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इलेक्ट्रिशियन का काम सीख रोजगार की नई राह पर बढ़ाए कदम

रायपुर. पुरूषों के वर्चस्व वाले एक और क्षेत्र में पैर जमाने एवं अपनी पहचान स्थापित करने महिलाएं एक बार फिर तैयार हैं। महिलाओं के लिए अब तक अछूते रहे ‘इलेक्ट्रिशियन’ का काम सीख कर महिलाएं रोजगार की एक नई राह पर कदम बढ़ा रही हैं। ग्रामीण महिलाओं के लिए एक नए क्षेत्र में रोजगार के अवसर खोलने बिलासपुर के कोनी स्थित ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आर-सेटी) में विभिन्न गांवों की 20 महिलाओं को इलेक्ट्रिशियन के काम का प्रशिक्षण दिया गया है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद ये महिलाएं अब एक नए आकाश में उड़ान के लिए तैयार हैं।    आर-सेटी बिलासपुर में महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए एक नई पहल की गई है। अब ग्रामीण महिलाएं केवल सिलाई, बुनाई या पारंपरिक रोजगार तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे उन क्षेत्रों में भी अपनी पहचान बना रही हैं जिन्हें वर्षों से पुरुष प्रधान माना जाता रहा है। ‘बिहान’ (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) से जुड़ी बिलासपुर जिले की 20 महिलाएं इस बदलाव की मिसाल पेश कर रही हैं। एक नए व्यवसाय इलेक्ट्रिशियन का प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा रही हैं।      बिलासपुर के ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान में इस साल पहली बार महिलाओं के लिए इलेक्ट्रिशियन का प्रशिक्षण शुरू किया गया। महिलाओं को तकनीकी कौशल प्रदान कर उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम बनाने और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने के लिए इसकी शुरूआत की गई है। यहां प्रशिक्षण ले चुकीं रतनपुर की बिहान दीदी आबिदा कहती हैं – “शुरू में लगा था कि बिजली का कार्य केवल पुरुष ही कर सकते हैं। लेकिन प्रशिक्षण के दौरान उनकी यह सोच पूरी तरह बदल गई। कुशल प्रशिक्षकों ने उन्हें वायरिंग, स्विच बोर्ड सुधार, घरेलू विद्युत उपकरणों की मरम्मत, सुरक्षा उपाय और तकनीकी जानकारी सरल तरीके से सिखाई।“  आबिदा बताती हैं कि अब वे आत्मविश्वास के साथ घर के बिजली संबंधी कार्य स्वयं कर लेती हैं और भविष्य में इसी कौशल के माध्यम से अपनी आय बढ़ाने की योजना बना रही हैं। वे बताती हैं कि पहले छोटी-छोटी बिजली खराबियों के सुधार के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब वे न केवल अपने घर की समस्याएं हल कर पाएंगी, बल्कि आसपास के लोगों की मदद भी कर सकती हैं। आबिदा का मानना है कि यह प्रशिक्षण ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की नई राह खोल रहा है।         आर-सेटी से प्रशिक्षित मस्तूरी के डोमगांव की तिगमती डहरिया ने बताया कि उन्हें पहले से ही बिजली के कार्यों में रुचि थी और वे एक निजी कंपनी में इलेक्ट्रिशियन के रूप में कार्य कर रही थीं। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उनके तकनीकी ज्ञान और आत्मविश्वास में और अधिक वृद्धि हुई है। तिगमती बताती हैं कि इस प्रशिक्षण ने उन्हें आधुनिक तकनीकों और सुरक्षा मानकों की बेहतर समझ दी है। जब उनसे जोखिम भरे कार्य के बारे में पूछा गया तो उन्होंने आत्मविश्वास से कहा कि यदि सावधानी, सही तकनीक और सुरक्षा नियमों का पालन किया जाए तो यह कार्य महिलाओं के लिए भी पूरी तरह सुरक्षित है।  बिलासपुर आर-सेटी में प्रशिक्षित विमला का कहना है कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं, आवश्यकता केवल अवसर और सही प्रशिक्षण की होती है। यहां से प्रशिक्षण लेने वाली महिलाओं ने बताया कि प्रशिक्षण अवधि के दौरान उनके रहने और भोजन की बेहतर व्यवस्था की गई थी। साथ ही अनुभवी एवं कुशल प्रशिक्षकों द्वारा व्यवहारिक प्रशिक्षण देकर उन्हें कार्य के हर पहलू की जानकारी दी गई। महिलाओं ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान उन्हें केवल तकनीकी जानकारी ही नहीं दी गई, बल्कि आत्मविश्वास, कार्य अनुशासन और स्वरोजगार के अवसरों के बारे में भी मार्गदर्शन दिया गया। इससे उनमें आत्मनिर्भर बनने की नई ऊर्जा और विश्वास पैदा हुआ है।          केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा एसबीआई के सहयोग से आर-सेटी में ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने विभिन्न निःशुल्क प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। हर वर्ष सिलाई, ब्यूटी-पार्लर, कम्प्यूटर, अगरबत्ती निर्माण जैसे पारंपरिक कोर्स चलाए जाते रहे हैं। लेकिन इस वर्ष पहली बार महिलाओं के लिए इलेक्ट्रिशियन प्रशिक्षण शुरू किया गया, जिसने ग्रामीण क्षेत्रों में नई सोच और सकारात्मक बदलाव की शुरुआत की है। यह पहल केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर समाज में उनकी भागीदारी और सम्मान बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।

