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PWD–NHAI ने हटाए अवैध निर्माण, NH-89 पर फिर से खुला रास्ता

अजमेर नेशनल हाईवे-89 पर अतिक्रमण के खिलाफ बुधवार को प्रशासन ने बड़ी और सख्त कार्रवाई की। देवनगर नागौर गांव से गुजर रहे NH-89 पर PWD और नेशनल हाईवे अथॉरिटी (NHAI) ने संयुक्त रूप से अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया। इस दौरान करीब 22 किलोमीटर लंबे हिस्से में अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। कार्रवाई के दौरान जेसीबी मशीनों का व्यापक उपयोग किया गया और हाईवे की जद में आ रहे मकान, दुकानें व अन्य निर्माण हटाए गए। ढाई माह पहले दिए गए थे नोटिस नेशनल हाईवे अथॉरिटी के अधिकारी संदीप कुमार ने बताया कि हाईवे किनारे अतिक्रमण करने वालों को करीब ढाई माह पहले नोटिस जारी किए गए थे। नियमों के तहत जिन मकानों और दुकानों को हटाया जाना था, उनके मालिकों को मुआवजा भी दिया जा चुका था। इसके बावजूद कई लोगों ने अतिक्रमण नहीं हटाया, जिसके बाद मजबूरन प्रशासन को यह सख्त कदम उठाना पड़ा। उन्होंने स्पष्ट किया कि NH-89 पर लगातार बढ़ते यातायात और दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए हाईवे की चौड़ाई और सुरक्षा मानकों को बनाए रखना जरूरी था। अतिक्रमण के कारण न केवल ट्रैफिक बाधित हो रहा था, बल्कि दुर्घटनाओं का खतरा भी बना हुआ था।   भारी पुलिस जाप्ते में हुई कार्रवाई अतिक्रमण हटाने की इस बड़ी कार्रवाई के दौरान किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया। स्थानीय थाना प्रभारी विक्रम सिंह राठौड़ के नेतृत्व में पुलिस जाप्ता मौके पर मौजूद रहा। पुलिस ने पूरे अभियान के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखी और कार्रवाई को शांतिपूर्वक संपन्न कराया। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, कुछ स्थानों पर लोगों ने विरोध का प्रयास किया, लेकिन पुलिस और प्रशासन की समझाइश के बाद स्थिति नियंत्रित रही। हाईवे सुरक्षा और विकास पर जोर PWD और NHAI अधिकारियों ने दो टूक कहा कि नेशनल हाईवे पर अतिक्रमण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हाईवे की सुरक्षा, सुचारु यातायात और भविष्य के विकास कार्यों के लिए यह कार्रवाई आवश्यक थी। उन्होंने संकेत दिए कि आने वाले समय में भी अन्य हिस्सों में अतिक्रमण के खिलाफ इसी तरह सख्त अभियान चलाया जाएगा। स्थानीय लोगों में मिली-जुली प्रतिक्रिया इस कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। जहां कुछ लोगों ने इसे विकास और सुरक्षा के लिहाज से जरूरी कदम बताया, वहीं प्रभावित लोगों ने प्रशासन से पुनर्वास और सहयोग की मांग की। फिलहाल NH-89 पर अतिक्रमण हटने से यातायात पहले की तुलना में अधिक सुचारु हो गया है। प्रशासन का कहना है कि यह अभियान हाईवे को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।  

