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चोरी करने घुसा था एग्जॉस्ट फैन से, बीच में फंसा चोर; पुलिस ने किया रेस्क्यू

कोटा आपने यह कहावत तो खूब सुनी होगी कि आसमान से गिरा खजूर में अटका। राजस्थान के कोटा में हुई हालिया घटना पर यह एकदम मुफीद बैठती है। कोटा के एक घर में चोर को चोरी करना महंगा पड़ गया या कहिए चोर की गजब बेइज्जती हो गई। घुसा तो चोरी के बहाने ही लेकिन जिस जगह से घुसा वही उसके लिए मुसीबत बन गई। सूने घर को साफ करने का मंसूबा एग्जॉस्ट फैन के छेद ने पूरा नहीं होने दिया और वह उस छेद में ऐसा फंसा कि निकल ही नहीं पाया। बाद में घरवालों ने पुलिस को बुलाकर उसे इस छेद से बाहर निकाला। अब चोरी की ये अनोखी घटना सोशल मीडिया पर वायरल है।   पूरी घटना जानिए अब घटना को पूरी तफ्शील से जानते हैं। कोटा में रहने वाले सुभाष कुमार रावत ने बताया कि वह पत्नी के साथ 3 जनवरी को खाटू श्याम जी दर्शन करने के लिए गए थे और 4 जनवरी की रात को घर लौटे। जब सुभाष स्कूटी लेकर घर के अंदर जा रहे थे तभी उसकी रोशनी में रसोई के एग्जॉस्ट के छेद में एक व्यक्ति फंसा हुआ दिखाई दिया। इसके बाद उन्होंने शोर मचाना शुरू कर दिया। शोर-शराबे की आवाज सुनकर एक चोर तो मौके से भाग गया पर उसका साथी एग्जॉस्ट में फंस गया। एक कार भी बाहर खड़ी थी जिसमें पुलिस का स्टीकर लगा हुआ था। शोर शराबा सुनकर आस-पड़ोस के लोग जाग गए और घर में घुसकर चोर को रंगे हाथों पकड़ लिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में आए दिन संदिग्ध व्यक्ति घूमते हुए नजर आते हैं। इस मामले में बोरखेड़ा थाने में शिकायत दर्ज करवाई गई है वहीं पुलिस ने मामला दर्ज कर शुरू कर दी है। पुलिस की लापरवाही पर लोगों की नाराजगी स्थानीय लोगों ने पुलिस की लापरवाही पर भी अपनी नाराजगी जताई है। लोगों का कहना है कि कई बार इस इलाके में गश्त के लिए पुलिस से अपील की गई, लेकिन उसके बावजूद भी यहां पर पुलिस की गाड़ियां नहीं आती है। आज सतर्कता की वजह से एक घर में बड़ी चोरी होने से बच गई। चोरी की वारदातें कोटा शहर में लगातार बढ़ रही है।

एक साल में 10 लाख AI एक्सपर्ट! केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया मेगा प्लान

