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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के घने वनों और वन्यजीव पर्यटन को राजस्व वृद्धि का एक प्रमुख माध्यम बताया

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य में ‘जियो और जीने दो’ की भावना को केंद्र में रखकर सह-अस्तित्व आधारित ईको-सिस्टम विकसित किया जा रहा है, जिससे न केवल जैव विविधता का संरक्षण हो रहा है, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा मिल रहा है और वनवासियों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में कई नवाचार किए जा रहे हैं इनमें वन्यजीव अभयारण्यों के संरक्षण और प्रबंधन में उच्च तकनीक का अनुप्रयोग, गुजरात के ‘वनतारा’ से प्रेरित रैस्क्यू सेंटर, दुर्लभ जीवों जैसे चीते, घड़ियाल एवं कछुओं के एक अभयारण्य से दूसरे में पुनर्स्थापन और संरक्षित क्षेत्रों की फेंसिंग शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन विभाग के अधिकारियों को गुजरात के ‘वनतारा’ वन्यजीव पुनर्वास केंद्र का अध्ययन कर प्रदेश में भी ऐसा ही रेस्क्यू और एनिमल वेलफेयर प्रोजेक्ट स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि यह पहल वन्यजीवों के संरक्षण और पुनर्वास में एक नई मिसाल पेश करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के घने वनों और वन्यजीव पर्यटन को राजस्व वृद्धि का एक प्रमुख माध्यम बताया। उन्होंने वन अधिकारी-कर्मचारियों के लिए विशेष सुविधाओं और उत्कृष्ट कार्य हेतु प्रोत्साहन की घोषणा की। उन्होंने यह भी बताया कि वन विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों से प्रदेश में वन क्षेत्र और राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्रदेश में वन ग्रामों को राजस्व ग्रामों में परिवर्तित करने की प्रक्रिया जारी है। जैव-विविधता को बढ़ावा देने के लिए कई स्थलों को जैव-विविधता विरासत घोषित किया गया है। वन-अग्नि की घटनाओं पर विभाग की प्रतिक्रिया अब पहले से अधिक त्वरित हुई है, जो प्रभावी वन प्रबंधन को दर्शाता है। वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उठाए गए प्रमुख कदम मध्यप्रदेश में बाघों की संख्या निरंतर बढ़ रही है, जिससे प्रदेश की छवि 'टाइगर स्टेट' के रूप में और मजबूत हो रही है। प्रदेश में अब 9 टाइगर रिजर्व हो गये हैं। बाघ संरक्षण के साथ-साथ ये रिजर्व पर्यटन उद्योग को बढ़ावा दे रहे हैं, साथ ही स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बना रहे हैं। टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्रों में पर्यटकों के लिए ‘बफर-सफर’ योजना के अंतर्गत अनेक नई गतिविधियाँ प्रारंभ की गई हैं। अब पर्यटक प्राकृतिक स्थलों, वन और वन्य-प्राणी दर्शन के साथ ईको-पर्यटन गतिविधियों का आनंद ले रहे हैं। इससे प्रदेश में पर्यटन को नया आयाम मिलेगा और कोर क्षेत्रों पर दबाव भी कम होगा। प्रदेश में 15,000 से अधिक वन