घरेलू विवाद बना कानून व्यवस्था की चुनौती, झारखंड में ससुर के घर पर बुलडोजर एक्शन

गिरिडीह भारत में दामाद की ससुराल में खूब आवभगत होती है। इस आवभगत की बहुत सारी कहानियां हमारे सामने हैं, लेकिन कभी-कभी ससुराल में दामाद कुछ ऐसा कर जाते हैं, जो कानूनन अपराध होता है। ऐसा ही एक मामला आया है झारखंड के गिरिडीह में। यहां एक शख्स की पत्नी बार-बार मायके चली जाती थी। इस बात से नाराज होकर महिला का पति बुलडोजर लेकर ससुराल पहुंच गया और घर पर ही बुलडोजर चला दिया। शख्स ने घर पर बुलडोजर चलाकर बाउंड्री को गिरा दिया।   यह मामला गिरिडीह के जमुआ थाना क्षेत्र का है। यहां के सिरसिया गांव में एक शख्स की पत्नी बार-बार मायके चली जा रही थी। पत्नी के बार-बार मायके जाने से पति इतना नाराज हुआ कि एक दिन वो बुलडोजर लेकर ससुराल पहुंच गया। ससुराल पहुंचकर शख्स ने ससुर के घर पर ही तोड़फोड़ शुरू कर दी और घर के बाहर बनी बाउंड्री की दीवार को तोड़कर गिरा दिया। इस घटना की खबर मिलने के बाद जब मौके पर भीड़ इकट्ठा हो गई तो, शख्स जेसबी लेकर फरार हो गया। इस मामले की सूचना पुलिस को दी गई तो मौके पर पुलिस पहुंची और मामला दर्ज कर लिया। मिली जानकारी के अनुसार, गादी-चुंगलो का रहने वाला पिंटू मंडल की शादी सिरसिया में हुई थी। शादी के बाद से ही पिंटू मंडल अपनी पत्नी उर्मिला को नशा करने के बाद मारता था और अभद्र व्यवहार करता था। इस वजह से उर्मिला अपने दो बच्चों को लेकर मायके रहने चली गई। इस घटना के बाद पिंटू पर मामला दर्ज कर लिया गया है।  

