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रांझी को मिली बड़ी स्वास्थ्य सौगात, ₹45 करोड़ की लागत से 100 बेड का हाईटेक अस्पताल हुआ तैयार

 जबलपुर रांझी में 100 बिस्तरों वाला नया सिविल अस्पताल भवन बनकर लगभग तैयार है, लेकिन इसके औपचारिक उद्घाटन और पूर्ण संचालन का इंतज़ार है। इसके शुरू होने से उपनगरीय क्षेत्र रांझी सहित आसपास के एरिया के तकरीबन दो लाख लोगों को फायदा मिलेगा। 100 बिस्तरों का नया भवन बनकर तैयार दरअसल रांझी क्षेत्र में स्थित सिविल अस्पताल अब स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में बड़ी सौगात पाने जा रहा है। जहां 45 करोड़ रुपये की लागत से चार मंजिला हाईटेक 100 बिस्तरों का नया भवन बनकर तैयार हो चुका है। अस्पताल बन जाने के बाद अब रांझी और आसपास के इलाकों के लोगों को इलाज के लिए शहर की ओर दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। फिलहाल रांझी सिविल अस्पताल सिर्फ रेफरल सेंटर के तौर पर ही जाना जाता था। जहां हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक और ब्रेन हेमरेज जैसे गंभीर मामलों में यहां प्राथमिक उपचार के बाद मरीजों को जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज या शहर के निजी अस्पतालों में भेज दिया जाता था। ऐसे में 20 से 25 मिनट का कीमती समय रास्ते में ही निकल जाता है, जो कई बार मरीज की जान पर भारी पड़ता था। विशेषज्ञ डॉक्टरों और आधुनिक जांच सुविधाओं से बदलेगी व्यवस्था नया भवन शुरू होने के बाद हालात पूरी तरह बदलने की उम्मीद है। अस्पताल में आधुनिक जांच मशीनें लगाई गई हैं। 100 बेड का हॉस्पिटल शुरू होने के बाद चिकित्सकों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी और पैरामेडिकल व नर्सिंग स्टाफ की भी तैनाती होगी। इससे सामान्य ही नहीं, बल्कि गंभीर बीमारियों का इलाज भी यहीं संभव हो सकेगा। गौरतलब है रांझी सिविल अस्पताल की ओपीडी में रोजाना औसतन 300 से 350 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। रांझी के छह वार्डों के अलावा मटामर, सोनपुर, मानेगांव, मोहनिया, खमरिया, पिपरिया और उमरिया जैसे इलाकों की बड़ी आबादी इसी अस्पताल पर निर्भर है। इसके मुकाबले संसाधनों की कमी अब तक सबसे बड़ी चुनौती रही है। सीएमएचओ डॉ. नवीन कोठारी ने बताया नए भवन के चालू होने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा काफी बढ़ेगा। जरूरी जांच सुविधाएं, विशेषज्ञ डॉक्टर और पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध कराया जाएगा। इससे गंभीर मरीजों को समय पर इलाज मिलेगा। ऑपरेशन थिएटर, लिफ्ट, रैंप और पैथोलॉजी लैब से लैस पहली मंजिल पर एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक, दूसरी मंजिल पर पुरुष और महिला वार्ड, तीसरी मंजिल पर अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर और भवन में सीढ़ी, रैंप, और तीन लिफ्ट सहित बाहर पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था है। इसके अलावा दो आधुनिक ऑपरेशन थिएटर बनाए गए हैं, जिसमें माइनर ऑपरेशन की सुविधा मिलेगी। एक पैथोलॉजी लैब जिसमें जांच की सुविधाएं होंगी। नई ओपीडी वार्ड, इमरजेंसी वार्ड और अन्य संसाधन भी उपलब्ध होंगे।  

