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चिराग के दही-चूड़ा भोज में चेतन के पास पहुंचे CM नीतीश

पटना.

मकर संक्रांति के मौके पर बिहार की राजनीति में दही-चूड़ा भोज सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि सियासी ताकत दिखाने का मंच बन गया। गुरुवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक के बाद एक कई दही-चूड़ा आयोजनों में शिरकत कर राजनीतिक संदेश दिए। कभी चिराग पासवान के ऑफिस पहुंचे, तो कभी बाहुबली आनंद मोहन के बेटे चेतन आनंद के घर जाकर उपस्थिति दर्ज कराई।

चिराग पासवान के भोज में पहुंचे CM, किया अभिवादन
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के दही-चूड़ा भोज में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी खास मानी जा रही है। यहां सीएम ने हाथ हिलाकर मौजूद लोगों और मीडिया का अभिवादन किया। इस मुलाकात को NDA के भीतर बढ़ती सहजता और तालमेल के रूप में देखा जा रहा है। भोज में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की अच्छी-खासी भीड़ रही।

चेतन आनंद के घर पहुंचे नीतीश, पांच मिनट की मुलाकात भी मायनेदार
इसके बाद मुख्यमंत्री जदयू विधायक चेतन आनंद के आवास पहुंचे, जहां वे करीब पांच मिनट रुके। इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा और PHED मंत्री संजय कुमार भी मौजूद थे। चेतन आनंद ने कहा कि व्यस्त शेड्यूल के बावजूद सीएम ने समय निकाला और आशीर्वाद दिया। उन्होंने बताया कि NDA के साथ-साथ विपक्षी नेताओं को भी आमंत्रण भेजा गया था।

मंत्रिमंडल विस्तार पर चेतन आनंद की सधी हुई प्रतिक्रिया
विधानसभा सत्र से पहले मंत्रिमंडल विस्तार और मंत्री पद को लेकर पूछे गए सवाल पर चेतन आनंद ने सधा हुआ जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वे किसी तरह की अनर्गल इच्छा नहीं रखते और परिस्थितियों के अनुसार निर्णय होगा। राजनीतिक गलियारों में इसे संतुलन साधने वाला बयान माना जा रहा है।

आनंद मोहन की रिहाई से मजबूत हुई नजदीकी
गौरतलब है कि चेतन आनंद के पिता आनंद मोहन की रिहाई में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अहम भूमिका रही थी। इसके बाद फ्लोर टेस्ट के दौरान चेतन आनंद ने RJD को झटका देते हुए नीतीश कुमार का साथ दिया था। तभी से आनंद मोहन परिवार और मुख्यमंत्री के रिश्ते और मजबूत माने जा रहे हैं।

तेजप्रताप से रत्नेश सदा तक, 14 जनवरी का सियासी कैलेंडर
14 जनवरी को तेजप्रताप यादव के आवास पर हुए दही-चूड़ा भोज में लालू यादव, राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, प्रभुनाथ यादव और चेतन आनंद की मौजूदगी ने अलग सियासी संकेत दिए। लालू यादव ने सार्वजनिक रूप से कहा कि वे तेजप्रताप से नाराज नहीं हैं। वहीं पूर्व मंत्री रत्नेश सदा के आवास पर भी दही-चूड़ा भोज हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री, राज्यपाल और NDA के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।

दही-चूड़ा के बहाने दिखी गठबंधन की तस्वीर
कुल मिलाकर, इस मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा भोज सिर्फ खान-पान का आयोजन नहीं रहा, बल्कि इसके जरिए गठबंधन की मजबूती, रिश्तों की गर्माहट और भविष्य की राजनीति के संकेत भी साफ तौर पर नजर आए। बिहार की राजनीति में दही-चूड़ा एक बार फिर सियासी भाषा बोलता दिखा।

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