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सूरज नासिक में रहते हैं और ट्रेनिंग का खर्च हर महीने 2-3 दौड़ों में भाग लेकर मिलने वाली इनामी राशि से निकालते हैं

रायपुर नासिक के एथलेटिक्स ट्रैक पर सूरज माशी और उनके कुछ साथी अक्सर अपने सीनियर खिलाड़ियों को ट्रेनिंग करते हुए बड़े ध्यान से देखते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि वे सिर्फ देख नहीं रहे होते, बल्कि हर छोटी-बड़ी चीज को समझकर उसे अपनी ट्रेनिंग में लागू करने की कोशिश करते हैं। सूरज उन आदिवासी खिलाड़ियों के समूह का हिस्सा हैं, जो हर महीने कोच की फीस नहीं दे सकते और अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए जो भी मदद मिलती है, उसी पर निर्भर रहते हैं। दौड़ना ही उनका सबसे बड़ा हुनर है, जिसने उन्हें यहां तक पहुंचाया है और जो एक दिन उनकी जिंदगी बदल सकता है।             सूरज ने कहा, “कोचिंग फीस 4000 रुपये प्रति माह है, जिसे मैं वहन नहीं कर सकता। मैं नासिक में किराये पर रहकर पढ़ाई करता हूं और किराया मुझे महाराष्ट्र और गुजरात में दौड़ों में भाग लेकर मिलने वाली इनामी राशि से ही देना पड़ता है। इसलिए मैं खुद ही ट्रेनिंग करता हूं और जब कहीं अटकता हूं तो सीनियर्स या ट्राइबल विभाग के कोच से सलाह लेता हूं।” यही सूरज खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की एथलेटिक्स प्रतियोगिता में पुरुष 5000 मीटर दौड़ में रजत पदक जीतने में सफल रहे।          सूरज हर महीने सिर्फ 300 रुपये देकर ट्रेनिंग सुविधा का उपयोग करते हैं और सेकेंड हैंड जूते और स्पाइक्स में अभ्यास करते हैं। उनके स्पाइक्स काफी घिस चुके थे, इसलिए उन्हें इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए एक साथी धावक से स्पाइक्स उधार लेने पड़े। पालघर जिले के मोखाडा तालुका के एक छोटे से गांव से आने वाले सूरज की जिंदगी संघर्ष और आत्मनिर्भरता की कहानी है। वारली जनजाति से ताल्लुक रखने वाले सूरज, जो एक दिहाड़ी मजदूर के बेटे हैं और चार बहनों के बाद पैदा हुए पहले बेटे हैं, बचपन से ही आत्मनिर्भर रहे हैं। सरकारी आश्रम शाला में पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने दौड़ना शुरू किया।             स्कूल के एक खेल आयोजन के दौरान उन्हें दौड़ने का शौक लगा और तब से यह उनके जीवन का सहारा बन गया। जब सूरज 10वीं कक्षा में थे, उनकी मां घर में गिरने से गंभीर रूप से घायल हो गईं और अब चल-फिर नहीं पातीं। पिछले साल उनकी एक बड़ी बहन का निधन हो गया और उनके तीन छोटे भाई उनसे मार्गदर्शन और सहारे की उम्मीद रखते हैं। स्कूल पूरा करने के बाद सूरज पढ़ाई और खेल को आगे बढ़ाने के लिए नासिक चले गए, लेकिन शहर में रहना और परिवार का सहारा बनना उनके लिए लगातार चुनौती बना हुआ है। उन्होंने कहा, “मैं स्थानीय प्रतियोगिताओं और क्रॉस-कंट्री दौड़ों में भाग लेकर हर महीने करीब 3000 से 5000 रुपये कमा लेता हूं। उसी में से कुछ पैसे बचाकर मैं अपने पिता को भेजता हूं और अपनी पढ़ाई, ट्रेनिंग और बाकी जरूरतें पूरी करता हूं।”           इस साल जून में 19 साल के होने वाले सूरज ने 18 साल की उम्र के बाद पुलिस विभाग में नौकरी पाने की भी कोशिश की। उन्होंने ज्यादातर शारीरिक परीक्षण पास कर लिए, लेकिन शॉट पुट में निर्धारित दूरी पूरी नहीं कर पाने के कारण चयन से चूक गए। हालांकि नौकरी पाना अभी भी उनकी प्राथमिकता है, लेकिन सूरज को भरोसा है कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में उनके प्रदर्शन से उनकी जिंदगी में सकारात्मक बदलाव आएगा। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र सरकार खेलो इंडिया गेम्स के पदक विजेताओं को नकद पुरस्कार भी देती है।

