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फर्जी दस्तावेजों से बनाई गई कंपनी, जमीन और बिजली बिल का हुआ दुरुपयोग

 नई दिल्ली

जीएसटी फर्जीवाड़े का एक चौकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि एक कारोबारी की जानकारी के बिना उसके पते, बिजली बिल और कथित रूप से फर्जी हस्ताक्षरों का इस्तेमाल कर फर्जी फर्म खड़ी कर दी गई। इसके बाद उसी फर्म के जरिए करोड़ों रुपये की बोगस बिलिंग कर जीएसटी लाभ हासिल करने का खेल खेला गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने शिकायतकर्ता के बयान पर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता रवि कुमार ने आरोप लगाया है कि सोनिया विहार स्थित उनकी संपत्ति के पते का दुरुपयोग कर एक नाम से जीएसटी फर्म रजिस्टर कराई गई। उन्हें जानकारी तब मिली, जब जीएसटी विभाग ने पूछताछ के लिए बुलाया। वहां अधिकारियों ने एक रेंट अग्रीमेंट दिखाया, जिसके आधार पर फर्म का रजिस्ट्रेशन कराया गया था।

कभी रेंट एग्रीमेंट पर साइन नहीं किया
रवि कुमार का कहना है कि उन्होंने कभी अपनी संपत्ति किसी कपिल नामक व्यक्ति को किराये पर नहीं दी। न ही किसी रेंट एग्रीमेंट पर साइन किए। शिकायतकर्ता के मुताबिक, दस्तावेज पर मौजूद हस्ताक्षर फर्जी हैं और जालसाजी कर तैयार किए गए शुरुआती जांच में सामने आया कि फर्म के जरिए करीब 34.28 करोड़ रुपये की फर्जी बिलिंग की गई हैं।

जांच में यह भी सामने आया कि फर्म के जीएसटी रजिस्ट्रेशन के लिए उनके घर का बिजली बिल इस्तेमाल किया गया। रवि का दावा है कि उन्होंने कभी किसी को अपना बिजली बिल उपलब्ध नहीं कराया। यह भी आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर संबंधित फर्म के नाम से बैंक खाता भी खुलवाया गया। इसी खाते से कथित तौर पर फर्जी कारोबारी लेन-देन किए गए और टैक्स लाभ लेने की कोशिश की गई।

बोगस बिलिंग का आरोप
शिकायतकर्ता का कहना है कि उनकी पहचान और संपत्ति का इस्तेमाल किया गया, जबकि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं थी। शुरुआती जाच में सामने आया कि फर्म के जरिए करीब 34.28 करोड़ रुपये की फर्जी बिलिंग की गई। आरोप है कि इसके माध्यम से करीब 6.17 करोड रुपये का अनुचित जीएसटी लाभ लेने का अनुचित प्रयास किया गया।

जाच के दौरान धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल, आपराधिक विश्वासघात और साजिश सही पाए गए। EOW ने 21 मई को केस दर्ज किया। पुलिस अब कथित मास्टरमाइंड कपिल, और पूरे नेटवर्क की जाच कर रही है।

 

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