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ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में छत्तीसगढ़ बंद, हजारों मेडिकल स्टोरों पर लटके ताले

सरगुजा. ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में आज देशभर में केमिस्ट संगठन हड़ताल पर हैं। छत्तीसगढ़ में करीब 18 हजार मेडिकल स्टोर बंद हैं, जिनमें थोक और रिटेल दोनों दुकानें शामिल हैं। रायपुर, बिलासपुर में सुबह से मेडिकल स्टोर नहीं खुले हैं। संगठनों का कहना है कि ऑनलाइन कंपनियों की भारी छूट से छोटे मेडिकल स्टोर्स का कारोबार प्रभावित हो रहा है। दवा व्यापारियों के इस आंदोलन को CAIT, चेंबर ऑफ कॉमर्स और कांग्रेस के चिकित्सा प्रकोष्ठ ने समर्थन दिया है। CAIT के राष्ट्रीय वाइस चेयरमैन अमर पारवानी ने कहा कि यह सिर्फ दवा कारोबार का मुद्दा नहीं, बल्कि छोटे व्यापारियों और स्थानीय बाजार को बचाने का मामला है। डिस्ट्रिक्ट केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय कृपलानी ने कहा कि ऑनलाइन दवा बिक्री और भारी छूट की वजह से स्थानीय मेडिकल स्टोर्स का कारोबार प्रभावित हो रहा है। इससे छोटे व्यापारियों पर संकट बढ़ रहा है। स्थानीय व्यापारियों के हितों पर ध्यान दे सरकार छत्तीसगढ़ कांग्रेस के चिकित्सा प्रकोष्ठ ने भी दवा व्यापारियों की हड़ताल का समर्थन किया है। प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने कहा कि बड़ी ऑनलाइन और विदेशी कंपनियां भारी छूट देकर स्थानीय दवा कारोबार को नुकसान पहुंचा रही हैं। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ दवा व्यापारियों की नहीं, बल्कि छोटे कारोबारियों की भी है। कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि स्थानीय व्यापारियों और जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखकर फैसले लिए जाएं। कांग्रेस चिकित्सा प्रकोष्ठ ने केमिस्ट हड़ताल का किया समर्थन। मरीजों को परेशानी ना हो इसके लिए व्यवस्था देशभर में चल रही हड़ताल को देखते हुए छत्तीसगढ़ खाद्य एवं औषधि प्रशासन अलर्ट हो गया है। मरीजों को दवाओं की कमी न हो, इसके लिए राज्यभर में जरूरी दवाएं और मेडिकल सामान उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने कहा है कि सरकारी जनऔषधि केंद्रों, धन्वंतरी मेडिकल स्टोर्स, सरकारी अस्पतालों, नर्सिंग होम और अन्य मेडिकल स्टोर्स के जरिए लोगों को जरूरी दवाएं उपलब्ध कराई जा रही है। केमिस्ट एसोसिएशन से सहयोग की अपील खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने छत्तीसगढ़ केमिस्ट एवं ड्रगिस्ट एसोसिएशन से भी अपील की है कि हड़ताल के दौरान मरीजों को जरूरी दवाएं मिलती रहे। इसके लिए दवा दुकानों और स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित न करने में सहयोग मांगा गया है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है। जरूरत से ज्यादा दवाइयों का स्टॉक न करें प्रशासन ने अपील की है कि घबराकर ज्यादा दवाइयां जमा न करें। रोजाना दवा लेने वाले लोग जरूरत की दवाएं पहले से रख सकते हैं। जरूरत पड़ने पर सरकारी अस्पतालों, जनऔषधि केंद्रों और मेडिकल स्टोर्स में दवाइयां उपलब्ध रहेंगी।

समय सीमा से पहले खत्म हुई माओवादी चुनौती, प्रभावित इलाकों में विकास कार्यों को मिलेगी रफ्तार

