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अलवर के रिहायशी इलाके में टाइमर ‘बमनुमा’ वस्तु से मचा हड़कंप

अलवर. राजस्थान के अलवर शहर के विवेकानंद नगर सेक्टर-4 में सोमवार सुबह टाइमर लगी बमनुमा वस्तु से मिलने से हड़कंप मच गया। पुलिस के मुताबिक बमनुमा वस्तु एक रिहायशी इलाके में स्थित एक घर के पास मिली है। पुलिस के मुताबिक सूचना मिलते ही जयपुर से आतंकवाद विरोधी दस्ते और बम निरोधक दस्ता बुला लिया गया है जो कि संदिग्ध वस्तु की जांच करेगी। पुलिस के मुताबिक संदिग्ध वस्तु अरावली विहार क्षेत्र के विवेकानंद नगर सेक्टर-4 में देखी गई। पुलिस ने तुरंत इलाके को घेर लिया और एहतियात के तौर पर संदिग्ध वस्तु को आनन-फानन में शहर से लगभग साढ़े छह किलोमीटर दूर जयसमंद बांध के पास एक सुनसान स्थान पर रखा दिया। पुलिस ने बताया कि बांध के आसपास के इलाके को सील कर दिया गया है और लोगों की आवाजाही प्रतिबंधित कर दी गई है। पुलिस संदिग्ध वस्तु पर लगातार नजर रखे हुए हैं। पुलिस को सुबह कंट्रोल रूम के जरिए बमनुमा वस्तु की सूचना मिली थी। पुलिस तुरंत रिहायशी इलाके में पहुंची और वस्तु को चेक किया। पुलिस को संदेह हुआ और इसके बाद मामले की जानकारी पुलिस के उच्च अधिकारियों को दी गई। बताया जा रहा है कि बमनुमा वस्तु में टाइमर लगा हुआ है और साथ में कुछ पदार्थ भी है। आपको बता दें कि पुलिस संदिग्ध वस्तु को ऐसे इलाके में लेकर पहुंची है जहां आस-पास कोई आबादी नहीं है।

राजस्थान के पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीय ने छोड़ी भाजपा

जयपुर. राजस्थान के आदिवासी नेता महेंद्रजीत सिंह मालवीय भाजपा छोड़कर दोबारा कांग्रेस में शामिल होने जा रहे हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने दावा किया कि पिछली सरकार में मंत्री रहे महेंद्रजीत सिंह मालवीय ने भाजपा छोड़ दी है। डोटासरा के अनुसार, महेंद्रजीत सिंह मालवीय ने स्वीकार किया है कि कांग्रेस छोड़कर भाजपा में जाना उनकी एक ऐतिहासिक गलती थी। कांग्रेस प्रदेश गोविंद सिंह डोटासरा ने रविवार को दावा किया कि महेंद्रजीत सिंह मालवीय ने BJP छोड़ दी है। उन्होंने बताया कि पिछले कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे मालवीय ने पार्टी के शीर्ष नेताओं से मुलाकात की है और फिर से शामिल होने के लिए पत्र लिखा है। भाजपा में जाना ऐतिहासिक गलती गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि महेंद्रजीत सिंह ने साफ किया है कि कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होना एक ऐतिहासिक गलती थी। महेंद्रजीत का अनुरोध अनुशासन समिति को भेज दिया गया है। समित के फैसले के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा। डोटासरा ने यह भी दावा किया कि मालवीय का कहना है कि कांग्रेस ने हमेशा उनको सम्मान दिया है। भाजपा में तो उनको घुटन महसूस हो रही थी। मालवीय कांग्रेस की नीतियों में यकीन रखते हैं। मालवीय ने भाजपा से इस्तीफा दे दिया है। लोकसभा चुनाव में ज्वाइन की थी भाजपा राजस्थान के वागड़ क्षेत्र से आने वाले आदिवासी नेता महेंद्रजीत सिंह मालवीय 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान बीजेपी में शामिल हुए थे। उन्होंने बांसवाड़ा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था लेकिन BAP कंडिडेट राजकुमार रोत से हार गए थे। सरकार पर साधा निशाना रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस नेताओं के साथ बैठक के बाद मालवीय ने संवाददाताओं से कहा कि सूबे में भाजपा की सरकार होने के बाद भी वह लोगों के लिए काम नहीं करवा पा रहे थे। मौजूदा राज्य सरकार में कोई ऐसा नहीं है जो गरीबों की बात सुने। मैंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को कई बार लेटर लिखा लेकिन समस्याओं का कोई समाधान नहीं निकल सका है। मेरा मानना है कि केवल कांग्रेस ही जनता का भला कर सकती है।

