samacharsecretary.com

किसानों को बड़ी राहत! पंजाब में गन्ने का नया MSP 416 रुपये प्रति क्विंटल घोषित

चंडीगढ़  पंजाब सरकार ने राज्य के गन्ना किसानों को बड़ी राहत देते हुए गन्ने के खरीद मूल्य में 15 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी का फैसला किया है। नई दर के अनुसार अब पंजाब में गन्ने का भाव 416 प्रति क्विंटल होगा, जो पिछले वर्ष के 401 की तुलना में 15 रुपये अधिक है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दीनानगर में नई शुगर मिल का उद्घाटन के मौके पर यह बात कही। हरियाणा सरकार ने इस वर्ष गन्ने का रेट 415 प्रति क्विंटल तय किया है। पंजाब ने इससे 1 रुपये अधिक मूल्य तय कर हरियाणा से बढ़त लेते हुए किसानों को बेहतर समर्थन देने का संकेत दिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दावा किया है कि पंजाब द्वारा तय किया गया यह रेट देश में सबसे अधिक है। यह घोषणा गन्ना पेराई सीजन शुरू होने से पहले किसानों के लिए सकारात्मक संदेश मानी जा रही है। उम्मीद है कि बढ़े हुए रेट से किसानों की आय में सुधार होगा और राज्य में गन्ना खेती को बढ़ावा मिलेगा।

पंजाब में नया ‘कैश गेम’ उजागर: Wedding Season में 10-20 के नोटों की अचानक बढ़ी डिमांड

गुरदासपुर  गुरदासपुर जिले के तहत आने वाले शहरों/कस्बों और गांवों में बैंक कर्मचारियों और दलालों की मिलीभगत से 10-20 रूपये की ब्लैक का गोरख धंधा जोरों पर चल रहा है। शादी समारोह के दौरान दूल्हे/दुल्हन को 10-20 रुपये के नोट हार पहनाने के लिए दलालों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। पिछले दिनों जब हरचोवाल, कादियां, श्री हरगोबिंदपुर, काहनूवान, वडाला ग्रंथियां, घुमाण, कलानौर, धालीवाल, कादियां, बटाला, गुरदासपुर, ध्यानपुर, डेरा बाबा नानक, फतेहगढ़ चूडिय़ां, दीनानगर आदि कस्बों के विभिन्न बैंकों में बैंक के उच्च अधिकारियों से 10 और 20 रुपये के नोटों के बंडलों की मांग की गई तो उन्होंने नोटों के बंडल न होने का बहाना बनाकर लोगों को वापिस भेज दिया। जब हमने वहां मौजूद दुकानदारों में दलालों से बात की तो हमें नए दस और बीस रुपये के नोटों की जरूरत थी तो उन्होंने हमें 10 रूपये के एक हजार रुपये के नए नोट देने के बदले 1400 रुपये में देने की मांग की, इस प्रकार हमें बीस रुपये के नोटों का बंडल 2400 से 2500 रुपये में ब्लैक में देने के लिए कहा गया। यह बहुत ही हैरानी की बात है कि अगर ये नोट बैंकों में उपलब्ध नहीं हैं तो शहरों और कस्बों में बैठे दलाल इन नोटों को लोगों को ब्लैक में बेच रहे हैं। इस संबंधी ऑल इंडिया सिख स्टूडेंट्स फेडरेशन के जनरल सेक्रेटरी गगनदीप सिंह रियाड़ ने हा कि आर.बी.आई.को बैंक के इस भ्रष्ट धंधे में शामिल कर्मचारियों और दलालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। जो लोग इन नोटों को ब्लैक कर रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। जिस बैंक में दस, बीस और पचास रुपये के नोटों के बंडल सप्लाई किए जाते हैं, उसकी डिटेल्स अंदर ब्लैक बोर्ड पर लिखी जानी चाहिए, जिसे भी शादी समारोह में इन नोटों की ज़रूरत हो, वह शादी का कार्ड सरपंच, किसी सम्मानित व्यक्ति से वेरिफाई करवाए और फिर ये नोट पूरे रेट पर दिए जाने चाहिए। गगनदीप सिंह रियाड़ ने आगे कहा कि, यह बहुत सोचने वाली बात है कि एक समय था जब बैंक में शादी का कार्ड दिखाकर 10, 20, 50 के नोटों के बंडल आसानी से मिल जाते थे। जबकि अब एैसा नही है। हैरानी की बात है कि ये बाजार में नए नोट ब्लैक में खुलेआम बिक रहे हैं। कुछ लोगों ने बैंक अधिकारियों से मिल कर इसे कमाई का साधन बना लिया है, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। हर बैंक के मैनेजर को इन नोटों की डिटेल्स सार्वजनिक करने के निर्देश दिए जाने चाहिए। रियाड़ ने पंजाब के डिप्टी कमिश्नरों और बड़े अधिकारियों से मांग है कि इन काले धन्धे को रोकने के लिए हर बैंक को निर्देश दिए जाएं। 