पत्रकारबंधुओं की कलम, सबसे बड़ी ताकत: उद्योग मंत्री

रायपुर पत्रकारबंधुओं की कलम, सबसे बड़ी ताकत: उद्योग मंत्री छत्तीसगढ़ के वाणिज्य, उद्योग, श्रम, सार्वजनिक उपक्रम व आबकारी मंत्री  लखनलाल देवांगन ने कहा कि पत्रकारबंधु एक ऐसा दर्पण होते हैं, जो समाज को सच का आईना दिखाने का कार्य करते हैं। उन्होने कहा कि निष्पक्षता एवं पारदर्शिता पत्रकारिता का मूलमंत्र है, समाचार पत्रों में जो छपता है, मीडिया में जो दिखता है, आमजन मानस उसे ही सच मानकर चलता है, अतः यह आवश्यक है कि समाचारों मंें निष्पक्षता, पारदर्शिता व निर्भीकता होनी ही चाहिये। उन्होने कहा कि प्रेस क्लब कोरबा एक ऊर्जावान संस्था है, जो पत्रकारिता व पत्रकारबंधुओं के हितों की रक्षा के लिये निरंतर कार्य कर रही है।  इस आशय के उद्गार आज मंगलवार को उद्योग मंत्री  देवंागन ने कोरबा के तिलक भवन स्थित प्रेस क्लब में आयोजित भूमिपूजन-लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान कही। नगर पालिक निगम कोरबा द्वारा वार्ड क्र. 35 खरमोरा डाईट बिल्डिंग तिलक नगर पत्रकार कालोनी के समीप एन.टी.पी.सी. के सीएसआर मद से 15 लाख रूपये की लागत से बाउण्ड्रीवाल का निर्माण कार्य कराया जाना हैं, जिसका वर्चुअल भूमिपूजन आज उद्योग मंत्री  लखनलाल देवांगन के मुख्य आतिथ्य एवं महापौर मती संजूदेवी राजपूत की अध्यक्षता में तिलक भवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उनके हाथों किया गया। इसी प्रकार वार्ड क्र. 24 तिलक भवन प्रेस क्लब में पार्षद  पंकज देवांगन के पार्षद मद से एलईडी प्रोजेक्टर, स्मार्ट टी.व्ही., साउण्ड सिस्टम व स्क्रीन स्थापना आदि का कार्य कराया गया है, जिसका लोकार्पण भी आज उद्योग मंत्री  देवांगन के करकमलों से सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर उद्योग मंत्री  देवांगन ने दिये गये अपने उद्बोधन में आगे कहा कि मुझे प्रसन्नता है कि जब मैं कोरबा का महापौर था, उस समय प्रेस क्लब का निर्माण किया गया, उस समय भी और आज भी नगर निगम केारबा द्वारा प्रेस क्लब के विकास व अन्य गतिविधियों के लिये लगातार सहयोग दिया जा रहा है, विकास कार्य कराये जा रहे हैं।  प्रदेश के मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में सरकार ने पुनः इन योजनाओं को प्रारंभ कराया है। उन्होने कहा कि हमारी सरकार देश के यशस्वी प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के सबका साथ-सबका विकास की नीति पर कार्य कर रही है तथा समाज के गरीब, निर्धन, मजदूर, किसान, युवा, महिला व हर वर्ग के लिये कल्याणकारी योजनायें संचालित कर उनके जीवन स्तर को ऊपर उठाने का कार्य कर रही है।  उद्योग मंत्री विकास हेतु लगातार कर रहे फंड की व्यवस्था  इस अवसर पर महापौर मती संजूदेवी राजपूत ने अपने उद्बोधन में कहा कि उद्योग मंत्री  लखनलाल देवांगन कोरबा के सभी 67 वार्डाे में विकास कार्य कराये जाने हेतु लगातार धनराशि की व्यवस्था करा रहे हैं, उनके प्रयासों से विगत 02 वर्षाे के दौरान विभिन्न मदों के अंतर्गत 1000 करोड़ रूपये के विकास कार्याे व परियोजनाओं की स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है।  सहजता, सरलता व सज्जनता के पर्याय हैं उद्योग मंत्री  इस अवसर पर प्रेस क्लब के अध्यक्ष  राजेन्द्र जायसवाल ने कहा कि उद्योग मंत्री  लखनलाल देवांगन अपनी सहजता, सरलता व सज्जनता के लिये जाने जाते हैं, आमजनता के बीच में भी उनकी छबि एक सहज, सरल व सज्जन व्यक्ति के रूप में अंकित है, जहॉं तक कोरबा के विकास का प्रश्न है, उन्होने अपने महापौर कार्यकाल और अब मंत्री कार्यकाल में उम्मीद से आगे बढ़कर कार्य कर रहे हैं। अभी हाल ही में महापौर ने प्रेस क्लब के मल्टी जिम की मरम्मत के लिये 02 लाख रूपये दिये हैं, उद्योग मंत्री  देवांगन ने प्रेस काम्पलेक्स में शौचालय निर्माण हेतु 10 लाख रूपये की राशि स्वीकृत कराई है, आगे भी लगातार उनके द्वारा सहयोग दिया जायेगा, जिसके लिये मैं उद्योग मंत्री  देवांगन व महापौर मती राजपूत के प्रति प्रेस क्लब कोरबा की ओर से धन्यवाद ज्ञापित करता हूॅं। वरिष्ठ पत्रकारों का उद्योग मंत्री व महापौर ने किया सम्मान  31 मार्च को कोरबा प्रेस क्लब का स्थापना दिवस भी मनाया गया, इस मौके पर उद्योग मंत्री  लखनलाल देवांगन एवं महापौर मती संजूदेवी राजपूत ने वरिष्ठ पत्रकारबंधुओं का शाल फल से सम्मान किया तथा पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिये उन्हें बधाई दी। इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार छेदीलाल अग्रवाल, राजेन्द्र पालीवाल, विश्वनाथ केडिया, मनोज शर्मा, विजय खेत्रपाल, प्रेमचंद जैन, किशोर शर्मा, राज गुप्ते, रवि पी.सिंह व आकाश वास्तव को सम्मानित  किया गया।  इस अवसर पर पार्षद नरेन्द्र देवांगन, अशोक चावलानी, पार्षद पंकज देवांगन, लक्ष्मण वास, ममता यादव, जिला उपाध्यक्ष प्रफुल्ल तिवारी, नरेन्द्र पाटनवार, प्रेस क्लब के संरक्षक मनोज शर्मा, अध्यक्ष राजेन्द्र जायसवाल, उपाध्यक्ष रामेश्वर ठाकुर, सचिव नागेन्द्र वास, महासचिव रघुनंदन सोनी, कोषाध्यक्ष ई. जैन, कार्यकारणी सदस्य राजकुमार शाह, शेख असलम, नीलम पडवार, मधु डिडवानिया, रेणु जायसवाल, प्रीतम जायसवाल, अनिल यादव, प्रतिमा सरकार, ममता आदि के साथ समस्त पत्रकारबंधु  उपस्थित थे।

