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गायों पर टूटा मौत का पहिया: ट्रक की टक्कर से 6 की जान गई, कई की हालत गंभीर

सूरजपुर तेज रफ्तार ट्रक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बैठे मवेशियों को रौंद दिया. इस हादसे में 6 गायों की मौके पर ही मौत हो गई. वहीं कई मवेशी घायल हुए हैं. घटना के बाद ट्रक चालक फरार हो गया. यह घटना अंबिकापुर-बनारस मार्ग पर गोंदा गांव के पास हुई. पुलिस आरोपी चालक की तलाश में जुटी है. किसान सुरेश कुमार ने बताया कि सड़क किनारे 19 गाय बैठे थे. ट्रक चढ़ने से 6 गाय की मौके पर ही मौत गई. वहीं कई गाय घायल हुए हैं. घटना के बाद ट्रक चालक गाड़ी छोड़कर फरार हो गया. घटना की जानकारी मिलने के बाद प्रतापपुर पुलिस मौके पर पहुंची और दुर्घटनाग्रस्त ट्रक को जब्त कर पुलिस आरोपी चालक की तलाश में जुटी है.

सुपर स्वच्छता लीग में छत्तीसगढ़ के तीन शहरों ने बनाई जगह, रायपुर राज्य का प्रॉमिसिंग स्वच्छ शहर

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत नगरीय निकायों को दी बधाई रायपुर. केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में छत्तीसगढ़ के सात शहरों ने अपनी स्वच्छता की चमक बिखेरी है। बिल्हा नगर पंचायत 20 हजार से कम आबादी वाले शहरों में अब देश का सबसे साफ-सुथरा शहर बन गया है। स्वच्छ सर्वेक्षण में 20 हजार से कम आबादी वाले शहरों की श्रेणी में बिल्हा ने देशभर में प्रथम स्थान हासिल किया है। तीन लाख से दस लाख जनसंख्या वाले शहरों में बिलासपुर को पूरे देश में दूसरा और 20 हजार से 50 हजार आबादी वाले शहरों में कुम्हारी को तीसरा स्थान मिला है। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित भव्य समारोह में इन तीनों नगरीय निकायों के साथ ही स्वच्छ सर्वेक्षण में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले राज्य के कुल सात नगरीय निकायों को पुरस्कृत किया। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव, संबंधित निकायों के महापौर, अध्यक्षों और अधिकारियों ने ये पुरस्कार ग्रहण किए। केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल और केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू भी पुरस्कार समारोह में शामिल हुए। भारत सरकार के स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में अंबिकापुर, पाटन, विश्रामपुर और रायपुर ने भी राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाया है। स्वच्छ सर्वेक्षण में पहली बार शामिल नई श्रेणी 'स्वच्छता सुपर लीग' (एसएसएल) में अंबिकापुर, पाटन और विश्रामपुर ने जगह बनाई है। यह सम्मान उन शहरों को दिया गया, जो पिछले तीन वर्षों में कम से कम एक बार शीर्ष तीन में रहे हैं और वर्तमान वर्ष में शीर्ष 20 शहरों में शामिल हैं। अंबिकापुर ने 50 हजार से तीन लाख जनसंख्या श्रेणी में तथा पाटन और विश्रामपुर ने 20 हजार से कम आबादी वाले शहरों की श्रेणी में एसएसएल में अपना स्थान सुनिश्चित किया है। इनके अतिरिक्त, राजधानी रायपुर को छत्तीसगढ़ का 'प्रॉमिसिंग (Promising) स्वच्छ शहर' का पुरस्कार मिला है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सभी विजेता नगरीय निकायों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि राज्य के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने इन शहरों में स्वच्छता के प्रति नागरिकों, स्थानीय निकायों और प्रशासन के सामूहिक प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ये पुरस्कार राज्य के अन्य शहरों को भी अपने शहर को सुंदर और स्वच्छ बनाने के लिए प्रेरित करेंगे। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव ने भी आज पुरस्कृत नगरीय निकायों को बधाई दी और कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए केवल एक सम्मान ही नहीं, बल्कि स्वच्छता के प्रति निरंतर प्रयासों का प्रमाण है। आने वाले समय में अन्य नगरीय निकायों को भी स्वच्छता के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त होंगे। शहरी सरकारों से लेकर राज्य और केंद्र की सरकार शहरों को स्वच्छ, सुंदर और सुविधापूर्ण बनाने के लिए कई नवाचारों के साथ सतत काम कर रहे हैं।