चित्तौड़गढ़ में 11 देशों से आएगा डिजिटल मायरा, 151 गांव बनेंगे साक्षी, गोकुल जैसी गोशाला का निर्माण

चित्तौड़गढ़   राजस्थान की मिट्टी की खुशबू और गोसेवा के संस्कार सात समंदर पार भी फीके नहीं पड़े हैं। क्षेत्र के नपानिया गांव के युवाओं ने साबित कर दिया है कि इंसान चाहे दुनिया के किसी भी कोने में रहे, अपनी जड़ों को नहीं भूलता। दुबई, अमरीका, लंदन और जापान जैसे 11 देशों में सफल करियर बना चुके इन युवाओं ने अपनी जन्मभूमि के प्रति कर्तव्य निभाते हुए करीब 20 लाख रुपए की लागत से एक विशाल नंदेश्वर गोशाला का निर्माण करवाया है। इस सामूहिक संकल्प की सिद्धि का उत्सव रविवार से नानी बाई के मायरा के साथ मनाया जाएगा। टीस से जन्मा संकल्प: 11 हजार से शुरू हुआ कारवां नपानिया गांव के युवा रोजगार के सिलसिले में केन्या, चीन और मुंबई जैसे शहरों में बसे हैं। अक्सर त्योहारों पर जब ये युवा गांव लौटते थे, तो सड़कों पर बेसहारा और चोटिल गोवंश को देखकर उनके मन में गहरी टीस उठती थी। यही दर्द पिछले वर्ष एक ठोस संकल्प में बदला। शुरुआत महज 11-11 हजार रुपए के अंशदान से हुई, लेकिन देखते ही देखते कारवां बढ़ता गया। प्रवासियों के साथ स्थानीय भामाशाहों ने भी दिल खोलकर सहयोग किया। 11 देशों से आएगा डिजिटल मायरा, 151 गांव बनेंगे साक्षी इस गोशाला का शुभारंभ एक ऐतिहासिक उत्सव की तरह होगा। 11 जनवरी से चित्तौड़गढ़ के हरे कृष्णा प्रभु राकेश पुरोहित के सानिध्य में नानी बाई का मायरा कथा शुरू होगी। दुबई, अमरीका, यूके, केन्या, जापान और मस्कट सहित 11 देशों से प्रवासी भारतीय मायरा लेकर पहुंचेंगे। मकर संक्रांति को करीब 151 गांवों के श्रद्धालु इस आयोजन में सम्मिलित होंगे। 20 बीघा जमीन पर गोकुल' जैसा आशियाना सांवलियाजी मार्ग पर करीब 20 बीघा भूमि पर इस गोशाला का निर्माण किया गया है। 15 लाख की लागत से विशाल शेड बनाया गया है ताकि गोवंश को हर मौसम से सुरक्षा मिले। किसी ने पशु खेळ (नांद) बनवाई, तो किसी ने बिजली कनेक्शन और समतलीकरण में श्रमदान किया। क्या कहते हैं जिम्मेदार? सड़कों पर चोटिल गोवंश को देख मन दुखी होता था। हमने तय किया कि अपनी कमाई का एक हिस्सा माटी और गोमाता को अर्पित करेंगे। गांव की एकता से ही यह संभव हुआ। – उदयलाल मेनारिया, प्रेम मेनारिया, संजय जाट और नपानिया के युवा 700 वर्ष पहले नरसीजी के भरोसे पर द्वारिकाधीश आए थे, आज उसी अटूट विश्वास के साथ नपानिया के युवा गोमाता के लिए भरोसे की कथा कर रहे हैं। यह आधुनिक पीढ़ी के लिए मिसाल है। – पं. राकेश पुरोहित, प्रशासनिक संत