छत्तीसगढ़ का बढ़ाया मान, सुष्मिता सिंह ने UPSC में 32वीं रैंक के साथ पाई भारतीय वन सेवा में जगह

राजनांदगांव. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा शुक्रवार शाम भारतीय वन सेवा परीक्षा 2025 का अंतिम परिणाम जारी किया गया, जिसमें 148 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। प्रतिष्ठित सूची में छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में पली-बढ़ी सुष्मिता सिंह ने 32वीं रैंक हासिल कर भारतीय वन सेवा (IFS) में चयन प्राप्त किया है। उनकी इस सफलता से प्रदेश में हर्ष का माहौल है। राजनांदगांव से लेकर IFS तक का सफर सुष्मिता सिंह ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा राजनांदगांव के जेएमजे नवजीवन स्कूल और रॉयल किड्स स्कूल से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने डीएवी पब्लिक स्कूल सरकंडा, जैन इंटरनेशनल स्कूल बिलासपुर और डीपीएस भिलाई से 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की। आगे चलकर उन्होंने यूपीएस देहरादून से कंप्यूटर साइंस में बीटेक की डिग्री हासिल की। नौकरी छोड़कर UPSC की तैयारी, पांचवें प्रयास में मिली सफलता बीटेक के बाद सुष्मिता सिंह ने नौकरी भी की, लेकिन UPSC की तैयारी में कठिनाई आने पर उन्होंने नौकरी से इस्तीफा देकर पूरी तरह सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी पर ध्यान केंद्रित किया। लगातार मेहनत और दृढ़ संकल्प के साथ उन्होंने अपने पांचवें प्रयास में यह सफलता हासिल की। पिता भी रह चुके हैं IFS अधिकारी सुष्मिता सिंह का परिवार भी वन सेवा से जुड़ा रहा है। उनके पिता भारतीय वन सेवा के अधिकारी रह चुके हैं और छत्तीसगढ़ में लंबे समय तक एसडीओ, डीएफओ, वन संरक्षक और मुख्य वन संरक्षक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दे चुके हैं। वर्तमान में वे सेवानिवृत्त होकर भिलाई में निवासरत हैं। परिवार और मेहनत को दिया सफलता का श्रेय सुष्मिता सिंह ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां की प्रेरणा, पिता के मार्गदर्शन और परिवार के सहयोग को दिया है। उन्होंने कहा कि निरंतर मेहनत, धैर्य और दृढ़ निश्चय ही सफलता की असली कुंजी है। उनकी इस उपलब्धि से युवाओं में नई प्रेरणा का संचार हुआ है।

Mother’s Day Gift: रायपुर महिला जेल में वीडियो कॉलिंग सुविधा शुरू, कैदियों को परिवार से मिलने का नया जरिया

