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वोटर लिस्ट से 31 लाख नाम बाहर, राजस्थान में फाइनल सूची जारी

जयपुर राजस्थान में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के समापन के बाद शनिवार को फाइनल मतदाता सूची जारी की गई। इस नई सूची से 31 लाख से अधिक नामों को बाहर किया गया है। वर्तमान में कुल मतदाताओं की संख्या 5,15,19,929 है।चुनाव आयोग के अनुसार, 27 अक्टूबर 2025 की सूची में कुल मतदाता 5,46,56,215 थे। एसआईआर प्रक्रिया के दौरान 41,84,891 नामों को ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं किया गया, जिससे 16 दिसंबर 2025 को जारी ड्राफ्ट सूची में कुल मतदाता 5,04,71,324 थे। ड्राफ्ट सूची के बाद 12,91,365 नए मतदाताओं को शामिल किया गया, जबकि 2,42,760 नामों को हटाया गया। 21 फरवरी को जारी अंतिम सूची में कुल मतदाताओं की संख्या 5,15,19,929 है, जो 27 अक्टूबर 2025 के मुकाबले 3,136,286 कम है। चुनाव आयोग ने आधिकारिक तौर पर जानकारी दी कि मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन में कुल मतदाताओं की संख्या 5,15,19,929 में से 2,69,57,881 पुरुष मतदाता और 2,45,61,486 महिला मतदाता हैं। इसके अलावा, 562 ट्रांसजेंडर मतदाता हैं। एसआईआर के बाद कुल 10,48,605 मतदाताओं की वृद्धि हुई है, जो 2.08 प्रतिशत है। जयपुर जिले में 3.45 प्रतिशत, फलौदी में 3.22 प्रतिशत, भरतपुर में 2.78 प्रतिशत, सिरोही में 2.72 प्रतिशत व बूंदी में 2.71 प्रतिशत कुल मतदाताओं में वृद्धि हुई है। आयोग के अनुसार, फाइनल मतदाता सूची में लिंगानुपात में 2 अंकों की वृद्धि हुई है, जो प्रारूप प्रकाशन के समय 909 से अंतिम प्रकाशन के समय 911 हो गया है। राज्य में जयपुर जिले में 7 अंक, कोटा में 6 अंक और अजमेर, सिरोही, डूंगरपुर, बूंदी, झालावाड़ व बारां में 4 अंक की वृद्धि हुई है। फाइनल मतदाता सूची में युवा मतदाताओं (18 से 19 वर्ष आयुवर्ग) की संख्या में 4,35,061 की वृद्धि हुई है, जो 0.82 प्रतिशत है। जयपुर जिले में 1.30 प्रतिशत, बाड़मेर में 1.26 प्रतिशत, भरतपुर में 1.22 प्रतिशत, फलौदी में 1.18 प्रतिशत तथा बूंदी में 1.09 प्रतिशत युवा मतदाताओं की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है।

अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित: प्रदेश में 5.15 करोड़ मतदाता, 31 लाख लोगों के नाम बाहर