भोपाल  छत्तीसगढ़ के बस्तर में आयोजित मध्य क्षेत्रीय बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश ने केंद्र सरकार द्वारा तय समय सीमा से पहले माओवादी समस्या के उन्मूलन में सफलता हासिल की है। उन्होंने बताया कि कई इनामी माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया, जबकि सुरक्षा बलों और जवानों को लगातार प्रोत्साहित किया गया, जिससे नागरिकों का सरकार पर विश्वास मजबूत हुआ है। केंद्रीय मंत्री शाह और कई मुख्यमंत्री रहे मौजूद मुख्यमंत्री ने माओवादी समस्या मुक्त भारत के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का प्रदेशवासियों की ओर से आभार व्यक्त किया। बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी मौजूद रहे। 330 करोड़ रुपये से होगा विकास मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि माओवादी प्रभावित क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए नई कार्ययोजना तैयार की गई है। प्रभावित गांवों के लिए 330 करोड़ रुपये की लागत से सूक्ष्म विकास योजना लागू की गई है। इसके तहत सड़क, पुल, मोबाइल टावर और नई सुरक्षा व्यवस्थाओं का विस्तार किया जा रहा है। बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रदेश में सुशासन और जनकल्याण से जुड़े प्रयासों की जानकारी भी साझा की। उन्होंने सहकारिता, साइबर सुरक्षा, शिक्षा, शहरी विकास, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल कल्याण, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और दुग्ध उत्पादन जैसे क्षेत्रों में मध्य प्रदेश की प्रगति को रेखांकित किया।बैठक में सुशासन, जनकल्याण, क्षेत्रीय विकास और सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। मोहन यादव सरकार एमपी को औद्योगिक केंद्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध बीजेपी की डबल इंजन की सरकार ने एमपी में औद्योगिक सेक्टर के विस्तार के लिए सुगम नीतियां और अनुकूल वातावरण तैयार किया है। यही वजह है कि एमपी की मोहन यादव सरकार निवेशकों को आकर्षित कर रही है और प्रदेश को सशक्त बना रही है। मालूम हो कि एमपी सरकार ने मध्य प्रदेश के औद्योगिक सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। सरकार का फोकस निवेश आकर्षित करने, रोजगार बढ़ाने और राज्य को औद्योगिक हब बनाने पर रहा है। राज्य सरकार ने 2025 को 'उद्योग और रोजगार का वर्ष' घोषित किया, ताकि उद्योग और रोजगार को प्राथमिकता दी जा सके। साथ ही नई 'औद्योगिक प्रोत्साहन नीति 2025' लागू की गई, जिसमें टेक्सटाइल, ईवी मैन्युफैक्चरिंग, फार्मा, बायोटेक, रिन्यूएबल एनर्जी और डिफेंस सेक्टर के लिए विशेष नीतियां बनाई गई हैं। सरकार ने अगले पांच सालों में 20 लाख रोजगार और औद्योगिक जीडीपी को 6 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। सीएम मोहन यादव ने डिजिटल ट्रांसमिशन कार्यक्रम में की शिरकत उधर, पिछले दिनों एमपी के चीफ मिनिस्टर मोहन यादव ने जबलपुर भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत समेत अन्य गणमान्य लोगों के साथ एक खास कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान सीएम मोहन ने कहा, 'मध्य प्रदेश न्याय और संस्कृति की गौरवशाली परंपराओं का प्रदेश है। आज जबलपुर में भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत के साथ मुलाकात की।' सीएम ने आगे कहा, 'केंद्रीय विधि एवं न्याय (स्वतंत्र प्रभार) तथा संसदीय कार्य राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल और मप्र उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा के साथ 'डिजिटल ट्रांसमिशन: पेपरलेस कानूनी प्रणाली को आगे बढ़ाना' विषय पर आयोजित विधि व्याख्यान कार्यक्रम में विचार साझा किए। हमारे प्राचीन ग्रंथों में भारतीय न्याय परंपरा के कई महान उदाहरण मिलते हैं। आज न्याय व्यवस्था, लोकतंत्र और भारतीय मूल्यों के पुनर्जागरण का काल है।'  

मध्यप्रदेश में टेक्नोलॉजी ट्रांसफॉर्मेशन की तैयारी, गूगल संग बैठक में AI आधारित बदलावों पर फोकस

भोपाल   मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 20 मई बुधवार यानी आज राजधानी भोपाल में गूगल के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ उच्च स्तरीय रणनीतिक बैठक करेंगे। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के समन्वय से आयोजित ये बैठक मध्य प्रदेश में एआई आधारित डिजिटल परिवर्तन, स्मार्ट गवर्नेंस और तकनीक आधारित विकास को नई दिशा प्रदान करेगी। बैठक में गूगल क्लाउड इंडिया के निदेशक (पब्लिक सेक्टर) आशीष वाट्टल, एपीएसी क्षेत्र के निदेशक (स्ट्रेटेजिक एंगेजमेंट्स) मदन ओबेरॉय समेत सिंगापुर से गूगल क्लाउड के वैश्विक प्रतिनिधि, हेल्थकेयर एआई और डिजिटल अवसंरचना विशेषज्ञ और राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे। इन समाधानों के इस्तेमाल पर होगी चर्चा बैठक में मध्य प्रदेश सरकार और गूगल के बीच दीर्घकालिक तकनीकी साझेदारी, उन्नत क्लाउड तकनीकों और एआई आधारित समाधानों के उपयोग पर चर्चा होगी। साथ ही डिजिटल गवर्नेंस को अधिक प्रभावी बनाने, जनसेवाओं को सरल और सुगम बनाने और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने पर विचार किया जाएगा। नागरिक सेवा विकास को दी जाएगी प्राथमिकता धर्म नगरी उज्जैन में आयोजित होने वाले सिंहस्थ-2028 के तकनीक आधारित प्रबंधन, स्मार्ट भीड़ प्रबंधन, एआई आधारित स्मार्ट पुलिसिंग, डेटा आधारित निगरानी, अधिक प्रभावी नागरिक सेवा विकास को प्राथमिकता दी जाएगी। स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई आधारित रोग पहचान और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली, कृषि में किसानों को डिजिटल सेवाओं की बेहतर पहुंच और शिक्षा के क्षेत्र में एआई आधारित शिक्षण और कौशल विकास पर भी विचार किया जाएगा। एमपी और गूगल के बीच दूरदर्शी तकनीकी साझेदारी को मिलेगी नई दिशा बैठक में एआई स्किलिंग, एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, स्टार्टअप इकोसिस्टम और पर्यावरण संरक्षण के लिए उन्नत तकनीकों के उपयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा होगी। ये बैठक मध्य प्रदेश और गूगल के बीच दूरदर्शी तकनीकी साझेदारी को नई दिशा देने और प्रदेश को नवाचार और अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित विकास के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित होगी। बैठक में ये होंगे शामिल बैठक में गूगल क्लाउड इंडिया के निदेशक (पब्लिक सेक्टर) आशीष वाट्टल, एपीएसी क्षेत्र के निदेशक (स्ट्रेटेजिक एंगेजमेंट्स) मदन ओबेरॉय समेत सिंगापुर से गूगल क्लाउड के वैश्विक प्रतिनिधि, हेल्थकेयर एआई और डिजिटल अवसंरचना विशेषज्ञ और राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। इनपर होगा विचार बैठक में मध्य प्रदेश और गूगल के बीच दीर्घकालिक तकनीकी साझेदारी, उन्नत क्लाउड तकनीकों और एआई पर आधारित समाधानों के इस्तेमाल पर चर्चा की जाएगी। साथ ही, डिजिटल गवर्नेंस को अधिक प्रभावी बनाने, जनसेवाओं को सरल एवं सुगम बनाने और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने पर विचार किया जाएगा।

