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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की ‘कृष्णायन’ की प्रशंसा, बताया श्रीकृष्ण जीवन प्रसंगों का सुंदर चित्रण

भगवान श्रीकृष्ण के जीवन के प्रसंगों की कृष्णायन" में प्रस्तुति सराहनीय : मुख्यमंत्री डॉ. यादव कृष्णायन में श्रीकृष्ण के जीवन की प्रेरक झलकियाँ, डॉ. यादव ने की सराहना "मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की 'कृष्णायन' की प्रशंसा, बताया श्रीकृष्ण जीवन प्रसंगों का सुंदर चित्रण विधानसभा के मानसरोवर सभागार में कलाकारों ने दिखाए भगवान के जीवन के प्रसंग भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनके योगदान को रेखांकित करने के लिए "कृष्णायन" जैसी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां प्रभावशाली माध्यम हैं। इस प्रस्तुति में शामिल कलाकारों ने सराहनीय प्रदर्शन किया है। प्रदेश के ऐसे स्थानों जिनसे भगवान श्रीकृष्ण का संबंध है, उनके महत्व को भी ऐसी सांस्कृतिक प्रस्तुति से समझा जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार शाम विधानसभा परिसर स्थित मानसरोवर सभाकक्ष में कृष्णायन की प्रस्तुति देखी। इसमें भगवान कृष्ण की जीवन की संपूर्ण कथा को सांगीतिक रूप से प्रस्तुत किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस प्रस्तुति के कलाकारों को एक लाख 11 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान कृष्ण ने जहां सांदीपनि आश्रम उज्जैन में शिक्षा ग्रहण की वहीं अमझेरा में विवाह संबंध, नारायणा धाम से सुदामा के साथ मैत्री और जानापाव में सुदर्शन चक्र प्राप्त करने के प्रसंग जन रूचि के हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने "कृष्णायन" के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के जीवन के विभिन्न पक्षों की जानकारी वाद्य यंत्रों, ध्वनि, प्रकाश और आतिशबाजी के साथ रोचक ढंग से मंच पर प्रस्तुत किये जाने की प्रशंसा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलाकारों को सम्मानित भी किया। मध्यप्रदेश बन सकता है, दूसरा वृंदावन: स्पीकर तोमर इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि मध्यप्रदेश के साथ भगवान कृष्ण का गहरा संबंध रहा है जिसे जन-जन तक पहुंचाया जाए तो मध्यप्रदेश दूसरा वृंदावन बन जाएगा। स्पीकर तोमर ने भजनों और गीतों के साथ की गई सुंदर प्रस्तुति के लिए समस्त कलाकारों को बधाई दी। कार्यक्रम में संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, बैतूल विधायक हेमन्त खण्डेलवाल, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और मंत्री गण, विधायक गण सहित अधिकारी, कर्मचारी उपस्थित थे। इन कलाकारों ने दी प्रस्तुति कृष्णायन प्रस्तुति में निर्देशक और प्रमुख कलाकार मोहित शेवानी के साथ ही अभिषेक बरथरे, शुभम, अंतिका विश्वकर्मा, श्रीजा उपाध्याय, हिमांशु पवार, विजय गौर, स्वप्निल, अनानंद, करन, दिव्यांश, राहुल, दिव्या, धनीराम, पंकज और ओमी शामिल थे।  

रायपुर : मुख्यमंत्री से एशियन अफ्रीकन पैसिफिक पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप की स्वर्ण पदक विजेता सुनमी राय पारेख ने की मुलाकात

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से उनके निवास कार्यालय में एशियन अफ्रीकन पैसिफिक पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप की स्वर्ण पदक विजेता सुनमी राय पारेख ने मुलाकात की। मुख्यमंत्री साय को रायपुर निवासी सुनमी राय पारेख ने बताया कि 05 से 13 जुलाई तक जापान के हिमेजी में एशियन पॉवरलिफ्टिंग एसोसिएशन द्वारा एशियन अफ्रीकन पैसिफिक पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप का आयोजन किया गया था। इस चैंपियनशिप में उन्होंने 57 किलोग्राम डेडलिफ्ट वर्ग में स्वर्ण पदक हासिल किया है।  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सुनमी राय पारेख को एशियन अफ्रीकन पैसिफिक पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक हासिल करने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि आपने अपनी मेहनत और समर्पण से छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाया है। प्रदेश की बेटियों को आपकी उत्कृष्ट उपलब्धि से प्रेरणा मिलेगी। इस अवसर पर अंजय शुक्ला, अंजिनेश शुक्ला, सनी पारेख सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।