जयपुर राजस्थान में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर-2026) सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। राज्य की 199 विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन 21 फरवरी 2026 को कर दिया गया। अंतिम प्रकाशित मतदाता सूची के अनुसार राज्य में कुल 5 करोड़ 15 लाख 19 हजार 929 मतदाता दर्ज किए गए हैं। इससे पहले 27 अक्तूबर 2025 को जारी प्रारंभिक आंकड़ों में मतदाताओं की संख्या 5 करोड़ 46 लाख 56 हजार 215 थी। पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान कुल 31 लाख 36 हजार 286 नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। निर्वाचन विभाग के अनुसार यह कार्रवाई मृत, स्थानांतरित अथवा अपात्र पाए गए मतदाताओं के नामों के सत्यापन के बाद की गई है। विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी, अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना था, ताकि आगामी चुनावों में निष्पक्ष और सुचारु मतदान सुनिश्चित किया जा सके। क्र.स. विवरण कुल 1 27 अक्टूबर 2025 को मतदाता 5,46,56,215 2 ड्राफ्ट सूची में शामिल ना हुये मतदाता (ASD) 41,84,891 3 16 दिसम्बर 2025 को ड्राफ्ट सूची में शामिल मतदाता 5,04,71,324 4 ड्राफ्ट सूची प्रकाशन के बाद जोड़े गये कुल नये मतदाता 12,91,365 5 ड्राफ्ट सूची प्रकाशन के बाद हटाये गये कुल मतदाता 2,42,760 6 मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन में मतदाता 5,15,19,929 राज्य में युवा मतदाताओं की संख्या में 4.35 लाख से अधिक की बढ़ोतरी राज्य में प्रारूप मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी गई है। इस दौरान 18 से 19 वर्ष आयुवर्ग के युवा मतदाताओं की संख्या में 4,35,061 की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो कुल मिलाकर 0.82 प्रतिशत की वृद्धि है। जिलावार आंकड़ों के अनुसार जयपुर जिले में 1.30 प्रतिशत, बाड़मेर में 1.26 प्रतिशत, भरतपुर में 1.22 प्रतिशत, फलौदी में 1.18 प्रतिशत तथा बूंदी में 1.09 प्रतिशत युवा मतदाताओं की वृद्धि दर्ज की गई है। मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के संबंध में 21 फरवरी 2026 को जिला निर्वाचन अधिकारियों की अध्यक्षता में सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में सभी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की निर्वाचक नामावली-2026 की एक सॉफ्ट कॉपी (फोटो रहित) और एक हार्ड कॉपी संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी स्तर पर निःशुल्क उपलब्ध कराई गई। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि कोई भी मतदाता जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) और मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) की वेबसाइट https://election.rajasthan.gov.in तथा https://voters.eci.gov.in पर ऑनलाइन EPIC सर्च के माध्यम से अपनी जानकारी देख सकता है। इसकी जानकारी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को भी दी गई। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने क्या बताया? मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि इस व्यापक अभियान को राज्य के सभी 41 जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ), 199 निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ईआरओ), 1651 सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (एईआरओ), 61,136 बूथ स्तर अधिकारियों (बीएलओ), लाखों स्वयंसेवकों और प्रमुख राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी से सफल बनाया गया। अभियान में जिला अध्यक्षों के साथ 1,08,252 बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) भी शामिल रहे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने पूरी प्रक्रिया के दौरान जागरूकता और सकारात्मक सहयोग के लिए प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया का भी आभार व्यक्त किया।

जयपुर में भी किफायती सफर का मिलेगा नया विकल्प

जयपुर. राजधानी जयपुर में महंगे ऑटो-टैक्सी किराये से परेशान लोगों के लिए राहत भरी खबर है। जयपुर शहर में जल्द ही किफायती दर पर सफर का नया विकल्प मिलने जा रहा है। सहकारिता मंत्री गौतम दक ने विभाग की अनुदान मांगों पर बहस का जवाब देते हुए विधानसभा में कहा कि जयपुर में जल्द ही नई सरकारी 'भारत टैक्सी' सेवा शुरू होगी। सहकारिता मंत्री गौतम दक ने कहा कि दिल्ली की तर्ज पर मार्च-अप्रैल में जयपुर में भारत टैक्सी शुरू होगी। इस सेवा के लिए ड्राइवरों को पूरा भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही लोगों को किफायती दर पर सफर की सुविधा मिलेगी। उदयपुर में सहकारी ‘बाइक ऑन रेंट’ सेवा शुरू मंत्री गौतम दक ने बताया कि उदयपुर में सहकारी ‘बाइक ऑन रेंट’ सेवा शुरू हो चुकी है, जबकि जयपुर में ‘भारत टैक्सी’ जल्द शुरू होगी। इसके अलावा केंद्र सरकार की नई पहल के तहत सहकारी समितियों को पेट्रोल पंप और गैस एजेंसी के लाइसेंस प्रदान किए जाएंगे। क्या है 'भारत टैक्सी'? 'भारत टैक्सी' एक सरकारी और सहकारी मॉडल पर आधारित ऐप है, जिसे ओला और उबर जैसी प्राइवेट कंपनियों के विकल्प के रूप में पेश किया गया है। इसका संचालन 'सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड' द्वारा किया जा रहा है। इस ऐप की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें टैक्सी चलाने वाला ड्राइवर ही इस प्लेटफॉर्म का हिस्सेदार यानी मालिक है।