पंजाब में भीषण सड़क दुर्घटना: सैनिकों को ले जा रहा ट्रक अनियंत्रित होकर पलटा

जालंधर जालंधर–पठानकोट हाईवे पर दारापुर बाईपास के पास आज सुबह हुए सड़क हादसे में एक ही दिशा में जालंधर की ओर जा रहे आर्मी के ट्रक और एक कार की टक्कर हो गई, जिसके बाद दोनों वाहन बेकाबू होकर सड़क पर पलट गए। गनीमत रही कि इस हादसे में कोई जानी नुक्सान नहीं हुआ और सभी सवार बाल-बाल बच गए। हादसे के दौरान कार में सवार कमल, पुत्री कुलदीप सिंह निवासी नरायणगढ़ को चोट आई है, जिसे मौके पर पहुंची सड़क सुरक्षा फोर्स की टीम, थानेदार बलजीत सिंह और आंचल ने प्राथमिक चिकित्सा दी। इसके साथ ही उन्होंने फौजी वाहन चला रहे बीरेंद्र यादव पुत्र राम धारी यादव निवासी लखनऊ, उसके साथी जवान, तथा कार चालक कुलदीप सिंह और उसकी पत्नी की मदद की और हाइड्रा की सहायता से सड़क को साफ करवाया। पुलिस हादसे की जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि यह दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई।  

किसानों-मजदूरों का 26 नवंबर का रैली दिन: मोर्चा ने क्या मांगे उठाईं?

तरनतारन  ऐतिहासिक विजयी किसान आंदोलन की 5वीं सालगिरह पर संयुक्त किसान मोर्चा पूरे देश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करेगा और पंजाब की राजधानी चंडीगढ़ में 26 नवंबर को एक बड़ी किसान और मजदूर रैली  करने का ऐलान किया है। इसकी तैयारियों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा जिला तरनतारन की एक मीटिंग एस.के.एम. जिला तरनतारन के कन्वीनर नछत्तर सिंह मुगल चक की अध्यक्षता में हुई। इस संबंध में तरसेम सिंह लुहार व मनजीत सिंह बग्गू ने कहा कि संगठन द्वारा तय कोटे के अनुसार तरनतारन जिले से किसान पूरे जोश के साथ पहुंचेंगे। पंजाब सरकार और खासकर केंद्र सरकार की किसानों और मजदूरों के लिए नुक्सानदायक नीतियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र की भी एस.पी. सरकार ने किसान आंदोलन के दौरान तीन लोक देख कानून वापस लेने का वादा किया था कि सभी फसलों और एम.एस.पी. का दाम स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार दिया जाएगा, लेकिन मामला जस का तस है। इसके उल्ट, पंजाब यूनिवर्सिटी पर कब्जा करने और पंजाब राज्य की राजधानी चंडीगढ़ पंजाब को सौंपने के बजाय, केंद्र सरकार उस पर पूरी तरह से कब्जा कर रही है। पंजाब के पानी को लूटा जा रहा है। पंजाब के खेती के सामान का व्यापार वाघा बॉर्डर व हुसैनीवाला बॉर्डर के बजाय गुजरात के रास्ते पाकिस्तान से हो रहा है, जिससे पंजाब के किसानों, मजदूरों और व्यापारियों को भारी नुक्सान हो रहा है। केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा के शीतकालीन सत्र में कानूनी संशोधन के जरिए चंडीगढ़ को पंजाब से हमेशा के लिए छीनने के प्रस्ताव की कड़ी निंदा की गई। किसान नेताओं ने कहा कि केंद्र की मौजूदा सरकार कांग्रेस सरकारों से भी बड़ी पंजाब की दुश्मन साबित हो रही है। पंजाबी इस धक्के को कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार ने बाढ़ पीड़ितों को पूरा मुआवजा नहीं दिया है, इसलिए इन गांवों के लोगों को कम से कम एक लाख रुपए की मदद दी जानी चाहिए, जिसमें सत्तर हजार रुपए प्रति एकड़ और दस लाख रुपए प्रति घर के नुक्सान के हिसाब से शामिल हैं।   इस मौके पर दूदलजीत सिंह दयालपुरा, बलबीर सिंह झामका, दलविंदर सिंह पन्नू, गुरसाहिब सिंह दल, दिलबाग सिंह लखोवाल, गुरचरण सिंह सबरा, पूरन सिंह मरीमेघा, गुरबचन सिंह घरका, हरजीत सिंह रवि, तरसेम सिंह कलसी, सतपाल सिंह नथोके, दया सिंह अलादीनपुर, सुखदेव सिंह तूर, भूपिंदर सिंह पंडोरी तख्तमल, अमृत पाल सिंह जोड़ा आदि मौजूद थे।

