में अरपा उद्गम स्थल के समीप नदी घाट स्वच्छता अभियान एवं नगरीय जल स्रोत जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य जल स्रोतों की स्वच्छता, संरक्षण एवं जल संवर्धन के प्रति आमजन में जागरूकता बढ़ाना तथा नागरिकों को जल स्रोतों को स्वच्छ रखने के लिए प्रेरित करना रहा। अरपा नदी छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण नदियों में शामिल है और इसका उद्गम क्षेत्र गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की प्राकृतिक एवं पर्यावरणीय पहचान से जुड़ा हुआ है। अरपा उद्गम स्थल के समीप आयोजित स्वच्छता अभियान के माध्यम से जल स्रोतों की स्वच्छता को लेकर सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं स्थानीय नागरिकों ने सहभागिता करते हुए नदी घाट और आसपास के क्षेत्र की स्वच्छता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। कार्यक्रम में मरवाही विधानसभा क्षेत्र के विधायक  प्रणव कुमार मरपची, जिला पंचायत अध्यक्ष सु समीरा पैंकरा, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  राजा उपेन्द्र बहादुर, नगर पालिका परिषद पेण्ड्रा के उपाध्यक्ष  शरद गुप्ता,  लालजी यादव,  राकेश चतुर्वेदी सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। स्वच्छ जल स्रोत स्वस्थ समाज का आधार कार्यक्रम के दौरान जल स्रोतों को स्वच्छ और सुरक्षित रखने के महत्व पर जोर दिया गया। उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने कहा कि नदी, तालाब और अन्य जल स्रोत केवल पानी के स्रोत नहीं हैं, बल्कि पर्यावरण, जैव विविधता और मानव जीवन के लिए महत्वपूर्ण आधार हैं। इनके संरक्षण के लिए शासन के प्रयासों के साथ-साथ आमजन की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। नदी घाट की स्वच्छता के माध्यम से लोगों को यह संदेश दिया गया कि जल स्रोतों में कचरा न डालें और उनके आसपास स्वच्छता बनाए रखें। स्थानीय स्तर पर स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ने से जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने में मदद मिलेगी। जल संरक्षण के साथ जल संवर्धन पर भी जोर कार्यक्रम में जल संरक्षण के साथ जल संवर्धन की आवश्यकता पर भी चर्चा की गई। वर्षा जल के संरक्षण, जल के विवेकपूर्ण उपयोग और पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण को लेकर नागरिकों को जागरूक किया गया। उपस्थित लोगों को दैनिक जीवन में पानी की बचत करने तथा उपलब्ध जल संसाधनों का जिम्मेदारी के साथ उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया। सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। अरपा उद्गम स्थल के समीप आयोजित यह कार्यक्रम भी इसी भावना को मजबूत करता है कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण केवल शासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। अरपा के संरक्षण से जुड़ा जनभागीदारी का संदेश अरपा नदी क्षेत्र की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी हुई है। इसके उद्गम क्षेत्र की स्वच्छता और संरक्षण का महत्व और भी बढ़ जाता है। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों की सहभागिता से स्थानीय नागरिकों को जल स्रोतों के संरक्षण के लिए आगे आने का संदेश मिला। कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को स्वच्छता को अपनी दैनिक आदतों में शामिल करने, नदी एवं अन्य जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने तथा जल संरक्षण के प्रयासों में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित किया गया। आयोजन ने सेवा, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की भावना को मजबूत करते हुए सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश दिया।

निर्माण कार्यो की धीमी प्रगति पर उप मुख्यमंत्री एवं पर्यटन मंत्री ने ठेकेदारों और निर्माण एजेंसियों के प्रति जताई नाराजगी

रायपुर स्वदेश दर्शन योजना के तहत लगभग 146 करोड़ रुपए की लागत से विकसित किए जा रहे भोरमदेव कॉरिडोर के सभी प्रोजेक्ट की प्रगति की आज उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक  विजय शर्मा और पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने कबीरधाम के जिला पंचायत सभाकक्ष में समीक्षा की। समीक्षा के दौरान कई निर्माण कार्य अपेक्षा के अनुरूप गति से नहीं चलने पर दोनों मंत्रियों ने संबंधित ठेकेदारों और निर्माण एजेंसियों के प्रति कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने हर 15 दिन के लिए स्पष्ट कार्ययोजना तैयार कर निर्माण कार्यों में तेजी लाने और निर्धारित समय-सीमा में ठोस प्रगति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।  उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने कहा कि भोरमदेव कॉरिडोर के निर्माण कार्यों में अपेक्षित गति नहीं होने पर अब जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि हर 15 दिन में कार्य की प्रगति निर्माण स्थल पर दिखाई देनी चाहिए। निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप प्रगति नहीं होने पर जिम्मेदार ठेकेदारों को कार्य से पृथक करने के साथ अनुबंध की शर्तों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने कहा कि भोरमदेव कॉरिडोर का निर्माण महत्वपूर्ण और दीर्घकालिक परियोजना है। ठेकेदार एजेंसियों की लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। जिन कार्यों में अपेक्षित प्रगति नहीं होगी, वहां संबंधित ठेकेदार को कार्य से पृथक कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर अनुबंध की शर्तों के तहत ब्लैक लिस्ट सहित अन्य कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने सभी प्रोजेक्ट के लिए 15-15 दिन की स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।  उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने कहा कि कार्ययोजना केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि निर्धारित अवधि के बाद निर्माण स्थल पर उसका परिणाम स्पष्ट रूप से दिखाई देना चाहिए। पर्याप्त मशीनरी, मानव संसाधन और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराकर निर्माण कार्यों में तेजी लाई जाए। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि भोरमदेव क्षेत्र का विकास आने वाले कई वर्षों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। इसलिए प्रत्येक निर्माण कार्य मजबूत, टिकाऊ और निर्धारित गुणवत्ता एवं तकनीकी मानकों के अनुरूप होना चाहिए। निर्माण की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। कार्य में किसी तरह की तकनीकी अथवा अन्य समस्या आने पर संबंधित अधिकारियों को तत्काल इसकी जानकारी दें, ताकि समय रहते उसका समाधान किया जा सके। इसलिए सभी संबंधित एजेंसियां पूरी गंभीरता और आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। आगामी भोरमदेव महोत्सव तक निर्माण कार्यों में स्पष्ट और दिखाई देने वाली प्रगति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने पीएमसी, ठेकेदारों और भोरमदेव विकास समिति के बीच निरंतर समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए। साथ ही पीएमसी की भूमिका एवं जिम्मेदारियों की समीक्षा कर तकनीकी निगरानी को और प्रभावी बनाने को कहा। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने भी भोरमदेव कॉरिडोर के निर्माण कार्यों की धीमी प्रगति पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि कई कार्यों के कार्यादेश जारी हुए 8 से 09 माह हो चुके हैं, इसके बावजूद निर्माण कार्य अपेक्षा के अनुरूप गति से नहीं चल रहे हैं। मंत्री  अग्रवाल ने सभी ठेकेदारों को पूर्ण कार्ययोजना प्रस्तुत करने तथा प्रत्येक 15 दिन में किए जाने वाले कार्यों का लक्ष्य निर्धारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भोरमदेव महोत्सव से 10 दिन पहले तक निर्धारित कार्यों को पूरा करने की समय-सीमा तय की जाए। प्रत्येक 15 दिन में कार्यों की प्रगति की समीक्षा होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप कार्य नहीं करने वाले ठेकेदार को कार्य से पृथक करने तथा अनुबंध की शर्तों के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पर्यटन मंत्री ने पीएमसी, भोरमदेव विकास समिति और संबंधित विभागों के साथ ठेकेदारों की स्थानीय टीम के नियमित समन्वय के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण स्थल पर ठेकेदार की ओर से ऐसा जिम्मेदार प्रतिनिधि अनिवार्य रूप से उपस्थित रहे, जो समिति एवं संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर ड्राइंग, डिजाइन और निर्माण से जुड़े विषयों पर तत्काल निर्णय ले सके। उन्होंने सिंचाई, लोक निर्माण विभाग सहित संबंधित अधिकारियों को नियमित रूप से निर्माण कार्यों का निरीक्षण करने और प्रगति की प्रभावी निगरानी करने के निर्देश दिए। पर्यटन मंत्री  अग्रवाल ने निर्देश दिए कि भोरमदेव कॉरिडोर के ड्राइंग एवं डिजाइन में भोरमदेव मंदिर की ऐतिहासिक वास्तुकला, स्वरूप और रंगत का विशेष ध्यान रखा जाए। नए निर्माण कार्य मंदिर की ऐतिहासिक पहचान के अनुरूप हों और उसके साथ सामंजस्य स्थापित करें।  अग्रवाल ने कहा कि भोरमदेव केवल कवर्धा की आस्था का विषय नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की आस्था और ऐतिहासिक पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल है। इसलिए सभी अधिकारी और संबंधित निर्माण एजेंसियां इसे सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूर्ण करें। बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष  ईश्वरी साहू, उपाध्यक्ष  कैलाश चंद्रवंशी, पुलिस प्राधिकरण के सदस्य  भगत पटेल, कलेक्टर मती तुलिका प्रजापति, पर्यटन विभाग के प्रबंध संचालक  सौमिल रंजन चौबे, पुलिस अधीक्षक  जितेन्द्र यादव,  विदेशीराम धुर्वे,  संतोष पटेल,  लोकचंद साहू,  नंद वास सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी-उपस्थित थे।  भोरमदेव मार्ग और आसपास के क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने के निर्देश उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने भोरमदेव क्षेत्र में अतिक्रमण की स्थिति का चिन्हांकन कर सख्त कार्रवाई के साथ अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए। उन्होंने कवर्धा से भोरमदेव जाने वाले मुख्य मार्ग के दोनों ओर अतिक्रमण की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश तहसीलदार को दिए। उन्होंने कहा कि राजस्व एवं वन विभाग की भूमि का संयुक्त रूप से चिन्हांकन किया जाए और यदि कहीं अतिक्रमण पाया जाता है तो नियमानुसार उसे तत्काल हटाया जाए। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण मुक्त कराई गई उपयुक्त शासकीय भूमि का सुव्यवस्थित उपयोग पार्किंग सहित अन्य जनसुविधाओं के विकास के लिए किया जा सकता है। साथ ही पूरे मार्ग को व्यवस्थित और सुगम बनाने के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