समितियाँ गठित की जा चुकी हैं, जिनकी कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी एवं सक्रिय बनाया जा रहा है। प्रदेश में आधुनिक चिड़ियाघर और रेस्क्यू सेंटर्स विकसित किये जा रहे हैं। उज्जैन और जबलपुर में उन्नत सुविधाओं से युक्त नये चिड़ियाघर और रेस्क्यू सेंटर शीघ्र ही स्थापित किए जा रहे हैं। ओंकारेश्वर, ताप्ती और बालाघाट के सोनेवानी क्षेत्र में नए कंजर्वेशन रिजर्व बनाए जा रहे हैं, जो वन्यजीव आवासों की रक्षा करेंगे। अफ्रीका से लाए गए चीतों की कूनो में सफल पुनर्स्थापना के बाद इन चीतों को प्रदेश एंव देश के दूसरे अभयारण्यों में बसाने की प्रक्रिया भी प्रारंभ हो चुकी है। प्रदेश के बुंदेलखंड वन क्षेत्रों में फैले हुए वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीता पुनर्स्थापना की तैयारियाँ चल रही हैं, जिससे जैव विविधता में वृद्धि होगी। जलीय जीव संरक्षण के रूप में नर्मदा में महाशीर मछली जैसे जलजीवों के लिए प्रजनन केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। चंबल में कछुए, मगरमच्छ एवं घड़ियाल एवं गंगा डॉल्फिन के संरक्षण के लिए केंद्र पहले से ही स्थापित हैं। इनमें जलीय जीवों की संख्या लगातार बढ़ रही है औऱ इन्हें प्रदेश के साथ ही देश भर में भेजा जा रहा है। मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए संरक्षित क्षेत्रों के लगभग 160 किलोमीटर क्षेत्र में फेंसिंग की जा रही है। इससे वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। हाथियों की सुरक्षा हेतु विशेष योजना प्रदेश सरकार द्वारा हाथियों की सुरक्षा और अनुश्रवण के लिए वर्ष 2023-24 एवं 2024-25 में कुल ₹1 करोड़ 52 लाख 54 हजार खर्च किए गए हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए ₹20 करोड़ और 2026-27 के लिए ₹25 करोड़ 59 लाख 15 हजार का प्रावधान किया गया है। इस तरह वर्ष 2023-24 से 2026-27 तक योजना का कुल आकार ₹47 करोड़ 11 लाख 69 हजार रहेगा। हाथियों के आवागमन की मॉनिटरिंग के कॉलर आईडी लगाये जा रहे हैं। इन योजनाओं से हाथियों की सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी। वनवासियों के अधिकारों का सम्मान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्पष्ट किया कि टाइगर रिजर्व की घोषणा से जनजातीय समुदायों और वनवासियों के अधिकारों को प्रभावित नहीं होने दिया जायेगा और उनका पूर्ण सम्मान किया जाएगा। सह-अस्तित्व के लिए सह-प्रबंधन की नीति अपनाई जाएगी और जहाँ आवश्यक होगा वहाँ पुनर्वास की समुचित व्यवस्था की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के विजन के अनुरूप उनके निर्देशन में मध्यप्रदेश वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में देश के लिये एक अग्रणी मॉडल के रूप में उभर रहा है। यहां जैव विविधता, पर्यटन, वन्यजीव संरक्षण और जनजातीय आजीविका का संतुलित एवं वन्य-जीवों के साथ सह-अस्तित्व का इको सिस्टम विकसित हो रहा है।  

