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योगी सरकार की पहल से न्यायालयों में प्रमाणित स्कैन प्रतियों से होगी कार्यवाही, मामलों के निस्तारण में आएगी तेजी

लखनऊ उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रशासनिक एवं न्यायिक व्यवस्थाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में राजस्व परिषद, उत्तर प्रदेश ने एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी पहल करते हुए राजस्व परिषद के न्यायालयों में मूल अभिलेखों के स्थान पर प्रमाणित पूर्ण स्कैन प्रतियों के आधार पर कार्यवाही करने का निर्णय लागू किया है। इस व्यवस्था को राजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल के निर्देशों के तहत तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। डिजिटल व्यवस्था से सुरक्षित रहेंगे मूल अभिलेख नई व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि अब मूल अभिलेखों को बार-बार एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इससे महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेजों के क्षतिग्रस्त होने, गुम होने अथवा विलंब से उपलब्ध होने जैसी समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा। अधीनस्थ न्यायालयों द्वारा भेजी जाने वाली स्कैन प्रतियों में प्रत्येक पृष्ठ, आदेश पत्रक, नोटशीट, मानचित्र और अन्य समस्त अभिलेख क्रमवार एवं स्पष्ट रूप से शामिल किए जाएंगे। साथ ही संबंधित राजस्व रिकॉर्ड कीपर द्वारा प्रमाणित प्रमाण-पत्र संलग्न करना अनिवार्य किया गया है, जिससे व्यवस्था की विश्वसनीयता और पारदर्शिता बनी रहे। राजस्व परिषद ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल विशेष परिस्थितियों में, जब न्यायालय कारण दर्ज करते हुए निर्देश देगा, तभी मूल अभिलेख प्रस्तुत किए जाएंगे। इससे न्यायिक प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और समयबद्ध हो सकेगी। आरसीसीएमएस पोर्टल से न्यायिक प्रक्रिया होगी और अधिक आधुनिक योगी सरकार लगातार ई-गवर्नेंस को बढ़ावा दे रही है और यह नई पहल उसी सोच का विस्तार मानी जा रही है। भविष्य में आरसीसीएमएस पोर्टल के माध्यम से इस पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन संचालित करने की तैयारी भी की जा रही है। इससे न्यायिक कार्यवाही और अधिक सुगम, पारदर्शी तथा प्रभावी बन सकेगी। अधिकारियों को निर्देश जारी राजस्व परिषद ने सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए अधीनस्थ अधिकारियों एवं कर्मचारियों को इस नई व्यवस्था की जानकारी देने और इसका प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है। साथ ही यह भी तय किया गया है कि यदि कोई अपूर्ण, अस्पष्ट अथवा अप्रमाणित स्कैन प्रति भेजी जाती है, तो संबंधित आरआरके के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

