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भोपाल को मिलने जा रहा 26 करोड़ की लागत वाला लग्जरी वृद्धाश्रम, हर महीने देना होगा 50 हजार

भोपाल  भोपाल में पहली बार ऐसा वृद्धाश्रम खुलने जा रहा है जिसकी कल्पना आपने सपने में भी नहीं की होगी. ये वृद्धाश्रम आम ओल्ड ऐज होम से बहुत अलग होने वाला है. यहां आपको 24×7 मेडिकल सुविधाएं मिलेंगी, रहने, खाने पीने की पूरी व्यवस्था भी की गई है. हालांकि इन 5 स्टार जैसी सुविधाओं का लुत्फ उठाने के लिए आपको हर महीने 50-82 हजार खर्ज करने पड़ेंगे. मध्य प्रदेश का पहला लग्जरी वृद्धाश्रम इस वृद्धाश्रम का नाम संध्या छाया रखा गया है जो 1 अगस्त से भोपाल में शुरू हो रहा है. संध्या छाया को एमपी का पहला पेड लग्जरी वृद्धाश्रम माना जा रहा है. इस वृद्धाश्रम को सीनियर सिटिजन की हर जरूरतों को ध्यान में रख कर बनाया गया है. संध्या छाया के निर्माण में करीब 26 करोड़ रुपए खर्च किए गए है जिसकी वजह से ये ओल्ड एज होम एक लग्जरी ठिकाना माना जा रहा है. क्या है लग्जरी वृद्धाश्रम की खासियत भोपाल के लिंक रोड-3 के पत्रकार कॉलोनी स्थित संध्या छाया ओल्ड एज होम में आपको सिंगल बेडरुम से लेकर डबल बेडरुम की सुविधा मिलती है. पूरा वृद्धाश्रम 5 एकड़ में फैला हुआ है. पूरे परिसर में सीसीटीवी की सुविधा है. यहां दो रेसिडेंशियल ब्लॉक के साथ लॉन भी बनाया गया है. इस वृद्धाश्रम में 60 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्ग रह सकते हैं. कितना है किराया इस वृद्धाश्रम में रहने के लिए आपको हर महीने कम से कम 50 हजार का बजट रखना होगा. सिंगल रुम का 50 हजार वहीं डबल रुम में रहने के लिए प्रति व्यक्ति को  41 हजार रुपए खर्च करने होंगे. रजिस्ट्रेशन के वक्त एक लाख रुपए सिक्योरिटी अमाउंट भी जमा करना होगा . यहां खानापान से लेकर हर बेसिक सुविधाओं का भी खास ख्याल रखा गया है. बुजुर्ग यहां जैसे चाहे वैसे रह सकते हैं. हेल्थ चेकअप के लिए डॉक्टर हफ्ते में एक बार विजिट करेंगे. किसके अंडर में होगा वृद्धाश्रम एमपी सरकार इस वृद्धाश्रम को चलाने की पूरी जिम्मेदारी सेवा भारती को दी है. बुजुर्ग जो अमाउंट देंगे वो राशि सेवा भारती को मिलेगी. वहीं सिक्योरिटी अमाउंट एमपी सरकार को दी जाएगी. आश्रम के मैनेजमेंट, सुविधाओं में विस्तार और स्टाफ को वेतन देने में ये सिक्योरिटी अमाउंट खर्च की जाएगी.   

चंद्रशेखर आज़ाद की शहादत, देशभक्ति की पराकाष्ठा है: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