दण्डकारण्य आज हिंसा से विश्वास की ओर लौटने का साक्षी बन रहा है : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर  छत्तीसगढ़ में आज 31 मार्च 2026 का दिन वामपंथी उग्रवाद के अंत के ऐतिहासिक और निर्णायक दिन के रूप में दर्ज हो रहा है। दण्डकारण्य क्षेत्र में “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” पहल के अंतर्गत 25 माओवादी कैडरों (12 महिला सहित) ने हिंसा का मार्ग छोड़कर मुख्यधारा में वापसी की है। यह घटना नक्सल आतंक के समापन की दिशा में एक स्पष्ट और ठोस उपलब्धि के रूप में सामने आई है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि आज का दिन दण्डकारण्य और पूरे छत्तीसगढ़ के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ है, जब वर्षों से चली आ रही हिंसा और भय की विचारधारा ने आत्मसमर्पण किया है। उन्होंने कहा कि यह विश्वास, लोकतंत्र और जनशक्ति की जीत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले इन 25 माओवादी कैडरों पर कुल ₹1.47 करोड़ का इनाम घोषित था। इनका मुख्यधारा में लौटना इस बात का प्रमाण है कि अब भटके हुए लोगों का भरोसा लोकतांत्रिक व्यवस्था और सरकार की पुनर्वास नीति पर मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों की प्रभावी कार्रवाई और सरकार की समन्वित रणनीति के परिणामस्वरूप माओवादी तंत्र निर्णायक रूप से कमजोर हुआ है। इसी क्रम में 93 घातक हथियारों के साथ ₹14.06 करोड़ की बड़ी बरामदगी भी हुई है, जो नक्सली नेटवर्क की कमजोर होती स्थिति को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि यह केवल आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि विश्वास की वापसी है। दण्डकारण्य क्षेत्र आज शांति, स्थिरता और सामान्य जीवन की ओर लौटने के इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बन रहा है। उन्होंने कहा कि 31 मार्च 2026 का यह दिन छत्तीसगढ़ के इतिहास में उस तिथि के रूप में याद किया जाएगा, जब नक्सलवाद के अंत की दिशा में निर्णायक परिणाम सामने आया और प्रदेश ने एक नए युग की दहलीज पर कदम रखा है।