एआई निगरानी से 44 फर्जी परीक्षार्थी पकड़े गए

लखनऊ योगी सरकार की नकलविहीन एवं पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था के तहत 2026 शिक्षक पात्रता परीक्षा प्राइमरी स्तर (कक्षा 1 से 5) एवं उच्च प्राइमरी स्तर (कक्षा 6 से 8) की लिखित परीक्षा 02, 03 एवं 04 जुलाई 2026 को प्रदेश के सभी 60 जनपदों में सफलतापूर्वक संपन्न हुई।  उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि  02 जुलाई 2026 की दो पालियों एवं 03 जुलाई 2026 की प्रथम पाली में उच्च प्राइमरी स्तर की परीक्षा आयोजित की गयी, जिसमें कुल पंजीकृत 12,11,459 परीक्षार्थियों के सापेक्ष 10,57,055 अभ्यर्थियों अर्थात 87.25% ने प्रतिभाग किया।  03 जुलाई 2026 की द्वितीय पाली एवं 04 जुलाई 2026 की प्रथम पाली में प्राइमरी स्तर की परीक्षा हुई, जिसमें पंजीकृत 7,83,202 परीक्षार्थियों में से 7,13,659 अभ्यर्थियों अर्थात 91.12% ने परीक्षा दी। उच्च प्राइमरी स्तर की परीक्षा में महिला अभ्यर्थियों की प्रतिभागिता 87.00% एवं प्राइमरी स्तर की परीक्षा में 90.85% रही।  शनिवार 04 जुलाई को प्रथम पाली में प्रदेश के 955 परीक्षा केन्द्रों पर आयोजित परीक्षा में 3,79,316 पंजीकृत अभ्यर्थियों के सापेक्ष 3,34,775 अर्थात 88.00% अभ्यर्थियों ने प्रतिभाग किया। इस प्रकार कुल पंजीकृत 19,94,661 परीक्षार्थियों में से 17,70,714 कुल 88.77% परीक्षार्थियों ने परीक्षा में प्रतिभाग किया। सभी 60 जनपदों में सदस्यगण व सेवानिवृत्त आईएएस व आईपीएस को प्रेक्षक के रूप में नामित किया गया था। सभी प्रेक्षकों ने परीक्षा के दौरान परीक्षा केन्द्रों का अनवरत भ्रमण कर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। परीक्षा के दौरान आयोग में स्थापित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंट्रोल कमांड रूम से अध्यक्ष, सदस्यगण, सचिव, परीक्षा नियंत्रक एवं उपसचिव की उपस्थिति में सभी परीक्षा केन्द्रों की सघन निगरानी की गयी तथा परीक्षा केन्द्रों पर लगे A.I. कैमरों के माध्यम से परीक्षार्थियों की गतिविधियों पर सतत् दृष्टि रखी गयी। A.I. आधारित सॉफ्टवेयर की मदद से परीक्षा के दौरान संदिग्धों की जाँच के पश्चात् प्रदेश के विभिन्न जनपदों में  02 जुलाई 2026 को 14,  03 जुलाई 2026 को 11 एवं दिनांक 04 जुलाई 2026 को 19 कुल 44 फर्जी परीक्षार्थी जो दूसरे परीक्षार्थी के स्थान पर परीक्षा देते हुए पकड़े गये एवं  03 जुलाई 2026 को एक अभ्यर्थी को परीक्षा कक्ष में मोबाइल से नकल के प्रयास में पकड़ा गया। उक्त सभी के विरुद्ध अग्रेतर विधिक कार्रवाई हेतु स्थानीय पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त प्रदेश के सभी निर्धारित परीक्षा केन्द्रों पर परीक्षा सुचारु रूप से पारदर्शी, नकल विहीन, शुचितापूर्ण, निर्विघ्न एवं सुव्यवस्थित वातावरण में सम्पन्न हुई। अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने शिक्षक पात्रता परीक्षा के सफल संचालन में सम्बन्धित जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन, सतर्कता विभाग एवं एसटीएफ के सक्रिय सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। साथ ही सभी परीक्षार्थियों, केन्द्र व्यवस्थापकों, प्रेक्षकों एवं प्रशासनिक अधिकारियों/सहयोगियों के प्रति आयोग की ओर से आभार प्रकट किया।

योगी सरकार की शानदार उपलब्धि, प्रदेश में जीएसटी संग्रह ने भरी नई उड़ान

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश लगातार आर्थिक मोर्चे पर नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। जीएसटी राजस्व संग्रह में प्रदेश ने जून 2026 में 19 फीसदी की प्रभावशाली बढ़ोतरी दर्ज करते हुए 9165 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त किया है। इस शानदार प्रदर्शन के साथ यूपी ने पंजाब, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों को पीछे छोड़ दिया है।  आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में 14 फीसदी वृद्धि, केरल में 11 फीसदी और कर्नाटक में 10 फीसदी वृद्धि हुई। वहीं तमिलनाडु में 2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। इन सभी राज्यों की तुलना में उत्तर प्रदेश ने 19 फीसदी की सबसे बड़ी वृद्धि दर्ज कर अपनी मजबूत आर्थिक स्थिति का परिचय दिया है। मई 2026 में भी बरकरार रही शानदार बढ़त यूपी ने मई 2026 में भी मजबूत प्रदर्शन करते हुए 8728 करोड़ रुपये का जीएसटी राजस्व प्राप्त किया था, जो मई 2025 के 7732 करोड़ रुपये की तुलना में 13 फीसदी अधिक रहा। लगातार दो महीनों तक दोहरे अंकों में वृद्धि ने यह संकेत दिया है कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था निरंतर गति पकड़ रही है। इससे पहले मई 2025 में 7732 करोड़ रुपए, जून 2025 में 7675 करोड़ रुपये का जीएसटी राजस्व प्राप्त हुआ था, जबकि जून 2026 में यह आंकड़ा बढ़कर 9165 करोड़ रुपये पहुंच गया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में 8 जुलाई को होगा समझौता, लगभग 10 लाख शिक्षक एवं कर्मचारी होंगे लाभान्वित