रायपुर आज मदर्स डे के ममतामयी अवसर पर रायपुर की महिला जेल में बंदिनियों के लिए खुशियों की एक नई किरण जगी है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा की घोषणा के अनुरूप, जेल प्रशासन ने महिला बंदिनियों को प्रिजन इनमेट वीडियो कॉलिंग सिस्टम का बहुप्रतीक्षित तोहफा दिया है। अपनों से दूरी होगी कम वीडियो कॉलिंग की सुविधा से जेल विभाग और बीएसएनएल के बीच हुए अनुबंध के तहत इस सिस्टम को स्थापित किया गया है। अब महिला बंदी अपने परिजनों और अधिवक्ताओं से सीधे वीडियो कॉल के जरिए संवाद कर सकेंगी, जिससे उनके मानसिक संबल और कानूनी विमर्श में मदद मिलेगी।  हुनर को मिला सम्मान निश्चय कार्यक्रम के अंतर्गत कौशल विकास का प्रशिक्षण पूर्ण करने वाली 38 महिला बंदिनियों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह उनके पुनर्वास और भविष्य में स्वावलंबन की दिशा में एक बड़ा कदम है। जेल में अपनी माताओं के साथ रह रहे 14 मासूम बच्चों को विभाग की ओर से विशेष उपहार वितरित किए गए, जिससे बच्चों के चेहरे पर खिली मुस्कान खिल गया और जेल परिसर का माहौल उत्सवमय हो गया। इस संवेनदनशील पहल के शुभारंभ अवसर पर जेल और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें मुख्य रूप से श्री हिमांशु गुप्ता (डीजी, जेल), श्री योगेश सिंह क्षत्री (जेल अधीक्षक), श्री विजय छबलानी (प्रतिनिधि, BSNL), सुश्री गरिमा पांडेय (प्रभारी, महिला जेल) एवं समस्त जेल स्टाफ, संबंधित महिला बंदिनी उपस्थित रहे। यह पहल न केवल बंदिनियों को उनके मानवाधिकारों और परिवार से जोड़ने का माध्यम बनेगी, बल्कि जेल सुधार की दिशा में तकनीकी समावेश का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी पेश करेगी।

रायपुर जेल में निश्चय कार्यक्रम सफल, 67 बंदियों को स्किल सर्टिफिकेट देकर मुख्यधारा से जोड़ा गया

रायपुर छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी योजना निश्चय के अंतर्गत आज केंद्रीय जेल और महिला जेल, रायपुर में एक विशेष गरिमामयी समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवा बंदियों को अपराध की दुनिया से दूर कर स्वावलंबन और सम्मानजनक जीवन की ओर अग्रसर करना है। ज़ेन जी युवा बंदियों को अपराध के दलदल में वापिस जाने से रोकने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ की सभी जेलों में निश्चय कार्यक्रम संचालित है। इस कार्यक्रम में युवा बंदियों को कॉउंसलिंग, अपराध बोध का ज्ञान, स्व-रोजगार उन्मुख कौशल प्रशिक्षण एवं रिहाई उपरांत स्वरोजगार हेतु बैंक के माध्यम से ऋण प्रदाय किया जाता है। कौशल विकास से आत्मनिर्भरता की ओर समारोह के दौरान कुल 67 बंदियों को उनकी प्रशिक्षण अवधि पूर्ण होने पर कौशल विकास प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। इनमें 38 महिला बंदिनी और 29 पुरुष बंदी शामिल हैं।निश्चय कार्यक्रम का उद्देश्य उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत के सहयोग से संचालित इस अभियान के तहत बंदियों को अपराध बोध का ज्ञान, मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग, और रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण दिया जाता है। तकनीकी शिक्षा हेतु कंप्यूटर केंद्र का आगाज़ डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय जेल, रायपुर में आज कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र का विधिवत शुभारंभ किया गया। अब बंदी जेल के भीतर ही कंप्यूटर का बुनियादी और उन्नत प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे, जो रिहाई के बाद उनके रोजगार के अवसरों को बढ़ाएगा। आगामी लोन मेला स्वरोजगार के लिए वित्तीय सहायता बंदियों के पुनर्वास को केवल प्रशिक्षण तक सीमित न रखते हुए, उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की तैयारी भी पूरी कर ली गई है। 13 मई 2026 को इंडियन ओवरसीज बैंक द्वारा केंद्रीय जेल परिसर में लोन मेला लगाया जाएगा, जिसका उद्देश्य रिहा होने वाले बंदियों को स्वयं का व्यवसाय शुरू करने के लिए सुगमता से ऋण उपलब्ध कराना। इस अवसर पर डीजी (जेल) श्री हिमांशु गुप्ता, जेल अधीक्षक श्री योगेश सिंह क्षत्री, महिला जेल प्रभारी सुश्री गरिमा पांडेय सहित जेल प्रशासन के समस्त अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