बदहाल NH 343 पर सफर नहीं सज़ा, हर मोड़ पर मौत का डर

बलरामपुर छत्तीसगढ़ को झारखंड से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग-343 (NH 343) की हालत बरसात के दिनों में बद से बदतर हो चुकी है. गड्ढों में सड़क या सड़क पर गड्ढे इसका अनुमान लगाना मुश्किल है. हालत यह है कि रोज सड़क पर बैलगाड़ी से भी कम रफ्तार में वाहनों की आवाजाही और दुर्घटनाग्रस्त वाहनों की लगातार लगने वाले जाम की वजह से बस चालक बायपास से होते हुए बस चलाने को मजबूर हैं. अंबिकापुर से रामानुजगंज तक करीब 120 किलोमीटर का सफर अब जगह- जगह बने जानलेवा गड्ढों के कारण कई घंटों में पूरा होता है. सबसे ज्यादा खराब स्थिति बलरामपुर से रामानुजगंज तक की है, जिससे रायपुर-बिलासपुर रूट की सारी बस का परिचालन बंद हो गया है. कुछ बसें रूट डायवर्ट कर वाड्रफनगर होकर चलने को मजबूर हैं, जिससे राजधानी जाने के लिए बलरामपुर के लोगों को सोचना पड़ रहा है. बस के लिए करना पड़ता है घंटों इंतजार जर्जर सड़क की वजह से सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था चरमरा गई है, यात्रियों को जहां पहले हर 10 मिनट में बसें मिला करती थीं, अब यात्रियों को 2-2 घंटे तक बस का इंतजार करना पड़ रहा है. कई बसें इस मार्ग पर चलना ही बंद कर चुकी हैं. जो वाहन चल भी रहे हैं, उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. खनिज परिवहन पर भी असर दरअसल, नेशनल हाइवे की बदहाली के पीछे बड़ी वजह सड़क पर रोजाना खनिज संपदा से लदे भारी ट्रकों का आवागमन है. लेकिन सड़क खराब होने के बाद अब इनका चलना भी दूभर हो गया है. जर्जर सड़क की वजह से सिर्फ आर्थिक नुकसान ही नहीं हो रहा है, बल्कि दुर्घटनाओं की संख्या में भी इज़ाफा हुआ है. जवाब देने से कतरा रहे जनप्रतिनिधि जिला प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधि भी मीडिया के सामने जवाब देने में कतरा रहे हैं. खतरनाक हो चुकी सड़क पर रात को चलना नामुमकिन हो गया है. कई बार ट्रक और छोटे वाहन भी पलट जाते हैं जिससे लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है. लोगों का कहना है कि अगर सरकार नई सड़क नहीं बना सकती, तो कम से कम इन गड्ढों को तत्काल भरने की व्यवस्था की जाए जिससे आवागमन सुचारू हो सके. जनता का सवाल — कब होगा सुधार? लोगों का साफ कहना है कि यह मार्ग कभी प्रदेश के विकास की पहचान था, लेकिन अब वह जनता की परेशानी का कारण बन चुका है सवाल यह है कि क्या प्रशासन तब तक सोता रहेगा जब तक कोई बड़ा हादसा न हो जाए. खराब रोड पर बस चलाने का दबाव छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ प्रदेश अध्यक्ष सैय्यद अनवर अली ने लल्लूराम डॉट कॉम से चर्चा में कहा कि रामानुजगंज जिला मुख्यालय होने के बाद भी रोड का सुधार नहीं हो रहा है. धरना-प्रदर्शन, चक्काजाम के बाद भी कलेक्टर खराब रोड पर बस चलाने का दबाव बना रहे हैं. ऐसी में अगर गाड़ियां पलटती हैं, जान-माल की क्षति होती है, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा. परिवहन विभाग को बता दिया गया है कि जब तक मार्ग की मरम्मत नहीं होगी, तब तक मार्ग बदलकर बस संचालन किया जाएगा. मौसम खुलने पर करेंगे मरम्मत बलरामपुर अपर कलेक्टर आरएस लाल ने लल्लूराम डॉट कॉम से चर्चा में कहा कि इस बात को ठेकेदार और संबंध विभाग के अधिकारियों के साथ कलेक्टर की चर्चा हुई है. बरसात के दिनों में आवागमन बाधित न हो इसकी व्यवस्था करेंगे. बहरहाल, लगातार बारिश होने की वजह से सुधार के बाद भी सड़क पर गड्ढा यथावत हो जा रहा है. जैसे ही थोड़ा सा मौसम खुलेगा, तब गड्ढों को ठीक तरह से भरेंगे, जिससे आवागमन सुचारू तरीके से हो सके.