उज्जैन और इंदौर को मेट्रोपॉलिटन सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार निरंतर महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। आईटी पार्क एवं इंजीनियरिंग कैंपस के माध्यम से युवाओं को शिक्षा के साथ रोजगार, कौशल विकास और नई तकनीकों से जुडऩे के अवसर प्राप्त होंगे। उन्होंने कहा कि उज्जैन में आईटी क्षेत्र के विस्तार की दिशा में आईटी पार्क एक महत्वपूर्ण परियोजना है, जो आने वाले समय में युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने में सहायक होगी। आईटी पार्क के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर और उज्जैन को मेट्रोपॉलिटन सिटी के रूप में विकसित करने की दिशा में विभिन्न महत्वपूर्ण विकास कार्य किए जा रहे है। इन विकास कार्यों का उद्देश्य युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, तकनीकी नवाचार और उद्योगों के विस्तार को गति देना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नई तकनीक और नवाचार के माध्यम से प्रदेश के प्रदर्शन को और बेहतर बनाया जा सकता है। आईटी क्षेत्र के विस्तार से प्रदेश में नए उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा तथा युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार और कौशल विकास के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे। इससे प्रदेश के समग्र विकास को गति मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र में प्रगति के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। सभी विकास कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के लिए निगरानी की जा रही है। उज्जैन में आगामी सिंहस्थ महापर्व को ध्यान में रखते हुए आवश्यक विकास कार्यों को भी तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। शहर के विकास, आधुनिक अधोसंरचना, तकनीकी सुविधाओं और युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों में वृद्धि के लिए राज्य सरकार समन्वित रूप से कार्य कर रही है। आईटी पार्क परियोजना का निर्माण दो चरणों में किया जा रहा है। परियोजना के लिए लगभग 2.16 हेक्टेयर भूमि निर्धारित की गई है। इसमें कुल प्रस्तावित 15,480 वर्गमीटर बिल्ट-अप एरिया का निर्माण किया जाना है। इसमें से 11,436 वर्गमीटर क्षेत्र आईटी कंपनियों के लिए आरक्षित किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता के निर्धारित मापदंडों का पालन सुनिश्चित करते हुए सभी कार्य समय-सीमा में पूर्ण किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निरीक्षण के दौरान इंदौर रोड पर उज्जैन विकास प्राधिकरण के माध्यम से निर्माणाधीन पीएम एकता मॉल एवं महाकाल भक्त निवास के निर्माण कार्य की प्रगति की जानकारी भी अधिकारियों से ली। उन्होंने दोनों परियोजनाओं के कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए, जिससे इनका लाभ आमजन और उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं को मिल सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर रोड स्थित महामृत्युंजय द्वार का भी निरीक्षण किया। उन्होंने महामृत्युंजय द्वार निर्माण की विशेषताओं एवं इससे संबंधित जानकारी से अधिकारियों को अवगत कराया। निरीक्षण के दौरान मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम के अधिकारी एवं कलेक्टर  रौशन कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को आईटी पार्क के निर्माण एवं अब तक की प्रगति की जानकारी दी।  

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में नगर निकाय चुनाव में भाजपा का दमदार प्रदर्शन