तकनीक, नवाचार और सतत प्रशिक्षण से सशक्त होंगे प्रदेश के इंजीनियर : मंत्री सिंह

भोपाल  लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह ने रविवार को भोपाल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से आईआईटी मुम्बई में लोक निर्माण विभाग के 50 इंजीनियरों के लिए आयोजित ‘ट्रेनिंग से ट्रांसफॉर्मेशन’ वेबिनार का शुभारंभ किया। मंत्री  सिंह ने कहा कि विकसित भारत के संकल्प के साथ कदमताल करने के लिए नवाचार, आधुनिक तकनीक और सतत प्रशिक्षण को विभागीय कार्य-संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बनाना आवश्यक है। मंत्री  सिंह ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में सहयोग के लिए आईआईटी बॉम्बे के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने प्रो. टॉम मैथ्यूज,  वेदागिरि और प्रो. धर्मवीर सिंह सहित संस्थान के विशेषज्ञों को धन्यवाद देते हुए कहा कि इस साझेदारी से मध्यप्रदेश के इंजीनियरों को नवीन तकनीकों, आधुनिक निर्माण पद्धतियों और उत्कृष्ट कार्य प्रणालियों को समझने एवं अपनाने का महत्वपूर्ण अवसर मिला है। विकसित भारत के निर्माण में इंजीनियरों की महत्वपूर्ण भूमिका मंत्री  सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में मध्यप्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस यात्रा में इंजीनियरों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनके बिना देश के विकास और नवनिर्माण की कल्पना नहीं की जा सकती। केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है। प्रशिक्षण ही ज्ञान को व्यावहारिक दक्षता, कार्य की गुणवत्ता और बेहतर परिणामों में परिवर्तित करता है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के इंजीनियर प्रतिभा और क्षमता से समृद्ध हैं। उन्हें विश्व में तेजी से बदलती तकनीकों के अनुरूप समय-समय पर प्रशिक्षण देकर प्रदेश के अधोसंरचना विकास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। निरंतर सीखने, जिज्ञासा बनाए रखने और शोधपरक सोच अपनाने से प्रत्येक कार्य को अधिक दक्षता एवं उत्कृष्टता के साथ पूरा किया जा सकता है।  वर्ष 2026 के लिए विशेष प्रशिक्षण कैलेंडर तैयार मंत्री  सिंह ने बताया कि विभाग द्वारा वर्ष 2026 का विशेष प्रशिक्षण कैलेंडर तैयार किया गया है। इसके साथ ही कैपेसिटी बिल्डिंग फ्रेमवर्क और ट्रेनिंग नीड असेसमेंट भी बनाया गया है। लोक निर्माण विभाग की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार मध्यप्रदेश का यह कैपेसिटी बिल्डिंग फ्रेमवर्क देश में अपनी तरह का पहला प्रयास है। मंत्री  सिंह ने बताया कि विभाग ने आईआईटी बॉम्बे के साथ ही सीआरआरआई नई दिल्ली, आईएएचई और ईएससीआई हैदराबाद सहित देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ समझौते किए हैं। अलग-अलग प्रशिक्षण बैचों के माध्यम से लगभग 1,508 इंजीनियरों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। आईआईटी बॉम्बे में 100 इंजीनियरों को प्रशिक्षण देने का निर्धारित लक्ष्य भी वर्तमान बैच के प्रशिक्षण के साथ पूरा होने जा रहा है। आधुनिक निर्माण तकनीकों में भी लिया जाएगा आईआईटी बॉम्बे का सहयोग मंत्री  सिंह ने कहा कि आईआईटी बॉम्बे के साथ विभाग की साझेदारी केवल वर्तमान प्रशिक्षण कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहेगी। सड़क एवं पुलों के रखरखाव, कंक्रीट रोड एवं व्हाइट टॉपिंग, ब्रिज डिजाइन तथा भवन निर्माण में प्रीफैब्रिकेटेड और प्रीकास्ट तकनीक जैसे विषयों पर भी संस्थान का तकनीकी सहयोग लिया जाएगा। मंत्री  सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि आईआईटी बॉम्बे से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले इंजीनियर अपने ज्ञान और अनुभव का उपयोग प्रदेश की परियोजनाओं में करेंगे। इससे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, टिकाऊपन और समयबद्धता में सुधार होगा तथा मध्यप्रदेश के अधोसंरचना विकास को नई गति मिलेगी। अच्छा अभियंता संरचना, श्रेष्ठ अभियंता भविष्य का निर्माण करता है :  पोल सलाहकार  प्रशांत पोल ने कहा कि प्रशिक्षण की वास्तविक सफलता तभी है, जब उसका प्रभाव निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, समयबद्धता और स्थायित्व में दिखाई दे। उन्होंने अभियंताओं को ‘लर्न, अप्लाई, शेयर एंड स्टैंडर्डाइज’ का सूत्र देते हुए प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान को कार्यक्षेत्र में लागू करने और सहकर्मियों के साथ साझा करने का आह्वान किया।  