samacharsecretary.com

मसालेदार खाना छोड़कर भी हो सकता है एसिड रिफ्लक्स! इन 5 कारणों से रहें सतर्क

त्योहारों के समय में कुछ हैवी खा लेने या कई बार बिना कारण भी सीने में जलन होने लगती है। सीने में जलन या हार्टबर्न को एसिड रिफ्लक्स के रूप में भी जाना जाता है। इसमें अधपचा खाना गले या मुंह में लौटकर आने लगता है। इससे मुंह का स्वाद कड़वा हो जाता है। आइए जानते हैं, ऐसा क्यों होता है, इसकी पहचान और बचाव कैसे करें। क्यों बढ़ जाता है एसिड रिफ्लक्स का खतरा खाने में जरूरत से ज्यादा मसाले या मिर्च का इस्तेमाल एसिड रिफ्लक्स का कारण बन सकता है। इसके अलावा भी इसके कुछ कारण हो सकते हैं:     ओवरवेट होना या मोटापा     स्मोकिंग     प्रेग्नेंसी     कुछ खास दवाएं ये हैं लक्षण     सीने में जलन: पेट में मौजूद एसिड सीने में जलन पैदा करता है।     गले या मुंह का कड़वा स्वाद: सिर्फ एसिड ही नहीं कई बार अधपचा खाना भी वापस लौटकर आपके गले या मुंह में आ जाता है और कड़वेपन का एहसास होता है।     डकारें: खाना खाने के दौरान कई बार हवा भी अंदर चली जाती है। ऐसा होने से खाना पचने के दौरान गैस बनने लगती है। इससे डकारें आने लगती हैं।     सीने में दर्द: एसिड रिफ्लक्स का यह लक्षण हार्ट अटैक होने का संदेह पैदा करता है। लेकिन इन दोनों में अंतर किया जा सकता है।     गले में खराश या आवाज बदल जाना: पेट के एसिड की वजह से गले में खराश की समस्या भी हो सकती है। साथ ही यह आपके आवाज में भी बदलाव ला सकता है।     लगातार खांसी होना: एसिड रिफ्लक्स में ऐसा लगता है कि आपके गले में कुछ अटका हुआ है, लेकिन ऐसा ज्यादा म्युकस बनने की वजह से होता है। ऐसा होने से आप उसे बाहर निकालने की कोशिश करते हैं और आपको खांसी आती है। इन घरेलू उपायों से मिल सकती है राहत यदि एसिड रिफ्लक्स की समस्या लगातार बनी हुई तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं। कुछ घरेलू उपायों से भी इससे थोड़ी राहत पाई जा सकती है:-     दही: यह खाने की नली को आराम पहुंचाता है और यह पेट के लिए भी अच्छा माना जाता है।     केला: इसका अल्कलाइन गुण ज्यादा एसिड बनने से रोकता है।     दूध: इससे तत्काल के लिए सीने में जलन से राहत मिल सकती है।  

नारियल तेल बनाम कैस्टर ऑयल: कौन सा है आपके बालों के लिए सबसे फायदेमंद?