प्रधानमंत्री आवास योजना से पक्के घरों के सपनों के साथ आजीविका, सम्मान और आत्मनिर्भरता भी हो रहे सुनिश्चित

रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य ने प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के अंतर्गत चालू वित्तीय वर्ष में ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल करते हुए पूरे देश में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। राज्य ने न केवल सर्वाधिक आवास निर्माण पूर्ण कर राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान प्राप्त किया है, बल्कि मध्यप्रदेश एवं महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों को भी पीछे छोड़ दिया है। इस उपलब्धि पर उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने हर्ष जताते हुए प्रदेशवासियों एवं हितग्राहियों को शुभकामनाएँ दी।       उन्होंने बताया कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत छत्तीसगढ़ ने 'एसएनए स्पर्श' के माध्यम से देश में सर्वाधिक व्यय कर उत्कृष्ट वित्तीय प्रबंधन का भी उदाहरण प्रस्तुत किया है। वर्ष 2016 में योजना के प्रारंभ से अब तक एक ही वित्तीय वर्ष में सर्वाधिक आवास निर्माण का रिकॉर्ड भी इसी वर्ष दर्ज किया गया है, जो राज्य की कार्यकुशलता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने बताया कि आवास से आजीविका’ के अभिनव प्रयास के अंतर्गत निर्माण सामग्री की आपूर्ति से हजारों महिलाओं को रोजगार मिला है। जिसमें रोजगार पाकर 9000 से अधिक बिहान दीदियाँ “लखपति दीदी” बनकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर रही हैं। इसके साथ ही इस वर्ष 6000 से अधिक राजमिस्त्रियों को आरसेटी के माध्यम से प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जो देश में सर्वाधिक है।          उल्लेखनीय है कि इन प्रशिक्षित राजमिस्त्रियों में 1400 महिलाएँ एवं 400 से अधिक आत्मसमर्पित नक्सली भी शामिल हैं, जो मुख्यधारा में जुड़कर विकास की नई कहानी लिख रहे हैं। पीएम आवास ग्रामीण  के हितग्राहियों को स्थायी आजीविका से जोड़ने हेतु महात्मा गांधी नरेगा के माध्यम से बड़े पैमाने पर व्यक्तिगत कार्य भी कराए गए हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।            इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार ग्रामीण विकास और गरीबों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए सतत प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से न केवल पक्के घरों का सपना साकार हो रहा है, बल्कि लोगों की आजीविका, सम्मान और आत्मनिर्भरता भी सुनिश्चित हो रही है। राज्य आगे भी इसी गति और प्रतिबद्धता के साथ विकास की नई ऊँचाइयों को छुएगा।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 हिला फुटबॉल: छत्तीसगढ़ और झारखंड फाइनल में