जयपुर  मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मजबूत रणनीति और नेतृत्व से प्रदेश के नगर निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया है। जिससे नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिकाओं में कमल खिला। मुख्यमंत्री की अगुवाई और मार्गदर्शन में मिशन मोड पर यह चुनाव लड़ा गया। प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, राष्ट्रीय अध्यक्ष और विभिन्न मुख्यमंत्रियों ने राजस्थान में भाजपा के दमदार प्रदर्शन और जीत पर मुख्यमंत्री की रणनीति को सराहा और उनकी प्रशंसा की। मुख्यमंत्री ने निकाय चुनाव में टिकट वितरण में पार्टी और संगठन को मार्गदर्शन दिया। उन्होंने चुनाव का मोर्चा खुद संभाला तथा बड़े नेताओं को संभागवार जिम्मेदारी दी और प्रतिदिन फीडबैक लिया। मुख्यमंत्री ने स्वयं चुनावी मैदान में उतरकर 10 नगर निगमों में रोड शो किए। निकाय चुनाव के परिणामों के बाद सभी पार्षदों को एकजुट रखा और निर्दलीयों को साधा। मुख्यमंत्री की इस रणनीति से कांग्रेस की जीत के दावे और उनकी पिक्चर फ्लॉप शो साबित हुई। उनकी अगुवाई में भरतपुर और डीग जिले की 90 प्रतिशत नगरपालिकाओं में भाजपा ने अपना बोर्ड बनाने में सफलता हासिल की और भरतपुर नगर निगम में भी निर्विरोध कमल खिलाया। जयपुर में लगातार सातवीं बार नगर निगम में भाजपा का बोर्ड बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री ने एक बार फिर अपना निर्विवाद नेतृत्व साबित किया है। राजस्थान में इस बार एक साथ सभी 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद सहित 252 नगर पालिकाओं में चुनाव एक साथ हुए हैं। इन निकायों में दमदार जीत सरकार के ढाई साल के काम पर जनता की मोहर है। इससे पहले मुख्यमंत्री के नेतृत्व में हुए चुनाव में पिछले साल 7 में से 5 उपचुनाव में भाजपा जीती थी। आंकड़े बोलते हैं, फर्क साफ है – कांग्रेस राज (2018-23) में – मात्र 11 निकाय निर्विरोध – 3 भाजपा – 6 कांग्रेस – 2 निर्दलीय भाजपा राज (भजनलाल सरकार) में – 33 निकायों में निर्विरोध – – 30 भाजपा – 2 कांग्रेस – 1 भाजपा समर्थित 11 के मुकाबले 33 – जनता का भरोसा भाजपा के साथ, जयपुर का रोड शो रहा चर्चित – जयपुर के चारदीवारी क्षेत्र में मुख्यमंत्री के रोड शो ने राजधानी की जीत में अहम भूमिका निभाई। परकोटे से ही भाजपा के मेयर पद के प्रत्याशी सुनील कोठारी जीते हैं। मुख्यमंत्री ने रोड शो में परकोटे के लोगों को स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने लव जिहाद, धर्मांतरण कानून, डिस्टर्ब एरिया बिल, यूसीसी की चर्चा के साथ महत्वपूर्ण संदेश दिया, जिसका सीधा असर चुनाव परिणामों में देखने को मिला। विपक्ष की रणनीति को किया फेल – कांग्रेस ने जातिगत समीकरण और होटल पॉलिटिक्स की रणनीति अपनाई, लेकिन मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सोशल इंजीनियरिंग और वन स्टेट-वन इलेक्शन की रणनीति के आगे विपक्ष की हर चाल फेल हो गई। कांग्रेस को पार्षदों को होटलों में बंद करना पड़ा, फिर भी पार्षद भागते रहे, जबकि भाजपा ने पहले ही 33 बोर्ड निर्विरोध बनाकर बढ़त ले ली।

जोधपुर में भारत-जापान की हवाई ताकत, वायुसेना प्रमुखों ने स्वदेशी तेजस में भरी उड़ान