आने वाली ठिठुरन से सतर्क रहें पंजाबी, IMD ने दिया बड़ा अलर्ट

चंडीगढ़ पंजाब में अभी तक हल्की ठंड ही पड़ रही थी और लोग हल्के गरम कपड़े और कम्बलों से ही काम चला रहे थे, लेकिन अब रज़ाइयां निकालने का समय आ गया है क्योंकि 28 नवंबर के बाद राज्य में कंपा देने वाली ठंड पड़ने वाली है। मौसम विभाग के नए अलर्ट के अनुसार फिलहाल पंजाब का मौसम शुष्क रहेगा और बारिश का कोई अलर्ट नहीं है, लेकिन कुछ जगहों पर हल्का कोहरा और धुंध छाई रह सकती है। 28 नवंबर के बाद ठंड में तेज़ बढ़ोतरी होने की संभावना है। राज्य में रातें काफ़ी ठंडी हो चुकी हैं और सभी इलाकों का न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे पहुंच गया है। मौसम विभाग के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक पिछले 24 घंटों में तापमान में 0.6 डिग्री की और गिरावट दर्ज की गई है। विभाग के अनुसार 28 नवंबर से राज्य के ज़्यादातर हिस्सों में रात का तापमान 4 से 6 डिग्री के बीच रहेगा। हालांकि जालंधर, कपूरथला, पटियाला, लुधियाना और मोहाली में यह 6 से 8 डिग्री के बीच रहने की संभावना है। 

दिल्ली में पंजाब कांग्रेस की बड़ी हलचल! वरिष्ठ नेता की एंट्री से बढ़ी सियासी गर्मी