जयपुर भारत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को आम नागरिक तक पहुंचाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राजस्थान से एक मेगा स्किलिंग अभियान की शुरुआत की, जिसका लक्ष्य मात्र एक वर्ष में देश के 10 लाख युवाओं को एआई कौशल प्रदान करना है। यह कार्यक्रम न केवल युवाओं को रोजगार योग्य बनाएगा, बल्कि छोटे व्यवसायों में उत्पादकता बढ़ाने और दैनिक जीवन में एआई के उपयोग को बढ़ावा देगा। मंत्री ने कहा कि तेजी से हो रहे 5G रोलआउट की तरह ही सेमीकंडक्टर क्षेत्र में प्रतिभा विकास और एआई कौशल विकास का काम भी उतनी ही तेजी से होगा।   मंत्री ने एआई की तुलना बिजली से की राजस्थान क्षेत्रीय एआई इम्पैक्ट सम्मेलन को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए मंत्री वैष्णव ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रोजमर्रा की जिंदगी का एक अभिन्न अंग बन गई है, ठीक उसी तरह जैसे कंप्यूटर, सेमीकंडक्टर, इंटरनेट और मोबाइल फोन द्वारा संचालित पिछली तकनीकी क्रांतियां थीं। उन्होंने कहा कि एआई एक समान पैमाने के परिवर्तन का प्रतिनिधित्व करता है, और इसकी भविष्य की भूमिका की तुलना बिजली से की, जिसने एक समय में हर घर और व्यक्ति तक पहुंचकर समाजों को नया रूप दिया था। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सर्वव्यापी होने वाली है और हर व्यक्ति, घर और इमारत तक पहुंचेगी। इसके संभावित लाभों पर जोर देते हुए मंत्री ने कहा कि इस तकनीकी बदलाव को अपनाना चाहिए और इसे दैनिक जीवन में एकीकृत करना चाहिए। भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रति दृष्टिकोण के बारे में बात करते हुए मंत्री वैष्णव ने कहा कि प्रधानमंत्री का एक स्पष्ट और सुस्पष्ट दृष्टिकोण है, जो समाज के व्यापक हित के लिए एआई के उपयोग पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि इस दृष्टिकोण का पहला मार्गदर्शक सिद्धांत एआई का लोकतंत्रीकरण है, यह सुनिश्चित करना कि प्रत्येक नागरिक को प्रौद्योगिकी तक पहुंच और इसके उपयोग का समान अवसर प्राप्त हो। भारत के एआई मिशन को मिल चुकी है वैश्विक मान्यता मंत्री ने कहा कि भारत के एआई मिशन को वैश्विक मान्यता मिल चुकी है और कई देश कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लोकतंत्रीकरण के भारत के मॉडल का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस मिशन का एक प्रमुख स्तंभ किफायती कंप्यूटिंग अवसंरचना उपलब्ध कराना है। जीपीयू की उच्च लागत पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि हर किसी के लिए इतने महंगे संसाधनों का मालिक होना संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि कई पश्चिमी देशों में, बड़ी-बड़ी कंपनियां 3.50 से 4 अमेरिकी डॉलर प्रति घंटे की दर से सेवाएं प्रदान करके एआई कंप्यूटिंग पर अपना दबदबा बनाए हुए हैं। इसके विपरीत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में उच्च गुणवत्ता वाली कंप्यूटिंग सुविधाओं को बहुत कम लागत पर उपलब्ध कराने का विचार प्रस्तुत किया है। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्र, स्टार्टअप, युवा, वैज्ञानिक और इंजीनियर वित्तीय बाधाओं के बिना विश्व स्तरीय कंप्यूटिंग संसाधनों का उपयोग कर सकें। मंत्री वैष्णव ने कहा कि एआई मिशन के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लोकतंत्रीकरण को समर्थन देने के लिए 38000 जीपीयू पहले ही उपलब्ध कराए जा चुके हैं। उन्होंने इस पहल को 'कॉमन कंप्यूट' की परिकल्पना बताया। उन्होंने स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के नवीनतम एआई इंडेक्स का भी हवाला दिया, जिसमें भारत को चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता में शीर्ष तीन देशों में स्थान दिया गया है। मंत्री वैष्णव के अनुसार, यह इंडेक्स एआई के विकास, तैनाती और अनुसंधान में हुई प्रगति का मूल्यांकन करता है।  

स्टार्टअप को बढ़ावा देने पर जोर, प्रदेश में नवाचार का माहौल बना रही सरकार : भजनलाल शर्मा

जयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वर्तमान सदी में मानवता के लिए एक नया कोड-एक नई भाषा लिख रहा है। उन्होंने एआई को प्रदेश की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण घटक बताते हुए कहा कि इसके विवेकपूर्ण उपयोग से सरकार ई-गवर्नेंस और डिजिटल समावेशन को और अधिक व्यापक एवं जन केन्द्रित बना रही है। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को जयपुर के जेईसीसी में आयोजित राजस्थान रीजनल एआई इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस 2026 के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि एआई स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि सहित अनेक क्षेत्रों में परिवर्तन लाकर लोगों के जीवन को बेहतर बना रहा है और विकसित भारत एवं विकसित राजस्थान के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक सिद्ध होगा। उन्होंने उद्यमियों, निवेशकों और युवाओं को एआई के उभरते क्षेत्र में सहभागी बनने के लिए राजस्थान में आमंत्रित भी किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में देश एआई के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रधानमंत्री का मानना है कि एआई केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि 21वीं सदी में राष्ट्रीय शक्ति और समृद्धि का आधार है। एआई देश की नीति, अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और सामाजिक संरचना को बेहतर स्वरूप दे रहा है। एआई-एमएल पॉलिसी से नवाचार को बढ़ावा मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में तकनीक और स्टार्टअप के सशक्त इकोसिस्टम के निर्माण के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है। राज्य सरकार द्वारा लाई गई एआई-एमएल पॉलिसी से एआई सिस्टम अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और निजता-संरक्षण के प्रति जवाबदेह बनेंगे। इस नीति से सार्वजनिक सेवा वितरण अधिक त्वरित, नागरिक-केंद्रित और पारदर्शी होगा तथा प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि एआई से जुड़े साइबर अपराधों की रिपोर्टिंग और समाधान की प्रक्रिया सरल की जाएगी, प्रदेश में एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित होगा तथा स्कूलों, आईटीआई, पॉलिटेक्निक और कॉलेजों में एआई शिक्षा को प्रोत्साहन दिया जाएगा। उद्योग, स्टार्टअप और रिसर्च संस्थानों को भी विशेष प्रोत्साहन प्रदान किए जाएंगे। 5 हजार युवाओं को कौशल प्रशिक्षण, राजस्थान में डेटा सेंटर की स्थापना केन्द्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा करते हुए कहा कि राजस्थान में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए उद्योग संगठनों के सहयोग से नए प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। इसके तहत राज्य में 5 हजार युवाओं को कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही, आने वाले समय में राजस्थान में डेटा सेंटर स्थापित किया जाएगा, जिसके लिए शीघ्र ही आवश्यक प्रक्रियाएं प्रारंभ होंगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के विशेष फोकस के तहत सीमावर्ती क्षेत्रों में रेलवे कनेक्टिविटी का विस्तार किया जा रहा है। बीकानेर से जैसलमेर और सीमावर्ती इलाकों तक रेल नेटवर्क को मजबूत करने के कार्य प्रगति पर हैं, जिससे सुरक्षा, विकास और संपर्क में उल्लेखनीय सुधार होगा। डिजिफेस्ट स्टार्टअप्स के लिए ग्लोबल गेटवे मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिफेस्ट ने स्टार्टअप्स को निवेशकों से, विद्यार्थियों को अवसरों से और उद्योग को सरकार से जोड़ डिजिटल राजस्थान का मार्ग प्रशस्त किया है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन स्टार्टअप्स के लिए ग्लोबल गेटवे साबित हो रहे हैं, जहां फंडिंग के साथ-साथ विश्वस्तरीय मेंटर्स का मार्गदर्शन भी मिल रहा है। एआई-एमएल, फिनटेक, एग्रीटेक, एआर-वीआर और प्रॉपटेक जैसे क्षेत्रों में विचार-विमर्श से नए अवसरों के द्वार खुल रहे हैं। राजस्थान में हर माह 81 हजार करोड़ रुपये के यूपीआई लेनदेन शर्मा ने कहा कि राजस्थान में 6 करोड़ 50 लाख से अधिक मोबाइल उपयोगकर्ता हैं और हर माह औसतन 81 हजार करोड़ रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन हो रहे हैं। ऑनलाइन सेवाओं के बढ़ते उपयोग को देखते हुए साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए ऑपरेशन एंटी वायरस के माध्यम से साइबर अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि एवीजीसी-एक्सआर पॉलिसी, डेटा सेंटर नीति 2025, अटल इनोवेशन स्टूडियो, स्टार्टअप लॉन्चपैड, लीप प्रोग्राम और सेंटर फॉर एडवांस्ड स्किलिंग जैसी पहलों से प्रदेश में रोजगार और नवाचार को बढ़ावा मिल रहा है। एआई के विस्तार के साथ-साथ भी रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट के दौरान हुए निवेश समझौतों में से बड़ी संख्या में परियोजनाएं धरातल पर उतर रही हैं। निवेश अनुकूल वातावरण, नई नीतियों, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और राजनिवेश पोर्टल के कारण राजस्थान निवेशकों के लिए शीर्ष राज्यों में शामिल हुआ है। प्रवासी राजस्थानियों के लिए बनाई गई नीति और विभाग से उन्हें प्रदेश के विकास में सक्रिय भागीदारी का अवसर मिल रहा है। एआई जीवन का अभिन्न अंग बनेगा, जन-जन तक पहुंचेगी कंप्यूट सुविधा – केन्द्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव केन्द्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव कार्यक्रम से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आने वाले समय में मानव जीवन का अभिन्न अंग बनेगा और हर व्यक्ति, हर घर तथा हर उद्यम तक इसकी पहुंच होगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में एआई को समावेशी, सुलभ और जनोपयोगी बनाने की दिशा में ठोस और दूरदर्शी कदम उठाए जा रहे हैं।  

