samacharsecretary.com

अब आसान होगा चंडीगढ़ का सफर, लंबे इंतजार के बाद ट्रिब्यून चौक प्रोजेक्ट को मिली मंजूरी

 चंडीगढ़
ट्रिब्यून चौक पर बनने वाले फ्लाईओवर और अंडरपास प्रोजेक्ट को लेकर सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने महत्वपूर्ण मंजूरी दे दी है। मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय, चंडीगढ़ द्वारा यूटी इंजीनियरिंग विभाग को भेजे गए पत्र में एल-1 बोलीदाता से अतिरिक्त परफिर्मेंस सिक्योरिटी जमा कराने की अनुमति प्रदान की गई है।

मालूम होगी पिछले महीने प्रशासन ने टेंडर प्रक्रिया को पूरा कर लिया है। जिस कंपनी ने सबसे कम बोली दी थी उसे अब टेंडर अलाट कर दिया जाएगा। मंत्रालय के अनुसार, परियोजना के लिए एल-1 कंपनी ने निर्धारित लागत से 31.06 प्रतिशत कम दर पर बोली लगाई है।

इसी कारण नियमों के तहत कंपनी से 4 करोड़ 73 लाख 53 हजार 652 रुपये की अतिरिक्त परफार्मेंस सिक्योरिटी मांगी जाएगी। यह राशि आरएफपी के तहत लागू सामान्य परफॉर्मेंस सिक्योरिटी के अतिरिक्त होगी।

यह परियोजना एनएच-05 पर एनएच (ओ) योजना के तहत ईपीसी मोड पर बनाई जानी है। इसमें ट्रिब्यून चौक पर फ्लाईओवर, रोटरी और अंडरपास का निर्माण किया जाएगा, जिससे शहर में ट्रैफिक दबाव कम होने और आवागमन सुगम होने की उम्मीद है।

मंत्रालय ने परियोजना की स्वीकृति की वैधता को 31 मई 2026 तक बढ़ा दिया है और यूटी इंजीनियरिंग विभाग को प्राथमिकता के आधार पर एलओए (लेटर इफ अवार्ड) जारी करने के निर्देश दिए हैं।

इस संबंध में मंत्रालय की ओर से जारी पत्र की प्रति यूटी चंडीगढ़ के सीपी डिवीजन नंबर-1 के कार्यकारी अभियंता को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है। मालूम हो कि पिछले 7 साल से इस प्रोजेक्ट का इंतजार किया जा रहा है।

प्रशासन का लक्ष्य फ्लाईओवर निर्माण कार्य जल्द शुरू कर दो वर्षों के भीतर पूरा करना है। करीब 1.6 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित फ्लाईओवर से ट्रिब्यून चौक पर लगने वाले भारी ट्रैफिक जाम से राहत मिलने की उम्मीद है। मूल ट्रैफिक आकलन के अनुसार इस चौक से प्रतिदिन लगभग 1.43 लाख वाहन गुजरते हैं, जिनमें करीब 1.35 लाख यात्री वाहन शामिल हैं।

केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से जुलाई 2025 में मंजूरी मिलने के बावजूद प्रशासन ने करीब सात महीने बाद इस वर्ष फरवरी में टेंडर प्रक्रिया शुरू की थी।

‘ओवरलूप’ विकल्प क्या है?
शहर के वास्तुकार और शहरी योजनाकार पर्ल अहलूवालिया और आश्रय आहूजा की संस्था यूआरएपी (Urban Research and Architecture Practice) ने “द ओवरलूप” नामक वैकल्पिक डिजाइन पेश किया है।

यह मौजूदा ट्रिब्यून चौक राउंडअबाउट के ऊपर एक एलिवेटेड रोटरी का प्रस्ताव है, जिससे ट्रैफिक को दो स्तरों पर विभाजित कर सिग्नल-फ्री आवाजाही सुनिश्चित की जा सकती है। डिजाइनरों का दावा है कि इससे ट्रैफिक क्षमता करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ेगी और मौजूदा फ्लाईओवर योजना के तहत प्रस्तावित लगभग 700 पेड़ों की जगह केवल 65 पेड़ों की कटाई करनी पड़ेगी।