जयपुर राजस्थान की सूर्यनगरी जोधपुर का एयरफोर्स स्टेशन 20 सितंबर 2026 को भारत और जापान के बीच मजबूत होते रक्षा संबंधों और सैन्य कूटनीति के एक ऐतिहासिक पल का साक्षी बना। भारत और जापान की वायुसेनाओं के बीच आयोजित द्विपक्षीय हवाई रक्षा अभ्यास 'वीर गार्जियन 2026' (Exercise Veer Guardian 2026) के दौरान भारतीय वायु सेना (IAF) के प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह और जापान एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स (JASDF) के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल टेकहीरो मोरिटा ने भारत के पूरी तरह स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान LCA तेजस (LCA Tejas) में एक साथ आसमान में उड़ान भरी। किसी विदेशी वायुसेना प्रमुख द्वारा भारत में निर्मित फाइटर जेट में इस तरह सॉर्टी (Sortie) लगाना भारत के रक्षा विनिर्माण और 'मेक इन इंडिया' अभियान की एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय सफलता के रूप में देखा जा रहा है। जोधपुर के सामरिक रूप से महत्वपूर्ण एयरबेस पर 9 सितंबर से शुरू हुआ यह संयुक्त हवाई युद्धाभ्यास 22 सितंबर 2026 तक जारी रहेगा। रविवार को अभ्यास की प्रगति और तैयारियों की समीक्षा करने के लिए जोधपुर पहुंचे दोनों मित्र देशों के वायुसेना प्रमुखों ने उड़ान भरने से पहले एयरबेस पर तैनात भारतीय और जापानी सैन्य दस्तों से मुलाकात की, उनका हौसला बढ़ाया और एक यादगार ग्रुप फोटो भी खिंचवाया। इसके बाद भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह और जापानी जनरल टेकहीरो मोरिटा ने स्वदेशी तेजस ट्रेनर विमान में बैठकर जोधपुर के आसमान में गर्जना की। स्वदेशी LCA तेजस में उड़ान और रक्षा कूटनीति का नया संदेश जोधपुर के एयर स्पेस में तेजस विमान द्वारा भरी गई यह उड़ान केवल एक साधारण अभ्यास सॉर्टी नहीं थी, बल्कि इसके पीछे एक मजबूत रणनीतिक संदेश छिपा हुआ है: भरोसे और तकनीकी क्षमता का प्रतीक: किसी विदेशी मित्र देश के वायुसेना प्रमुख का भारत के स्वदेशी फाइटर जेट तेजस में सवार होकर उड़ान भरना भारतीय एयरोस्पेस इंजीनियरिंग पर दुनिया के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। मेक इन इंडिया को बढ़ावा: इस ऐतिहासिक सॉर्टी से भारतीय रक्षा उद्योग और तेजस विमान के निर्यात संभावनाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा प्रोत्साहन मिला है। चीफ्स की सीधी सहभागिता: दोनों वायुसेना प्रमुखों ने खुद कॉकपिट में बैठकर युद्ध कौशल और विमान की परिचालन क्षमताओं का जायजा लिया। 'वीर गार्जियन 2026' में कौन-कौन से आधुनिक फाइटर जेट्स दिखा रहे हैं दम? राजस्थान के पश्चिमी सीमांत क्षेत्र जोधपुर में आयोजित हो रहे इस 14 दिवसीय युद्धाभ्यास में दोनों देशों के सबसे आधुनिक और खतरनाक लड़ाकू विमान अपनी मारक क्षमता का प्रदर्शन कर रहे हैं: भारतीय वायुसेना (IAF): भारत की तरफ से स्वदेशी एलसीए तेजस (LCA Tejas), सुखोई (Su-30MKI) और अत्याधुनिक राफेल (Rafale) जैसे फ्रंटलाइन फाइटर जेट्स इस युद्धाभ्यास में भाग ले रहे हैं। जापान एयरफोर्स (JASDF): जापानी वायुसेना अपने बेहद एडवांस F-2A लड़ाकू विमानों के साथ इस अभ्यास में हिस्सा ले रही है। ऐतिहासिक मील का पत्थर: यह पहला मौका है जब जापानी वायुसेना ने अपने लड़ाकू विमानों को किसी द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास के लिए भारतीय जमीन पर भेजा है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और आपसी तालमेल बढ़ाना मुख्य मकसद 'वीर गार्जियन 2026' अभ्यास का मुख्य उद्देश्य दोनों मित्र राष्ट्रों की वायुसेनाओं के बीच अंतर-संचालन को मजबूत करना और जटिल हवाई युद्ध परिस्थितियों में एक-दूसरे के साथ बेहतर तालमेल बिठाना है। जोधपुर में चल रहे इस अभ्यास से दोनों देशों के पायलटों को एक-दूसरे की सर्वोत्तम युद्ध रणनीतियों, हवाई सुरक्षा तकनीकों और मेंटेनेंस प्रक्रियाओं को समझने का शानदार अवसर मिल रहा है। इसके साथ ही, भारत-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समुद्री व हवाई सुरक्षा सुनिश्चित करने के दृष्टिकोण से भी भारत और जापान के बीच का यह रणनीतिक अभ्यास बेहद अहम माना जा रहा है। जोधपुर मिलिट्री बेस का सामरिक महत्व राजस्थान का जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन अपनी विशेष भौगोलिक स्थिति और विशाल एयरस्पेस के कारण भारतीय वायुसेना के सबसे महत्वपूर्ण और सक्रिय सामरिक ठिकानों में से एक है। पाकिस्तान सीमा के पास स्थित होने के कारण जोधपुर एयरबेस पर लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर के बड़े युद्धाभ्यास आयोजित होते रहते हैं। 'वीर गार्जियन 2026' के सफल आयोजन और दोनों देशों के प्रमुखों की इस ऐतिहासिक उड़ान से जोधपुर एक बार फिर से वैश्विक रक्षा कूटनीति का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है।

