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लिव-इन में रहने वालों को संरक्षण देना राज्य का दायित्व: हाईकोर्ट का बड़ा बयान

चंडीगढ़ पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक फैसला देते हुए कहा कि लिव-इन में रहने वाले दो वयस्कों की सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य का दायित्व है, भले ही उनमें से एक साथी शादीशुदा ही क्यों न हो। अदालत ने यह साफ किया कि संविधान का अनुच्छेद-21 हर व्यक्ति को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देता है और यह अधिकार किसी भी रिश्ते की नैतिक या सामाजिक स्वीकार्यता पर निर्भर नहीं करता। निर्णय उस याचिका पर आया जिसमें एक महिला और एक पुरुष ने अपने परिवारों और परिचितों से खतरा महसूस होने का दावा करते हुए सुरक्षा की मांग की थी। महिला पहले से शादीशुदा थी और उसका एक बच्चा भी है, जबकि पुरुष अविवाहित है। दोनों ने बताया कि वे अपनी मर्जी से साथ रह रहे हैं लेकिन स्वजन से उन्हें खतरा है।   मेवात निवासी याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट से अनुरोध किया कि पुलिस उनकी शिकायत पर उचित कार्रवाई करे और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य को अपनी नैतिक राय थोपने का अधिकार नहीं है और न ही सामाजिक असहमति किसी व्यक्ति के बुनियादी अधिकारों को कमजोर कर सकती है। अदालत ने यह भी कहा कि दो वयस्कों के बीच संबंध यदि सहमति से है तो उसे केवल इसलिए असुरक्षित नहीं माना जा सकता कि उनमें से एक शादीशुदा है। अदालत ने जोर दिया कि जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा अदालतों और प्रशासन दोनों का मूल दायित्व है। हाई कोर्ट ने संबंधित जिला पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ताओं द्वारा दी गई शिकायत का मूल्यांकन करें और यदि खतरे की आशंका सही पाई जाए, तो तुरंत आवश्यक सुरक्षा प्रदान करें। साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सुरक्षा देने का यह आदेश किसी भी पक्ष को आपराधिक या सिविल कार्यवाही से छूट नहीं देता। यदि कानून के उल्लंघन का कोई मुद्दा सामने आता है, तो संबंधित पक्ष सामान्य कानूनी उपाय अपना सकते हैं।  

डिजिटल रजिस्ट्री का कमाल: सिर्फ 21 दिनों में पार हुए 10 हजार का आंकड़ा, एक दिन में बना राज्यस्तरीय रिकॉर्ड

चंडीगढ़ राज्य में नवंबर के पहले 21 दिन में 10,450 प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन पेपरलेस हुए हैं। राज्य के डिजिटल लैंड-रजिस्ट्री सिस्टम ने एक दिन में नया रिकॉर्ड बनाया, इसमें बिना कागज के 1,659 रजिस्ट्रेशन प्रोसेस किए गए। अब बेहतर वर्कफ्लो के लिए अब सिस्टम अपग्रेडेड कर सॉफ्टवेयर को काफी मजबूत किया गया है। 1 से 21 नवंबर के बीच लोगों ने प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के लिए ऑनलाइन 9,365 अपॉइंटमेंट बुक किए। अब तक कुल 10,450 अपॉइंटमेंट हो गए। इनमें से बीते 3 सप्ताह में 8,338 डीड अप्रूव व कुल 9,260 डीड अप्रूव हो गए हैं। सिस्टम अब रोज करीब 1,500 डीड प्रोसेस कर रहा है, एक दिन में औसतन 1,659 रजिस्ट्रेशन का रिकॉर्ड प्लेटफॉर्म की बेहतर कैपेसिटी है। पोर्टल पर ऑफिसर-साइड फीचर्स को भी अपग्रेड किया गया है। खेवट व विलेज ब्लॉकिंग चालू कर दी गई है, इससे सभी जिलों में अपॉइंटमेंट शेड्यूलिंग आसान हो गई है।  सिस्टम में अब आरसी और सब-रजिस्ट्रार के दोनों डैशबोर्ड पर डीड वेरिफिकेशन सही ढंग से दर्शाता है। अब तहसीलदार अपने लॉगिन से सीधे टोकन वापस कर सकते हैं। वितायुक्त राजस्व एवं आपदा प्रबंधन डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि नागरिकों को बेवजह फाइनेंशियल नुकसान से बचाने के लिए स्टाम्प ड्यूटी कैलकुलेशन, टोकन डिडक्शन और डॉक्यूमेंट को प्रभावित करने वाली कई दिक्कतें पहले ही हल कर दी गई हैं।  

सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी! हरियाणा की कैशलेस स्वास्थ्य योजना में बड़ा सुधार

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने अपने कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए बागवानी और मत्स्य पालन विभाग के कर्मचारियों को भी व्यापक कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा (CCHFE) योजना में शामिल कर लिया है। इस योजना के तहत राज्य के रेगुलर कर्मचारी, पेंशनर और उनके आश्रित बिना किसी पूर्व भुगतान के कैशलेस स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ ले सकेंगे। यह योजना 1 नवंबर 2023 से प्रदेश में सफलतापूर्वक लागू है और अब इसके दायरे का विस्तार किया गया है। सरकार ने इस संबंध में प्रदेश के सभी जिलों के सिविल सर्जनों को निर्देश जारी किए हैं।   जारी नोटिफिकेशन में बताया गया है कि डीजीएचएस (DGHS) के पैनल में शामिल 447 अस्पतालों को पहले ही HEM 2.0 पोर्टल पर इंटीग्रेट किया जा चुका है। इसके साथ ही निर्देश दिए गए हैं कि डीजी कार्यालय के पैनल में शामिल शेष अस्पताल स्वयं HEM पोर्टल पर पैनल प्रकार विकल्प में “CCHFE” चुनकर आवेदन भेजें। इससे उन्हें कैशलेस योजना के तहत शामिल किया जा सकेगा और कर्मचारी आसानी से उनका लाभ उठा सकेंगे। नोटिफिकेशन में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी अस्पताल को व्यापक कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा योजना में अलग से शामिल करने का अधिकार राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (SHA) के पास नहीं होगा। केवल DG कार्यालय के पैनल में शामिल अस्पताल ही HEM पोर्टल पर अप्लाई करके सिस्टम का हिस्सा बन सकेंगे। सिविल सर्जनों को यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि उनके जिलों में सूचीबद्ध सभी अस्पतालों के आवेदन समय पर पोर्टल पर अपलोड हों ताकि किसी भी पात्र कर्मचारी, पेंशनर या आश्रित को योजना का लाभ लेने में कोई परेशानी न आए। सरकार का कहना है कि इस कदम से हजारों कर्मचारियों और पेंशनरों को उपचार में और अधिक सुविधा व पारदर्शिता मिलेगी। निर्देशों में यह भी उल्लेख है कि सिविल सर्जन यह सुनिश्चित करें कि योजना के अंतर्गत आने वाले सभी पात्र लाभार्थियों का उपचार कैशलेस मोड में ही हो, जिससे उन्हें आर्थिक बोझ न पड़े।  

KFC रेस्टोरेंट को उड़ाने की धमकी! हिसार पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा

हरियाणा  हिसार के हांसी के रामायण टोल प्लाजा के पास स्थित KFC रेस्टोरेंट को उड़ाने की धमकी मिलने के बाद पुलिस प्रशासन सतर्क हो गया है। पुलिस मुख्यालय में एक अज्ञात व्यक्ति ने फोन कर यह धमकी दी, जिसके बाद मामले की जांच तेज कर दी गई है। शुरुआती जांच में पता चला है कि कॉल करने वाले की लोकेशन सोनीपत क्षेत्र की है, जबकि जिस मोबाइल नंबर पर कॉल रजिस्टर्ड है, वह बरवाला इलाके का निकला।  संभव है कॉल मजाक में की गई हो: हांसी SP हांसी SP अमित यशवर्धन ने बताया कि धमकी किस KFC रेस्टोरेंट को लेकर दी गई है, यह स्पष्ट किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संभव है कॉल मजाक में की गई हो, लेकिन पुलिस किसी भी स्थिति को हल्के में नहीं ले रही है और पूरी सावधानी बरती जा रही है। आम नागरिकों से अपील  सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस टीमों को सतर्क कर संबंधित स्थानों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। साथ ही साइबर सेल को सक्रिय कर कॉल का तकनीकी विश्लेषण शुरू कर दिया गया है, ताकि आरोपी की सटीक लोकेशन और पहचान की पुष्टि की जा सके। पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि अफवाहों से बचें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।