पंचायत प्रतिनिधि लापता: इलाज का बहाना बनाकर घर से निकली, थाने में दर्ज हुई रिपोर्ट

कोंडागांव छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में एक 45 वर्षीय महिला जनपद सदस्य अचानक लापता हो गई है. महिला फरसगांव जनपद पंचायत की सदस्य है. वह 8 दिन पहले अपने घर से बिना कुछ कहे निकली थी और फिर न वो घर लौटी और न ही उसकी कोई खबर मिल सकी है. महिला का फोन भी 8 दिनों से स्विच ऑफ है. जानकारी के मुताबिक, फरसगांव जनपद पंचायत के वार्ड क्रमांक 8 से जनपद सदस्य रैयमती कोर्राम (45 वर्ष) के पति ने पुलिस में आज गुमशूदगी की शिकायत दर्ज कराई है. उसने बताया कि रैयमती 9 जुलाई की दोपहर 3:30 बजे घर से बिना कुछ बताए निकली और बाद में फोन कर के कहा कि वह जिला अस्पताल में इलाज कराने के लिए गई हुई है. लेकिन इसके बाद से वह अब तक घर नहीं लौटी. पिरजनों ने कई बार उससे संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन फोन नंबर अब तक स्विच ऑफ आ रहा है. महिला के वापिस घर नहीं आने पर परिजनों ने जिला अस्पताल जाकर पूछताछ की और सभी रिश्तेदारों से संपर्क कर पतासाजी की. लेकिन कहीं से रैयमती कोई खबर नहीं मिली. अंत में महिला के पति ने फरसगांव थाने में गुमशूदगी की शिकायत दर्ज कराई है. शिकायतकर्ता (पति) ने बताया कि महिला ने 9 जुलाई को लाल रंग की साड़ी पहनी थी. उसने बैग में कपड़े रखे थे, गले में सोने का मंगलसूत्र, कानों में सोने के टॉप्स और नाक में सोने की फूली पहनी हुई थी. उनका रंग सांवला और कद करीब 5 फुट है. वह हिंदी, हल्बी और छत्तीसगढ़ी भाषा बोलने में सक्षम हैं. पुलिस जांच में जुटी फिलहाल पुलिस मामला दर्ज कर सुराग जुटाने में लगी है. परिजनों ने भी आमजन से अपील की है कि यदि रैयमती कोर्राम के बारे में कोई जानकारी मिले तो नजदीकी पुलिस थाने में सूचना दें.