‘गौरक्षा बनेगा सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा’, यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का दावा

अंबेडकरनगर  ज्योतिर्मठ के स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की 81 दिवसीय गविष्ठ यात्रा जिले में पहुंची। गाय को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने, गोवंशी संरक्षण और गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग को लेकर निकली यात्रा का विभिन्न स्थानों पर स्वागत किया गया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 का चुनाव गोमाता की रक्षा के मुद्दे पर लड़ा जाएगा। जो गोमाता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध होगा, वही उनके वोट का अधिकारी होगा। इसी उद्देश्य से वह प्रदेश की प्रत्येक विधानसभा में पहुंचकर जन-जागरण अभियान चला रहे हैं। अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि गाय केवल दूध देने का साधन नहीं, बल्कि आशीर्वाद का प्रतीक है। अब तक लोग बिजली, पानी और सड़क जैसे मुद्दों पर मतदान करते रहे हैं, लेकिन वर्ष 2027 में गोरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा बनेगा। एक सवाल के जवाब में प्रदेश में चल रहे अवैध बूचड़खानों और गोहत्या पर चिंता जताई। कहा कि लाइसेंस जारी होने से गोहत्या वैध नहीं हो सकती। सवाल उठाया कि गोमांस निर्यात से जुड़े लोग क्या वास्तव में गोमाता की रक्षा कर सकते हैं। अविमुक्तेश्वरानंद का काफिला सुबह नौ बजे फुलवरिया पहुंचा। इसके बाद यात्रा नेवादा, अंबरपुर, जलालपुर, रफीगंज और दुल्हूपुर होते हुए आलापुर विधानसभा के न्यौरी, ढोलबजवा और रामनगर, टांडा विधानसभा के हंसवर, सुलेमपुर और टांडा पहुंची। जुबेर चौराहा पर सरदार अमरजीत सिंह उर्फ सोनू, रौनक सिंह आदि ने माल्यार्पण कर स्वागत किया। इसके बाद अकबरपुर के पटेलनगर तिराहा पर महेंद्र यादव, अमित वर्मा, संजय यादव, विशाल वर्मा ने स्वागत किया। जलालुपर में जिला पंचायत सदस्य जयप्रकाश यादव को अपना प्रतिनिधि नियुक्त करते हुए गोधाम केंद्र निर्माण के लिए सहयोग राशि एकत्र करने की जिम्मेदारी सौंपी। पूर्व विधायक सुभाष राय, अभिषेक सिंह, जिला पंचायत सदस्य आलोक यादव, राधेश्याम यादव मौजूद रहे।  

मोनालिसा-फरमान ने हाईकोर्ट में लगाई गुहार, बोले- शादी के खिलाफ रची जा रही साजिश

खरगोन  प्रयागराज महाकुंभ वायरल गर्ल मोनालिसा और उसके पति फरमान खान ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का रुख किया है. दंपति ने आरोप लगाया कि उनकी अंतर-धार्मिक शादी को अपराध साबित करने के लिए उनके जन्म प्रमाण पत्र में हेराफेरी की गई है. इसलिए, दंपति ने इंदौर बेंच में याचिका दायर उनके जन्म प्रमाण पत्र को बहाल करने और सरकारी दस्तावेजों में की गई हेराफेरी की स्वतंत्र जांच करने की मांग की है।  याचिका में दावा किया गया कि मोनालिसा भोसले बालिग है. सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार उसकी जन्म तिथि लगातार 1 जनवरी, 2008 दर्ज है. याचिका में कहा गया कि उसकी उम्र को लेकर विवाद तब शुरू हुआ, जब उसने फरमान खान से शादी की. दंपति का आरोप है कि बाद में मोनालिसा को नाबालिग दिखाने के लिए झूठे दस्तावेज तैयार किए गए।  केरल में हुई थी शादी याचिका के अनुसार, मोनालिसा और फरमान की मुलाकात केरल में एक फिल्म की शूटिंग के दौरान हुई थी. दोनों के बीच प्रेम संबंध बन गया. मार्च 2026 में मोनालिसा अपने रिश्तेदारों के साथ दोबारा केरल गई. वहां शादी के प्रस्ताव पर असहमति होने के बाद, उसने तिरुवनंतपुरम के थंपानूर पुलिस स्टेशन में अपने पिता के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।  11 मार्च को की शादी केरल पुलिस ने उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र को सरकारी पोर्टल से सत्यापित किया और उन्हें बालिग पाया. इसके बाद, दोनों ने 11 मार्च, 2026 को पूवार के अरुमानूर नायरन देवा मंदिर में शादी कर ली. इस शादी का पंजीकरण केरल विवाह पंजीकरण नियम, 2008 के तहत कराया गया।  दंपति ने याचिका में लगाए ये आरोप याचिका में आरोप लगाया कि मोनालिसा के पिता ने मध्य प्रदेश लौटकर नगर पंचायत महेश्वर द्वारा जारी असली जन्म प्रमाण पत्र को अवैध रूप से रद्द करवा दिया. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि फरमान के खिलाफ आपराधिक मामला बनाने के लिए अधिकारियों के सामने जाली रिकॉर्ड पेश किए गए. दंपति ने यह भी आरोप लगाया कि सोशल मीडिया और टीवी पर फरमान को ‘आतंकवादी’ बताया गया और शादी को ‘लव जिहाद’ का नाम दिया गया. इन धमकियों के कारण उन्हें केरल में बार-बार अपनी जगह बदलनी पड़ी।  बता दें, यह याचिका वकील बीएल नागर, सुभाष चंद्रन केआर और अनिरुद्ध केपी के माध्यम से दायर की गई है. केरल हाई कोर्ट ने 23 मार्च, 2026 को इस जोड़े को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की थी. अब इंदौर हाईकोर्ट में इस मामले पर जल्द सुनवाई होने की उम्मीद है। 