वक्फ बोर्ड ने पंजीकृत की 5000 संपत्तियाँ, किराया बढ़ाने की योजना पर काम शुरू

रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड की स्थिति पर एक पुरानी कहावत “आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपैया” पूरी तरह से लागू होती है। राजधानी रायपुर में बैजनाथ पारा में एक दुकान का किराया मात्र 80 पैसे है, जबकि इस किराए के लिए बोर्ड को दो रुपये की रसीद काटनी पड़ती है। यह किराया 1980 में बढ़ा था और तब से अब तक 45 वर्षों से यही किराया चल रहा है। इससे पहले यह किराया 35 पैसे था। वक्फ बोर्ड के पोर्टल पर प्रदेशभर में लगभग पांच हजार संपत्तियां पंजीकृत हैं। इन संपत्तियों से 200 करोड़ रुपये सालाना किराया मिलना चाहिए, लेकिन वर्तमान में केवल पांच लाख रुपये ही प्राप्त हो रहे हैं। किराया बढ़ाने के लिए बोर्ड ने दो बार नोटिस भेजा है, लेकिन दुकानदारों की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। यदि तीसरे नोटिस के बाद भी कोई उत्तर नहीं मिलता है, तो दुकानों को सील करने की कार्रवाई की जाएगी। बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम ने बताया कि प्रदेश में 100 रुपये से 500 रुपये तक किराये वाली लगभग 700 दुकानें हैं। इनमें रायपुर में टिकरापारा सहित अन्य क्षेत्रों में 200 से अधिक दुकानें शामिल हैं। वहीं, बाजार में 200 वर्गफीट की दुकानों का किराया 25,000 से 35,000 तक है। पहले 23 हजार, अब मिल रहा पांच लाख किराया डॉ. सलीम ने बताया कि वक्फ बोर्ड की संपत्तियों का किराया संशोधित करने की योजना बनाई जा रही है। कुछ जिलों में किराया संशोधन किया गया है, जिससे बोर्ड की आय में वृद्धि हुई है। बिलासपुर में 70 से अधिक दुकानों का किराया वक्फ बोर्ड को मात्र 23,000 रुपये मिल रहा था, लेकिन अब यह राशि बढ़कर पांच लाख से अधिक हो गई है। बोर्ड का उद्देश्य समाज के जरूरतमंद लोगों की मदद करना है, विशेषकर कमजोर वर्ग के बच्चों की शिक्षा और अन्य खर्चों का वहन करना है। उन्होंने कहा कि हम दुकानदारों को प्रेरित कर रहे हैं कि वे एक बच्चे को गोद लें और उनकी शिक्षा का खर्च उठाएं। बोर्ड की संपत्ति पर कुछ परिवारों का ही कब्जा बोर्ड की दुकानों का किराया बहुत कम होने के कारण कुछ लोग इसका दुरुपयोग कर रहे हैं। कई लोग अपनी खुद की दुकानों के साथ-साथ बोर्ड की दुकानों को किराए पर लेकर मुनाफा कमा रहे हैं। डॉ. सलीम ने बताया कि बोर्ड की संपत्तियों पर मौलाना, मौलवी और मुल्तवियों के परिवारों का कब्जा है, जिससे बोर्ड अपने उद्देश्यों को पूरा नहीं कर पा रहा है।     बोर्ड की आय बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है ताकि समाज के कल्याण के लिए स्कूल और अस्पतालों का निर्माण किया जा सके। -डॉ. सलीम राज अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड

मुख्यमंत्री डॉ. यादव से पर्यावरण प्रेमियों ने की भेंट

मुख्यमंत्री डॉ. यादव से पर्यावरण प्रेमियों ने की भेंट बाजारों में वस्त्र के झोले वितरित करने के प्रकल्प की दी जानकारी भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से बुधवार की शाम मुख्यमंत्री निवास में पॉलिथीन मुक्त बिट्टन मार्केट समूह की सदस्यों ने भेंट की। ग्रुप की पर्यावरण प्रेमी महिला सदस्यों ने श्रीमती सीमा सिंह जादौन ने नेतृत्व में भेंट कर जानकारी दी कि बाजारों में ग्रुप की सदस्य वस्त्र के झोले वितरित करने का कार्य गत कई वर्ष से कर रही हैं। इन प्रयासों में सफलता भी मिली है। हजारों नागरिक पॉलीथिन के स्थान पर कपड़े के झोलों का उपयोग करने के प्रति जागरूक हो रहे हैं। मुख्यमंत्री यादव ने इस सामाजिक प्रकल्प की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ यादव से भेंट करने वाली पर्यावरण प्रेमी महिला समाज सेवियों में श्रीमती समता अग्रवाल , सुश्री रुचिका सचदेवा और अल्पना गुप्ता शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को संस्था द्वारा तैयार करवाए गए कपड़े के झोले भेंट भी किए गए।  

बीमार शिक्षकों के लिए सहारा बनी ‘जीवन दान योजना’, इलाज में मिलेगी आर्थिक सहायता

लखनऊ उत्तर प्रदेश के लाखों शिक्षकों के लिए राहत की खबर है। अब गंभीर बीमारी की स्थिति में उन्हें आर्थिक मदद मिल सकेगी। इसके लिए टीचर्स सेल्फ केयर टीम (TSCT) ने ‘जीवन दान योजना’ की शुरुआत की है, जिसके तहत जरूरतमंद शिक्षकों को पांच लाख रुपये तक की सहायता मिलेगी। यह योजना शिक्षकों द्वारा शिक्षकों के लिए शुरू की गई है और पूरी तरह से स्वैच्छिक है। उत्तर प्रदेश में शिक्षकों के लिए एक बड़ी पहल की गई है। प्रदेश की चार लाख सदस्यीय संस्था टीचर्स सेल्फ केयर टीम (TSCT) ने ‘गंभीर बीमारी के लिए जीवन दान योजना’ शुरू की है। इस योजना का उद्देश्य जरूरतमंद शिक्षकों को गंभीर बीमारियों की स्थिति में आर्थिक सहायता देना है।   इस योजना के तहत शिक्षक सदस्य 10 अगस्त तक 200 रुपये की राशि जमा करेंगे, जो कि एक कोष (कार्पस फंड) में संचित होगी। इस फंड से किसी भी सदस्य को गंभीर बीमारी के दौरान अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में अधिकतम पांच लाख रुपये तक की सहायता राशि दी जाएगी। योजना पूरी तरह ऐच्छिक है। इसमें भाग लेना या न लेना पूरी तरह शिक्षक की मर्जी पर निर्भर है और इसका असर संस्था की अन्य योजनाओं पर नहीं पड़ेगा। संस्था के संस्थापक अध्यक्ष विवेकानंद आर्य ने बताया कि यह योजना शिक्षकों की आपसी सहायता की भावना को मजबूत करती है। इस योजना के लिए कुछ शर्तें भी तय की गई हैं-     सहायता केवल तभी दी जाएगी जब इलाज का खर्च 2 लाख रुपये से अधिक हो।     केवल अस्पताल में भर्ती होने पर ही यह सहायता मान्य होगी।     योजना में केवल एलोपैथिक इलाज को मान्यता दी गई है।     एक सदस्य को दो वर्षों में केवल एक बार सहायता दी जाएगी। लॉक-इन पीरियड सामान्य शिक्षकों के लिए 18 माह और शिक्षामित्र व अनुदेशकों के लिए 17 माह तय किया गया है, जिसे जुलाई से 18 माह किया जाएगा। इसमें यह भी तय किया गया है कि यदि किसी शिक्षक के पास मेडिकल इंश्योरेंस है, तो पहले उसे उसी सीमा तक सहायता दी जाएगी। इंश्योरेंस की सीमा से अधिक खर्च होने पर संस्था की योजना के तहत पूरी सहायता दी जाएगी।