डॉक्टर की ‘ना-खड़े होने’ वाली घटना पर बवाल, हाई कोर्ट ने सुनाया कड़ा निर्णय

हरियाणा पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने कोविड ड्यूटी पर तैनात सरकारी डॉक्टर के खिलाफ केवल इसलिए कार्रवाई किए जाने पर निराशा जताई, क्योंकि वह इमरजेंसी वार्ड में विधायक के आने पर खड़ा नहीं हुआ था। अदालत ने कहा कि यह राज्य का असंवेदनशील और बेहद चिंताजनक रवैया दिखाता है। जज अश्विनी कुमार मिश्रा और जज रोहित कपूर की पीठ ने कहा कि समर्पित चिकित्सीय पेशेवरों के साथ होने वाली ऐसी अवांछित घटनाओं पर रोक लगनी चाहिए। अदालत ने हरियाणा के अधिकारियों को निर्देश दिया कि डॉक्टर को स्नातकोत्तर चिकित्सीय पाठ्यक्रम के लिए जरूरी अनापत्ति प्रमाणपत्र तुरंत जारी किया जाए। उसने राज्य पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।   याचिकाकर्ता डॉ. मनोज हरियाणा सरकार के कैजुअल्टी मेडिकल ऑफिसर थे और कोविड-19 महामारी के दौरान सरकारी अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में ड्यूटी पर थे। डॉक्टर की याचिका के अनुसार, एक दिन अस्पताल का निरीक्षण करने आए विधायक इस बात पर नाराज हो गए कि डॉक्टर ने उनके आने पर उठकर उनका अभिवादन नहीं किया। इसके बाद राज्य सरकार ने 2016 के हरियाणा सिविल सर्विसेज नियमों के तहत चिकित्सक को मामूली सजा देने का प्रस्ताव रखा और उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया। डॉ. मनोज ने जून 2024 में अपना जवाब दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि वह विधायक को पहचान नहीं पाए थे। इसलिए वह खड़े नहीं हुए और उन्होंने ऐसा जानबूझकर नहीं किया था। कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा डॉक्टर के अनुसार, आज तक इस मामले में कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया गया है। अदालत ने कहा, ‘हमें राज्य की ओर से उठाए गए इस कदम पर आश्चर्य और निराशा है कि कोविड काल के दौरान आपातकालीन ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर को केवल इसलिए नोटिस जारी किया गया, क्योंकि वह विधायक के आने पर खड़े नहीं हुए। किसी डॉक्टर से यह उम्मीद करना कि वह इमरजेंसी वार्ड में विधायक के आने पर खड़ा हो और ऐसा न करने पर उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करना बेहद व्यथित करने वाला है।’ पीठ ने कहा कि हमारी नजर में इस तरह के आरोप पर चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई करना राज्य की असंवेदनशीलता दिखाता है। उसने कहा कि चिकित्सक को एनओसी न देकर उसे उच्च शिक्षा के अधिकार से वंचित रखा पूरी तरह मनमाना रवैया है। 'ऐसी घटनाओं पर सख्ती से रोक लगे' अदालत ने कहा, ‘हमें दुख के साथ यह कहना पड़ रहा है कि अखबारों में अक्सर समाचार आते हैं कि मरीजों के परिजन या जनप्रतिनिधि चिकित्सकों के साथ बिना किसी ठोस कारण के दुर्व्यवहार करते हैं। अब समय आ गया है कि ऐसी अवांछित घटनाओं पर सख्ती से रोक लगाई जाए और ईमानदार डॉक्टरों को पर्याप्त सम्मान दिया जाए।’ अदालत ने कहा कि राज्य सरकार चिकित्सक को तुरंत एनओसी जारी करे। उसने कहा कि याचिका स्वीकार की जाती है और राज्य सरकार को 50 हजार रुपये का जुर्माना PGIMER, चंडीगढ़ के गरीब मरीज कल्याण कोष में जमा करना होगा।  