तपते हरियाणा में गर्मी ने तोड़े रिकॉर्ड, 46.9°C तापमान से लोग बेहाल

चंडीगढ़. देश के बड़े हिस्से में भीषण गर्मी और हीटवेव (लू) का प्रकोप जारी है, जिसमें उत्तर प्रदेश का बांदा जिला सबसे अधिक प्रभावित है। मंगलवार को लगातार तीसरे दिन बांदा देश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 48.2 डिग्री सेल्सियस रहा। गत कुछ वर्षों में यह तीसरी बार है, जब बांदा में पारा 48 डिग्री पार पहुंचा। मैदान ही नहीं पहाड़ी राज्य जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में भी गर्मी लोगों को परेशान किए हुए है। यहां कई शहरों में पारा 40 डिग्री के पार पहुंच गया है। उधर इंदौर में मंगलवार को अधिकारियों ने बताया कि भीषण गर्मी में कार के अंदर फंसने के कारण दम घुटने से चार साल की एक बच्ची की मौत हो गई। सबसे ज्यादा रोहतक में तापमान हरियाणा के रोहतक में 46.9 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया। वहीं महाराष्ट्र के अमरावती में तापमान 46.8 डिग्री रहा। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के पूर्व मौसम विज्ञानी डा. एसएन सुनील पांडेय बताते हैं कि राजस्थान व पाकिस्तान के थार मरुस्थल से आने वाली गर्म पछुआ हवा गर्मी बढ़ा रही है। दिल्ली रिज में 46.5 व मध्य प्रदेश के नौगांव में 47 डिग्री तापमान रहा। मौसम विभाग के मुताबिक, पश्चिम से लेकर पूरब तक अगले पांच-छह दिनों तक तपिश से राहत के आसार नहीं हैं। दिल्ली में मंगलवार 'हीटवेव' वाला दिन रहा, जहां पारा 45 डिग्री पार पहुंच गया। पंजाब के फरीदकोट में दिन का तापमान 47.3 डिग्री रहा। जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले में तापमान 44.6 डिग्री रहा। देश के सर्वाधिक गर्म पांच शहर (पारा डिग्री सेल्सियस में) बांदा (उप्र) – 48.2 नौगांव (मप्र) – 47.0 रोहतक (हरियाणा) – 46.9 अमरावती (महाराष्ट्र) – 46.8 दिल्ली रिज – 46.5 पहाड़ी राज्यों के इन शहरों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक पहुंचा यहाँ दिए गए तापमान के आंकड़ों (डिग्री सेल्सियस में) के आधार पर एक सुव्यवस्थित और साफ-सुथरी तालिका (Table) दी गई है: शहर का नाम      तापमान (°C) कठुआ     44.6 ऊना     43.4 जम्मू     42.0 नेरी (हमीरपुर)     41.2 रुड़की     41.0 पंतनगर     40.2 मंडी     40.0 हरियाणा को लू ने अपनी चपेट में ले लिया है। राजस्थान से चल रही दक्षिण-पश्चिमी हवाओं ने पूरे हरियाणा को गर्म कर दिया है। इसी के चलते रोहतक सबसे गर्म रहा और तापमान 46.9 डिग्री तक पहुंच गया। यह तापमान राजस्थान के चुरू से भी ज्यादा है। गर्मी से बचने को लोग एसी-कूलर का सहारा लेने लगे हैं, इससे बिजली की खपत भी बढ़ी है। गर्मी का असर मंदिरों में भी देखने को मिला है। कई मंदिरों में पुजारियों की तरफ से भगवान को ठंडे पेय पदार्थ का भोग लगाया गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार अधिकतम तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है। आइएमडी के अनुसार बुधवार को प्रदेश के 15 जिलों में आरेंज तो सात जिलों में लू का यलो अलर्ट जारी किया गया है। सभी जिलों का अधिकतम तापमान 42 डिग्री पार सभी जिलों का अधिकतम तापमान 42 डिग्री पार कर गया है। सिरसा में भी अधिकतम तापमान 46.4 डिग्री तक पहुंच गया। 22 मई तक दिन का तापमान बढ़ने सहित कहीं-कहीं हल्के बादल छाने की संभावना है। हिसार में 45.3 डिग्री अधिकतम पारा रहा। दिन में लू चलने के साथ अब रातें भी गर्म रहने लगी हैं। भिवानी का रात का तापमान 30 डिग्री तक पहुंच गया। राजस्थान सीमा से लगते जिलों में पारा काफी अधिक है। वहीं अंबाला और सिरसा का रात का तापमान 29 डिग्री पार हो गया है, यह और बढ़ सकता है। गर्मी बढ़ने के साथ ही बिजली की मांग बढ़ी हरियाणा में गर्मी बढ़ने के साथ ही बिजली की मांग बढ़ गई है। दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम की तरफ से 17 मई को प्रदेश के करीब 11 सर्कल में 1295.20 लाख प्रतिदिन यूनिट बिजली की सप्लाई की गई। वहीं 18 मई को खपत बढ़ कर 1364.21 लाख प्रति दिन हो गई। हरियाणा के विभिन्न जिलों के लिए जारी किए गए मौसम विभाग के अलर्ट के आधार पर एक सुव्यवस्थित तालिका (Table) नीचे दी गई है: हरियाणा मौसम अलर्ट ऑरेंज अलर्ट         सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, जींद, भिवानी, रोहतक, सोनीपत, चरखी दादरी, झज्जर, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, गुरुग्राम, फरीदाबाद, मेवात और पलवल।    अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता: इन जिलों में भीषण गर्मी/लू (Heatwave) का प्रकोप ज्यादा रह सकता है। यलो अलर्ट      पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, करनाल, कैथल और पानीपत। अपडेट रहने की आवश्यकता: इन जिलों में मौसम खराब या गर्म रहने की संभावना है, नजर बनाए रखें। जिलावार अधिकतम व न्यूनतम तापमान जिला     अधिकतम तापमान (°C)     न्यूनतम तापमान (°C) अंबाला     44.4                                 29.8 भिवानी     42.5                                 30.0 गुरुग्राम     44.6                                28.1 हिसार     45.3                                  27.7 करनाल     43.1                               26.8 नारनौल     45.0                               26.5 रोहतक     46.9                               28.0 सिरसा     46.4                                29.4

