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कोटा में बाढ़ का पानी घटा, गांवों में हालात होने लगे सामान्य

कोटा राजस्थान के बूंदी जिले के नैनवां, कापरेन और केशोरायपाटन इलाकों में घुसा बाढ़ का पानी जैसे-जैसे कम हो रहा है, ग्रामीण जीवन की टूटी हुई कड़ियों को फिर से जोड़कर उसे पटरी पर लाने में जुट गए हैं। वे अपने भीगे हुए घरेलू सामान, गीले कपड़ों और अनाज को सुखा रहे हैं तथा अपने अपने घरों और दुकानों में बाढ़ के कारण जमा गाद को बाहर निकाल रहे हैं। इस क्षेत्र के किसानों को बाढ़ से भारी नुकसान हुआ है, सोयाबीन, मूंग, उड़द और मक्के की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। नैनवां ब्लॉक में पैबलापुरा बांध के नीचे की ओर स्थित 1,500 से अधिक आबादी वाला डोकुन गांव और पड़ोसी देवरिया गांव सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। शुक्रवार और शनिवार को हुई मूसलाधार बारिश के दौरान बांध का पानी उफनकर अचानक घरों और दुकानों में घुस गया था। डोकुन गांव के निवासी रमेश नागर ने बताया कि बाढ़ का पानी इतनी तेजी से घरों में घुस आया कि लोगों को अपने घरेलू सामान या फसलों को बचाने का भी समय नहीं मिला। उन्होंने बताया कि उनके घरों में रखे गेहूं, सोयाबीन, चना और मूंग से भरे सैकड़ों बोरे पूरी तरह भीगकर खराब हो गए। इस बीच, प्रभावित क्षेत्रों के जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए अब तक कोई सरकारी सहायता नहीं पहुंची है। कांग्रेस की बूंदी जिला इकाई के अध्यक्ष और केशोरायपाटन से विधायक सीएल प्रेमी ने मीडिया को बताया, ‘‘बाढ़ के बाद के हालात केशोरायपाटन, कापरेन और नैनवां क्षेत्रों में सबसे खराब हैं। इन इलाकों के गांवों के लगभग हर घर और दुकान को भारी नुकसान हुआ है। संपत्ति और फसलें नष्ट हो गई हैं, अधिकतर कच्चे मकान ढह गए हैं, मवेशी मर गए हैं। राज्य सरकार को शिकायतों पर ध्यान देना चाहिए और अधिक से अधिक लोगों तक तुरंत राहत पहुंचानी चाहिए।’’ बूंदी के विधायक हरिमोहन शर्मा ने बताया कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्य सरकार ने अब तक बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए कोई मुआवज़ा घोषित नहीं किया है। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन और बाढ़ राहत मानदंडों के तहत निर्धारित सहायता राशि अपर्याप्त है और गांवों में हुए नुकसान को देखते हुए ‘‘यह सागर में एक बूंद के समान है और सहायता के नाम पर एक मजाक है’’। इस बीच, केशोरायपाटन के उप-मंडल अधिकारी (एसडीएम) ऋतुराज शर्मा ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य और नुकसान का सर्वेक्षण जारी है। एसडीएम ने कहा, ‘‘हम जल्द ग्राम पंचायतों में शिविर लगाने जा रहे हैं, ताकि मौके पर ही दस्तावेजों और राहत संबंधी औपचारिकताएं पूरी की जा सकें।’’ उन्होंने बताया कि लोग राहत शिविरों से अपने अपने घर लौट चुके हैं।  