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षकों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल करने जा रही है। 8 जुलाई को वाराणसी में मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना के शुभारंभ के अवसर पर बेसिक शिक्षा विभाग और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौते (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस समझौते का उद्देश्य विभाग के स्थायी एवं संविदा कार्मिकों की सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा को और मजबूत करना है। महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में वाराणसी के हस्तकला संकुल (ट्रेड फैसिलिटेशन सेंटर) में आयोजित कार्यक्रम के दौरान एमओयू पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इसी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का शुभारंभ भी होगा। जिलों में भी होगा व्यापक प्रचार-प्रसार निर्देशों में कहा गया है कि राज्य स्तरीय कार्यक्रम के समानांतर सभी जनपदों में जिलाधिकारी तथा तहसील मुख्यालयों पर उपजिलाधिकारी की अध्यक्षता में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में भारतीय स्टेट बैंक और बेसिक शिक्षा विभाग के बीच होने वाले एमओयू का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक शिक्षक और कर्मचारी इस पहल से अवगत हो सकें। बैंक अधिकारियों की सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश महानिदेशक ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे भारतीय स्टेट बैंक के स्थानीय अधिकारियों से समन्वय स्थापित कर उनकी जनपद स्तरीय कार्यक्रमों में सहभागिता सुनिश्चित करें। साथ ही एमओयू के उद्देश्यों और उससे मिलने वाले लाभों का प्रभावी प्रचार-प्रसार भी कराया जाए। यह पहल शिक्षकों और विभागीय कार्मिकों के कल्याण को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है। मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना के साथ बैंकिंग क्षेत्र के सहयोग को जोड़ते हुए प्रदेश सरकार शिक्षक हितों को और अधिक मजबूत तथा संस्थागत स्वरूप देने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