पटियाला पंजाब कांग्रेस के भीष्म पितामह और पार्टी के ‘ब्रेन’ के रूप में माने जाने वाले पूर्व वित्त मंत्री तथा पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष लाल सिंह ने दिल्ली पहुंचकर कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता एवं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच पंजाब की मौजूदा राजनीति को लेकर गंभीर चर्चा हुई।   पंजाब कांग्रेस की वर्तमान राजनीति में लाल सिंह सबसे पुराने नेताओं में से हैं। उन्होंने 1977 के बाद बने सभी कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों के साथ बतौर कैबिनेट मंत्री काम किया है। उनके पास कांग्रेसी राजनीति का 50 वर्षों का अनुभव है। इन वर्षों के दौरान कांग्रेस में कई बार टूट-फूट हुई कभी तिवाड़ी कांग्रेस बनी, कभी एन.सी.पी. जैसी पार्टियों का गठन हुआ पर लाल सिंह ऐसे नेता रहे जो हर परिस्थिति में गांधी परिवार की अगुवाई वाली कांग्रेस के साथ डटे रहे। यही कारण है कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी उनका विशेष सम्मान करते हैं। लाल सिंह भी सदैव पार्टी की मजबूती के लिए हाईकमान को महत्वपूर्ण सलाह देते रहे हैं। कांग्रेस पार्टी का तरनतारन उपचुनाव में चौथे नंबर पर पहुंचना पार्टी के लिए बेहद चिंताजनक है। मौजूदा राजनीतिक माहौल में लोग आम आदमी पार्टी की सरकार से काफी निराश हैं। अकाली दल दोबारा खड़े होने की कोशिशों में लगा हुआ है, पर अभी तक वह सफल नहीं हो पाया। वहीं भाजपा की केंद्र सरकार के कुछ फैसलों से पंजाब में पार्टी की राजनीतिक स्थिति कमजोर होती दिख रही है। ऐसे माहौल में लाल सिंह जैसे वरिष्ठ नेता का राहुल गांधी से मुलाकात करना इस बात का संकेत है कि कांग्रेस पंजाब को लेकर बेहद गंभीर है। वर्तमान समय में लाल सिंह ही ऐसे नेता हैं जो पंजाब के सभी 117 विधानसभा हलकों की राजनीति को गहराई से समझते हैं। पार्टी 2027 विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए उनके अनुभव का लाभ लेना चाहती है, क्योंकि चुनावों में बहुत कम समय बचा है और सभी राजनीतिक पार्टियां अपनी गतिविधियां तेज कर चुकी हैं। आम आदमी पार्टी जहां विकास कार्यों के लिए ग्रांटों का वितरण कर रही है, वहीं गुरु तेग बहादुर साहिब की 350वीं शहीदी वर्षगांठ को बड़े स्तर पर मना कर अकाली दल के पंथक वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश भी कर रही है। कांग्रेस पंजाब में संगठन निर्माण अभियान चला रही है। सभी जिलों के नए अध्यक्ष नियुक्त किए जा चुके हैं। अब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का पुनर्गठन होना है और पंजाब को नया प्रदेशाध्यक्ष मिलने वाला है। ऐसे में लाल सिंह का दिल्ली जाकर हाईकमान से मिलना पंजाब की कांग्रेस राजनीति में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पंजाब के 3 शहरों के लिए राहत भरी खबर, CM मान ने किया बड़ा ऐलान

चंडीगढ़  आज मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने श्री आनंदपुर साहिब में श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस को समर्पित 'सरबत दे भले दी अरदास' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमृतसर, आनंदपुर साहिब तलवंडी साबो के लिए एक और बड़ा ऐलान किया है। श्री आनंदपुर साहिब में एक वर्ल्ड क्लास यूनिवर्सिटी बनाने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि इस यूनिवर्सिटी में संगत से सलाह करके विषयों पर फैसले लिए जाएंगे। इसमें एक चेयर बनाई जाएगी। लोगों को गुरुओं की शिक्षाओं से ज्यादा से ज्यादा जोड़ा जाएगा और साथ ही, गुरुओं की बाणी की दुनिया भर की भाषाओं में अनुवाद किया जाएगा। लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि श्री अमृतसर साहिब, श्री आनंदपुर साहिब और तलवंडी साबो में गुरुधामों के दर्शन के लिए ई-रिक्शा, मिनी बसें और दूसरी ट्रांसपोर्टेशन सुविधाएं सभी के लिए फ्री होंगी। इनका पूरा खर्च पंजाब सरकार उठाएगी। गौरतलब है कि कल इन शहरों को पवित्र दर्जा दिया गया था। उन्होंने कहा कि समागम के दौरान सफाई से लेकर मेडिकल सुविधाएं, टेंट सिटी रिहायश, प्रबंध एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड, पुलिस अफसर साहिबान, वर्कर साहिबान सब सेवा में लगे हुए हैं। सी.एम. मान ने कहा कि अगर इसके बावजूद सेवा में कोई कमी रह गई तो माफी मांगते हैं। उन्होंने कहा कि यहां कोई मंत्री, मुख्यमंत्री नहीं सेवादार हैं। यहां स्टार नहीं चलते। उन्होंने कहा कि गुरुओं की कुर्बानी की आगे वह धूल का तिनका भी नहीं। उन्होंने कहा कि अगर उन्होंने एक पैसे की भी बेईमान की है तो उन्हें सजा मिले। 