पोस्टरों पर कालिख पोतने का मामला तूल पकड़ा, नूंह पुलिस ने पांच आरोपियों को दबोचा

नूंह  नूंह के नए बस स्टैंड पर कांग्रेस के कुछ युवा कार्यकर्ताओं द्वारा सरकारी बसों पर लगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नायब सैनी के पोस्टरों पर कालिख पोतने का मामला तूल पकड़ गया है। घटना के तुरंत बाद शहर थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पाँच युवकों को गिरफ़्तार किया है। पुलिस के अनुसार हिरासत में लिए गए युवकों की पहचान हारिस पुत्र जाकिर निवासी बिसरू, आमिर पुत्र नूर मोहम्मद निवासी आकेड़ा, वासिद पुत्र शमसुद्दीन निवासी चंदेनी, अफाक पुत्र इलियास निवासी सालाहेडी और यूथ कांग्रेस के जिला अध्यक्ष मुबीन पुत्र पलटू निवासी तेड के रूप में हुई है। सभी पर आरोप है कि उन्होंने बस स्टैंड पर खड़ी सरकारी बसों पर लगे पीएम और सीएम के पोस्टरों पर कालिख पोती। हरियाणा रोडवेज़ के ड्राइवर कासम की शिकायत पर पुलिस ने सरकारी कार्य में बाधा डालने समेत संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। गिरफ्तार युवकों ने पुलिस को बताया कि 19 नवंबर की रात उन्हें जिला अध्यक्ष मुबीन तेडीया का फोन आया था। उन्होंने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष यूथ कांग्रेस निशित कटारिया और अन्य पदाधिकारी 20 नवंबर को नूंह आने वाले हैं और बस स्टैंड पर कार्यक्रम रखा गया है। युवकों के अनुसार जब वे बस स्टैंड पहुँचे तो वहाँ प्रदेश अध्यक्ष निशित कटारिया, सह प्रभारी प्रियंका चंडाल और कई यूथ कांग्रेस कार्यकर्ता पहले से मौजूद थे। बताया गया कि कटारिया अपने साथ काली स्प्रे लेकर आए थे और उसी से सरकारी बसों पर लगे पोस्टरों पर कालिख पोती गई। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची, बसों की जांच की और आरोपियों को मौके से हिरासत में ले लिया। इस घटना के बाद स्थानीय राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है। भाजपा समर्थक इसे सरकारी संपत्ति का अपमान बता रहे हैं, जबकि कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि युवाओं पर की गई कार्रवाई पक्षपातपूर्ण और मनमानी है।

यमुनानगर में सीजन की पहली घनी धुंध, हाईवे पर वाहनों की रफ्तार थमी

यमुनानगर  यमुनानगर में सर्दी ने दस्तक दे दी है और इस सीजन की पहली घनी धुंध ने पूरे जिले को अपनी सफेद चादर में समेट लिया। गुरुवार सुबह लोगों ने जैसे ही घरों से बाहर कदम रखा, हवा में ठंडक और नमी ने साफ संकेत दे दिया कि मौसम अब पूरी तरह बदल चुका है। धुंध के कारण हाईवे सहित कई स्थानों पर विजिबिलिटी काफी कम रही, जिसके चलते वाहन चालकों को धीमी गति से सफर करना पड़ा। मौसम में बदलाव का अहसास सुबह के समय ठंडी हवा और गाढ़ी नमी ने लोगों को सर्दियों के आगमन का एहसास कराया। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में तापमान में और गिरावट दर्ज की जा सकती है। धुंध के कारण सड़क हादसों की आशंका बढ़ने की वजह से प्रशासन ने भी वाहन चालकों से सावधानी बरतने की अपील की है। किसानों के लिए वरदान साबित हो रही धुंध  किसानों के लिए यह धुंध किसी वरदान से कम नहीं है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि धुंध से बनने वाली नमी रबी की फसलों—विशेषकर गेहूं और सरसों—के लिए काफी फायदेमंद है। इससे जमीन की नमी बरकरार रहती है और फसलों को प्राकृतिक सुरक्षा मिलती है, जिससे उपज में सुधार की संभावना बढ़ जाती है। प्रदूषण स्तर में भी गिरावट धुंध और ठंडक के कारण प्रदूषण स्तर में भी हल्की गिरावट देखी गई है। नमी और ठंड हवा में मौजूद प्रदूषक कणों को नीचे बैठने में मदद करती है, जिससे वातावरण कुछ हद तक साफ महसूस होता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह अस्थायी सुधार है। शांत और सुकूनभरी शुरुआत कुल मिलाकर, यमुनानगर में पड़ी इस पहली घनी धुंध ने सर्दी के मौसम की शांत और सुकूनभरी शुरुआत कर दी है। जहां एक ओर यह लोगों को सावधानी बरतने का संदेश दे रही है, वहीं किसानों के लिए उम्मीद की किरण बनकर आई है।  