चंद्रशेखर आजाद ने शहादत दे दी, पर अंग्रेजों के हाथ न आये, यह देश प्रेम की है पराकाष्ठा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव शहादत का वह क्षण जब आज़ाद ने चुनी मृत्यु, पर न झुके अंग्रेजों के आगे: सीएम डॉ. यादव चंद्रशेखर आज़ाद की शहादत, देशभक्ति की पराकाष्ठा है: मुख्यमंत्री डॉ. यादव चंद्रशेखर आजाद नगर में हुआ स्मरण आजाद कार्यक्रम मुख्यमंत्री डॉ. यादव वी.सी. के जरिए हुए कार्यक्रम में शामिल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमें गर्व है कि अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद जैसे महानायक मध्यप्रदेश की धरती पर जन्मे हैं। उन्होंने कहा कि अपनी समूची चेतना, जीवन और अस्तित्व भारतमाता के चरणों में समर्पित करने वाले अमर बलिदानी चंद्रशेखर आज़ाद के चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित कर हम गौरवान्वित हैं। मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए समर्पित चंद्रशेखर आजाद का जीवन ऊर्जा, संकल्प और सेवा का अमिट अध्याय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद ने जब यह देखा कि अब गिरफ्तारी से बच पाना मुश्किल है तो अपने हाथों से ही खुद के प्राणोत्सर्ग कर शहादत दे दी, पर अंग्रेजों के हाथ नहीं आये, यह देश प्रेम की परकाष्ठा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की जयंती के अवसर पर अलीराजपुर जिले के चंद्रशेखर आज़ाद नगर (भाभरा) में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम "स्मरण-आजाद" को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन से वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। वीसी में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार, प्रमुख सचिव संस्कृति एवं पर्यटन शिवशेखर शुक्ला सहित अधिकारी भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद एक साधारण परिवार में जन्मे असाधारण व्यक्तित्व के धनी थे। आज़ाद एक ऐसी आंधी थे, जिसने भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिलाकर रख दी थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चंद्रशेखर आज़ाद एक नाम नहीं, भारत की क्रांति का वह तेजस्वी स्वर था, जिसकी गूंज आज भी देशभक्ति की शपथ लेने वालों के हृदय में सुनाई देती है। बाल्यकाल से ही उनमें एक अलग तेज और एक अलग सोच थी। जब काशी में उन्होंने असहयोग आंदोलन में भाग लिया और गिरफ्तार हुए, तब न्यायाधीश के पूछने पर जो जवाब उन्होंने दिया, वह आज भी हर देशभक्त के हृदय में बसा है। जब उनसे, उनका नाम पूछा गया, तो उन्होंने जवाब दिया- 'आजाद'। पिता का नाम पूछा, तो उन्होंने जवाब दिया-स्वाधीनता। तीसरी बार जब उनके घर का पता पूछा गया, तो उन्होंने जवाब दिया था- जेल। वे केवल एक क्रांतिकारी ही नहीं, एक विचारधारा और आत्मबल के प्रतीक थे, जिन्होंने यह संकल्प लिया था कि-'मैं आज़ाद था, आज़ाद हूं और आज़ाद ही रहूंगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चंद्रशेखर आज़ाद ने केवल एक क्रांतिकारी की ही नहीं, बल्कि संपूर्ण स्वाधीनता आंदोलन के सेनापति की भूमिका निभाई। वे हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के सेनापति बने और शहीद भगत सिंह जैसे नौजवानों को भी उन्होंने दिशा दी थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लाला लाजपत राय की शहादत का बदला लेने के लिए जब सांडर्स को लाहौर में मार गिराया गया, तब इस योजना के केंद्र में चंद्रशेखर आज़ाद ही थे और जब देश की क्रांति को धन की आवश्यकता पड़ी, तब काकोरी कांड (1925) में ब्रिटिश खजाने को लूटकर उन्होंने यह सिद्ध कर दिया था कि अगर लक्ष्य पवित्र हो, तो क्रांति भी तपस्या बन जाती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इतिहास इस बात का साक्षी है कि दुश्मनों से घिरे होने पर उन्होंने अंतिम गोली स्वयं पर चला दी, परंतु दुश्मन की पकड़ में नहीं आए। इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क (अब आज़ाद पार्क) में 27 फरवरी 1931 को पुलिस से घिरे होने पर अंतिम गोली खुद को मारकर प्राणोत्सर्ग कर दिया और अपने नाम के अनुरूप अंतिम सांस तक वे "आज़ाद" ही रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चंद्रशेखर आज़ाद की शहादत आज भी हमें यह याद दिलाती है कि स्वतंत्रता किसी एक दिन की घटना नहीं, बल्कि लाखों बलिदानों का परिणाम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चंद्रशेखर आज़ाद की जयंती पर देश के युवाओं को उनके साहस, त्याग और बलिदान से प्रेरणा लेनी चाहिए। आजाद केवल एक क्रांतिकारी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना के प्रखर प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि आज की नई पीढ़ी को चाहिए कि वह आज़ाद जी के जीवन व चरित्र से सीखें कि कैसे कोई अकेला व्यक्ति इतिहास की धारा बदल सकता है। राष्ट्र के लिए जीना और राष्ट्र के लिए मरना क्या होता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज हम जिस आज़ाद हवा में सांस ले रहे हैं, वह चंद्रशेखर आजाद जैसे रणबांकुरों के बलिदान की ही देन है। हम सबका यह परम कर्तव्य है कि हम एकजुट होकर उनके सपनों का भारत गढ़ें। उल्लेखनीय है कि चंद्रशेखर आज़ाद का जन्म मध्यप्रदेश के वर्तमान अलीराजपुर जिले के एक छोटे से गांव भाभरा (अब चंद्रशेखर आज़ाद नगर के रूप में प्रचलित) में 23 जुलाई 1906 को हुआ था। चंद्रशेखर आजाद नगर में हुए मुख्य कार्यक्रम स्थल पर अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान, संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास और धर्मस्व राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र सिंह लोधी, पूर्व विधायक एवं वर्तमान में म.प्र. लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष माधो सिंह डाबर, भाभरा नगर परिषद की अध्यक्षा श्रीमती निर्मला डाबर, नगर परिषद के अध्यक्ष नारायण अरोड़ा, भाभरा जनपद पंचायत के अध्यक्ष जगदीश गणावा और जनपद पंचायत उपाध्यक्ष परमार सहित जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।  

जनहित के कार्य समयसीमा में पूर्ण कराएं: राज्यमंत्री श्रीमती गौर

  विकास कार्यों की समीक्षा की, सरयू सरोवर पार्क की मरम्मत और असामाजिक तत्वों पर कार्रवाई करने के निर्देश भोपाल पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने बुधवार को मंत्रालय में विभिन्न विकासकार्यों की समीक्षा की। बैठक में उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनहित से जुड़े सभी कार्य निर्धारित समयसीमा में पूर्ण किए जाएं। उन्होंने कहा कि अधूरे कार्यों के कारण आमजन को असुविधा होती है, जिसे किसी भी स्थिति में नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। अधूरे कार्य जल्द पूर्ण करने के निर्देश राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने आईटीआई रहवासी परिसर, गौतम नगर बस्ती, गायत्री नगर समेत अनेक कॉलोनियों के विकास कार्यों का प्राक्कलन शीघ्र तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने क्षेत्र में नियमित साफ-सफाई, डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, नालियों की सफाई, विद्युत पोलों की शिफ्टिंग और अतिरिक्त ट्रांसफार्मरों की स्थापना कर स्ट्रीट लाइट व्यवस्था सुधारने पर बल दिया। सरयू सरोवर पार्क का सौंदर्यीकरण और असामाजिक तत्वों पर कार्रवाई होगी राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने सरयू सरोवर पार्क की बदहाल स्थिति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि पार्क में खराब फव्वारे और झूलों की मरम्मत शीघ्र कराई जाए। पाथवे निर्माण, पार्क का समुचित रख-रखाव, हाईमास्ट लाइट की व्यवस्था एवं वाचनालय की बाउंड्रीवाल निर्माण कार्य शीघ्र शुरू करने के निर्देश दिए। साथ ही अयोध्या नगर क्षेत्र में बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों का सर्वे कर उन्हें पुनः चालू करने के निर्देश भी दिए। बैठक में श्री लव-कुश यादव, पार्षद श्रीमती शिरोमणि शर्मा, श्रीमती उर्मिला मौर्य समेत अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश पेसा अधिनियम के क्रियान्वयन में देश में अग्रणी