जयपुर मैराथन की तैयारियां तेज, कैलेंडर जारी; ड्रीम रन में उमड़ेगा एक लाख का सैलाब

जयपुर जयपुर गुलाबी नगर एक बार फिर फिटनेस, स्वास्थ्य और सामूहिक ऊर्जा के उत्सव के लिए तैयार है। जयपुर मैराथन 2026 के 17वें संस्करण का आधिकारिक इवेंट कैलेंडर लॉन्च कर दिया गया है। इस आयोजन को राजस्थान पर्यटन विभाग, राजस्थान खेल परिषद और राजस्थान युवा बोर्ड का सहयोग प्राप्त है। कैलेंडर लॉन्च कार्यक्रम में मैराथन से पहले आयोजित होने वाली एक माह की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी साझा की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री अरुण चतुर्वेदी रहे। उनके साथ संस्कृति युवा संस्था के अध्यक्ष पं. सुरेश मिश्रा, एयू जयपुर मैराथन के सीईओ मुकेश मिश्रा, एयू स्मॉल फाइनेंस से धर्मेंद्र सिंह शेखावत सहित आयोजन से जुड़े कई गणमान्य अतिथि मंच पर उपस्थित थे। इस अवसर पर अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि जयपुर मैराथन अब ऐसा आयोजन बन चुका है, जिसका शहर हर वर्ष बेसब्री से इंतजार करता है। यह केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि ऐसा मंच है जो पूरे शहर को स्वास्थ्य और वेलनेस के प्रति जागरूक करता है। जयपुर मैराथन ने अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना ली है। चार अलग-अलग जोन में बांटा गया शहर संस्कृति युवा संस्था के अध्यक्ष पं. सुरेश मिश्रा ने बताया कि आयोजन का उद्देश्य मैराथन को जयपुर की जीवनशैली का हिस्सा बनाना है, ताकि फिटनेस आदत बने और स्वास्थ्य को प्राथमिकता मिले। प्रतिभागियों की बेहतर तैयारी के लिए जयपुर रनर्स क्लब द्वारा शहर को चार अलग-अलग ज़ोन में विभाजित किया गया है, जहां प्रशिक्षकों की व्यवस्था की गई है। हर वर्ग के लोगों को एक मंच पर जोड़ रही मैराथन वहीं एयू जयपुर मैराथन के सीईओ मुकेश मिश्रा ने कहा कि जयपुर मैराथन 2026 अब केवल एक दिन की दौड़ तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह एक समग्र फिटनेस मूवमेंट का रूप ले चुकी है, जो युवाओं, कॉर्पोरेट प्रोफेशनल्स, रनर्स और आम नागरिकों को एक मंच पर जोड़ रही है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष विभिन्न श्रेणियों में प्रतिभागियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है। खासतौर पर ड्रीम रन में लगभग एक लाख लोगों की ऐतिहासिक भागीदारी का अनुमान लगाया जा रहा है।