3645 करोड़ के प्रोजेक्ट का 16 अप्रेल को काम होगा पूरा

चित्तौडगढ़़. जाखम प्रोजेक्ट के तहत चार जिलों को मिलने वाले पानी का इंतजार लम्बा होता जा रहा है। घोषणा के डेढ़ साल बाद भी अभी तक टेक्निकल बिड तक नहीं खुल पाई है। इसे खोलने के लिए 16 फरवरी निर्धारित की थी, जिसे बढ़ाकर 16 अप्रेल कर दिया है। उक्त प्रोजेक्ट को तीन साल में पूरा करना है, जबकि अब तक डेढ़ साल से अधिक समय गुजर चुका है। राज्य सरकार ने 20224-25 के बजट में जाखम प्रोजेक्ट की घोषणा की थी। पूरे प्रोजेक्ट पर 3645.56 करोड़ रुपए खर्च होंगे। पहले चरण में चित्तौडगढ़़ और प्रतापगढ़ जिलों के करीब 800 गांव 622 ढाणी में पाइप लाइन से पीने का शुद्ध पानी पहुंचाया जाना प्रस्तावित है। प्रथम चरण में 1692.30 करोड़ रुपए खर्च होंगे। जलदाय विभाग की ओर से इसके लिए टेण्डर आमंत्रित किए गए। टेण्डर को खोलने से पहले टेक्निकल बिड खोली जाती है। इसे खोलने के लिए 16 फरवरी 2026 निर्धारित की गई थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 16 अप्रेल कर दिया है। ऐसे में अब इस पूरे प्रोसेस में देरी होने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि तकनीकी बोली को खोलने के बाद टेण्डर खोले जाते हैं। दस्तावेजों की जांच आदि के बाद सबसे कम बोली लगाने वाली फर्म को वर्क ऑर्डर दिया जाता है। इसके बाद काम शुरू होता है। दूसरे चरण में 1953.26 करोड़ होंगे खर्च जाखम बांध पेयजल परियोजना दो चरणों में पूरी होगी। पहले चरण में चित्तौडगढ़़ और प्रतापगढ़ जिलों के करीब 800 गांव 622 ढाणी में पानी पहुंचाया जाता है। दूसरे चरण में राजसमंद और उदयपुर जिले के 1697 गांव और ढाणी में पानी पहुंचाने की योजना है। राजसमंद जिले के 790 गांव-ढाणी और उदयपुर जिले के 907 गांव-ढाणी को शामिल किया गया है। इस प्रोजेक्ट के पहले चरण में 1692.30 करोड़ एवं दूसरे चरण में 1953.26 करोड़ रुपए खर्च होंगे। टेक्निकल बिड अब अप्रेल में खुलेगी जाखम बांध पेयजल परियोजना के प्रथम चरण में चित्तौडगढ़़ और प्रतापगढ़ के लिए टेण्डर आमंत्रित किए गए हैं, इसकी टेक्निकल बिड 16 फरवरी को खोली जानी थी, जिसे अब अप्रेल में खोला जाएगा। -सुनीत कुमार गुप्ता, अधीक्षण अभियंता जनस्वास्थ्य अभियांत्री विभाग चित्तौडगढ़़

क्या सच में उदयपुर जा रहे हैं विजय और रश्मिका? शादी की अटकलों के बीच एयरपोर्ट पर हुए स्पॉट

 उदयपुर रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा की शादी की खबरें इन दिनों बी-टाउन का हॉट टॉपिक बनी हुई हैं। रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि दोनों 26 फरवरी को उदयपुर में एक प्राइवेट सेरेमनी में शादी करने वाले हैं। दोनों के इन्विटेशन कार्ड की एक फोटो भी सोशल मीडिया पर फैल रही है। हालांकि, अभी तक कपल की ओर से शादी को लेकर कोई कंफर्मेशन सामने नहीं आई है। इस बीच अब ये जोड़ा एयरपोर्ट पर नजर आया है। हालांकि, दोनों अलग-अलग दिखे, लेकिन इनके एयरपोर्ट पर नजर आते ही ये कयास लगाए जाने लगे कि दोनों उदयपुर के लिए रवाना हो रहे हैं। कैजुअल लुक में एयरपोर्ट पर दिखा कपल आज सुबह यानी शनिवार 21 फरवरी को शादी की चर्चाओं के बीच रश्मिका और विजय देवरकोंडा को एयरपोर्ट पर देखा गया है। इसके बाद ये अटकलें लगाई गईं कि दोनों शादी के लिए उदयपुर रवाना हो रहे हैं। हालांकि, अभी तक ये कंफर्म नहीं है कि दोनों कहां के लिए रवाना हुए हैं। लेकिन दोनों सेलेब्स एयरपोर्ट पर कैजुअल अंदाज में नजर आए। इस दौरान विजय देवरकोंडा जहां ओपन ब्लैक शर्ट और ब्लैक पैंट में नजर आए। वहीं रश्मिका ग्रे स्लीवलेस टी-शर्ट और ब्लैक लोअर में नजर आईं।   इस दौरान रश्मिका के माथे पर छोटी सी बिंदी भी नजर आई। दोनों ही सेलेब्स इस दौरान चेहरे पर मास्क लगाए हुए थे। गाड़ी से उतरते समये रश्मिका फोन में व्यस्त दिखीं। हालांकि, पैपराजी को देखकर उन्होंने हाय किया। इस दौरान दोनों साथ में नहीं बल्कि अलग-अलग नजर आए।  सजे हुए विजय के घर का वीडियो और कार्ड की तस्वीरें वायरल बीते दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें विजय देवरकोंडा का घर झालरों से सजा हुआ नजर आ रहा था। इस वीडियो के सामने आने के बाद दोनों की शादी को लेकर चर्चाएं और भी तेज हो गईं। वहीं दोनों के इन्विटेशन कार्ड की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं। इनमें शादी की तारीख 26 फरवरी बताई जा रही है, जबकि 4 मार्च को हैदराबाद में रिसेप्शन बताया जा रहा है। हालांकि, अभी तक कपल या उनके परिवार की ओर से शादी को लेकर को आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। शादी में होगी नो फोन पॉलिसी बीते दिनों कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि रश्मिका और विजय ने शादी के कार्यक्रम में नो फोन पॉलिसी को लागू किया है। यानी कोई भी गेस्ट फोन लेकर फंक्शन में शामिल नहीं हो सकेगा। यहां तक कि शादी को शूट करने वाली टीम ने भी एनडीए (गैर-खुलासा समझौता) पर हस्ताक्षर किए हैं। वहीं रिपोर्ट्स में ये भी दावा किया जा रहा है कि दोनों ने शादी की सिक्योरिटी के लिए विदेशी कंपनी से डील की है।  