अंधेरे से उजाले की ओर: पूवर्ती गांव के अर्जुन की उड़ान

रायपुर नक्सलवाद से प्रभावित बस्तर अंचल का एक नाम जो आज उम्मीद और बदलाव की मिसाल बनकर उभरा है – वह है माडवी अर्जुन। सुकमा जिले के अति-दुर्गम और माओवादी हिंसा से वर्षों त्रस्त रहे पूवर्ती गांव के इस बालक ने जवाहर नवोदय विद्यालय, पेंटा (दोरनापाल) में छठवीं कक्षा में चयन पाकर इतिहास रच दिया है। यह केवल एक छात्र की जीत नहीं, बल्कि उस उम्मीद का संकेत है जो अब बस्तर के कोने-कोने में अंकुरित हो रही है।  माडवी अर्जुन जिस पूवर्ती गांव का रहने वाला है , दरअसल वह नक्सलियों के कमांडर हिड़मा का पैतृक गांव है। एक दौर था, जब  पूवर्ती नक्सलियों का गढ़ माना जाता था। यहाँ माओवादी जन अदालत लगाकर आतंक और ग्रामीणों भाग्य का फैसला सुनाते थे। अब वही पूवर्ती गांव,  शिक्षा और विकास के नए सूरज की किरणें देख रहा है। अर्जुन की इस उपलब्धि ने यह दिखा दिया है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन हों, अगर अवसर और मार्गदर्शन मिले तो सफलता जरूर मिलती है। अर्जुन वर्तमान में बालक आश्रम सिलगेर में पढ़ाई कर रहा था। उसके घर में न बिजली है, न पक्की छत। उसके माता-पिता खेती और मजदूरी कर किसी तरह घर चलाते हैं। फिर भी, अर्जुन ने कठिन परिस्थितियों को पीछे छोड़ते हुए अपनी मेहनत और आश्रम शिक्षकों के समर्पण से यह उपलब्धि अर्जित की। बीते डेढ़ वर्षों में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा चलाए जा रहे नक्सल उन्मूलन अभियान ने बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों में परिवर्तन की नींव रखी है। पूवर्ती जैसे क्षेत्र जहां पहले सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं थीं, अब वहां सड़क निर्माण, सुरक्षा बलों के कैंप, गुरुकुल विद्यालय, स्वास्थ्य सेवाएं और उचित मूल्य दुकानें शुरू हो चुकी हैं। पूवर्ती में अब बच्चों की पढ़ाई के लिए सुरक्षा बलों की देखरेख में चल रहे  गुरुकुल ने एक प्रेरणादायी माहौल देना शुरू किया है। अर्जुन की सफलता इसी सतत प्रयास की पहली बड़ी उपलब्धि है। जिला कलेक्टर श्री देवेश ध्रुव ने कहा कि पूवर्ती जैसे दुर्गम और माओवाद प्रभावित गांव से नवोदय विद्यालय में चयन, न केवल अर्जुन की मेहनत का परिणाम है, बल्कि यह जिले की शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन का भी संकेत है। हम हर बच्चे को आगे बढ़ाने का मौका देना चाहते हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि माडवी अर्जुन की सफलता छत्तीसगढ़ की बदलती तस्वीर का प्रतीक है। यह उस नव-छत्तीसगढ़ की झलक है, जहाँ अंधेरे की जगह अब उजाले की बातें हो रही हैं। पूवर्ती जैसे गांव से राष्ट्रीय स्तर के नवोदय स्कूल  तक का सफर दर्शाता है कि हमने जो बीज शिक्षा, सुरक्षा और विकास का बोया है, वह अब फल देने लगा है। अर्जुन को मेरी ओर से ढेरों बधाई और शुभकामनाएं। अब पूवर्ती क्षेत्र से केवल एक अर्जुन नहीं, हजारों अर्जुन निकलेंगे और छत्तीसगढ़ के भविष्य को संवारेंगे। राज्य सरकार हर बच्चे के सपनों को पंख देने के लिए कटिबद्ध है। माडवी अर्जुन की यह यात्रा केवल एक छात्र की कहानी नहीं, बल्कि यह उस बदलाव की दास्तान है, जिसे बस्तर जी रहा है। नक्सलवाद की दीवारें अब दरक रही हैं और शिक्षा की रोशनी बस्तर के घर-आंगनों में फैल रही है।बदलते बस्तर की यह शुरुआत है। अब अर्जुनों की कतार लगेगी और पूवर्ती जैसे गांव विकास की नई इबारत लिखेंगे।