पेसा अधिनियम बना जनजातीय समुदाय के लिए वरदान : चौपाल लगाकर सुलझा रहे हैं आपसी विवाद लगभग 8 हजार से अधिक प्रकरणों को जनजातीय समुदाय ने आपसी विमर्श में सुलझाया थाने में शिकायत किए बिना सुलझाए मामले भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार जनजातीय वर्ग के उत्थान के लिए लगातार कार्य कर रही है। जनजातीय समुदाय के लिये राज्य सरकार द्वारा विभिन्न प्रकार की योजनाएं चलाई जा रही है। प्रदेश के 88 ट्राइबल ब्लॉक्स में लागू पेसा अधिनियम जनजातीय समुदाय के लिए वरदान साबित हो रहा है। इस अधिनियम के अंतर्गत जनजातीय समुदाय आपसी विवादों का समाधान थानों में शिकायत दर्ज कराए बिना ही चौपालों के माध्यम से कर रहे हैं। पेसा अधिनियम के क्रियान्वयन में देश में मध्यप्रदेश न केवल अग्रणी है बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। जनजातीय समुदाय ने अब तक लगभग 8 हजार से अधिक विवाद प्रकरणों का चौपाल के माध्यम से निराकरण कर मिसाल पेश की है। इन मामलों में पारिवारिक जमीन संबंधी विवाद शामिल है। मध्यप्रदेश शासन द्वारा लागू किए गए पेसा एक्ट का उद्देश्य भी यही है कि जनजातीय समुदाय के लोगों को छोटे-छोटे विवाद में पुलिस थाना का चक्कर ना लगाना पड़े और आपस में बैठकर ही मामले की सुलह कर लें। साथ ही उनकी परंपरा, कला संस्कृति की भी रक्षा की जा सके। पेसा अधिनियम के अंतर्गत 3 प्रकार की समितियां कर रहीं हैं काम पेसा अधिनियम के तहत प्रदेश के 88 विकासखंडों में तीन प्रकार की समितियां काम रही है। इसमें शांति और विवाद निवारण समिति, सहयोगिनी मातृ समिति और वन संसाधन योजना एवं नियंत्रण समिति शामिल है। प्रदेश में शांति और विवाद निवारण समिति की संख्या 11 हजार 639 है। वन संसाधन योजना एवं नियंत्रण समिति की संख्या 11 हजार 331 है, जबकि सहयोगिनी मातृ निवारण समिति की संख्या 21 हजार 887 है। देश के 10 राज्य में हो रहा है पेसा एक्ट का क्रियान्वयन, मध्यप्रदेश है अग्रणी देश के 10 राज्यों में पेसा एक्ट का क्रियान्वयन किया जा रहा है, जिसमें मध्यप्रदेश अग्रणी राज्य है। पंचायती राज मंत्रालय भारत सरकार द्वारा सफलता की कहानियों को लेकर एक पुस्तिका भी निकाली गई है जिसमें मध्यप्रदेश की दो कहानियों को शामिल किया गया है। इस वजह से मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। 5133 ग्राम पंचायतों में लागू है पेसा अधिनियम मध्यप्रदेश सरकार द्वारा जनजातीय बाहुल्य वाले प्रदेश के 20 जिलों के 88 विकासखंड की 5133 ग्राम पंचायतों के 11 हजार 596 ग्रामों में पेसा एक्ट लागू किया गया है। वर्तमान में 4850 पेसा मोबलाइजर कार्य कर रहे हैं। पेसा कानून में सबसे महत्वपूर्ण विषय वित्तीय प्रबंधन है, जिसके तहत राज्य में अब तक 11 हजार 538 खाते खोले गये है।  

खरगौन : 12 कॉलोनियों के 85 मकान घोषित असुरक्षित, प्रशासन ने शुरू की कार्रवाई

खरगौन खरगौन शहर और आसपास के क्षेत्रों में ट्रांसमिशन लाइनों के प्रतिबंधित क्षेत्रों में हुए अवैध निर्माण पर 85 मकान मालिकों को अतिक्रमण हटाने के लिये नोटिस जारी किये गये हैं। उल्लेखनीय है कि खरगौन में मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) की 132 के.व्ही. से लेकर 220 के.व्ही. तक की छह प्रमुख ट्रांसमिशन लाइनों के समीप मानव जीवन के लिये घातक और विद्युत सुरक्षा मानकों के विरूद्ध अनाधिकृत निर्माण कर लिये गये है। ट्रांसमिशन लाइनो की प्रतिबंधित सीमा में हुये निर्माण खरगौन के अनेक क्षेत्रों में ट्रांसमिशन लाइनो के प्रतिबंधित सीमा में अनाधिकृत निर्माण किये गये है, जिनमें विद्युत मानकों के अनुरूप न्यूनतम सुरक्षा दूरी का उल्लंघन किया गया है। यहां के ओंकार दत्त रेजिडेंसी, निमरानी, द्वारका धाम कॉलोनी, साकेत नगर, जेतपुरा, यमुना नगर कॉलोनी, खरगोन मोतीपुरा, हिंगलाज नगर, स्मार्ट पार्क टाउनशिप, माँ रेवा विन्यास कॉलोनी, पानवा एवं भीलगांव आदि क्षेत्रों में ट्रांसमिशन लाइन और निर्माण के बीच बेहद कम क्लियरेंस पाया गया है। यह अति उच्च वोल्टेज की बिजली से जुड़े संभावित करंट, स्पार्किंग, और अग्निकांड जैसे गंभीर खतरे उत्पन्न कर सकता है। इन ट्रांसमिशन लाइनों के समीप हुये निर्माण खरगौन जिले में मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी की छह ट्रांसमिशन लाइने हैं जिनके समीप विद्युत सुरक्षा मानकों के विरूद्ध निर्माण कर लिये गये हैं। इन ट्रांसमिशन लाइनों में 132 के.व्ही. भीकनगांव-खरगोन डी.पी. लाइन, 132 के.व्ही. बिस्टन-लिलो लाइन, 132 के.व्ही. निमरानी-कसरावद लाइन, 220 के.व्ही. निमरानी-छैःगांव लाइन, 220 के.व्ही. निमरानी-ओंकारेश्वर लाइन एवं 220 के.व्ही. महेश्वर-पीथमपुर लाईन शामिल हैं। जरूरी है 27 मीटर का कॉरिडोर केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अनुसार, 132 के.व्ही. या इससे अधिक वोल्टेज की ट्रांसमिशन लाइन के नीचे कम से कम 27 मीटर की सुरक्षित दूरी आवश्यक है, ताकि हवा में झूलते तारों से संपर्क न हो और दुर्घटना टाली जा सके। 600 से 950 गुना अधिक रहता है ट्रांसमिशन लाइनों से जान का खतरा आम घरों में उपयोग होने वाली विद्युत आपूर्ति की तीव्रता मात्र 230 वोल्ट होती है। यह स्तर भी इतना अधिक होता है कि यदि कोई व्यक्ति गलती से इसके संपर्क में आ जाए तो गंभीर रूप से घायल हो सकता है या उसकी जान भी जा सकती है लेकिन इससे भी कहीं अधिक खतरनाक होती हैं। शहर भर में क्रियाशील एक्स्ट्रा हाईटेंशन ट्रांसमिशन लाइनें, जिनमें विद्युत तीव्रता 132 के.व्ही. (यानी 132,000 वोल्ट) एवं 220 के.व्ही. (यानी 2,20,000 वोल्ट) होती है। यह घरेलू बिजली की तुलना में 600 से 950 गुना अधिक रहती है। यह अंतर दर्शाता है कि अगर मात्र 230 वोल्ट के संपर्क में आने से जान को खतरा हो सकता है, तो 132 या 220 के.व्ही. की ट्रांसमिशन लाइनों के पास रहने या निर्माण करने से कितना बड़ा जोखिम हो सकता है। ट्रांसमिशन लाइनों के आसपास निर्धारित प्रतिबंधित क्षेत्र में निर्माण करना न सिर्फ गैरकानूनी है, बल्कि यह जानलेवा जोखिम भी उत्पन्न करता है। h