मौसम ने ली खतरनाक करवट: पंजाब और हिमाचल में आज रात बढ़ेगा संकट, सावधानी बरतें

पंजाब  भारत की तरफ बड़ा संकट बढ़ता नजर आ रहा है, जिसमें पंजाब-हिमाचल भी शामिल है। जी हां, हाल ही में इथियोपिया में हुए ज्वालामुखी विस्फोट से निकली राख के भारत पहुंचने से हवा की गुणवत्ता पर असर पड़ेगा, जिससे सावधान रहने की अपील की जा रही है। जानकारी के अनुसार इथियोपिया में हायली गुब्बी ज्वालामुखी (Hayli Gubbi volcano) लगभग 12,000 वर्षों की निष्क्रियता के बाद 23 नवंबर, 2025 को अचानक फट गया, जिससे राख और सल्फर डाइऑक्साइड का एक बड़ा गुबार निकला। इस विस्फोट ने आसपास के कई देशों, जिनमें यमन, ओमान और भारत के कुछ हिस्से शामिल हैं, में हवाई यात्रा और वायु गुणवत्ता को प्रभावित किया है। कहा जा रहा है कि   दरअसल, इसका सीधा-सीधा असर पंजाब-हिमाचल, गुजरात, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा पर पड़ेगा। गत रात दिल्ली में देर रात राख के बादल (जहरीली हवा) बढ़ते दिखाई दिए, जिस कारण कई फ्लाईट्स रद्द कर दी गई है।   वहीं DGCA ने एयरलाइंस को चेतावनी जारी कर राख वाले क्षेत्रों और ऊंचाइयों से दूर उड़ान भरने, रूट बदलने और इंजनों की जांच करने को कहा है।   भारत मौसम विभाग (IMD) ने कहा कि राख के बादल राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली में फैल चुका है और आज रात के समय राख का गुबार पंजाब और हिमाचल प्रदेश को प्रभावित कर सकते है। हालांकि  वैज्ञानिकों  का कहना है कि गुबार की ऊंचाई काफी ज्यादा है जिसका असर जनजीवन पर कम होगा । साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि ज्वालामुखी की राख भारत से रात तक निकल जाएगी और फिर चीन की तरफ बढ़ेगी। 