राजस्थान में शीतलहर और कोहरे का असर, 20 जिलों में स्कूलों की छुट्टी

जयपुर राजस्थान में कड़ाके की सर्दी ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। प्रदेश में घने कोहरे और बर्फीली हवाओं के चलते शीतलहर का असर तेज हो गया है। हालात को देखते हुए राज्य के 20 जिलों में कक्षा 8वीं तक के सभी स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। मौसम विभाग ने मंगलवार को 18 जिलों में कोहरा और शीतलहर को लेकर चेतावनी जारी की है। राजधानी जयपुर में मंगलवार सुबह घना कोहरा छाया रहा, जिससे सीजन में पहली बार विजिबिलिटी शून्य (0 मीटर) दर्ज की गई। इसके साथ ही शहर की हवा की गुणवत्ता भी खराब रही और अधिकांश इलाकों में AQI 200 से ऊपर रिकॉर्ड किया गया। जयपुर के अलावा सीमावर्ती जिलों, अजमेर और कोटा सहित कई क्षेत्रों में भी घने कोहरे का असर देखा गया। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में 7 जनवरी तक कोहरे और 9 जनवरी तक शीतलहर का प्रभाव बना रह सकता है। इस दौरान तापमान में 2 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट की संभावना है। नए साल की शुरुआत से ही प्रदेश में ठंड लगातार बढ़ रही है। बीते पांच दिनों में तीन दिन माउंट आबू और शेखावाटी क्षेत्र में न्यूनतम तापमान 1 डिग्री या उससे नीचे दर्ज किया गया। घने कोहरे और ठंडी हवाओं के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मंगलवार सुबह भी शीतलहर के चलते कड़ाके की ठंड महसूस की गई। इससे पहले सोमवार को जयपुर, अलवर, भरतपुर, दौसा सहित कई जिलों में दोपहर तक कोहरा छाया रहा। प्रदेश के 19 शहरों में दिन का अधिकतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया, जबकि गंगानगर सबसे ठंडा जिला रहा। मौसम विभाग ने नागरिकों को सतर्क रहने, अनावश्यक यात्रा से बचने और ठंड से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी है।

सांगानेर स्टेशन के कायाकल्प की शुरुआत, रेल मंत्री रखेंगे वर्ल्ड क्लास प्रोजेक्ट की नींव

जयपुर राजधानी जयपुर के यात्रियों को नए साल में बड़ी सौगात मिलने जा रही है। सांगानेर रेलवे स्टेशन को वर्ल्ड क्लास सुविधाओं से लैस किया जाएगा। मंगलवार को केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव स्टेशन पुनर्विकास कार्यों का शिलान्यास करेंगे। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी शामिल होंगे। करीब दो साल पहले यह योजना स्वीकृत हुई थी, लेकिन बीसलपुर पेयजल परियोजना की पाइपलाइन के कारण काम शुरू नहीं हो पाया। अब नए डिजाइन और प्रस्ताव के साथ परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है।   स्टेशन को दो चरणों में विकसित किया जाएगा। पहले चरण में स्टेशन भवन का आधुनिकीकरण होगा, जबकि दूसरे चरण में जयपुर-सवाई माधोपुर रेलखंड के दोहरीकरण और यार्ड विस्तार का कार्य किया जाएगा। तीन लाइनों वाले स्टेशन को पांच लाइनों में बदला जाएगा, जिससे ट्रेनों की आवाजाही सुचारु होगी।  

सेना के अस्पताल में लगा बड़ा मेडिकल कैंप, डिप्टी सीएम दिया कुमारी ने किया उद्घाटन