वाराणसी में आकार ले रहा विश्वस्तरीय क्रिकेट स्टेडियम

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खेल और खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रहे हैं। उनकी दूरदर्शी सोच और मजबूत नेतृत्व में प्रदेश में खेल अवसंरचना तेजी से विकसित हो रही है। इसी कड़ी में वाराणसी में निर्माणाधीन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में उभर रहा है। लगभग 400 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह अत्याधुनिक स्टेडियम प्रदेश में खेल विकास के नए युग की शुरुआत का प्रतीक बन चुका है। स्टेडियम का निर्माण कार्य 92 प्रतिशत पूरा हो चुका है और जल्द ही यह खिलाड़ियों व क्रिकेट प्रेमियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। यह परियोजना उत्तर प्रदेश की बढ़ती खेल क्षमता का प्रमाण है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश खेल क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहा है। यह स्टेडियम न केवल पूर्वांचल के खिलाड़ियों के लिए नई संभावनाएं खोलेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल मानचित्र पर मजबूत पहचान भी दिलाएगा। शिव थीम, क्रिकेट स्टेडियम की सबसे बड़ी विशेषता इस अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम की सबसे बड़ी विशेषता इसकी अनूठी शिव थीम है, जो इसे देश के अन्य क्रिकेट स्टेडियमों से अलग पहचान देती है। स्टेडियम का मीडिया सेंटर/ नार्थ पवेलियन भगवान शिव के डमरू के आकार में तैयार किया जा रहा है। वहीं फ्लडलाइट्स त्रिशूल की आकृति में स्थापित की जा रही हैं। प्रवेश द्वार बेलपत्र थीम पर आधारित है, जबकि छत को अर्धचंद्राकार स्वरूप दिया जा रहा है। काशी की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को आधुनिक वास्तुकला के साथ जोड़ने का यह प्रयास स्टेडियम को एक अद्वितीय पहचान प्रदान करेगा।  क्रिकेट स्टेडियम में 30 हजार दर्शकों के बैठने की क्षमता लगभग 30,000 दर्शकों की बैठने की क्षमता वाला यह स्टेडियम आधुनिक सुविधाओं और वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। परिसर में एक अंतरराष्ट्रीय मानकों का मुख्य क्रिकेट मैदान और एक पूर्ण आकार का प्रैक्टिस ग्राउंड तैयार किया गया है। इससे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मैचों के आयोजन के साथ-साथ खिलाड़ियों के प्रशिक्षण और कौशल विकास के लिए भी उत्कृष्ट वातावरण उपलब्ध होगा। फिलहाल स्टेडियम का निर्माण कार्य अंतिम चरण में चल रहा है, सितंबर माह तक पूरा होने की संभावना है। स्टेडियम में विश्वस्तरीय सुविधाओं का समावेश किया गया स्टेडियम में खिलाड़ियों, मैच अधिकारियों, मीडिया प्रतिनिधियों, प्रसारण एजेंसियों और दर्शकों के लिए सभी आवश्यक विश्वस्तरीय सुविधाओं का समावेश किया गया है। इसमें अत्याधुनिक ड्रेसिंग रूम, आधुनिक पवेलियन, उन्नत मीडिया एवं ब्रॉडकास्ट सुविधाएं, 1500 गाड़ियों की क्षमता वाली पार्किंग, उच्च क्षमता वाली फ्लडलाइट व्यवस्था, आधुनिक सुरक्षा प्रणाली, उन्नत विद्युत एवं अग्नि सुरक्षा प्रबंधन और दर्शकों के लिए उच्चस्तरीय सुविधाएं शामिल हैं। इन व्यवस्थाओं के चलते यह स्टेडियम देश के प्रमुख क्रिकेट स्टेडियमों की श्रेणी में शामिल होने की पूरी क्षमता रखता है। 400 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा क्रिकेट स्टेडियम इस महत्वाकांक्षी परियोजना की एक और बड़ी उपलब्धि यह है कि इसका निर्माण उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन द्वारा अपनी संचित निधियों से कराया जा रहा है। लगभग 400 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा है। यह स्टेडियम यूपीसीए की वित्तीय आत्मनिर्भरता, संस्थागत क्षमता और प्रदेश में क्रिकेट के समग्र विकास के प्रति उसकी गंभीर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह परियोजना इस बात का उदाहरण है कि अगर खेल संस्थाएं दूरदर्शी सोच और संसाधनों के प्रभावी उपयोग के साथ कार्य करें, तो विश्वस्तरीय खेल अवसंरचना का निर्माण संभव है। 90 वर्षों की अवधि के लिए भूमि लीज पर उपलब्ध कराई गई इस परियोजना को साकार करने में योगी सरकार का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने इस स्टेडियम परियोजना को हर स्तर पर मजबूत सहयोग प्रदान किया। राज्य सरकार द्वारा स्टेडियम निर्माण के लिए लगभग 90 वर्षों की अवधि के लिए भूमि लीज पर उपलब्ध कराई गई, जिससे परियोजना को मजबूत आधार मिला। यही नहीं, परियोजना से जुड़ी सभी प्रशासनिक अनुमतियां और आवश्यक स्वीकृतियां भी समयबद्ध ढंग से प्रदान की गईं, जिससे निर्माण कार्य बिना किसी बड़ी बाधा के तेज गति से आगे बढ़ सका है। योगी सरकार की त्वरित कार्यशैली से स्टेडियम निर्माण में तेजी योगी सरकार की कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता तेज निर्णय क्षमता और समयबद्ध क्रियान्वयन रही है, जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण इस परियोजना में देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री की त्वरित विकास निधि के माध्यम से स्टेडियम के समीप विद्युत उपकेंद्र की स्थापना कराई गई और मात्र चार माह के भीतर विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित कर दी गई। यह कदम निर्माण कार्य को गति देने के साथ-साथ भविष्य में स्टेडियम के सुचारु संचालन के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगा। वाराणसी प्रशासन और राज्य सरकार के निरंतर समन्वय ने इस परियोजना को निर्धारित समयसीमा के भीतर आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।  पूरे पूर्वांचल में क्रिकेट के भविष्य का केंद्र बिंदु बनेगा स्टेडियम यह स्टेडियम केवल एक खेल परिसर नहीं होगा, बल्कि पूरे पूर्वांचल में क्रिकेट के भविष्य का केंद्रबिंदु बनेगा। वाराणसी सहित पूर्वांचल के लाखों युवाओं को अपने ही क्षेत्र में विश्वस्तरीय प्रशिक्षण, अभ्यास और प्रतियोगी माहौल उपलब्ध होगा। इससे क्षेत्र की उभरती प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने के बेहतर अवसर मिलेंगे। इसके अतिरिक्त यह स्टेडियम अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय क्रिकेट प्रतियोगिताओं की मेजबानी कर वाराणसी को वैश्विक खेल मानचित्र पर नई पहचान देगा। खेल गतिविधियों में वृद्धि से खेल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय रोजगार, होटल उद्योग, परिवहन, व्यापार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। 92 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा यूपीसीए के सीईओ अंकित चटर्जी ने बताया कि क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण कार्य 92 प्रतिशत पूरा हो चुका है। यह परियोजना उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश सरकार और वाराणसी प्रशासन के सफल समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने बताया कि आने वाले दशकों तक प्रदेश के खेल विकास, युवा सशक्तीकरण और क्रिकेट संस्कृति को नई दिशा देने वाली एक स्थायी धरोहर के रूप में स्थापित होगी।