‘नियद नेल्ला नार’: सुकमा में विकास और विश्वास की मिसाल

आत्मसमर्पित माओवादियों को मिल रहा नया जीवन कौशल विकास प्रशिक्षण से बदल रही है बस्तर के युवाओं और महिलाओं की जिंदगी राज्य सरकार की माओवादी आत्मसमर्पण राहत एवं पुनर्वास नीति-2025 ला रही रंग रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा लागू माओवादी आत्मसमर्पण राहत एवं पुनर्वास नीति-2025 और बस्तर संभाग के अंदरूनी गांवों के समग्र विकास के लिए विशेष रूप से संचालित ‘नियद नेल्ला नार’  योजना ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास और विश्वास का नया मार्ग प्रशस्त किया है। इस योजना के कन्वर्जेंस के माध्यम से जिला प्रशासन सुकमा द्वारा आत्मसमर्पित माओवादियों को कौशल प्रशिक्षण, पुनर्वास एवं स्वरोजगार से जोड़कर समाज की मुख्यधारा में सफलतापूर्वक जोड़ा जा रहा है। कलेक्टर श्री देवेश कुमार ध्रुव के मार्गदर्शन में चल रहे इस कार्यक्रम के अंतर्गत लाइवलीहुड कॉलेज एवं ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान में विभिन्न ट्रेड में नि:शुल्क प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है ताकि आत्मसमर्पित युवा और महिलाएं आर्थिक रूप से स्वावलंबी होकर समाज में सम्मानजनक जीवन जी सकें। पुनर्वास केंद्र बना नई राह की शुरुआत कोंटा विकासखंड की अनीता सोड़ी जैसी आत्मसमर्पित महिलाओं के जीवन में यह योजना नई दिशा लेकर आई है। अनीता बताती हैं कि पुनर्वास केंद्र ने हमें यह एहसास कराया कि शांति और सम्मान से भी जीवन जीया जा सकता है। सिलाई, कृषि समेत अन्य आजीविका प्रशिक्षणों ने हमारा आत्मविश्वास बढ़ाया है। अब मैं स्वयं का सिलाई कार्य प्रारंभ कर परिवार को बेहतर भविष्य देना चाहती हूं। अनीता के साथ सुश्री वेट्टी कन्नी, हड़मे माड़वी, कड़ती विज्जे समेत 6 आत्मसमर्पित महिलाएं लाइवलीहुड कॉलेज सुकमा में चल रहे एक माह के सिलाई प्रशिक्षण में हिस्सा ले रही हैं। ‘सक्षम योजना’ के अंतर्गत उन्हें 40 हजार से 2 लाख रुपये तक का ऋण 3% ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जाएगा तथा निःशुल्क सिलाई मशीन एवं प्रमाण पत्र भी प्रदान किए जाएंगे। लाइवलीहुड कॉलेज में संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रम में 30 किशोरी बालिकाएं एवं महिलाएं हिस्सा ले रही हैं। इन्हें ब्लाउज, ड्रेस, स्कूल यूनिफॉर्म एवं शर्ट-पैंट की सिलाई की ट्रेंनिग दी जा रही है। साथ ही नोनी सुरक्षा योजना, महतारी वंदन योजना, सक्षम योजना, एवं महिला ऋण योजनाओं की जानकारी देकर उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ने की पहल भी की जा रही है, जिससे महिला सशक्तिकरण को नई गति मिल रही है। नियद नेल्ला नार योजना से बस्तर में विकास और विश्वास की बहार बह रही है। अब तक 79 आत्मसमर्पित माओवादियों को सिलाई, कृषि-नर्सरी, वाहन-चालन, राजमिस्त्री एवं उद्यमिता जैसे ट्रेड्स में प्रशिक्षण दिया जा चुका है। आगामी सप्ताह से 30 युवा राजमिस्त्री प्रशिक्षण के लिए आरसेटी में प्रशिक्षण लेंगे। पुनर्वास केंद्र सुकमा में वर्तमान में 42 प्रशिक्षणार्थी (21 महिलाएं) निवासरत हैं जिन्हें क्रमशः कौशल प्रशिक्षण से जोड़ा जा रहा है। योजना के कन्वर्जेंस से युवाओं को मुख्यमंत्री कौशल विकास, सक्षम, पीएम स्वनिधि, स्टार्टअप, कृषि उद्यमिता और महिला ऋण योजनाओं से जोड़कर स्वरोजगार की राह दिखाई जा रही है जो बस्तर के अंदरूनी गांवों में रोजगार, सम्मान तथा विकास के नए युग का सूत्रपात कर रही है। छत्तीसगढ़ सरकार की दूरदर्शी नीति और ‘नियद नेल्ला नार’ योजना ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब सरकार संवेदना, अवसर और कौशल के साथ लोगों तक पहुँचती है तो बदलाव सिर्फ संभव ही नहीं बल्कि सुनिश्चित होता है। बस्तर की यह परिवर्तन यात्रा आने वाले समय में शांति, विकास और समृद्धि की स्थायी नींव तैयार करेगी।