एनजीटी ने शिवालिक इलाके में निर्माण गतिविधियों पर दिखाई सख्ती, प्रशासन से मांगा जवाब

चंडीगढ़. पंजाब के पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील शिवालिक और कंडी क्षेत्र में वर्षों से जारी निर्माण गतिविधियों को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कड़ा रुख अपनाया है। अधिकरण ने मोहाली, रूपनगर, नवांशहर, गुरदासपुर और पठानकोट के डिप्टी कमिश्नरों को नोटिस जारी कर उन जमीनों का पूरा रिकार्ड पेश करने को कहा है, जिन्हें पंजाब भूमि संरक्षण अधिनियम (पीएलपीए) के दायरे से बाहर किया गया था। इन क्षेत्रों में निर्माण और नई राज्य नीति को लेकर उठे सवालों के बीच यह कार्रवाई अहम मानी जा रही है। दरअसल, राज्य सरकार के हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट विभाग ने पिछले वर्ष 20 नवंबर को लो इंपैक्ट ग्रीन हैबिटैट्स (एलआईजीएच) नीति अधिसूचित की थी। इस नीति के जरिए पीएलपीए से बाहर की गई जमीनों पर पहले से मौजूद ढांचों को नियमित करने और सीमित निर्माण गतिविधियों को अनुमति देने का प्रावधान रखा गया। लेकिन इस नीति को पर्यावरण संरक्षण के लिए खतरा बताते हुए सार्वजनिक कार्रवाई समिति के प्रतिनिधि जसकीरत सिंह ने एनजीटी में याचिका दायर की। जमीनों की वास्तविक सीमा तय नहीं याचिका में कहा गया कि जिन जमीनों को पीएलपीए से बाहर किया गया, उनका सीमांकन आज तक स्पष्ट रूप से नहीं हुआ। वर्ष 2010 में पंजाब के तत्कालीन मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में तय किया गया था कि इन क्षेत्रों का सीमांकन राष्ट्रीय प्रतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (कैम्पा) फंड से कराया जाएगा। इसके बावजूद 15 साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जमीनों की वास्तविक सीमा तय नहीं की जा सकी। याचिकाकर्ता का आरोप है कि सीमांकन न होने का फायदा उठाकर शिवालिक की तलहटी और कांडी बेल्ट में सैकड़ों अवैध इमारतें, फार्म हाउस और स्थायी ढांचे खड़े कर दिए गए। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के विपरीत निर्माण यह निर्माण सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और पंजाब इको-टूरिज्म नीति 2018 के विपरीत बताए गए हैं। उक्त नीति में ऐसे क्षेत्रों में स्थायी निर्माण की अनुमति नहीं है। मामले की सुनवाई के दौरान एनजीटी ने पांचों जिलों के डिप्टी कमिश्नरों को निर्देश दिया कि वे अगली सुनवाई से पहले विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट दाखिल करें। इस रिपोर्ट में संबंधित क्षेत्रों में बने निर्माणों का ब्यौरा, कथित उल्लंघनों की जानकारी, किसे अनुमति दी गई और अवैध निर्माण रोकने के लिए प्रशासन ने क्या कार्रवाई की, यह सब शामिल करना होगा। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी। याचिका में यह भी रेखांकित किया गया कि एलआईजीएच नीति जिन पांच जिलों में लागू की गई है, वे पंजाब के कुल वन क्षेत्र का करीब 68 प्रतिशत हिस्सा समेटे हुए हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों को नियमित करने की नीति पर्यावरणीय संतुलन के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। पंजाब में कुल वन क्षेत्र महज 3.67 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय मानक 33 प्रतिशत से काफी कम है। जानें क्या है मामला गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद वर्ष 2005 में इन इलाकों की कुछ जमीनों को पीएलपीए से बाहर किया गया था। इसके बाद 2006 और 2009 में केंद्र के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से मंजूरी भी मिली थी। हालांकि यह छूट केवल वास्तविक कृषि और आजीविका संबंधी जरूरतों के लिए थी। व्यावसायिक गतिविधियों और स्थायी निर्माण पर स्पष्ट रोक लगाई गई थी। अब एनजीटी के हस्तक्षेप के बाद राज्य सरकार की नई नीति, डिलिस्टेड जमीनों पर बने निर्माण और प्रशासन की भूमिका पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। माना जा रहा है कि डीसी की रिपोर्ट के बाद मामले में और सख्त निर्देश सामने आ सकते हैं, जिससे कई निर्माण परियोजनाओं और भूमि उपयोग के मामलों पर असर पड़ सकता है।