आनंदपुर साहिब गुरुघर के अनुभव के साथ तैयार होगा PM मोदी का समागम स्थल

कुरुक्षेत्र गीता उपदेश स्थली ज्योतिसर व इंदबड़ी की करीब 170 एकड़ धरा पर गुरु तेग बहादुर जी का 350वां शहीदी समागम बेहद खास रहेगा। 25 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन के चलते यहां विशेष तैयारी की जा रही है। संगत को यहां पहुंचते ही पंजाब के रूपनगर स्थित और सिख धर्म के सबसे पवित्र स्थानों में से एक माने जाने वाले आनंदपुर साहिब गुरुघर का अनुभव होगा। इसकी थीम पर ही समागम की तैयारी की जा रही है, पूरे समागम स्थल को गुरुघर का रूप दिया जाएगा। आनंदपुर साहिब में श्री गुरु तेग बहादुर जी और श्री गुरु गोविंद सिंह जी रहे थे और यहीं सन् 1699 में गुरु गोविंद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। यहां तख्त श्री केसगढ़ साहिब है, जो सिख धर्म के पांच तख्तों में से तीसरा है। ऐसे में इस समागम स्थल को भी उसी तर्ज पर सजाया जाएगा। एचएसजीएमसी प्रधान जगदीश सिंह झींडा का कहना है कि यहां संगत को पूरी तरह से गुरुघर का अहसास होगा। समागम स्थल के लिए वॉटरबॉडी से गुजरेगी संगत वाहनों की आवाजाही नेशनल हाईवे 152 डी की ओर से रखी जाएगी और यहां पहुंचते ही इंदबड़ी की ओर पार्किंग होगी। पार्किंग के साथ ही प्रवेश द्वार होगा। इसके बाद संगत विशेष तौर पर तैयार की जा रही वॉटर बॉडी से गुजरते हुए समागम स्थल में प्रवेश करेगी। इसी समागम स्थल के दोनों ओर लंगर हॉल होंगे। वहीं, समागम के मुख्य पंडाल के करीब 150 मीटर दूरी पर ही तीन हेलिपेड का निर्माण भी शुरू कर दिया गया है। इन हेलिपेड को मुख्य पंडाल, पिहोवा रोड और ज्योतिसर गांव की सड़क से भी जोड़ा जाएगा। इसके लिए तीनों ओर सड़क तैयार की जाएगी। यही नहीं इंदबड़ी जाने वाली सड़क से लेकर मुख्य पंडाल तक भी एक सड़क तैयार की जाएगी। प्रदर्शनी में बयां होगा पूरा संघर्ष मुख्य पंडाल के साथ ही 30 बाई 60 मीटर एरिया में प्रदर्शनी तैयार की जा रही है जिसका 50 फीसदी से ज्यादा कार्य पूरा किया जा चुका है। इसमें श्री गुरु तेग बहादुर जी व उनके परिवार के पूरे जीवन व संघर्ष को चित्रों के जरिये दर्शाया जाएगा। यही नहीं पंजाबी, हिंदी और अंग्रेजी में पूरा विवरण भी दर्ज होगा। 100 से ज्यादा हट कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा से लेकर अन्य कर्मियों के लिए 100 से ज्यादा हट तैयार की गई हैं। वहीं, सीसीटीवी कंट्रोल रूम और बिजली सप्लाई रूम तैयार किए जा रहे हैं।

पराली प्रबंधन में बड़ा बदलाव: ईंट-भट्ठों को ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति, उल्लंघन पर सख्त कदम