जयपुर उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने आज आर्मी हॉस्पिटल में आयोजित विशाल मेडिकल कैंप का शुभारंभ किया। यह मेडिकल कैंप देश की रक्षा में अपना सर्वस्व अर्पण करने वाले पूर्व सैनिकों एवं उनके परिवारजनों के कल्याण, सम्मान और बेहतर स्वास्थ्य के उद्देश्य से आयोजित किया गया। शुभारंभ के बाद उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने मेडिकल कैंप का निरीक्षण किया तथा मरीजों के पास पहुंचकर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। उन्होंने न केवल मरीजों का मनोबल बढ़ाया, बल्कि उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना भी की।   इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने कहा कि इस मेडिकल कैंप के माध्यम से पूर्व सैनिकों एवं उनके परिजनों को हृदय रोग, हड्डियों से संबंधित रोगों सहित विभिन्न चिकित्सकीय समस्याओं के उपचार और विशेषज्ञ परामर्श की सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। यह पहल उनके बेहतर स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन की दिशा में एक सार्थक कदम है। उन्होंने कहा कि हमारे सैनिकों के अदम्य साहस, अनुशासन और निष्ठा से ही देश की सीमाएँ सुरक्षित हैं और भारत निरंतर सशक्त बन रहा है। दिया कुमारी ने कहा, “मैं स्वयं एक सैनिक की बेटी हूँ। अनुशासन, सेवा, त्याग और देशभक्ति के संस्कार बचपन से ही मेरे जीवन का हिस्सा रहे हैं। सैनिक परिवारों का दर्द, संघर्ष और गौरव मैंने बहुत करीब से देखा और महसूस किया है। इसलिए वीर सैनिकों और उनके परिवारों की सेवा मेरे लिए केवल दायित्व नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव और आत्मिक कर्तव्य है।” उन्होंने बताया कि 15 जनवरी को जयपुर में आयोजित होने वाले आर्मी डे समारोह की शुरुआत आज से इस मेडिकल कैंप के साथ की गई है। राजस्थान में पहली बार हो रही आर्मी डे परेड को लेकर आमजन में भारी उत्साह है। जयपुर में इस भव्य परेड का आयोजन होना प्रदेशवासियों के लिए गर्व की बात है। इस अवसर पर साउथ-वेस्टर्न कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह, आवा की क्षेत्रीय अध्यक्षा बरिन्दरजीत कौर, बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक एवं उनके परिवारजन उपस्थित रहे।  

निवाई में रहस्यमय घड़ा: दिन भर की जांच के बाद रात को दोबारा खुदाई

टोंक टोंक के निवाई में मिले घड़े का रहस्य अभी बरकरार है। हालांकि, रविवार रात को फिर वहीं पर खुदाई की गई। रात एक बजे बाद जेसीबी से खुदाई की गई लेकिन ग्रामीण डर के कारण मौके पर नहीं पहुंचे। हाल ही में मिले घड़े का रहस्य बरकरार है वहीं, अब दूसरे गड्डे का भी रहस्य बना हुआ है। इस गड्डे की खुदाई किसने की और इसमें क्या निकला किसी को पता नहीं। दूसरी तरफ प्रशासन की और से यहां सुरक्षा के तौर पर पुलिस की तैनाती नहीं की गई। निवाई के देवरी गांव में शनिवार को खुदाई में निकले घड़े को निवाई ट्रेजरी में सील कर ताले में रखवाया है और पुलिस तैनात कर दी गई। इस पूरे मामले में एसडीएम ने कलेक्टर को एक पत्र लिखा, जिसके बाद कलेक्टर ने पुरातत्व विभाग के अधिकारियों को जानकारी दी। एडीएम रामरतन सौंकरिया ने जानकारी देते हुए बताया कि खुदाई में निकले घड़े की जांच पुरातत्व विभाग के अधिकारी आकर करेंगे।   फिलहाल टोंक जिले की निवाई में खजाना मिलने की खबर से हड़कंप मचा हुआ है। सीदड़ा ग्राम पंचायत के देवरी गांव में खुदाई की जगह ग्रामीणों की आज भी भारी भीड़ जमा है। लोगों ने प्रशासन से और खुदाई करने की मांग की। लोगों को कहना है कि प्रशासन जल्द जांच करें जिससें खुलासा हो सके की खजाना है या अफवाह। लोगों ने घड़े में खजाना देखा लेकिन असली नकली को लेकर संदेह बना हुआ है। दरअसल, शनिवार रात जमीन से बड़ी मात्रा में सोने से भरा भारी भरकर घड़ा निकलने की जानकारी मिली। चारागाह जमीन पर खोदी हुई जमीन पर गुलाब के फूल बिखरे होने पर ग्रामीणों ने शव होने की आंशका जताई थी जिसके बाद पुलिस को बुलाया। निवाई पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जेसीबी से खुदाई की। खुदाई के दौरान भारी भरकर एक बड़े आकार का घड़ा निकला। लोग इसे चांदी का घड़ा बता रहे हैं। जिसे देखकर ग्रामीणों में लूट सी मच गई। खुदाई की खबर आग की तरह फैल गई और मौके पर आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुट गई। पुलिस लोगों को हटाकर घड़ा निवाई लेकर पहुंची, जहां अधिकारियों को जानकारी दी। भारी भरकम घड़े को सील कर ट्रेज़री में रखवाया और उच्चाधिकारियों को इसकी जानकारी दी। संभवतः घड़े में कुछ होने पर ही सील किया गया। तहसीलदार नरेश गुर्जर ने जानकारी देते हुए बताया कि पुरातत्व के अधिकारियों की मौजूदगी में घड़ा खोला जाएगा।  