अंधेरे से उजाले की ओर: पूवर्ती गांव के अर्जुन की उड़ान

रायपुर नक्सलवाद से प्रभावित बस्तर अंचल का एक नाम जो आज उम्मीद और बदलाव की मिसाल बनकर उभरा है – वह है माडवी अर्जुन। सुकमा जिले के अति-दुर्गम और माओवादी हिंसा से वर्षों त्रस्त रहे पूवर्ती गांव के इस बालक ने जवाहर नवोदय विद्यालय, पेंटा (दोरनापाल) में छठवीं कक्षा में चयन पाकर इतिहास रच दिया है। यह केवल एक छात्र की जीत नहीं, बल्कि उस उम्मीद का संकेत है जो अब बस्तर के कोने-कोने में अंकुरित हो रही है।  माडवी अर्जुन जिस पूवर्ती गांव का रहने वाला है , दरअसल वह नक्सलियों के कमांडर हिड़मा का पैतृक गांव है। एक दौर था, जब  पूवर्ती नक्सलियों का गढ़ माना जाता था। यहाँ माओवादी जन अदालत लगाकर आतंक और ग्रामीणों भाग्य का फैसला सुनाते थे। अब वही पूवर्ती गांव,  शिक्षा और विकास के नए सूरज की किरणें देख रहा है। अर्जुन की इस उपलब्धि ने यह दिखा दिया है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन हों, अगर अवसर और मार्गदर्शन मिले तो सफलता जरूर मिलती है। अर्जुन वर्तमान में बालक आश्रम सिलगेर में पढ़ाई कर रहा था। उसके घर में न बिजली है, न पक्की छत। उसके माता-पिता खेती और मजदूरी कर किसी तरह घर चलाते हैं। फिर भी, अर्जुन ने कठिन परिस्थितियों को पीछे छोड़ते हुए अपनी मेहनत और आश्रम शिक्षकों के समर्पण से यह उपलब्धि अर्जित की। बीते डेढ़ वर्षों में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा चलाए जा रहे नक्सल उन्मूलन अभियान ने बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों में परिवर्तन की नींव रखी है। पूवर्ती जैसे क्षेत्र जहां पहले सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं थीं, अब वहां सड़क निर्माण, सुरक्षा बलों के कैंप, गुरुकुल विद्यालय, स्वास्थ्य सेवाएं और उचित मूल्य दुकानें शुरू हो चुकी हैं। पूवर्ती में अब बच्चों की पढ़ाई के लिए सुरक्षा बलों की देखरेख में चल रहे  गुरुकुल ने एक प्रेरणादायी माहौल देना शुरू किया है। अर्जुन की सफलता इसी सतत प्रयास की पहली बड़ी उपलब्धि है। जिला कलेक्टर श्री देवेश ध्रुव ने कहा कि पूवर्ती जैसे दुर्गम और माओवाद प्रभावित गांव से नवोदय विद्यालय में चयन, न केवल अर्जुन की मेहनत का परिणाम है, बल्कि यह जिले की शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन का भी संकेत है। हम हर बच्चे को आगे बढ़ाने का मौका देना चाहते हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि माडवी अर्जुन की सफलता छत्तीसगढ़ की बदलती तस्वीर का प्रतीक है। यह उस नव-छत्तीसगढ़ की झलक है, जहाँ अंधेरे की जगह अब उजाले की बातें हो रही हैं। पूवर्ती जैसे गांव से राष्ट्रीय स्तर के नवोदय स्कूल  तक का सफर दर्शाता है कि हमने जो बीज शिक्षा, सुरक्षा और विकास का बोया है, वह अब फल देने लगा है। अर्जुन को मेरी ओर से ढेरों बधाई और शुभकामनाएं। अब पूवर्ती क्षेत्र से केवल एक अर्जुन नहीं, हजारों अर्जुन निकलेंगे और छत्तीसगढ़ के भविष्य को संवारेंगे। राज्य सरकार हर बच्चे के सपनों को पंख देने के लिए कटिबद्ध है। माडवी अर्जुन की यह यात्रा केवल एक छात्र की कहानी नहीं, बल्कि यह उस बदलाव की दास्तान है, जिसे बस्तर जी रहा है। नक्सलवाद की दीवारें अब दरक रही हैं और शिक्षा की रोशनी बस्तर के घर-आंगनों में फैल रही है।बदलते बस्तर की यह शुरुआत है। अब अर्जुनों की कतार लगेगी और पूवर्ती जैसे गांव विकास की नई इबारत लिखेंगे।