24 जुलाई को राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन करेंगे CM डॉ. यादव, वन विकास निगम की होगी विशेष बैठक

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम की स्थापना के 50 वर्ष पूर्ण होने पर 24 जुलाई को स्वर्ण जयंती वर्ष का उद्घाटन एवं राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ करेंगे।वे ‘विजन डॉक्यूमेंट-2047’ का विमोचन एवं प्रदर्शनी का उद्घाटन भी करेंगे। कार्यक्रम में निगम के उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारी-कर्मचारी को सम्मानित भी किया जायेगा। वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री श्री दिलीप सिंह अहिरवार, अपर मुख्य सचिव वन श्री अशोक बर्णवाल और प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री असीम श्रीवास्तव भी उपस्थित रहेंगे। गुरुवार 24 जुलाई को प्रात: 10:30 बजे से भारतीय वन प्रबंधन संस्थान नेहरू नगर भोपाल के ऑडिटोरियम में होने वाले कार्यक्रम के संबंध में प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम श्री व्ही.एन. अम्बाड़े ने जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि कार्यशाला में महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, तेलंगाना और कर्नाटक राज्य के वन विकास निगम के प्रबंध संचालक द्वारा विभिन्न विषयों जैसे थिनिंग व फेलिंग, जनरल प्लानटेशन, मियॉवाकी प्लानटेशन, डिपॉजिट वर्क, थीम वर्क, ईको टूरिज्म विषय पर प्रस्तुतीकरण दिया जायेगा। कार्यशाला का उद्देश्य मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम लिमिटेड द्वारा विगत 50 वर्षों में किये गये वानिकी, वन एवं वन्य जीव संरक्षण कार्य को रेखांकित किया जाना है। कार्यक्रम में वन विकास निगम के कार्यों पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन भी किया जायेगा। वनीकरण में निगम की अनेक उपलब्धियां मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम की स्थापना 24 जुलाई 1975 को हुई थी। निगम की स्थापना का उद्देश्य निम्न कोटि के वन क्षेत्रों को तेजी से बढ़ने वाली बहुमूल्य तथा बहु उपयोगी प्रजातियों के रोपण द्वारा उच्च कोटि के वन क्षेत्रों में उत्पादन क्षमता एवं गुणवत्ता में सुधार लाना है। निगम का कार्य प्रदेश के 22 जिलों में संचालित है। निगम अंतर्गत कुल 13 काष्ठगार एवं 15 स्थाई रोपणियां स्थापित हैं। निगम को लगभग 4.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र प्राप्त हुआ है, जिसमें से वर्ष 2025 तक 3.90 लाख हेक्टेयर क्षेत्र का उपचारण किया जा चुका है एवं 3.14 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रोपण किया गया है। विगत 2 वर्षों में निगम द्वारा 2 करोड़ 48 लाख पौधों का रोपण किया गया है। निगम की रोपणियों में वर्ष 2025 में कुल 1 करोड़ 70 लाख सागौन रूटशूट सागौन का उत्पादन हुआ है। टाइगर रिजर्व में चुनौती पूर्ण कार्य वन विकास निगम की अधिकांश परियोजना मंडल टाइगर रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यान एवं अभयारण्य क्षेत्र बफर जोन से लगे हैं। इन क्षेत्रों में बाघ, तेंदुआ, भालू एवं हिरण आदि वन्य जीवों के विचरण की उपस्थिति दर्ज की गई है। वन्य जीवों की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिये निगम द्वारा बोरीबंधान, तालाब निर्माण एवं झिरियां निर्माण का कार्य किया जाता है। वर्ष 2024-25 में लगभग 60 हजार घनमीटर इमारती काष्ठ एवं 3100 टन बांस का उत्पादन किया गया। जैव विविधता के साथ साथ जलगंगा संवर्धन भी निगम ने व्यावसायिक वृक्षारोपण के साथ जैव विविधता संरक्षण एवं संवर्धन का कार्य भी किया जा रहा है। निगम द्वारा ‘जल गंगा संवर्धन’ एवं ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अंतर्गत लगभग 125 करोड़ पौधों का रोपण वृहद स्तर पर किया जा रहा है। निगम को वित्तीय वर्ष 2024-25 में 170 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ है।   