वास्तुकारों का कहना है कि “शहरी गतिशीलता का उद्देश्य कारों को नहीं, बल्कि लोगों को सुचारु रूप से आगे बढ़ाना होना चाहिए।” उनका आरोप है कि मौजूदा फ्लाईओवर योजना पुरानी सोच पर आधारित है और दुनिया भर के अनुभव बताते हैं कि शहरों के भीतर बने फ्लाईओवर अक्सर ट्रैफिक कम करने के बजाय बढ़ा देते हैं।

यूआरएपी ने दावा किया कि उन्होंने चंडीगढ़ के अगले 50 वर्षों के लिए मास्टर प्लान तैयार करने में तीन साल लगाए। “द ओवरलूप” उसी योजना का हिस्सा है, जिसे 2019 में यूटी प्रशासन के सामने प्रस्तुत किया गया था और दो अंतिम डिजाइनों में शामिल किया गया था। हालांकि उनका आरोप है कि बाद में मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं रही।

 700 पेड़ों की कटाई पर विवाद

परियोजना के विरोध का सबसे बड़ा कारण ट्रिब्यून चौक कॉरिडोर में लगभग 700 परिपक्व पेड़ों की प्रस्तावित कटाई है। हाई कोर्ट में दायर हलफनामों में कहा गया है कि जिन 17 आम के पेड़ों को काटा जाना है, वे हेरिटेज ग्रेड-1 श्रेणी वाले बाग का हिस्सा हैं।

वास्तुकारों का कहना है कि नए पौधे लगाना पर्याप्त मुआवजा नहीं हो सकता। उनके अनुसार, “यह ऐसा है जैसे गोली के घाव पर सिर्फ बैंड-एड लगा दिया जाए।” उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ की हरियाली और वृक्ष-पंक्तियां शहर की मूल पहचान का हिस्सा हैं, जिन्हें ली कार्बुजिए की मूल योजना में विशेष महत्व दिया गया था।

मास्टर प्लान उल्लंघन का आरोप

याचिकाकर्ताओं का दावा है कि यह परियोजना चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031 के खिलाफ है। मास्टर प्लान शहर के भीतर फ्लाईओवर निर्माण की अनुशंसा नहीं करता और हरित क्षेत्र संरक्षण को प्राथमिकता देता है। अमिकस क्यूरी तनु बेदी ने अदालत में दलील दी कि 1.6 किलोमीटर लंबा फ्लाईओवर मास्टर प्लान की मूल अवधारणा के अनुरूप नहीं है।

पूर्व मुख्य वास्तुकार भी विरोध में

चंडीगढ़ की पूर्व मुख्य वास्तुकार सुमित कौर लगातार इस परियोजना का विरोध कर रही हैं। उन्होंने इसे “अल्पदृष्टि और अस्थायी समाधान” बताते हुए कहा कि यह शहर की विशिष्ट शहरी पहचान को नुकसान पहुंचाएगा और ट्रैफिक जाम को केवल एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करेगा। उन्होंने सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने, मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (MRTS) विकसित करने और रिंग रोड बनाने जैसे विकल्प सुझाए हैं।

प्रशासन का पक्ष

यूटी प्रशासन का कहना है कि ट्रिब्यून चौक पर प्रतिदिन 1.5 लाख से अधिक वाहन गुजरते हैं और फ्लाईओवर ट्रैफिक जाम कम करने के लिए बेहद जरूरी है। प्रशासन ने बताया कि अप्रैल 2024 में हाईकोर्ट द्वारा पेड़ों की कटाई पर लगी रोक हटाई जा चुकी है और सितंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट में दायर चुनौतियां भी खारिज हो चुकी हैं।

प्रशासन ने सिंगला कंस्ट्रक्शन लिमिटेड (Singla Constructions Limited) को 147.98 करोड़ की सबसे कम बोली (L1) देने वाली कंपनी के रूप में चुना है। अब सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की अंतिम मंजूरी का इंतजार है।

Tribune Flyover Project: परियोजना से जुड़े प्रमुख तथ्य

    कुल लागत: 247.07 करोड़ रुपये
    अनुमानित लागत: 214.66 करोड़ रुपये
    एल1 बोली: 147.98 करोड़ रुपये
    लंबाई: 1.65 किलोमीटर
    फ्लाईओवर लंबाई: 1,442 मीटर
    अंडरपास लंबाई: 519 मीटर
    निर्माण अवधि: 30 महीने
    प्रतिदिन ट्रैफिक: 1.5 लाख वाहन

 

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here