साध्वी की मौत का खुलासा! 18 दिन की पड़ताल में CCTV और कॉल डिटेल से सामने आया सच

 जोधपुर राजस्थान की चर्चित युवा साध्वी प्रेम बाईसा का मौत को लेकर सवालों का सैलाब उमड़ पड़ा था. क्या उनकी मौत के पीछे कोई साजिश थी? क्या उन्हें जहर दिया गया? या फिर कोई मेडिकल लापरवाही? 18 दिनों तक चली लंबी और पेचीदा जांच, 44 गवाहों के बयान, 106 लोगों की कॉल डिटेल, 100 से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज और 37 से अधिक विसरा नमूनों की पड़ताल के बाद आखिरकार जोधपुर पुलिस ने इस राज से पर्दा उठा दिया. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती. क्योंकि मौत की वजह भले सामने आ गई हो, इंजेक्शन का सच सामने आना अभी बाकी है. एक लंबी और चुनौतीपूर्ण तफ्तीश के बाद राजस्थान की मशहूर साध्वी प्रेम बाईसा के मौत के रहस्य से आखिरकार पर्दा हट ही गया. इस मामले में फाइनल ओपिनियन के लिए जोधपुर पुलिस को फॉरेंसिक साइंस लैब्रोटरी यानी एफएसएल की रिपोर्ट का इंतजार था. उस रिपोर्ट के बाद पुलिस ने इसे लेकर फिर से मेडिकल एक्सपर्ट्स से चर्चा की और आखिरकार प्रेम बाईसा की मौत के सच का खुलासा कर दिया.  28 जनवरी को हुई प्रेम बाईसा की मौत के बाद से ही इसे लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म था. प्रेम बाईसा के अनुयायी तो खैर इस मामले में इंसाफ की मांग कर ही रहे थे, खुद प्रेम बाईसा के पिता वीरमनाथ भी बार-बार इस मामले में साजिश की आशंका जताते हुए अपनी बेटी के लिए न्याय मांग रहे थे, ऐसे में पुलिस ने पहले डॉक्टरों के बोर्ड से उनके शव का पोस्टमार्टम करवाया और फिर हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच के लिए उनके विसरा के नमूनो को स्टेट फॉरेंसिक साइंस लैब्रोटरी जयपुर भेजा, जिसकी रिपोर्ट 16वें दिन सामने आ गई और 18वें दिन जोधपुर पुलिस ने इस केस को एक तरह से कनक्लूड कर दिया. पुलिस की मानें तो साध्वी प्रेम बाईसा के साथ ना तो कोई साजिश हुई, ना उनके साथ मौत से पहले कोई सेक्सुअल ऑफेंस हुआ और ना ही उन्होंने खुदकुशी की, बल्कि उनकी मौत की वजह कार्डिएक और पल्मॉनरी अरेस्ट बनी. कार्डियो पल्मनॉरी अरेस्ट से मौत बोले तो दिल की धड़कनों का और सांस लेने की क्रिया रुकने के चलते हुई मौत. पुलिस ने साफ किया कि उन्हें पहले से फेफड़े से संबंधित बीमारी थी, ऐसे में कार्डियो पल्मनॉरी अरेस्ट जानलेवा बन गई.  वैसे तो इस मामले में कई पेच थे, लेकिन सबसे बड़ा पेच साध्वी को मौत से ऐन पहले लगाए गए इंजेक्शन का ही था. क्योंकि सामने आई खबरों के मुताबिक इंजेक्शन लगाए जाने के बाद ही उनकी तबीयत एकाएक बिगड़ी और जब तक उनके पिता और आश्रम के लोग उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, तब तक उनकी जान चली गई. ऐसे में इंजेक्शन में दी गई दवाओं की जांच के साथ-साथ पुलिस के लिए उस कंपाउंडर की भूमिका की पड़ताल भी जरूरी थी. पुलिस ने इस दिशा में जांच की भी और शुरुआती तफ्तीश में उसे कंपाउंडर की लापरवाही का पता चला. आपको याद होगा कि 28 जनवरी को साध्वी की तबीयत बिगड़ने पर जोधपुर के एक कंपाउंडर देवी सिंह राजपुरोहित को आश्रम की ओर