भोपाल में 400 करोड़ के निवेश से लगेगा रोजगार का मेला, 1500 युवाओं को मिलेगा लाभ

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार युवाओं और बहनों के रोजगार के लिए संकल्पित है। इस दिशा में राज्य सरकार द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। गुरुवार 24 जुलाई को भोपाल जिले के औद्योगिक क्षेत्र अचारपुरा में पांच औद्योगिक इकाइयों का भूमि-पूजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उन्होंने हाल ही में स्पेन और दुबई की यात्रा में अनेक निवेशकों को मध्यप्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित किया है। मध्यप्रदेश में वर्ष 2025 उद्योग और रोजगार वर्ष है। गांव से लेकर शहरों तक समृद्धि लाना, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाना और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए निर्णायक भूमिका निभा कर मध्यप्रदेश ने नए औद्योगिक युग की शुरूआत की है। पांच इकाईयों का होगा भूमि-पूजन मुख्यमंत्री डॉ. यादव 24 जुलाई को अचारपुरा औद्योगिक क्षेत्र में 12.88 हेक्टेयर में 400 करोड़ से अधिक निवेश और लगभग 1500 व्यक्तियों को रोजगार देने वाली 5 इकाइयों का भूमि-पूजन करेंगे। इनमें गारमेंट सेक्टर में गोकुलदास एक्सपोर्टस, टेक्सटाइल सेक्टर में इंडो एकॉर्ड अप्पेरल्स, हाई टेक इलेक्ट्रानिक में एसेडस प्राइवेट लिमिटेड, फार्मा सेक्टर में सिनाई हेल्थ केयर और कृषि उपकरण में समर्थ एग्रीटेक इकाइयां शामिल हैं। मुख्यमंत्री  ने  कहा है कि राज्य सरकार युवाओं और बहनों के रोजगार के लिए संकल्पित है। इस दिशा में राज्य सरकार द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। गुरुवार 24 जुलाई को भोपाल जिले के औद्योगिक क्षेत्र अचारपुरा में पांच औद्योगिक इकाइयों का भूमि-पूजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उन्होंने हाल ही में स्पेन और दुबई की यात्रा में अनेक निवेशकों को मध्यप्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित किया है।  मध्यप्रदेश में वर्ष 2025 उद्योग और रोजगार वर्ष है। गांव से लेकर शहरों तक समृद्धि लाना,  स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाना और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए निर्णायक भूमिका निभा कर मध्यप्रदेश ने नए औद्योगिक युग की शुरूआत की है।    

विकसित भारत @2047 अंतर्गत रोजगार आधारित शिक्षा: रुझान एवं नए अवसर राष्ट्रीय कार्यशाला में राज्यपाल और मुख्यमंत्री हुए शामिल

भोपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि स्थानीय स्तर पर रोजगार की संभावनाओं को पहचान कर विश्वविद्यालय पाठ्यक्रम तैयार करें। उन्होंने प्रदेश में देश विदेश से निवेश प्रस्ताव प्राप्त करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल की सराहना की है। अपेक्षा की है कि निवेश परियोजना क्रियान्वयन के साथ ही उद्योग में रोजगार के लिए उपयुक्त अभ्यर्थी उपलब्ध कराने के लिए कोर्स प्रारम्भ करें, जिससे परियोजना शुरू होने के साथ ही आवश्यकता अनुसार स्थानीय स्तर के युवा उपलब्ध हो सकें। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज करेंसी का जमाना है, लेकिन स्किल (कौशल) ही करेंसी है, भारत इसे अच्छी तरह समझता है। इसीलिए हम नवाचार करते हुए कौशल विकास की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। मध्यप्रदेश एक कृषि प्रधान और तेजी से बढ़ता राज्य है। इसीलिए हम खेती की पढ़ाई को सामान्य महाविद्यालयों तक लेकर गए हैं। अगर कोई युवा खेती में करियर बनाना चाहे तो उसे आधुनिक तकनीक की जानकारी होनी चाहिए। विश्वविद्यालयों के दायरे विस्तृत होने चाहिए। सभी कोर्स यहां से संचालित होने चाहिए। राज्यपाल पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उक्त विचार उच्च शिक्षा विभाग द्वारा विकसित मध्यप्रदेश @2047 ‘रोजगार आधारित शिक्षा-रूझान एवं नए अवसर’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए कही है। कार्यशाला का आयोजन बुधवार को  कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में किया गया। राज्यपाल पटेल ने कहा कि राष्ट्रीय रोजगार आधारित शिक्षा-रूझान एवं नए अवसर कार्यशाला समय की आवश्यकता है। भविष्य की तैयारी का सशक्त मंच है। रोजगार केन्द्रित शिक्षा और विकसित भारत के निर्माण में प्रदेश के योगदान को बढ़ाने की प्रभावी पहल है। राज्यपाल पटेल ने कहा कि शिक्षा समाज की रीढ़ है। यह समय के साथ तालमेल बैठाने, नवाचारों को अपनाने और नवीन अवसरों का लाभ उठाने के लिए व्यक्ति, समाज और राष्ट्र को सक्षम बनाती है। इसलिए हमारी शिक्षा प्रणाली ऐसी होनी चाहिए जो विद्यार्थियों को रोजगार के अवसरों तक सुलभ पहुंच देने के साथ ही उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में सशक्त बनाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शिक्षा से मनुष्य का समग्र विकास होता है। यह आयोजन को बदलते दौर में रोजगार आधारित शिक्षा और अवसरों का विकास करने के क्रम किया जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर सबसे पहले 1968 और उसके बाद 1988 में मंथन हुआ। अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर तीसरी बार मंथन हो रहा है। लेकिन आजादी के बाद 2020 से पहले कभी भी लार्ड मैकाले की शिक्षा पद्धति से बाहर आकर विचार नहीं किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरदार वल्लभ भाई पटेल शासन की मंशा को समझने वाले दृष्टा थे। इसी भाव से उन्होंने सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार करते हुए देश की जड़ों को मजबूत करने का कार्य किया। महात्मा गांधी ने अहिंसा के अस्त्र का उपयोग करते हुए देश के गांव-गांव तक स्वतंत्रता की अलख जगाई थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दुनिया, भारत के साथ आने के लिए लालायित है। आक्रांताओं ने भारतीय संस्कृति पर आक्रमण करने के लिए हमारी शिक्षा के बड़े केंद्रों तक्षशिला, नालंदा और विक्रमशिला को तोड़ने और जलाने का कार्य किया। मध्य प्रदेश 64 कलाओं की शिक्षा वाली भूमि है। इसीलिए भगवान श्रीकृष्ण शिक्षा ग्रहण करने के लिए उज्जैन के सांदीपनि आश्रम आए थे। हम उस देश के वासी हैं, जहां होठों पर सच्चाई रहती है और जो होठों पर सच्चाई लेकर आए वही शिक्षा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में शासकीय और निजी मिलाकर 70 से अधिक विश्वविद्यालय हैं। भारत विश्वगुरु है और गुरु वह जो हमारे जीवन में अंधकार हटाकर उसे प्रकाशमय कर दे। जेएनयू ने भी मध्यप्रदेश की कुलगुरु परंपरा को आत्मसात कर लिया है। सरकार प्रदेश में 10 हजार से अधिक शैक्षणिक संस्थाओं में एनईपी लागू करने पर आगे बढ़ चुकी है। प्रदेश में 220 से अधिक सांदीपनि विद्यालयों की शुरुआत की गई है। यहां विद्यार्थियों के लिए आधुनिक कंप्यूटर कोडिंग लैब स्थापित की गई हैं। शिक्षा केवल कागज की डिग्री लेने के लिए न हो, बल्कि वह भविष्य की चुनौतियों से लड़ने और उसे समझने में समर्थ हो। इसीलिए प्रदेश के विश्वविद्यालयों में आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस (एआई), डेटा साइंस, मशीन लर्निंग, क्लाउड कंप्युटिंग और बायोटेक्नोलॉजी जैसे कोर्स शुरू किए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश दूध उत्पादन में देश में तीसरे स्थान पर है। हमने शीर्ष स्तर पर पहुंचने का लक्ष्य रखा है। प्रदेश में 6 करोड़ से अधिक पशुधन है, इसीलिए राज्य सरकार प्रदेश में वेटेनरी कॉलेज की संख्या बढ़ाने पर जोर दे रही है। हम सिंचाई के रकबे के साथ-साथ मत्स्य उत्पादन को भी बढ़ाने के लिए संकल्पित हैं। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि शिक्षा हर काल में सर्वोच्च रही है। भारतीय संस्कृति में संस्कारों को आगे बढ़ाते हुए रोजगार देने की परंपरा थी। बिना संस्कारों के हम श्रेष्ठ और कर्तव्यनिष्ठ नागरिक नहीं बना सकते हैं। प्रदेश में नई शिक्षा नीति और कार्य की जवाबदेही तय करने की पहल देश भर में स्थान बनाएगी और प्रदेश के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगी। कार्यक्रम के प्रारंभ में राज्यपाल पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यशाला का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन कर किया। राज्यपाल पटेल का उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने पौधा, श्रीफल, अंग वस्त्र और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। कार्यशाला में विषय -विशेषज्ञ इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) नई दिल्ली के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी और आई.ई.यू.ए.सी. के निदेशक डॉ. ए.सी. पांड़े ने विचार रखे। राष्ट्रीय कार्यशाला के प्रारंभ में अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन ने स्वागत उद्बोधन दिया। मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष प्रो. भरत शरण सिंह ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव के.सी. गुप्ता, उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त प्रबल सिपाहा, प्रदेश के सभी शासकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों के कुलगुरू, वरिष्ठ प्राध्यापक और विषय-विशेषज्ञ उपस्थित रहे।  

किसान बगीचा लगाएं और उद्यानिकी विभाग उपलब्ध कराये पौधे: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