बालों की देखभाल की बात आती है तो तेल सबसे पहला और जरूरी उपाय माना जाता है। भारतीय परंपरा में तेल मालिश न सिर्फ बालों को पोषण देने के लिए बल्कि रिलैक्सेशन के लिए भी जरूरी रही है। हालांकि, ऐसे में अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है कि कौन-सा तेल बालों के लिए ज्यादा फायदेमंद है। नारियल तेल और अरंडी का तेल, जिसे कैस्टर ऑयल कहते हैं, दोनों ही अपनी-अपनी खूबियों के लिए जाने जाते हैं। लेकिन इन दोनों में से बालों के लिए क्या ज्यादा अच्छा है? आइए जानते हैं इस बारे में। नारियल तेल के फायदे नारियल तेल में लॉरिक एसिड और मीडियम-चेन फैटी एसिड्स पाए जाते हैं, जो बालों की जड़ों तक गहराई से पहुंचकर उन्हें मजबूत बनाते हैं। यह तेल-     डैंड्रफ कम करने में मददगार।     बालों को मुलायम और शाइनी बनाता है।     प्रोटीन लॉस को रोकता है, जिससे हेयर फॉल कम होता है।     हल्का होने के कारण आसानी से लग जाता है और रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए परफेक्ट है। किसके लिए बेहतर- पतले, रूखे और आसानी से झड़ने वाले बालों के लिए नारियल तेल परफेक्ट है। कैस्टर ऑयल के क्या फायदे हैं? अरंडी का तेल अपने गाढ़ेपन और पोषण क्षमता के लिए जाना जाता है। इसमें रिकिनोलिक एसिड और विटामिन-ई भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। ये सिर में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर करते हैं और बालों की जड़ों को एक्टिव करते हैं। यह तेल-     बालों की ग्रोथ को तेज करने में मदद करता है।     पतले और खाली होते स्कैल्प पर नए बाल आने में सहायक।     एंटी-फंगल गुणों के कारण स्कैल्प इन्फेक्शन से बचाव।     दोमुंहे बालों को कम करने और बालों को घना बनाने में कारगर। किसके लिए बेहतर- बहुत पतले, डैमेज्ड और हेयर थिनिंग से परेशान लोगों के लिए कैस्टर ऑयल बेस्ट माना जाता है। क्या है ज्यादा बेहतर? अगर आपके बाल कमजोर और झड़ने वाले हैं, तो कोकोनट ऑयल आपके लिए ज्यादा फायदेमंद रहेगा। वहीं अगर आप तेजी से बाल बढ़ाना चाहते हैं और घनापन पाना चाहते हैं, तो कैस्टर ऑयल आपके लिए सही ऑप्शन होगा। दरअसल, दोनों ही तेल अपने-अपने गुणों के कारण बालों के लिए बेहद फायदेमंद हैं। सबसे अच्छा तरीका है कि आप दोनों का मिक्स करके बालों में लगाएं, जिससे बाल मजबूत, लंबे और घने बनेंगे।  

OpenAI का Sora 2 लॉन्च: टेक्स्ट से अब वीडियो और ऑडियो बनाना हुआ आसान, Instagram और YouTube को मिलेगी टक्कर

नई दिल्ली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आज हमारी ज़िंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. चाहे दफ्तर का काम हो, पढ़ाई हो या फिर कंटेंट क्रिएशन, AI ने हर जगह अपनी पकड़ मज़बूत की है. अब इसी दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए OpenAI ने अपना सबसे एडवांस्ड वीडियो जेनरेशन मॉडल Sora 2 पेश किया है. इसके साथ ही कंपनी ने एक नया सोशल मीडिया ऐप भी लॉन्च किया है, जिसे सीधा-सीधा Instagram और YouTube का मुकाबला करने वाला माना जा रहा है. क्या है OpenAI Sora 2? Sora 2 एक ऐसा AI मॉडल है, जो सिर्फ टेक्स्ट प्रॉम्प्ट से वीडियो ही नहीं बल्कि ऑडियो के साथ पूरा सीन तैयार कर सकता है. मतलब, आप बस लिखेंगे और AI आपके लिए हाई-क्वालिटी वीडियो बना देगा. इस बार OpenAI ने इसमें एक नया फीचर Cameos भी जोड़ा है. इसकी मदद से यूज़र खुद को किसी भी AI जनरेटेड वीडियो का हिस्सा बना सकते हैं. यानी बिना कैमरा, शूटिंग या एडिटिंग के भी आप किसी भी वीडियो में नज़र आ सकते हैं. Sora 2 की खासियतें     Sora 2 अपने पुराने वर्जन से काफी एडवांस्ड है.     यह मॉडल वीडियो को ज्यादा रियलिस्टिक और नैचुरल बनाता है.     इसमें फिजिकली-एक्युरेट मोशन (यानी असली जैसी हरकतें) और सिंक्ड डायलॉग्स की सुविधा है.     बैकग्राउंड साउंड और म्यूज़िक भी काफी नेचुरल और इमर्सिव लगते हैं.     इससे बने वीडियो पहले की तुलना में कहीं ज्यादा लाइफ-लाइक और आकर्षक होते हैं. Sora 2 ऐप भी हुआ लॉन्च OpenAI ने इस मॉडल के साथ Sora 2 App भी पेश किया है. इस ऐप का इंटरफेस TikTok और Instagram Reels जैसा है, जिसमें Swipe-and-Scroll लेआउट दिया गया है.     यूजर्स केवल टेक्स्ट प्रॉम्प्ट डालकर वीडियो बना सकेंगे.     Cameos फीचर से खुद को भी वीडियो में शामिल करना संभव होगा.     ऐप पर पर्सनलाइज्ड रिकमेंडेशन के आधार पर ही कंटेंट दिखाई देगा, ठीक इंस्टाग्राम की तरह. फिलहाल यह ऐप सिर्फ Apple App Store पर अमेरिका और कनाडा में उपलब्ध कराया गया है, वह भी इनवाइट-ओनली सिस्टम के जरिए. यानी अभी हर कोई इसे तुरंत इस्तेमाल नहीं कर पाएगा. सोशल मीडिया को मिल सकती है टक्कर टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि Sora 2 का यह कदम आने वाले समय में YouTube, Instagram और TikTok जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स के लिए चुनौती बन सकता है. क्योंकि अब कंटेंट क्रिएशन और भी आसान हो जाएगा और कोई भी व्यक्ति केवल कुछ शब्द लिखकर प्रोफेशनल लेवल का वीडियो बना पाएगा.