हिसार  खेतों में पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए अब इसका उपयोग ईंट-भट्ठों में ईंधन के तौर पर किया जाएगा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के निर्देश पर कृषि विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पराली के निपटान की नई योजना तैयार की है। इसके तहत हर जिले की पराली वहीं उपयोग की जाएगी और प्रबंधन पर अतिरिक्त खर्च भी नहीं आएगा। साथ ही ईंट भट्ठों में कोयले की खपत भी कम होगी। प्रदेश के करीब 2480 ईंट-भट्ठों पर यह आदेश लागू होंगे। पराली के निपटान को लेकर सीपीसीबी ने ईंट भट्ठों में इसके उपयोग का प्रस्ताव दिया था, जिसे प्रदेश सरकार ने मंजूरी देकर लागू कर दिया है। इसी वर्ष से ईंट भट्ठों में 20 प्रतिशत पराली जलाना अनिवार्य कर दिया गया है। पराली को सीधे जलाने की बजाय इसे कंप्रेस कर पैलेट और ब्लॉक बनाया जाएगा। जिला स्तर पर नामित एजेंसियां पराली को इकट्ठा कर पैलेट तैयार करेंगी। यह पैलेट कोयले की तरह ही ऊर्जा देंगे और भट्ठा संचालकों के लिए सस्ता विकल्प साबित होंगे। इस संबंध में ईंट भट्ठा मालिकों को निर्देश जारी किए जा चुके हैं। निगरानी सख्त, नियम तोड़ने पर होगी कार्रवाई सीपीसीबी की ओर से इन आदेशों की पालना सुनिश्चित करने के लिए औचक निरीक्षण किए जाएंगे। निरीक्षण में यह जांचा जाएगा कि भट्ठा मालिक किस प्रकार का ईंधन और कितनी मात्रा में उपयोग कर रहे हैं। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड संयुक्त रूप से जांच करेंगे। मानकों का पालन न करने पर संबंधित ईंट भट्ठे का लाइसेंस निलंबित किया जा सकता है और जुर्माना भी लगाया जाएगा। थर्मल में लागू हो चुके आदेश इससे पहले प्रदेश के थर्मल पावर प्लांट में पराली पैलेट्स जलाने के आदेशाें को लागू किया जा चुका है। इसमें पहले चरण में 10 प्रतिशत तक पराली का उपयोग किया जा रहा है। दूसरे चरण में इसे 20 प्रतिशत तक किया जाएगा। हिसार खेदड़ थर्मल पावर प्लांट में 2024 से इस नियम को लागू किया जा चुका है। पिछले चार साल से हिसार में धान का एरिया लगातार बढ़ रहा है। इस बार जिले में धान का रकबा 3 लाख 30 हजार एकड़ था। पराली जलाने का लक्ष्य नवंबर 2025 से 20 प्रतिशत नवंबर 2026 से 30 प्रतिशत नवंबर 2027 से 40 प्रतिशत नवंबर 2028 से 50 प्रतिशत अधिकारी के अनुसार हिसार जिले में 8 एजेंसी पैलेट बनाने काम कर रही हैं। अन्य जिलों में भी पैलेट्स तैयार किए जा रहे हैं। कृषि अवशेषों से बने पैलेट प्रयोग ईंट-भट्ठों में करने के बारे में निर्देश जारी किए गए हैं। मुख्यालय से मिले निर्देशों की पालना कराई जाएगी। इस बारे में जिला स्तर से रिपोर्ट बनाकर भेजी जाएगी। -अमित शेखावत, जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी, हिसार।

कुरुक्षेत्र में SBI में बड़ा कैश लॉस: ₹40 लाख गायब, CCTV में मिली अहम जानकारी, दो कर्मचारियों पर FIR

