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​मानसून की दस्तक से पहले अबूझमाड़ में मुकम्मल इंतजाम

​रायपुर

 बस्तर के दुर्गम और धुर नक्सल प्रभावित अबूझमाड़ इलाके में भारी बारिश के दौरान भी ग्रामीणों को राशन के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। जिला प्रशासन ने मानसून के दौरान पहुंचविहीन होने वाले क्षेत्रों के लिए पुख्ता रणनीति तैयार की है। जिले की सभी 39 पहुंचविहीन शासकीय उचित मूल्य दुकानों में तीन महीने का खाद्यान्न (राशन) एडवांस में भंडारित कर दिया गया है।

राशन की बोरियों का हो रहा है भौतिक सत्यापन

कलेक्टर  ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बारिश के मौसम में खाद्यान्न वितरण किसी भी हाल में प्रभावित नहीं होना चाहिए। इस पूरी व्यवस्था की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रशासन केवल राशन भेजने तक सीमित नहीं है, बल्कि तैनात किए गए नोडल अधिकारी खुद नदी-नाले पार कर इन सुदूर केंद्रों में पहुंच रहे हैं और राशन की बोरियों की गिनती (भौतिक सत्यापन) कर रहे हैं।

​ग्राउंड जीरो पर पहुंचे अफसर, व्यवस्थाएं मिलीं चाक-चौबंद
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कलेक्टर के निर्देशानुसार, समाज कल्याण विभाग के उप संचालक व नोडल अधिकारी ने ओरछा विकासखंड के बेहद संवेदनशील और अंदरूनी ग्राम पंचायत हांदावाड़ा के बेड़मापारा राशन दुकान का औचक निरीक्षण किया। अधिकारी ने मौके पर जाकर तीन माह के लिए सुरक्षित रखे गए खाद्यान्न के स्टॉक का भौतिक सत्यापन किया। सुरक्षा मानकों और भंडारण व्यवस्था को बारीकी से देखने के बाद वितरण प्रक्रिया की जानकारी ली गई। 

दुर्गम क्षेत्रों के दुकानों में राशन का शत प्रतिशत अग्रिम भंडारण
   

खाद्य विभाग के मुताबिक, जिले की सभी 39 दुर्गम क्षेत्रों के दुकानों में 100 प्रतिशत अग्रिम भंडारण का काम समय से पहले पूरा कर लिया गया है। भंडारण और वितरण व्यवस्था में कोई गड़बड़ी न हो, इसके लिए जिला स्तर के अधिकारियों की दुकानवार ड्यूटी लगाई गई है, जो लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। भौगोलिक रूप से बेहद कठिन इस क्षेत्र में बारिश के दिनों में कई नदी-नाले उफान पर आ जाते हैं, जिससे संपर्क टूट जाता है। इस अग्रिम कदम से अब अंतिम व्यक्ति तक बिना किसी बाधा के राशन पहुंचेगा।
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प्रशासन की इस मुस्तैदी से अबूझमाड़ के आश्रित गांवों के हजारों राशन कार्डधारियों ने राहत की सांस ली है। जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि भौगोलिक चुनौतियां कितनी भी बड़ी हों, दूरस्थ अंचलों के ग्रामीणों का हक उन तक हर हाल में पहुंचेगा।

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