एक तरफ Arattai की धड़ाधड़ डाउनलोडिंग, दूसरी ओर WhatsApp बीटा वर्जन में यूज़र्स परेशान

मुंबई  मैसेजिंग ऐप Arattai आजकल चर्चा में है. इस स्वदेशी ऐप का मुकाबला विदेशी ऐप WhatsApp से है. जहां आजकल Arattai डाउनलोडिंग में नए-नए रिकॉर्ड बना रहा है. वहीं यूजर्स से WhatsApp का एक वर्जन इंस्टॉल ना करने को कहा है.  दरअसल, WhatsApp के अपकमिंग फीचर को ट्रैक करने वाली वेबसाइट WABetainfo ने पोस्ट करके बताया है कि ये वर्जन इंस्टॉल ना करें, जिसके बाद कई यूजर्स ने रिपोर्ट की है कि उनके मैसेज डिसअपीयर हो रहे हैं. हालांकि ये हो सकता है कि UI Bug हो, जो मैसेज को डिस्प्ले होने से रोक रहा हो.  साथ ही पोस्ट में बताया है कि अगर आप ये वर्जन पहले अपडेट कर चुके हैं और आपके मैसेज नहीं दिखाई दे रहे हैं. इसके लिए जल्द ही एक नया अपडेट जारी किया जाएगा.  WABetaInfo का पोस्ट  देसी मैसेजिंग ऐप Arattai बना नंबर-1 Arattai अपने ऑफिशियल X अकाउंट पर पोस्ट करके पहले ही बता चुका है कि वह ऐप स्टोर पर सोशल नेटवर्किंग कैटेगरी में पहले नंबर-1 पहुंच गया है. एंड्रॉयड प्लेटफॉर्म पर इसे पहले ही काफी पसंद किया जा रहा है. इस ऐप को जोहो कॉर्पोरेशन ने डेवलप किया है.  काफी कुछ WhatsApp जैसा  Arattai मैसेजिंग ऐप में कई फीचर्स हैं, जो पहले आप व्हाट्सऐप में भी कई बार देखे जा चुके हैं. इसमें मैसेजिंग,कॉलिंग और वीडियो कॉलिंग जैसी सुविधा मिलती है. हालांकि कलर थीम आदि आपको Arattai की थोड़ी कमजोर नजर आ सकती हैं. आने वाले दिनों में इसमें कई और अपडेट मिलेंगे. Arattai में मिलता है मीटिंग का ऑप्शन  Arattai मैसेजिंग ऐप के अंदर का एक खास मीटिंग का ऑप्शन मिलता है. इसकी मदद से आप मीटिंग शेड्यूल कर सकते हैं और मौजूदा मीटिंग को जॉइन भी कर सकते हैं. यहां यूजर्स अपनी अपकमिंग मीटिंग को देख भी सकेंगे. 