जयपुर में रोबोटिक डॉग्स की एंट्री, सड़कों पर दिखी इनकी खासियतें, जानें इनका नाम

जयपुर सेना दिवस 2026 की मुख्य परेड जयपुर में 15 जनवरी होगी। इस परेड की फुल ड्रेस रिहर्सल चल रही है। जयपुर की सड़कों पर इन दिनों फौजी बूटों की धमक के साथ-साथ एक और आवाज़ सुनाई दे रही है – लोहे के पैरों की खनक। इस लोहे के रोबोटिक डॉग्स को जो भी देख रहा है वो दंग रह जा रहा है। आखिर ये है क्या चीज? भारतीय सेना ने अपनी सबसे एडवांस तकनीक यानी 'रोबोटिक डॉग्स' को जयपुर की परेड में भी उतारा है। इस 'रोबोटिक डॉग्स' को देखने वालों की सांसें थम जाती हैं। आखिर ये क्या बला है। क्या है इस रोबोटिक डॉग्स की खासियत? ये महज़ खिलौने हैं या फिर जंग के मैदान में पासा पलटने वाले आधुनिक हथियार? आइए जानते हैं रोबोटिक डॉग्स, मल्टी यूटीलिटी लेगी इक्विपमेंट (MULE) की खासियत? रोबोटिक डॉग्स या खच्चर रोचक बात है कि नए रोबोटिक डॉग्स का नाम म्यूल क्यों रखा गया है। नए रोबोटिक डॉग्स को तकनीकी भाषा में MULE यानी Multi-Utility Legged Equipment कहा जाता है। सेना में सामान ढोने के लिए खच्चर का प्रयोग किया जाता है। खच्चर को अंग्रेजी में म्यूल कहते हैं। सामान्यतौर पर इसका भी थोड़ा बहुत इसी प्रकार का उपयोग है। इसका चीन, अमेरिका में भी प्रयोग होता है। सेना ने रोबोटिक डॉग्स का नाम रखा है 'संजय' रोबोटिक डॉग्स यानि म्यूल की खासियतें जानकर चौंक जाएंगे। एकबारगी तो आपको विश्वास नहीं होगा। सेना ने बहुत प्यार से रोबोटिक डॉग्स का नाम 'संजय' रखा है। इनका वजन करीब 51 किलोग्राम है और ये दिखने में किसी खूंखार शिकारी कुत्ते जैसे लगते हैं। लेकिन इनकी असली ताकत इनके अंदर छिपी 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' में है। इनको दिल्ली की एरोआर्क कंपनी ने विकसित किया है। ये रोबोटिक डॉग्स एक बार में चार्ज होने के बाद 20 घंटे तक लगातार काम कर सकते हैं। इनमें NVIDIA के ग्राफिग कार्ड्स लगाए गए हैं। इन्हें रिमोट से तो ऑपरेट किया ही जा सकता है। ये ऑटोमैटिक रूप से भी काम करते हैं। रोबोटिक डॉग्स की खासियतें ये रोबोटिक डॉग्स -40°C की हाड़ कंपाने वाली ठंड से लेकर 55°C की चिलचिलाती धूप में भी काम कर सकते हैं। ये 3 मीटर प्रति सेकंड की रफ़्तार से भाग सकते हैं। ऊबड़-खाबड़ पहाड़, गहरी खाइयां या शहर की संकरी सीढ़ियां, इनके लिए चुटकियों का खेल है। इनके चेहरे पर लगे हाई-डेफिनिशन थर्मल कैमरे और LiDAR सेंसर रात के अंधेरे में भी दुश्मन को पहचान लेते हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन रोबोट्स पर हल्के हथियार (Small Arms) फिट किए जा सकते हैं। ये करीब 12 से 15 किलो तक का बारूद, खाना या दवाइयां अग्रिम चौकियों तक पहुंचा सकते हैं, जहां इंसान का पहुंचना मुश्किल होता है। इन्हें वाई-फाई या LTE के जरिए 10 किमी दूर बैठकर भी कंट्रोल किया जा सकता है। यानी अब आतंकी ठिकानों या संकरी गलियों में घुसने के लिए हमारे जवानों को जान जोखिम में डालने की जरूरत नहीं होगी, ये रोबोटिक डॉग्स खुद मोर्चा संभालेंगे। फिलहाल ये रोबोटिक डॉग्स जयपुर के जगतपुरा और महल रोड पर रिहर्सल के दौरान लोगों के लिए कौतूहल का विषय बने हुए हैं। ये पूरी तरह से 'आत्मनिर्भर भारत' की तस्वीर पेश करते हैं। 15 जनवरी को आर्मी डे परेड देखने जरूरी जाएं तो 15 जनवरी को जब आप आर्मी डे परेड देखने पहुंचेंगे, तो इन आधुनिक योद्धाओं का स्वागत तालियों के साथ ज़रूर कीजिएगा। तकनीक और साहस का यह मेल बताता है कि भारतीय सेना अब केवल जज़्बे से ही नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे बेहतरीन टेक्नोलॉजी से भी लैस है। देश में दिल्ली से बाहर सेना दिवस परेड की मेजबानी करने वाला जयपुर, बेंगलूरू, लखनऊ और पुणे के बाद चौथा शहर है।