चंडीगढ़ की कमान बदलेगी? राष्ट्रपति शासन जैसे संकेतों पर सियासी तापमान बढ़ा

चंडीगढ़  चंडीगढ़ पंजाब के लिए एक शरीर ही नहीं बल्कि इसकी आत्मा भी है और चंडीगढ़ के साथ पंजाब ही नहीं बल्कि विदेशों में बैठे हर पंजाबी चाहे वह किसी भी धर्म जात का हो उसकी भावनाएं जुड़ी हुई है, लेकिन चंडीगढ़ पंजाब का मुद्दा नया नहीं है. यह कई दशकों से पंजाब ओर हरियाणा के बीच चलता आ रहा है. जिसमें दोनों राज्य उसके ऊपर अपना अपना हक जताते आ रहे है. चंडीगढ़ महा पंजाब का एक हिस्सा था. जिसको फ़्रांस के आर्किटेक्ट ली कार्बुजिया ने बसाया था. इसमें उसने हर एक चीज का ध्यान रखा था, खासकर भविष्य की आने वाली मुश्किलों को लेकर यहां पर विधासनभा भी बनाई गई और एक सिविल सेक्रेट्रिएट भी बनाया गया. पंजाब और हरियाणा बनाने के बाद बनी चंडीगढ़ की समस्या चंडीगढ़ में एक झील भी बनाई गई थी. पंजाब और हरियाणा बनाने के बाद चंडीगढ़ की समस्या का जन्म भी हुआ. इससे पहले हिमाचल, पंजाब और हरियाणा एक पंजाब था. जिसके टुकड़े टुकड़े करके छोटे छोटे राज्य बना दिए गए. इसका विवाद भी उसी समय से चला आ रहा है. चाहे एसवाईएल नहर हो या फिर चंडीगढ़ पंजाब को देने की बात हो. इन्हीं मांगों के कारण पंजाब ने दशकों तक आंतकवाद का जख्म झेला है. पाकिस्तान हमेशा से ही पंजाब के भावनात्मक मुद्दों को हवा देता आया है, लेकिन अब चंडीगढ़ का जिन्न केंद्र सरकार ने फिर से बोतल से निकाल दिया है. इससे पहले पंजाब यूनिवर्सिटी का मुद्दा गर्माया हुआ है और छात्र आज भी यूनिवर्सिटी की सीनेट चुनाव को लेकर धरने पर बैठे है. पंजाब के सारे राजनीतिक और सोशल संगठन उनकी मांगों का समर्थन कर रहे है. वहीं चंडीगढ़ के मुद्दे पर एक बार फिर से चंडीगढ़ को चाहने वाले राजनीतिक ओर सोशल संगठनों ने सोशल मीडिया पर अपनी आवाज बुलंद करनी शुरू कर दी है.   राष्ट्रपति के हाथ चली जाएगी चंडीगढ़ की कमान अकाली दल द्वारा चंडीगढ़ के लिए एक बड़ा प्रस्ताव श्री आनंदपुर साहिब का दशकों पहले पास किया हुआ है. अब श्री आनंदपुर साहिब में ही श्री गुरु तेग बहादुर साहिब का 350 साला शहीदी पर्व मनाया जा रहा है. अचानक चंडीगढ़ के स्टेटस की धारा 239 से 240 करने और आने वाले पार्लियामेंट सेशन में लाने ने सबको हैरत में डाल दिया है. इसके पास होने पर इसकी सीधी कमान राष्ट्रपति के हाथ चली जाएगी. यहां का सारा प्रशाशन राष्ट्रपति के अधीन आ जाएगा. चंडीगढ़ पंजाब को देने की वकालत करने वाले कहते है कि चंडीगढ़ पंजाब के गांवों को उजाड़ कर बनाया गया था. पंजाब की जमीन पर इसकी नींव रखी गई. जिसके कारण पंजाबियों का हक इसपर बनता है. इसलिए पंजाब और हरियाणा के कारण इसको यूनियन टेरेटरी का दर्जा दिया गया. जिसमें काम करने वाले अधिकारियों को यहां पर 60-40 की रेशों से तैनात किया जाता है. अब इस रेशों के हिसाब को भी तोड़कर ज्यादा संख्या हरियाणा के अधिकारियों की कर दी गई. जिसका सामाजिक संगठन और राजनीतिक पार्टियां आरोप लगाती है. 1952 में पंडित जवाहरलाल नेहरू के ने रखी थी इसकी नींव चंडीगढ़ के हक का विवाद भी सत्तर वर्ष पुराना है. जिसकी शुरुआत महा पंजाब के पूर्वी पंजाब को तोड़कर शुरू हुई थी. 1966 से लेकर 1986 तक छह कमीशन बने, लेकिन इस विवाद का अंत नहीं हो पाया. ऐसे में अब संशोधन विधेयक ने आग पर घी का काम किया है. चंडीगढ़ को पंजाब की राजधानी बनाने का भी एक दिलचस्प किस्सा है. जो दो पंजाब को एक करने के बाद इसकी राजधानी बनाया गया. 1952 में पंडित जवाहरलाल नेहरू के ने इसकी नींव रखी थी. 7 अक्टूबर 1953 को उस समय के राष्ट्रपति जगजीवन लाल ने इसका उद्घाटन किया था. उस समय पेप्सू (पटियाला ओर ईस्ट पंजाब स्टेट्स यूनियन जिनमें पटियाला, नाभा, जींद, कपूरथला, फरीदकोट, नालागढ़, कालका, फरीदकोट जिसकी राजधानी पटियाला थी. पूर्वी पंजाब की राजधानी एक नवंबर 1956 को मिलाकर महा पंजाब बनाया गया, तो चंडीगढ़ को पंजाब की राजधानी बना दिया गया था. उस समय चंडीगढ़ में एक विधानसभा थी. जो 1966 तक जारी रही. चंडीगढ़ की विधान सभा में बनी हरियाणा की विधानसभा इसके बाद हरियाणा का जन्म हुआ तो चंडीगढ़ में बनी विधानसभा में ही अलग से हरियाणा की विधानसभा बनाई गई. यहां से ही दोनों राज्यों का चंडीगढ़ को लेकर हक शुरू हुआ. 1980 के दशक के बाद पंजाब में आतंकवाद की शुरुआत हुई. फिर 1984 के बाद उस समय शिरोमणी अकाली दल के अध्य्क्ष हरचंद सिंह लोंगोवाल और राजीव गांधी के बीच समझौता हुआ. जिसमें चंडीगढ़ को पंजाब को देने की बात कही गई जो अब तक सिरे नहीं चढ़ पाया. फिलहाल पंजाब की सारी राजनीतिक पार्टियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चाबंदी शुरू कर दी है. अपनी अपनी पार्टी की रणनीति बनाने में जुट गए है. जिसमें शिरोमणी अकाली दल ने एक कदम आगे बढ़कर कल अपनी पार्टी की एमरजेंसी कोर कमेटी की बैठक बुला ली है. वही पर कांग्रेस ओर आम आदमी पार्टी भी इसको लेकर योजना बना रही है.