5500 बच्चों का भविष्य संकट में: नीरजा मोदी स्कूल की मान्यता रद्द के विरोध में अभिभावकों का उग्र आंदोलन

जयपुर नीरजा मोदी स्कूल में छात्रा की आत्महत्या के मामले के बाद केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा स्कूल की मान्यता रद्द किए जाने के फैसले के विरोध में शनिवार को जयपुर में अभिभावकों का आक्रोश फूट पड़ा। बड़ी संख्या में अभिभावक अपने बच्चों के साथ स्कूल परिसर के बाहर एकत्र हुए और शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन कर सीबीएसई से निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की। प्रदर्शन कर रहे अभिभावकों का कहना है कि सीबीएसई के इस फैसले से स्कूल में पढ़ने वाले करीब 5,500 बच्चों का भविष्य संकट में पड़ गया है। बीच सत्र में मान्यता रद्द होने से बच्चों की पढ़ाई, परीक्षा की तैयारी, नियमित अध्ययन और मानसिक स्थिति पर गंभीर नकारात्मक असर पड़ रहा है। अभिभावकों ने कहा कि अचानक लिया गया यह निर्णय न केवल बच्चों के शैक्षणिक भविष्य को प्रभावित कर रहा है, बल्कि उनमें भय और असमंजस की स्थिति भी पैदा कर रहा है।   अभिभावकों ने यह भी चिंता जताई कि यदि बच्चों को अन्य स्कूलों में स्थानांतरित किया जाता है, तो उन्हें नई व्यवस्था, नया वातावरण और पढ़ाई के नए पैटर्न में ढलने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। इससे बच्चों पर अनावश्यक मानसिक दबाव बढ़ सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन मापदंडों के आधार पर नीरजा मोदी स्कूल की मान्यता रद्द की गई है, क्या अन्य स्कूलों में वे सभी मापदंड पूरी तरह से पूरे होते हैं। धरना-प्रदर्शन के दौरान अभिभावकों और विद्यार्थियों ने सीबीएसई से अपील की कि वह बाल मनोविज्ञान को ध्यान में रखते हुए मान्यता रद्द करने के फैसले को वापस ले, ताकि बच्चों की पढ़ाई बिना बाधा के जारी रह सके। उनका कहना था कि एक दुखद घटना के लिए दोषियों को सजा मिलनी चाहिए, लेकिन इसका खामियाजा निर्दोष बच्चों को नहीं भुगतना चाहिए। इस मामले में शिवसेना (शिंदे गुट), राजस्थान ने भी प्रतिक्रिया दी है। प्रदेश मुख्य सचिव इंजीनियर जितेन्द्र हिन्दू ने कहा कि शिवसेना इस दुख की घड़ी में बच्ची के परिवार के साथ पूरी संवेदना के साथ खड़ी है। उन्होंने मांग की कि मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और यदि किसी भी प्रकार की लापरवाही सामने आती है, तो दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए। इंजीनियर जितेन्द्र हिन्दू ने स्पष्ट किया कि एक गंभीर घटना के आधार पर पूरे विद्यालय की सीबीएसई मान्यता रद्द करना न्यायसंगत नहीं है, क्योंकि इससे सैकड़ों नहीं बल्कि हजारों निर्दोष बच्चों का भविष्य और मानसिक संतुलन प्रभावित हो रहा है। शिवसेना ने मान्यता रद्द करने के निर्णय को तत्काल स्थगित करने, बच्चों की पढ़ाई को सुरक्षित रखने और सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बच्चों के भविष्य के साथ अन्याय जारी रहा, तो शिवसेना राज्यव्यापी आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेगी।  