बीकानेर में बोर्ड एग्जाम से पहले 4394 लेक्चरर के तबादले, शिक्षा विभाग ने दो चरणों में की ट्रांसफर लिस्ट जारी

बीकानेर  राजस्थान में 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा शुरू होने में एक माह का समय बचा है, लेकिन उस से पहले ही शिक्षा विभाग ने तबादलों की झड़ी लगा दी है। शनिवार के दिन 4,394 लेक्चररों के ट्रांसफर कर दिए गए। करीब सुबह 7:30 बजे 1,644 हिन्दी लेक्चररों की ट्रांसफर लिस्ट जारी की गई। इसके कुछ ही समय बाद अन्य विषयों के 2,750 लेक्चररों की ट्रांसफर लिस्ट जारी कर दी गई। अभी और ट्रांसफर लिस्ट आने की संभावना विभागीय सूत्रों के मुताबिक अभी अन्य ट्रांसफर लिस्ट भी जारी की जा सकती हैं। इनमें बड़ी संख्या में लेक्चररों की अदला-बदली की जा सकती हैं। यदि ऐसा होता है तो बोर्ड परीक्षा से ठीक पहले स्कूलों के छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती हैं।  माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर की 10वीं और 12वीं कक्षायों की परीक्षाएं 12 फरवरी से शुरू हो रही हैं। इस बार ये परीक्षाएं मार्च के बजाय फ़रवरी में करवाई जा रही हैं, लेकिन पाठ्यक्रम में कोई कटौती नहीं की गई है। ऐसे में छात्र पहले से ही समय की कमी से जूझ रहे थे। इस पर ये तबादलें छात्रओ की पढ़ाई पर  असर डाल सकते हैं। सर्दी में भी छुट्टी नहीं सर्दी के मौसम में भी दसवीं और बारहवीं के विद्यार्थियों की छुट्टी नहीं की गई है। इसके बावजूद कई स्कूलों में उपस्थिति कम बनी हुई है। ऐसे समय में  लेक्चररों के तबादले होने से छात्रों की बोर्ड परीक्षा तैयारी पर सीधा असर पड़ेगा।      इन जिलों में ज्यादा तबादले     जारी आदेश के अनुसार सबसे अधिक तबादले जयपुर जिले में किए गए हैं, जहां 25 से अधिक वाइस प्रिंसिपल और समकक्ष अधिकारियों को इधर-उधर किया गया है। बीकानेर जिले से 10 से ज्यादा, चूरू से 8 से अधिक और नागौर से करीब 12 तबादले हुए हैं। इसी तरह अजमेर, अलवर, भीलवाड़ा, उदयपुर, टोंक, सीकर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, जोधपुर, बूंदी और भरतपुर जैसे जिलों में भी 4 से 8 के बीच तबादले किए गए हैं। कई जिलों में यह तबादले एक ही जिले के भीतर, तो कई में एक जिले से दूसरे जिले में किए गए हैं। प्रिंसिपलों के भी हुए थे तबादले माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने बोर्ड परीक्षाओं से ठीक पहले 400 से अधिक प्रिंसिपलों के तबादले किए थे। ये तबादले एक साथ नहीं, बल्कि चार अलग-अलग ट्रांसफर लिस्ट जारी कर किए गए थे, जिससे कई स्कूलों में लगातार प्रशासनिक अस्थिरता बनी रही। परीक्षा ड्यूटी पर असर बोर्ड परीक्षा के दौरान परीक्षा केंद्रों पर लेक्चररों की ड्यूटी लगाई जाती है। बड़ी संख्या में तबादलों के चलते परीक्षा ड्यूटी का समुचित प्रबंधन करना विभाग के लिए एक चुनौती बन सकता है। शिक्षा विभाग के इस फैसले से स्कूलों में असमंजस की स्थिति बनी हुई हैं। 