‘सेवा मेरा योगदान’ के तहत जलाशय परिसर में हुआ श्रमदान और वृक्षारोपण

रायपुर  सेवा संकल्प अभियान 2026 के अंतर्गत ‘सेवा मेरा योगदान’ पहल जनभागीदारी के माध्यम से सेवा, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की भावना को मजबूत कर रही है। इसी क्रम में जल संसाधन संभाग क्रमांक-1, अम्बिकापुर द्वारा विकासखण्ड बतौली के ग्राम घोघरा स्थित घोघरा जलाशय योजना में जल संरक्षण, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को समर्पित जनभागीदारी कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों और जल संसाधन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों ने सक्रिय सहभागिता निभाते हुए श्रमदान और वृक्षारोपण किया। सामूहिक श्रमदान से स्वच्छ हुआ जलाशय परिसर घोघरा जलाशय परिसर में आयोजित अभियान के दौरान जनप्रतिनिधियों, ग्रामवासियों और विभागीय कर्मचारियों ने एक साथ श्रमदान कर बांध एवं जलाशय परिसर की साफ-सफाई की। सामूहिक प्रयास से परिसर में फैले कचरे और अनुपयोगी सामग्री को हटाया गया। इस पहल ने यह संदेश दिया कि सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। पौधरोपण के साथ संरक्षण का भी लिया संकल्प कार्यक्रम के दौरान जलाशय परिसर में वृक्षारोपण किया गया। जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों और विभागीय कर्मचारियों ने पौधे लगाकर उनके संरक्षण की जिम्मेदारी निभाने का संकल्प लिया। जल स्रोतों के आसपास हरियाली बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का संदेश भी दिया गया। जल संरक्षण और स्वच्छता की सामूहिक शपथ कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने जल संरक्षण एवं स्वच्छता की सामूहिक शपथ ली। सभी ने जल का विवेकपूर्ण उपयोग करने, जल स्रोतों को स्वच्छ रखने, पानी की बर्बादी रोकने तथा समाज के अन्य लोगों को भी जल संरक्षण के लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया। ‘सेवा मेरा योगदान’ पहल के तहत आयोजित यह कार्यक्रम सेवा संकल्प अभियान के मूल उद्देश्य—जनभागीदारी के माध्यम से समाज और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी को मजबूत करने—का प्रभावी उदाहरण बना। ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और विभागीय अमले की सहभागिता ने स्वच्छता, जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण को सामुदायिक प्रयास से आगे बढ़ाने का संदेश दिया।

यूपीपीसीएस-2025: 23 सितंबर से शुरू होगा विशेष मॉक इंटरव्यू कार्यक्रम

लखनऊ उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की यूपीपीसीएस-2025 मुख्य परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को साक्षात्कार की तैयारी के लिए विशेष अवसर मिलेगा। समाज कल्याण मंत्रालय की पहल पर 23 सितंबर से विशेष मॉक इंटरव्यू कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है। इसका उद्देश्य अभ्यर्थियों को वास्तविक साक्षात्कार के लिए तैयार करना और उनके व्यक्तित्व, संचार कौशल व आत्मविश्वास को निखारना है। कार्यक्रम का आयोजन गोमती नगर स्थित छत्रपति शाहू जी महाराज शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान, भागीदारी भवन में किया जाएगा। आईएएस-पीसीएस अधिकारी और विशेषज्ञ बताएंगे इंटरव्यू की बारीकियां मॉक इंटरव्यू में उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी (उपाम) से जुड़े आईएएस-पीसीएस अधिकारी और विषय विशेषज्ञ अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन करेंगे। इसमें साक्षात्कार की तैयारी की रणनीति, सवालों के प्रभावी जवाब देने, व्यक्तित्व प्रस्तुतीकरण, संचार कौशल और आत्मविश्वास बनाए रखने जैसे पहलुओं पर अभ्यास कराया जाएगा। अभ्यर्थियों को अपनी कमियों की पहचान कर उन्हें सुधारने का अवसर भी मिलेगा। कई चरणों में संचालित होने वाला यह कार्यक्रम अभ्यर्थियों को वास्तविक इंटरव्यू के माहौल से परिचित कराने में मदद करेगा। मनोरंजन, खेलकूद और जिम की उपलब्ध कराई जा रही सुविधा प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को सुविधाजनक बनाने के लिए समाज कल्याण मंत्रालय की ओर से आठ आवासीय कोचिंग केंद्र भी संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों में अभ्यर्थियों को निःशुल्क आवासीय प्रशिक्षण के साथ मेस, पुस्तकालय, इंटरनेट, टेस्ट सीरीज और अध्ययन सामग्री जैसी सुविधाएं मिल रही हैं। इसके साथ मनोरंजन, खेलकूद और जिम की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। निःशुल्क मॉक इंटरव्यू में सभी वर्गों के सफल अभ्यर्थियों को अवसर समाज कल्याण विभाग के उप निदेशक आनंद कुमार सिंह ने बताया कि यह मॉक इंटरव्यू निःशुल्क होगा। समाज कल्याण विभाग के छत्रपति शाहू जी महाराज शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान, भागीदारी भवन और प्रदेश के अन्य परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केंद्रों से प्रशिक्षण लेने वाले अभ्यर्थियों के साथ मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के अभ्यर्थी भी इसका लाभ उठा सकेंगे। इसके अलावा यूपीपीसीएस-2025 मुख्य परीक्षा में सफल किसी भी वर्ग के इच्छुक अभ्यर्थी मॉक इंटरव्यू में शामिल हो सकेंगे। इस पहल के जरिए प्रदेश सरकार प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को परीक्षा के अगले और महत्वपूर्ण चरण के लिए अतिरिक्त मार्गदर्शन उपलब्ध करा रही है।