नियमों में सख्ती: गणेश प्रतिमाएं सिर्फ तय मैदान में ही बिकेंगी, सड़क पर बिक्री पर रोक

रायपुर  राजधानी की सड़कों पर अक्सर त्योहारी सीजन में जाम की स्थिति बनती थी, जिससे निपटने के लिए निगम ने मुहीम शुरू कर दी है. इस बार गणेशोत्सव के लिए मूर्तियों की बिक्री सड़क किनारे नहीं होगी. जोन 5 और जोन 7 क्षेत्र में सड़क किनारे मूर्तियों की बिक्री करते पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी. निगम ने लाखेनगर मैदान में मूर्तिकारों को मूर्तियां बेचने की अनुमति दी है. महापौर मीनल चौबे के निर्देश पर एमआईसी मेंबर दीपक जायसवाल ने जोन कमिश्नर खीरसागर नायक और राकेश शर्मा के अलावा अधिकारियों के साथ मूर्तिकारों की बैठक बुलाई. इनमें मूर्तिकार संघ के अध्यक्ष श्री शुद्ध प्रजापति, पदाधिकारी रवि प्रजापति, कुती प्रजापति और अरूण प्रजापति शामिल हुए. कुम्हार समाज के साथ ही मूर्तिकारों ने भी अपनी सहमति दे दी. बैठक में मूर्तिकारों को बताया गया कि सडक पर श्री गणेश मूर्ति का विक्रय करने के कारण शहर में यातायात व्यवस्था पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ता है. इसीलिए सभी जोनो में 1 स्थान निर्धारित कर वहा व्यवस्थित रूप से श्री गणेश मूतिर्यों का विक्रय करने की व्यवस्था देने प्रयास किया जा रहा है. इसी के चलते जोन 5 एवं जोन 7 के क्षेत्र के कुम्हार समाज के प्रतिनिधियों मूर्ति कलाकारो के लिए  ईदगाह भाठा, लाखे नगर मैदान के स्थल का श्रीगणेश उत्सव के पूर्व श्री गणेश की मूतिर्यों का विक्रय करने निर्धारण किया गया है.

स्वतंत्रता दिवस से पहले बड़ी घोषणा: यूपी-राजस्थान को जोड़ेगी नई वंदे भारत एक्सप्रेस

लखनऊ 15 अगस्त से पहले उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को वंदे भारत की नई सौग़ात मिल सकती है। लखनऊ के गोमतीनगर स्टेशन से जयपुर के लिए वंदे भारत एक्सप्रेस का संचालन प्रस्तावित है। यह ट्रेन सुबह 5:50 बजे लखनऊ से रवाना होकर दोपहर 2 बजे जयपुर पहुंचेगी। वहीं, वापसी में ट्रेन दोपहर 3 बजे जयपुर से चलकर रात 11 बजे गोमतीनगर स्टेशन पर पहुंचेगी। आठ घंटे में तय करेगी सफर बताया जा रहा है कि हफ़्ते में 6 दिन वंदे भारत का संचालन होगा। आधुनिक सुविधाओं से लैस यह सेमी हाई-स्‍पीड ट्रेन दोनों राजधानियों के बीच का सफर आठ घंटे में तय करेगी। शनिवार के दिन इसका संचालन नहीं होगा। उस दिन ट्रेन की मेंटेनेंस की जाएगी। पूर्वोत्तर रेलवे ने लखनऊ-जयपुर वंदे भारत एक्‍सप्रेस का प्रस्‍ताव रेलवे बोर्ड को भेजा है। इस कदम से यात्रियों को तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा का विकल्प मिलेगा। बता दें कि भारत में इस समय 70 से ज्‍यादा वंदे भारत एक्‍सप्रेस ट्रेनें विभिन्‍न रूटों पर चल रही हैं। जिनमें सेमी हाई स्‍पीड ट्रेनों को यात्रियों का भी खूब साथ मिल रहा है। जिसकी वजह से ज्‍यादातर रूट्स पर इन ट्रेनों की ऑक्‍यूपेंसी फुल है। जल्द ही नागपुर-पुणे, अमृतसर-कटरा और बेंगलुरु-बेलगावी के बीच भी वंदे भारत एक्‍सप्रेस चल सकती है।