स्वास्थ्य सेवाओं में ऐतिहासिक प्रगति: गांव-ढाणी तक मिल रहा बेहतर इलाज, दो वर्षों में मजबूत हुआ इंफ्रास्ट्रक्चर — भजनलाल शर्मा

जयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा और संवेदना से जुड़ा क्षेत्र है। विगत दो वर्षों में राज्य सरकार ने अपने बजट में स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। आगे भी स्वास्थ्य के लिए संसाधनों की कोई कमी नहीं रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ बनाया है। इससे गांव-ढाणी तक प्रदेशवासियों को गुणवत्तापूर्ण निःशुल्क उपचार मिल रहा है। उन्होंने कहा कि बजट पूर्व संवाद का उद्देश्य यही है कि इस क्षेत्र के विशेषज्ञों के सुझावों से एक ऐसा बजट बने, जिससे प्रदेश की 8 करोड़ से अधिक जनता को बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं मिलें और राजस्थान स्वास्थ्य में सिरमौर बने। शर्मा शुक्रवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र के प्रतिनिधियों के साथ बजट पूर्व संवाद कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शास्त्रों के अनुसार ‘पहला सुख निरोगी काया’ अर्थात् स्वस्थ शरीर ही सबसे बड़ा सुख होता है। इसी अवधारणा के साथ प्रदेश में लागू की गई मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना अब पूरे देश के लिए मिसाल बन गई है। मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के तहत अब तक 37 लाख मरीजों को 7 हजार 300 करोड़ रुपये का कैशलेस इलाज उपलब्ध करवाया गया है। इसी तरह, मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा योजना के तहत औषधियां, सर्जिकल एवं सूचर्स उपलब्ध करवाने में राजस्थान देश में प्रथम स्थान पर है। जिला चिकित्सालयों में बुजुर्गों के लिए रामाश्रय वार्ड खोले हैं, जहां उन्हें सम्मान के साथ स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं। चिकित्सा सेवा का क्षेत्र, दायित्वों को निष्ठा और ईमानदारी से निभाए स्वास्थ्यकर्मी मुख्यमंत्री ने कहा कि चिकित्सा सेवा का क्षेत्र है। हर रोगी को संवेदनशीलता के साथ अच्छा उपचार मिले और जीवन रक्षा का उद्देश्य फलीभूत हो। यही इस क्षेत्र की महानता है। चिकित्सकों एवं इस क्षेत्र से जुड़े प्रत्येक स्वास्थ्यकर्मी को चाहिए कि वे अपने दायित्वों को निष्ठा और ईमानदारी के साथ निभाए। राज्य सरकार ऐसे सेवाभावी कार्मिकों के सम्मान में कोई कमी नहीं रखेगी। लेकिन जनता के पैसे का दुरूपयोग करने वाले एवं स्वास्थ्य योजनाओं में अनियमितता करने वाले कार्मिकों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान शर्मा ने कहा कि हमारी सरकार चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दे रही है ताकि प्रदेश को प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी मिल सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 7 नए मेडिकल कॉलेज खोले गए हैं और 15 नवीन मेडिकल कॉलेज निर्माणाधीन हैं। साथ ही, भीलवाड़ा, धौलपुर, प्रतापगढ़, नाथद्वारा एवं बूंदी में नर्सिंग कॉलेज की स्थापना की गई है। हमारा प्रयास है कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में शोध एवं अनुसंधान को बढ़ावा मिले। इस दिशा में जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। 8 हजार 700 चिकित्सा संस्थान आयुष्मान आरोग्य मंदिर में परिवर्तित मुख्यमंत्री ने कहा कि निचले स्तर तक चिकित्सा सेवाओं के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए अनेक कदम उठाए गए हैं। विगत दो वर्षों में 7 उप जिला अस्पताल, 2 सैटेलाइट अस्पताल, 5 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सहित कुल 14 संस्थानों का जिला चिकित्सालयों में क्रमोन्नयन तथा 7 नवीन सैटेलाइट अस्पतालों की स्थापना की गई है। उन्होंने कहा कि 129 उप स्वास्थ्य केंद्रों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में क्रमोन्नयन किया है। करीब 8 हजार 700 चिकित्सा संस्थानों को आयुष्मान आरोग्य मंदिर के रूप में परिवर्तित किया गया एवं 412 शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित किए गए। उन्होंने कहा कि बालोतरा में नवीन जिला आयुर्वेद चिकित्सालय और ब्यावर, दूदू, डीग, डीडवाना-कुचामन और अनूपगढ़ में जिला आयुष चिकित्सालय शुरू किए गए हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बैठक में उपस्थित प्रतिभागियों के सुझावों को गंभीरता के साथ सुना। उन्होंने कहा कि प्राप्त सुझावों को आगामी बजट में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, अतिरिक्त मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय अखिल अरोरा, प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड, प्रमुख शासन सचिव वित्त वैभव गालरिया सहित वरिष्ठ विभागीय अधिकारी एवं आईएलबीएस हॉस्पिटल, नारायणा हृदयालय ग्रुप, महावीर विकलांग सेवा समिति, इंडियन फार्मासिस्ट एसोसिएशन, यूनीसेफ, महात्मा गांधी हॉस्पिटल, आईएमए राजस्थान, एसएमएस मेडिकल कॉलेज एवं आरयूएचएस के प्रतिनिधियों सहित विभिन्न चिकित्सा एवं स्वास्थ्य से जुड़े संस्थानों के प्रतिनिधि मौजूद थे।