पोल ने कहा कि सड़क केवल दो स्थानों को नहीं जोड़ती, बल्कि किसान को बाजार, विद्यार्थी को विद्यालय, रोगी को अस्पताल और उद्योग को उपभोक्ता से जोड़ती है। आज अभियंता टेक्नोलॉजी एवं प्रोजेक्ट मैनेजर, पर्यावरण नियोजक तथा सार्वजनिक संसाधनों के संरक्षक की भूमिका भी निभा रहे हैं। उन्होंने बिल्डिंग इन्फॉर्मेशन मॉडलिंग, डिजिटल ट्विन और डेटा एनालिटिक्स जैसी तकनीकों के उपयोग पर बल देते हुए कहा कि अभियंता गुणवत्ता, समय, लागत, सुरक्षा और स्थायित्व को ध्यान में रखकर कार्य करें। अच्छा अभियंता संरचना बनाता है, जबकि श्रेष्ठ अभियंता भविष्य का निर्माण करता है। प्रशिक्षण का अंतिम लक्ष्य जनकल्याण पर प्रभाव होना चाहिए : डॉ. तोमर सलाहकार डॉ. विक्रांत सिंह तोमर ने कहा कि लोक निर्माण मंत्री  सिंह के मार्गदर्शन में तैयार कैपेसिटी बिल्डिंग फ्रेमवर्क ने कम समय में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। तेजी से बदलती तकनीक के दौर में प्रासंगिक बने रहने के लिए निरंतर प्रशिक्षण आवश्यक है। प्रशिक्षण केवल सीखने तक सीमित न रहे, बल्कि ‘फील, लर्न, एक्ट और इम्पैक्ट’ के क्रम में धरातल पर जनकल्याणकारी परिणाम प्रस्तुत करे। डॉ. तोमर ने कहा कि कार्य की गुणवत्ता, दक्षता, सतत अध्ययन, पारदर्शिता, जवाबदेही और नवाचार से ही लोक निर्माण विभाग को वास्तविक अर्थों में ‘लोक कल्याण विभाग’ बनाया जा सकता है। अभियंताओं के निर्माण कार्य ही भविष्य में उनकी पहचान और योगदान की कहानी कहेंगे। उन्होंने सभी इंजीनियरों से प्रशिक्षण के ज्ञान को व्यवहार में उतारते हुए मध्यप्रदेश के लोक निर्माण विभाग को देश का सर्वश्रेष्ठ विभाग बनाने का आह्वान किया। दीर्घकालीन तकनीकी एवं शोध साझेदारी होगी मजबूत प्रो. टॉम मैथ्यूज ने कहा कि मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग की प्रशिक्षण के प्रति गंभीरता सराहनीय है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह कार्यक्रम आईआईटी मुम्बई और विभाग के बीच दीर्घकालीन तकनीकी एवं शोध साझेदारी को और मजबूत करेगा।  वेदागिरि ने बताया कि पांच दिवसीय प्रशिक्षण में निर्माण गुणवत्ता नियंत्रण और रखरखाव की आधुनिक पद्धतियों पर व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और टिकाऊ अधोसंरचना के लिए डिजाइन से लेकर निर्माण एवं रखरखाव तक आधुनिक तकनीक और सतत निगरानी आवश्यक है।  धर्मवीर सिंह ने कहा कि अधोसंरचना में निवेश के साथ अभियंताओं का कौशल विकास भी आवश्यक है। आईआईटी बॉम्बे और मध्यप्रदेश शासन की साझेदारी में आयोजित तीसरे प्रशिक्षण बैच का उद्देश्य कक्षा में प्राप्त ज्ञान को कार्यस्थल पर लागू कर ‘ट्रेनिंग से ट्रांसफॉर्मेशन’ की अवधारणा को साकार करना है।  

वन स्टॉप सेंटर की व्यवस्थाओं का राज्य महिला आयोग ने किया निरीक्षण

भोपाल  महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की रक्षा को लेकर मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग ने वन स्टॉप सेंटर की व्यवस्थाओं को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया है। आयोग की अध्यक्ष  रेखा यादव एवं सदस्य  साधना स्थापक ने भोपाल स्थित वन स्टॉप सेंटर का निरीक्षण कर संकटग्रस्त महिलाओं को उपलब्ध कराई जा रही काउंसलिंग, चिकित्सा, कानूनी सहायता, अस्थायी आश्रय एवं पुलिस सहायता सहित विभिन्न सेवाओं का जायजा लिया। संकटग्रस्त महिलाओं के साथ संवेदनशीलता सर्वोच्च प्राथमिकता : रेखा यादव राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष  रेखा यादव ने कहा कि संकट की स्थिति में वन स्टॉप सेंटर पहुंचने वाली प्रत्येक महिला को सुरक्षा के साथ-साथ सम्मान और भरोसे का वातावरण मिलना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देश दिए कि महिलाओं की समस्याओं को संवेदनशीलता से सुनते हुए उनके प्रकरणों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि प्रभावी काउंसलिंग, आवश्यक कानूनी एवं चिकित्सा सहायता तथा संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय से महिलाओं को समय पर राहत और न्याय उपलब्ध कराया जा सकता है।आयोग की सदस्य  साधना स्थापक ने कहा कि वन स्टॉप सेंटर की सेवाओं का उद्देश्य संकटग्रस्त महिलाओं को एक ही स्थान पर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना है। इसके लिए काउंसलिंग, चिकित्सा, कानूनी और पुलिस सहायता के बीच प्रभावी समन्वय बनाए रखना आवश्यक है। आयोग के पदाधिकारियों ने केंद्र की व्यवस्थाओं का निरीक्षण करते हुए शिकायतों के त्वरित निराकरण, प्रभावी काउंसलिंग तथा जरूरत के अनुसार चिकित्सा, कानूनी और पुलिस सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सहायता प्राप्त करने के लिए अनावश्यक रूप से विभिन्न कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए विभागीय एवं संस्थागत समन्वय मजबूत होना जरूरी है। मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान, न्याय एवं अधिकारों से जुड़े मामलों में जनसुनवाई, निरीक्षण, जागरूकता कार्यक्रमों तथा संबंधित विभागों के साथ समन्वय के माध्यम से निरंतर सक्रिय भूमिका निभा रहा है। आयोग का उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के साथ उनके अधिकारों और न्याय तक पहुंच को और मजबूत करना है।  

कृषि पर केन्द्रित होंगी प्रदर्शनियां और कृषि के क्षेत्र में नवाचार व उपलब्धियों को मिलेगा सम्मान