राजस्व प्रकरणों का रिकॉर्ड निराकरण, राजस्व महा-अभियान के बाद 8 लाख 49 हजार 681 प्रकरणों का निराकरण

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर लंबित राजस्व प्रकरणों के निराकरण के लिये प्रदेश में 2 चरणों में राजस्व महाअभियान संचालित किये गये। राजस्व महाअभियान में राजस्व प्रकरणों के निराकरण का क्रम राजस्व महाअभियान-2 के बाद भी जारी है। राजस्व महाअभियान-2 के बाद फरवरी-2025 से अब तक राजस्व विभाग द्वारा नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन के 8 लाख 49 हजार 681 प्रकरणों का रिकॉर्ड निराकरण किया गया है। यह निराकरण राजस्व महा-अभियान के बाद जनवरी-2025 के अंत से अब तक किया गया है। राजस्व प्रकरणों के निराकरण की स्थिति, राजस्व न्यायालयों की दक्षता, पारदर्शिता और तीव्रता को दर्शाती है। राजस्व महा-अभियान से प्रकरणों के निराकरण में आयी तेजी लगातार बनी हुई है। नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन के 27 जनवरी, 2025 के बाद से अब तक के प्रकरणों के निराकरण की जिलेवार स्थिति में आगर-मालवा में 10 हजार 417, अलीराजपुर में 2550, अनूपपुर में 10 हजार 690, अशोकनगर में 10 हजार 130, बालाघाट में 21 हजार 897, बड़वानी में 5 हजार 610, बैतूल में 21 हजार 407, भिण्ड में 21 हजार 964, भोपाल में 31 हजार 996, बुरहानपुर में 6 हजार 340, छतरपुर में 28 हजार 325, छिंदवाड़ा में 23 हजार 84, दमोह में 15 हजार 616, दतिया में 14 हजार 501, देवास में 16 हजार 395, धार में 13 हजार 362, डिण्डौरी में 9 हजार 203, गुना में 14 हजार 784, ग्वालियर में 26 हजार 221, हरदा में 5 हजार 704, इंदौर में 31 हजार 540, जबलपुर में 28 हजार 167, झाबुआ में 6 हजार 730, कटनी में 22 हजार 299, खण्डवा में 13 हजार 413, खरगौन में 14 हजार 37, मैहर में 8 हजार 612, मण्डला में 11 हजार 110, मंदसौर में 14 हजार 776, मऊगंज में 6 हजार 788, मुरैना में 21 हजार 538, नर्मदापुरम में 12 हजार 89, नरसिंहपुर में 9 हजार 650, नीमच में 8 हजार 710, निवाड़ी में 4 हजार 491, पांढुर्णा में 5 हजार 16, पन्ना में 11 हजार 544, रायसेन में 15 हजार 343, राजगढ़ में 15 हजार 911, रतलाम में 13 हजार 720, रीवा में 31 हजार 789, सागर में 25 हजार 841, सतना में 18 हजार 959, सीहोर में 17 हजार 112, सिवनी में 20 हजार 725, शहडोल में 12 हजार 646, शाजापुर में 14 हजार 816, श्योपुर में 5 हजार 134, शिवपुरी में 21 हजार 98, सीधी में 13 हजार 653, सिंगरौली में 17 हजार 373, टीकमगढ़ में 11 हजार 387, उज्जैन में 26 हजार 614, उमरिया में 7 हजार और विदिशा जिले में 19 हजार 854 राजस्व प्रकरणों का निराकरण किया गया। 

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग 4 जुलाई को करेगा जनसुनवाई

भोपाल प्रदेश की पिछड़े वर्ग की जातियों को केन्द्र की सूची में शामिल करने के संबंध में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग 4 जुलाई 2025 को भोपाल में जन सुनवाई करेगा। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष श्री हंसराज गंगाराम अहीर और आयोग के सदस्य श्री भूवन भूषण कमल जनसुनवाई करेंगे। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की जनसुनवाई राज्य अतिथि गृह (व्हीआईपी गेस्ट हाउस) लालघाटी में 4 जुलाई को पूर्वान्ह 11 बजे से प्रारंभ होगी। इसमें मध्यप्रदेश की पिछड़े वर्ग की 32 जातियों (जो राज्य पिछड़ावर्ग की सूची में है, किन्तु केन्द्र की सूची में नहीं हैं।) को केन्द्र की सूची में शामिल करने पर सुनवाई करेंगे। उक्त जानकारी आयुक्त पिछड़ा वर्ग ने दी है। 