दूसरे राज्यों की पुलिस की एंट्री पर बवाल, गहलोत और जूली ने भजनलाल सरकार को कटघरे में खड़ा किया

जयपुर राजस्थान में कानून-व्यवस्था और पुलिस के सूचना तंत्र को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। गुजरात पुलिस द्वारा जोधपुर में एमडी ड्रग्स लैब पर की गई कार्रवाई के बाद यह सामने आया कि स्थानीय राजस्थान पुलिस को इस ऑपरेशन की पूर्व जानकारी तक नहीं थी। इस मामले ने तब और तूल पकड़ लिया, जब स्वयं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पुलिस अधिकारियों से संवाद के दौरान इस पर सवाल उठाए। इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार पर तीखा हमला बोला।  पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि मुख्यमंत्री खुद स्वीकार कर रहे हैं कि दूसरे राज्यों की पुलिस बिना सूचना के राजस्थान में कार्रवाई कर रही है। उन्होंने इसे राजस्थान पुलिस के सूचना तंत्र के पूरी तरह ध्वस्त होने का प्रमाण बताया। गहलोत ने कहा कि गुजरात और महाराष्ट्र, दोनों राज्यों में भाजपा की सरकार है और राजस्थान में भी भाजपा सत्ता में है, इसके बावजूद आपसी समन्वय का यह अभाव सरकार की गंभीर प्रशासनिक कमजोरी को दर्शाता है। गहलोत ने सवाल उठाया कि जब मुख्यमंत्री ही राज्य की पुलिस पर भरोसा नहीं जता पा रहे, तो आम जनता अपनी सुरक्षा के लिए किसके पास जाए। उन्होंने कहा कि गृह विभाग स्वयं मुख्यमंत्री के पास है, ऐसे में यह जवाबदेही से बचने का प्रयास है। पुलिस का मनोबल गिराकर सरकार अपनी नाकामी नहीं छिपा सकती। वहीं नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में दिया गया बयान राजस्थान की बदहाल कानून-व्यवस्था की स्वीकारोक्ति है। जूली ने कटाक्ष करते हुए कहा कि क्या मुख्यमंत्री की नींद आज टूटी है? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को खुद नहीं पता कि पुलिस महकमे में क्या चल रहा है। जूली ने चूरू में महिला कांस्टेबल द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों का भी जिक्र करते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए।   इस पूरे मामले ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था, पुलिस समन्वय और सरकार की प्रशासनिक पकड़ को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है।  

सचिन पायलट को राजस्थान भेजने की योजना, 2028 के CM फेस को लेकर क्यों शुरू हुई चर्चा?