गरिमा और सम्मान के साथ मनाया जाएगा अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस

भोपाल सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण मंत्री श्री नारायन सिंह कुशवाह ने एक अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस प्रदेशभर में गरिमा और सम्मान के साथ मनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि वृद्धजनों ने अपने ज्ञान, अनुभव और परिश्रम से परिवार, समाज तथा राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनके सम्मान, सुरक्षा, स्वास्थ्य और गरिमापूर्ण जीवन के लिए संवेदनशील एवं सहयोगात्मक वातावरण तैयार करना हम सभी का दायित्व है। मंत्री श्री कुशवाह ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के कार्यक्रम केवल औपचारिक आयोजन बनकर न रह जाएं। इनमें वृद्धजनों की अधिकतम और सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करते हुए उनके साथ संवाद किया जाए तथा उनकी आवश्यकताओं एवं समस्याओं के निराकरण की दिशा में सार्थक पहल की जाए। सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण आयुक्त श्री के.जी. तिवारी ने सभी जिला कलेक्टरों, जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों तथा विभागीय संयुक्त और उप संचालकों को इस संबंध में विस्तृत निर्देश जारी किए हैं। वर्ष 2026 में अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस की निर्धारित थीम “गरिमा के साथ वृद्धावस्था: वृद्ध नागरिकों के लिए देखभाल और समर्थन प्रणालियों को मजबूत करने का महत्व” के अनुरूप जिलों में विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। वृद्धाश्रमों में निवासरत तथा अन्य वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान एवं अभिनंदन किया जाएगा। उनसे संवाद कर उनकी आवश्यकताओं और समस्याओं की जानकारी ली जाएगी। वृद्धजनों की सक्रिय सहभागिता और मनोरंजन के लिए कैरम, लूडो, शतरंज, गीत-संगीत तथा अन्य इंडोर गतिविधियां और प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। वरिष्ठ नागरिकों को डिजिटल रूप से सक्षम बनाने के उद्देश्य से मोबाइल फोन, इंटरनेट, डिजिटल सेवाओं और कम्प्यूटर के उपयोग संबंधी प्रशिक्षण एवं जागरूकता शिविर लगाए जाएंगे। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, जिला चिकित्सालय, सिविल डिस्पेंसरी और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों के समन्वय से विशेष स्वास्थ्य परीक्षण शिविर आयोजित होंगे। इनमें रक्तचाप, मधुमेह, नेत्र परीक्षण सहित अन्य सामान्य स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था की जाएगी। जिलों में 100 वर्ष अथवा उससे अधिक आयु पूरी कर चुके वरिष्ठ नागरिकों को चिन्हित कर “शतायु सम्मान” से सम्मानित किया जाएगा। उन्हें शॉल और श्रीफल भेंट किए जाएंगे। माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम-2007 एवं मध्यप्रदेश नियम-2009 के अंतर्गत उपलब्ध अधिकारों, सहायता तथा शिकायत निवारण व्यवस्था की जानकारी भी दी जाएगी। पीढ़ियों के बीच अंतर कम करने तथा युवाओं में वृद्धजनों के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता विकसित करने के लिए विद्यालय एवं महाविद्यालय के विद्यार्थियों और युवाओं की सहभागिता से संवाद, सांस्कृतिक और रचनात्मक कार्यक्रम आयोजित होंगे। वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं और शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए संचालित एल्डरलाइन हेल्पलाइन-14567 का व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा। जिला स्तर पर गठित समितियों की बैठक आयोजित कर वृद्धजनों के कल्याण, संरक्षण एवं पुनर्वास से संबंधित प्रकरणों की समीक्षा की जाएगी। कार्यक्रमों में मंत्री, सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया जाएगा।  