नए मास्टर प्लान के तहत जिंसी चौराहे की सड़क चौड़ी, होलकर काल के घर-दुकान का संकट

इंदौर  शहर के मध्य क्षेत्र में स्थित जिंसी चौराहे के आसपास की सड़कों का नए मास्टर प्लान के मुताबिक चौड़ीकरण होना है। यहां की सड़कें 79 फीट चौड़ी की जाएंगी। जिंसी चौराहे से रानी लक्ष्मीबाई प्रतिमा और नेमीनाथ चौराहे से जिंसी चौराहे तक सड़क चौड़ीकरण प्रस्तावित है। हाल ही में नगर निगम ने लोगों को मकान खुद हटाने के नोटिस दिए हैं और अब लगातार विरोध बढ़ रहा है। रहवासी दोनों ही सड़कों के चौड़ीकरण का लगातार विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि सड़क की चौड़ाई में हमारे मकान और दुकानें लगभग समाप्त हो जाएंगे। नेताओं और अधिकारियों को इस पर विचार करना चाहिए। इससे हजारों लोगों का रोजगार खत्म हो जाएगा और पूरे क्षेत्र की संस्कृति का नुकसान होगा।  लंबे समय से चल रहा विरोध प्रदर्शन वरिष्ठ कांग्रेस नेता कृपाशंकर शुक्ला का घर भी इसी क्षेत्र में है। उन्होंने कहा कि सड़क चौड़ीकरण व्यावहारिक होना चाहिए। लगभग 80 फीट सड़क चौड़ी की जा रही है। इसमें तो पूरा क्षेत्र ही बर्बाद हो जाएगा। यह कारोबार का मुख्य क्षेत्र है। पूरा बाजार ही समाप्त हो जाएगा। हमने महापौर पुष्यमित्र भार्गव और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से मुलाकात की है, हमें उम्मीद है कि इसे सोच समझकर ही अमल में लाया जाएगा। गौरतलब है कि यह क्षेत्र मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र में आता है।  200 साल पुराने मकान बाजार, नक्शे भी पास इस क्षेत्र में अधिकतर मकान 100 से 200 साल पुराने हैं। सभी ने होलकरों के समय यहां की जमीनों के सौदे किए थे और बाद में नगर निगम के अस्तित्व में आने पर नक्शे पास करवाए। इसके बाद मास्टर प्लान आया और उसमें इस क्षेत्र की सड़कों के चौड़ीकरण की बात तय की गई। रहवासियों का कहना है कि हमारे घर और दुकान का एक इंच भी अवैध नहीं है। बिना मुआवजा दिए इस तरह से तोड़फोड़ करना और हमारे रोजगार खत्म करना बिल्कुल गलत है। हम इस निर्णय के खिलाफ आंदोलन करते रहेंगे।  60 फीट के लिए रहवासी राजी क्षेत्र में रहने वाले अधिकतर रहवासी सड़कों को 60 फीट तक चौड़ी करने के लिए राजी हैं। दुकानदारों का भी कहना है कि इससे हमारी दुकानों का कुछ हिस्सा बच जाएगा और हमें व्यापार करने के लिए जगह मिल जाएगी। यदि पूरी दुकानें ही खत्म हो गई तो हम क्या करेंगे। हमारे पूरे परिवार इन दुकानों की आय पर ही जीवित हैं।  ट्रैफिक का दबाव बहुत अधिक यह शहर के मध्य क्षेत्र में आता है इसलिए ट्रैफिक का दबाव यहां पर सबसे अधिक है। जाम की समस्या से निपटने के लिए यहां पर ट्रैफिक पुलिस के द्वारा कई बार विशेष टीमें भी लगाई जाती हैं। शाम को 6 बजे बाद बिना ट्रैफिक जाम में फंसे यहां से गाड़ी निकालना लगभग असंभव सा रहता है। नगर निगम और प्रशासन को उम्मीद है कि सड़कों के चौड़ीकरण के बाद में यहां ट्रैफिक जाम की समस्या से निजात मिल जाएगी।  1835 में घर खरीदा था, आजादी के बाद निगम से नक्शा पास करवाया रहवासी गोविंद शर्मा ने बताया कि उन्होंने 1835 में होलकर शासन में यह घर खरीदा था। उस समय होलकरों के नियमों के मुताबिक रजिस्ट्री करवाई गई थी। बाद में देश आजाद हुआ और नगर निगम बना। हमने पूरे घर का नक्शा पास करवाया। अब सड़क चौड़ीकरण में हमारी पूरी दुकानें टूट रही हैं। पहले यह सड़क 40 फीट चौड़ी होना थी, बाद में इसे 60 फीट करने का कहा गया और अब 80 फीट चौड़ीकरण का प्रस्ताव आया है। इस तरह तो हमारे व्यापार पूरी तरह खत्म हो जाएंगे।  महापौर ने माइक्रो सर्वे करवाने का कहा हमने महापौर पुष्यमित्र भार्गव से अपनी बात रखी है। उन्होंने क्षेत्र में माइक्रो सर्वे करवाने के लिए कहा है। उन्होंने कहा है कि उसके बाद ही यहां पर काम शुरू होगा। रहवासियों की पूरी मदद की जाएगी।  – शंकर नागवानी, रहवासी आंदोलन जारी रहेगा क्षेत्र के लगभग सभी नेता हमारे साथ आंदोलन में खड़े हैं। हमें जब तक न्याय नहीं मिलेगा हम आंदोलन करते रहेंगे। यह सब हमारी पुश्तैनी संपत्तियां हैं। हम किसी कीमत पर इन्हें बर्बाद नहीं होने देंगे।  – संजय खानविलकर, रहवासी रहवासियों से बातचीत जारी हम रहवासियों की परेशानी में उनके साथ खड़े हैं। उनकी बात हमने महापौर और अधिकारियों तक पहुंचाई है। रहवासियों से लगातार संवाद हो रहा है। जल्द बीच का कोई रास्ता जरूर निकलेगा। – भावना मिश्रा, पार्षद 

भोपाल में IAS अफसर के घर में घुसकर 40 गुंडों ने की तोड़फोड़, अफसर बोलीं – खुलेआम बैठकर दे रहे थे धमकी