सेहत का खजाना: पपीते के बीज से दूर होंगे कई रोग

पपीता एक ऐसा फल है जो स्वादिष्ट होने के साथ-साथ सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है, लेकिन अक्सर लोग इसके बीजों को बेकार समझकर फेंक देते हैं, जबकि पपीते के बीज भी एक पावरफुल सुपरफूड की तरह काम करते हैं। इनमें मौजूद पोषक तत्व जैसे फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट्स, एंजाइम्स, विटामिन और मिनरल्स शरीर को कई गंभीर बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं। आइए जानते हैं पपीते के बीजों से मिलने वाले कुछ जबरदस्त फायदों के बारे में। लिवर डिटॉक्स करें मदद पपीते के बीज लिवर को टॉक्सिन्स से मुक्त करते हैं और लीवर की कार्यक्षमता बढ़ाते हैं। ये फैटी लिवर और सिरोसिस जैसी समस्याओं से बचाव में सहायक हैं। किडनी को रखें हेल्दी बीजों में मौजूद एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व किडनी को इंफेक्शन और सूजन से बचाते हैं। नियमित सेवन से किडनी हेल्दी बनी रहती है। पाचन तंत्र को मजबूत बनाएं इनमें पाया जाने वाला पपेन एंजाइम डाइजेशन को बेहतर बनाता है और कब्ज, गैस जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है। डिटॉक्सिफिकेशन में मददगार पपीते के बीज शरीर से हानिकारक टॉक्सिन को बाहर निकालने में मदद करते हैं, जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। आंतों के कीड़ों से सुरक्षा पपीते के बीज परजीवियों को नष्ट करने की क्षमता रखते हैं, खासतौर पर बच्चों में पेट के कीड़ों की समस्या को दूर करते हैं। सूजन और दर्द से राहत प्राकृतिक एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण ये गठिया, जोड़ों के दर्द और सूजन में आराम पहुंचाते हैं। वजन घटाने में मददगार इन बीजों में फाइबर की भरपूर मात्रा मेटाबॉलिज्म को बढ़ाती है, जिससे फैट तेजी से बर्न होता है और वजन नियंत्रित रहता है। त्वचा को दें निखार जों में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स स्किन से टॉक्सिन्स को हटाते हैं, जिससे स्किन ग्लोइंग और हेल्दी बनी रहती है। कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करें इनमें हेल्दी फैट होता है जो शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) को घटाता है और हार्ट को हेल्दी बनाए रखता हैं। कैंसर से बचाव में सहायक पपीते के बीजों में मौजूद फेनोलिक और फ्लैवोनॉयड्स जैसे एंटीऑक्सीडेंट्स कुछ प्रकार के कैंसर से बचाने में सहायक साबित होते हैं। सावधानी भी है जरूरी पपीते के बीजों का सेवन सीमित मात्रा में करें। ज्यादा मात्रा में लेने से शरीर पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। इन्हें सुखाकर पाउडर बनाकर या हल्का चबाकर सेवन करना सुरक्षित होता है। अगली बार जब आप पपीता खाएं, तो इसके बीज न फेंके। इन्हें अपने डायट में शामिल कर आप कई बीमारियों से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।

त्वचा और बालों की समस्याओं का घर बैठे इलाज: जानें 4 असरदार देसी मसालों के फायदे

नई दिल्ली क्या आप जानते हैं कि आपकी रसोई में रखे कुछ साधारण मसाले आपकी त्वचा और बालों की कई समस्याओं का शानदार समाधान हो सकते हैं? हम अक्सर महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स पर हजारों रुपये खर्च करते हैं, लेकिन शायद ही कभी अपनी दादी-नानी के नुस्खों पर ध्यान देते हैं। दरअसल, हमारी रसोई में मौजूद हल्दी, दालचीनी, लौंग और मेथी जैसे मसाले सिर्फ खाने का स्वाद ही नहीं बढ़ाते, बल्कि इनमें ऐसे औषधीय गुण भी छिपे होते हैं, जो त्वचा और बालों को भीतर से पोषण देते हैं। डर्मेटोलॉजिस्ट डॉक्टर जुश्या भाटिया सरीन भी इन मसालों के गुणों की तारीफ करती हैं और इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल करने की सलाह देती हैं। आइए जानते हैं ये 4 देसी मसाले (Desi Spices For Skin And Hair) कैसे आपकी ब्यूटी के लिए वरदान साबित हो सकते हैं।   हल्दी हल्दी को आयुर्वेद में सदियों से एक शक्तिशाली औषधि माना गया है। इसमें मौजूद करक्यूमिन नामक तत्व में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं। ये गुण त्वचा के मुंहासे, दाग-धब्बे और सूजन को कम करने में मदद करते हैं, जिससे चेहरा साफ और चमकदार बनता है। इसके अलवा, यह स्कैल्प के हल्दी बनाती है, रूसी को कम करती है और हेयर फॉल को भी कम करने में मददगार साबित हो सकती है। दालचीनी दालचीनी की मीठी और तीखी खुशबू जितनी मनमोहक होती है, उतने ही कमाल के इसके फायदे भी हैं। यह ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाती है, जिससे त्वचा को पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषण मिलता है। इससे चेहरे पर एक प्राकृतिक और गुलाबी चमक आती है। बालों के लिए, दालचीनी बालों के रोम को मजबूत करती है, जिससे बालों का टूटना कम होता है और वे घने व चमकदार बनते हैं। लौंग लौंग में पाए जाने वाले एंटी-माइक्रोबियल और एंटी-फंगल गुण इसे त्वचा और स्कैल्प की समस्याओं के लिए एक बेहतरीन विकल्प बनाते हैं। यह मुंहासे पैदा करने वाले बैक्टीरिया से लड़ती है और त्वचा को साफ रखने में मदद करती है। बालों के मामले में, लौंग का तेल या पानी डैंड्रफ को कम करने में बहुत प्रभावी होता है, जिससे स्कैल्प हेल्दी रहता है और बालों की ग्रोथ अच्छी होती है। मेथी मेथी दाना, जिसे हम अक्सर तड़के में इस्तेमाल करते हैं, बालों के लिए एक 'सुपरफूड' है। इसमें प्रोटीन और निकोटिनिक एसिड भरपूर मात्रा में होते हैं, जो बालों के झड़ने को रोकने और उनकी ग्रोथ को बढ़ाने के लिए जाने जाते हैं। मेथी का पेस्ट बनाकर लगाने से बाल मजबूत, मुलायम और चमकदार बनते हैं।  