1 अक्टूबर से बिना Biometric e-KYC नहीं मिलेगा Subsidised LPG Refill, सरकार ने जारी किया नया नियम

नई दिल्ली  पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सब्सिडी वाले घरेलू एलपीजी (LPG) रिफिल के लिए बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण (Biometric Aadhaar Authentication – BAA) को अनिवार्य करने की घोषणा की है। यह नियम 1 अक्टूबर से लागू होगा। मंत्रालय के अनुसार, इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य फर्जी और दोहराए गए कनेक्शनों को खत्म करना है ताकि सब्सिडी का लाभ केवल वास्तविक और जरूरतमंद परिवारों तक ही पहुंचे। 89.9 प्रतिशत उपभोक्ता करा चुके हैं ऑथेंटिकेशन मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, देश के लगभग 27.43 करोड़ उपभोक्ता (89.9 प्रतिशत) पहले ही अपना बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन पूरा करा चुके हैं। जिन लोगों ने यह प्रक्रिया पहले ही पूरी कर ली है, उन्हें दोबारा कुछ भी करने की आवश्यकता नहीं है और उनकी सिलेंडर बुकिंग पहले की तरह जारी रहेगी। 1 अक्टूबर से क्या बदलेगा? जिन्होंने ऑथेंटिकेशन करा लिया है, उनके लिए प्रक्रिया पहले जैसी ही रहेगी और वे रियायती दर पर सिलेंडर बुक कर सकेंगे। वहीं, जिन्होंने ऑथेंटिकेशन नहीं कराया है, उनके लिए सब्सिडी वाली तय दर (आरएसपी) पर सिलेंडर बुकिंग ऑथेंटिकेशन पूरा होने के बाद ही संभव हो पाएगी। ऑथेंटिकेशन पूरा करने के आसान तरीके उपभोक्ता निम्नलिखित तीन में से किसी भी तरीके से अपना बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन पूरा कर सकते हैं…     सिलेंडर डिलीवरी के समय: डिलीवरी बॉय मोबाइल ऐप के जरिए मौके पर ही ऑथेंटिकेशन पूरा कर सकता है।     डिस्ट्रिब्यूटर के शोरूम पर: उपभोक्ता सीधे अपने एलपीजी वितरक (एजेंसी) के शोरूम पर जाकर बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन करा सकते हैं।     ओएमसी के मोबाइल ऐप द्वारा: उपभोक्ता घर बैठे कंपनियों के आधिकारिक ऐप के माध्यम से खुद भी e-KYC कर सकते हैं…     इंडेन (Indane) ग्राहक: IndianOil ONE ऐप     भारतगैस (Bharatgas) ग्राहक: HelloBPCL ऐप     एचपी गैस (HP Gas) ग्राहक: HP PAY ऐप सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य किसी भी वास्तविक लाभार्थी को एलपीजी सेवा से वंचित करना नहीं, बल्कि प्रक्रिया को पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है।  

महानदी जल बंटवारे को लेकर सीएम साय ने साफ किया रुख, बोले- ओडिशा से नहीं है कोई विवाद