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वर्ष 2026 समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश की थीम पर किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। एक नवम्बर को वर्ष 2026 का मध्यप्रदेश स्थापना दिवस कृषि विकास और किसान कल्याण पर केंद्रित हो। उन्नत कृषि, प्राकृतिक खेती, कृषि में नवाचार आदि पर विशेष रूप से प्रदर्शनियां आयोजित की जाएं तथा कृषि के क्षेत्र में नवाचार करने और उपलब्धियां अर्जित करने वाले कृषकों, उद्यमियों, युवाओं को सम्मानित किया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य स्तर पर गतिविधियों के साथ ही जिलों में भी उत्साह और उल्लास के साथ कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। सभी शासकीय भवनों पर स्थापना दिवस पर एक नवम्बर की रात्रि में रोशनी की जाए। प्रदेश की प्रतिभाओं को अपनी कला, योग्यता और क्षमता के प्रदर्शन का मौका प्रदान करने के लिये कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। स्थापना दिवस समारोह प्रदेश का उत्सव है। राज्य और जिलास्तरीय कार्यक्रमों में अधिक से अधिक जनभागीदारी सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ये निर्देश मध्यप्रदेश स्थापना दिवस के संबंध में आज मंत्रालय में हुई बैठक में दिए। बैठक में मुख्य सचिव  अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव  अनुपम राजन,  संजय कुमार शुक्ला,  शिवशेखर शुक्ला, पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाना सहित संस्कृति तथा अन्य विभागों के अधिकारी उपस्थित थे। देशज व्यंजनों का लगेगा मेला बैठक में बताया गया कि 71वें मध्यप्रदेश स्थापना समारोह का राज्य स्तरीय समारोह लाल परेड ग्राउंड में होगा। इसके अंतर्गत विकसित मध्यप्रदेश-2047, एक जिला-एक उत्पाद, मध्यप्रदेश के जननायक, प्रदेश की पारम्परिक कलाओं, मंदिर स्थापत्य, भारत की ऋषि परम्परा, प्रदेश में विरासत से विकास और कृषि के क्षेत्र में उपलब्धियों पर प्रदर्शनियां लगाई जाएंगी। इस अवसर पर देशज व्यंजनों का मेला भी विशेष रूप से होगा। एक नवम्बर की शाम को भव्य स्तर पर सुगम संगीत पर कार्यक्रम होगा। इसमें देश के प्रतिष्ठित कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे। इस अवसर पर आकर्षक आतिशबाजी भी की जाएगी। जिले की उपलब्धियों को किया जाए प्रदर्शित स्थापना दिवस समारोह में जिला मुख्यालयों पर विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियां, जिलावार उत्कृष्ट कार्यों और जिला उत्पादों का प्रदर्शन किया जाएगा। जिला स्तरीय कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों, उद्योगपतियों, व्यवसायियों, धर्मगुरुओं, स्वयंसेवी संस्थाओं, स्वतंत्रता सेनानियों, लोकतंत्र सेनानियों, शहीद सैनिकों के परिजन और महत्वपूर्ण उपलब्धि अर्जित करने वाले स्व-सहायता समूहों, स्टार्ट-अप से जुड़े व्यक्तियों को विशेष रूप से आमंत्रित करने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में राज्य स्तरीय कार्यक्रम के लिए बैठक व्यवस्था, यातायात, सुरक्षा व्यवस्था आदि के संबंध में भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।  

स्लीमनाबाद टनल का काम पूर्णता की ओर, शीघ्र ही रीवा जिले के खेतों को मिलेगा नर्मदा जल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि खेती-किसानी विशेषकर उद्यानिकी और प्राकृतिक खेती में रीवा का जवाब नहीं। उन्होंने कहा कि किसानों की मेहनत और लगन से यहां धान, गेहूं, चना, मसूर, अलसी और सोयाबीन का भरपूर उत्पादन हुआ है। इससे रीवा जिले की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को मंत्रालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से रीवा जिले में हुए बलराम कृषि महोत्सव में किसानों को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों से कहा कि स्लीमनाबाद टनल का काम तेजी से पूरा होने की ओर है। इस टनल के पूरा होते ही रीवा जिले के खेतों तक नर्मदाजी का पावन जल पहुंचेगा। इससे क्षेत्र में सिंचाई और पेयजल की सुविधा बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि रीवावासियों को त्योंथर, लोंही, सिरमौर और सेमरिया की सिंचाई परियोजनाएं पूरी होने पर करीब एक लाख 32 हजार हैक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों को बताया कि जिनके पास भूमि के पट्टे हैं परंतु रजिस्ट्री नहीं है, ऐसे सभी पट्टेधारकों को राज्य सरकार रजिस्ट्री कराकर नि:शुल्क प्रदाय करेगी। ऐसे 50 लाख पट्टों की रजिस्ट्री का शुल्क (करीब 4 हजार करोड़ रुपए) राज्य सरकार वहन करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिले के जनप्रतिनिधियों और 4 प्रगतिशील किसानों से आत्मीय संवाद कर उनके द्वारा परम्परागत खेती से अलावा वर्तमान में की जा रही नवाचारी खेती के बाद तब और अब के अनुभवों की जानकारी ली। किसानों ने बताया कि उन्नत कृषि यंत्रों से तकनीकी खेती करने और जैविक खाद के इस्तेमाल से प्राकृतिक खेती करने में ज्यादा फायदा होता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिले भर से आए किसानों से प्राकृतिक खेती, उद्यानिकी, श्रीअन्न, पशुपालन और फसल विविधीकरण अपनाने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए रीवा जिले में एक हजार हैक्टेयर क्षेत्र को नैचुरल फार्मिंग क्लस्टर के रूप में विकसित किया जा रहा है। बसामन मामा गो-अभयारण्य हमारे गौ-संवर्धन और ग्रामीण स्वावलंबन का एक बड़ा केन्द्र है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गौशाला में संचालित 'प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण केन्द्र' से यहां के सभी किसान भाइयों को जीवामृत, घन जीवामृत और प्राकृतिक खेती की आधुनिक तकनीकें सीखने और अपनाने में बड़ी मदद मिल रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि परम्परागत खेती से आगे बढ़कर रीवा के किसान उद्यानिकी और प्राकृतिक खेती में नए-नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि रीवा में अमरूद, आंवला और कटहल का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है, जो यहां की कृषि विविधता को दर्शाता है। रीवा श्रीअन्न उत्पादन में भी आगे बढ़ रहा है। खेती में विविधता लाने के लिए राज्य मिलेट मिशन अन्तर्गत कोदो-कुटकी जैसे मोटे अनाज की फसलों का विस्तार किया जा रहा है। श्रीअन्न की खेती किसानों की आमदनी बढ़ाने के साथ-साथ हमारे परिवारों की पोषण सुरक्षा को भी सुदृढ़ करती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी किसानों को तेजा दशमी, डोल ग्यारस और गणेशोत्सव की शुभकामनाएं भी दीं। रीवा में हुए बलराम कृषि महोत्सव के मुख्य कार्यक्रम स्थल पर उपमुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने भी किसानों को संबोधित किया। इस अवसर पर मप्र राज्य सहकारी बैंक (अपेक्स बैंक) के प्रशासक श्री महेन्द्र सिंह यादव, विन्ध्य विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री पांचूलाल प्रजापति, उपाध्यक्ष श्री प्रवीण त्रिपाठी, जिला पंचायत अध्यक्ष रीवा श्रीमती नीता कोल, श्री सिद्धार्थ, श्री कपिल यार्दे, श्री वीरेन्द्र गुप्ता सहित बड़ी संख्या में किसानबंधु उपस्थित थे। 

उत्पादन से मूल्य संवर्धन तक : उद्यानिकी को नई ऊंचाई देने की तैयारी, किसानों की आय बढ़ाने पर नीति संवाद में मंथन

भोपाल मध्यप्रदेश में उद्यानिकी क्षेत्र को केवल उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय संग्रहण, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग, बाजार संपर्क और निर्यात से जोड़कर मजबूत मूल्य श्रृंखला विकसित करने की दिशा में राज्य नीति आयोग ने व्यापक नीति संवाद आयोजित किया। भोपाल के एमपीटी होटल पलाश रेजीडेंसी स्थित विमर्श सभागार में आयोजित एक दिवसीय “Strengthening Horticulture Value Chains in Madhya Pradesh” संवाद में शासन, कृषि एवं उद्यानिकी क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारियों, नीति विशेषज्ञों, कृषक उत्पादक संगठनों (FPO), वित्तीय संस्थानों, उद्योग प्रतिनिधियों और तकनीकी संस्थाओं ने किसानों को उत्पादन का बेहतर मूल्य दिलाने तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक उनकी पहुंच बढ़ाने के उपायों पर मंथन किया। कार्यक्रम का आरंभ “समृद्ध मध्यप्रदेश@2047” पर आधारित लघु फिल्म के प्रदर्शन से हुआ। उद्घाटन सत्र में मध्यप्रदेश राज्य नीति आयोग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  स्वरौचिष सोमवंशी, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के सचिव  मन शुक्ला, अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के उपाध्यक्ष प्रो. राजीव दीक्षित तथा कृषि उत्पादन आयुक्त एवं अपर मुख्य सचिव  के.सी. गुप्ता ने उद्यानिकी क्षेत्र की संभावनाओं और आगामी नीति की प्राथमिकताओं पर विचार रखे। अब लक्ष्य अधिक उत्पादन नहीं, अधिक मूल्य किसानों तक पहुंचाना राज्य नीति आयोग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  स्वरौचिष सोमवंशी ने कहा कि मध्यप्रदेश में उद्यानिकी का विस्तार उल्लेखनीय स्तर तक पहुंच चुका है। अब अगले चरण में उत्पादन बढ़ाने के साथ यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि उत्पाद से बनने वाले अधिकतम मूल्य का लाभ किसान तक पहुंचे। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024-25 में प्रदेश में लगभग 13.26 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में 259.86 लाख मीट्रिक टन सब्जियों तथा लगभग 4.80 लाख हेक्टेयर में 102.07 लाख मीट्रिक टन फलों का उत्पादन हुआ। पिछले पांच वर्षों के औसत वार्षिक उत्पादन में केला 23.24 लाख मीट्रिक टन, आम 8.92 लाख मीट्रिक टन और संतरा 22.07 लाख मीट्रिक टन रहा है। उन्होंने कहा कि कृषकों के संगठन, मजबूत शीत श्रृंखला, आधुनिक प्रसंस्करण, ब्रांडिंग तथा विभिन्न योजनाओं और वित्तीय साधनों के बेहतर समन्वय से उद्यानिकी उत्पादों की वास्तविक आर्थिक क्षमता का उपयोग किया जा सकता है। मालवा सहित विभिन्न क्षेत्रों की विशिष्ट फसलों को मिले बाजार योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के सचिव  मन शुक्ला ने कहा कि उद्यानिकी मध्यप्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। प्रदेश के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों, विशेषकर मालवा क्षेत्र में कई विशिष्ट उद्यानिकी फसलों के लिए प्राकृतिक अनुकूलता उपलब्ध है। आवश्यकता इस बात की है कि इन फसलों को केवल खेत से मंडी तक पहुंचाने के बजाय प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार से जोड़कर मूल्य श्रृंखला का हिस्सा बनाया जाए। उन्होंने कहा कि उत्पादन आधारित व्यवस्था से मूल्य श्रृंखला आधारित व्यवस्था की ओर बढ़ने से कटाई के बाद तत्काल बिक्री का दबाव कम होगा और किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त करने के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने जिला-स्तरीय आंकड़ों, FPO की क्षमता और फसल समूहों के आधार पर सार्वजनिक एवं निजी निवेश को प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई। शोध, तकनीक और उद्योग के समन्वय पर जोर प्रो. राजीव दीक्षित ने कहा कि खेत से बाजार तक मौजूद कमियों को दूर करने के लिए सुदृढ़ नीति अनुसंधान, तकनीकी परीक्षण और संस्थागत क्षमता निर्माण जरूरी है। उन्होंने उद्यानिकी क्षेत्र से जुड़े सभी पक्षों को साझा मंच पर लाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान ने उद्यानिकी क्षेत्र से जुड़े नौ विशेषज्ञ संस्थानों के साथ सहभागिता स्थापित की है। आगे फसल एवं विषय-विशेष आधारित सत्रों के माध्यम से क्षेत्रीय चुनौतियों और नए अवसरों पर कार्य किया जाएगा। कुल कृषि क्षेत्र का 9 प्रतिशत, राष्ट्रीय उद्यानिकी क्षेत्र में 16 प्रतिशत हिस्सेदारी कृषि उत्पादन आयुक्त एवं अपर मुख्य सचिव  के.सी. गुप्ता ने कहा कि उद्यानिकी को पारंपरिक कृषि से आगे बढ़ाकर उच्च मूल्य आधारित कृषि और प्रसंस्करण से जोड़ना प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने बताया कि उद्यानिकी प्रदेश के कुल कृषि क्षेत्र का लगभग 9 प्रतिशत है, जबकि राष्ट्रीय उद्यानिकी क्षेत्र में मध्यप्रदेश का योगदान लगभग 16 प्रतिशत है। उन्होंने शोध संस्थानों, नीति विशेषज्ञों और उद्योग जगत से जिला-वार चुनौतियों की पहचान कर स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण बीज एवं रोपण सामग्री, उच्च तकनीक नर्सरी, बीज प्रक्षेत्रों के उन्नयन और समूह आधारित प्रसंस्करण संरचना के विस्तार को महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं के रूप में रेखांकित किया। 28.60 लाख हेक्टेयर से 438.05 लाख मीट्रिक टन उद्यानिकी उत्पादन नीति संवाद में बताया गया कि मध्यप्रदेश वर्तमान में कुल उद्यानिकी उत्पादन के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में है। प्रदेश में लगभग 28.60 लाख हेक्टेयर क्षेत्र से 438.05 लाख मीट्रिक टन वार्षिक उद्यानिकी उत्पादन हो रहा है। ऐसे में उत्पादन के बाद की व्यवस्थाओं को मजबूत करना किसानों की आय और बाजार प्रतिस्पर्धा दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। चर्चा में शीत भंडारण, पैक हाउस, ग्रेडिंग-सॉर्टिंग, प्राथमिक प्रसंस्करण, FPO की क्षमता, गुणवत्ता प्रमाणीकरण, ट्रेसबिलिटी और निर्यात मानकों से संबंधित मुद्दों पर विस्तार से विचार किया गया। वैश्विक बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप उत्पाद की गुणवत्ता और निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। मंडी स्तर पर ग्रेडिंग से लेकर सौर प्रसंस्करण तक आए सुझाव दिनभर चली चर्चा में छंटाई, ग्रेडिंग और गुणवत्ता आधारित मूल्य निर्धारण को मंडी स्तर पर बढ़ावा देने, कृषि अवसंरचना कोष से संबंधित प्रकरणों के समाधान के लिए विभागीय समन्वय मजबूत करने तथा उद्यानिकी कार्यालयों और FPO तक डिजिटल सहायता पहुंचाने के सुझाव सामने आए। इसके साथ ही उच्च मूल्य वाली मसाला फसलों के लिए सहायता प्रावधानों की समीक्षा तथा कम लागत वाली शीत परिवहन और सौर आधारित प्रसंस्करण तकनीकों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। नीति संवाद का उद्देश्य प्राथमिक फसल मूल्य श्रृंखलाओं की पहचान, शासन-FPO-तकनीकी संस्थानों-निजी क्षेत्र की भूमिकाओं को स्पष्ट करना तथा योजनाओं के बेहतर समन्वय के माध्यम से राज्य की उद्यानिकी नीति और आगामी बजट प्रक्रिया के लिए क्रियान्वयन योग्य सुझाव तैयार करना रहा। समापन अवसर पर मध्यप्रदेश राज्य नीति आयोग की सलाहकार डॉ. आकांक्षा चंद ने दिनभर हुई चर्चा और प्रमुख सुझावों का सार प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि संवाद से प्राप्त नीतिगत अनुशंसाओं को राज्य शासन के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि नीति निर्माण और बजट संबंधी प्रक्रिया में उनका समुचित उपयोग किया जा सके। कार्यक्रम के अंत में आयोग की प्रशासनिक अधिकारी मती पूर्णिमा शर्मा ने आभार व्यक्त किया।  

अटल जी के विचारों, राष्ट्रवाद और सुशासन के मॉडल को अपनाना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि स्व.  अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीति के महान पुरोधा थे। उन्होंने देश को विकास और सुशासन की नई दिशा दिखाई। स्व. अटल जी भारतीय राजनीति और राष्ट्रजीवन का गौरव हैं। उनका जीवन लोकतांत्रिक मूल्यों के लिये प्रतिबद्धता का उदाहरण है। उनके विचार युगों तक हम सबको सदैव प्रेरणा देते रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि श्रद्धेय अटल जी का जीवन हम सभी के लिए मार्गदर्शक प्रकाशपुंज है। वे शुचिता और विनम्रता की प्रतिमूर्ति थे। उनके राष्ट्रवाद और सुशासन के आदर्शों को अपनाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमवार को गोविंदपुरा औद्योगिक प्रक्षेत्र स्थित निजी प्रतिष्ठान के परिसर में भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा का अनावरण किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस निजी प्रतिष्ठान के मोनो का भी लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्व.  