जगन्नाथ मंदिर पहुंचे CM विष्णुदेव साय, हरिनाम संकीर्तन यज्ञ में शामिल होकर मांगी प्रदेश की खुशहाली

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज राजधानी रायपुर के गायत्री नगर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में आयोजित हरिनाम संकीर्तन नामयज्ञ में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने विधि-विधान के साथ भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री साय ने हरिनाम संकीर्तन की परंपरा को भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजन लोगों को आध्यात्मिक रूप से जोड़ने के साथ-साथ समाज में भाईचारे और सद्भाव का संदेश भी देते हैं। इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा सहित अन्य जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालुगण उपस्थित थे। मुगंली को देंगे 353 करोड़ की सौगात मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज मुंगेली जिले को 353 करोड़ 58 लाख रुपये से अधिक की विकास सौगात देंगे. जिला मुख्यालय मुंगेली में आयोजित इस बड़े कार्यक्रम में मुख्यमंत्री 414 विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे. इनमें 152 करोड़ 02 लाख रुपये से अधिक लागत के 284 कार्यों का लोकार्पण और 201 करोड़ 56 लाख रुपये से अधिक के 130 कार्यों का भूमिपूजन शामिल है. कार्यक्रम का मुख्य आयोजन डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्टेडियम, मुंगेली में होगा. मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर प्रशासन और पुलिस विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में है.

RCB टीम का छत्तीसगढ़ पहुंचने पर भव्य स्वागत, खिलाड़ियों ने की कला, संस्कृति और खानपान की जमकर तारीफ

रायपुर  आईपीएल के रोमांच के बीच आरसीबी की टीम के छत्तीसगढ़ पहुँचने पर खिलाड़ियों का छत्तीसगढ़ की पारंपरिक संस्कृति और लोककलाओं के साथ भव्य स्वागत किया गया। टीम 10 मई को रायपुर में Mumbai Indians के खिलाफ मुकाबला खेलेगी। रायपुर स्थित रिसॉर्ट में टीम के पहुँचते ही पारंपरिक तिलक, आरती और लोकनृत्य के माध्यम से खिलाड़ियों का स्वागत किया गया। इस दौरान छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की रंगत और पारंपरिक संगीत ने खिलाड़ियों का ध्यान आकर्षित किया। कई खिलाड़ी लोककलाकारों के प्रदर्शन को अपने मोबाइल कैमरों में कैद करते नजर आए। इस वीडियो को आरसीबी ने अपने ऑफिसियल इंस्टा हैंडल पर शेयर किया है जिसे अब तक 50 लाख से भी ज्यादा लोग देख चुके हैं। वहीं इस मुकाबले को देखने मुकेश अम्बानी के बेटे आकाश अम्बानी भी रायपुर आ सकते हैं । वहीं 13 मई को होने वाले आरसीबी और केकेआर मैच देखने के लिए सुपरस्टार शाहरुख खान भी रायपुर आ सकते हैं। खिलाड़ियों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक खानपान के बारे में भी जानकारी दी गई। उन्हें प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों से परिचित कराया गया, जिसकी खिलाड़ियों ने सराहना की। आईपीएल मुकाबले को लेकर रायपुर में क्रिकेट प्रेमियों के बीच खासा उत्साह देखा जा रहा है। वहीं, खिलाड़ियों के पारंपरिक स्वागत ने खेल के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की संस्कृति और मेहमाननवाज़ी की भी अलग पहचान प्रस्तुत की है।

9वीं में एडमिशन के लिए चयन परीक्षा आज, आवासीय विद्यालयों में मिलेगी प्रतियोगी एग्जाम की खास तैयारी