से साध्वी के इलाज के लिए बुलाया गया था और तब देवी सिंह दो दवाओं के साथ साध्वी के पास पहुंचा था. साध्वी को ये दवाएं पहले भी दी जाती रही हैं. इन दवाओं में डेक्सोना और डायनापार शामिल हैं, लेकिन गौर करने वाली बात ये है कि से शेड्यूल एच की दवाएं हैं, जिन्हें बिना किसी मेडिकल प्रैक्टिशनर यानी डॉक्टर की इजाजत या देख-रेख के बगैर दिए जाने की मनाही है. इसके बावजूद देवी सिंह राजपुरोहित ने ना सिर्फ साध्वी को इन दो दवाओं का इंजेक्शन दिया, बल्कि वो बगैर किसी प्रैस्क्रिप्शन यानी डॉक्टर की पर्ची के खुद ही ये दवाएं लेकर साध्वी के पास पहुंचा था, जो की एक गैरकानूनी हरकत है. जोधपुर पुलिस ने साफ किया कि कंपाउंडर की लापरवाही को लेकर पुलिस ने नए सिरे से मेडिकल बोर्ड से उनकी राय मांगी है, ताकि ये साफ हो सके कि क्या कपाउंडर देवी सिंह राजपुरोहित की ओर से दिया गया इंजेक्शन ही उनकी मौत की वजह बनी या नहीं? पुलिस ने कहा कि इस मामले में मेडिकल बोर्ड की राय आने के बाद ही देवी सिंह राजपुरोहित के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी. साध्वी को 28 जनवरी को 2 इंजेक्शन लगाए गए थे. डायनापार और डेक्सोना. डायनापार यानी डाइक्लोफिनैक और डेक्सोना यानी डेक्सामेथासोन. तेज दर्द, सूजन, चोट और सर्जरी के बाद होने वाले दर्द से निजात दिलाने वाली ये दवाएं आम तौर पर एक साथ दी जाती हैं. लेकिन इसकी शर्त है कि इन्हें डॉक्टर की निगरानी में ही दिया जाना जरूरी है. क्योंकि इन्हें दी जाने में बरती गई मामूली लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है. एक्सपर्ट बताते हैं कि कभी-कभार एक ही सीरींज से डाइक्लोफिनैक और डेक्सामेथासोन का इंजेक्शन मरीज के लिए खतरनाक कार्डियोवैस्कुलर इवेंट यानी हार्टफेल की वजह बन जाती है. कई बार इन दवाओं से पेट से संबंधी समस्याएं, सिर चकराने, सिर दर्द या इनफेक्शन यानी संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है. यही वजह है कि ये दवाएं सिर्फ डॉक्टर की निगरानी में ही दी जाने की बात कही जाती है. लेकिन साध्वी प्रेम बाईसा के मामले में डॉक्टर की निगरानी वाली बात की अनदेखी की गई. अब सवाल यही है कि क्या साध्वी के शरीर में इन दो दवाओं का रिएक्शन हो गया, जिसके चलती उनकी जान चली गई? पुलिस फिलहाल ये पता लगाने में जुटी है. फिलहाल इंजेक्शन लगाने वाला कपाउंडर बेशक डॉक्टर की पर्ची के मुताबिक ही इंजेक्शन लगाने की बात कह रहा है, लेकिन ये भी सच है कि वो पर्ची पुरानी थी. साध्वी ने 28 जनवरी को किसी डॉक्टर से कोई सलाह नहीं ली थी. अजमेर से प्रोग्राम कर लौटने के बाद जब साध्वी की तबीयत बिगड़ी, तो उन्होंने अपने पिता से ट्रिटमेंट करवा देने की बात कही थी. हालांकि अस्पताल जाने के पिता की पेशकश को उन्होंने ठुकरा दिया था. एफएसएल और हिस्टोपैथोलॉजिकल रिपोर्ट के सामने आने के बाद साध्वी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद बनी असमंजस की स्थिति भी काफी हद तक साफ हो गई है. क्योंकि इन रिपोर्ट में बताया गया है कि साध्वी के शरीर में ना तो अंदरुनी या बाहरी चोट के निशान थे और ना ही उनके शरीर में … Read more