अब आसमान से तय होगा इंदौर-भोपाल का सफर, हेलीकॉप्टर सेवा के लिए प्रक्रिया शुरू

इंदौर अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेस लिमिटेड (AICTSL) की बोर्ड बैठक का आयोजन बुधवार को महापौर और बोर्ड अध्यक्ष पुष्यमित्र भार्गव की अध्यक्षता में किया गया। बैठक में शहर के सार्वजनिक परिवहन को पर्यावरण अनुकूल और यात्रियों के लिए अधिक सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इसमें एक बड़ी घोषणा भी की गई, जिसमें बताया गया कि इंदौर से भोपाल के बीच अब हेलीकॉप्टर सेवा शुरू करने पर भी विचार किया जा रहा है। जिसके लिए AICTSL एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट मंगाने का निर्णय भी लिया गया है। हेलीकॉप्टर सेवा पर मिलने वाले प्रस्तावों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। रक्षाबंधन पर महिलाओं को मिलेगी मुफ्त यात्रा सुविधा महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बोर्ड बैठक में एक और महत्वपूर्ण घोषणा की। इसमें उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन पर्व के उपलक्ष्य में महिला यात्रियों को शहर में संचालित सभी बसों में नि:शुल्क यात्रा की सौगात दी जाएगी। इसे उन्होंने माताओं और बहनों को रक्षाबंधन का उपहार बताया। बैठक में संभागायुक्त एवं बोर्ड उपाध्यक्ष दीपक सिंह, कलेक्टर एवं निदेशक आशीष सिंह, नगर निगम कमिश्नर एवं प्रबंध निदेशक शिवम वर्मा, आईडीए सीईओ रामप्रकाश अहिरवार, AICTSL सीईओ दिव्यांक सिंह सहित अन्य कई वरिष्ठ अफसर मौजूद थे।  50 नई इलेक्ट्रिक बसें चलाएंगे इंदौर में ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देने की दिशा में इस माह 50 नई इलेक्ट्रिक बसें सड़कों पर उतरेंगी। वर्तमान में शहर में बीआरटीएस कॉरिडोर पर 30 और अन्य मार्गों पर 50 इलेक्ट्रिक बसें संचालित हो रही हैं। इसके साथ ही केंद्र सरकार की पीएम ई-बस सेवा योजना के अंतर्गत प्रथम चरण में इंदौर को 150 इलेक्ट्रिक बसों की सौगात मिलने जा रही है। इन बसों के संचालन के लिए आईएसबीटी नायता मुंडला और देवास नाका पर दो नए इलेक्ट्रिक बस डिपो तैयार किए जाएंगे, जिसकी वित्तीय सहायता केंद्र और राज्य सरकार द्वारा दी जाएगी। इंटरसिटी इलेक्ट्रिक बस सेवा का होगा शुभारंभ इंदौर से आसपास के शहरों के लिए जल्द ही 26 इंटरसिटी इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी। ये बसें इंदौर से उज्जैन, भोपाल, खरगोन, सेंधवा, खंडवा, बुरहानपुर, रतलाम, धार-मांडव और महेश्वर तक चलेंगी। निविदा प्रक्रिया पूर्ण कर ली गई है। पीपीपी मॉडल पर भविष्य की इलेक्ट्रिक बसों के लिए ऑपर्च्युनिटी चार्जिंग स्टेशन भी बनाए जाएंगे। नई एसी लग्जरी बस सेवाएं भी होंगी शुरू महापौर ने बताया कि पूर्व में की गई निविदा प्रक्रिया के आधार पर अब इंदौर से कोटा, मंदसौर होते हुए नीमच, जीरापुर और सोयत कला तक एसी बस सेवा भी प्रारंभ की जाएगी। पूर्व में आमंत्रित निविदा प्रक्रिया में कोई बोलीदाता न मिलने के कारण अब निगम स्वयं डबल डेकर बसें खरीदेगा। राष्ट्रीय स्तर पर जुड़ने की तैयारी, फिर से होंगी निविदाएं इंदौर को राष्ट्रीय मार्गों से जोड़ने के लिए कई शहरों के लिए फिर से निविदाएं आमंत्रित की जाएंगी। जिसमें राजकोट (वाया सूरत), रायपुर (वाया नागपुर), जयपुर, ग्वालियर, कानपुर (वाया झांसी), अहमदाबाद, उदयपुर, पुणे, मुंबई, अयोध्या, वाराणसी, नई दिल्ली, दमोह, बांसवाड़ा, भुसावल और शहडोल शामिल है। ई-बाइक से लास्ट माइल कनेक्टिविटी को मिलेगी मजबूती मौजूदा माय बाइक प्रोजेक्ट के तहत शहर में 1500 साइकिलें सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं। भविष्य में ई-बाइक सेवा भी शुरू करने पर विचार किया गया। AICTSL को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास AICTSL ने एबी रोड पर 42 यूनिपोल पर विज्ञापन के लिए निविदाएं आमंत्रित की हैं। जल्द ही डिपो पर भी यूनिपोल लगाए जाएंगे और उन पर विज्ञापन के लिए बोली प्रक्रिया शुरू होगी।