सरकार तुरंत कदम उठाए नहीं तो आंदोलन तय: पंजाब के व्यापारियों का बड़ा अल्टीमेटम

लुधियाना जी.एस.टी और वैट के लंबित रिफंड को लेकर पंजाब के व्यापारियों में नाराज़गी लगातार बढ़ रही है। विभिन्न व्यापारिक संगठनों का कहना है कि पिछले 7–8 महीनों से मुद्दे को सरकार के समक्ष कई बार उठाए जाने के बावजूद रिफंड जारी नहीं किए गए। सूचनाओं के अनुसार अगस्त माह में केवल 220 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ, जबकि लगभग 650 करोड़ रुपए अभी भी लंबित हैं। व्यापारियों ने बताया कि यह मामला कई बार लुधियाना डी.टी.सी. रणधीर कौर के समक्ष रखा गया, जिन्होंने वैबसाइट अपग्रेडेशन पूरा होते ही रिफंड जारी करने का आश्वासन दिया था। इसी तरह पंजाब ट्रेड कमीशन के अध्यक्ष अनिल ठाकुर के लुधियाना दौरे में भी व्यापारिक संगठनों ने समस्या से अवगत कराया, और तब भी सरकार की ओर से जल्द समाधान का भरोसा दिया गया था। व्यापारिक संगठनों का आरोप है कि सरकार व्यापार जगत की समस्याओं के प्रति उदासीन बनी हुई है। पहले से ही कमजोर पड़ चुके व्यापारिक माहौल में कानून-व्यवस्था की चुनौतियां और कारोबार विरोधी नीतियां निवेशकों को पंजाब से दूर कर रही हैं। पंजाब प्रदेश व्यापार मंडल के महासचिव सुनील मेहरा ने कहा है कि यदि जल्द ही लंबित रिफंड जारी नहीं किए गए, तो वे राज्यस्तरीय धरने के लिए बाध्य होंगे। इसके साथ ही जल्द ही राज्य भर के व्यापारियों की एक बड़ी बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें आगामी आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी। लुधियाना के कारोबारी राजेश ढांडा ने कहा, 650 करोड़ रुपए का लंबित रिफंड छोटे व्यापारियों की कमर तोड़ रहा है। सरकार को तुरंत कदम उठाने चाहिए, वरना हालात और बिगड़ेंगे। कारोबारी विवेक वर्मा ने व्यापारिक माहौल को लेकर कहा,“पंजाब में पहले ही निवेशक भरोसा कमजोर है। रिफंड में देरी से हालात और खराब हो रहे हैं। सरकार को पारदर्शी और तेज़ व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। छोटे उद्यमियों की मुश्किलों पर विवेक जिंदल ने कहा, रिफंड का पैसा कारोबारियों का कैपिटल है, यदि कारोबारियों के पास पैसा ही नहीं होगा , तो व्यापार कैसे चलेगा। उद्योगों के भविष्य को लेकर कारोबारी एस.एस. खुराना ने बताया कि,“यदि सरकार ने समय पर रिफंड जारी नहीं किए तो उद्योगों का पलायन और बढ़ेगा। कई यूनिट पहले ही बंद हो चुकी हैं।