भोपाल  भोपाल में शिक्षा विभाग में उप सचिव आईएएस मंजूषा राय के घर में शुक्रवार को कुछ लोग जेसीबी लेकर पहुंच गए। इस दौरान बाउंड्रीवॉल और सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए। महिला अफसर ने कहा कि 40 गुंडे बाहर खड़े कर दिए। प्रॉपर्टी का विवाद है तो सिविल कोर्ट में आओ। मामला दानिशकुंज कॉलोनी में शुक्रवार का है। विवाद 1800 स्क्वायर फीट जमीन पर बने मकान के एग्रीमेंट, नामांतरण और रजिस्ट्री से जुड़ा है। सूचना मिलने पर प्रशासनिक अफसर भी मौके पर पहुंचे। दोनों पक्षों को समझाइश दी गई। लेकिन उनके हटने के बाद में उन्होंने जेसीबी लगाकर मकान को तोड़ना शुरू कर दिया। पुलिस से नहीं मिल रहा सहयोग 41 लाख रुपए में किया था एग्रीमेंट महिला अफसर राय ने बताया कि 2010 में मकान का 41 लाख रुपए एग्रीमेंट किया था। पूरा पेमेंट बैंक अकाउंट से किया। इसके बाद भी जब-जब जरूरत पड़ी, लाखों रुपए लिए। संबंधित के नाम नामांतरण नहीं होने की वजह से रजिस्ट्री नहीं करा पा रहे थे। वहीं, साल 2011 से परिवार समेत मकान में रह रहे हैं। जरूरत पड़ने पर यहां दो कमरे भी बनवाए। दूसरे के नाम पर करा दी रजिस्ट्री महिला ने बताया कि इसी बीच हितेश बटेजा नामक व्यक्ति के जरिए 17 मार्च-2025 में नामांतरण करा दिया। 10 जून में रजिस्ट्री करा दी। इस बारे में हमें कोई जानकारी नहीं दी गई। शुक्रवार को 40 से ज्यादा गुंडे घर पहुंचे और घर में तोड़फोड़ की। गुंडे घर के बाहर ही बैठ गए। पति के नाम से कराया था एग्रीमेंट आईएएस राय ने इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों से भी शिकायत की है। इसमें कहा है कि मकान नंबर-595 दानिश कुंज में रंजना अहमद से पति विक्रांत प्रवीण राय ने 16 दिसंबर-10 में 41 लाख रु में विक्रय अनुबंध कर क्रय किया था। यह डुप्लेक्स मकान है। रंजना अहमद की मृत्यु के बाद उसके पुत्र सईद फरीद अहमद परिवर्तित नाम रिदित अरोड़ा को शेष बची हुई राशि मकान के एवज में अपने स्वयं के खाते से एवं मेरे पति के बचत खाते से भुगतान की गई। दो बार नामांतरण आवेदन खारिज 2021 में रिदित अरोड़ा द्वारा नायब तहसीलदार न्यायालय में नामांतरण के लिए दो बार आवेदन लगाए गए थे। जिन्हें दस्तावेज के अभाव में खारिज कर दिया था। रिदित अरोड़ा की सहमति से पारिवारिक आवश्यकताओं को दृष्टिगत रखते हुए हमारे द्वारा उक्त संपत्ति में अतिरिक्त निर्माण कार्य भी कराया था। इसका भुगतान मैंने अपने स्वयं के खाते से किया था। कोर्ट में विचाराधीन है प्रकरण बाद में 17 मार्च 2025 में उक्त संपत्ति पर रंजना अहमद के पुत्र रिदित अरोड़ा का नामांतरण अतिरिक्त तहसीलदार कोलार ने किया और 10 जून में उक्त संपत्ति का विक्रय अरोड़ा ने मोना बटेजा पति हितेश बटेजा को कर दिया। हमारे संज्ञान में उक्त रजिस्ट्री और नामांतरण के आने के पश्चात कोलार एसडीएम कोर्ट में नामांतरण के विरुद्ध अपील की गई। तहसीलदार कोर्ट में मोना बटेजा के पक्ष में नामांतरण न हो, इस संबंध में आपत्ति भी लगाई गई। प्रकरण राजस्व न्यायालय में विचाराधीन है। एसडीएम-तहसीलदार के यहां आपत्ति लगाई उन्होंने कहा कि हमारे सभी रिकॉर्ड में इसी मकान का नाम दर्ज है। इस संबंध में एसडीएम और तहसीलदार के यहां आपत्ति लगाई गई है। इस मामले में प्रशासनिक अफसर कुछ भी कहने से बच रहे हैं। वहीं, बटेजा से चर्चा नहीं हो पाई।