सियासी घमासान के बीच अदालत का हस्तक्षेप, राजस्थान पुलिस भर्ती पर लगा ब्रेक

जयपुर राजस्थान हाईकोर्ट ने गुरुवार, 28 अगस्त 2025 को बहुचर्चित पुलिस उप-निरीक्षक (SI) भर्ती परीक्षा 2021 रद्द कर देने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। इस भर्ती को लेकर लंबे समय से चल रही पेपर लीक और गड़बड़ी की जांच के बाद हाईकोर्ट ने इस निर्णय तक पहुंचा। एसआई भर्ती 2021 मामले की लंबी सुनवाई के बाद फैसला न्यायमूर्ति समीर जैन की खंडपीठ ने 14 अगस्त 2025 को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था। अदालत ने सुनवाई के दौरान बहुत गंभीर रुख अपनाया और कहा कि यह 'साधारण मामला नहीं' है। पेपर लीक और मिलीभगत के खुलासों के बाद अब मिला न्याय! सरकार ने बॉडी के सामने माना कि भर्ती में कुल 68 उम्मीदवारों की मिलीभगत सामने आई थी, जिसमें 54 ट्रेनी SI, 6 चयनित उम्मीदवार तथा 8 फरार उम्मीदवार शामिल थे। आरोपों की गुत्थी सुलझाने के लिए SIT जांच कर रही थी। सरकार और विपक्ष के बीच सियासत, हनुमान बेनीवाल भी सड़कों पर उतरे राज्य सरकार ने अदालत में स्पष्ट किया कि इस स्तर पर भर्ती को रद्द करना उपयुक्त नहीं है। इसके पीछे कारण था कि केवल कुछ ही उम्मीदवार आरोपों की गिरफ्त में हैं, और शेष अधिकांश उम्मीदवार निष्कलंक हैं। कैबिनेट उप-समिति ने भी भर्ती जारी रखने की सिफारिश की थी, जिसे मुख्यमंत्री की ओर से अनुमोदित किया गया। नागौर से RLP सांसद हनुमान बेनीवाल ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि भर्ती रद्द नहीं की गई क्योंकि 'सरकार को इसका श्रेय नहीं मिलेगा।' उन्होंने दिल्ली कूच करने वाली युवाओं के आंदोलन का समर्थन किया। अदालत में अंतिम दलीलों की सुनवाई 2 अगस्त 2025 को हुई थी, जिसमें याचिकाकर्ताओं ने भर्ती प्रक्रिया में सुरक्षा की विफलता और प्रक्रिया की ईमानदारी पर सवाल उठाए थे। कोर्ट ने कहा कि गलत तरीके से चुने गए उम्मीदवारों को बरकरार रखना कानून-व्यवस्था की दृष्टि से खतरनाक हो सकता है।

पैलेस ऑन व्हील्स का नया अध्याय: निजी कंपनी करेगी संचालन, स्वर्णनगरी में 21 सितंबर को होगा आगमन

जयपुर देश की विभिन्न शाही रेलों में सबसे चर्चित और लोकप्रिय लग्जरी ट्रेन पैलेस ऑन व्हील इस सीजन की पहली यात्रा पर 21 सितंबर को जैसलमेर पहुंचेगी। यह ट्रेन 17 सितंबर को दिल्ली के सफदरजंग रेलवे स्टेशन से रवाना होकर जयपुर, सवाई माधोपुर, चित्तौड़गढ़ और उदयपुर होते हुए रविवार सुबह जैसलमेर पहुंचेगी। 26 जनवरी 1982 को शुरू हुई पैलेस ऑन व्हील का 41 साल बाद दो साल पहले निजीकरण कर दिया गया है। पहले रेलवे इसके संचालन और नवीनीकरण का जिम्मा संभालता था, लेकिन यात्रियों की घटती संख्या और लगातार घाटे के बाद अब इसकी कमान निजी कंपनी को सौंप दी गई है। ट्रेन को इस सीजन के लिए नया कलेवर दिया गया है। 41 बाथरूमों का रेनोवेशन किया गया है, बायो-टॉयलेट्स लगाए गए हैं, फर्नीचर और लाइटिंग बदली गई है तथा स्थानीय व्यंजनों को खाने के मेन्यू में शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य सैलानियों को एक बार फिर से शाही रेल का शाही अनुभव देना है। पैलेस ऑन व्हील की यात्रा हमेशा से विदेशी सैलानियों की पहली पसंद रही है लेकिन महंगे किराए और कोविड के प्रभाव से यात्रियों की संख्या लगातार गिरती गई। पांच साल पहले पूरे सीजन में केवल 3500 यात्री ही इसमें सवार हुए। कोविड से ठीक पहले यह संख्या 2500 से भी नीचे चली गई थी। स्थिति और बिगड़ने पर इसे दो साल तक बंद करना पड़ा। 2022 में इसे फिर से शुरू किया गया, लेकिन पूरे सीजन में केवल 11 फेरे ही हो पाए। इस बार निजी कंपनी के हाथों में संचालन सौंपने के बाद ट्रेन 33 फेरे करेगी। उम्मीद है कि बदलाव और नए शाही लुक के साथ पैलेस ऑन व्हील का पुराना आकर्षण एक बार फिर लौटेगा।

