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लंदन बैडमिंटन टूर्नामेंट में जजों की भागीदारी वाले वायरल दावे को लेकर विवाद

नई दिल्ली
 भारतीय बैडमिंटन संघ (बीएआई) ने ऑनलाइन वायरल हो रही फेक न्यूज के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। फेक खबर में दावा किया जा रहा था कि इस महीने लंदन में हुए बैडमिंटन टूर्नामेंट में कई दर्जन भारतीय जजों ने भाग लिया।दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले को शुक्रवार को ही तत्काल सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है।

क्या है लंदन में जजों के खेलने का पूरा मामला
खबरों के मुताबिक, काफी संख्या में न्यायाधीश और वकील दूसरे अंतरराष्ट्रीय बार एंड बेंच बैडमिंटन चैंपियनशिप में भाग लेने के लिए ब्रिटेन गए थे। 7 जून को लंदन के साउथॉल में भारत और ब्रिटेन के वकीलों के लिए एक 'अंतरराष्ट्रीय' बैडमिंटन टूर्नामेंट का आयोजन किया गया। बताया जा रहा है कि इसका आयोजन पूर्व अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी और डेका इवेंट्स की संस्थापक अबंतिका डेका ने किया था। इस कार्यक्रम को भारत के केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय के साथ-साथ कुछ कॉर्पोरेट कंपनियों ने भी प्रायोजित किया था।

देखते ही देश में शुरू हो गई बहस
हालांकि, इस आयोजन की आलोचना के साथ ही देश में एक नया मुद्दा सामने आ गया। वकील प्रशांत भूषण ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी सवालों की बौछार कर दी थी।

उन्होंने एक्स पर लिखा था, 'कानून मंत्रालय द्वारा लंदन में आज भारतीय न्यायाधीशों और वकीलों के बीच एक अद्भुत बैडमिंटन टूर्नामेंट प्रायोजित किया जा रहा है! अन्य प्रायोजक विभिन्न कॉर्पोरेट कंपनियां हैं। मुख्य न्यायाधीश और कानून मंत्री द्वारा उद्घाटन किया जा रहा है! 150 न्यायाधीश और वकील भाग ले रहे हैं! प्रधानमंत्री की मितव्ययिता की अपील का क्या हुआ? न्यायाधीशों के लिए आचार संहिता का क्या हुआ? न्यायपालिका की स्वतंत्रता का क्या हुआ? घिनौना!'

वहीं, सोशल मीडिया पर फिजूलखर्ची को लेकर केंद्र सरकार पर एक से बढ़कर एक आरोप लगने लगे।

आज ही होगी सुनवाई
शुक्रवार को अब इस मामले में नया मोड़ आ गया है। भारतीय बैडमिंटन संघ ने इस वायरल खबर को ही नकार दिया है। इसी मामले की सुनवाई के निए उसने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कोर्ट ने भी केस की गंभीरता और न्यायाधीशों की शुचिता का ख्याल रखते हुए इस मुकदमे की तत्काल सुनवाई करना तय किया है।

 

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