मंगला पशु बीमा योजना में 21 हजार पशुओं का होगा बीमा

जयपुर. राजस्थान में मंगला पशु बीमा योजना पशु पालकों का 'मंगल' कर रही है। प्रथम चरण की कामयाबी के बाद अब इसका दूसरा चरण भी प्रारंभ कर दिया गया है। इस बार भी जिले में 21 हजार पशुओं का बीमा करने का लक्ष्य रखा गया है। राजस्थान सरकार ने छोटे पशुपालकों को पशु हानि से बचाने के लिए मंगला पशु बीमा योजना शुरू की है। इसके तहत पशु पालक 2 बड़े पशु गाय, भैंस अथवा 10 छोटे पशु बकरी भेड़ का निःशुल्क बीमा करवा सकते हैं। योजना के तहत बीमा का लाभ उठाने के लिए पशुपालकों को कोई प्रीमियक शुल्क भी नहीं देना पड़ेगा। जानकारी के अनुसार योजना के तहत पशु के बीमारी, प्राकृतिक आपदा व अन्य कारण से मृत्यु होने जाने पर अधिकतम 40 हजार रुपए की बीमा राशि दी जाती है। लॉटरी में चयनित पशुओं को पशुपालन विभाग हेल्थ सर्टिफिकेट जारी करता है। पहले फेज के दौरान भी विभाग को 21 हजार पशुओं का बीमा करने का लक्ष्य मिला था। जिसके तहत विभाग ने जिले में लगभग 20 हजार पशुओं का रजिस्ट्रेशन भी कराया था, लेकिन इन रजिस्ट्रेशनों में पशु पालकों के गलफत के कारण लगभग 4 से 5 हजार रजिस्ट्रेशन कैंसिल किए गए थे। यानी विभाग गत सीजन 16 हजार पशुओं का ही आंकड़ा प्राप्त कर सका था। जिसमें सबसे ज्यादा 15 हजार 383 पंजीयन भैंसों के किए गए थे। इसके बाद 2 हजार 990 गाय, 2 हजार 103 बकरी और 656 भेड़ों के रजिस्ट्रेशन किए गए थे। अभी तक 36 प्रतिशत ही कार्य गत वर्ष की तरह इस वर्ष भी विभाग को 21 हजार पशुओं का रजिस्ट्रेशन करने का लक्ष्य मिला है। जिसके तहत अभी तक जिले भर में 8,478 पशुओं का रजिस्ट्रेशन हो चुका है। जिसमें धौलपुर ग्रामीण क्षेत्र में 2,073 तो शहरी क्षेत्र में 169 पशुओं का बीमा योजना का लाभ लेने के लिए रजिस्ट्रेशन हो चुका है। इसके अलावा राजखेड़ा में ।,266, सैंपऊ में ।,177, सरमथुरा ग्रामीण में 565 तो शहरी में 46, बसेड़ी में 679, बाड़ी में 1063 मनियां में 33 पशुओं का रजिस्ट्रेशन सहित टोटल 7 हजार 71 पशुओं के पंजीयन कराया गया हैं। देखा जाए तो अभी तक लगभग 36 प्रतिशत ही कार्य हो सका है। मार्च 2026 तक रखी है समय सीमा शासन ने योजना के तहत लक्ष्य को हासिल करने के लिए मार्च तक की समय सीमा रखी है। समय सीमा को देखते हुए पशुओं के रजिस्ट्रेशन का कार्य धीमा ही लग रहा है, लेकिन हर बार की तरह इस बार भी लक्ष्य हासिल नहीं होने पर रजिस्ट्रेशन की समय सीमा को फिर बढ़ा दिया जाएगा, जिससे कि विभाग लक्ष्य को हासिल कर सके। गत वर्ष शुरू हुई मंगला पशु बीमा योजना राज्य सरकार ने मंगला पशु बीमा योजना की शुरुआत गत वर्ष की थी। मंगला पशु बीमा योजना में पशु की अकाल मृत्यु पर जनाधार कार्डधारक पशुपालक को बीमा क्लेम के रूप में 40 हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जाती है। सबसे बड़ी बात यह है कि योजना में पशुपालकों को किसी भी प्रकार का प्रीमियम भी नहीं देना होता है यानी योजना निःशुल्क है। मंगला पशु बीमा योजना का द्वितीय चरण प्रारंभ मंगला पशु बीमा योजना द्वितीय चरण प्रारंभ हो गया है। पहले चरण की तरह इस चरण में भी लक्ष्य को हासिल किया जाएगा। जिससे योजना का लाभ अधिक से अधिक पशुपालकों को मिल सके। डॉ. संतराम मीणा, संयुक्त निदेशक पशु चिकित्सालय धौलपुर