जांजगीर-चांपा/अम्बिकापुर. आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त ने बताया कि आयुक्त, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास रायपुर के द्वारा जारी पत्र के निर्देशानुसार मुख्यमंत्री बाल भविष्य सुरक्षा योजना अंतर्गत संचालित प्रयास आवासीय विद्यालयों में शिक्षण सत्र 2025-26 कक्षा 9वीं में प्रवेश हेतु चयन परीक्षा का आयोजन 20 अप्रैल 2025 को प्रातः 10:00 बजे से 01:00 बजे अपरान्ह तक जिला स्तर पर आयोजित है। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन फार्म भरने वाले सभी पात्र परीक्षार्थी विभागीय वेबसाईट www.eklavya.cg.nic.in पर विद्यार्थी का आवेदन क्रमांक व विद्यार्थी के पिता का मोबाईल नम्बर अंकित कर 03 अप्रैल 2025 से 20 अप्रैल 2025 तक ऑनलाइन प्रवेश पत्र डाउनलोड कर सकते हैं। किसी प्रकार की कठिनाई होने पर कलेक्टरेट कैम्पस अंबिकापुर में कार्यालय सहायक आयुक्त आदिवासी विकास अथवा संबंधित विकासखण्ड के मण्डल संयोजक से सम्पर्क कर सकते हैं। अम्बिकापुर के मंण्डल संयोजक का मो. नम्बर 9009627222, लखनपुर के मंण्डल संयोजक का मो. नम्बर 9753946553, उदयपुर के मंण्डल संयोजक को मो. नम्बर 9406130942, लुंण्ड्रा के मंण्डल संयोजक का मो. नम्बर 7999566767, बतौली के मंण्डल संयोजक का मो. नम्बर 7000452965, सीतापुर के मंण्डल संयोजक का मो. नम्बर 7240825482 एवं मैंनपाट के मंण्डल संयोजक का मो. नम्बर 9098979738 है।

IPL Fever in Raipur: RCB स्टार्स को भाया छत्तीसगढ़ का स्वाद, चखी मशहूर कांदा भाजी

रायपुर. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर का वीर नारायण सिंह क्रिकेट स्टेडियम इस साल रॉयल चैलेंजर्स बंगलुरू (RCB) के रंग में डूबा है, लेकिन उस टीम के क्रिकेटरों पर शनिवार को छत्तीसगढ़िया रंग चढ़ गया. क्रिकेटर्स ने कांदा भाजी, चरोटा भाजी, रागी के व्यंजन और बस्तर के प्राकृति तिखुर शरबत का स्वाद लिया. उन्होंने स्थानीय संगीत और नृत्य का आनंद लिया. आरसीबी ने इस साल आईपीएल के लिए रायपुर को अपना दूसरा होमग्राउंड बनाया है. आरसीबी टीम को 10 मई को मुंबई इंडियन्स और 13 मई को कोलकता नाइट राइडर्स के साथ मुकाबला खेलने वाली है. इसके लिए 8 मई को आरसीबी टीम रायपुर पहुंची. मायरा रिजॉर्ट में पूरी आरसीबी टीम ठहरी हुई है. एक प्रदर्शनी में सांस्कृतिक अनुभव के हिस्से के रूप में खिलाड़ियों का पारंपरिक संगीत और नृत्य के साथ स्वागत किया गया. टीम के कप्तान रजत पाटीदार समेत सभी क्रिकेटर्स को खासकर चरोटा और कांदा भाजी का स्वाद खूब भाया. गर्मियों में पीये जाने वाले बस्तर के प्राकृतिक शर्बत तिखुर भी पसंद आया. वहीं उन्होंने स्थानीय हस्तशिल्प आदिवासी कला, गोदना और चित्रकोट जलप्रपात के बारे में जाना. रायपुर ने हमें अपने घर जैसा महसूस कराया : सीईओ राजेश आरसीबी के सीईओ राजेश मेनन ने कहा कि रायपुर ने हमारा जिस गर्मजोशी के साथ स्वागत किया है, उससे हम बेहद उत्साहित हैं. हम आरसीबी को एक ऐसे शहर में लाकर खुश हैं, जिसने सचमुच हमें अपने घर जैसा महसूस कराया है. गोदना कला से प्रभावित हुए पांड्या टीम मेंबर्स को बताया गया कि गोदना कला, एक पारंपरिक टैटू प्रथा है, जो आदिवासी संस्कृति में गहराई से रची-बसी है. इस कला को संरक्षित रखने के लिए यह वस्त्र और कपड़ों के डिजाइनों में भी विकसित हो गई है. क्रिकेटर क्रुणाल पांड्या जो टैटू के शौकीन हैं, इस कलाकृति के पीछे की कारीगरी और कहानी कहने के अंदाज से विशेष रूप से प्रभावित हुए. उन्होंने कहा कि यह पहली बार है जब मैं रायपुर आया हूं और यह अनुभव अद्भुत रहा है.  मेफेयर में ठहरी है मुंबई इंडियन टीम रायपुर के मेफेयर होटल में मुंबई इंडियन ठहरी हुई है. जहां उनके लिए छत्तीसगढ़ी थीम पर फ़ूड और कल्चर एक्टिविटी की तैयारी की गई है. चियर्स करने पहुंचेंगी अनुष्का, रितिका और नीता अंबानी  रायपुर में होने वाले मैच को देखने के लिए  राज्यसभा सदस्य राजीव शुक्ला के अलावा अभिनेत्री और विराट कोहली की पत्नी अनुष्का शर्मा रायपुर आ रही हैं. रोहित शर्मा की पत्नी रितिका सचदेव के अलावा मुंबई इंडियंस की ओनर नीता अंबानी और उनके पुत्र अनंत अंबानी के भी आने की संभावना है.  बता दें कि मुख्यमंत्री साय की पहल से छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 10 साल बाद आईपीएल मैच संभव हो पाया है. पिछले वर्ष की विजेता टीम आरसीबी ने रायपुर को अपना होम ग्राउंड चुना. यह मैच छत्तीसगढ़ में होने से राज्य की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी. 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हरिनाम संकीर्तन नामयज्ञ में लिया हिस्सा, प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि के लिए की विशेष पूजा