पार्टी लाइन से हटकर बोलना पड़ा भारी, विधायक चौधरी पर कार्रवाई के संकेत

जयपुर डीग जिले की कामां विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी विधायक नौक्षम चौधरी पर उनके विवादित बयान को लेकर पार्टी ने सख्ती दिखाई है। विधायक द्वारा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में "कांग्रेस प्रधान को हटाकर बीजेपी समर्थित प्रधान बनाने" की बात कहे जाने के बाद बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने उनसे स्पष्टीकरण मांगा है। नोक्षम का बयान सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कांग्रेस ने इसे मुद्दा बना लिया। कांग्रेस विधानसभा में इस बयान को भुनाएगी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी इसे लेकर बयान जारी किया। डोटासरा ने कहा-  'जो बात कांग्रेस पार्टी कह रही है उसकी साक्ष्य खुद सत्ताधारी दल की विधायक दे रही हैं। कामां से भाजपा विधायक नौक्षम चौधरी जी ने स्वीकार किया है कि भरतपुर में कांग्रेस से जुड़े प्रधानों को मनगढ़ंत आरोप लगाकर पद से हटाया है और नियमों को ताक पर रखकर बहुमत के खिलाफ उनकी जगह भाजपा से जुड़े प्रधानों को बैठा दिया गया। इसका साफ मतलब है कि भाजपा ने राजनीतिक दुर्भावना से कार्रवाई करते हुए जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों को सत्ता के दुरुपयोग से हटाया गया। भाजपा ने संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था की खुलेआम हत्या की है।'  कांग्रेस इसे विधानसभा में भी मुद्दा बनाने की तैयारी कर चुकी है। बीजेपी अध्यक्ष बोले यह हमारी परंपरा नहीं बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने इस मुद्दे पर कहा, "भाजपा की परंपरा चुने हुए जनप्रतिनिधियों को हटाने की नहीं रही है, यह कांग्रेस की कार्यशैली रही है। विधायक से इस बयान पर जवाब तलब किया गया है। उन्हें बुलाया गया है, वे आकर अपना पक्ष रखेंगी।" क्या कहा था विधायक ने? कामां विधायक नौक्षम चौधरी ने कामां और पहाड़ी पंचायत समितियों में बीजेपी प्रधान बनने के बाद प्रेस वार्ता की थी। इसमें उन्होंने बिना नाम लिए पार्टी के एक मंत्री पर भी सवाल उठाए और कहा, "नगर पंचायत में कांग्रेस का प्रधान क्यों है? बीजेपी समर्थित कार्यकर्ता को प्रधान बनाइए, ताकि हम भी कह सकें कि कांग्रेस का प्रधान हटाकर बीजेपी का बनाया गया है।" पार्टी कर सकती है अनुशासनात्मक कार्रवाई बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने इस बयान को गंभीरता से लिया है और संकेत दिए हैं कि यदि विधायक का जवाब असंतोषजनक रहा तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।  