कोटा में 22 बीघा वन भूमि पर बने हिस्ट्रीशीटर के अवैध निर्माण ध्वस्त

कोटा. राजस्थान में अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का सिलसिला जारी है। कोटा शहर में शुक्रवार सुबह वन विभाग और पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए रानपुर थाना क्षेत्र के हिस्ट्रीशीटर कालू भड़क के अवैध अतिक्रमण को बुलडोजर की मदद से ध्वस्त किया। टीम ने वन विभाग की जमीन पर किए गए पक्के और कच्चे निर्माण को हटाया। डीएसपी मनीष शर्मा ने बताया कि हिस्ट्रीशीटर कालू भड़क ने लंबे समय से वन विभाग की करीब 22 बीघा जमीन पर अवैध कब्जा कर रखा था। ​हिस्ट्रीशीटर ने सरकारी जमीन पर मकान, बाड़े और खेती जैसी गतिविधियाँ संचालित कर रही थी। ऐसे में कोटा शहर पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम ने भारी पुलिस जाब्ते की मौजूदगी अतिक्रमण हटाया और सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया। आगे भी जारी रहेगा अभियान उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई से हार्डकोर अपराधियों और अवैध कब्जाधारियों को सख्त संदेश दिया जा रहा है कि कानून सर्वोपरि है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने और माफिया तत्वों पर लगाम कसने के लिए यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। अवैध हथियारों के साथ किया था गिरफ्तार गौरतलब है कि रानपुर थाना पुलिस ने हिस्ट्रीशीटर कालू भड़क को 12 फरवरी को गिरफ्तार किया था। आरोपी के कब्जे से 7 हथियार और 27 जिंदा कारतूस बरामद किए थे। इनमें दो देसी पिस्टल मय मैगजीन, चार अतिरिक्त मैगजीन तथा पांच देसी कट्टे शामिल थे।

राजस्थान के विनोद जाखड़ बने NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष

जयपुर. अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने राजस्थान की छात्र राजनीति के कद्दावर चेहरे विनोद जाखड़ को NSUI का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह न केवल विनोद जाखड़ के लिए, बल्कि पूरे राजस्थान के लिए गौरव का विषय है क्योंकि NSUI के 55 साल के इतिहास में पहली बार है जब कमान राजस्थान के किसी नेता को सौंपी है। विनोद जाखड़ वर्तमान में राजस्थान NSUI के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। प्रदेश अध्यक्ष से राष्ट्रीय अध्यक्ष तक का सफर जनवरी 2024 में विनोद जाखड़ को राजस्थान NSUI का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। उनके कार्यकाल के दौरान: छात्र हितों का संघर्ष: उन्होंने राजस्थान यूनिवर्सिटी में आरएसएस (RSS) के कार्यक्रमों के विरोध से लेकर छात्रसंघ चुनाव बहाली तक कई बड़े आंदोलनों का नेतृत्व किया। जेल और संघर्ष: छात्र हितों की लड़ाई में उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपना संघर्ष जारी रखा। शीर्ष नेतृत्व का भरोसा: राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के 'यूथ विजन' में फिट बैठने के कारण उन्हें अब राष्ट्रीय स्तर पर यह बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। राजस्थान की राजनीति पर क्या होगा असर? विनोद जाखड़ की इस नियुक्ति के कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं: जातीय समीकरण: कांग्रेस ने एक दलित युवा को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर राजस्थान और देश के अन्य राज्यों में दलित वोट बैंक को साधने की कोशिश की है। युवा नेतृत्व: राजस्थान से पहली बार किसी का इस पद पर पहुँचना, प्रदेश के अन्य युवा छात्र नेताओं के लिए दिल्ली के दरवाजे खोलने जैसा है। संघर्ष की कहानी विनोद जाखड़ की कहानी किसी फिल्म की पटकथा से कम नहीं है। जयपुर के पास एक साधारण परिवार में जन्मे विनोद के पिता पेशे से मिस्त्री (प्लास्टर का काम करने वाले) हैं। बचपन का संघर्ष: जब विनोद 7 साल के थे, उनका परिवार काम की तलाश में जयपुर शिफ्ट हो गया। शिक्षा: उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा उसी स्कूल में प्राप्त की जहाँ उनके पिता मजदूरी करते थे। बाद में राजस्थान यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा प्राप्त करते हुए वे छात्र राजनीति में सक्रिय हुए। दलित चेहरा: विनोद जाखड़ एससी (SC) वर्ग से आते हैं और वे राजस्थान कॉलेज के पहले दलित अध्यक्ष भी रह चुके हैं। 2018 की वो 'ऐतिहासिक' जीत विनोद जाखड़ की असली पहचान साल 2018 के राजस्थान यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव से हुई। उस समय NSUI ने विनोद को टिकट नहीं दिया था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरे। उन्होंने न केवल चुनाव जीता बल्कि पूरे प्रदेश की छात्र राजनीति में अपनी साख जमा ली। जीत के बाद वे पुनः कांग्रेस और NSUI के साथ जुड़ गए।  