‘देश की डेमोग्राफी बदलना चाहती है विपक्ष’ — डिप्टी सीएम शर्मा का आरोप, ममता ने बीजेपी पर उठाए सवाल

रायपुर प्रदेश की भाजपा सरकार लगातार छत्तीसगढ़ में पहचान छुपाकर या बदलकर रह रहे बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें वापिस भेजने की कार्रवाई कर रही है. लेकिन पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि अगर बांग्लाभाषियों पर उत्पीड़न नहीं रुका, तो गंभीर नतीजा भुगतना होगा. उनके इस बयान पर अब डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने पलटवार किया है. डिप्टी सीएम शर्मा ने कहा कि विपक्षी पार्टियां देश की डेमोग्राफी बदलना चाहती हैं. फर्जी आधार बनवाकर लोग बंगाल से छत्तीसगढ़ आ रहे हैं. बोलने के लहजे और एक्सेंट से सब साफ पता चल जाता है. पूछने पर गांव, जन्म स्थान तक नहीं बता पाते हैं. बता दें, पश्चिम बंगाल में चुनाव होने हैं. PM मोदी के बंगाल दौरे से ठीक पहले कोलकाता में आयोजित एक रैली में CM ममता बनर्जी ने BJP सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि देश भर में पश्चिम बंगाल के मजदूरों को बांग्लादेशी बताकर उनका उत्पीड़न किया जा रहा है. CM ममता ने कहा- “मैं बंगालियों के प्रति केंद्र और भाजपा के रवैए से निराश और शर्मिंदा हूं.” उन्होंने सवाल किया कि आखिर उनको बंगालियों से इतनी नाराज़गी क्यों है? “आगे से मैं और ज़्यादा बांग्ला बोलूंगी. CM ममता बनर्जी ने चेतावनी देते हुए आगे कहा कि “बीजेपी में हिम्मत है तो मुझे डिटेंशन शिविर में बंद कर दिखाए. बंगाल के लोगों को डिटेंशन शिविरों में रखने की स्थिति में राज्य के लोग BJP को चुनाव के जरिए राजनीतिक डिटेंशन शिविर में भेज देंगे. अगर बांग्लाभाषियों का उत्पीड़न नहीं रुका तो भाजपा को इसका गंभीर राजनीतिक नतीजा भुगतना होगा.” छत्तीसगढ़ को स्वच्छ सर्वेक्षण पुरस्कार मिलने पर डिप्टी सीएम शर्मा ने दी बधाई छत्तीसगढ़ के निकायों को स्वच्छता के लिए आज राष्ट्रीय स्वच्छ सर्वेक्षण पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इसपर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ को स्वच्छता में आज राष्ट्रीय सम्मान मिला है. दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उपमुख्यमंत्री अरुण साव एवं रायपुर नगर निगम की टीम को सम्मानित किया है. उन्होंने आगे कहा कि निकायों ने अच्छा काम किया है, इसलिए स्वच्छता में इनाम मिला, लेकिन अभी और काम बाकी है. इसके साथ ही उन्होंने डिप्टी सीएम अरुण साव और टीम को बधाई दी है.    विधानसभा में भारतमाला प्रोजेक्ट पर हंगामा भारतमाला प्रोजेक्ट पर विधानसभा में संभावित हंगामे को लेकर डिप्टी सीएम शर्मा ने कहा कि कांग्रेस खुद घोटालेबाज है. “यह तो वही बात हो गई, उल्टा चोर कोतवाल को डांटे. मुख्यमंत्री ने कार्रवाई की है. जो दोषी हैं वो जेल जाएंगे. स्वास्थ्यकर्मियों की हड़ताल डिप्टी सीएम शर्मा ने स्वास्थ्यकर्मियों की हड़ताल पर भी बयान दिया. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को सभी की चिंता है. आपके (मीडिया) माध्यम से ध्यान खींचा जा रहा है, जरूर देखा जाएगा. आने वाले समय में सब ठीक होगा.