कम खर्च में ज्यादा फायदा देने वाले फलदार और छायादार पौधों का बहुतायत में करें रोपण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव निजी सेक्टर और किसानों को भी जोड़ें पौधरोपण से किसान बगीचा लगाएं और उद्यानिकी विभाग उपलब्ध कराये पौधे मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की “एक पेड़ मां के नाम” अभियान की समीक्षा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसान हो या आमजन, खरीदकर पौधे लगाने और उन्हें बड़ा करने में लागत अधिक आती है, इसलिए सबको नर्सरी और बगीचा लगाने के लिए प्रेरित तो करें, परंतु उन्हें पौधे उद्यानिकी विभाग उपलब्ध कराये। कम खर्च में ज्यादा फायदा देने वाले फलदार और छायादार पौधों का बहुतायत में रोपण कराया जाये। पौधरोपण के कार्य में निजी सेक्टर और किसानों को भी जोड़ा जाये। अधिक लाभ देने वाली पौध प्रजाति का चयन किया जाये, जिससे भविष्य में इनकी मांग के अनुरूप आपूर्ति (पौध उत्पादन) भी तैयार की जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान की बैठक में समीक्षा कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के किसानों और निजी क्षेत्रों को भी 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान से जोड़ा जाए। सभी विभाग लक्ष्य की पूर्ति के लिए पौधरोपण में तेजी लाएं और रोपे गए पौधों की मॉनिटिरिंग भी बेहतर तरीके से करें। उद्यानिकी विभाग किसानों को फलदार वृक्ष लगाने के लिए प्रेरित करे, जिससे निकट भविष्य में फलों को बेचकर उनकी आय में वृद्धि हो सके। 'एक बगिया मां के नाम' के माध्यम से राज्य सरकार स्व-सहायता समूहों की महिलाओं की आय बढ़ाने के लिए भी संकल्पित है। फलों की बगिया विकसित करने के लिए उन्हें तीन साल तक आर्थिक मदद दी जाएगी। वन विभाग ने लगाए हैं अब तक 5 करोड़ 38 लाख से अधिक पौधे मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर प्रदेशभर में गत 5 जून से 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान चलाया जा रहा है, जो 30 सितंबर तक चलेगा। प्रमुख सचिव पर्यावरण ने बताया कि विश्व पर्यावरण दिवस से प्रारंभ 'एक पेड़ मां के नाम अभियान' की मॉनीटरिंग के लिए मेरी लाइफ पोर्टल तैयार किया गया है। गत 5 जून से अब तक प्रदेश के विभिन्न विभागों और जिलों में करीब 5 करोड़ 54 लाख से अधिक पौधरोपण कर पोर्टल पर दर्ज कर दिया गया है। इस अभियान में अकेले वन विभाग ने ही वर्ष 2025-26 में 3.40 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा था। इस लक्ष्य के विरूद्ध 22 जुलाई तक 5 करोड़ 38 लाख से अधिक पौधों का रोपण कर दिया गया है। कुल पौधरोपण की 95 प्रतिशत से अधिक उपलब्धि वन विभाग ने हासिल की है। वन विभाग ने व्यापक कार्ययोजना तैयार की थी, जिसमें पौधरोपण क्षेत्रों को अभियान से जोड़ने, शासन के निर्देशानुसार पौधरोपण की तैयारियां, संयुक्त वन प्रबंधन समितियों की सक्रिय भागीदारी, प्लांटेशन मॉनिटरिंग सिस्टम से पौधों की निगरानी और “मेरी लाइफ” पोर्टल पर पौधरोपण की नियमित जानकारी अपलोड करना भी शामिल है। अभियान की अब तक की प्रगति 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान में उच्च शिक्षा विभाग ने 1.60 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। अब तक प्रदेश के सभी शासकीय विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालय परिसरों में 1 लाख से अधिक देशी फलदार पौधे लगाए जा चुके हैं। इसी प्रकार नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने 1 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य रखा है। लक्ष्य के विरूद्ध प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में 4.15 लाख छायादार और औषधीय पौधे लगाए जा चुके हैं। यह अभियान नगरीय क्षेत्र में अर्बन फॉरेस्ट (ग्रीन कवर) तैयार करने में बेहद सहायक सिद्ध होगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने बड़े पैमाने पर स्व-सहायता समूह की महिलाओं को पौधरोपण अभियान से जोड़ा है। अब तक 7 हजार से अधिक महिलाओं को पौधरोपण स्थल का भ्रमण कराया गया है। विभाग की योजना रोपित किए गए सभी पौधों के रख-रखाव की जिम्मेदारी महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपने की है। करीब 50 हजार पौधे रोजाना लगा रहा स्कूल शिक्षा विभाग अभियान के तहत स्कूल शिक्षा विभाग ने 86 लाख 27 हजार से अधिक पौधरोपण का लक्ष्य तय किया है। प्रदेश के सभी स्कूलों और खुले मैदान में अब तक 5 लाख 37 हजार 625 आम, अमरूद, नीम, पीपल, बरगद, सागौन एवं शीशम जैसे फलदार एवं छायादार पौधे लगाए जा चुके हैं। बैठक में स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. संजय गोयल ने बताया कि विभाग ने स्कूली बच्चों को इस अभियान से सक्रियता से जोड़ा है। विभाग प्रतिदिन बच्चों से पौधरोपण कराकर बच्चों की माता के साथ फोटो खिंचवाकर इन्हें मेरी लाइफ पोर्टल पर दर्ज कर रहा है। उन्होंने बताया कि सबके सामूहिक सहयोग एवं प्रयासों से विभाग द्वारा रोजाना 50 हजार पौधे लगाए जा रहे हैं। अगले दो से तीन माह में विभाग अपना लक्ष्य पूर्ण कर लेगा। उद्यानिकी विभाग ने लगाए 9.34 लाख से अधिक पौधे उद्यानिकी विभाग ने 4862 हेक्टेयर क्षेत्र में 21 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। प्रदेशभर में खेत, नदियों से सटे क्षेत्र तथा जलाशयों व नालों के आसपास अब तक 9.34 लाख से अधिक पौधरोपण किया जा चुका है। इनमें आम, अमरूद, संतरा, नीबू जैसे विभिन्न फलदार पौधे शामिल हैं। इसी प्रकार पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने 15 अगस्त से 15 सितंबर तक प्रदेश में “एक बगिया मां के नाम” अभियान प्रारंभ कर पौधरोपण का लक्ष्य हासिल करने की योजना बनाई है। विभाग द्वारा विगत 15 जुलाई से गंगोत्री हरित परियोजना, मां नर्मदा परिक्रमा पथ पर पौधरोपण की शुरुआत कर दी गई है। पर्यावरण विभाग ने ईको क्लब से माध्यम से लगभग 37 हजार स्कूल परिसरों में अब तक 2 लाख 76 से अधिक पौधरोपण किया है। बैठक में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार, अपर मुख्य सचिव वन अशोक वर्णवाल, प्रमुख सचिव पर्यावरण नवनीत मोहन कोठारी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक असीम श्रीवास्तव, आयुक्त नगरीय विकास एवं आवास संकेत भोंडवे, संचालक सह आयुक्त एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास छोटे सिंह, आयुक्त उद्यानिकी श्रीमती प्रीति मैथिल सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

विजय शाह के खिलाफ कांग्रेस की दूसरी सुप्रीम कोर्ट याचिका, पद से हटाने की उठी मांग