विधायकी पर लटकी तलवार! जयकृष्ण पटेल के खिलाफ सिफारिश संभव

जयपुर राजस्थान विधानसभा में  सवाल वापस लेने के बदले रिश्वत मांगने के मामले में एसीबी द्वारा रंगे हाथ गिरफ्तार किए गए भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के बागीदौरा विधायक जयकृष्ण पटेल के खिलाफ विधानसभा की सदाचार समिति ने जांच पूरी हो चुकी है। समिति अपनी रिपोर्ट आज दोपहर 2 बजे विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी को सौंपेगी। सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में विधायक की सदस्यता रद्द करने तक की सिफारिश की जा सकती है। 1 सितंबर से शुरू हो रहे सत्र में पेश होगी रिपोर्ट सदाचार समिति की यह रिपोर्ट आगामी 1 सितंबर से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र में रखी जाएगी। इसके बाद सदन की सिफारिश के आधार पर स्पीकर देवानी पटेल की सदस्यता के संबंध में कोई निर्णय ले सकते हैं। पहली बार किसी विधायक को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया जयकृष्ण पटेल को राजस्थान एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने उनके घर से 20 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। बताया गया कि उन्होंने खनन विभाग से जुड़े सवालों को विधानसभा से वापस लेने के लिए 10 करोड़ रुपये की मांग की थी। सौदेबाज़ी के दौरान वे 20 लाख रुपये ले रहे थे, तभी एसीबी ने उन्हें ट्रैप कर लिया। यह राजस्थान के इतिहास में पहली बार है जब किसी विधायक को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। स्पीकर ने सदाचार कमेटी को सौंपी थी जांच गिरफ्तारी के बाद विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने मामला सदाचार समिति को सौंपा था। इस कमेटी ने पूरे मामले की गहन जांच करते हुए एसीबी, संबंधित एजेंसियों और खुद विधायक का पक्ष भी शामिल किया। अब रिपोर्ट अंतिम चरण में पहुंच गई है। विधायकी रद्द होने पर क्या होगा? अगर सदाचार समिति की रिपोर्ट में जयकृष्ण पटेल को गंभीर दुराचार का दोषी ठहराया जाता है और विधायकी समाप्त करने की सिफारिश की जाती है, तो इसे विधानसभा में रखकर वोटिंग कराई जाएगी। इसके बाद सदन बहुमत से निर्णय लेगा।  

आवारा कुत्तों को लेकर बड़ा फैसला, 6 महीने से कम उम्र के पिल्लों पर नसबंदी नहीं

जयपुर राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को आधार मानते हुए आवारा कुत्तों के मानवीय प्रबंधन हेतु नई 13 सूत्री गाइड लाइन जारी की है। स्वायत्त शासन विभाग ने इसे सभी नगरीय निकायों में 30 दिनों के भीतर लागू करने के निर्देश दिए हैं। नियमों के अनुसार अब राज्य में 6 महीने से छोटे कुत्तों की नसबंदी नहीं की जाएगी। इसी तरह दूध पिलाने वाली मादा को तब तक पकड़ने पर रोक रहेगी, जब तक उनके पिल्ले प्राकृतिक रूप से दूध छोड़ न दें। गाइड लाइन में स्पष्ट किया गया है कि कुत्तों को पकड़ने के लिए तार, फंदा या टोंग्स का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। केवल प्रशिक्षित कर्मचारी ही कुत्तों को सुरक्षित जाल या हाथ से पकड़ सकेंगे। प्रत्येक वार्ड में निर्धारित भोजन स्थल बनाए जाएंगे। इसके अलावा नसबंदी केंद्रों का नवीनीकरण और नई सुविधाओं जैसे टीकाकरण और डीवार्मिंग की व्यवस्था होगी। कुत्तों को पकड़ने और देखभाल का जिम्मा केवल एडब्ल्यूबीआई से मान्यता प्राप्त एनजीओ को दिया जाएगा, जिन्हें प्रति कुत्ता 200 से 1450 रुपए तक भुगतान होगा। हर नगर निकाय में निगरानी समिति बनाई जाएगी, जिसमें पशु कार्यकर्ता की मौजूदगी अनिवार्य होगी। सभी प्रक्रियाओं की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और 30 दिन का फुटेज रखना होगा। बीमार या घायल कुत्तों का पहले इलाज किया जाएगा, उसके बाद ही नसबंदी होगी। यूडीएच शासन सचिव रवि जैन ने कहा कि यह नीति लोगों की सुरक्षा और पशु कल्याण दोनों को संतुलित करेगी। उल्लंघन करने पर पशु जन्म नियंत्रण नियम 2003 के तहत कार्रवाई होगी। नई गाइड लाइन से राज्य में आवारा कुत्तों के प्रति मानवीय व्यवहार और जनता की सुरक्षा दोनों को मजबूती मिलेगी।