5 जुलाई को होगी प्रवेश परीक्षा, 1 अगस्त से शुरू होंगी कक्षाएं

लखनऊ उत्तर प्रदेश के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के गरीब व मेधावी युवाओं के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में संचालित निःशुल्क आईएएस-पीसीएस आवासीय कोचिंग योजना बड़ी राहत बनकर सामने आई है। समाज कल्याण विभाग की इस योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को उच्च स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पूरी तरह निशुल्क कराई जाएगी।  10,175 अभ्यर्थी देंगे प्रवेश परीक्षा 5 जुलाई 2026 को प्रदेश के सभी मंडलों में प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाएगी। इस परीक्षा में कुल 10,175 छात्र-छात्राएं शामिल होंगे। परीक्षा के बाद काउंसलिंग प्रक्रिया के माध्यम से चयनित अभ्यर्थियों को प्रदेश के विभिन्न आवासीय कोचिंग सेंटरों में प्रवेश दिया जाएगा। नियमित कक्षाएं 1 अगस्त 2026 से प्रारंभ होंगी, जबकि यह शैक्षणिक सत्र 31 मई 2027 तक संचालित किया जाएगा। सात आवासीय कोचिंग सेंटरों में मिलेगी मुफ्त सुविधा प्रदेश के सात आवासीय कोचिंग सेंटरों में कुल 865 चयनित छात्र-छात्राओं को निशुल्क आवासीय सुविधा के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाएगी। इनमें से 25 प्रतिशत सीटें ऐसे छात्र-छात्राओं के लिए आरक्षित हैं जो लेटरल एंट्री के माध्यम से प्री परीक्षा क्वालीफाई कर चुके हैं। चयनित अभ्यर्थियों को रहने, खाने, पुस्तकें, स्टडी मटेरियल और अनुभवी शिक्षकों द्वारा मार्गदर्शन जैसी सभी सुविधाएं मुफ्त उपलब्ध कराई जाएंगी। सरकार का उद्देश्य है कि प्रतिभाशाली छात्र आर्थिक अभाव के कारण अपने सपनों से समझौता न करें। गरीब और होनहार युवाओं को मिलेगा आगे बढ़ने का अवसर यह योजना केवल कोचिंग कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों के युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने का बड़ा प्रयास है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा है कि आर्थिक तंगी किसी भी प्रतिभाशाली छात्र के भविष्य में बाधा न बने। इसी उद्देश्य से सरकार गरीब और होनहार युवाओं को निशुल्क आवासीय कोचिंग उपलब्ध करा रही है, ताकि वे यूपीएससी और यूपीपीएससी जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में सफलता हासिल कर सकें। योगी सरकार की पहल से प्रशासनिक सेवाओं में बढ़ रही वंचित वर्ग की भागीदारी वर्तमान समय में निजी कोचिंग संस्थानों में आईएएस-पीसीएस की तैयारी पर लाखों रुपये खर्च होते हैं, जो गरीब परिवारों के लिए मुश्किल होता है। ऐसे में योगी सरकार की यह योजना एसी, एसटी और ओबीसी वर्ग के युवाओं के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आई है।गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और उचित मार्गदर्शन मिलने से वंचित वर्ग के युवा प्रशासनिक सेवाओं में अपनी मजबूत भागीदारी दर्ज कराएंगे और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। संजीव सिंह, निदेशक, समाज कल्याण विभाग

योगी सरकार ने गाजियाबाद और रामपुर में 100 प्रतिशत फार्मर रजिस्ट्री का कार्य किया पूर्ण

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश तेजी से डिजिटल कृषि व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ रहा है। किसानों को सरकारी योजनाओं का पारदर्शी और त्वरित लाभ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश में चल रही फार्मर रजिस्ट्री अभियान ने अब बड़े स्तर पर परिणाम देना शुरू कर दिया है। यूपी के गाजियाबाद और रामपुर में 100 प्रतिशत फार्मर रजिस्ट्री का कार्य पूर्ण हो गया है। प्रदेश सरकार की सक्रिय पहल के चलते अब तक 2.38 करोड़ से अधिक किसानों का पंजीकरण किया जा चुका है, जो केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य का 82.69 प्रतिशत है।      प्रदेश में फार्मर रजिस्ट्री अभियान की शुरुआत 5 नवंबर 2024 से की गई थी। केंद्र सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश के लिए 2,88,70,495 किसानों के पंजीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वर्तमान प्रगति के अनुसार अब तक 2, 38,72,418 किसानों का नामांकन किया जा चुका है, जबकि लगभग 49,98,007 किसानों का पंजीकरण अभी शेष है।    योगी सरकार ने इस अभियान को मिशन मोड में संचालित करते हुए जिला प्रशासन, राजस्व विभाग, कृषि विभाग और स्थानीय स्तर के कर्मचारियों को तेजी से कार्य पूरा करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का उद्देश्य किसानों का एकीकृत डिजिटल डाटाबेस तैयार करना है, जिससे उन्हें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा, कृषि अनुदान, ऋण सुविधा और अन्य योजनाओं का लाभ सीधे और पारदर्शी तरीके से मिल सके। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अगले 90 दिनों यानी 26 सितंबर 2026 तक लक्ष्य पूरा करना है।     प्रदेश सरकार की प्राथमिकता केवल पंजीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि भूमि और किसानों के रिकॉर्ड को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाना भी है। इसी क्रम में “अंश निर्धारण” का कार्य भी तेजी से चल रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में अंश निर्धारण का कार्य 87.53 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है। इससे भूमि रिकॉर्ड की शुद्धता बढ़ेगी और भविष्य में विवादों को कम करने में मदद मिलेगी।    विभागीय अधिकारियों के अनुसार फार्मर रजिस्ट्री उत्तर प्रदेश की कृषि व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकती है। इससे सरकार को वास्तविक किसानों की पहचान करने, योजनाओं की मॉनिटरिंग करने और कृषि आधारित नीतियों को अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी। साथ ही किसानों को सरकारी सहायता प्राप्त करने में भी आसानी होगी।    योगी सरकार लगातार तकनीक आधारित प्रशासन को बढ़ावा दे रही है। डिजिटल गवर्नेंस, ऑनलाइन सेवाओं और डेटा आधारित योजना क्रियान्वयन के जरिए उत्तर प्रदेश को आधुनिक और पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है। फार्मर रजिस्ट्री अभियान को भी इसी व्यापक परिवर्तन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है, जो आने वाले समय में प्रदेश के करोड़ों किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।