रायपुर खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के अंतर्गत स्वामी विवेकानंद एथलेटिक्स स्टेडियम कोटा में खेले गए महिला फुटबॉल प्रतियोगिता के सेमीफाइनल मुकाबले रोमांच और उत्कृष्ट खेल प्रदर्शन से भरपूर रहे। पहले सेमीफाइनल में छत्तीसगढ़ और अरुणाचल प्रदेश के बीच बेहद कांटे का मुकाबला देखने को मिला। निर्धारित समय तक दोनों टीमें 2-2 की बराबरी पर रहीं। इसके बाद मैच का फैसला पेनल्टी शूटआउट से हुआ, जिसमें छत्तीसगढ़ ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अरुणाचल प्रदेश को 6-5 से हराकर फाइनल में अपनी जगह पक्की की।                 वहीं दूसरे सेमीफाइनल में झारखंड ने गुजरात के खिलाफ एकतरफा जीत दर्ज की। झारखंड की टीम ने आक्रामक खेल दिखाते हुए गुजरात को 9-0 से पराजित किया। पहले हाफ के अंत तक ही झारखंड 4-0 की मजबूत बढ़त बना चुकी थी, जिसे दूसरे हाफ में और मजबूत करते हुए बड़ी जीत हासिल की। इस तरह छत्तीसगढ़ और झारखंड की टीमें अब फाइनल में आमने-सामने होंगी, जहां खिताब के लिए रोमांचक मुकाबले की उम्मीद है।

योगी सरकार में 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन से 2.31 लाख से अधिक बच्चों को मिली सहाय

लखनऊ मार्च उत्तर प्रदेश में बच्चों की सुरक्षा व संरक्षण को लेकर योगी सरकार का तंत्र अत्यंत सुदृढ़ हो चुका है। महिला कल्याण विभाग की 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन सेवा के माध्यम से जरूरतमंद बच्चों को 24 घंटे त्वरित सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। राज्य सरकार की इस पहल के तहत अब तक प्रदेश में 2.31 लाख से अधिक बच्चों को सहायता प्रदान की जा चुकी है। इनमें संकटग्रस्त, लावारिस, बाल श्रम और उत्पीड़न के शिकार बच्चे शामिल हैं। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि प्रदेश में बाल सुरक्षा के लिए एक मजबूत और संवेदनशील तंत्र विकसित किया गया है, जो जरूरतमंदों तक समयबद्ध सहायता पहुंचा रहा है। संकटग्रस्त बच्चों को त्वरित सहायता महिला कल्याण विभाग की निदेशक डॉ. वंदना वर्मा ने बताया कि यह सेवा अब जमीनी स्तर पर प्रभावी नेटवर्क के रूप में कार्य कर रही है, जहां हर जिले में हेल्पलाइन यूनिट सक्रिय रूप से संचालित है और संकट में फंसे बच्चों तक तुरंत पहुंच सुनिश्चित की जा रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में ही 77 हजार से अधिक बच्चों को हेल्पलाइन के माध्यम से मदद मिली है, जो इसकी बढ़ती पहुंच और प्रभावशीलता को दर्शाता है। 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन के तहत त्वरित बचाव व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, जिसमें कॉल प्राप्त होते ही टीम 60 मिनट के भीतर आपात स्थिति में फंसे बच्चों तक पहुंचकर उन्हें सुरक्षित निकालती है। यह सेवा 24 घंटे पुलिस सहायता, चिकित्सा सुविधा, आश्रय और कानूनी परामर्श उपलब्ध कराती है, जिससे बच्चों को हर स्तर पर संरक्षण मिलता है। साथ ही, मुसीबत में फंसे बच्चों का बाल कल्याण समिति के माध्यम से पुनर्वास कर उन्हें उनके परिवार से मिलाने की व्यवस्था भी की गई है। रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर हेल्पलाइन यूनिट सक्रिय 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन सेवा को रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों तक विस्तारित किया गया है, जिससे ऐसे स्थानों पर भटकने वाले या जोखिम में पड़े बच्चों तक तत्काल पहुंच बनाई जा सके। इसके अंतर्गत राज्य स्तर पर कंट्रोल रूम, समस्त जनपदों में चाइल्ड हेल्पलाइन यूनिट, 28 रेलवे स्टेशन यूनिट व 11 बस स्टैंड यूनिट की स्थापना की गई है। यह व्यवस्था बाल तस्करी और बाल शोषण जैसे अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में भी सहायक बन रही है। योगी सरकार का यह मॉडल बाल सुरक्षा के क्षेत्र में एक सशक्त, जवाबदेह और सक्रिय व्यवस्था के रूप में उभरकर सामने आया है।

उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने दी ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई

रायपुर  छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की समाप्ति की दिशा में मिली ऐतिहासिक सफलता के बीच आज मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से उनके नवा रायपुर स्थित निवास कार्यालय में उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर श्री शर्मा ने मुख्यमंत्री को नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में मिली इस बड़ी उपलब्धि पर बधाई देते हुए पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ अब विकास, विश्वास और समृद्धि के नए युग की ओर अग्रसर होगा। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद वर्षों तक प्रदेश की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा बना रहा और विशेष रूप से बस्तर अंचल लंबे समय तक लाल आतंक के साये में रहा।मुख्यमंत्री ने कहा कि अब परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और नक्सल प्रभावित सभी क्षेत्रों में विकास की मुख्यधारा मजबूत हो रही है। बस्तर सहित पूरे प्रदेश में शांति, सुरक्षा और विकास का नया वातावरण तैयार हो रहा है, जिससे आमजन के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि का श्रेय देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प, स्पष्ट नीति और प्रभावी रणनीति को दिया। उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व में भयमुक्त और सुरक्षित छत्तीसगढ़ का सपना आज साकार हो रहा है। मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर जवानों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी शहादत ने इस सफलता की नींव रखी है। उन्होंने सुरक्षाबलों के अदम्य साहस, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा की सराहना करते हुए कहा कि यह उपलब्धि उनके अथक प्रयासों का परिणाम है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि नक्सलमुक्त वातावरण में अब छत्तीसगढ़ तेज गति से विकास के नए सोपान गढ़ेगा और देश के अग्रणी राज्यों में अपनी सशक्त पहचान स्थापित करेगा।

भूपेश vs शाह बयानबाजी गरमाई, CM साय बोले- बस्तर में नक्सलवाद खत्म, अब विकास की रफ्तार

रायपुर. छत्तीसगढ़ समेत पूरे देश से नक्सलवाद समाप्त हो चुका है। वहीं इस मामले पर सियासत भी शुरू हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को नक्सलवाद के मुद्दे पर बहस की चुनौती दी है। बघेल ने कहा है कि कांग्रेस की सरकार में नक्सल समस्या को खत्म करने केंद्र की भाजपा सरकार को पूरा सहयोग किया गया था, लेकिन अमित शाह ने संसद में नक्सलवाद पर चर्चा के दौरान यह झूठ कहा कि कोई सहयोग नहीं किया था। सच्चाई यो यह है कि मदद भी किया गया था। साथ नक्सल मोर्चे पर जोखिम लेकर हमारी सरकार ने विकास के अनेक कार्य किए थे। वहीं, नक्सलवाद को लेकर सीएम विष्णुदेव साय ने कहा है कि आज 31 मार्च का ये दिन प्रदेश के लिए ऐतिहासिक दिन है। हमारे जवानों के साहस से छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद समाप्त हुआ है। इसके लिए प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री का बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं। नक्सलवाद छत्तीसगढ़ के विकास में बड़ा बाधक था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2024 में नक्सलवाद खत्म करने का संकल्प लिया था और उनका संकल्प पूरा हुआ है। अब बस्तर क्षेत्र बहुत तेजी से विकास करेगा। सीएम ने बताया, अमित शाह ने नक्सलवाद और कांग्रेस के आरोपों पर कहा है कि भूपेश बघेल ने जो कहा है वह असत्य है। अपनी कमजोरी को छुपाने के लिए उन्होंने ऐसा कहा है। दिसंबर 2023 में सरकार आने के बाद अगले ही महीने नक्सल प्रभावित प्रदेश की समीक्षा हुई और उसमें पता चला कि 75 फीसदी नक्सलवाद छत्तीसगढ़ में है। अपने 5 साल के कार्यकाल में तत्कालीन छत्तीसगढ़ सरकार माओवाद के साथ लड़ने में दृढ़ता प्रकट की होती, ठीक नियत से लड़ी होती तो ऐसा नहीं होता, लेकिन प्रदेश शासन का सहयोग केंद्र सरकार को नहीं मिला। वे सरासर झूठ बोल रहे हैं। झीरम के सबूत को लेकर सीएम साय ने कहा कि डॉ. रमन सिंह की जब सरकार थी तो वो नेता प्रतिपक्ष थे तो कहते थे झीरम घाटी का सबूत हमारे जेब में है। सरकार में ना तो वह झीरम घाटी की जांच करवा पाए न ही जेब वाला सबूत निकला। राहुल गाधी जब यात्रा किए, वामपंथियों से वह मिलते थे, इस सवाल पर सीएम ने कहा, देश जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल की अनेकों जगह नक्सलियों से मुलाकात हुई थी। कई जगहों पर उन्होंने मंच साझा किया। हिड़मा जब न्यूट्रलाइज हुआ तब इंडिया गेट के पास 'कितने हिड़मा मारोगे' का नारा लगाया गया और उसको राहुल गांधी ने ट्वीट किया था। यह क्या प्रमाणित करता है, देश जानती है किसके पीछे राहुल गांधी का क्या आशय है.