कुरुक्षेत्र  हरियाणा के कुरुक्षेत्र की स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की पिहोवा ब्रांच से 40 लाख रुपए के नोट की गड्डियां गायब होने का मामला सामने आया है। यह खुलासा तब हुआ, जब ब्रांच मैनेजर ने रूटीन जांच की और पुरानी CCTV फुटेज खंगाली। इस घटना में बैंक के ही दो कर्मचारियों पर नोट गायब करने का आरोप है। रूटीन जांच में हुआ कैश गायब होने का खुलासा ब्रांच मैनेजर तरसेम लाल ने बताया कि 18 नवंबर सुबह करीब 9:30 बजे बैंक में रूटीन निरीक्षण के दौरान करेंसी चेस्ट (बिन नंबर 26) की जांच की गई। रिकॉर्ड के अनुसार इस बिन में 500 रुपए के 90 गड्डियां होनी चाहिए थीं, लेकिन चेस्ट में केवल 82 गड्डियां ही मिलीं। इससे कुल 40 लाख रुपए गायब पाए गए। कैश ऑफिसर और अकाउंटेंट की जिम्मेदारी गायब नोटों के मामले में कैश ऑफिसर रवि कुमार और अकाउंटेंट करण पाल से पूछताछ की गई। इन दोनों को बैंक की करेंसी चेस्ट की जिम्मेदारी दी गई थी और इनके पास ही चेस्ट की चाबियां थीं। दोनों कर्मी पूछताछ में संतोषजनक जवाब देने में असफल रहे।      गड्डियां गायब होने की बात सामने आई। इसमें बैंक के ही 2 कर्मियों पर गड्डियां गायब करने का आरोप लगा। ब्रांच मैनेजर के पुरानी सीसीटीवी फुटेज देखने पर मामले का खुलासा हुआ।     500 रुपए के नोट की 8 गड्डियां गायबः ब्रांच मैनेजर तरसेम लाल के मुताबिक 18 नवंबर सुबह करीब 9:30 बजे बैंक में रूटीन जांच की गई। इस जांच में करेंसी चेस्ट के बिन नंबर 26 का निरीक्षण किया गया। बैंक रिकॉर्ड में इस बिन में 90 गड्डियां (हर बंडल में 1 हजार नोट) 500 रुपए के नोट होने चाहिए थे, लेकिन चेस्ट में सिर्फ 82 गड्डियां मिलीं।     कैश ऑफिसर-अकाउंटेंट पर थी जिम्मेदारीः इन 8 गड्डियों के गायब होने से बैंक के 40 लाख रुपए कम पाए गए। इस पर मैनेजर ने कैश ऑफिसर रवि कुमार और अकाउंटेंट करण पाल से पूछताछ की। इन दोनों को बैंक की ओर से करेंसी चेस्ट की जिम्मेदारी दी गई थी। साथ ही उनके पास ही चेस्ट की चाबियां होती है।     CCTV फुटेज से खुलासाः पूछताछ में दोनों कर्मी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए, तब बैंक की CCTV फुटेज जांची गई। इससे खुलासा हुआ कि 10 नवंबर को आखिरी निकासी के बाद शेष बंडलों की सही जांच नहीं की। दोनों कर्मियों पर मिलीभगत करके कैश गायब करने का शक है।     कैशियर-अकाउंटेंट पर केस दर्जः ​​बैंक मैनेजर ने सीसीटीवी देखने के बाद पुलिस में शिकायत की। ​शिकायत पर पुलिस ने बैंक के कैश ऑफिसर रवि कुमार और अकाउंटेंट करण पा​​ल के खिलाफ FIR दर्ज की। कर्मियों की विभागीय जांच भी होगी। FIR के बाद जांच में जुटी पुलिस ब्रांच मैनेजर ने DSP पिहोवा निर्मल सिंह को घटना की शिकायत दी गई। उनकी शिकायत पर पुलिस ने थाना सिटी पिहोवा में रवि और करण पाल के खिलाफ BNS की धारा 316 (5) और 318 (4) के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी। CCTV फुटेज से खुलासा ब्रांच मैनेजर ने पुरानी CCTV फुटेज चेक की, जिससे पता चला कि 10 नवंबर को आखिरी निकासी के बाद शेष बंडलों की सही जांच नहीं की गई थी। फुटेज और घटनाक्रम से शक है कि दोनों कर्मियों ने मिलकर कैश गायब किया। FIR दर्ज और पुलिस जांच बैंक मैनेजर ने पुलिस में शिकायत की। DSP पिहोवा निर्मल सिंह की रिपोर्ट पर थाना सिटी पिहोवा में रवि कुमार और करण पाल के खिलाफ BNS की धारा 316 (5) और 318 (4) के तहत FIR दर्ज की गई। पुलिस इस मामले की जांच में जुटी हुई है। इसके अलावा कर्मियों पर विभागीय जांच भी होगी।