लोकपथ मोबाइल ऐप की सफलता की प्रथम वर्षगांठ पर मंत्री श्री सिंह ने दी बधाई

भोपाल  मध्यप्रदेश के लोक निर्माण विभाग द्वारा विकसित लोकपथ मोबाइल ऐप ने अपनी पहली वर्षगांठ के साथ एक सराहनीय उपलब्धि दर्ज की है। बुधवार को लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह की अध्यक्षता में इस अवसर पर समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें ऐप के अब तक की सफलता, नागरिकों की भागीदारी और आगामी लक्ष्यों पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा लोकपथ ऐप की शुरुआत 2 जुलाई 2024 को विधानसभा परिसर में की गई थी। ऐप ने अपने पहले ही वर्ष में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। अब तक इस ऐप पर 7800 से अधिक शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 95 प्रतिशत से अधिक का त्वरित समाधान कर दिया गया है। लगभग 1.5 लाख नागरिकों द्वारा ऐप को डाउनलोड किया जाना यह दर्शाता है कि जनता में इसकी उपयोगिता और विश्वसनीयता को लेकर गहरी स्वीकार्यता बनी है। ऐप की सफलता पर मंत्री श्री सिंह ने विभागीय अधिकारियों को बधाई देते हुए लोकपथ ऐप को “जनभागीदारी आधारित डिजिटल गवर्नेंस का प्रभावी उदाहरण” बताया। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्ष में ऐप के 5 लाख डाउनलोड सुनिश्चित करने का लक्ष्य है, जिसके लिए व्यापक जनजागरण और प्रचार-प्रसार अभियान चलाया जाएगा। लोकपथ ऐप को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली जब ‘कौन बनेगा करोड़पति’ जैसे प्रतिष्ठित कार्यक्रम में अभिनेता श्री अमिताभ बच्चन ने इससे संबंधित प्रश्न प्रस्तुत किया। इससे यह स्पष्ट होता है कि मध्यप्रदेश का यह नवाचार अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरणास्रोत बन चुका है। मंत्री श्री राकेश सिंह ने बैठक में नागरिकों को और अधिक त्वरित सेवा देने के लिए नियमित समीक्षा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हमें संवेदनशीलता के साथ शिकायतों का निराकरण करना चाहिए। यदि समय सीमा में सड़क की मरम्मत करना संभव नहीं है तो संबंधित शिकायतकर्ता को दूरभाष पर कारण बताते हुए सुधार में लगने वाले समय की जानकारी देना चाहिए। उन्होंने प्रमुख अभियंताओं को साप्ताहिक समीक्षा अनिवार्य रूप से करने तथा लंबित शिकायतों को लेकर लापरवाह अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए कहा। मंत्री श्री सिंह ने सभी परिक्षेत्रीय मुख्य अभियंताओं के कार्यालयों में एक-एक नोडल अधिकारी को नियुक्ति करने के निर्देश देते हुए उन्हें भोपाल में विशेष प्रशिक्षण देने की बात कही। साथ ही, ऐप से जुड़ी गूगल प्ले स्टोर टिप्पणियों पर विभागीय उत्तर देने की प्रक्रिया आरंभ करने की सिफारिश भी की गई, जिससे नागरिकों का विश्वास और अधिक मजबूत हो सके। बैठक में यह सुझाव भी आया कि नगर निगम की सड़कों को भी लोकपथ ऐप से जोड़ा जाए, जिससे नगरीय क्षेत्रों में भी सड़क समस्याओं का समाधान इसी प्लेटफॉर्म से हो सके। एनएचएआई के साथ राष्ट्रीय राजमार्गों को लोकपथ से जोड़ने की प्रक्रिया पर भी विचार किया जा रहा है — जो आने वाले समय में राज्य के समग्र सड़क नेटवर्क प्रबंधन में क्रांतिकारी सुधार ला सकती है। बैठक में प्रमुख अभियंता श्री केपीएस राणा, श्री एस.आर. बघेल, भवन विकास निगम के प्रमुख अभियंता श्री अनिल श्रीवास्तव, सड़क विकास निगम के तकनीकी सलाहकार श्री आर.के. मेहरा, भोपाल परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता श्री संजय मस्के, श्री आनंद राणे, श्री बी.पी. बोरासी समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे और ऐप के क्रियान्वयन व सुधार की दिशा में अपने बहुमूल्य सुझाव प्रस्तुत किए।  

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप प्रदेश में मातृ भाषा को दिया जाये बढ़ावा

भोपाल  केन्द्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा है कि प्रदेश में स्कूल शिक्षा में मातृ-भाषा हिन्दी को बढ़ावा देने के लिए ठोस प्रयास किये जा रहे हैं। मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप श्रेष्ठ कार्य किया जा रहा है। श्री प्रधान ने यह बात बुधवार को भोपाल में स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह से सौजन्य मुलाकात के दौरान कही। स्कूल शिक्षा मंत्री श्री‍सिंह ने बताया कि प्रदेश में 4473 शासकीय स्कूलों में पूर्व प्राथमिक कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। इन शालाओं में करीब एक लाख बच्चे नामांकित है। प्रदेश में ड्रॉप-आउट बच्चों की संख्या दर कम करने के लिए स्कूलों में नामांकन बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। स्कूल शिक्षा मंत्री ने केन्द्रीय मंत्री को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के बारे में भी जानकारी दी।  