योगी सरकार शिक्षा और व्यक्तित्व विकास के लिए चलाएगी गतिविधियों का व्यापक अभियान

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षा को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रखकर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का माध्यम बना रही है। इसी सोच के अनुरूप जुलाई में प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में नियमित पठन-पाठन के साथ बोर्ड परीक्षा आवेदन प्रक्रिया, सतत मूल्यांकन, डिजिटल शिक्षा, छात्रवृत्ति, स्वास्थ्य, पर्यावरण, सांस्कृतिक गतिविधियों और करियर मार्गदर्शन का व्यापक अभियान चलेगा। शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार पूरे माह संचालित होने वाली गतिविधियों का उद्देश्य विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ उनके व्यक्तित्व, नेतृत्व क्षमता, जीवन कौशल और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास करना है। नियमित शिक्षण के साथ सीखने की गुणवत्ता, तकनीकी दक्षता, अनुशासन और व्यावहारिक कौशल को भी समान रूप से बढ़ावा दिया जाएगा। जुलाई में राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस, विशेष संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान, वन महोत्सव, सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान तथा करियर काउंसिलिंग (साइकोमेट्रिक टेस्ट) जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इन कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण, सड़क सुरक्षा, सामाजिक दायित्व और भविष्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित किया जाएगा। नियमित पढ़ाई के साथ आगे बढ़ेगी बोर्ड परीक्षा आवेदन प्रक्रिया जुलाई में निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार नियमित शिक्षण कार्य जारी रहेगा। कक्षा 9 से 12 तक प्रवेश संबंधी कार्य पूरे किए जाएंगे। कक्षा 10 एवं 12 के विद्यार्थियों के विवरण का मिलान कर बोर्ड परीक्षा आवेदन प्रक्रिया पूरी की जाएगी, जबकि कक्षा 11 के विद्यार्थियों का पंचम पोर्टल पर पंजीकरण कराया जाएगा। विद्यार्थियों को सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) का प्रशिक्षण दिया जाएगा तथा छात्रवृत्ति योजनाओं के लिए आवेदन भी कराए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक छात्र-छात्राएं इन योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकें। यूनिट टेस्ट से होगी सीखने की प्रगति की समीक्षा कक्षा 9 से 12 तक जुलाई के दूसरे सप्ताह में प्रथम यूनिट टेस्ट आयोजित किया जाएगा। इसमें मई माह के गृहकार्य का मूल्यांकन तथा अप्रैल से जुलाई के प्रथम सप्ताह तक पढ़ाए गए पाठ्यक्रम पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से विद्यार्थियों की सीखने की प्रगति का आकलन किया जाएगा। इसके साथ ही विद्यालयों में नियमित शैक्षणिक अनुश्रवण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। कक्षा के बाहर भी सीखने के मिलेंगे अवसर जुलाई माह में अभिभावक-शिक्षक संघ की सामान्य सभा एवं कार्यकारिणी का गठन कराया जाएगा। 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों को अरुणाचल प्रदेश और मेघालय की संस्कृति, लोककला और परंपराओं से परिचित कराया जाएगा। स्काउट-गाइड गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ विद्यालयों में योग, खेलकूद, प्रार्थना सभा आधारित प्रेरक कार्यक्रम तथा डिजिटल शिक्षण गतिविधियों का भी आयोजन होगा। इससे विद्यार्थियों में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, टीम भावना और सामाजिक सहभागिता का विकास होगा। निदेशक, माध्यमिक शिक्षा, प्रताप सिंह बघेल ने बताया कि जुलाई का शैक्षणिक कैलेंडर विद्यार्थियों के समग्र विकास को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। नियमित पढ़ाई के साथ मूल्यांकन, डिजिटल शिक्षा, छात्रवृत्ति, खेल, स्वास्थ्य, पर्यावरण, करियर मार्गदर्शन और सह-शैक्षणिक गतिविधियों को समान महत्व दिया गया है। हमारा प्रयास है कि प्रत्येक विद्यालय, कैलेंडर का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करे ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ जीवन में आगे बढ़ने के लिए आवश्यक कौशल और अवसर भी प्राप्त हों।