नन्हे छात्रों को बड़ी राहत, राजस्थान में पहली से पांचवीं तक हल्के होंगे स्कूल बैग

जयपुर राजस्थान के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा एक से पांचवीं तक के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा विभाग ने बड़ी राहत देने की तैयारी कर ली है। बच्चों के स्कूल बैग का बढ़ता भार लंबे समय से चिंता का विषय रहा है, जिसे कम करने के लिए अब नई शिक्षा नीति के तहत महत्वपूर्ण व्यवस्था लागू की जा रही है। शिक्षा विभाग ने निर्णय लिया है कि सत्र 2026-27 से प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकों का वितरण दो चरणों में किया जाएगा। नई व्यवस्था के अनुसार, पूरे सत्र की सभी किताबें एक साथ देने के बजाय सीमित पाठ्यपुस्तकें एक चरण में दी जाएंगी। इससे विद्यार्थियों के स्कूल बैग का भार वर्तमान की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत तक कम हो जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि भारी बैग बच्चों के शारीरिक विकास पर नकारात्मक असर डालते हैं, ऐसे में यह निर्णय बच्चों के स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद फायदेमंद साबित होगा। शासन सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग कृष्ण कुणाल ने जानकारी देते हुए बताया कि सत्र 2027-28 से पाठ्यपुस्तकों का आवंटन तिमाही आधार पर किया जाएगा। इसका मतलब यह होगा कि विद्यार्थियों को हर तीन महीने में पाठ्यक्रम के अनुसार सीमित पुस्तकें दी जाएंगी। इस व्यवस्था के पूरी तरह लागू होने के बाद बच्चों पर पुस्तकों का भार और घटकर वर्तमान का लगभग 50 प्रतिशत रह जाएगा। उन्होंने कहा कि यह पहल बच्चों के लिए पढ़ाई को बोझ नहीं, बल्कि एक आनंददायक और सहज अनुभव बनाने की दिशा में ठोस कदम है। शिक्षा विभाग का मानना है कि पुस्तक भार कम होने से बच्चों की नियमित स्कूल उपस्थिति में भी सुधार होगा। हल्का बैग होने से बच्चे स्कूल जाने में अधिक उत्साह महसूस करेंगे और शारीरिक थकान भी कम होगी। इसके साथ ही पढ़ाई में रुचि बढ़ेगी और बच्चों की एकाग्रता में भी सुधार देखने को मिलेगा। अभिभावकों के लिए भी यह फैसला राहत भरा है, क्योंकि वे लंबे समय से बच्चों के भारी स्कूल बैग को लेकर चिंता जताते रहे हैं। यह निर्णय राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों के अनुरूप है, जिसमें बच्चों पर अनावश्यक शैक्षणिक दबाव कम करने और बाल-केंद्रित शिक्षा व्यवस्था को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। नई व्यवस्था से न केवल बच्चों का शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होगा, बल्कि उनकी सीखने की क्षमता और मानसिक विकास पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। शिक्षा विभाग की इस पहल को अभिभावकों और शिक्षाविदों द्वारा सराहा जा रहा है, और इसे प्राथमिक शिक्षा में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।