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: सिर्फ शक के आधार पर नहीं दी जा सकती सजा, सभी आरोपी बरी

बिलासपुर. जगदलपुर के ढाई दशक पुराने बहुचर्चित फर्जी वेतन आहरण और भ्रष्टाचार के मामले में हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में विफल रहा। केवल संदेह के आधार पर सजा नहीं दी जा सकती। मामला जगदलपुर स्थित स्वास्थ्य विभाग में वर्ष 1979 से 1985 के बीच कथित रूप से फर्जी वेतन बिल बनाकर सरकारी राशि निकालने से जुड़ा था, जिसमें करीब 42 हजार रुपये के गबन का आरोप था। अभियोजन के अनुसार, तत्कालीन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आरके सेन और उनके अधीनस्थ कर्मचारियों पर आरोप था कि उन्होंने मिलकर तीन सफाई कर्मचारी जयसिंह, लालमणि और मयाराम के नाम पर फर्जी वेतन बिल तैयार किए। कहा गया कि ये कर्मचारी वास्तविक रूप से काम नहीं कर रहे थे, फिर भी उनके नाम पर वेतन निकालकर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया। आरोप यह भी था कि वेतन बिलों में फर्जी हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान लगाए गए। जगदलपुर की विशेष अदालत ने 28 जनवरी 2002 को इस मामले में आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467, 468 (जालसाजी), 471 (फर्जी दस्तावेज का उपयोग) और 120-बी (साजिश) सहित भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत 2-2 साल के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई थी। मामले में गवाहों के बयान से यह सामने आया कि सभी कार्य तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. आरके सेन के निर्देश पर किए गए थे। कोर्ट ने माना कि अन्य आरोपी केवल अधीनस्थ कर्मचारी थे, जो अपने वरिष्ठ अधिकारी के आदेश का पालन कर रहे थे। उनके खिलाफ कोई स्वतंत्र भूमिका या आपराधिक मंशा साबित नहीं हुई। उन्होंने केवल अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया, जिसे अपराध नहीं माना जा सकता। मामले में जिन कर्मचारियों के नाम पर वेतन निकाले जाने का आरोप था, उन्होंने भी स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया कि वे कब तक काम पर नहीं थे या उन्हें वेतन नहीं मिला। कई गवाहों ने कहा कि उन्हें काम के दौरान वेतन मिला और उन्होंने हस्ताक्षर कर भुगतान लिया। इससे अभियोजन का दावा कमजोर हो गया। हाईकोर्ट ने पूरे मामले की गहन समीक्षा के बाद पाया कि अभियोजन के पास आरोप साबित करने के लिए ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य नहीं है। किसी भी आरोपी के खिलाफ यह साबित नहीं हुआ कि उसने फर्जी दस्तावेज तैयार किए या उनका उपयोग किया। हस्ताक्षर या अंगूठे के निशान फर्जी होने का कोई विशेषज्ञ प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया। कई दस्तावेज केवल कार्बन कॉपी थे, मूल रिकॉर्ड पेश नहीं किए गए। कोर्ट ने कहा कि ऐसे में जालसाजी और धोखाधड़ी के आरोप सिद्ध नहीं होते। हाईकोर्ट ने कहा कि संदेह कितना भी मजबूत क्यों न हो, वह कानूनी प्रमाण का स्थान नहीं ले सकता। इसी आधार पर कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को निरस्त करते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया। साथ ही जो आरोपी जमानत पर हैं, उनके जमानती बांड 6 महीने तक प्रभावी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