विवाहिता की गैंगरेप के बाद हत्या के दोषियों को मिली फांसी की सजा

दौसा. दौसा जिले के लालसोट में गैंगरेप के बाद महिला की हत्या के मामले में अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश न्यायालय ने शुक्रवार को दोनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई। मामला करीब चार साल पुराना है। जब विवाहिता ससुराल से पीहर जा रही थी, तभी आरोपियों ने अपहरण के बाद विवाहिता से सामूहिक दुष्कर्म किया और हत्या के बाद शव को कुएं में फेंक दिया था। इससे पहले कोर्ट ने गुरुवार को दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए फैसला सुर​क्षित रखा था। एडीजे ऋतु चौधरी ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए दोनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई। न्यायालय में राज्य पक्ष से नियुक्त विशिष्ट लोक अभियोजक महावीर सिंह ने घटना को जघन्य बताते हुए कड़ी सजा की दलील रखी। बचाव पक्ष ने आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होने का हवाला देते हुए नरमी की अपील की। जज ने फैसला सुनाते हुए पढ़ी ये कविता जज ने फैसला सुनाते हुए कविता पढ़ते हुए कहा कि गूंजती है आज भी फिजा में हजारों सिसकियां, घुट-घुट कर तड़पती हैं इस समाज में बेटियां। किस्सा बलात्कार का आज फिर अखबार में छपेगा, एक बेटी के खून से आज फिर अखबार सनेगा, क्या था कसूर मेरा, क्या बेटी होना ही कसूर था मेरा। कैसे जिए इस समाज में नारी जहां दरिंदे बसते हों, भेड़ियों ने जहां इंसान के चेहरे पहने हों, आखिर कब तक नारी की इज्जत यूं तार-तार होगी, आखिर कब इस समाज की गलियां बेटियों के लिए सुरक्षित होगी। सिर झुकाएं पुलिस के साथ पहुंचे अदालत में अपने ससुराल से पीहर जा रही महिला के साथ एक जघन्य अपराध करने वाले दोनों आरोपियों को गुरुवार को न्यायालय में कड़ी सुरक्षा के बीच पेश किया गया था। इस दौरान दोनो आरोपी सिर झुकाए न्यायालय में पहुंचे और सिर झुकाएं ही खड़े रहे, कुछ देर बाद जब उन्हे दोषी करार दिया तो पुलिस उन्हे वहा से ले गई थी। नाबालिग व सीसीटीवी से खुला मामला घटना 23 अप्रैल 2022 की है। महिला जिले के एक गांव में बस से उत्तरने के बाद लापता हो गई थी। 24 अप्रेल को गुमशुदगी दर्ज हुई। जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज और एक नाबालिग छात्र की जानकारी के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंची। 25 अप्रैल को आरोपी कालूराम की गिरफ्तारी के बाद उसी रात कुएं से शव बरामद किया गया, जबकि दूसरे आरोपी संजू मीना को 26 अप्रैल को पकड़ा गया। विशेष अनुसंधान दल गठित कर जुलाई 2022 में चार्जशीट पेश की गई। 45 गवाहों के बयान और 145 दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। दोनों आरोपी रामगढ़ पचवारा थाना क्षेत्र के सिसोदिया गांव के एक ही परिवार के चाचा ताऊ के लड़के हैं। यूं चला घटनाक्रम 23 अप्रेल 2022 को सुबह मृतक अपने ससुराल से हुई रवाना 23 अप्रेल 2022 को दोपहर 1 बजे सोनड़ मोड़ पर बस से उतरी 24 अप्रेल 2022 को हुआ गुमशुदगी का मामला दर्ज 25 अप्रेल 2022 को एक आरोपी कालूराम मीना गिरफ्तार 25 अप्रेल 2022 की आधी रात्रि को मृतका का शव कुएं से बरामद 26 अप्रेल 2022 को संजू मीना की गिरफ्तारी 4 मई 2022 को हुआ एसआईटी का गठन जुलाई 2022 में न्यायालय में हुई चार्जशीट पेश 19 फरवरी 2026 को दोनों आरोपियों को किया न्यायालय ने दोषी करार 20 फरवरी 2026 को दोनों दोषियों को फांसी की सजा