सरकारी स्कूल में मचा हड़कंप! 10 फीट लंबा मगरमच्छ मिला, बच्चों में दहशत

चित्तौड़गढ़ जिले के गंगरार उपखंड क्षेत्र के सुवानियां गांव के राजकीय विद्यालय में मंगलवार दोपहर करीब 10 फीट लंबा मगरमच्छ घुस आया। सूचना मिलने पर वन विभाग और वन्यजीव प्रेमियों की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। हालांकि स्कूल परिसर में दो से तीन फीट ऊंची घास होने के कारण अभियान में काफी दिक्कत आई। करीब दो से ढाई घंटे की मशक्कत के बाद मगरमच्छ को सुरक्षित पकड़ा गया और बस्सी बांध में छोड़ दिया गया। गनीमत रही कि उस समय स्कूल में छुट्टी हो चुकी थी, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। जानकारी के अनुसार सुवानियां गांव के पास से बहने वाली बेड़च नदी से यह मगरमच्छ गांव तक पहुंच गया था। दोपहर बाद ग्रामीणों ने इसे स्कूल में देखा तो तुरंत सरपंच गोपाललाल गाडरी ने उपवन संरक्षक राहुल झांझड़िया को सूचना दी। निर्देश पर नाथू सिंह के नेतृत्व में वन विभाग की टीम और वन्यजीव प्रेमी मौके पर पहुंचे। संयुक्त टीम ने निरीक्षण किया तो पता चला कि मगरमच्छ स्कूल भवन की बजाय मैदान की तरफ घास में छिपा बैठा है। रेस्क्यू टीम के सदस्य दीवार पर चढ़कर निगरानी कर रहे थे, तभी मगरमच्छ दिखाई दिया। टीम को देखते ही वह हमला करने की स्थिति में आ गया। बड़ी सावधानी से उसे पकड़ा गया और देर शाम बस्सी बांध में छोड़ा गया। वन्यजीव प्रेमी मनीष तिवारी ने बताया कि मगरमच्छ घास में फंस जाने के कारण बाहर नहीं निकल पाया। यदि वह छिपा रह जाता तो अगले दिन बच्चों या स्टाफ के लिए बड़ा खतरा बन सकता था। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी बेड़च नदी से मगरमच्छ निकलकर सुवानियां गांव में आ चुके हैं। करीब एक माह पहले यहां से दो मगरमच्छ रेस्क्यू किए गए थे।