योगी सरकार शिक्षा और व्यक्तित्व विकास के लिए चलाएगी गतिविधियों का व्यापक अभियान

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षा को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रखकर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का माध्यम बना रही है। इसी सोच के अनुरूप जुलाई में प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में नियमित पठन-पाठन के साथ बोर्ड परीक्षा आवेदन प्रक्रिया, सतत मूल्यांकन, डिजिटल शिक्षा, छात्रवृत्ति, स्वास्थ्य, पर्यावरण, सांस्कृतिक गतिविधियों और करियर मार्गदर्शन का व्यापक अभियान चलेगा। शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार पूरे माह संचालित होने वाली गतिविधियों का उद्देश्य विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ उनके व्यक्तित्व, नेतृत्व क्षमता, जीवन कौशल और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास करना है। नियमित शिक्षण के साथ सीखने की गुणवत्ता, तकनीकी दक्षता, अनुशासन और व्यावहारिक कौशल को भी समान रूप से बढ़ावा दिया जाएगा। जुलाई में राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस, विशेष संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान, वन महोत्सव, सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान तथा करियर काउंसिलिंग (साइकोमेट्रिक टेस्ट) जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इन कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण, सड़क सुरक्षा, सामाजिक दायित्व और भविष्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित किया जाएगा। नियमित पढ़ाई के साथ आगे बढ़ेगी बोर्ड परीक्षा आवेदन प्रक्रिया जुलाई में निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार नियमित शिक्षण कार्य जारी रहेगा। कक्षा 9 से 12 तक प्रवेश संबंधी कार्य पूरे किए जाएंगे। कक्षा 10 एवं 12 के विद्यार्थियों के विवरण का मिलान कर बोर्ड परीक्षा आवेदन प्रक्रिया पूरी की जाएगी, जबकि कक्षा 11 के विद्यार्थियों का पंचम पोर्टल पर पंजीकरण कराया जाएगा। विद्यार्थियों को सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) का प्रशिक्षण दिया जाएगा तथा छात्रवृत्ति योजनाओं के लिए आवेदन भी कराए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक छात्र-छात्राएं इन योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकें। यूनिट टेस्ट से होगी सीखने की प्रगति की समीक्षा कक्षा 9 से 12 तक जुलाई के दूसरे सप्ताह में प्रथम यूनिट टेस्ट आयोजित किया जाएगा। इसमें मई माह के गृहकार्य का मूल्यांकन तथा अप्रैल से जुलाई के प्रथम सप्ताह तक पढ़ाए गए पाठ्यक्रम पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से विद्यार्थियों की सीखने की प्रगति का आकलन किया जाएगा। इसके साथ ही विद्यालयों में नियमित शैक्षणिक अनुश्रवण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। कक्षा के बाहर भी सीखने के मिलेंगे अवसर जुलाई माह में अभिभावक-शिक्षक संघ की सामान्य सभा एवं कार्यकारिणी का गठन कराया जाएगा। 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों को अरुणाचल प्रदेश और मेघालय की संस्कृति, लोककला और परंपराओं से परिचित कराया जाएगा। स्काउट-गाइड गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ विद्यालयों में योग, खेलकूद, प्रार्थना सभा आधारित प्रेरक कार्यक्रम तथा डिजिटल शिक्षण गतिविधियों का भी आयोजन होगा। इससे विद्यार्थियों में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, टीम भावना और सामाजिक सहभागिता का विकास होगा। निदेशक, माध्यमिक शिक्षा, प्रताप सिंह बघेल ने बताया कि जुलाई का शैक्षणिक कैलेंडर विद्यार्थियों के समग्र विकास को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। नियमित पढ़ाई के साथ मूल्यांकन, डिजिटल शिक्षा, छात्रवृत्ति, खेल, स्वास्थ्य, पर्यावरण, करियर मार्गदर्शन और सह-शैक्षणिक गतिविधियों को समान महत्व दिया गया है। हमारा प्रयास है कि प्रत्येक विद्यालय, कैलेंडर का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करे ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ जीवन में आगे बढ़ने के लिए आवश्यक कौशल और अवसर भी प्राप्त हों।

सीएम योगी के निर्देश पर तत्काल लागू की गई नई व्यवस्था, लखनऊ और प्रयागराज में गठित हुई विशेष बेंच