रोमांच के सहारे बदलेगी बस्तर की तस्वीर, बाइकर्स मीट से पर्यटन को नई उड़ान

जगदलपुर. बस्तर अब अपनी पहचान बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है, जहां पहली बार बस्तर राइडर्स मीट 2026 का आयोजन कर इसे एडवेंचर टूरिज्म के नए हब के रूप में पेश किया जाएगा. इस आयोजन में देश और विदेश के प्रोफेशनल राइडर्स हिस्सा लेंगे, और डर्ट बाइक रेस जैसे रोमांचक खेलों का प्रदर्शन करेंगे. करीब 500 से ज्यादा बाइकर्स ऊबड़ खाबड़ ट्रैक पर अपनी स्किल दिखाएंगे, वहीं 5 अप्रैल को चित्रकोट तक विशाल बाइक रैली निकाली जाएगी. आयोजन के दौरान स्थानीय संस्कृति खानपान और कला को भी मंच मिलेगा, जिससे बस्तर की सकारात्मक छवि सामने आएगी. जिला प्रशासन के सहयोग से यह इवेंट पर्यटन और स्थानीय प्रतिभाओं को नई पहचान देने का प्रयास है, जो बस्तर को राष्ट्रीय स्तर पर एक नए रूप में स्थापित कर सकता है. ज्ञात हो कि गत शुक्रवार को छत्तीसगढ़ में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बस्तर के लिए बाइकर्स का ग्रुप राइडिंग पर निकल। बाइकर्स ग्रुप में शामिल युवाओं ने बताया कि छत्तीसगढ़ में तो कई खूबसूरत जगह है पर बस्तर की बात ही अलग है। यहां कि हरियाली देखते ही बनती है। साल के ऊंचे-ऊंचे पेड़ की बात कुछ और है। रास्ते भर दोनों ओर हरे भरे पेड़ जो सफर को और सुकून देते हैं। रास्ते में पड़ने वाली केशकाल की घुमावदार घाटी में बाइक राइड करना अद्भूत अनुभव देता है। बस्तर में कई ऐसी जगह हैं, जिन्हें लोग नहीं जानते। बस्तर कहते ही हमें चित्रकोट और तिरथगढ़ वॉटरफाल का दृश्य जहन में आता है। वहां पर और भी वॉटरफाल हैं। उनमें से एक नया नाम नबीं वॉटरफाल का आ रहा है। वही बस्तर की संस्कृति, वाद्य यंत्र और व्यंजनों को बढ़ावा देना इस सफर का एक उद्देश्य है। यहां पर टेंट और होम स्टे जैसी सुविधाएं भी अब उपलब्ध हैं। देश और राज्य के लोगों को बस्तर जाने में थोड़ी झिझक होती है पर अब हालात अलग हैं। बस्तर के लोगों को बेहतर रोजगार पर्यटन के माध्यम से मिले यही बाइकर्स का एक लक्ष्य हैं। ग्रुप में 25 बाइकर्स होंगे शामिल राजधानी में कई बाइकर्स ग्रुप हैं। इनमें से एक ग्रुप 36 राइडिंग क्लब के सदस्य बस्तर में नए पर्यटन स्थल को निहारने जाएंगे। इस ग्रुप के 25 सदस्य अपनी=अपनी बाइक लेकर सफर पर निकलेगें। इस ग्रुप में लड़कों के साथ ही लड़कियां भी शामिल हैं। ग्रुप में पेशे से कोई डॉक्टर तो इंजीनियर तो फायनेंस एक्सपर्ट है।