सदन की गरिमा पर सवाल: विपक्षी आचरण से आहत स्पीकर, डॉ. रमन ने जताई कड़ी आपत्ति

रायपुर छत्तीसगढ़ विधानसभा में गुरुवार को खाद संकट पर विपक्षी सदस्यों की लगातार नारेबाजी से प्रश्नकाल बाधित हुआ. इससे नाराज स्पीकर डॉ. रमन सिंह ने बीच में प्रश्नकाल को स्थगित कर दिया. स्पीकर डॉ. रमन सिंह कहा कि प्रश्नकाल को बाधित करना बहुत ही गलत परंपरा है. आज जो कुछ हुआ 25 साल के इतिहास में नहीं हुआ. मेरे द्वारा आग्रह करने के बाद विपक्षी सदस्य गर्भगृह में नारेबाजी करते रहे. यह बहुत ही दुःखद था. मैं बहुत दुखी मन से विपक्षी सदस्यों को सदन की आज पूरे दिन की कार्यवाही से निलंबित करता हूँ. कांग्रेस विधायकों को उकसा रहे थे भूपेश बघेल संसदीय कार्यमंत्री ने विपक्षी सदस्यों की लगातार नारेबाजी पर कहा आज विपक्ष का व्यवहार बेहद ही दुर्भाग्यपूर्ण रहा है. छत्तीसगढ़ के संसदीय परंपरा के इतिहास के लिए जो कुछ प्रश्नकाल के दौरान हुआ वह दुःखद है. कांग्रेस को इसका जवाब देना चाहिए कि विपक्ष को चला कौन रहा था ? भूपेश बघेल जी कांग्रेस विधायकों को उकसाने का प्रयास कर रहे थे.

सदन में खाद संकट की गूंज: विपक्ष ने घेरा सरकार को, धरना देकर लगाए ‘इस्तीफा दो’ के नारे

रायपुर  विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन खाद संकट पर विपक्ष ने कृषि मंत्री रामविचार नेताम को घेरा. मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी दल के सदस्यों ने पहले गर्भगृह में पहुंचकर ‘खाद की कालाबाजारी बंद करो’ जैसे नारे लगाए, इसके बाद सदन से वॉकआउट किया. कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री उमेश पटेल ने सदन ने प्रश्नकाल के दौरान प्रदेश खाद की कमी का मुद्दा उठाया. उन्होंने खाद का पूछा कि जून तक करीब आधा भंडारण हुआ है आपूर्ति का क्या प्लान है? कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि भारत सरकार से लगातार संपर्क में है, किसी तरह की कोई कमी खाद की नहीं हो इसपर नजर है, डीएपी की जहां कमी थी वहां दूसरे खाद को प्रमोट कर रहे हैं, डीएपी नैनो को भी प्रोत्साहित कर रहे हैं. बहुत से रैक प्वाइंट पर खाद पहुंचने वाला है. 20 जुलाई तक 18850 मैट्रिक टन खाद यानि कुल 24 रैक अभी मिलने वाला है, जिसमें एनपीके और डीएपी खाद भी रहेगा पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पूछा कि डीएपी की कालाबाजारी क्यों हो रही है? इस पर कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि अभी तक 1 लाख 72 हजार मैट्रिक टन डीएपी आ गया है, 18 हजार मैट्रिक टन अगले 5 दिन में और आ जाएगा, कहीं कोई दिक्कत नहीं होगी.