अब कफ सिरप खरीदना हुआ मुश्किल, फोन नंबर दर्ज करना होगा जरूरी

जयपुर राजस्थान में टीबी  यानी क्षय रोग के मरीजों की वास्तविक संख्या सरकार कागजों में रजिस्टर्ड टीबी के मरीजों के आंकड़े से कहीं ज्यादा है। यह चौंकाने वाली जानकारी  इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के सर्वे में सामने आई है। यहां टीबी के इलाज के लिए लोग बड़ी संख्या में कफ सिरप काम में ले रहे हैं। जबकि इस बीमारी का इलाज लंबे समय तक चलता है और विशेष प्रकार की दवाइयां इस रोग  को खत्म करने के लिए उपयोग में लाई जाती है। ऐसे में अब राजस्थान में टीबी के मरीजों की असल संख्या जानने के लिए ICMR की तरफ से एक पॉयलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है।  इस प्रोजेक्ट के तहत सर्वे कराया जा रहा है,जिसमें मरीजों को दिए जाने वाले कफ सिरप से टीबी की संभावना का पता लगाया जाएगा।  राजस्थान में इस प्रोजेक्ट पर काम कर रही डॉ कलिका का कहना है की इस प्रोजेक्ट में पहले फेज में राजस्थान के 33 जिलों से कफ सिरप का डेटा तैयार किया जा रहा है ताकि पता लग सके कि कफ सिरप की बिक्री कितनी मात्रा में हो रही है,यह डेटा प्रदेश के लगभग सभी मेडिकल स्टोर से जुटाया जा रहा है,इसमें चिकित्सा विभाग का ड्रग डिपार्टमेंट सक्रिय भूमिका निभा रहा है, टीबी नियंत्रण कार्यक्रम के लिए यह कदम अहम माना जा रहा है, क्योंकि प्रदेश में अब भी बड़ी संख्या में मरीज या तो देर से रिपोर्ट करते हैं या फिर अपनी बीमारी को छुपा रहे है और इसके कारण संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। 7 गुना ज्यादा डॉ कलिका ने बताया कि जब हमने सर्वे किया तो सामने आया कि बड़ी संख्या में ऐसे लोग है जो कफ सिरप खरीद रहे हैं। उन्होंने कहा की राजस्थान में जितने टीबी के रजिस्टर्ड मरीज है उनसे सात गुना ज्यादा संख्या टीबी मरीजों की है, और यह कफ सिरप की की खरीद के आंकड़ों से सामने आया है। सर्वे में पता चला है कि  मेडिकल स्टोर्स पर कफ सीरप की खपत बहुत ज़्यादा बढ़ गई है,इसे लेकर चिकित्सा विभाग के ड्रग डिपार्टमेंट के साथ मिलकर टीबी के मरीजों की पहचान की जाएगी, राजस्थान में प्रोजेक्ट सफल रहने पर  ICMR  इसे पूरे देश में चलाएगा । कफ सिरप के लिए अब देना होगा मरीज को फोन नम्बर एड्रेस मामले को लेकर राजस्थान के ड्रग कंट्रोलर राजा राम शर्मा का कहना है कि ICMR के साथ मिलकर टीबी रोगियों की पहचान की जाएगी, इसे लेकर डिपार्टमेंट एक आदेश जारी करने जा रहा है जिसके तहत मेडिकल स्टोर्स से कफ सिरप खरीद करने वालो का रिकॉर्ड रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि जयपुर से पायलेट प्रोजेक्ट की शुरुआत हो रही है। अब  कफ सिरप की खरीद करने पर मरीज को फोन नम्बर एड्रेस देना होगा। इसके लिए प्रदेश की मेडिकल स्टोर्स को भी निर्देश जारी किए जाएगे। राजस्थान में फिलहाल करीब 60 हजार मेडिकल स्टोर्स हैं।  राजाराम शर्मा का कहना है की इसको लेकर तैयारी शुरू कर दी गई है,प्रदेश में टीबी को ख़त्म करने के लिए चिकित्सा लगातार प्रयास कर रहा है इसे लेकर ड्रग विभाग के अधिकारियो को ट्रेनिंग भी दी जाएगी, एक बार रिकॉर्ड मिलने के बाद ऐसे मरीज़ों के घर जाकर स्क्रीनिंग की जाएगी और उसके सैंपल लिए जाएंगे जानकारी नहीं दे रहे मरीज हाल ही में चिकित्सा विभाग द्वारा टीबी मुक्त ग्राम पंचायत अभियान के तहत वर्ष 2024 में राजस्थान की 3,355 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया है, जबकि वर्ष 2023 में यह संख्या 586 थी। लेकिन फिर भी टीबी जैसी गंभीर बीमारी के बारे में अभी भी लोग जानकारी नहीं दे रहे हैं।  लोग सीधे मेडिकल स्टोर से कफ सिरप ख़रीद कर बीमारी का इलाज करने का प्रयास कर रहे हैं। जबकि इस बीमारी का इलाज लंबे समय तक चलता है और विशेष प्रकार की दवाइयां इस रोग  को खत्म करने के लिए उपयोग में लाई जाती है। टीबी बीमारी क्या है टीबी यानि क्षय रोग एक संक्रामक रोग है, जो कीटाणु के कारण होता है। टीबी बैक्टीरिया से संक्रमित लोगों को टीबी से बीमार होने का जोखिम जीवन भर 5-10% रहता है।टीबी के लक्षणों की बात करें तो * तीन सप्ताह से ज्यादा खांसी * बुखार विशेष तौर से शाम को बढने वाला बुखार * छाती में दर्द * वजन का घटना * भूख में कमी * बलगम के साथ खून आना टीबी होने के कारण * धूम्रपान करना * वायु प्रदुषण के कारण * कुपोषित या ऐसे लोग जिनकी इम्युनिटी कमजोर है * जिन्हें मधुमेह है * एचआईवी और एड्स ग्रसित मरीजों को अन्य अंगो को प्रभावित टी.बी रोग विशेषकर (85 प्रतशित) फेंफडों को ग्रसित करता है।  करीब 15 प्रतिशत मामलों में शरीर के अन्य अंग जैसे, मस्तिष्क,  आंतें,  गुर्दे,  हड्डी व जोड इत्यादि भी रोग से ग्रसित होते हैं। टीबी रोग के निदान के लिये एक्स-रे करवाना, बलगम की जांच करवाना होता है। कई मामलों में इसकी जांच के लिए एक्स-रे व अन्य जॉंच जैसे FNAC, Biopsy, CT Scan की आवश्यकता हो सकती है।

राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े की सख्ती: बीकानेर-जोधपुर विश्वविद्यालय के कुलगुरु को हटाया

जयपुर बीकानेर-जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ अरुण कुमार को बर्खास्त कर दिया गया है। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने बर्खास्तगी का आदेश जारी किया है। डॉ कुमार पर शक्तियों के दुरुपयोग का आरोप साबित हुआ है। जांच में निधि का दुरुपयोग और अवैधानिक नियुक्तियां उजागर हुई हैं। डॉ. अरुण कुमार के विरुद्ध काफी समय से शिकायतें आ रही थीं। इसके बाद उनकी जांच के लिए संभागीय आयुक्त, जोधपुर को निर्देशित किया गया था। संभागीय आयुक्त, जोधपुर द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन में डॉ. अरुण कुमार द्वारा के विरूद्ध  अधिनियम के प्रावधानों का कार्यान्वयन करने में जानबूझकर लोप करने, प्रदत्त शक्तियों का दुरूपयोग करने, विश्वविद्यालय को वित्तीय हानि पहुंचाने आदि के कृत्य प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाये गये। किसी विश्वविद्यालय के कुलपति को कैसे बर्खास्त किया जा सकता है? किसी कुलपति के खिलाफ भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता, कदाचार, या प्रशासनिक लापरवाही जैसे गंभीर आरोप लगाए जाते हैं तो कुलपति को नियमानुसार जांच करवाकर हटाया जा सकता है। शिकायतें छात्रों, कर्मचारियों, या अन्य हितधारकों द्वारा विश्वविद्यालय प्रशासन, राज्य सरकार, या राज्यपाल (जो विश्वविद्यालय के कुलाधिपति होते हैं) को लिखित रूप में की जा सकती हैं और कुलपति के खिलाफ कार्रवाई की दिशा में कदम बठाया जा सकता है।  शिकायत मिलने पर, राज्यपाल या विश्वविद्यालय के कुलाधिपति के निर्देश पर प्रारंभिक जांच शुरू की जाती है। यदि प्रारंभिक जांच में आरोपों में सत्यता पाई जाती है, तो एक औपचारिक जांच समिति गठित की जा सकती है। जांच समिति अपनी रिपोर्ट कुलाधिपति (राज्यपाल) को सौंपती है। यदि कुलपति दोषी पाए जाते हैं, तो समिति बर्खास्तगी या निलंबन की सिफारिश कर सकती है।

हाहाकार: राजस्थान की नदियों में बह गए 15 लोग, बचाव कार्य चल रहा, 10 लोग डूबने की आशंका