सेल का iPhone असली या नकली? इन 3 तरीकों से करें पहचानें

नई दिल्ली फेस्टिवल सीजन की शुरुआत हो चुकी है। फ्लिपकार्ट की बिग बिलियन डे सेल और अमेजन की ग्रेट इंडियन फेस्टिवल सेल से लोग खरीदारी कर रहे हैं। इन सेल्स में आप में से कई लोग iPhone पहले ही ऑर्डर कर चुके होंगे। जिन्होंने नहीं किया है, वे आईफोन ऑर्डर करने की सोच रहे होंगे। लेकिन जब बात ज्यादा कीमत वाले फोन की होती है तो हर किसी के मन में डर रहता है कि उन्हें कोई चूना न लगा दें। ऑनलाइन ऑर्डर करने में थोड़ा संकोच होना स्वाभाविक है। अच्छी बात ये है कि ओपन-बॉक्स डिलीवरी में डिलीवरी पर्सन यह सुनिश्चित करता है कि फोन सही हालत में हो, तभी आप OTP देते हैं। फिर भी,कुछ आसान तरीके हैं, जिनसे आप यह पक्का कर सकते हैं कि आपको असली और नया iPhone मिला है। सीरियल नंबर की जांच करें जब आपका iPhone ओपन-बॉक्स डिलीवरी में आए, तो सबसे पहले फोन के बॉक्स पर लिखा सीरियल नंबर चेक करें। डिलीवरी पर्सन आपको फोन चेक करने के लिए कहेगा। वह न कहे तो भी आपको इसकी जांच तो करनी है कि। इसके लिए आप इस सीरियल नंबर को ऐपल की ऑफिसियल वेबसाइट पर डालें। वहां आपको पता चलेगा कि फोन पहले से एक्टिवेट किया गया है या नहीं। अगर सेलर ने आपको पहले से एक्टिवेट किया हुआ फोन दिया है, तो आप डिलीवरी स्वीकार करने से ही बना कर दें। यदि यह लिखा आता है कि 'डिवाइस नॉट एक्टिवेटेड', इसका मतलब फोन बिल्कुल नया है। मॉडल नंबर की जांच करें मॉडल नंबर को चेक करना भी जरूरी है। मॉडल नंबर से भी आपको पता लग सकता है कि आपके पास जो डिवाइस आया है, वह फ्रेश है या नहीं। अगर मॉडल नंबर M से शुरू होता है, तो यह ज्यादातर नया फोन होता है। अगर यह F से शुरू होता है, तो फोन रीफर्बिश्ड है। N का मतलब है कि यह रिप्लेसमेंट डिवाइस है। P का मतलब है कि यह पर्सनलाइज्ड डिवाइस है। साथ ही, मॉडल नंबर के अंत में H/NA होना चाहिए, जो यह दिखाता ह कि फोन भारत में बिक्री के लिए बनाया गया है, न कि कोई डेमो मॉडल है। IMEI नंबर का मिलान करें आप अपने फोन के IMEI नंबर की जांच कर भी फोन की Authenticity पता कर सकते हैं। इसके लिए फोन के बॉक्स पर लिखे सीरियल नंबर और IMEI नंबर को फोन के साथ मिलान करके देखें। फोन को जल्दी से एक्टिवेट करें, साइन इन करें और फिर सेटिंग्स में जाकर चेक करें कि फोन का IMEI नंबर और सीरियल नंबर बॉक्स पर लिखे नंबरों से मेल खाते हैं या नहीं। अगर ये नंबर मेल खाते हैं, तो आप निश्चिंत हो सकते हैं कि आपको वही फोन मिला है जो बॉक्स में होना चाहिए।