जयपुर दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस पार्टी सचिन पायलट को राजस्थान का प्रदेश अध्यक्ष बनाने वाली है। इस दौरान चर्चा यह भी है कि कांग्रेस साल 2028 में होने वाले राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए पायलट को सीएम फेस भी बनाने वाली है। इसकी चर्चा तब शुरू हुई, जब बीते दिनों सचिन पायलट और राहुल गांधी की दिल्ली में मुलाकात हुई। मुलाकात में राहुल गांधी और सचिन पायलट ने क्या बात की? आइए समझते हैं इस मुलाकात के मायने। राहुल गांधी से क्या बोले सचिन पायलट बीते दिनों दिल्ली में राहुल गांधी और सचिन पायलट की गुप्ती मीटिंग हुई। इस दौरान सचिन पायलट ने राजस्थान वापस जाने की अपनी इच्छा जाहिर कर दी। सूत्रों के अनुसार, पायलट ने राहुल गांधी से कहा कि उन्हें अब दिल्ली की राजनीति से छुट्टी दी जाए और उनके गृह प्रदेश राजस्थान की जिम्मेदारी सौंप दी जाए। हालांकि, राहुल गांधी और कांग्रेस की तरफ से इस मामले पर अभी तक निर्णय नहीं हो पाया है। पायलट के लिए अब दोहरी चुनौती राजस्थान में कांग्रेस की राजनीति के दो बड़े चेहरे हैं। कांग्रेस की धुरी पहले सचिन पायलट और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच ही घूमती थी, लेकिन अब इसमें एक और बड़ा नाम पिछले कुछ सालों में उभरकर सामने आया है। तीसरी धुरी का नाम है गोविंद सिंह डोटासरा, जो वर्तमान में राजस्थान कांग्रेस के मुखिया हैं। सचिन पायलट और गहलोत ग्रुप पहले से ही राजस्थान में अपनी धाक जमाए हुए है, अध्यक्ष बनने के बाद डोटासरा ने भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करवा दी है। ऐसे में सचिन पायलट की राजस्थान वापसी आसान नहीं है। क्योंकि अशोक गहलोत ही सचिन पायलट के लिए चुनौती हैं, और अब तीसरा मोर्चा भी उनके सामने खड़ा हो गया है। साल 2023 में हुए विधानसभा चुनावों में सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच तकरार खुलकर सामने आई थी। इन चुनावों में सचिन पायलट चाहते थे कि उन्हें सीएम फेस बनाया जाए, और अशोक गहलोत खुद को सीएम फेस मानकर चल रहे थे। दोनों के बीच की तकरार का कांग्रेस को नुकसान भी हुआ। नतीजा यह रहा कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की बुरी तरह हार हुई और भाजपा ने जीतकर अपनी मुख्यमंत्री बना लिया।

विधानसभा का बजट सत्र 28 जनवरी से, 2 बच्चों की बाध्यता हटाने वाला बिल होगा पास

जयपुर  राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू होने जा रहा है और राज्यपाल की मंजूरी के बाद विधानसभा सचिवालय ने बजट सत्र बुलाने की अधिसूचना जारी कर दी है। सभी विधायकों को इसकी सूचना भेजीहै। बजट सत्र की शुरुआत 28 जनवरी को राज्यपाल के अभिभाषण से होगी और यह सत्र मार्च तक चलेगा।अभिभाषण में राज्यपाल सरकार की प्रमुख उपलब्धियों के बारे में बताएंगे और फरवरी के पहले सप्ताह में बजट पेश होने की संभावना है। राज्यपाल का अभिभाषण और फिर दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि देने के बाद कार्यवाही स्थगित होगी। इसके बाद कार्य सलाहकार समिति की बैठक होगी और इसमें बजट सत्र का कामकाज तय होगा। बजट में सरकार नए कार्यक्रमों की घोषणा करने के साथ कई नई योजनाएं शुरू करने का ऐलान करेगी। इस सत्र में सबसे अहम पंचायतीराज और शहरी निकाय चुनावों में दो बच्चों की बाध्यता हटाने के लिए बिल लाने की तैयारी है। बजट सत्र में पंचायतीराज कानून और नगरपालिका कानून में संशोधन करने के लिए बिल लाए जाएंगे। इसके अलावा भी कई नए बिल और आ सकते हैं। विधानसभा का बजट सत्र हंगामेदार रहने की पूरी संभावना है और विपक्ष कई मुद्दों पर सरकार को घेरेगा। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने अपने विधायक दल से मिलकर सरकार को घेरने की पूरी तैयारी कर ली है।  