अटल जी का सम्पूर्ण जीवन देशसेवा और जनसेवा को समर्पित रहा। उनके व्यक्तित्व में लोककल्याण और राजनीतिक शुचिता ही सदैव अटल रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीति में शुचिता, विचारों में दृढ़ता और व्यवहार में सौम्यता, इन तीन महान गुणों का संगम अटल जी के व्यक्तित्व की पहचान थी। उन्होंने कहा कि अटल जी ने सत्ता और विपक्ष, दोनों में लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उदाहरण प्रस्तुत किया। उनकी यह सीख आज भी प्रासंगिक है कि सत्ता आती-जाती रहती है, सरकारें बदलती रहती हैं, लेकिन देश और लोकतंत्र बने रहना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी के दिखाए रास्ते, उनके राष्ट्रवाद और सुशासन के मॉडल को अपनाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। आज जब प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व गुरु बनने की ओर अग्रसर है, तब अटल जी के विचारों और आदर्शों को आत्मसात करना सभी का दायित्व है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व. अटल जी ने हमें यह सिखाया कि सत्ता में रहते हुए किस प्रकार का आचरण होना चाहिए और विपक्ष में रहते हुए राजनीतिक मर्यादाओं का पालन कैसे किया जाता है। अटल जी ने विपक्ष में रहते हुए सबसे लम्बे समय तक विपक्ष के नेता का दायित्व निभाया। आपातकाल के दौर में जब लोकतंत्र पर कुठाराघात हुआ, तो उन्होंने करीब 19 माह तक जेल में बिताए थे। भारतीय राजनीति का इतिहास रहा है कि जब राष्ट्र पर संकट आता है, तो हम भारतीय दलों की सीमाएं भूल कर एक संकल्प के साथ खड़े हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मती इंदिरा गांधी के कार्यकाल में जब बांग्लादेश युद्ध चल रहा था, तो श्रद्धेय अटल जी ने खुले दिल से प्रधानमंत्री और सरकार का समर्थन किया था। सत्ता तो आती-जाती रहती है, देश और लोकतंत्र बने रहना चाहिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अटलजी के संसदीय जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने संसद में खड़े होकर कहा था कि सत्ता तो आती-जाती रहती है और सरकारें भी बदलती रहती हैं, लेकिन देश बना रहना चाहिए, देश का लोकतंत्र कायम रहना चाहिए। मुख्यमंत्री ने इसे भारत के लोकतंत्र की गरिमा और अटल जी के महान व्यक्तित्व का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को यह जानना चाहिए कि हमारे बीच ऐसे अटल जी रहे हैं, जिन्होंने सरकार के नेता के साथ विपक्ष के नेता की भूमिका और उसके दायित्वों का भी आदर्श प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निजी प्रतिष्ठान के स्वामी  त्रिलोकी अग्रवाल का आभार व्यक्त कर कहा कि उन्होंने अपने निजी प्रतिष्ठान में अटल जी की प्रतिमा लगाकर समाज को उनके प्रेरणादायी जीवन से जोड़ने का पुनीत कार्य किया है। कार्यकम में मौजूद पूर्व राज्यपाल  कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश के मुख्य सेवक हैं। प्रधानमंत्री  मोदी भी स्वयं को देश का प्रधान सेवक ही मानते हैं। उन्होंने सेवा संकल्प अभियान में जनकल्याण का संकल्प लिया है। प्रजा की भलाई के बिना जनसेवा नहीं हो सकती है। जनसेवा से सुशासन स्थापित होता है। आज यहां अटल जी की प्रतिमा नहीं, एक प्रेरणा पुंज का अनावरण हुआ है। उन्होंने कहा कि देश को एक सूत्र में पिरोने के साथ सभी को देश के प्रति अपने कर्त्तव्यपालन पर ध्यान देना होगा। अटलजी के लिए राष्ट्र हमेशा सर्वोपरि रहा। वे देश को जोड़ने के लिए 'स्वर्णिम चतुर्भुज राजमार्ग योजना' लेकर आए। उन्होंने देश के गांव-गांव को पक्की सड़कों से जोड़ा। सूखे की समस्या समाप्त करने के लिए उन्होंने देश की नदियों को आपस में जोड़ने का विचार दिया। स्व.  अटलजी के लिए भारत एक जीता-जागता राष्ट्रपुरुष था।  सोलंकी ने कहा कि आज भारत की जीडीपी विकास दर 7.8 प्रतिशत की गति से आगे बढ़ रही है। यह दुनिया में चीन और अमेरिका से भी अधिक है। कार्यक्रम में मप्र हिंदी ग्रंथ अकादमी के अध्यक्ष  अशोक कड़ेल, पूर्व विधायक  शिशुपाल सिंह यादव, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम आयुक्त  कुमार पुरूषोत्तम, निजी प्रतिष्ठान के  अजय कुमार सोनी सहित बड़ी संख्या नागरिकगण उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निजी प्रतिष्ठान परिसर में स्थापित डिजीटल प्रिंटिंग मशीनों का अवलोकन भी किया।  

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार को वितरित करेंगे 3,567 नियुक्ति पत्र

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार, 22 सितंबर को 3,567 नवचयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान करेंगे।लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित भव्य कार्यक्रम में प्रदेश के सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों को योग्य शिक्षक और कुशल प्रशासक मिलेंगे। चयनित अभ्यर्थियों में 319 प्रधानाचार्य, 258 प्रधानाध्यापक, 618 प्रवक्ता (पीजीटी) तथा 2372 सहायक अध्यापक (टीजीटी) शामिल हैं। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा पारदर्शी परीक्षा प्रणाली के माध्यम से अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के लिए चयनित इन अभ्यर्थियों को जुपिटर हॉल में आयोजित समारोह में नियुक्ति पत्र सौंपे जाएंगे। इस दौरान उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी समेत अन्य नेता एवं अधिकारी मौजूद रहेंगे।