राउटर से ये डिवाइस रखें दूर, और पाएं सुपरफास्ट इंटरनेट स्पीड

नई दिल्ली घर में इंटरनेट की स्पीड कम होने से हर कोई परेशान हो जाता है, चाहे आप नेटफ्लिक्स पर फिल्म देख रहे हों या यूट्यूब स्क्रॉल कर रहे हों। कई लोग तो वर्क फ्रोम होम भी करते हैं, जो वाई-फाई की धीमी स्पीड से परेशान हो जाते हैं। कई बार राउटर चेंज करने के बाद और राउटर की जगह बदलने के बाद भी स्पीड नहीं या रही तो हो सकता है कि घर के बाकी डिवाइस इसकी स्पीड को रोक रहे हों। टेक एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आप अपने वाई-फाई राउटर को बाकी गैजेट से दूर रखें, तो आपकी इंटरनेट स्पीड में फौरन सुधार हो सकता है। गैजेट रोकते हैं सिग्नल द सन की रिपोर्ट बताती है कि कई बार हम राउटर को उन चीजों के पास रख देते हैं, जो इसकी परफॉर्मेंस को खराब कर देती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि राउटर को ब्लूटूथ डिवाइस जैसे एलेक्सा या गूगल होम स्पीकर से दूर रखना चाहिए। ये गैजेट आजकल हर घर में मिलते हैं, लेकिन इन्हें राउटर के पास रखने से वाई-फाई सिग्नल कमजोर हो सकता है। ब्लूटूथ डिवाइस को दूर ही रखें ब्लूटूथ डिवाइस और वाई-फाई राउटर दोनों एक ही तरह की रेडियो फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल करते हैं। जब ये दोनों एक-दूसरे के पास होते हैं, तो उनकी फ्रीक्वेंसी में टकराव होता है, जिससे इंटरनेट की स्पीड कम हो जाती है। मसलन, अगर आपका राउटर और ब्लूटूथ स्पीकर एक ही टेबल पर रखे हैं, तो सिग्नल में रुकावट आ सकती है। इसलिए, आप तेज इंटरनेट चाहते हैं, तो अपने राउटर को ब्लूटूथ डिवाइस से थोड़ा दूर रखें। ये डिवाइसेस भी राउटर से दूर रखें ब्लूटूथ डिवाइस के अलावा भी कुछ डिवाइसेस आपके वाई-फाई को धीमा कर सकते हैं। जैसे कि माइक्रोवेव, बेबी मॉनिटर और कॉर्डलेस फोन। ये सभी चीजें रेडियो फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल करती हैं, जो वाई-फाई सिग्नल में दखल दे सकती हैं। खासकर जब माइक्रोवेव चल रहा हो, तो यह आपके राउटर के सिग्नल को और कमजोर कर सकता है। इसलिए राउटर को इन चीजों से दूर रखना एक स्मार्ट तरीका है। ऊंचाई पर रखें वाई-फाई अगर आपका इंटरनेट धीमा चल रहा है, तो महंगे प्लान लेने या सर्विस प्रोवाइडर बदलने से पहले अपने राउटर को घर के बाकी डिवाइसेस से दूर करके देखें। इसे ब्लूटूथ डिवाइस, माइक्रोवेव या अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान से दूर किसी खुली जगह पर रखें। राउटर को ऊंचाई पर रखने से सिग्नल और बेहतर हो सकता है। यह छोटा-सा कदम आपके इंटरनेट की स्पीड को तुरंत बढ़ा सकता है, वो भी बिना एक रुपया खर्च किए।