बस्तर की पारंपरिक शिल्पकला को मिली बड़ी पहचान, अमित शाह-योगी को दिए गए विशेष उपहार

कोंडागांव. बस्तर की पारंपरिक कला को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की पहल कोंडागांव में देखने को मिली. गृहमंत्री अमित शाह को भगवान गणेश की विशेष शिल्पकृति भेंट कर स्थानीय कला का सम्मान किया गया. वहीं उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मां दंतेश्वरी का चित्र स्मृति चिन्ह के रूप में प्रदान किया गया. यह शिल्पकृति स्थानीय मूर्तिकारों की मेहनत और बस्तर की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक मानी जा रही है. बताया गया कि कलाकार सुशील सखूजा ने इस कृति को तैयार करवाया, जबकि इसे मूर्त रूप देने में मदन का योगदान रहा. विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल कलाकृति नहीं, बल्कि बस्तर की लोक परंपराओं का प्रतिनिधित्व है. राष्ट्रीय नेतृत्व तक बस्तर की कला पहुंचने से स्थानीय कलाकारों में उत्साह देखा जा रहा है. ऐसी पहल से हस्तशिल्प और पारंपरिक कला को नया बाजार मिलने की उम्मीद भी बढ़ी है. कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, किरण सिंह देव और कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे. बस्तर की कला लंबे समय से अपनी अलग पहचान रखती है. अब इसे राष्ट्रीय मंच मिलने से स्थानीय शिल्पकारों को प्रोत्साहन और रोजगार की संभावनाएं बढ़ने लगी हैं. सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने वाली इस पहल की क्षेत्र में सराहना हो रही है.