CM साय की बड़ी पहल: गांव-गांव पहुंचेगी चिकित्सा सुविधा, 151 वाहन किए रवाना

रायपुर  प्रदेश के कोने-कोने तक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण हेतु राज्य सरकार पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है. भरोसेमंद चिकित्सा सुविधा आमजन तक पहुँचाने की दिशा में उठाया गया यह कदम ऐतिहासिक है. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज अपने निवास परिसर से मैदानी स्वास्थ्य अमले के लिए 151 वाहनों को हरी झंडी दिखाकर विभिन्न जिलों के लिए रवाना किया. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि इन वाहनों के माध्यम से बस्तर और सरगुजा क्षेत्र के सुदूर अंचलों में भी लोगों को समय पर प्रभावी उपचार मिल सकेगा. यह ‘स्वस्थ छत्तीसगढ़’ की दिशा में एक सशक्त पहल सिद्ध होगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था को सशक्त और सुलभ बनाने की दिशा में आज एक नया अध्याय जुड़ गया है. पुराने, अनुपयोगी हो चुके वाहनों को स्क्रैप कर उनकी जगह अत्याधुनिक नए वाहन शामिल किए गए हैं. यह पहल राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन, समयबद्ध निरीक्षण और निगरानी को भी गति प्रदान करेगी. मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जिला और विकासखंड स्तर पर कार्यरत अधिकारियों और मैदानी स्वास्थ्य कर्मियों के लिए उपलब्ध कराए जा रहे वाहनों से नियमित निरीक्षण, स्वास्थ्य शिविरों की निगरानी, दूरस्थ अंचलों तक त्वरित पहुँच और आपातकालीन परिस्थितियों में समयबद्ध हस्तक्षेप संभव हो सकेगा. इससे राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों का संचालन अधिक प्रभावी और गतिशील होगा और राज्य में स्वास्थ्य सेवा वितरण प्रणाली और अधिक सक्रिय, उत्तरदायी और परिणामोन्मुखी बनेगी. यह पहल प्रदेश के संपूर्ण स्वास्थ्य तंत्र को गति देने का कार्य करेगी. मुख्यमंत्री साय ने बताया कि प्रदेश के सभी जिलों को ये वाहन चरणबद्ध रूप से उपलब्ध कराए जाएंगे. प्रथम चरण में बस्तर और सरगुजा संभाग के 12 जिलों को ये वाहन भेजे जा रहे हैं. उन्होंने यह भी जानकारी दी कि शीघ्र ही प्रदेश में 851 नवीन एंबुलेंस सेवाएं शुरू की जाएंगी, जिनमें से 375 एंबुलेंस 108 आपातकालीन सेवाओं के लिए, 30 एंबुलेंस ग्रामीण चलित चिकित्सा इकाइयों के लिए और 163 ‘मुक्तांजली’ शव वाहन निःशुल्क सेवा के अंतर्गत दी जाएंगी. मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जनजातीय समुदायों के उत्थान हेतु समर्पित भाव से कार्य कर रहे हैं. उनके मार्गदर्शन में प्रधानमंत्री ‘जन मन योजना’ के तहत विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए 30 एंबुलेंस की व्यवस्था भी शीघ्र की जाएगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि अब वर्षा ऋतु जैसे चुनौतीपूर्ण समय में भी राज्य सरकार घर-घर स्वास्थ्य सेवा पहुँचाने के अपने संकल्प को पूरी तत्परता से पूर्ण कर सकेगी. उन्होंने राज्य सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त करने हेतु किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी और इस दिशा में निरंतर प्रतिबद्धता दोहराई. स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार पूरी क्षमता के साथ स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में निरंतर कार्यरत है. उन्होंने स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत बनाने हेतु सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी और मैदानी स्वास्थ्य अमले को इस विशेष सौगात के लिए शुभकामनाएं प्रेषित कीं. इस अवसर पर सीजीएमएससी के अध्यक्ष दीपक म्हस्के, वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सलीम राज, स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया, आयुक्त डॉ. प्रियंका शुक्ला सहित बड़ी संख्या में अधिकारीगण और गणमान्यजन उपस्थित थे.