भोपाल  कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित बयान देने वाले मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह के खिला कांग्रेस नेता जया ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट में एक और याचिका दाखिल की है. जिसमें मंत्री को पद से हटाने की मांग गई है. नेता ने अपनी याचिका में कहा है कि मंत्री शाह का आचरण संविधान के अनुच्छेद 164 (3) के तहत ली गई शपथ का उल्लंघन करता है. जिसके आधार पर याचिकाकर्ता ने मंत्री के खिलाफ क्वो-वारंटो रिट जारी करने की मांग की है, ताकि उन्हें मंत्री पद से हटाया जा सके। कांग्रेस नेता जया ठाकुर ने अपनी याचिका में कहा है कि डॉ. अंबेडकर नगर के रायकुंडा गांव में आयोजित एक समारोह के दौरान मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित टिप्पणी की थी. याचिका में कहा गया है कि ये टिप्पपणी किसी और के लिए नहीं बल्कि कर्नल सोफिया के लिए हो सकती है. कांग्रेस नेता जया ठाकुर ने अपनी याचिका में कहा है कि डॉ. अंबेडकर नगर के रायकुंडा गांव में आयोजित एक समारोह के दौरान मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित टिप्पणी की थी. याचिका में कहागया है कि ये टिप्पपणी किसी और के लिए नहीं बल्कि कर्नल सोफिया के लिए हो सकती है. कार्यक्रम में दिया था विवादित बयान दरअसल मंत्री विजय शाह ने मध्य प्रदेश के मही में जलसंरक्षण कार्यक्रम के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक बयान दिया था. जिसको लेकर काफी हंगामा मचा था. देशभर में मंत्रीय के बयान की निंदा की गई थी उन्हें पद से हटाने की मांग की गई थी. कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों और मुस्लिम संगठनों ने मंत्री शाह के बयान कको शर्मनाक बताया था और इस मुद्दे को लेकर बीजेपी पर जमकर निशाना साधा था. हालांकि विवाद बढ़ने के बाद मंत्री ने अपने बयान पर माफी मांग ली थी. 11 मई को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में आयोजित हलमा कार्यक्रम के दौरान मंत्री विजय शाह ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कहा था ‘उन्होंने कपड़े उतार-उतार कर हमारे हिंदुओं को मारा और मोदी जी ने उनकी बहन को उनकी ऐसी की तैसी करने उनके घर भेजा.’ ऑपरेशन सिंदूर की दी थी जानकारी कर्नल सोफिया कुरैशी, विंग कमांडर व्योमिका सिंह और विदेश विभाग के सचिव विक्रम मिसरी ने एक साथ मिलकर ऑपरेशन सिंदूर के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. जिसमें इस ऑपरेशन को लेकर तमाम तरह की जानकारियां दी थीं और बताया था कि किस तरह से भारतीय सैनिकों ने इस ऑपरेशन को अंजाम देकर पाकिस्तान की कमर तोड़ दी थी. कर्नल सोफिया कुरैशी इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का चेहरा बन गई थीं. मंत्री के बयान पर मचा बवाल इधर मंत्री के बयान पर बवाल मच गया और मामला कोर्ट तक पहुंच गया. हाई कोर्ट ने उनकी टिप्पणी पर नाराजगी जाहिर करते हुए उनके खिलाफ मामला दर्ज करने के निर्देश दिए थे. वहीं सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले को लेकर 19 मई को सुनवाई की थी और मंत्री शाह को जमकर फटकार लगाई थी. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मामले में SIT को जांच के निर्देश भी दिए थे. तीन सदस्यीय SIT का गठन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 19 मई को देर शाम को ही तीन सदस्यीय SIT का गठन किया गया था. 20 मई से जांच शुरू की गई और इस मामले में 125 लोगों के बयान दर्ज किए गए थे. तीन सदस्यीय SIT टीम में सागर रेंज के तत्कालीन IG प्रमोद वर्मा के साथ तत्कालीन SAF DIG कल्याण चक्रवर्ती और डिंडोरी SP वाहिनी सिंह को शामिल किया गया था. 20 मई को SIT ने विजय शाह केस की जांच शुरू की. 21 मई को SIT टीम महू के रायकुंडा गांव भी पहुंची थी, जहां मंत्री ने कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी की थी. SIT ने 22 मई को बेस कैंप में लोगों के बयान दर्ज करना शुरू किए. कार्यक्रम में शामिल 125 से ज्यादा लोगों को बुलाया. ये सिलसिला 5 दिन तक चला. इसमें वीडियो बनाने वाले पत्रकार से लेकर पूर्व मंत्री और स्टूडेंट से लेकर कुलपति तक के बयान दर्ज किए गए थे. कार्यक्रम में दिया था विवादित बयान दरअसल मंत्री विजय शाह ने मध्य प्रदेश के मही में जलसंरक्षण कार्यक्रम के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक बयान दिया था. जिसको लेकर काफी हंगामा मचा था. देशभर में मंत्रीय के बयान की निंदा की गई थी उन्हें पद से हटाने की मांग की गई थी. कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों और मुस्लिम संगठनों ने मंत्री शाह के बयान कको शर्मनाक बताया था और इस मुद्दे को लेकर बीजेपी पर जमकर निशाना साधा था. हालांकि विवाद बढ़ने के बाद मंत्री ने अपने बयान पर माफी मांग ली थी. मंत्री विजय शाह ने क्या कहा था 11 मई को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में आयोजित हलमा कार्यक्रम के दौरान मंत्री विजय शाह ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कहा था ‘उन्होंने कपड़े उतार-उतार कर हमारे हिंदुओं को मारा और मोदी जी ने उनकी बहन को उनकी ऐसी की तैसी करने उनके घर भेजा.’ ऑपरेशन सिंदूर की दी थी जानकारी कर्नल सोफिया कुरैशी, विंग कमांडर व्योमिका सिंह और विदेश विभाग के सचिव विक्रम मिसरी ने एक साथ मिलकर ऑपरेशन सिंदूर के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. जिसमें इस ऑपरेशन को लेकर तमाम तरह की जानकारियां दी थीं और बताया था कि किस तरह से भारतीय सैनिकों ने इस ऑपरेशन को अंजाम देकर पाकिस्तान की कमर तोड़ दी थी. कर्नल सोफिया कुरैशी इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का चेहरा बन गई थीं. मंत्री के बयान पर मचा बवाल इधर मंत्री के बयान पर बवाल मच गया और मामला कोर्ट तक पहुंच गया. हाई कोर्ट ने उनकी टिप्पणी पर नाराजगी जाहिर करते हुए उनके खिलाफ मामला दर्ज करने के निर्देश दिए थे. वहीं सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले को लेकर 19 मई को सुनवाई की थी और मंत्री शाह को जमकर फटकार लगाई थी. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मामले में SIT को जांच के निर्देश भी दिए थे. तीन सदस्यीय SIT का गठन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 19 मई को देर शाम को ही तीन सदस्यीय SIT का गठन किया गया था. … Read more