ट्रायल कोर्ट की 1 साल की सजा पर हाई कोर्ट की रोक, 18 साल बाद मिला इंसाफ

जबलपुर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक मामले में सुनवाई करते हुए 18 साल आरोपी के पक्ष में फैसला सुनाया है और उसे बरी किया है। अपने इस फैसले में न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा की एकलपीठ ने ग्राम पोंडी, पाटन, जबलपुर निवासी लोक सिंह को 18 वर्ष बाद दोषमुक्त करार दे दिया। उसके विरुद्ध ट्रायल कोर्ट की ओर से पारित आदेश अनुचित पाकर निरस्त कर दिया गया। ट्रायल कोर्ट ने उसे 18 साल पहले 1 वर्ष के कारावास और 25 हजार जुर्माने की सजा सुनाई थी। जुर्माना राशि जमा न करने पर छह माह के अतिरिक्त कारावास की व्यवस्था दी गई थी। इस सजा के विरुद्ध पहले सेशल कोर्ट में अपील की गई, जहां ट्रायल कोर्ट का आदेश यथावत रखा गया। इसीलिए हाई कोर्ट में रिवीजन दायर की गई।   यह था मामला हाई कोर्ट में लोक सिंह का पक्ष अधिवक्ता प्रमेंद्र सेन व प्रवीण सेन ने रखा। उन्होंने दलील दी कि 16 फरवरी, 2004 को बेलखेड़ा पुलिस ने 54 लीटर देसी शराब जब्त करने का अपराध पंजीबद्ध कर लिया था। उसके विरुद्ध आबकारी अधिनियम अंतर्गत मामला बनाया गया था। 28 अगस्त, 2006 को प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी, पाटन की कोर्ट ने सजा सुना दी। जिसके विरुद्ध 2007 में हाई कोर्ट की शरण ले ली गई थी।   दरअसल, यह मामला दुर्भावनावश फंसाए जाने से संबंधित था। अवैध शराब से लोक सिंह का कोई सरोकार नहीं था। इसीलिए वह अपनी बेगुनाही साबित करने जमानत हासिल करने के बाद से लंबे समय तक इंसाफ की लड़ाई लड़ता रहा। हालांकि अंत में हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया और 18 साल बाद लोक सिंह को दोष मुक्त कर दिया गया है।

कलेक्टर ने की रीवा-सीधी-सिंगरौली रेल लाईन की समीक्षा

रेलवे तथा राजस्व अधिकारी समन्वय के साथ कार्य करें – कलेक्टर सीधी   कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी ने रीवा-सीधी-सिंगरौली रेल लाईन के प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। कलेक्टर ने कहा कि रेलवे तथा राजस्व अधिकारी आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। रेलवे विभाग के अधिकारी कार्यों के प्राथमिकता क्रम को निर्धारित करते हुए राजस्व अधिकारियों के सतत संपर्क में रह कर कार्य मे प्रगति लाएं।   सीधी सिंगरौली नई रेल लाइन परियोजना की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने राजस्व अधिकारियों को भू-अर्जन के काम को समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए निर्देशित किया। कलेक्टर ने लंबित रकबों के भू-अर्जन के धारा 11, 19, 21 की कार्यवाही निर्धारित समयावधि में पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। जो भुगतान लंबित है उनकी कमियों को दूर करते हुए अगले एक सप्ताह में भुगतान की कार्यवाही पूर्ण करायें। कलेक्टर ने सभी संबंधित अधिकारियों से समन्वय बनाकर काम करने के लिए निर्देशित किया, ताकि कार्य समय सीमा में पूर्ण हो।   बैठक में उपखण्ड अधिकारी गोपद बनास नीलेश शर्मा, चुरहट शैलेष द्विवेदी, सिहावल प्रिया पाठक, उप मुख्य अभियंता निर्माण रीवा घमंडी लाल मीणा, उप मुख्य अभियंता सीधी अवलीश मीणा, सहायक कार्यकारी अभियंता निर्माण सीधी अविनाश कुमार, वरिष्ठ खंड अभियंता निर्माण सीधी गिरधर मीणा, कुलदीप शर्मा उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का जिले में आगमन 4 जुलाई को