मध्य प्रदेश में विज्ञान बना बदलाव की गाड़ी, ‘साइंस ऑन व्हील्स’ से टूट रही रूढ़ियां, संवर रहा भविष्य

शहडोल मध्यप्रदेश के जनजातीय जिलों में अब विज्ञान केवल किताबों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने और बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को रोकने का मजबूत हथियार बन चुका है। शहडोल जिले के शिक्षक संतोष कुमार मिश्रा की अनोखी पहल 'साइंस ऑन व्हील्स' (Science on Wheels) न सिर्फ ग्रामीण बच्चों में वैज्ञानिक सोच जगा रही है, बल्कि समाज में गहराई से जमी कुप्रथाओं के खिलाफ जागरूकता की अलख भी जगा रही है। शहडोल जिला, जहां आज भी कई ग्रामीण इलाकों में झाड़-फूंक, दागना और बाल विवाह जैसी परंपराएं प्रचलित हैं, वहां शिक्षक संतोष कुमार मिश्रा ने ‘साइंस ऑन व्हील्स’ की शुरुआत की। इस पहल का मकसद था विज्ञान को कक्षा की चारदीवारी से बाहर निकालकर गांव-गांव तक पहुंचाना।   ‘साइंस ऑन व्हील्स’ के अंतर्गत एक चलती-फिरती साइंस वैन के ज़रिए स्कूल, खेत, गांव और छात्रावासों में जाकर विज्ञान की बेसिक और दिलचस्प जानकारी दी जाती है। इसमें बच्चों को विज्ञान के प्रयोग करवाए जाते हैं और उन्हें साइंस एंबेस्डर बनाया जाता है, ताकि वे अपने घर और समाज में वैज्ञानिक सोच फैला सकें। इस पहल की सबसे खास बात यह रही कि इसने बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा दिया। जब ग्रामीण इलाकों की बच्चियों ने इन विज्ञान गतिविधियों में हिस्सा लेना शुरू किया, तो अभिभावकों को भी यह समझ में आने लगा कि उनकी बेटियां भी होशियार हैं। परिणामस्वरूप कई बच्चियों का बाल विवाह टला और वे स्कूल में बने रहने लगीं। ‘साइंस ऑन व्हील्स’ सिर्फ पढ़ाई का जरिया नहीं रहा, बल्कि यह बेटियों को आत्मविश्वासी, जागरूक और स्वतंत्र सोच वाला नागरिक बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हुआ है। अभिभावकों के साथ संवाद कर उन्हें बेटियों की शिक्षा के प्रति जागरूक किया गया। साथ ही उन्हें यह बताया गया कि झाड़-फूंक, दागना जैसी परंपराएं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से गलत हैं और इनसे दूर रहना चाहिए।