जयपुर  राजस्थान में चितौड़गढ़ और जालोर जिले में एक साथ दो बड़े हादसे हो गए हैं. यहां बनास और सूकड़ी नदी में 15 लोग बह गए हैं. इनमें से पांच लोगों को बच गए हैं. लेकिन 10 लोग अभी लापता हैं. उनके नदियों डूब जाने की आशंका है. नदियों में समाए इन लोगों की तलाश के लिए दोनों ही जगह रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है. लेकिन लापता लोगों का अभी तक कोई सुराग नहीं लग पाया है. पुलिस प्रशासन रेस्क्यू टीमों के साथ वहां डेरा जमाए हुए बैठा है. दोनों ही घटनास्थलों पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा है. लापता हुए लोगों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो रखा है. जानकारी के अनुसार पहला हादसा मंगलवार देर शाम को जालोर के सायला थाना इलाके में हुआ. हाल ही में हुई जोरदार बारिश के कारण इलाके के आसाणा गांव के पास से गुजर रही सुकड़ी नदी में पानी का बहाव जोरों पर था. उस समय कुछ लोगों को नदी किनारे एक बोलेरो खड़ी दिखाई दी. इस गाड़ी के पास छह जोड़ी चप्पल और जूते पड़े हुए थे. इस पर लोगों को आशंका हुई तो उन्होंने पुलिस प्रशासन को सूचना दी. सूचना पर वह एसडीएम, तहसीलदार और थाना पुलिस मौके पर पहुंची. ग्रामीणों ने आशंका जताई कि जीप सवार लोग संभवतया नहाने के लिए नदी में उतरे थे लेकिन वापस नहीं निकल पाए. 5-6 लोगों को नदी में उतरते हुए दिखे थे जीप काफी समय से खड़ी हुई और कोई इसे लेने नहीं आया. प्रशासन ने जब इसकी जांच पड़ताल की तो पता चला कि एक ग्रामीण ने 5-6 लोगों को नदी में उतरते हुए भी देखा था. जांच में सामने आया कि आसाणा गांव के 6 लोग लापता हैं. इस पर प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया. उसके बाद रात साढ़े आठ बजे रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया. यह ऑपरेशन मंगलवार को रातभर चला. लेकिन किसी का कोई भी सुराग नहीं लग पाया है. ऑपरेशन अभी चल रहा है. बनास नदी में बह गई कार दूसरा हादसा मंगलवार आधी रात को चित्तौड़गढ़ जिले के राशमी इलाके में बनास नदी में हुआ. वहां एक वेगन आर कार बनास नदी में बह गई. इस कार में 9 लोग सवार थे. उनमें से पांच लोग तो जैसे-तैसे करके बाहर आ गए लेकिन चार लोग नदी में बह गए. नदी में बहने वालो में दो बच्चे और दो महिला शामिल बताई जा रही है. यह हादसा उपरेड़ा सेमी मार्ग पर बहने वाली पुलिया पर हुआ. यहां भी हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचा. उसने गोताखोरों की मदद से लापता हुए चार लोगों को ढूंढ़ने का प्रयास किया. लेकिन उनका बुधवार को सुबह तक कोई सुराग नहीं लग पाया है. सवाई भोज कार्यक्रम में शामिल होकर लौट रहे थे लोग बताया जा रहा है कि भारी बारिश के कारण मातृकुण्डिया बांध के गेट खोले जाने से बनास नदी में उफान आया हुआ था. उसकी उफान में यह कार बह गई. कार सवार लोग भीलवाड़ा से भूपाल सागर के काना खेड़ी जा रहे थे. काना खेड़ा गांव का यह भीलवाड़ा के सवाई भोज में धार्मिक कार्यक्रम में भाग लेने गया हुआ था. वहां से आधी रात को वापस अपने गांव लौट रहे थे. उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं लग पाया कि पुलिया पर पानी कितना है और उन्होंने उस पर कार को चढ़ा दिया. बहरहाल यहां भी रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है.