मुख्यमंत्री सरई में आयोजित शसक्त महिला एवं जन जाति गौरव सम्मेलन में होगे शामिल सिंगरौली मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव  का 4 जुलाई को  जिले के  सरई अंचल में आगमन होगा  मुख्यमंत्री सरई में आयोजित शसक्त महिला  एवं जन जाति गौरव सम्मेलन में शामिल होगे। मुख्यमंत्री के आगमन को मद्देनजर रखते हुये देवसर विधानसभा के विधायक श्री राजेन्द्र मेश्राम,  कलेक्टर चन्द्र शेखर शुक्ला, पुलिस अधीक्षक मनीष खत्री, एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री गजेन्द्र सिंह नागेश के द्वारा मुख्यमंत्री जी के लिए कार्यक्रम हेतु चयनित सभा स्थल सीएम राईज विद्यालय सरई के परिसर में की जा रही व्यवस्थाओ का निरीक्षण किया गया। एवं तैयारियो में सलग्न अधिकारी कर्मचारियो को समय पर सभी तैयारियो को पूर्ण करने हेतु निर्देशित किया गया।  कलेक्टर ने विंदुवार कार्यक्रम हेतु की जा रही तैयारियो का गहनता पूर्वक निरीक्षण करते हुयें सभा स्थल पर बैठक व्यवस्था, बैरिकेंटिग, पेयजल, वाहनो के पार्किग व्यवस्था, हेलीपैड सहित सभा स्थल तक पहुच मार्ग व्यवस्था आदि का अवलोकन करते हुयें निर्देश दिया गया कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में शामिल होने के आने वाले नागरिको के लिए सेक्टरवार बैठक व्यवस्था सुनिश्चित कराये। साथ सभा स्थल तक नागरिको लाने एवं ले जाने वाले वाहनो के लिए उचित पर्किग व्यवस्था सुनिश्चित करे।  कलेक्टर ने सभा स्थल पर निर्बध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ ही पेयजल, शौचालय, अग्निशमक आदि का उचित प्रबंध करने के निर्देश दिए। साथ ही निर्देश दिया गया। कलेक्टर ने कहा कि मुख्यमंत्री जी के द्वारा जिले के जिन विकास कार्यो का लोकापर्ण भूमिपूजन कराया जाना है उनकी सूची तैयार कर विकास कार्यो की शिलापट्टीका तैयार कराकर व्यवस्थित करले। इसके अलावा भी कार्यक्रम के तैयारियो के संबंध मे कलेक्टर द्वारा महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। इस दौरान संयुक्त कलेक्टर संजीव पाण्डेय,  एसडीएम देवसर अखिलेश सिंह, एसडीएम माड़ा राजेश शुक्ला, नगर निगम आयुक्त डी.के शर्मा,  डिप्टी कलेक्टर माइकेल तिर्की, देवेन्द्र द्विवेदी, तहसीलदार सरई चन्द्र शेखर मिश्रा सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

शहडोल सांसद ने अपनी बेटी का एडमिशन शासकीय विद्यालय में कराया

भोपाल  शहडोल सांसद श्रीमती हिमाद्री सिंह ने अपनी बेटी गिरीश नंदिनी सिंह का एडमिशन अनूपपुर जिले के ग्राम राजेंद्र के शासकीय प्राथमिक कन्या विद्यालय में कराया है। स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह ने सांसद श्रीमती हिमाद्री सिंह के इस निर्णय की सराहना की। स्कूल शिक्षा मंत्री श्री सिंह ने कहा कि इस सकारात्मक संदेश से अन्य जन-प्रतिनिधियों एवं नागरिकों को प्रेरणा मिलेगी। जन-सामान्य में सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता के प्रति उनका विश्वास और अधिक मजबूत होगा। 