1 से 15 जून तक होंगे कर्मचारियों-अधिकारियों के तबादले, MP कैबिनेट का बड़ा फैसला

भोपाल  मध्य प्रदेश कैबिनेट बैठक में मोहन सरकार ने ट्रांसफर पॉलिसी को लेकर बड़ा निर्णय लिया है. इस बैठक में राज्य सरकार की तबादला नीति-2026 को मंजूरी मिल गई है. प्रदेश में राज्य और जिला स्तर पर कर्मचारियों और अधिकारियों को 1 जून से 15 जून तक तबादले किए जाएंगे. सामान्य प्रशासन विभाग (ने ड्राफ्ट तैयार कर मुख्यमंत्री सचिवालय भेजा था. सीएम और मंत्रियों की सहमति के बाद नीति को अंतिम रूप दिया गया. बता दें कि प्रदेश के कर्मचारी और अधिकारी तबादला नीति को लेकर लंबे समय से इंतजार कर रहे थे।  तबादला नीति में क्या खास है? नई तबादला नीति के तहत प्रत्येक संवर्ग में अधिकतम 20% अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले किए जा सकेंगे. इससे बड़े पैमाने पर मनमाने तबादलों पर रोक लगेगी और प्रक्रिया को नियंत्रित रखा जाएगा. जिलों के भीतर होने वाले तबादलों के लिए प्रभारी मंत्री का अनुमोदन अनिवार्य किया गया है. इस नीति के तहत प्रथम श्रेणी (Class‑I) अधिकारियों के तबादले मुख्यमंत्री के अनुमोदन से ही किए जा सकेंगे. वहीं अन्य संवर्गों के अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादलों को संबंधित विभागीय मंत्री अनुमोदित कर सकेंगे. यह व्यवस्था वरिष्ठ अधिकारियों के स्थानांतरण में अतिरिक्त सतर्कता सुनिश्चित करेगी. इसमें यह भी स्पष्ट किया गया है कि उन अधिकारियों और कर्मचारियों को पहले प्राथमिकता दी जाएगी, जो एक ही स्थान पर तीन वर्षों से अधिक समय से पदस्थ हैं।  कैबिनेट मंत्री चेतन्य कश्यप ने दी कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी. वहीं कैबिनेट पीएम मोदी को नार्वे और स्वीडन के दिए गए सम्मान के लिए शुभकामनाएं दी।  सरस्वती लोक बनाने की तैयारी धार जिले के भोजशाला परिसर को लेकर उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि धारा के भोजशाला मंदिर को वागदेवीकी प्रतिमा को वापस लाने का प्रयास केंद्र सरकार के माध्यम से की जाएगी. साथ ही यहां सरस्वती लोक बनाने पर भी विचार कर रहे हैं. सीएम ने कहा कि करीब 750 वर्ष पुराने इस धार्मिक विवाद पर न्यायालय ने सकारात्मक और शांतिपूर्ण निर्णय दिया है और राज्य सरकार सभी पक्षों की भावनाओं का सम्मान करते हुए फैसले का पालन सुनिश्चित करेगी।  उन्होंने बताया कि बीते दिन सीएम जगदलपुर गए थे, जहां केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बैठक रखी थी. यह बैठक बस्तर में हुई थी. केंद्रीय गृहमंत्री ने एक प्रमुख बिंदु रेखांकित किया हैं. उन्होंने कहा कि कभी नक्सल प्रभावित रहे जिलों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए नए योजना बनाने की बात कही हैं।  कैबिनेट बैठक में ई-रिक्शा से पहुंचे मंत्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायल-ईरान युद्ध के कारण बने वैश्विक हालात को देखते हुए पेट्रोल-डीजल जैसे ईंधन का संयमित उपयोग करने की अपील की थी। पीएम की इस अपील को अनदेखा कर मध्य प्रदेश के नवनियुक्त निगम, मंडल और बोर्ड के अध्यक्षों-उपाध्यक्षों ने वाहन रैलियां निकालीं, जिसके बाद पूरे देश में एमपी बीजेपी नेताओं की फजीहत हुई। मामले में दिल्ली से केंद्रीय नेतृत्व की फटकार पड़ी तो एमपी बीजेपी ने दो नेताओं पर एक्शन लिया। साथ ही कई नेताओं को हिदायत भी दी गई। वाहन रैलियों को लेकर आलोचना होने के बाद अब संगठन ने सख्ती दिखाई है। इसके बाद मंत्री, विधायक और सांसद भी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करते नजर आ रहे हैं। मंत्रालय ई-रिक्शा से पहुंचे 2 मंत्री बुधवार को मंत्रालय में हो रही कैबिनेट बैठक में शामिल होने के लिए मंत्री गौतम टेटवाल और नारायण सिंह पवार ई-रिक्शा के जरिए पहुंचे। भोपाल के चार इमली में पास-पास रहने वाले दोनों मंत्री एक ही ई-रिक्शा से करीब ढाई किलोमीटर का सफर तय कर मंत्रालय पहुंचे। मंत्रियों के पीछे दूसरे ई-रिक्शा में उनके स्टाफ के लोग पहुंचे, लेकिन जिनके पास पास नहीं थे, उन्हें सुरक्षा कर्मियों ने अंदर नहीं जाने दिया। मंत्रियों के बाद उनके स्टाफ के लोग अलग-अलग गाड़ियों से थोड़ी देर के अंतराल पर मंत्रालय पहुंचे। ये हैं वाहन रैलियां निकालने वाले नेता     सौभाग्य सिंह ठाकुर (अध्यक्ष, मध्य प्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम): पदभार ग्रहण करने के दौरान उज्जैन से भोपाल तक 200 से 700 गाड़ियों का विशाल काफिला निकाला। वीडियो वायरल होने के बाद सीएम डॉ. मोहन यादव ने सख्त एक्शन लिया। कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। साथ ही जांच पूरी होने तक सभी प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए गए।     सज्जन सिंह यादव (जिलाध्यक्ष, किसान मोर्चा भिंड): नियुक्ति के बाद लग्जरी कारों की विशाल वाहन रैली निकालकर शक्ति प्रदर्शन किया था। संगठन ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए तत्काल प्रभाव से उनकी नियुक्ति रद्द कर दी।     वीरेंद्र गोयल (अध्यक्ष, सिंगरौली विकास प्राधिकरण): जब पदभार ग्रहण करने पहुंचे, तब उनके समर्थकों ने भी विशाल वाहन रैली निकाली थी। इस रैली के कारण सिंगरौली शहर की सड़कों पर भारी ट्रैफिक जाम लगा था। आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ा।     पंकज जोशी (अध्यक्ष, मध्य प्रदेश खादी ग्रामोद्योग बोर्ड): नियुक्ति का जश्न मनाने के लिए विशाल वाहन रैली निकाली थी। काफिले में करीब 100 से ज्यादा गाड़ियां शामिल थीं, जिसे पीएम की ईंधन बचाने की अपील का उल्लंघन माना गया।     सत्येंद्र भूषण सिंह (अध्यक्ष, मध्य प्रदेश लघु उद्योग निगम): नियुक्ति के बाद भोपाल के अवधपुरी स्थित घर से बीजेपी प्रदेश कार्यालय तक ई-रिक्शा से पहुंचे। इसके बाद न्यू मार्केट स्थित कार्यालय में पदभार ग्रहण करने भी ई-रिक्शा से ही पहुंचे। हालांकि भाजपा कार्यालय के बाहर उनके समर्थकों की गाड़ियों की लंबी लाइन नजर आई थी।     राकेश सिंह जादौन (उपाध्यक्ष, मध्य प्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड): यह भी प्रदेश बीजेपी कार्यालय पहुंचने के लिए ई-रिक्शा का उपयोग करते नजर आए। हालांकि विदिशा से भोपाल तक वे गाड़ियों का काफिला लेकर पहुंचे थे। अब ई-व्हीकल्स और बस से सफर कर रहे नेता प्रद्युम्न सिंह तोमर (ऊर्जा मंत्री): पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील का असर दिखाते हुए उन्होंने अपनी लग्जरी गाड़ी छोड़ दी और ई-स्कूटी (E-Scooter) से मंत्रालय पहुंचे। सीएम हाउस में सत्ता और संगठन की वन-टू-वन मीटिंग में शामिल होने भी वे ई-स्कूटी से ही पहुंचे थे। गौतम टेटवाल (तकनीकी शिक्षा मंत्री): तकनीकी शिक्षा मंत्री गौतम टेटवाल अपने विधानसभा क्षेत्र में सारंगपुर से पचोर तक बस से सफर कर पहुंचे थे। इसके दो दिन बाद वे प्रभारी जिले बड़वानी में भी कलेक्टर जयति सिंह और अधिकारियों के … Read more