खरगौन : 12 कॉलोनियों के 85 मकान घोषित असुरक्षित, प्रशासन ने शुरू की कार्रवाई

खरगौन खरगौन शहर और आसपास के क्षेत्रों में ट्रांसमिशन लाइनों के प्रतिबंधित क्षेत्रों में हुए अवैध निर्माण पर 85 मकान मालिकों को अतिक्रमण हटाने के लिये नोटिस जारी किये गये हैं। उल्लेखनीय है कि खरगौन में मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) की 132 के.व्ही. से लेकर 220 के.व्ही. तक की छह प्रमुख ट्रांसमिशन लाइनों के समीप मानव जीवन के लिये घातक और विद्युत सुरक्षा मानकों के विरूद्ध अनाधिकृत निर्माण कर लिये गये है। ट्रांसमिशन लाइनो की प्रतिबंधित सीमा में हुये निर्माण खरगौन के अनेक क्षेत्रों में ट्रांसमिशन लाइनो के प्रतिबंधित सीमा में अनाधिकृत निर्माण किये गये है, जिनमें विद्युत मानकों के अनुरूप न्यूनतम सुरक्षा दूरी का उल्लंघन किया गया है। यहां के ओंकार दत्त रेजिडेंसी, निमरानी, द्वारका धाम कॉलोनी, साकेत नगर, जेतपुरा, यमुना नगर कॉलोनी, खरगोन मोतीपुरा, हिंगलाज नगर, स्मार्ट पार्क टाउनशिप, माँ रेवा विन्यास कॉलोनी, पानवा एवं भीलगांव आदि क्षेत्रों में ट्रांसमिशन लाइन और निर्माण के बीच बेहद कम क्लियरेंस पाया गया है। यह अति उच्च वोल्टेज की बिजली से जुड़े संभावित करंट, स्पार्किंग, और अग्निकांड जैसे गंभीर खतरे उत्पन्न कर सकता है। इन ट्रांसमिशन लाइनों के समीप हुये निर्माण खरगौन जिले में मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी की छह ट्रांसमिशन लाइने हैं जिनके समीप विद्युत सुरक्षा मानकों के विरूद्ध निर्माण कर लिये गये हैं। इन ट्रांसमिशन लाइनों में 132 के.व्ही. भीकनगांव-खरगोन डी.पी. लाइन, 132 के.व्ही. बिस्टन-लिलो लाइन, 132 के.व्ही. निमरानी-कसरावद लाइन, 220 के.व्ही. निमरानी-छैःगांव लाइन, 220 के.व्ही. निमरानी-ओंकारेश्वर लाइन एवं 220 के.व्ही. महेश्वर-पीथमपुर लाईन शामिल हैं। जरूरी है 27 मीटर का कॉरिडोर केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अनुसार, 132 के.व्ही. या इससे अधिक वोल्टेज की ट्रांसमिशन लाइन के नीचे कम से कम 27 मीटर की सुरक्षित दूरी आवश्यक है, ताकि हवा में झूलते तारों से संपर्क न हो और दुर्घटना टाली जा सके। 600 से 950 गुना अधिक रहता है ट्रांसमिशन लाइनों से जान का खतरा आम घरों में उपयोग होने वाली विद्युत आपूर्ति की तीव्रता मात्र 230 वोल्ट होती है। यह स्तर भी इतना अधिक होता है कि यदि कोई व्यक्ति गलती से इसके संपर्क में आ जाए तो गंभीर रूप से घायल हो सकता है या उसकी जान भी जा सकती है लेकिन इससे भी कहीं अधिक खतरनाक होती हैं। शहर भर में क्रियाशील एक्स्ट्रा हाईटेंशन ट्रांसमिशन लाइनें, जिनमें विद्युत तीव्रता 132 के.व्ही. (यानी 132,000 वोल्ट) एवं 220 के.व्ही. (यानी 2,20,000 वोल्ट) होती है। यह घरेलू बिजली की तुलना में 600 से 950 गुना अधिक रहती है। यह अंतर दर्शाता है कि अगर मात्र 230 वोल्ट के संपर्क में आने से जान को खतरा हो सकता है, तो 132 या 220 के.व्ही. की ट्रांसमिशन लाइनों के पास रहने या निर्माण करने से कितना बड़ा जोखिम हो सकता है। ट्रांसमिशन लाइनों के आसपास निर्धारित प्रतिबंधित क्षेत्र में निर्माण करना न सिर्फ गैरकानूनी है, बल्कि यह जानलेवा जोखिम भी उत्पन्न करता है। h