रायपुर   छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में कहा कि छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच पिछले कई दशकों से चला आ रहा महानदी जल विवाद अब बहुत जल्द सुलझ जाएगा। उनके अनुसार, इस दिशा में केंद्र सरकार सक्रिय रूप से प्रयास कर रही है और दोनों ही पड़ोसी राज्यों के साथ-साथ केंद्र में भी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार होने के कारण इस संवेदनशील मामले का आपसी सहमति से समाधान निकलना अब आसान हो गया है। अपने दौरे के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से शिष्टाचार मुलाकात की। इस उच्चस्तरीय बैठक के दौरान दोनों राज्यों के बीच आपसी सहयोग, क्षेत्रीय विकास और जन कल्याण से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। सांस्कृतिक संबंध गहरे मुख्यमंत्री साय ने इस बात पर जोर दिया कि छत्तीसगढ़ और ओडिशा सांस्कृतिक, सामाजिक और ऐतिहासिक रूप से एक-दूसरे के बेहद करीब हैं। दोनों राज्यों के सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के बीच आपसी पारिवारिक और सांस्कृतिक गहरे संबंध हैं। उन्होंने यह भी विश्वास दिलाया कि दोनों सरकारों के बीच बेहतर तालमेल और समन्वय से आम नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा और पूरे क्षेत्र की प्रगति को एक नई गति प्राप्त होगी। इसके अलावा, मुख्यमंत्री साय ने भुवनेश्वर स्थित प्रसिद्ध भगवान लिंगराज मंदिर पहुंचकर दर्शन-पूजन किए और राज्य की सुख-समृद्धि की कामना की। ट्रिब्यूनल के निर्देश और केंद्र की सकारात्मक पहल गौरतलब है कि महानदी जल बंटवारे को लेकर यह विवाद वर्ष 1983 से चला आ रहा है, जो लंबे समय से दोनों राज्यों के बीच चर्चा का विषय रहा है। वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी की अध्यक्षता में गठित विशेष ट्रिब्यूनल ने दोनों राज्यों को आगामी 28 सितंबर 2026 तक अपनी प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का सख्त निर्देश दिया है। तय समय से पहले सहमति से समाधान जानकारों का मानना है कि इस तय समय सीमा से पहले दोनों राज्यों के बीच आपसी सहमति से कोई ठोस समझौता सामने आ सकता है। कई राज्यों के मुद्दे सुलझे हाल के वर्षों में केंद्र सरकार की मध्यस्थता और पहल से देश के अन्य राज्यों के बीच कई पुराने जल विवाद सफलतापूर्वक सुलझाए गए हैं, जैसे कि किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना, ताजेवाला हेडवर्क्स समझौता, सोन नदी जल बंटवारा और केन-बेतवा लिंक परियोजना। इन सफल समझौतों की तर्ज पर अब महानदी विवाद के भी जल्द ही शांतिपूर्ण हल निकलने की संभावना जताई जा रही है।  

नस्ल सुधार ने बदली किसान विनोद की किस्मत, घर की बछिया बनी आर्थिक समृद्धि का आधार

​रायपुर  ​ग्रामीण अंचलों में अक्सर दैनिक जरूरतों की चीजों के लिए भी लोगों को संघर्ष करना पड़ता है। ऐसा ही कुछ हाल नारायणपुर जिले के धौड़ाई गांव निवासी किसान श्री विनोद नुरेटी का था। उनके परिवार में दूध की रोजाना जरूरत तो थी, लेकिन गांव में उपलब्धता न होने और बाजार में ऊंची कीमतों के कारण उन्हें काफी दिक्कत झेलनी पड़ती थी। परंतु, राज्य सरकार के पशुधन विकास विभाग के मार्गदर्शन और विनोद की मेहनत ने इस समस्या को न सिर्फ खत्म किया, बल्कि उनकी आजीविका की नई राह भी खोल दी। ​कृत्रिम गर्भाधान से नस्ल सुधार की नींव दूध की समस्या के स्थायी समाधान के लिए विनोद नुरेटी ने पशुधन विकास विभाग से संपर्क साधा। विभागीय सलाह पर उनकी देशी गाय का कृत्रिम गर्भाधान कराया गया। परिणामस्वरूप, एक उच्च नस्ल की बछिया का जन्म हुआ। देशी नस्ल में सुधार का यह प्रयोग किसान के लिए पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। ​'उन्नत मादा वत्स पालन योजना' से मिला आर्थिक बल बछिया के सही पोषण और नस्ल संवर्धन के लिए पशुधन विकास विभाग की उन्नत मादा वत्स पालन योजना के तहत विनोद को 18 हजार रुपये की अनुदान राशि प्रदान की गई। इसके साथ ही विभाग की ओर से समय-समय पर नि:शुल्क पशु चिकित्सा देखभाल और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराई गईं। ​आत्मनिर्भरता और आय का नया जरिया विभागीय मार्गदर्शन और अनुदान से विनोद ने बछिया की बेहतर देखरेख की, जो समय के साथ एक स्वस्थ और अत्यधिक दुधारू गाय के रूप में विकसित हुई। आज स्थिति यह है कि विनोद के परिवार को न केवल घर पर ही प्रचुर मात्रा में शुद्ध दूध मिल रहा है, बल्कि वे दूध, दही और घी बेचकर हर महीने अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रहे हैं।    ​ जो परिवार कल तक दूध की एक-एक बूंद के लिए दूसरों पर निर्भर था, आज वह खुद दूध उत्पादन कर आर्थिक रूप से स्वावलंबी बन चुका है। विनोद नुरेटी के लिए यह योजना केवल एक बछिया के पालन तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने उनके पूरे परिवार के जीवन में आर्थिक स्थिरता, सुविधा और सम्मान की नई सुबह ला दी है।