लखनऊ योगी सरकार प्रदेश में राजस्व प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाने की दिशा में लगातार महत्वपूर्ण सुधार कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राजस्व परिषद ने सार्वजनिक महत्व की भूमि से जुड़े मामलों के त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के लिए बड़ा निर्णय लिया है। अब आरक्षित श्रेणी की भूमि, शासकीय भूमि, ग्राम सभा, नजूल, निष्क्रांत संपत्ति तथा शत्रु संपत्ति (यदि कोई हो) से संबंधित सभी वादों की सुनवाई तीन सदस्यीय विशेष पीठ (थ्री मेंबर बेंच) द्वारा की जाएगी। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। धारा-9 के तहत लागू की गई नई व्यवस्था राजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार सरकारी एवं सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने, भूमि विवादों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने तथा राजस्व न्याय प्रणाली को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने पर विशेष बल देते रहे हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा-9 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए नई व्यवस्था लागू की गयी है। इसका उद्देश्य इन संवेदनशील मामलों के निस्तारण में पारदर्शिता, न्यायिक गुणवत्ता और एकरूपता सुनिश्चित करना है। यह व्यवस्था तत्काल लागू कर दी गई है, जिसके तहत लखनऊ एवं प्रयागराज स्थित राजस्व परिषद न्यायालयों में इन श्रेणी के सभी लंबित और नए वाद अब विशेष रूप से गठित तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे। नई व्यवस्था के अनुसार आरक्षित श्रेणी की भूमि, शासकीय भूमि, ग्राम सभा, नजूल, निष्क्रांत संपत्ति तथा शत्रु संपत्ति से जुड़े मामलों की सुनवाई अब परिषद की एकल पीठ अथवा सर्किट कोर्ट द्वारा नहीं की जाएगी। इन मामलों पर विशेष रूप से गठित तीन सदस्यीय पीठ सामूहिक रूप से विचार करेगी। इससे महत्वपूर्ण मामलों में विभिन्न न्यायिक दृष्टिकोणों का समावेश होगा और निर्णय प्रक्रिया अधिक मजबूत, निष्पक्ष तथा न्यायसंगत बन सकेगी। विशेष पीठ हर बुधवार को करेगी मामलों की सुनवाई परिषद की अध्यक्ष ने बताया कि राजस्व परिषद ने लखनऊ और प्रयागराज दोनों न्यायालयों के लिए अलग-अलग तीन सदस्यीय विशेष पीठों का गठन किया है। इन विशेष पीठों द्वारा प्रत्येक बुधवार को नियमित रूप से इन मामलों की सुनवाई की जाएगी। इससे सरकारी और सार्वजनिक भूमि से जुड़े संवेदनशील प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण संभव होगा, साथ ही पूरे प्रदेश में निर्णय प्रक्रिया में एकरूपता भी स्थापित होगी। वहीं संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि इस श्रेणी के सभी लंबित एवं नए वादों की पहचान कर उन्हें निर्धारित विशेष पीठ के समक्ष सूचीबद्ध कराया जाए। इससे नई व्यवस्था का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा और मामलों के अनावश्यक लंबित रहने की संभावना भी कम होगी। व्यवस्थित सूचीकरण और नियमित सुनवाई से न्यायिक प्रक्रिया अधिक सुचारु एवं परिणामकारी बनेगी। सामूहिक निर्णय प्रणाली अपनाए जाने से न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता और पारदर्शिता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। साथ ही विभिन्न प्रकार के समान मामलों में एकरूप निर्णय आने से भविष्य में अनावश्यक विवादों और कानूनी असमंजस की स्थिति भी कम होगी। राजस्व व्यवस्था को बनाया अधिक उत्तरदायी योगी सरकार पहले ही राजस्व प्रशासन में व्यापक सुधारों की दिशा में कई महत्वपूर्ण पहल कर चुकी है। डिजिटल भू-अभिलेख, ऑनलाइन नामांतरण एवं अन्य राजस्व सेवाएं, आधुनिक तकनीकों के माध्यम से भूमि पैमाइश, पारदर्शी न्यायिक प्रक्रिया तथा सरकारी भूमि की सुरक्षा जैसे कदमों ने राजस्व व्यवस्था को अधिक उत्तरदायी बनाया है। अब तीन सदस्यीय विशेष पीठ का गठन इसी सुधार श्रृंखला की महत्वपूर्ण कड़ी है। विशेषज्ञतापूर्ण सामूहिक निर्णय व्यवस्था से न केवल न्याय वितरण प्रणाली अधिक प्रभावी और विश्वसनीय बनेगी, बल्कि प्रदेश में राजस्व न्याय व्यवस्था के आधुनिकीकरण को भी नई गति मिलेगी।