शौर्य स्मारक से निकली रैली, ट्विशा मामले में कार्रवाई को लेकर पूर्व सैन्य अधिकारियों का प्रदर्शन

भोपाल  राजधानी भोपाल में ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में न्याय की मांग को लेकर बुधवार को पूर्व सेना अधिकारी और जवान सड़क पर उतर आए। वर्दी वेलफेयर सोसाइटी के नेतृत्व में निकाली गई रैली में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक शामिल हुए और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। शौर्य स्मारक से शुरू हुई रैली रैली की शुरुआत शौर्य स्मारक से की गई, जहां पूर्व सैनिकों ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद मार्च करते हुए प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री निवास, पुलिस मुख्यालय और राजभवन की ओर बढ़ गए, जहां ज्ञापन सौंपने की तैयारी की गई। पुलिस जांच पर उठे सवाल मंगलवार को ट्विशा शर्मा के पिता, परिजनों और पूर्व सैन्य अधिकारियों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पुलिस कार्रवाई और जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए थे। उनका आरोप है कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से नहीं की जा रही। इसी के विरोध में पूर्व सैनिकों ने बुधवार को प्रदर्शन कर सरकार से न्याय की मांग की। सड़ने लगा है ट्विशा का शव', डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन में भी बड़ा खुलासा ट्विशा का शर्मा का शव 13 मई से भोपाल एम्स में पड़ा हुआ है। परिजन दोबारा पोस्टमार्टम की मांग कर रहे हैं। ऐसे में भोपाल पुलिस की ओर से ट्विशा के परिजनों को एक चिट्ठी लिखी गई है, जिसमें कहा गया है कि ट्विशा शर्मा का शव सड़ने लगा है। शव को ज्यादा दिन तक सुरक्षित रखने की व्यवस्था भोपाल एम्स में नहीं है। परिजनों को भोपाल पुलिस ने लिखी चिट्ठी दरअसल, ट्विशा शर्मा के परिजन ससुराल के लोगों पर लगातार हत्या के आरोप लगा रहे हैं। साथ ही अंतिम संस्कार करने से मना कर रहे हैं। इस बीच भोपाल पुलिस ने ट्विशा शर्मा के माता-पिता को एक चिट्ठी लिखी है। उसमें कहा गया है कि ट्विशा शर्मा का शव लंबे समय से मोर्चरी में रखा है। उसे सड़ने की संभावना ज्यादा है। ऐसे में आपसे अनुरोध किया जाता है कि कृप्या शव को लेने की व्यवस्था करें। -80 डिग्री तापमान की है जरूरत भोपाल पुलिस की चिट्ठी में इस बात का जिक्र है कि अभी शव को भोपाल एम्स में रखा गया है। भोपाल एम्स की मोर्चरी में -4 डिग्री सेल्सियस तापमान है। शव को सड़ने से बचाने के लिए -80 डिग्री सेल्सियस पर रखना जरूरी है। यह सुविधा भोपाल एम्स में उपलब्ध नहीं है। पुलिस के अनुसार ट्विशा शर्मा का पहला पोस्टमार्टम 13 मई को पूरा हो गया था। ऐसे में पुलिस ने कहा है कि हमें दोबारा पोस्टमार्टम पर कोई आपत्ति नहीं है। पिता कर रहे हैं दूसरी जगह पर पोस्टमार्टम की मांग वहीं, ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा लगातार दिल्ली एम्स में पोस्टमार्टम की मांग कर रहे हैं। उन्होंने बुधवार को भी मीडिया से बातचीत में कहा है कि सभी फॉरेंसिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ट्विशा के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार शांति और गरिमा के साथ किया जा सकेगा। ये उठ रहे हैं सवाल     पोस्टमार्टम के दौरान भोपाल पुलिस के चूक भी हुई है     पीएम के दौरान पुलिस ने वो बेल्ट डॉक्टरों के सामने नहीं पेशी की, जिससे ट्विशा ने खुदकुशी की     मेडिकल टीम महिला की गर्दन पर मिले लिगेचर निशानों की जांच साइंटीफिक तरीके से नहीं कर पाई     ट्विशा के परिजनों का कहना है कि इससे जांच प्रभावित हुई उलझता जा रहा है मामला इसी लापरवाही की वजह से ट्विशा शर्मा का केस उलझता जा रहा है। उसकी गर्दन पर दो सामानांतर निशान मिले हैं। इससे मामला उलझता दिख रहा है। वहीं, सीसीटीवी फुटेज में भी टाइम मिसमैच है। ससुराल वालों का कहना है कि उसने रात 10 बजे के बाद फांसी लगाई है। वहीं, सीसीटीवी फुटेज में टाइम 7 बजकर 20 मिनट दिख रही है, जिस वक्त ट्विशा छत पर जा रही थी। साइकियाट्रिक ट्रीटमेंट पर थी ट्विशा वहीं, ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह ने दावा किया था कि उसका इलाज साइकियाट्रिक के पास चल रहा है। डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन से यह पता चला है कि ट्विशा शर्मा नींद और डिप्रेशन की दवा ले ही थी। 28 अप्रैल से 6 मई तक उसका इलाज चला है। वह एडजसमेंट डिसऑर्डर की शिकार थी। सुसाइड से पहले भी वह डॉक्टर से संपर्क की थी।