एसडीजी इंडिया इंडेक्स 2023-24 में मध्यप्रदेश को फ्रंट रनर स्टेट का दर्जा

भारत-जर्मनी सहयोग से सतत विकास लक्ष्य स्थानीयकरण पर नीति आयोग की 3 जुलाई को राज्य स्तरीय वर्कशॉप भोपाल  सतत विकास के लक्ष्यों को स्थानीय स्तर पर क्रियान्वित करने में मध्यप्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। इसी क्रम में सतत विकास लक्ष्यों के क्रियान्वयन में निजी उद्योग की भूमिका और सहभागिता को बढ़ाने के लिए भारत जर्मन सहयोग परियोजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश राज्य नीति आयोग द्वारा विशेषज्ञों की राष्ट्रीय कार्यशाला भोपाल के कोर्टयार्ड बाय मैरियट भोपाल में 3 जुलाई को सुबह दस बजे से आयोजित की गई है। कार्यशाला में मध्यप्रदेश के विभिन्न विभाग, जिलों के प्रतिनिधियों, नीति आयोग, जर्मनी की संस्था जीआईजेड के प्रतिनिधियों से सतत विकास के लक्ष्यों और उनके स्थानीयकरण के मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। मध्यप्रदेश उन राज्यों में से एक है जहां सतत विकास के लक्ष्यों के स्थानीयकरण में तेजी आई है और एसडीजी इंडिया इंडेक्स 2023-24 में मध्यप्रदेश को फ्रंट रनर स्टेट का दर्जा मिला। प्रदेश में उत्पादन और जिम्मेदार पूर्ण उपभोग, स्वच्छ ऊर्जा, टिकाऊ स्वच्छता, शहरीकरण, गरीबी उन्मूलन जैसे क्षेत्रों में मध्यप्रदेश में उल्लेखनीय काम हुआ है। मध्यप्रदेश के प्रयासों से 2.30 करोड़ व्यक्ति बहुआयामी गरीबी से बाहर आए हैं। सतत विकास के लक्ष्यों को हासिल करते हुए मध्यप्रदेश में खाद्य सुरक्षा के लिए मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना, स्वास्थ्य सुरक्षा हासिल करने के लिए आयुष्मान भारत और स्वच्छ भारत के प्रावधान के लिए जल जीवन मिशन में उल्लेखनीय काम हुआ है। मध्यप्रदेश देश के उन पहले राज्यों में से एक है जिसने भोपाल शहर के लिए स्वैच्छ‍िक स्थानीय समीक्षा की और इंदौर नगर निगम में ग्रीन म्युनिसिपल बांड के माध्यम से वित्त जुटाने में अग्रणी भूमिका निभाई। कार्यशाला में जर्मन दूतावास और यूएनडीपी के प्रतिनिधि, भारत जर्मन सहयोग परियोजना की प्रमुख श्रीमती हेनरी पेईचर्ट, नीति आयोग के वरिष्ठ सलाहकार श्री राजीव कुमार सेन और सतत विकास लक्षण के क्रियान्वयन से जुड़े विषय विशेषज्ञ, आर्थिक सलाहकार, कॉर्पोरेट भागीदारी से जुड़े विशेषज्ञ शामिल होंगे। उल्लेखनीय है कि मई 2022 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और चांसलर ओलाफ स्कोल्ज़ ने भारत और जर्मनी के बीच हरित और सतत विकास के लिए एक नई साझेदारी के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह साझेदारी भारत-जर्मनी विकास सहयोग को 2030 एजेंडा और पेरिस समझौते के उद्देश्यों को हासिल करने के लिए था। इस प्रक्रिया में भारत जर्मनी सहयोग का समर्थन करने के लिए जर्मन संघीय आर्थिक सहयोग और विकास मंत्रालय बीएमजेड ने जीआईजेड संस्था के साथ साझेदारी की। जीआईजेड और नीति आयोग राष्ट्रीय राज्य और जिला स्तर पर सतत विकास लक्ष्य के क्रियान्वयन और निगरानी में सहायता के लिए संस्थागत क्षमताओं को मजबूत करने के करने में सहयोग दे रहे हैं। इसका उद्देश्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मध्य पारस्परिक ज्ञान साझा करने को सुलभ बनाना और राज्य नीति आयोग और अन्य संस्थाओं के सहयोग के लिए मार्ग प्रशस्त करना है।