आंखों की जांच: आपकी नजर के साथ कैंसर की शुरुआती चेतावनी भी

नई दिल्ली कैंसर के बढ़ते मामले दुनियाभर में स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए गंभीर चिंता का कारण बने हुए हैं, चिंता इसलिए क्योंकि इस रोग से सबसे अधिक मौतें होती हैं। पुरुषों में फेफड़े-मुंह और प्रोस्टेट जबकि महिलाओं में स्तन, सर्वाइकल और गर्भाशय के कैंसर के केस सबसे अधिक रिपोर्ट किए जाते रहे हैं। इसके अलावा भी कुछ और प्रकार के कैंसर हैं जो स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा रहे हैं। ब्लड कैंसर उनमें से एक है, जिसके मामले हाल के वर्षों में काफी तेजी से बढ़े हैं। आज पूरी दुनिया कैंसर से परेशान है। अंतर्राष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान एजेंसी (आईएआरएस) की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2022 में लगभग 2 करोड़ नए कैंसर के मामले सामने आए और लगभग 97 लाख कैंसर से संबंधित मौतें हुईं। ब्लड कैंसर का खतरा भी तेजी से बढ़ता जा रहा है। साल 2022 में रक्त कैंसर के लगभग 55.7 लाख मामले रिपोर्ट किए गए। डॉक्टर कहते हैं, इस कैंसर की जो रफ्तार देखी जा रही है, उसे लेकर सभी लोगों को सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है। एक हालिया रिपोर्ट में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने ब्लड कैंसर का आसानी से पता लगाने का तरीका बताया है। आप रूटीन आई चेकअप के दौरान भी जान सकेगे कि आपको ब्लड कैंसर का खतरा तो नहीं है? पहले जान लीजिए कि ब्लड कैंसर होता क्या है? ब्लड कैंसर यानी खून का कैंसर। हमारा खून लाल कोशिकाओं, सफेद कोशिकाओं और प्लेटलेट्स से मिलकर बना है। जब ये कोशिकाएं गड़बड़ तरीके से बनने लगती हैं और शरीर में अनियंत्रित रूप से फैल जाती हैं, तब इससे ब्लड कैंसर का खतरा हो सकता है। इसके कारण शरीर में ऑक्सीजन ले जाने, इंफेक्शन से लड़ने और खून जमने की क्षमता कम हो जाती है। ल्यूकेमिया (जिसमें खून और बोन मैरो में असामान्य सफेद कोशिकाएं तेजी से बढ़ती हैं), लिम्फोमा (इम्यून सिस्टम और लिम्फ नोड्स को प्रभावित करने वाला) और  मल्टीपल मायलोमा (जिसमें हड्डियों के अंदर मौजूद प्लाज्मा कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं) ये ब्लड कैंसर का सबसे आम प्रकार हैं। ब्लड कैंसर का पता कैसे लगाया जाता है? ब्लड कैंसर की पहचान धीरे-धीरे की जाती है। जिन लोगों में इसका आनुवांशिक खतरा होता है या फिर जोखिम कारक होते हैं, डॉक्टर उन्हें कुछ जांच कराने की सलाह देते हैं। यह अध्ययन यूरोपियन जर्नल ऑफ कैंसर में प्रकाशित हुआ। इस रिपोर्ट में विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित नेत्र परीक्षणों के दौरान, ब्लड कैंसर का पता लगाया जा सकता है। शोध में वैज्ञानिकों ने पाया कि आई स्कैन के दौरान विशेषज्ञ उन सूक्ष्म परिवर्तनों का पता लगा सकते हैं जो घातक कैंसर के विकास के बढ़ते जोखिम से जुड़े हैं। इस अध्ययन में ब्रिटेन के 1,300 से ज्यादा मरीजो के आई स्कैन का विश्लेषण करने के लिए एआई का इस्तेमाल किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन रोगियों के आई स्कैन में कुछ असामान्य परिवर्तन थे, उनमें मायलोमा नामक रक्त कैंसर होने की आशंका अन्य लोगों की तुलना में सात गुना अधिक थी। इतना ही नहीं अगले 10 साल में इन लोगों में ल्यूकेमिया का होने की आशंका भी दो गुनी देखी गई। रेटिना इमेज से चल सकता है कैंसर का पता ब्लड कैंसर यूके नामक संस्था के अनुसार, फेफड़े और आंत के कैंसर के बाद, ब्लड कैंसर के कारण यूके में कैंसर से तीसरी सबसे ज्यादा मौतें होती हैं। हर साल लगभग 16,000 लोगों की इससे जान जा रही है। इसके लिए कोई आसान स्क्रीनिंग टेस्ट भी नहीं है। अब शोधकर्ताओं का कहना है कि क्रॉनिक इंफ्लेमेशन की स्थिति इसकी एक पहचान हो सकती है। रेटिना की रक्त वाहिकाओं में होने वाले सूक्ष्म परिवर्तन इसका संकेत होते हैं जिसे आई स्कैन के दौरान देखा जा सकता है। क्या कहते हैं विशेषज्ञ? अमेरिका के एमोरी विश्वविद्यालय के वरिष्ठ लेखक डॉ. अनंत मदभुशी कहती हैं, एआई ऑप्टिशियंस द्वारा ली गई नियमित रेटिना इमेज का उपयोग करके पहले से ही मल्टीपल मायलोमा, लिंफोमा और ल्यूकेमिया विकसित होने के जोखिम का अनुमान लगाना आसान हो सकता है। ब्लड कैंसर यूके में अनुसंधान के उप निदेशक डॉ. रिचर्ड फ्रांसिस कहते हैं, नैदानिक अभ्यास में इसके उपयोग से पहले और अधिक शोध की आवश्यकता है। ये निष्कर्ष इस सिद्धांत का एक महत्वपूर्ण प्रमाण प्रदान करते हैं कि एआई-संचालित उपकरण भविष्य में क्रांति लाने वाले हो सकते हैं। किन लोगों को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत? स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं,  कुछ लोगों में ब्लड कैंसर का खतरा अधिक हो सकता है। उम्र के साथ यह बीमारी आम हो जाती है। इसके अलावा जिनके परिवार में पहले से किसी को ब्लड कैंसर हुआ हो, उनमें भी रिस्क बढ़ जाता है। रेडिएशन या कीमोथेरेपी भी इस कैंसर को बढ़ाने वाली हो सकती है। ऐसे लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहना चाहिए।