CTH और बफर क्षेत्र निर्धारण पर विवाद, सरिस्का में 9 जनवरी को होंगी विशेष ग्राम सभाएं

अलवर सरिस्का टाइगर रिजर्व के क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट (CTH) और बफर क्षेत्र के निर्धारण को लेकर जिला प्रशासन ने अहम प्रक्रिया शुरू की है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी की अनुशंसाओं के अनुपालन में 9 जनवरी को सरिस्का से जुड़े ग्राम पंचायत क्षेत्रों में विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाएगा। इस संबंध में जिला कलेक्टर डॉ. आर्तिका शुक्ला ने जानकारी देते हुए बताया कि इन ग्राम सभाओं का उद्देश्य प्रस्तावित सीमा निर्धारण पर ग्रामीणों से सुझाव, परामर्श और आपत्तियां प्राप्त करना है। कलेक्टर ने बताया कि ग्राम सभाओं में वन विभाग के अधिकारी और प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे, जो सरिस्का टाइगर रिजर्व के प्रस्तावित नक्शों, सीटीएच और बफर क्षेत्र की सीमाओं तथा उनके प्रभावों की विस्तृत जानकारी ग्रामीणों को देंगे। यदि किसी ग्रामीण को इस प्रस्ताव पर कोई आपत्ति है या कोई सुझाव देना है, तो वह उसी दिन ग्राम सभा में अपनी बात दर्ज करा सकता है। जिला प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि 9 जनवरी के बाद प्राप्त होने वाले किसी भी सुझाव या आपत्ति पर विचार नहीं किया जाएगा। प्रशासन ने क्षेत्रवासियों से अपील की है कि वे इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लें, ताकि वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय लोगों के हितों के बीच संतुलन बनाया जा सके। वन विभाग द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव के अनुसार सरिस्का टाइगर रिजर्व के अंतर्गत 9,091.22 हेक्टेयर क्षेत्र को क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट और 4,753.63 हेक्टेयर क्षेत्र को बफर जोन के रूप में चिन्हित किया गया है। वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 38 (V) के तहत इस तरह के किसी भी बदलाव से पहले संबंधित ग्राम सभाओं से परामर्श लेना अनिवार्य है। इसी कानूनी प्रावधान के तहत यह विशेष ग्राम सभाएं आयोजित की जा रही हैं, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और नियमों के अनुरूप रहे। इस बीच सरिस्का के प्रस्तावित क्षेत्र निर्धारण को लेकर राजनीतिक विवाद भी गहराता नजर आ रहा है। राजस्थान विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरिस्का टाइगर रिजर्व के 4,839.07 हेक्टेयर सीटीएच क्षेत्र को बफर एरिया में बदलने के प्रस्ताव पर कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने इस संबंध में जिला कलेक्टर अलवर को एक विस्तृत प्रतिवेदन सौंपते हुए इस पूरी प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग की है। जूली ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि राज्य सरकार का यह कदम 17 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेशों का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट वे संवेदनशील क्षेत्र होते हैं, जिन्हें बाघों के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक आधार पर पूरी तरह सुरक्षित और अक्षुण्ण रखा जाना आवश्यक है। इन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार का भौगोलिक या प्रशासनिक बदलाव वन्यजीव संरक्षण के मूल उद्देश्य के विपरीत है। नेता प्रतिपक्ष ने यह भी आशंका जताई कि सीटीएच को बफर क्षेत्र में बदलने के पीछे का वास्तविक उद्देश्य क्षेत्र की 50 से अधिक बंद पड़ी खदानों को पुनः शुरू करना है। उन्होंने मालाखेड़ा, उमरैण और थानागाजी उपखंडों के दर्जनों गांवों और क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस बदलाव से पर्यावरण, वन्यजीव और स्थानीय ग्रामीणों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। फिलहाल 9 जनवरी को होने वाली ग्राम सभाओं पर सभी की निगाहें टिकी हैं, क्योंकि इन्हीं सभाओं के जरिए सरिस्का टाइगर रिजर्व के भविष्य से जुड़े अहम निर्णयों की दिशा तय होगी।