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज राजधानी रायपुर के गायत्री नगर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में आयोजित हरिनाम संकीर्तन नामयज्ञ में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने विधि-विधान के साथ भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री साय ने हरिनाम संकीर्तन की परंपरा को भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजन लोगों को आध्यात्मिक रूप से जोड़ने के साथ-साथ समाज में भाईचारे और सद्भाव का संदेश भी देते हैं। इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा सहित अन्य जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालुगण उपस्थित थे।

सुशासन की रफ़्तार 12 किमी का मुश्किल सफर अब अनिल के लिए हुआ आसान

बिलासपुर हौसले बुलंद हों और शासन का साथ मिल जाए, तो कोई भी बाधा सपनों को नहीं रोक सकती। बिलासपुर जिले के कोटा विकासखंड के अंतर्गत ग्राम नागपुरा के रहने वाले अनिल कुमार की कहानी आज इसी बदलाव की गवाही दे रही है। सुशासन तिहार के माध्यम से मिली एक मोटरराइज़्ड ट्राइसिकल ने न केवल अनिल के रास्ते की दूरी कम की है, बल्कि उनके आत्मविश्वास को नई ऊँचाई दी है। चुनौतियों से भरा था शिक्षा का पथ      अनिल कुमार 12वीं कक्षा के छात्र हैं और 70 प्रतिशत दिव्यांगता के बावजूद उनके मन में पढ़ने की तीव्र इच्छा है। लेकिन उनके घर से स्कूल की दूरी 12 किलोमीटर है। रोज़ लंबी दूरी तय करना, ऊबड़-खाबड़ रास्ते और स्कूल पहुँचने के लिए दूसरों पर निर्भरता अनिल की पढ़ाई में बड़ी बाधा थी। अनिल के परिवार वाले भी उनकी सुरक्षा और पहुँच को लेकर हमेशा चिंतित रहते थे। समाधान शिविर में मिली त्वरित राहत    बानाबेल में आयोजित श्सुशासन तिहारश् समाधान शिविर अनिल के जीवन में टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। अनिल ने अपनी समस्या अधिकारियों के सामने रखी। शासन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए मौके पर ही आवेदन का निराकरण किया और अनिल को मोटरराइज़्ड ट्राइसिकल प्रदान की। आत्मनिर्भरता की नई मुस्कान      ट्राइसिकल की चाबी मिलते ही अनिल के चेहरे पर जो चमक दिखी, वह आत्मनिर्भर होने के गर्व की थी। अब अनिल बिना किसी मानवीय सहारे के स्वयं वाहन चलाकर समय पर स्कूल पहुँच सकेंगे। पहले स्कूल पहुँचना ही सबसे बड़ी चुनौती थी, जिससे पढ़ाई प्रभावित होती थी। अब मेरी मुश्किलें आसान हो गई हैं। अनिल कुमार ने कहा कि मैं मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय का हृदय से आभारी हूँ, जिन्होंने मेरे सपनों को नई रफ़्तार दी है।