हेयर कलर करवाने के बाद न करें ये गलतियाँ, वरना जल्दी उड़ जाएगा रंग

आजकल हेयर कलरिंग सिर्फ स्टाइल नहीं, बल्कि एक ट्रेंड भी बन चुका है। चाहे ग्रे हेयर को कवर करना हो या लुक में नया ट्विस्ट लाना हो, लोग अलग-अलग शेड्स में बाल कलर करवा रहे हैं। लेकिन बालों का कलर तभी खूबसूरत और टिकाऊ लगता है, जब उसकी सही देखभाल की जाए। अगर सही केयर न हो, तो कुछ ही हफ्तों में कलर फीका पड़ने लगता है और बाल भी रूखे और बेजान हो सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि हेयर कलर के बाद कुछ खास टिप्स अपनाकर बालों के रंग को लंबे समय तक बरकरार रखा जाए। यहां इसकी जानकारी दी गई है। तो आइए जानते हैं इनके बारे में 48 घंटे तक शैंपू करने से बचें कलर करवाने के बाद कम से कम दो दिन तक बालों को न धोएं, जिससे कलर पूरी तरह सेट हो जाए। सल्फेट-फ्री शैम्पू और कंडीशनर का उपयोग करें ये बालों से कलर को जल्दी नहीं हटाते और बालों को मॉइस्चराइज भी रखते हैं। गर्म पानी से बाल धोने से बचें अपने बालों को वॉश करने के लिए हमेशा गुनगुने या ठंडे पानी का इस्तेमाल करें क्योंकि गर्म पानी कलर को जल्दी निकाल देता है। सप्ताह में केवल 2-3 बार ही शैंपू करें ज्यादा शैंपू करने से बालों का नेचुरल ऑयल और कलर दोनों जल्दी खत्म हो जाते हैं। यू वी प्रोटेक्शन वाला हेयर सीरम लगाएं सूरज की किरणें बालों का रंग फीका कर सकती हैं, इसलिए प्रोटेक्शन जरूरी है हीट स्टाइलिंग से बचें स्ट्रेटनर, कर्लर या हेयर ड्रायर का कम से कम उपयोग करें। अगर जरूरी हो तो हीट प्रोटेक्टेंट जरूर लगाएं। हेयर मास्क का करें नियमित उपयोग हफ्ते में एक बार डीप कंडीशनिंग या हेयर मास्क लगाने से बाल सॉफ्ट और शाइनी बने रहते हैं। तेल से करें मसाज नियमित कोकोनट, आर्गन या ऑलिव ऑयल से हल्के हाथों से मालिश करें जिससे बालों को पोषण मिलता रहे और ये जड़ों से मजबूत बनें। हेल्दी और बैलेंस्ड डाइट लें बालों की हेल्थ का सीधा असर हेयर कलर पर भी पड़ता है, इसलिए प्रोटीन और विटामिन्स से भरपूर खाना खाएं। हेयर कलर तभी बना रहेगा जब आप उसकी सही देखभाल करें। ऊपर दिए गए टिप्स न केवल कलर को लंबे समय तक टिकाते हैं, बल्कि आपके बालों को भी हेल्दी, शाइनी और स्मूद बनाए रखते हैं।